गंभीर चक्रवात के खतरे से निपटने को तैयार रहें अधिकारी: भूगोल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

गंभीर चक्रवात के खतरे से निपटने को तैयार रहें अधिकारी: भूगोल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

गंभीर चक्रवात के खतरे से निपटने को तैयार रहें अधिकारी: भूगोल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

चक्रवात आने पर तैयारी प्रक्रियाचेतावनी जारीIMD द्वारातैयारी समीक्षाअधिकारियों द्वारानियंत्रण कक्ष स्थापितजिला स्तर परनिकासी व्यवस्थासंवेदनशील क्षेत्रों कीराहत व्यवस्थाएसडीआरएफ से संसाधन
चक्रवात आने पर तैयारी प्रक्रिया

✎ चक्रवात से जान-माल की हानि घटाने की कुंजी समय पर पूर्व-चेतावनी, संवेदनशील क्षेत्रों से सुरक्षित निकासी और चक्रवात-आश्रय स्थलों के उपयोग में निहित है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (Geography): उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति और बंगाल की खाड़ी की भूमिका  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन (Disaster Management): आपदा-पूर्व तैयारी, चेतावनी और निकासी  |  GS Paper II — शासन (Governance): केंद्र-राज्य-जिला स्तरीय आपदा-प्रबंधन संस्थागत ढाँचा
  • Prelims: चक्रवात (Cyclone) और चक्रवाती तूफान (Cyclonic Storm) का IMD वर्गीकरण, गंभीर चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm) की पवन-गति सीमा, स्थलपात (Landfall) और तूफानी लहर (Storm Surge), भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF), आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005)
  • Essay: प्राकृतिक आपदाएँ: पूर्व-चेतावनी से पूर्व-तैयारी तक का सफर, आपदा-जोखिम न्यूनीकरण में स्थानीय प्रशासन और समुदाय की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: चक्रवात से जान-माल की हानि घटाने की कुंजी समय पर पूर्व-चेतावनी, संवेदनशील क्षेत्रों से सुरक्षित निकासी और चक्रवात-आश्रय स्थलों के उपयोग में निहित है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

25 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा, एनटीआर और एलुरू जिलों से समाचार मिले कि गंभीर चक्रवाती तूफान के समीप आने को देखते हुए जिला कलेक्टरों ने तैयारी की समीक्षा की। अधिकारियों को अपने निर्धारित स्थानों पर उपलब्ध रहने, पेयजल और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने, और संवेदनशील क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने के निर्देश दिए गए। जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए। बिजली वितरण निगम ने कर्मचारियों की छुट्टियाँ रद्द कीं और टूटी बिजली की तारों के निकट जाने से जनता को सावधान किया। सिंचाई विभाग को नहरों और तालाबों के बंधों की सुरक्षा के उपाय करने को कहा गया। सार्वजनिक सलाह में नदियों, नहरों और बंधों से दूर रहने तथा जर्जर भवनों, पेड़ों, बिजली के खंभों और होर्डिंग के नीचे शरण न लेने की अपील की गई। समाचार में पवन की सटीक गति या स्थलपात के समय का उल्लेख नहीं है, इसलिए इसे आधिकारिक पूर्वानुमान के अनुसार ही समझना चाहिए।

पृष्ठभूमि

  • बंगाल की खाड़ी में अक्टूबर-दिसंबर के दौरान उत्तर-पूर्वी मानसून की अवधि में चक्रवात अपेक्षाकृत अधिक बनते हैं, और आंध्र प्रदेश का तटीय क्षेत्र इनसे नियमित रूप से प्रभावित होता है।
  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत राष्ट्रीय स्तर पर NDMA, राज्य स्तर पर SDMA और जिला स्तर पर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण गठित किए गए हैं, जो योजना, समन्वय और प्रतिक्रिया के लिए उत्तरदायी हैं।
  • अधिनियम के तहत राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की स्थापना की गई है, जबकि राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) से राहत और पुनर्वास के लिए राज्यों को संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं।
  • IMD चक्रवात के बनने, दिशा और तीव्रता की निगरानी करता है और चेतावनी जारी करता है। इसी चेतावनी के आधार पर राज्य और जिला प्रशासन निकासी और सुरक्षा के उपाय करते हैं।
  • 1999 के ओडिशा सुपर चक्रवात के बाद भारत में चक्रवात-प्रबंधन की संस्थागत और सामुदायिक तैयारी पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसमें चक्रवात-आश्रय स्थलों का निर्माण एक प्रमुख उपाय बना।
  • आपदा-जोखिम न्यूनीकरण के लिए भारत सेंडाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework, 2015-2030) का अनुसरण करता है, जो रोकथाम, तैयारी और समुदाय की भागीदारी पर बल देता है।

चक्रवात क्या है?

  • चक्रवात निम्न वायुदाब वाला एक विशाल वायुमंडलीय तंत्र है, जो गर्म समुद्री सतह (सामान्यतः 26-27 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान) पर बनता है और तीव्र पवनों व भारी वर्षा से जुड़ा होता है।
  • उत्तरी गोलार्ध में चक्रवात कोरिओलिस बल (Coriolis Force) के प्रभाव से वामावर्त (Anticlockwise) दिशा में घूमता है।
  • IMD पवन-गति के आधार पर चक्रवात को वर्गीकृत करता है: चक्रवाती तूफान, गंभीर चक्रवाती तूफान, अति गंभीर चक्रवाती तूफान, अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान और सुपर चक्रवाती तूफान।
  • तूफानी लहर (Storm Surge) समुद्र के जल का असामान्य रूप से ऊपर उठकर तटीय क्षेत्र में प्रवेश करना है, जो चक्रवात से होने वाली जान-माल की हानि का सबसे बड़ा कारण हो सकता है।
  • स्थलपात (Landfall) वह क्षण है जब चक्रवात समुद्र से तट को पार करता है; इसके बाद भी तेज़ पवनें और वर्षा कुछ समय तक जारी रह सकती हैं।
  • आपदा प्रबंधन के तीन चरण माने जाते हैं: आपदा-पूर्व (रोकथाम, तैयारी, चेतावनी), आपदा के दौरान (प्रतिक्रिया और बचाव) तथा आपदा-पश्चात (राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण)।
  • पूर्व-चेतावनी प्रणाली की प्रभावशीलता इस पर निर्भर करती है कि चेतावनी समय पर नीचे तक पहुँचे और लोग उसके अनुरूप कार्य करें; इसलिए बचाव में निकासी, सुरक्षित आश्रय और जन-जागरूकता की भूमिका केंद्रीय होती है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
नियंत्रण कक्ष (Control Room) की स्थापना सभी प्रभावित जिलों में जिलाधिकारी कार्यालयों और विद्युत वितरण निगम में हेल्पलाइन नंबरों के साथ कक्ष बनाए गए, ताकि सूचना का प्रवाह और आपातकालीन शिकायतों का निवारण एक केंद्र से हो सके।
पूर्व-चेतावनी और सार्वजनिक अपील जनता से नदी, नहर और तटबंधों पर न जाने तथा जर्जर भवनों, पेड़ों, बिजली के खंभों और होर्डिंग के नीचे शरण न लेने की अपील की गई है। यह आपदा के समय जनहानि कम करने का प्रत्यक्ष उपाय है।
संवेदनशील क्षेत्रों से स्थानांतरण तहसीलदारों को निचले और असुरक्षित इलाकों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने का निर्देश दिया गया, जो आपदा प्रबंधन की निवारक रणनीति का मूल तत्व है।
विद्युत आपूर्ति की सुरक्षा विद्युत कर्मचारियों और अधिकारियों की छुट्टियाँ रद्द की गईं तथा लोगों को टूटी विद्युत तारों के संपर्क से बचने की चेतावनी दी गई। इससे क्षति के बाद आपूर्ति की शीघ्र बहाली संभव होती है।
सिंचाई संरचनाओं की सुरक्षा नहर और तालाब के बंधों (Canal and Tank Bunds) को क्षति से बचाने के निर्देश दिए गए, क्योंकि बंधों के टूटने से बाढ़ और जलभराव का खतरा बढ़ता है।
बहु-विभागीय समन्वय राजस्व, सिंचाई, ए.पी. ट्रांसको, चिकित्सा व स्वास्थ्य तथा अग्निशमन विभागों की संयुक्त समीक्षा से आपदा के समय विभागीय तालमेल सुनिश्चित होता है।

महत्व

मानव जीवन और सार्वजनिक सुरक्षा

  • चक्रवात जैसी आपदाओं में सबसे बड़ा लक्ष्य जीवन की रक्षा है। समय पर स्थानांतरण और चेतावनी इसका मुख्य साधन है।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित जीवन के अधिकार की व्यावहारिक अभिव्यक्ति आपदा के समय सुरक्षित आश्रय और सूचना की उपलब्धता में होती है।

प्रशासनिक और शासन-व्यवस्था

  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) के अंतर्गत जिला स्तर पर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का नेतृत्व जिलाधिकारी करते हैं, जिससे यह घटनाक्रम जिला प्रशासन की वैधानिक भूमिका को दर्शाता है।
  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority) द्वारा निर्धारित ढाँचे के अनुसार राज्य और जिला स्तर पर तैयारी का क्रम बनता है, जिसमें समीक्षा बैठकें और नियंत्रण कक्ष प्रमुख घटक हैं।

आर्थिक और अवसंरचनागत

  • विद्युत और सिंचाई अवसंरचना की सुरक्षा से कृषि, उद्योग और सेवाओं की निरंतरता बनी रहती है। इससे आपदा के आर्थिक नुकसान को सीमित किया जा सकता है।
  • चक्रवात के बाद पेयजल और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति से स्थानीय अर्थव्यवस्था और बाज़ार व्यवस्था पर दबाव कम होता है।

आपदा न्यूनीकरण की नीति-दृष्टि

  • आपदा के बाद राहत के स्थान पर पहले से तैयारी (Preparedness) और जोखिम न्यूनीकरण पर बल देना आधुनिक आपदा नीति की मूल सोच है।
  • सटीक मौसम चेतावनी और स्थानीय स्तर की कार्रवाई के बीच समन्वय से आपदा जोखिम प्रबंधन की प्रभावशीलता बढ़ती है।

चुनौतियाँ

1. पूर्वानुमान से जमीनी कार्रवाई तक का अंतर

  • चक्रवात की चेतावनी समय पर जारी होने के बावजूद उसे अंतिम नागरिक तक पहुँचाने में भाषा, संचार माध्यम और पहुँच की बाधाएँ आती हैं।
  • तटीय गाँवों में सूचना-प्रसार की विश्वसनीय व्यवस्था न होने से स्थानांतरण के निर्देश पूरी तरह लागू नहीं हो पाते।

2. जर्जर संरचनाओं में शरण की समस्या

  • जर्जर भवन, होर्डिंग और पेड़ों के नीचे शरण लेने की प्रवृत्ति जनहानि का बड़ा कारण बनती है, जिसके लिए जिला प्रशासन को सार्वजनिक अपील करनी पड़ती है।
  • सुरक्षित चक्रवात आश्रय स्थलों और आपदा-रोधी निर्माण मानकों की उपलब्धता पर्याप्त न होने से संवेदनशील समुदाय असुरक्षित रहते हैं।

3. नदी, नहर और तटबंधों की सुरक्षा

  • तेज़ वर्षा और तेज़ हवाओं में नहर और तालाब के बंध कमजोर हो सकते हैं, जिससे अचानक बाढ़ और बस्तियों में जलभराव का खतरा होता है।
  • बंधों के रख-रखाव में विलंब और मानसून-पूर्व निरीक्षण की कमी जोखिम को बढ़ाती है।

4. विद्युत अवसंरचना की भंगुरता

  • चक्रवात में खंभे गिरने और तार टूटने से बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है, जिससे पेयजल पंपिंग, अस्पताल और संचार सेवाएँ भी प्रभावित होती हैं।
  • टूटे तारों के संपर्क से होने वाली दुर्घटनाएँ आपदा के बाद की जनहानि का अलग स्रोत बनती हैं।

5. बहु-विभागीय समन्वय की चुनौती

  • राजस्व, सिंचाई, विद्युत, स्वास्थ्य और अग्निशमन विभागों के बीच भूमिकाओं का स्पष्ट बँटवारा और त्वरित निर्णय आवश्यक होता है।
  • विभागीय सीमाओं के कारण सूचना और संसाधनों के आदान-प्रदान में विलंब होने की आशंका रहती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
सूचना का अंतिम छोर तक पहुँचना दूरस्थ और तटीय गाँवों में चेतावनी समय पर और समझने योग्य रूप में न पहुँचने की आशंका।
असुरक्षित आश्रय जर्जर भवन, पेड़ और बिजली के खंभे के नीचे शरण लेने से जनहानि का खतरा।
तटबंधों की कमजोरी नहर और तालाब के बंधों के टूटने से बाढ़ और फसल व संपत्ति की क्षति।
बिजली आपूर्ति में बाधा गिरे खंभे और टूटे तार पेयजल, अस्पताल और संचार सेवाओं को प्रभावित कर सकते हैं।
कर्मचारियों की उपलब्धता छुट्टियाँ रद्द होने के बावजूद क्षेत्र में तत्काल उपलब्धता और कार्य-क्षमता सुनिश्चित करना कठिन।
राहत आपूर्ति पेयजल और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में विलंब से आपदा के बाद का संकट गहराता है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय चक्रवात जोखिम न्यूनीकरण परियोजना (National Cyclone Risk Mitigation Project)

आगे की राह

  • संवेदनशील तटीय गाँवों तक चेतावनी पहुँचाने के लिए स्थानीय भाषा में संदेश, सामुदायिक रेडियो और ग्राम स्तर के स्वयंसेवकों का उपयोग किया जाए।
  • नियंत्रण कक्षों को चक्रवात की पूरी अवधि में सक्रिय रखा जाए और उनके हेल्पलाइन नंबरों का व्यापक प्रचार हो।
  • चक्रवात-रोधी आश्रय स्थलों की पहचान, उनका रख-रखाव और आवश्यक सुविधाओं (पेयजल, शौचालय, चिकित्सा) की व्यवस्था पूर्व में सुनिश्चित की जाए।
  • नहर और तालाब के बंधों का मानसून-पूर्व निरीक्षण और मरम्मत प्राथमिकता के आधार पर की जाए।
  • बिजली आपूर्ति के लिए आपातकालीन दल, आवश्यक सामग्री और पुनर्बहाली की योजना पहले से तैयार रखी जाए।
  • जर्जर भवनों और होर्डिंग की पहचान कर उन्हें हटाने या सुरक्षित करने का अभियान चलाया जाए।
  • राजस्व, सिंचाई, विद्युत, स्वास्थ्य और अग्निशमन विभागों के बीच स्पष्ट भूमिका-विभाजन और संयुक्त अभ्यास (Mock Drill) नियमित किए जाएँ।
  • आपदा के बाद क्षति-आकलन और राहत वितरण में पारदर्शिता बनाए रखी जाए, ताकि संवेदनशील परिवारों तक सहायता समय पर पहुँचे।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

गंभीर चक्रवाती तूफ़ान (Severe Cyclonic Storm) · आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) · ज़िला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (District Disaster Management Authority) · आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) · पूर्व चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) · भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) · राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority) · सेंडाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework for Disaster Risk Reduction) · चक्रवात आश्रय स्थल (Cyclone Shelters) · सामुदायिक सहभागिता (Community Participation) · आवश्यक सेवाओं की निरंतरता (Continuity of Essential Services) · त्रि-स्तरीय आपदा प्रबंधन ढाँचा (Three-tier Disaster Management Structure)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21 — जीवन और सुरक्षा का अधिकार, आश्रय और चेतावनी से संबंध
  • अनुच्छेद 47 — लोक स्वास्थ्य और पेयजल व्यवस्था से संबंध

अवधारणा प्रवाह

भारतीय मौसम विभाग (India Meteorological Department) द्वारा गंभीर चक्रवात की चेतावनी जारी  →  राज्य सरकार और जिला प्रशासन तक सूचना का प्रसार, जिलाधिकारी द्वारा तैयारी की समीक्षा  →  जिला और मंडल स्तर पर नियंत्रण कक्षों की स्थापना तथा कर्मचारियों की छुट्टियाँ रद्द  →  संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों का सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरण और राहत सामग्री की व्यवस्था  →  जनता को नदी, नहर, तटबंध और जर्जर संरचनाओं से दूर रहने की सार्वजनिक अपील  →  चक्रवात के दौरान और बाद में विद्युत, सिंचाई और स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा व बहाली  →  क्षति-आकलन, राहत वितरण और भविष्य के लिए आपदा-तैयारी की समीक्षा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा चक्रवातों के वर्गीकरण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गंभीर चक्रवाती तूफ़ान (Severe Cyclonic Storm) में निरंतर पवन की गति 89 से 117 किलोमीटर प्रति घंटा होती है।
2. अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफ़ान (Very Severe Cyclonic Storm) की पवन गति गंभीर चक्रवाती तूफ़ान से अधिक, किंतु अति प्रचंड चक्रवाती तूफ़ान (Extremely Severe Cyclonic Storm) से कम होती है।
3. चक्रवाती तूफ़ान (Cyclonic Storm) में निरंतर पवन की गति 89 से 117 किलोमीटर प्रति घंटा होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है; IMD के अनुसार गंभीर चक्रवाती तूफ़ान की पवन गति 89 से 117 किमी/घंटा है। कथन 2 सही है, क्योंकि अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफ़ान की गति लगभग 118 से 166 किमी/घंटा होती है, जो अति प्रचंड श्रेणी (167 से 221 किमी/घंटा) से नीचे है। कथन 3 गलत है, क्योंकि 89 से 117 किमी/घंटा का मान गंभीर चक्रवाती तूफ़ान का है; चक्रवाती तूफ़ान की गति 62 से 88 किमी/घंटा होती है।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों (A) और (R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): चक्रवात की आशंका होने पर ज़िला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण संवेदनशील क्षेत्रों की आबादी को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के निर्देश दे सकता है।
कारण (R): आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत ज़िला स्तर पर आपदा प्रबंधन योजना तैयार करना और आपदा की स्थिति में बचाव तथा राहत कार्यों का समन्वय करना ज़िला प्राधिकरण का दायित्व है।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही विकल्प चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, किंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत ज़िला प्राधिकरण आपदा प्रबंधन योजना बनाता है और आपदा के समय निकासी, बचाव एवं राहत का समन्वय करता है। यही कानूनी दायित्व निकासी संबंधी निर्देशों का आधार बनता है, इसलिए कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है।

Q3. निम्नलिखित सूचियों का सही मिलान कीजिए:
सूची I (संस्था/पहल)
A. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)
B. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD)
C. SACHET
D. राष्ट्रीय चक्रवात जोखिम शमन परियोजना (NCRMP)

सूची II (विशेषता)
1. चक्रवात और मौसम संबंधी पूर्वानुमान जारी करने वाला पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन संस्थान
2. प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाला आपदा प्रबंधन का शीर्ष निकाय
3. आपदा संबंधी सतर्कता संदेश प्रसारित करने का राष्ट्रीय मंच
4. तटीय राज्यों में चक्रवात-जोखिम शमन हेतु बहुराज्यीय परियोजना

सही कूट चुनिए:

  1. A-2, B-1, C-3, D-4
  2. A-1, B-2, C-4, D-3
  3. A-2, B-3, C-1, D-4
  4. A-3, B-1, C-2, D-4

उत्तर: A-2, B-1, C-3, D-4 — NDMA की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं (A-2)। IMD चक्रवात के पूर्वानुमान और चेतावनी जारी करता है और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन है (B-1)। SACHET NDMA का सतर्कता संदेश प्रसारित करने वाला मंच है (C-3)। NCRMP तटीय राज्यों में चक्रवात जोखिम शमन की बहुराज्यीय परियोजना है (D-4)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ गंभीर चक्रवाती तूफ़ान की आशंका में ज़िला प्रशासन द्वारा नियंत्रण कक्ष स्थापित करना, संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों को हटाना, बिजली आपूर्ति की सुरक्षा और जल-आपूर्ति का प्रबंध जैसे उपाय किए जाते हैं। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के त्रि-स्तरीय ढाँचे के संदर्भ में ज़िला स्तरीय आपदा प्रबंधन की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि चक्रवात के पश्चात आवश्यक सेवाओं की बहाली में किस प्रकार समन्वय संबंधी चुनौतियाँ सामने आती हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर के प्रमुख आयाम: (1) वैधानिक ढाँचा: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय (NDMA, प्रधानमंत्री अध्यक्ष), राज्य (SDMA, मुख्यमंत्री अध्यक्ष) और ज़िला (DDMA) स्तर का त्रि-स्तरीय ढाँचा; ज़िला योजना का दायित्व; राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन नीति, 2009 और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना का उल्लेख। (2) चक्रवात की पहचान और चेतावनी: IMD का वर्गीकरण (चक्रवाती तूफ़ान, गंभीर, अत्यंत गंभीर, अति प्रचंड), पूर्व चेतावनी प्रणाली, SACHET जैसे मंचों द्वारा सूचना का प्रसार और उसकी अंतिम-मील पहुँच की सीमाएँ। (3) ज़िला स्तर की क्रियान्वयन-भूमिका: समीक्षा बैठकें, तहसीलदारों द्वारा असुरक्षित क्षेत्रों से निकासी, नियंत्रण कक्ष और हेल्पलाइन, जर्जर भवनों, पेड़ों, बिजली के खंभों और होर्डिंगों के नीचे शरण न लेने की अपील, नदी-नहरों व तटबंधों से दूर रहने की सलाह। (4) केस-उदाहरण: ओडिशा का फैनी (2019) और फाइलिन (2013) में बड़े पैमाने पर निकासी का मॉडल, 1999 के सुपर साइक्लोन के बाद चक्रवात आश्रय स्थल और सामुदायिक तैयारी; आंध्र प्रदेश में हुदहुद (2014) का अनुभव। (5) संतुलित दृष्टिकोण: प्रशासनिक/संरचनात्मक तैयारी बनाम सामुदायिक भागीदारी; आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क (2015-2030) के चार प्राथमिकता क्षेत्र; अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन की सुरक्षा का राज्य दायित्व। (6) बहाली चुनौतियाँ: APCPDCL द्वारा अवकाश-निरस्तीकरण और टूटे बिजली तारों से सावधानी जैसे उपाय; विभागों (राजस्व, सिंचाई, परिवहन, स्वास्थ्य, अग्निशमन) के बीच समन्वय; बिजली, पेयजल और सड़क बहाली की प्राथमिकता-निर्धारण; राज्य-केंद्र सहायता तथा NDRF की भूमिका। (7) निष्कर्ष: प्रशासनिक सक्रियता के साथ संस्थागत निरंतरता, डेटा-आधारित पूर्वानुमान और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को मिलाकर ही निवारक आपदा प्रबंधन सफल होता है।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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