सीओपी31: जलवायु शिक्षा से कार्रवाई तक का भारत का प्रयास

सीओपी31: जलवायु शिक्षा से कार्रवाई तक का भारत का प्रयास

सीओपी31: जलवायु शिक्षा से कार्रवाई तक का भारत का प्रयास

सीओपी31: जलवायु शिक्षा से कार्रवाई तक का भारत का प्रयास — जलवायु शिक्षा से कार्रवाई तक: COP31 का मार्ग
आरेख: जलवायु शिक्षा से कार्रवाई तक: COP31 का मार्ग

✎ जलवायु परिवर्तन शिक्षा (CCE) का लक्ष्य जागरूकता से आगे बढ़कर दक्षता-आधारित परिवर्तन है, और इसकी संवैधानिक जड़ें अनुच्छेद 48A और अनुच्छेद 51A(छ) में हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — राजव्यवस्था (अनुच्छेद 48A और मौलिक कर्तव्य अनुच्छेद 51A(छ) के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण)  |  GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक शासन, COP और UNFCCC की प्रक्रिया)  |  GS Paper III — पर्यावरण (जलवायु परिवर्तन, जलवायु अनुकूलन और शमन में शिक्षा की भूमिका)
  • Prelims: जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) और पक्षकारों का सम्मेलन (COP), मिशन लाइफ (Mission LiFE — Lifestyle for Environment), राष्ट्रीय पाठ्यचर्या फ्रेमवर्क (NCF-SE 2023), राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, निष्ठा (NISHTHA) — शिक्षक व्यावसायिक विकास कार्यक्रम, हरित शिक्षा साझेदारी (Greening Education Partnership) — UNESCO द्वारा संचालित, अनुच्छेद 48A और अनुच्छेद 51A(छ) (42वाँ संविधान संशोधन, 1976), एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ (1991) — पर्यावरण शिक्षा पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश
  • Essay: जलवायु साक्षरता से जलवायु कार्रवाई तक: शिक्षा क्या भूमिका निभा सकती है?, सतत विकास के लिए शिक्षा: ज्ञान से कौशल और नागरिक उत्तरदायित्व तक का सफर

त्वरित पुनरावृत्ति: जलवायु परिवर्तन शिक्षा (CCE) का लक्ष्य जागरूकता से आगे बढ़कर दक्षता-आधारित परिवर्तन है, और इसकी संवैधानिक जड़ें अनुच्छेद 48A और अनुच्छेद 51A(छ) में हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

तुर्की के अंतालिया में 9 नवंबर से आयोजित होने वाले COP31 से पहले जलवायु परिवर्तन शिक्षा (Climate Change Education: CCE) को केवल जागरूकता बढ़ाने वाले प्रयास से आगे ले जाकर दक्षता-आधारित परिवर्तन की ओर बढ़ाने की चर्चा तेज़ हुई है। इस विमर्श का केंद्र यह है कि शिक्षा को मापने योग्य राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं से जोड़ा जाए। लेख में दो क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिलाया गया है: शिक्षकों की क्षमता-वृद्धि और उन साझा भौगोलिक क्षेत्रों के समुदायों के लिए ज्ञान-मंच, जो समान आपदाओं का सामना करते हैं। भारत के संदर्भ में NCF-SE 2023, मिशन लाइफ, इको क्लब और NISHTHA जैसे कार्यक्रमों को इस दिशा में उदाहरण के रूप में रखा गया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में पर्यावरण शिक्षा की संवैधानिक नींव 1976 के 42वें संविधान संशोधन से जुड़ी है, जिसके तहत राज्य के लिए पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन (अनुच्छेद 48A) तथा नागरिकों के लिए पर्यावरण की रक्षा का मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51A(छ)) स्थापित हुआ। इससे पहले 1972 के संयुक्त राष्ट्र मानव पर्यावरण सम्मेलन (स्टॉकहोम) ने वैश्विक पर्यावरण कार्रवाई को गति दी थी।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने 1991 के एम.सी. मेहता मामले में निर्देश दिया कि पर्यावरण शिक्षा को औपचारिक शिक्षा का अनिवार्य अंग बनाया जाए। यह भारत में पर्यावरण शिक्षा के विकास का एक निर्णायक मोड़ माना जाता है।
  • 2010 के बाद जलवायु परिवर्तन को एक प्रमुख विकासात्मक चुनौती के रूप में मान्यता मिली। इसके साथ शिक्षा का दायरा संरक्षण से आगे बढ़कर अनुकूलन-क्षमता (resilience) और सतत विकास तक विस्तृत हुआ।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या फ्रेमवर्क (NCF-SE) 2023 ने स्कूली स्तर पर जलवायु साक्षरता को संस्थागत रूप दिया। उच्च शिक्षा में UGC के 2023 के दिशा-निर्देश और पाठ्यचर्या फ्रेमवर्क में सतत विकास, जलवायु नीति, नवीकरणीय ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकी से जुड़ा अनिवार्य पाठ्यक्रम शामिल किया गया है।
  • UNESCO के नेतृत्व में हरित शिक्षा साझेदारी (Greening Education Partnership) लगभग 100 देशों और हज़ारों संगठनों के सहयोग से जलवायु-सक्षम शिक्षा के लिए विश्व का सबसे बड़ा सहयोगात्मक मंच बताई गई है। इसमें परिसर, पाठ्यचर्या, शिक्षक प्रशिक्षण और सामुदायिक हस्तक्षेप शामिल हैं।

जलवायु परिवर्तन शिक्षा (CCE) क्या है?

  • जलवायु परिवर्तन शिक्षा (Climate Change Education: CCE) वह शैक्षिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से विद्यार्थी जलवायु परिवर्तन के कारणों, प्रभावों, विज्ञान, नीति और समाधानों को समझते हैं।
  • इसका स्वभाव अंतर्विषयक (interdisciplinary) और बहुविषयक (multidisciplinary) है, जिसमें विज्ञान, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र और नीति-विज्ञान के दृष्टिकोण एक साथ आते हैं।
  • CCE का विकास चरणबद्ध रहा है: पहले जागरूकता, फिर जलवायु साक्षरता, और अब दक्षता-आधारित परिवर्तन, जिसमें लचीलापन, नवाचार, उद्यमिता और हरित कौशल पर बल दिया जाता है।
  • शिक्षक क्षमता-वृद्धि CCE की सफलता की मूल शर्त है, क्योंकि प्रशिक्षित शिक्षक ही पाठ्यचर्या को व्यावहारिक और स्थानीय संदर्भ से जोड़ सकते हैं। NISHTHA जैसे कार्यक्रम इसी उद्देश्य से जुड़े हैं।
  • मिशन लाइफ (Mission LiFE) को जलवायु-अनुकूल जीवनशैली के राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में देखा जाता है, और इसकी जड़ें भी जलवायु परिवर्तन शिक्षा में मानी गई हैं।
  • समुदाय-स्तरीय ज्ञान-मंच उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी हैं जो एक ही भौगोलिक परिस्थिति और समान आपदाओं से प्रभावित हैं, जैसे बाढ़-प्रवण या तटीय क्षेत्र। इससे स्थानीय अनुभवों का आदान-प्रदान संभव होता है।
  • COP एक अंतरराष्ट्रीय मंच है जहाँ राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ और उनके मापन के तरीके तय होते हैं। शिक्षा को ऐसी प्रतिबद्धताओं में शामिल करने का प्रयास इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
मूल बदलाव जलवायु परिवर्तन शिक्षा (Climate Change Education, CCE) को जागरूकता-आधारित शिक्षण से क्षमता-आधारित परिवर्तन की ओर ले जाना, जिसमें संरक्षण के साथ लचीलापन और सतत विकास भी शामिल हैं
संवैधानिक और न्यायिक आधार 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा पर्यावरण संरक्षण को राज्य और नागरिकों दोनों का दायित्व बनाया गया; एम. सी. मेहता बनाम भारत संघ (1991) में सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरण साक्षरता को शिक्षा का अनिवार्य अंग बनाने का निर्देश दिया
नीतिगत ढाँचा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy, NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE) 2023 में जलवायु साक्षरता को स्थान मिला, जिससे स्कूली शिक्षा में इसका औपचारिक ढाँचा बना
अंतरविषयक स्वरूप CCE में वैज्ञानिक, सामाजिक, आर्थिक और नीतिगत दृष्टिकोण एक साथ आते हैं, इसलिए यह एक विषय तक सीमित न रहकर पाठ्यक्रम के कई क्षेत्रों में फैलता है
वैश्विक सहभागिता UNESCO के नेतृत्व में ग्रीनिंग एजुकेशन पार्टनरशिप लगभग 100 देशों और हजारों संस्थाओं को जोड़ती है, जो परिसर, पाठ्यक्रम, शिक्षक प्रशिक्षण और सामुदायिक हस्तक्षेप में कार्य करती है

महत्व

नीतिगत और शासन संबंधी महत्व

  • जलवायु परिवर्तन शिक्षा को NEP 2020 और NCF-SE 2023 से जोड़ने पर भारत की शिक्षा नीति में सतत विकास की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है
  • मिशन LiFE (Lifestyle for Environment) की जड़ें भी CCE में हैं, जिससे नागरिक-व्यवहार में बदलाव की नीति को शैक्षिक आधार मिलता है

कौशल और आर्थिक महत्व

  • लचीलापन, नवाचार, उद्यमिता और हरित कौशल पर बल देने से हरित अर्थव्यवस्था के लिए मानव संसाधन तैयार होता है
  • हरित कौशल की माँग बढ़ने के साथ यह दृष्टिकोण रोजगार और आर्थिक संवृद्धि के बीच सेतु का काम कर सकता है

अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक महत्व

  • COP31 में भारत अपने CCE ढाँचे को प्रदर्शित करके जलवायु शिक्षा के क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका का दावा कर सकता है
  • क्षेत्रीय दृष्टिकोण की वकालत से भारत विकासशील और आपदा-प्रवण देशों के साझा हितों को स्वर दे सकता है

सामाजिक और आपदा-प्रबंधन महत्व

  • एक ही भौगोलिक क्षेत्र और समान आपदाओं का सामना करने वाले समुदायों के लिए ज्ञान मंच बनाने से स्थानीय तैयारी मजबूत होती है
  • सामुदायिक स्तर पर जागरूकता और कार्रवाई जुड़ने से आपदा जोखिम न्यूनीकरण की जमीनी क्षमता बढ़ती है

चुनौतियाँ

1. शिक्षक क्षमता का अंतर

  • CCE को अंतरविषयक ढंग से पढ़ाने के लिए शिक्षकों को विज्ञान, समाज विज्ञान और नीति के बीच संबंध समझने होंगे, जो वर्तमान प्रशिक्षण में कम दिखता है
  • नियमित और निरंतर प्रशिक्षण के अभाव में जागरूकता से आगे की क्षमता-आधारित शिक्षा कठिन हो जाती है

2. जागरूकता से क्षमता की ओर संक्रमण

  • केवल जानकारी देने वाला पाठ्यक्रम व्यवहार में बदलाव नहीं लाता, इसलिए मूल्यांकन को कौशल और निर्णय-क्षमता पर केंद्रित करना होगा
  • पाठ्यक्रम, परीक्षा और शिक्षण पद्धति के बीच तालमेल न होने पर CCE का लक्ष्य अधूरा रह सकता है

3. स्थानीय संदर्भ और क्षेत्रीय ज्ञान

  • एक समान पाठ्यक्रम पूरे देश या क्षेत्र की विविध भौगोलिक और आपदा-संबंधी परिस्थितियों को पूरी तरह नहीं समेट सकता
  • साझा भूगोल वाले समुदायों के लिए ज्ञान मंच विकसित करने में समन्वय, स्थानीय भाषा और संसाधनों की कमी बाधा बन सकती है

4. संवैधानिक दायित्व और कार्यान्वयन का अंतर

  • अनुच्छेद 48A और 51A(छ) के दायित्व तभी प्रभावी होते हैं जब राज्य स्तर पर शिक्षा और पर्यावरण विभाग समन्वित ढंग से कार्य करें
  • केंद्र और राज्यों की भूमिकाएँ स्पष्ट न होने पर नीति घोषणाओं और जमीनी क्रियान्वयन के बीच दूरी बनी रह सकती है

5. अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का मापन

  • COP31 में मापने योग्य राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ तय करना आसान है, पर उनके परिणामों की निगरानी के संकेतक विकसित करना कठिन है
  • विभिन्न देशों के मानक और संसाधन अलग होने से तुलनात्मक मूल्यांकन जटिल हो जाता है

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
शिक्षक प्रशिक्षण अंतरविषयक CCE के लिए शिक्षकों की तैयारी सीमित होने से पाठ्यक्रम का लक्ष्य प्रभावित हो सकता है
मूल्यांकन का ढाँचा जानकारी आधारित परीक्षा कौशल और व्यवहार परिवर्तन को माप नहीं पाती
क्षेत्रीय विविधता एकरूप पाठ्यक्रम स्थानीय आपदाओं और भूगोल की विशिष्टताओं को पर्याप्त स्थान नहीं दे पाता
केंद्र-राज्य समन्वय शिक्षा और पर्यावरण से जुड़े विषय राज्य सूची और समवर्ती सूची में आने के कारण क्रियान्वयन में समन्वय आवश्यक है
संसाधन और निगरानी ज्ञान मंच और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए निरंतर वित्तीय संसाधन और प्रभाव-मूल्यांकन तंत्र का अभाव बाधा बन सकता है

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मिशन LiFE (Lifestyle for Environment)
  • NISHTHA (राष्ट्रीय पहल: स्कूल प्रमुखों और शिक्षकों के लिए समग्र प्रगति हेतु प्रशिक्षण)
  • इको क्लब

आगे की राह

  • शिक्षक प्रशिक्षण को NISHTHA जैसे निरंतर कार्यक्रमों में अंतरविषयक CCE मॉड्यूल के रूप में शामिल किया जाए, ताकि शिक्षक जागरूकता से आगे बढ़कर कौशल-आधारित शिक्षण कर सकें
  • मूल्यांकन में जानकारी के साथ व्यवहार, समस्या-समाधान और स्थानीय कार्रवाई को शामिल किया जाए, जिससे CCE का परिणाम मापा जा सके
  • साझा भूगोल और समान आपदा-जोखिम वाले क्षेत्रों के लिए क्षेत्रीय ज्ञान मंच बनाए जाएँ, जिनमें राज्य, स्थानीय निकाय और शैक्षणिक संस्थान मिलकर कार्य करें
  • इको क्लब और सामुदायिक गतिविधियों को आपदा-तैयारी, जल और ऊर्जा संरक्षण तथा हरित कौशल से जोड़ा जाए
  • UGC के 2023 दिशानिर्देशों के अनुरूप उच्च शिक्षा में पर्यावरण और जलवायु नीति के पाठ्यक्रम को व्यावहारिक परियोजनाओं से जोड़ा जाए
  • केंद्र और राज्यों के बीच स्पष्ट भूमिका-विभाजन और समन्वय तंत्र बनाया जाए, ताकि संवैधानिक दायित्वों का क्रियान्वयन सुनिश्चित हो
  • COP31 में मापने योग्य राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के साथ प्रगति के संकेतक तय किए जाएँ और उनकी नियमित समीक्षा हो
  • UNESCO की ग्रीनिंग एजुकेशन पार्टनरशिप जैसे वैश्विक मंचों से अनुभव साझा कर भारतीय मॉडल को दक्षिण-दक्षिण सहयोग में प्रस्तुत किया जाए

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

जलवायु परिवर्तन शिक्षा · हरित कौशल · COP31 · मिशन LiFE · राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 · राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2023 · शिक्षक क्षमता निर्माण · अंतर-विषयक दृष्टिकोण · सतत विकास · पर्यावरण संरक्षण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48A: राज्य का पर्यावरण संरक्षण का दायित्व
  • अनुच्छेद 51A(छ): नागरिकों का पर्यावरण संरक्षण का कर्तव्य
  • अनुच्छेद 21: स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार, न्यायिक व्याख्या से
  • अनुच्छेद 21A: शिक्षा का मौलिक अधिकार, शिक्षा में जोड़

अवधारणा प्रवाह

पर्यावरण संरक्षण का संवैधानिक आधार (1976) और सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश (1991) पर्यावरण साक्षरता को शिक्षा का अंग बनाते हैं  →  2010 के बाद जलवायु परिवर्तन को प्रमुख विकास चुनौती मानने से जागरूकता संरक्षण से आगे लचीलापन और सतत विकास की ओर बढ़ी  →  NEP 2020 और NCF-SE 2023 ने जलवायु साक्षरता को स्कूली पाठ्यक्रम में औपचारिक स्थान दिया तथा मिशन LiFE से व्यवहार-परिवर्तन को जोड़ा  →  शिक्षक प्रशिक्षण और क्षेत्रीय ज्ञान मंचों के माध्यम से CCE को अंतरविषयक और स्थानीय संदर्भ से जोड़ा जाता है  →  क्षमता-आधारित शिक्षा से हरित कौशल, नवाचार और उद्यमिता का विकास होता है, जो हरित अर्थव्यवस्था के लिए मानव संसाधन तैयार करता है  →  COP31 (Antalya, नवंबर 2026) में मापने योग्य राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ तय होने से यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही में बदलती है

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. 42वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1976 ने पर्यावरण संरक्षण को राज्य के दायित्व और नागरिकों के कर्तव्य के रूप में स्थापित किया।
2. सर्वोच्च न्यायालय के एम.सी. मेहता निर्णय (1991) ने पर्यावरण साक्षरता को औपचारिक शिक्षा का अनिवार्य घटक बनाने का निर्देश दिया।
3. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-SE) 2023 ने जलवायु साक्षरता को मजबूत किया है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। 42वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1976 ने अनुच्छेद 48ए और 51ए(जी) के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को राज्य के नीति निदेशक तत्व और मौलिक कर्तव्य के रूप में शामिल किया। कथन 2 सही है। एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ (1991) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरण शिक्षा को औपचारिक शिक्षा प्रणाली का अनिवार्य हिस्सा बनाने का निर्देश दिया था। कथन 3 सही है। NEP 2020 और NCF-SE 2023 दोनों ने शिक्षा में जलवायु साक्षरता और सतत विकास पर जोर दिया है।

Q2. निम्नलिखित युग्मों पर विचार करें:
1. मिशन LiFE : जलवायु परिवर्तन शिक्षा
2. NISHTHA : शिक्षक व्यावसायिक विकास कार्यक्रम
3. Greening Education Partnership : UNESCO के नेतृत्व में जलवायु-तैयार शिक्षा मंच
उपरोक्त में से कितने युग्म सुमेलित हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — युग्म 1 सही है। मिशन LiFE (लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट) जलवायु परिवर्तन शिक्षा और पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवन शैली को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। युग्म 2 सही है। NISHTHA (नेशनल इनिशिएटिव फॉर स्कूल हेड्स एंड टीचर्स होलिस्टिक एडवांसमेंट) एक प्रमुख शिक्षक व्यावसायिक विकास कार्यक्रम है। युग्म 3 सही है। Greening Education Partnership वास्तव में UNESCO के नेतृत्व में जलवायु-तैयार शिक्षा के लिए एक वैश्विक सहयोगी मंच है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ जलवायु परिवर्तन शिक्षा (CCE) को केवल जागरूकता-आधारित पहल से सक्षमता-आधारित प्रयास में बदलने में भारत की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संबंध में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और मिशन LiFE के योगदान पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय में जलवायु परिवर्तन शिक्षा (CCE) के महत्व और इसके वर्तमान वैश्विक संक्रमण (जागरूकता से कार्रवाई की ओर) को संक्षेप में बताएं। मुख्य भाग में, भारत की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण करें, जिसमें संवैधानिक प्रावधान (42वां संशोधन), न्यायिक हस्तक्षेप (एम.सी. मेहता निर्णय, 1991), और नीतिगत पहल शामिल हों। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-SE) 2023 के माध्यम से शिक्षा में जलवायु साक्षरता को कैसे मजबूत किया गया है, इसका विस्तार से वर्णन करें। मिशन LiFE की अवधारणा, इसके उद्देश्य और CCE से इसके जुड़ाव को समझाएं। शिक्षक क्षमता निर्माण (NISHTHA), ज्ञान मंचों के विकास और क्षेत्रीय दृष्टिकोण की आवश्यकता जैसे क्षेत्रों में चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करें। निष्कर्ष में, COP31 जैसे वैश्विक मंचों पर भारत की नेतृत्व क्षमता और CCE को सक्षमता-आधारित बनाने में इसके प्रयासों के महत्व को रेखांकित करें।

स्रोत: The Indian Express


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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