24 Oct स्वावलंबन 2026: भारतीय नौसेना की तकनीकी क्रांति और आत्मनिर्भरता पर विशेष फोकस
✎ स्वावलंबन नौसेना का प्रमुख आयोजन है, जो स्वदेशीकरण और उभरती प्रौद्योगिकियों के माध्यम से रक्षा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — Science and Technology (रक्षा प्रौद्योगिकी, स्वदेशी विकास और नवाचार) | GS Paper III — Internal Security (राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा तैयारी) | GS Paper III — Economy (मेक इन इंडिया और रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भूमिका) | GS Paper II — Government Policies and Interventions (रक्षा मंत्रालय की नीतियां और रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया)
- Prelims: स्वावलंबन (Swavlamban) — भारतीय नौसेना का प्रमुख आयोजन, iDEX (Innovations for Defence Excellence) — रक्षा मंत्रालय की नवाचार पहल, रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure — DAP), सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (Positive Indigenisation List), रक्षा उत्पादन और निर्यात संवर्धन नीति, 2020 (DPEPP 2020), रक्षा औद्योगिक गलियारे (Defence Industrial Corridors) — उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु, एआईपी (Air Independent Propulsion — AIP) प्रणाली, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (Defence Public Sector Undertakings — DPSUs)
- Essay: आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा: स्वदेशी रक्षा क्षमता का महत्व, नवाचार, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका: रक्षा में निजी-सार्वजनिक सहयोग
त्वरित पुनरावृत्ति: स्वावलंबन नौसेना का प्रमुख आयोजन है, जो स्वदेशीकरण और उभरती प्रौद्योगिकियों के माध्यम से रक्षा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय नौसेना का प्रमुख आयोजन स्वावलंबन 2026 उभरती प्रौद्योगिकियों और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं पर केंद्रित रहेगा। ऐसे आयोजन का उद्देश्य नौसेना की आवश्यकताओं को उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), स्टार्टअप और शैक्षणिक-शोध संस्थानों के समाधानों से जोड़ना होता है। इसके साथ ही यह समाचार उस नीतिगत दिशा को रेखांकित करता है जिसके अंतर्गत रक्षा क्षेत्र में विदेशी उपकरणों पर निर्भरता घटाकर घरेलू अनुसंधान एवं विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। नौसेना के पनडुब्बी कार्यक्रम में स्वदेशी एआईपी प्रणाली का विकास इसी प्रयास का एक उदाहरण है।
पृष्ठभूमि
- भारत की रक्षा आयात पर निर्भरता लंबे समय से उच्च रही है। इसी कारण सरकार ने रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता को नीतिगत प्राथमिकता बनाया है।
- आत्मनिर्भर भारत अभियान (Atmanirbhar Bharat Abhiyan), 2020 के अंतर्गत रक्षा क्षेत्र को स्वदेशी विनिर्माण और निजी भागीदारी के लिए खोला गया।
- रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया में समय-समय पर संशोधन होते रहे हैं, और इसमें भारतीय उद्योग से खरीद (Buy Indian) की श्रेणियों को प्राथमिकता दी गई है।
- सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची के माध्यम से ऐसे उपकरण और प्रणालियां चिन्हित की जाती हैं जिन्हें एक निश्चित समय-सीमा के बाद केवल घरेलू स्रोतों से लिया जाएगा।
- रक्षा नवाचार के लिए iDEX पहल के अंतर्गत स्टार्टअप और MSMEs को सरकारी आवश्यकताओं से जोड़ा जाता है, ताकि प्रौद्योगिकी विकास सीधे उपयोगकर्ता की आवश्यकता से संचालित हो।
स्वावलंबन 2026 (Swavlamban 2026) क्या है?
- स्वावलंबन भारतीय नौसेना का वार्षिक प्रमुख आयोजन है, जिसका केंद्रीय विषय नौसेना के लिए स्वदेशी समाधान विकसित करना है।
- इसमें नौसेना अपनी तकनीकी आवश्यकताएं प्रस्तुत करती है, और उद्योग, स्टार्टअप तथा शोध संस्थान उन आवश्यकताओं के लिए नवाचार प्रस्तुत करते हैं।
- उभरती प्रौद्योगिकियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), स्वायत्त प्रणालियां (Autonomous Systems), सेंसर और संचार प्रणालियां प्रमुख क्षेत्र हैं।
- स्वदेशीकरण का अर्थ है कि रक्षा उपकरणों के डिज़ाइन, विकास और विनिर्माण में घरेलू क्षमता का अधिकाधिक उपयोग हो, ताकि आयात पर निर्भरता घटे।
- पनडुब्बी जैसे जटिल प्लेटफॉर्म में एआईपी प्रणाली अहम है, क्योंकि यह डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को वायु-स्वतंत्र प्रणोदन से लंबे समय तक पानी के भीतर रहने में सक्षम बनाती है।
- रक्षा में स्वदेशीकरण के लिए नीतिगत ढांचा रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया, सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची और रक्षा उत्पादन नीति जैसे साधनों से बनता है।
- ऐसे आयोजन रक्षा क्षेत्र में निजी-सार्वजनिक सहयोग और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (Innovation Ecosystem) को मजबूत करने में सहायक होते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| आयोजक और स्वरूप | भारतीय नौसेना (Indian Navy) का प्रमुख आयोजन स्वावलंबन 2026 (Swavlamban 2026) है। इसका केंद्र उभरती प्रौद्योगिकियों और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं पर है, जिससे नौसेना की नीतिगत प्राथमिकताएँ स्पष्ट होती हैं। |
| केंद्रीय विषय: उभरती प्रौद्योगिकियाँ | कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), स्वायत्त प्रणालियाँ, सेंसर और संचार जैसी तकनीकें समुद्री युद्ध और निगरानी का स्वरूप बदल रही हैं। इनमें घरेलू क्षमता विकसित करना सामरिक स्वायत्तता के लिए आवश्यक है। |
| केंद्रीय विषय: स्वदेशी रक्षा क्षमता | रक्षा उपकरणों और प्रणालियों के स्वदेशीकरण (Indigenisation) पर बल दिया जाता है। इससे आयातित प्लेटफॉर्म पर निर्भरता घटती है और देश की रक्षा आत्मनिर्भरता (Self-reliance) मज़बूत होती है। |
| उद्योग और नवाचार का संपर्क | सार्वजनिक और निजी उद्योग, स्टार्टअप तथा शोध संस्थानों को नौसेना की आवश्यकताओं से जोड़ा जाता है। इससे रक्षा नवाचार की परिसंस्था (Ecosystem) का विस्तार होता है। |
| नीतिगत संदर्भ | यह आयोजन आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) की पहल और रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया के सुधारों की दिशा में एक व्यावहारिक मंच है। इसमें प्रयोक्ता (नौसेना) और आपूर्तिकर्ता (उद्योग) के बीच सीधा संवाद संभव होता है। |
महत्व
आर्थिक
- रक्षा विनिर्माण में घरेलू मूल्य-संवर्धन बढ़ने से विदेशी मुद्रा की बचत होती है और आयात-निर्भरता घटती है।
- एमएसएमई (MSME) और स्टार्टअप को नौसेना की माँग से जोड़कर बाज़ार और पूँजी के नए अवसर मिलते हैं।
- रक्षा उपकरणों के स्वदेशीकरण से सहायक उद्योगों (Ancillary Industries) और कुशल रोज़गार का विस्तार होता है।
सामरिक
- समुद्री सीमा और हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी तथा प्रतिक्रिया क्षमता के लिए घरेलू प्रौद्योगिकी पर निर्भरता कम करना आवश्यक है।
- आपूर्ति शृंखला में व्यवधान की स्थिति में प्रमुख प्रणालियों के उत्पादन और रखरखाव की स्वायत्तता सुरक्षा को सुदृढ़ करती है।
- स्वायत्त और मानवरहित प्रणालियों में दक्षता सामरिक निरोध (Deterrence) की विश्वसनीयता बढ़ाती है।
तकनीकी और नवाचार
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और उन्नत सामग्री जैसे क्षेत्रों में दोहरे उपयोग (Dual-use) की तकनीकों के विकास को गति मिलती है।
- प्रयोक्ता-केंद्रित नवाचार से अनुसंधान एवं विकास (Research and Development) का परिणाम सीधे परिचालन आवश्यकताओं से जुड़ता है।
संस्थागत और नीतिगत
- सशस्त्र बलों, उद्योग और शोध संस्थानों के बीच समन्वय से रक्षा अधिग्रहण में समयबद्धता और पारदर्शिता बढ़ने की संभावना रहती है।
- ऐसे आयोजन स्वदेशीकरण संबंधी नीतियों के कार्यान्वयन की प्रगति और बाधाओं की पहचान का मंच भी बनते हैं।
चुनौतियाँ
1. प्रौद्योगिकी में अंतर
- उन्नत सेंसर, पनडुब्बी प्रणोदन और उच्च-गुणवत्ता वाले अर्धचालक (Semiconductor) जैसे क्षेत्रों में घरेलू क्षमता अभी सीमित है।
- वैश्विक तकनीकी विकास की गति के साथ तालमेल बनाए रखना निरंतर निवेश और दक्ष मानव संसाधन की माँग करता है।
यूपीएससी लिंक: GS-III: रक्षा प्रौद्योगिकी और आंतरिक सुरक्षा
2. उद्योग की भागीदारी और क्षमता
- एमएसएमई और स्टार्टअप को परीक्षण सुविधाओं, वित्तीय सहायता और दीर्घकालिक अनुबंधों की कमी का सामना करना पड़ता है।
- बड़े रक्षा उत्पादन में आपूर्ति शृंखला का स्थानीयकरण अभी पूर्णता तक नहीं पहुँचा है।
यूपीएससी लिंक: GS-III: औद्योगिक नीति और रक्षा उत्पादन
3. अधिग्रहण प्रक्रिया की जटिलता
- लंबी अधिग्रहण प्रक्रिया और परीक्षण-मूल्यांकन के चरणों में विलंब नवाचार की गति को धीमा कर सकते हैं।
- नवाचार-उन्मुख अनुबंधों और जोखिम-साझाकरण के तंत्र को अधिक स्पष्ट और सुलभ बनाने की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: GS-III: रक्षा सुधार और सार्वजनिक खरीद
4. बौद्धिक संपदा और डेटा सुरक्षा
- नवाचार में निजी भागीदारों की भूमिका बढ़ने से बौद्धिक संपदा अधिकारों के स्वामित्व और वितरण के प्रश्न उठते हैं।
- रक्षा से जुड़े संवेदनशील आँकड़ों और सॉफ़्टवेयर की साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: GS-III: साइबर सुरक्षा और बौद्धिक संपदा अधिकार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| तकनीकी निर्भरता | उच्च-स्तरीय घटकों के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भरता से आपूर्ति और मूल्य के जोखिम बने रहते हैं। |
| अनुसंधान से उत्पादन तक का अंतर | प्रयोगशाला स्तर के नवाचार का औद्योगिक उत्पादन और परिचालन परीक्षण तक पहुँचना धीमा हो सकता है। |
| वित्तपोषण की कमी | स्टार्टअप और छोटे उद्यमों के लिए प्रारंभिक पूँजी और दीर्घकालिक निवेश की उपलब्धता सीमित है। |
| खरीद प्रक्रिया की गति | अधिग्रहण में विलंब से नवाचार का लाभ समय पर सशस्त्र बलों तक नहीं पहुँचता। |
| साइबर और डेटा सुरक्षा | रक्षा प्रणालियों में प्रयुक्त सॉफ़्टवेयर और आँकड़ों की सुरक्षा पर निरंतर सतर्कता आवश्यक है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- iDEX (Innovations for Defence Excellence)
- रक्षा उत्पादन एवं निर्यात संवर्धन नीति, 2020 (Defence Production and Export Promotion Policy, 2020)
आगे की राह
- अनुसंधान से उत्पादन तक के चरणों में परीक्षण सुविधाओं और प्रमाणन की व्यवस्था को सरल एवं सुलभ बनाया जाए।
- स्वदेशीकरण सूचियों (Positive Indigenisation Lists) की नियमित समीक्षा कर उनमें उभरती प्रौद्योगिकियों को शामिल किया जाए।
- अधिग्रहण प्रक्रिया में समयबद्ध निर्णय-प्रणाली और नवाचार-अनुकूल अनुबंध मॉडल अपनाए जाएँ।
- एमएसएमई और स्टार्टअप के लिए दीर्घकालिक माँग-आश्वासन और प्रारंभिक वित्तपोषण की व्यवस्था सुदृढ़ की जाए।
- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच संयुक्त अनुसंधान को संस्थागत रूप दिया जाए।
- आपूर्ति शृंखला के स्थानीयकरण के लिए मुख्य घटकों की पहचान कर लक्षित क्षमता-निर्माण किया जाए।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा में कुशल मानव संसाधन के विकास के लिए शैक्षणिक-उद्योग साझेदारी बढ़ाई जाए।
- बौद्धिक संपदा अधिकारों के स्पष्ट वितरण और रक्षा डेटा सुरक्षा के मानक तय किए जाएँ।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्वदेशीकरण (Indigenisation) · आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) · रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure) · iDEX (Innovations for Defence Excellence) · रक्षा औद्योगिक गलियारे (Defence Industrial Corridors) · उभरती प्रौद्योगिकियाँ (Emerging Technologies) · वायु-स्वतंत्र प्रणोदन (Air Independent Propulsion) · सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (Positive Indigenisation List) · आयात-प्रतिस्थापन (Import Substitution) · तकनीकी अंतरण (Transfer of Technology) · दोहरे-उपयोग प्रौद्योगिकी (Dual-use Technology) · रक्षा विनिर्माण में निजी क्षेत्र की भूमिका
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 53: राष्ट्रपति सशस्त्र बलों का सर्वोच्च सेनापति होता है।
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 1 और 2: रक्षा तथा नौसैनिक, सैन्य और वायु सेना संघ का विषय है।
अवधारणा प्रवाह
उभरती प्रौद्योगिकियों (AI, स्वायत्त प्रणालियाँ) में वैश्विक प्रगति से नौसेना की परिचालन आवश्यकताएँ बदलती हैं। → आवश्यकताओं को स्वावलंबन 2026 जैसे मंच पर प्रयोक्ता और उद्योग के बीच चर्चा में रखा जाता है। → चिह्नित क्षमता-अंतर के लिए स्वदेशीकरण सूचियों और iDEX जैसी पहलों के माध्यम से नवाचार को प्रोत्साहन मिलता है। → स्टार्टअप और उद्योग के प्रस्ताव परीक्षण, प्रमाणन और अधिग्रहण प्रक्रिया से होकर गुज़रते हैं। → सफल स्वदेशी प्रणालियाँ सेवा में शामिल होकर आयात-निर्भरता घटाती हैं और रक्षा विनिर्माण का आधार बढ़ाती हैं। → आत्मनिर्भरता और सुरक्षा के संयुक्त परिणाम से समुद्री सामरिक क्षमता और रक्षा निर्यात की संभावनाएँ सुदृढ़ होती हैं।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. iDEX (Innovations for Defence Excellence) रक्षा मंत्रालय की एक पहल है, जिसके अंतर्गत स्टार्टअप और लघु उद्यमों को रक्षा नवाचार में सहभागी बनाया जाता है।
2. रक्षा औद्योगिक गलियारे केवल गुजरात और महाराष्ट्र में स्थापित किए जा रहे हैं।
3. संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची में रक्षा से संबंधित प्रविष्टि सम्मिलित है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- इनमें से कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: iDEX (2018) रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत रक्षा नवाचार संगठन (DIO) द्वारा कार्यान्वित होता है। कथन 2 गलत है: रक्षा औद्योगिक गलियारे उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में घोषित किए गए हैं। कथन 3 सही है: संघ सूची की प्रविष्टि 1 में भारत की रक्षा का विषय आता है, इसलिए केवल दो कथन सही हैं।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए, जिनमें एक अभिकथन (A) और एक कारण (R) दिया गया है:
अभिकथन (A): वायु-स्वतंत्र प्रणोदन (AIP) से लैस डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी बैटरी चार्ज करने के लिए बार-बार सतह पर आए बिना लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकती है।
कारण (R): AIP प्रणाली वायुमंडलीय ऑक्सीजन के बिना ईंधन-सेल या स्टर्लिंग इंजन जैसे स्रोतों से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करती है।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही विकल्प चुनिए:
- A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सही है, परंतु R गलत है
- A गलत है, परंतु R सही है
उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है — AIP प्रणाली पनडुब्बी को सतह पर आए बिना अधिक समय तक डूबी रहने की क्षमता देती है, क्योंकि यह ऑक्सीजन की आवश्यकता के बिना ऊर्जा उत्पन्न करती है। इसलिए R, A की सही व्याख्या करता है। स्टर्लिंग इंजन और ईंधन-सेल AIP के प्रमुख रूप हैं।
Q3. भारत में रक्षा अधिग्रहण से संबंधित पूंजीगत प्रस्तावों को अनुमोदित करने वाली शीर्ष समिति, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री करते हैं, कौन-सी है?
- रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council)
- मंत्रिमंडलीय सुरक्षा समिति (Cabinet Committee on Security)
- रक्षा योजना समिति (Defence Planning Committee)
- रक्षा अधिग्रहण बोर्ड (Defence Procurement Board)
उत्तर: रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council) — रक्षा अधिग्रहण परिषद की अध्यक्षता रक्षा मंत्री करते हैं और यह पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को मंज़ूरी देती है। मंत्रिमंडलीय सुरक्षा समिति उच्च स्तरीय राजनीतिक-सुरक्षा निर्णय लेती है, जबकि रक्षा योजना समिति की अध्यक्षता राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार करते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ ‘आत्मनिर्भर भारत’ के अंतर्गत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को नीतिगत प्राथमिकता दी गई है, फिर भी उच्च-प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्मों पर आयात पर निर्भरता बनी हुई है। इस परिप्रेक्ष्य में रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया और iDEX जैसी पहलों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या स्वदेशीकरण का लक्ष्य केवल निजी उद्योग की सहभागिता से प्राप्त हो सकता है? (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर संरचना: (1) परिचय: नौसेना के प्रमुख कार्यक्रम स्वावलंबन जैसे मंचों द्वारा उभरती प्रौद्योगिकियों और स्वदेशी क्षमताओं पर बल, तथा आयात-निर्भरता का विरोधाभास। (2) संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 246 के अंतर्गत संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची की प्रविष्टि 1 (भारत की रक्षा) के कारण रक्षा नीति पर संघ सरकार का विधायी और कार्यकारी नियंत्रण। (3) नीतिगत ढाँचा: रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP 2020) की श्रेणियाँ (Buy, Buy and Make, Make-I, Make-II, Make-III) और सामरिक भागीदारी मॉडल; रक्षा उत्पादन एवं निर्यात संवर्धन नीति (DPEPP 2020) के लक्ष्य; सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियाँ; iDEX (2018) और रक्षा नवाचार संगठन की भूमिका; उत्तर प्रदेश व तमिलनाडु में रक्षा औद्योगिक गलियारे। (4) प्रमाण और उदाहरण: AIP प्रणाली का स्वदेशी विकास, तेजस लड़ाकू विमान कार्यक्रम में विलंब और इंजन आयात से जुड़ी चुनौतियाँ, MSME और स्टार्टअप की भागीदारी। (5) समालोचना: आयात-प्रतिस्थापन बनाम तकनीकी क्षमता; प्रौद्योगिकी अंतरण की सीमाएँ; क्रय-प्रक्रिया में विलंब; सीमित अनुसंधान एवं विकास निवेश; उद्योग के लिए लाभ-हानि और मूल्य-निर्धारण की चुनौती। (6) विद्वानों और समितियों के दृष्टिकोण: कारगिल समीक्षा समिति (1999) द्वारा रक्षा प्रबंधन सुधार की सिफ़ारिश; नरेश चंद्रा टास्क फ़ोर्स (2012) के राष्ट्रीय सुरक्षा सुझाव; सामरिक विश्लेषक राजेश राजगोपालन के अनुसार स्वदेशीकरण के लिए उत्पादन-शृंखला और तकनीकी आधार का विकास अनिवार्य है। (7) निष्कर्ष: निजी क्षेत्र केंद्रीय है, पर सार्वजनिक उपक्रमों, डीआरडीओ जैसे शोध संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों और विदेशी सहयोग के संतुलित मेल से ही दीर्घकालिक स्वदेशीकरण संभव है; अंत में प्रक्रियागत सुधार और दीर्घकालिक अनुसंधान निवेश पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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