डीडीडब्ल्यूएस ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सामुदायिक जल प्रबंधन को मजबूत किया

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डीडीडब्ल्यूएस ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सामुदायिक जल प्रबंधन को मजबूत किया

जल जीवन मिशन 2.0 प्रक्रियाप्रशिक्षण आयोजनराष्ट्रीय स्तरक्षमता निर्माण8 मॉड्यूलग्राम संस्थाओं को सशक्पंचायत, समितिसंचालन रखरखावस्थानीय जिम्मेदारीटिकाऊ सेवाउपयोगकर्ता शुल्क
जल जीवन मिशन 2.0 प्रक्रिया

✎ ग्रामीण पेयजल की दीर्घकालिक सफलता बुनियादी ढांचे से अधिक ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के सामुदायिक स्वामित्व, वित्तीय स्थिरता और संस्थागत रखरखाव पर निर्भर करती है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन (Governance): पंचायती राज संस्थाएँ, स्थानीय स्वशासन और विकेंद्रीकरण  |  GS Paper II — राजव्यवस्था (Polity): संविधान का 73वाँ संशोधन और ग्यारहवीं अनुसूची  |  GS Paper III — पर्यावरण एवं जल संसाधन: जल सुरक्षा और जल स्रोतों का संरक्षण
  • Prelims: जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) और हर घर जल का लक्ष्य, जल शक्ति मंत्रालय और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS), ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC), ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP), राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA), अनुच्छेद 243G और संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची (पेयजल), राज्य सूची की प्रविष्टि 17 (जल आपूर्ति), वित्त आयोग के अनुदान और पंचायतों का वित्तीय सशक्तीकरण
  • Essay: ‘जल सुरक्षा केवल बुनियादी ढांचे से नहीं, बल्कि सामुदायिक स्वामित्व से सुनिश्चित होती है’ — चर्चा कीजिए।, विकेंद्रीकरण और स्थानीय संस्थाएँ: ग्रामीण सेवा वितरण की स्थिरता में पंचायतों की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: ग्रामीण पेयजल की दीर्घकालिक सफलता बुनियादी ढांचे से अधिक ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के सामुदायिक स्वामित्व, वित्तीय स्थिरता और संस्थागत रखरखाव पर निर्भर करती है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS), जल शक्ति मंत्रालय ने नई दिल्ली में जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के अंतर्गत राज्य-स्तरीय प्रशिक्षकों के लिए राष्ट्रीय स्तरीय प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण (TOT) आयोजित किया। इसमें राज्य ग्रामीण विकास संस्थानों (SIRD), जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभागों (PHED) और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस कार्यक्रम में ‘द स्टोरी ऑफ पानीपुर’ नामक कहानी-आधारित स्व-शिक्षण हैंडबुक सहित आठ मॉड्यूल वाला क्षमता निर्माण पैकेज प्रस्तुत किया गया। इसका उद्देश्य ग्राम पंचायतों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों और स्वयं सहायता समूहों की क्षमता बढ़ाकर ग्रामीण पेयजल सेवाओं को दीर्घकाल तक टिकाऊ बनाना है। मिशन के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक ने इस बात पर बल दिया कि बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ उसके संचालन, रखरखाव और उपयोगकर्ता शुल्क जैसे वित्तीय पहलुओं की जिम्मेदारी स्थानीय संस्थाओं को सौंपी जानी चाहिए।

पृष्ठभूमि

  • संविधान में जल को मुख्यतः राज्य का विषय माना गया है। राज्य सूची की प्रविष्टि 17 में जल आपूर्ति, सिंचाई और नहर आते हैं, जबकि 73वें संशोधन (1992) द्वारा जोड़ी गई संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में पेयजल को पंचायतों के कार्यों में शामिल किया गया है।
  • अनुच्छेद 243G पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाएँ तैयार करने और लागू करने की शक्ति देता है। इसी आधार पर ग्राम स्तर पर पेयजल प्रबंधन पंचायतों की संस्थागत भूमिका से जुड़ता है।
  • जल जीवन मिशन की घोषणा 2019 में हुई थी, जिसका लक्ष्य ग्रामीण परिवारों के लिए कार्यशील नल जल कनेक्शन सुनिश्चित करना (हर घर जल) है। इसे जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग लागू करता है। अब इसके विस्तार वाले चरण (JJM 2.0) में नल जल कनेक्शन के बाद की निरंतरता, संचालन और रखरखाव पर अधिक बल दिया जा रहा है।
  • पहले के अनुभवों में यह देखा गया कि कई योजनाओं में ढांचा तो बन गया, परंतु रखरखाव और वित्तीय व्यवस्था कमजोर रही। इसी कारण सामुदायिक निगरानी और स्थानीय संस्थाओं की क्षमता को केंद्र में रखा जा रहा है।
  • राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) और ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDP) के साथ जेजेएम का एकीकरण यह सुनिश्चित करने का प्रयास है कि पंचायतों की योजनाओं में पेयजल स्रोतों की सुरक्षा और संचालन की आवश्यकताएँ शामिल हों।

जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) क्या है?

  • जल जीवन मिशन ग्रामीण क्षेत्रों के हर परिवार को निर्धारित गुणवत्ता और मात्रा में कार्यशील नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराने का केंद्र प्रायोजित कार्यक्रम है। इसका लक्ष्य ‘हर घर जल’ है।
  • इसे जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) द्वारा राज्यों के सहयोग से लागू किया जाता है। जल आपूर्ति राज्य का विषय होने के कारण राज्य सरकारें योजना और क्रियान्वयन की मुख्य जिम्मेदारी निभाती हैं।
  • ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC) ग्राम पंचायत की उप-समिति के रूप में कार्य करती है। यह जल स्रोतों की निगरानी, जल वितरण और उपयोगकर्ता शुल्क के संग्रह से जुड़ी होती है।
  • मिशन में सामुदायिक भागीदारी पर बल दिया गया है, ताकि परियोजना के पूरे होने के बाद भी जल आपूर्ति प्रणाली चलती रहे। इसी कारण संचालन, रखरखाव और वित्तीय स्थिरता को प्रमुख चुनौती माना जाता है।
  • जल स्रोतों का संरक्षण (जैसे पुनर्भरण, जल स्रोतों की सुरक्षा) और जल गुणवत्ता की जांच भी मिशन के महत्वपूर्ण घटक हैं। ग्रामीण स्तर पर इनमें स्थानीय समुदाय की सक्रिय भूमिका होती है।
  • ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) के माध्यम से पेयजल की स्थानीय प्राथमिकताएँ पंचायत बजट और विकास योजना में शामिल की जाती हैं। इसके लिए पंचायत प्रतिनिधियों की वित्तीय और नियोजन क्षमता का विकास आवश्यक है।
  • वित्त आयोग के अनुदान पंचायतों के वित्तीय संसाधनों का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इन अनुदानों को जल आपूर्ति के संचालन और रखरखाव के लिए उपयोग करने की संभावना पर विचार किया जाता है।
  • संस्थागत रूप से प्रशिक्षण मॉड्यूल को राज्यों की मौजूदा ग्रामीण विकास और पंचायती राज प्रशिक्षण प्रणालियों में शामिल करने का लक्ष्य है, ताकि मिशन की अवधि के बाद भी क्षमता निर्माण जारी रह सके।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
प्रशिक्षण का स्वरूप राज्य-स्तरीय प्रशिक्षकों के लिए राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षक प्रशिक्षण (Training of Trainers – ToT) कार्यक्रम, जिसका उद्देश्य क्षमता को नीचे तक फैलाना है
क्षमता निर्माण पैकेज 8 मॉड्यूल वाला पैकेज, जिसमें कहानी-आधारित स्व-शिक्षण हैंडबुक “द स्टोरी ऑफ पानीपुर” और “प्रशिक्षक सुविधा नियमावली” शामिल हैं
लक्षित समूह ग्राम पंचायत प्रतिनिधि, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियाँ (VWSC), सुजलाम शक्ति समूह और ग्रामीण पेयजल प्रबंधन से जुड़ी अन्य जमीनी संस्थाएँ
आयोजक और भागीदार पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) के साथ राज्य ग्रामीण विकास संस्थान (SIRD), जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के हितधारक
संस्थागत लक्ष्य पैकेज को मौजूदा ग्रामीण विकास और पंचायती राज प्रशिक्षण प्रणालियों में समाहित करना, ताकि मिशन की अवधि के बाद भी सीखना और क्षमता निर्माण जारी रहे
वित्तीय एकीकरण ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDP), पंचायती राज संस्थाओं और राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के साथ जल जीवन मिशन को जोड़ना, तथा 16वें वित्त आयोग के अनुदानों का उपयोग

महत्व

शासन और प्रशासनिक महत्व

  • बुनियादी ढांचे के निर्माण से आगे बढ़कर संचालन, रखरखाव और सेवा की निरंतरता पर ध्यान केंद्रित होना
  • ग्राम स्तर की संस्थाओं को सेवा मानक तय करने और उनकी निगरानी करने के लिए सक्षम बनाना
  • पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका को योजना-निर्माण से लेकर क्रियान्वयन तक सुदृढ़ करना

आर्थिक और वित्तीय महत्व

  • वित्त आयोग के अनुदानों, GPDP और अन्य स्रोतों के अभिसरण से संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होना
  • उपयोगकर्ता शुल्क और वित्तीय स्थिरता के माध्यम से जल सेवाओं को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाने का प्रयास

सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी महत्व

  • सुरक्षित और नियमित पेयजल की उपलब्धता से जल-जनित रोगों की रोकथाम में सहायता
  • पेयजल को सामूहिक संपत्ति मानने की समझ से सामाजिक एकजुटता और सहभागी शासन को बढ़ावा

संघीय ढांचे से जुड़ा महत्व

  • जल आपूर्ति संविधान की राज्य सूची की प्रविष्टि 17 में आती है, इसलिए राज्य इसके मुख्य क्रियान्वयनकर्ता हैं और केंद्र नीति, मार्गदर्शन व सहायता देता है
  • राज्यों से अपने प्रशिक्षण तंत्र में मॉड्यूल समाहित करने का आग्रह सहकारी संघवाद की भावना से जुड़ा है

चुनौतियाँ

1. संचालन एवं रखरखाव (O&M) के लिए स्थिर निधि

  • उपयोगकर्ता शुल्क वसूलने में सामाजिक और व्यावहारिक प्रतिरोध की संभावना बनी रहती है
  • पंप, पाइपलाइन और शोधन संयंत्रों की मरम्मत के लिए नियमित बजट न होने पर सेवा बाधित होती है
  • निर्माण के लिए मिली पूंजीगत सहायता और दीर्घकालिक परिचालन व्यय के बीच अंतर रहता है

2. योजनाओं और निधियों का अभिसरण

  • जल जीवन मिशन, RGSA, 16वें वित्त आयोग के अनुदान और अन्य ग्रामीण योजनाओं के बीच समन्वय की कमी
  • विभिन्न विभागों की अलग-अलग नियोजन प्रणालियों के कारण दोहराव और संसाधनों का अपव्यय
  • GPDP में जल प्राथमिकताओं को शामिल करने के लिए स्थानीय नियोजन क्षमता का अभाव

3. जल स्रोतों की दीर्घकालिक सुरक्षा

  • भूजल के अत्यधिक दोहन से स्रोतों के सूखने का खतरा, जिससे आपूर्ति प्रणाली की निरंतरता प्रभावित होती है
  • जल संग्रहण क्षेत्रों और पुनर्भरण संरचनाओं के रखरखाव की जिम्मेदारी स्पष्ट न होना
  • जलवायु परिवर्तन से वर्षा के पैटर्न में अनिश्चितता और स्रोतों पर दबाव

4. पंचायत प्रतिनिधियों और समितियों की तकनीकी क्षमता

  • चुने हुए प्रतिनिधियों के कार्यकाल और नेतृत्व में बदलाव से सीखी गई क्षमता का नुकसान
  • जल गुणवत्ता जांच, मीटरिंग और वित्तीय लेखा जैसे तकनीकी कार्यों में प्रशिक्षण की कमी
  • प्रशिक्षण का मौजूदा प्रशिक्षण तंत्र में संस्थागत रूप से न ढल पाना

5. समावेशन और सामुदायिक भागीदारी

  • महिलाओं, अनुसूचित जातियों और जनजातियों तथा वंचित समूहों की निर्णय-प्रक्रिया में सीमित भागीदारी
  • ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों में सक्रिय भागीदारी बनाए रखने की चुनौती
  • सेवा वितरण में सभी बस्तियों, विशेषकर दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों, तक समान पहुँच सुनिश्चित करना

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
रखरखाव की निधि परिचालन और मरम्मत के लिए स्थायी वित्तीय स्रोत तय न होने पर मिशन के बाद सेवा टूटने का खतरा
योजनाओं का समन्वय जल जीवन मिशन, RGSA और वित्त आयोग अनुदानों के बीच नियोजन का बिखराव
जल स्रोतों का क्षरण भूजल स्तर में गिरावट और स्रोत-संरक्षण के अभाव से दीर्घकालिक आपूर्ति पर संकट
संस्थागत क्षमता पंचायत प्रतिनिधियों और समितियों में तकनीकी व वित्तीय प्रबंधन कौशल की कमी

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission – JJM)
  • राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (Rashtriya Gram Swaraj Abhiyan – RGSA)

आगे की राह

  • रखरखाव के लिए उपयोगकर्ता शुल्क की पारदर्शी संरचना और ग्राम स्तर पर वित्तीय प्रबंधन का स्पष्ट ढांचा बनाना
  • GPDP में पेयजल स्रोतों, संचालन और रखरखाव की जरूरतों को अनिवार्य रूप से शामिल करना
  • जल जीवन मिशन, RGSA और वित्त आयोग अनुदानों के लिए एकीकृत नियोजन और निगरानी तंत्र विकसित करना
  • क्षमता निर्माण मॉड्यूल को SIRD और राज्य पंचायती राज प्रशिक्षण संस्थानों के नियमित पाठ्यक्रम में शामिल करना
  • जल स्रोत संरक्षण, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण को ग्राम स्तर की योजनाओं का हिस्सा बनाना
  • महिलाओं और वंचित समूहों को VWSC और ग्राम पंचायत की निर्णय-प्रक्रिया में प्रभावी प्रतिनिधित्व देना
  • सामुदायिक निगरानी के लिए सरल और सार्वजनिक डैशबोर्ड तथा ग्राम सभा में नियमित समीक्षा की व्यवस्था करना

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) · सामुदायिक स्वामित्व · ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC) · पंचायती राज संस्थाएं · संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची · अनुच्छेद 243G · वित्त आयोग अनुदान · उपयोगकर्ता शुल्क · संस्थागत क्षमता निर्माण · सामुदायिक निगरानी · विकसित भारत 2047 · सेवा वितरण की निरंतरता

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 243G: पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाएँ
  • ग्यारहवीं अनुसूची, विषय 11: पेयजल से संबंधित पंचायती विषय
  • अनुच्छेद 243H: पंचायतों की कर-शक्ति और संचित निधि से अनुदान
  • अनुच्छेद 280: वित्त आयोग द्वारा पंचायतों के लिए अनुदान की सिफारिश

अवधारणा प्रवाह

राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षक प्रशिक्षण (ToT) और 8 मॉड्यूल वाले क्षमता निर्माण पैकेज का आरंभ  →  राज्य ग्रामीण विकास संस्थानों और पीएचईडी के प्रशिक्षकों द्वारा राज्य स्तर पर प्रशिक्षण का विस्तार  →  ग्राम पंचायतों, VWSC और सुजलाम शक्ति समूहों की क्षमता में वृद्धि  →  GPDP और वित्त आयोग अनुदानों के माध्यम से जल आपूर्ति की योजना और वित्त का एकीकरण  →  उपयोगकर्ता शुल्क, स्रोत-संरक्षण और सामुदायिक निगरानी से परिचालन की निरंतरता  →  मिशन अवधि के बाद भी मौजूदा प्रशिक्षण प्रणालियों के माध्यम से सीखने और सेवा की दीर्घकालिक स्थिरता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में पेयजल (Drinking Water) का उल्लेख उन विषयों में किया गया है जो पंचायतों को सौंपे जा सकते हैं।
2. सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची में आने वाली प्रविष्टि है।
3. अनुच्छेद 243G के अंतर्गत राज्य विधानमंडल पंचायतों को ऐसी शक्तियां और उत्तरदायित्व दे सकता है जो उन्हें स्वशासन की संस्थाओं के रूप में कार्य करने के लिए आवश्यक हों।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. इनमें से कोई नहीं

उत्तर: केवल तीन — कथन 1 सही है, क्योंकि ग्यारहवीं अनुसूची की प्रविष्टि 11 में पेयजल शामिल है। कथन 2 भी सही है, क्योंकि सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता राज्य सूची की प्रविष्टि 6 है। कथन 3 अनुच्छेद 243G का सही सार है, इसलिए सही उत्तर ‘केवल तीन’ है।

Q2. अभिकथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): ग्रामीण पेयजल प्रणालियों की दीर्घकालिक निरंतरता मुख्य रूप से सामुदायिक स्वामित्व और संस्थागत जिम्मेदारी पर निर्भर करती है।
कारण (R): जल आपूर्ति का बुनियादी ढांचा तैयार होने के बाद उसके संचालन और रखरखाव (O&M) के लिए स्थानीय संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी और उपयोगकर्ता शुल्क से वित्तीय स्थिरता आवश्यक होती है।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही विकल्प चुनिए।

  1. (a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
  2. (b) A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (c) A सही है, किंतु R गलत है।
  4. (d) A गलत है, किंतु R सही है।

उत्तर: (a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन और कारण दोनों सही हैं, क्योंकि जल जीवन मिशन में परिसंपत्तियों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम स्तरीय संस्थाओं पर रखी गई है। कारण सीधे यह बताता है कि सामुदायिक स्वामित्व क्यों आवश्यक है, इसलिए R, A की सही व्याख्या है।

Q3. निम्नलिखित सूची-I (योजना/मिशन) को सूची-II (मंत्रालय) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I
A. जल जीवन मिशन
B. राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान
C. दीनदयाल अंत्योदय राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन
सूची-II
1. ग्रामीण विकास मंत्रालय
2. पंचायती राज मंत्रालय
3. जल शक्ति मंत्रालय
4. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
नीचे दिए गए कूटों में से सही उत्तर चुनिए।

  1. (a) A-3, B-2, C-1
  2. (b) A-1, B-3, C-2
  3. (c) A-3, B-1, C-4
  4. (d) A-4, B-2, C-1

उत्तर: (a) A-3, B-2, C-1 — जल जीवन मिशन का प्रशासनिक नियंत्रण जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) के पास है। राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान पंचायती राज मंत्रालय के अंतर्गत आता है, जबकि दीनदयाल अंत्योदय राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण विकास मंत्रालय की योजना है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ ग्रामीण पेयजल आपूर्ति की दीर्घकालिक निरंतरता को केवल अवसंरचना निर्माण का प्रश्न मानना कितना पर्याप्त है? जल जीवन मिशन के संदर्भ में सामुदायिक स्वामित्व और संस्थागत जिम्मेदारी की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि यदि ग्राम स्तरीय संस्थाएं उपयोगकर्ता शुल्क वसूलने और रखरखाव में असफल रहती हैं, तो सेवा वितरण पर क्या प्रभाव पड़ेगा। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल उत्तर के बिंदु: (1) संवैधानिक आधार: पेयजल संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची की प्रविष्टि 11 में है; सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य सूची की प्रविष्टि 6 में है; अनुच्छेद 243G के अंतर्गत पंचायतें स्वशासन की संस्थाओं के रूप में कार्य करती हैं; अनुच्छेद 243A (ग्राम सभा) और 73वां संविधान संशोधन (1992) का उल्लेख करें। (2) नीतिगत ढांचा: जल जीवन मिशन (2019 में आरंभ, ‘हर घर जल’ का लक्ष्य), विस्तारित चरण जल जीवन मिशन 2.0, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC) की भूमिका, जीपीडीपी और राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान से समन्वय, 16वें वित्त आयोग के अनुदान और वीबी-जी राम जी संसाधनों का एकीकरण। (3) समर्थन का तर्क: एलिनॉर ओस्ट्रॉम (Elinor Ostrom, ‘Governing the Commons’, 1990) के साझा संसाधन प्रशासन के सिद्धांत, जैसे स्पष्ट सीमाएं, स्थानीय निगरानी, क्रमिक दंड और सामूहिक निर्णय-व्यवस्था; नीति आयोग के समग्र जल प्रबंधन सूचकांक से जल प्रशासन में स्थानीय भागीदारी का महत्व। (4) प्रतिपक्षी/सीमित दृष्टि: अवसंरचना-केंद्रित और तकनीकी दृष्टिकोण; ग्राम स्तरीय संस्थाओं की क्षमता, तकनीकी कर्मियों की कमी, जल स्रोतों की घटती उपलब्धता और राज्यों में शक्तियों के हस्तांतरण की असमानता; उपयोगकर्ता शुल्क से गरीब परिवारों के बहिष्करण का जोखिम। (5) संतुलित निष्कर्ष: सामुदायिक स्वामित्व और राज्य के वित्तीय व तकनीकी सहयोग का समन्वय आवश्यक है। (6) उप-प्रश्न: रखरखाव में विफलता से परिसंपत्तियों का जल्दी खराब होना, सेवा की अनियमितता, वित्तीय अस्थिरता, गुणवत्ता-संबंधी जोखिम (जैसे दूषित जल) और विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों पर प्रभाव; नियमित जल परीक्षण और जल सुरक्षा योजना का सुझाव दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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