26 Oct सर्दियों से पहले दिल्ली में वाहनों से प्रदूषण कम करने के लिए NCR पुलिस की मदद
✎ वायु प्रदूषण एक अंतर-राज्यीय समस्या है, इसलिए एनसीआर में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) जैसी समन्वित व्यवस्थाएँ सहकारी संघवाद का व्यावहारिक उदाहरण हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण (वायु प्रदूषण नियंत्रण, वाहनीय उत्सर्जन, पर्यावरण संरक्षण से संबंधित संवैधानिक और वैधानिक प्रावधान) | GS Paper II — शासन (अंतर-राज्यीय समन्वय, सहकारी संघवाद, वैधानिक निकायों की भूमिका) | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा और शहरी प्रबंधन (यातायात प्रबंधन, सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रवर्तन)
- Prelims: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (National Capital Region – NCR) और इसके घटक जिले, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management in NCR and Adjoining Areas – CAQM), ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (Graded Response Action Plan – GRAP), प्रदूषण नियंत्रण में (Pollution Under Control – PUC) प्रमाण-पत्र, भारत स्टेज-VI (BS-VI) उत्सर्जन मानक, सीएनजी (Compressed Natural Gas – CNG) और विद्युत वाहन, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal – NGT), पूर्वी और पश्चिमी परिधीय एक्सप्रेसवे (Eastern and Western Peripheral Expressways)
- Essay: वायु प्रदूषण से निपटने में सहकारी संघवाद: जब प्रदूषण की सीमाएँ प्रशासनिक सीमाओं से परे हों, शहरी परिवहन, भीड़ और उत्सर्जन: सार्वजनिक परिवहन और सतत गतिशीलता की चुनौती
त्वरित पुनरावृत्ति: वायु प्रदूषण एक अंतर-राज्यीय समस्या है, इसलिए एनसीआर में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) जैसी समन्वित व्यवस्थाएँ सहकारी संघवाद का व्यावहारिक उदाहरण हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
दिल्ली सरकार ने आगामी सर्दी के मौसम में वायु प्रदूषण की स्थिति से निपटने के लिए नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत और बहादुरगढ़ जैसे निकटवर्ती एनसीआर शहरों के पुलिस और यातायात अधिकारियों के साथ समन्वय बढ़ाया है। एक आभासी बैठक में ट्रकों का सीमा पर मोड़ना, भीड़-प्रवण मार्गों पर यातायात कर्मियों की तैनाती, गैर-अनुपालक अंतर-राज्यीय बसों के प्रवेश पर रोक, और पीयूसी मानकों के सख़्त प्रवर्तन जैसे उपायों पर चर्चा हुई। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को रोकने, उन्हें जब्त करने और अधिकतम अनुमेय जुर्माना लगाने की बात भी कही गई। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अनुसार प्रतिदिन औसतन 10,000 से अधिक चालान यातायात और प्रदूषण उल्लंघनों के लिए जारी किए जा रहे हैं। यह कदम विंटर एक्शन प्लान और ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के अंतर्गत लागू होने वाले प्रतिबंधों की तैयारी का हिस्सा है।
पृष्ठभूमि
- एनसीआर की अवधारणा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड अधिनियम, 1985 के अंतर्गत दिल्ली और उससे सटे हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ क्षेत्रों को मिलाकर विकसित हुई। वायु प्रदूषण जैसी समस्याएँ इन प्रशासनिक सीमाओं से आगे फैलती हैं, इसलिए समन्वित नियंत्रण की आवश्यकता बनी।
- ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) वायु गुणवत्ता सूचकांक के बढ़ते स्तर के अनुसार चरणबद्ध प्रतिबंध लागू करने की व्यवस्था है। इसे पहले पर्यावरण प्रदूषण (नियंत्रण एवं शमन) प्राधिकरण (EPCA) के अंतर्गत लागू किया जाता था।
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की स्थापना वर्ष 2021 में की गई, जिसने एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता के समन्वित प्रबंधन की वैधानिक जिम्मेदारी ली। इसके पास राज्यों को निर्देश देने और उनके कार्यों की समीक्षा करने की शक्तियाँ हैं।
- सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने समय-समय पर पुराने डीज़ल और पेट्रोल वाहनों तथा प्रदूषणकारी सार्वजनिक परिवहन पर नियंत्रण संबंधी आदेश दिए हैं। दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन में सीएनजी अपनाने की प्रक्रिया भी इन्हीं न्यायिक हस्तक्षेपों से जुड़ी रही है।
- भारत में बीएस-VI उत्सर्जन मानक लागू होने के बाद वाहनों के उत्सर्जन मानकों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, परंतु भीड़, निष्क्रिय इंजन और पुराने वाहनों के कारण उत्सर्जन की समस्या बनी हुई है। इसी कारण यातायात प्रवाह सुधारना भी प्रदूषण नियंत्रण का एक उपाय माना जाता है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और वाहनीय प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्था क्या है?
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) एक वैधानिक निकाय है, जिसे वर्ष 2021 के अधिनियम के माध्यम से गठित किया गया। इसका कार्यक्षेत्र दिल्ली-एनसीआर और उससे सटे क्षेत्रों तक फैला है।
- आयोग का उद्देश्य एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए विभिन्न राज्य सरकारों और एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना है।
- ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) वायु गुणवत्ता के स्तर के आधार पर चरणबद्ध उपाय लागू करता है। खराब स्तर पर डीज़ल वाहनों, निर्माण गतिविधियों और ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध जैसे कदम इसमें शामिल हो सकते हैं।
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 केंद्र सरकार को पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यापक शक्तियाँ देता है, जिनके अंतर्गत वायु गुणवत्ता से जुड़े मानक और नियम बनाए जाते हैं।
- प्रदूषण नियंत्रण में (PUC) प्रमाण-पत्र यह सुनिश्चित करता है कि वाहन निर्धारित उत्सर्जन सीमा के भीतर चल रहा है। इसकी अवधि पूरी होने या नियमों का उल्लंघन होने पर प्रवर्तन कार्रवाई की जाती है।
- संविधान का अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार का निर्देश देता है, जबकि अनुच्छेद 51A(छ) (मूल कर्तव्य) नागरिकों पर प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और उसके संवर्धन का कर्तव्य डालता है। स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार अनुच्छेद 21 की व्याख्या से जुड़ा है।
- वायु प्रदूषण के मुख्य स्रोतों में वाहनीय उत्सर्जन, धूल, निर्माण गतिविधियाँ और पराली जलाना शामिल हैं। इसलिए नियंत्रण के लिए बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण आवश्यक माना जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्त्व |
|---|---|
| सीमा-क्षेत्र पर ट्रकों का मार्ग-परिवर्तन | दिल्ली-गामी न होने वाले ट्रकों को पूर्वी और पश्चिमी परिधीय एक्सप्रेसवे (Eastern and Western Peripheral Expressway) की ओर मोड़ा जाएगा, ताकि शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव और जाम घटे। |
| भीड़भाड़-प्रवण मार्गों पर यातायात कर्मी की तैनाती | जाम में लंबे समय तक रुकने से वाहन अधिक ईंधन जलाते हैं और उत्सर्जन बढ़ता है। यातायात प्रवाह सुधारने से प्रति वाहन उत्सर्जन में कमी आती है। |
| प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) मानकों का सख्त प्रवर्तन | नियमों का पालन न करने वाले वाहनों को रोकना, जब्त करना और अधिकतम निर्धारित जुर्माना लगाना, यह दर्शाता है कि वाहन-स्तरीय उत्सर्जन नियंत्रण पर प्रवर्तन पर ज़ोर है। |
| अंतर्राज्यीय बसों पर ईंधन और उत्सर्जन मानक | दिल्ली-एनसीआर में प्रवेश करने वाली बसों को CNG, विद्युत या BS-VI डीज़ल के अनुरूप होना होगा। इससे बाहरी स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण संभव होता है। |
| अंतर-क्षेत्रीय समन्वय | दिल्ली और नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत व बहादुरगढ़ के पुलिस अधिकारियों की संयुक्त बैठक से स्पष्ट है कि वाहनजनित प्रदूषण एक बहु-क्षेत्रीय समस्या है, जिसे एक अधिकार-क्षेत्र में हल नहीं किया जा सकता। |
| प्रतिदिन लगभग 10,000 से अधिक चालान | प्रवर्तन की व्यापकता दर्शाती है कि वाहन और प्रदूषण उल्लंघनों पर दंडात्मक उपाय ठोस रूप से लागू हो रहे हैं। यह निवारक प्रभाव के लिए आवश्यक है। |
महत्व
पर्यावरणीय
- वाहनजनित प्रदूषण दिल्ली-एनसीआर की शीतकालीन वायु गुणवत्ता में प्रमुख योगदानकर्ता है। सर्दियों में तापमान-प्रतिलोमन (temperature inversion) और कम हवा की गति से प्रदूषक जमीन के पास फँस जाते हैं, इसलिए उत्सर्जन घटाने के उपाय इसी समय सबसे प्रभावी होते हैं।
- जाम में धीमी गति से चलने वाले वाहन अधिक कण-पदार्थ और नाइट्रोजन ऑक्साइड छोड़ते हैं। यातायात प्रवाह सुधारना सीधे उत्सर्जन घटाने का साधन बनता है।
प्रशासनिक और शासन-संबंधी
- एक से अधिक राज्यों और पुलिस क्षेत्रों के बीच समन्वय से यह संस्थागत संदेश मिलता है कि एनसीआर स्तर पर साझा प्रवर्तन आवश्यक है।
- GRAP और शीतकालीन कार्य योजना जैसे पूर्व-निर्धारित ढाँचे आपात-प्रतिक्रिया के बजाय समय से पहले तैयारी (preparedness) को प्राथमिकता देते हैं।
आर्थिक और परिवहन-संबंधी
- सार्वजनिक परिवहन के प्रोत्साहन और अंतर्राज्यीय बसों पर मानक लागू होने से परिवहन-प्रणाली में स्वच्छ ईंधन (CNG और विद्युत) की ओर संक्रमण को गति मिलती है।
- ट्रकों का परिधीय मार्गों की ओर मोड़ा जाना शहरी सड़कों पर लॉजिस्टिक्स-लागत और समय-हानि में कमी ला सकता है।
नागरिक-स्वास्थ्य और सार्वजनिक जागरूकता
- बैनर, डिस्प्ले बोर्ड और मीडिया अभियान का उद्देश्य मोटरचालकों को पहले से सूचित करना और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्रोत्साहित करना है।
- जल छिड़काव, यांत्रिक सड़क-सफाई और धूल-नियंत्रण जैसे उपाय सड़क-धूल से होने वाले श्वसन-रोगों के जोखिम को कम करने में सहायक हैं।
चुनौतियाँ
1. प्रवर्तन क्षमता और मानव संसाधन की सीमा
- प्रतिदिन 10,000 से अधिक चालान जारी होना बड़े पैमाने के प्रवर्तन को दर्शाता है, परंतु इतने बड़े क्षेत्र में पर्याप्त यातायात कर्मी और तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराना कठिन है।
- सीमा-क्षेत्र पर चेकपोस्ट पर भीड़ बढ़ने से प्रवर्तन स्वयं नया जाम पैदा कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: पर्यावरण संरक्षण; GS-2: शासन में प्रवर्तन तंत्र की भूमिका
2. वाहन-आधारित उत्सर्जन का स्रोत-विविधता संबंधी प्रश्न
- दिल्ली में पंजीकृत और बाहर से आने वाले वाहनों की संख्या बड़ी है। केवल शहर की सीमा पर नियंत्रण से पूरे उत्सर्जन-भार का समाधान नहीं होता।
- पुराने डीज़ल और पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध का प्रभावी कार्यान्वयन आर्थिक रूप से कमज़ोर वाहन-मालिकों पर बोझ डाल सकता है, जिससे नीति की न्यायसंगतता पर प्रश्न उठते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-3: वायु प्रदूषण के स्रोत और नियंत्रण; GS-2: नीति-निर्माण में सामाजिक न्याय
3. बहु-राज्यीय समन्वय और अधिकार-क्षेत्र का विभाजन
- दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग परिवहन और पुलिस विभाग हैं। एक समान प्रवर्तन-मानक और समय-सारणी बनाना प्रशासनिक रूप से जटिल है।
- एनसीआर स्तर की नीतियों का पालन राज्य-स्तरीय आदेशों पर निर्भर करता है, इसलिए समन्वय औपचारिक बैठकों से आगे संस्थागत तंत्र पर टिका होना चाहिए।
यूपीएससी लिंक: GS-2: केंद्र-राज्य और अंतर-राज्यीय समन्वय; संघवाद की कार्यप्रणाली
4. सार्वजनिक परिवहन की पर्याप्तता और व्यवहार-परिवर्तन
- लोग निजी वाहन तभी छोड़ते हैं जब सार्वजनिक परिवहन विश्वसनीय, सुलभ और सस्ता हो। जागरूकता अभियान अकेले पर्याप्त नहीं होते।
- अंतर्राज्यीय बसों पर मानक लागू होने से कुछ क्षेत्रों में यात्री-सेवाएँ घट सकती हैं, जिससे यात्रियों की असुविधा बढ़ सकती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: परिवहन अवसंरचना और सतत विकास; GS-2: सार्वजनिक सेवाओं की पहुँच
5. न्यायिक आदेशों और कार्यकारी नीति का तालमेल
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन की बाध्यता रहती है, इसलिए प्रशासन को न्यायिक निर्देशों और स्थानीय परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।
- आदेशों की भाषा और समय-सीमा बदलने से नागरिकों में नियमों की स्पष्टता घट सकती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संबंध; न्यायिक समीक्षा की भूमिका
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता |
|---|---|
| प्रवर्तन का पैमाना | प्रतिदिन लाखों वाहनों की आवाजाही में चुनिंदा कर्मियों से निरंतर जाँच कठिन है; सीमा-चेकपोस्ट पर नया जाम बन सकता है। |
| पुराने वाहनों का बोझ | आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग पर प्रतिबंधों का असमान प्रभाव पड़ सकता है, जिससे सामाजिक न्याय का प्रश्न उठता है। |
| अंतर-राज्यीय समन्वय | विभिन्न राज्यों और पुलिस विभागों के बीच एकसमान मानक और समय-सारणी का अभाव प्रवर्तन को असंगत बना सकता है। |
| सार्वजनिक परिवहन की कमी | विश्वसनीय विकल्प के बिना निजी वाहन-उपयोग में कमी लाना कठिन है। |
| मौसमी प्रकृति की नीतियाँ | शीतकालीन उपाय केवल प्रदूषण के चरम काल में सक्रिय होते हैं; वर्षभर के स्रोत-नियंत्रण के बिना स्थायी सुधार सीमित रहता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- शीतकालीन कार्य योजना (Winter Action Plan)
- ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (Graded Response Action Plan – GRAP)
आगे की राह
- सीमा-क्षेत्र पर स्वचालित संख्या-पहचान कैमरे और डिजिटल निगरानी लगाकर मानव-आधारित जाँच पर निर्भरता घटाई जाए, ताकि चेकपोस्ट पर जाम न बढ़े।
- दिल्ली-एनसीआर के सभी राज्यों के लिए एकसमान प्रवर्तन-मानक, चालान-प्रक्रिया और कार्रवाई की समय-सारणी तय की जाए।
- पुराने वाहनों के प्रतिस्थापन के लिए स्वैच्छिक प्रोत्साहन और चरणबद्ध योजना बनाई जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग पर अचानक बोझ न पड़े।
- सार्वजनिक परिवहन की बसों की संख्या, आवृत्ति और विश्वसनीयता बढ़ाई जाए, ताकि निजी वाहन का विकल्प व्यावहारिक बने।
- PUC प्रणाली को डिजिटल रिकॉर्ड और वास्तविक-समय डेटा से जोड़ा जाए, ताकि प्रमाणपत्र की वैधता की जाँच सरल हो।
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के दिशा-निर्देशों के तहत विभिन्न राज्यों के बीच नियमित समीक्षा और डेटा-साझाकरण सुनिश्चित किया जाए।
- धूल-नियंत्रण, यांत्रिक सड़क-सफाई और जल छिड़काव को पूरे वर्ष लागू करने की योजना बने, केवल शीतकाल तक सीमित न रहे।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
वायु प्रदूषण · वाहनीय उत्सर्जन · राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र · पर्यावरण संरक्षण · समन्वित प्रयास · वायु गुणवत्ता प्रबंधन · ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान · सड़क परिवहन · सार्वजनिक परिवहन · प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र · सतत शहरी विकास · अंतर-राज्यीय सहयोग
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: स्वच्छ वायु को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना गया है
- अनुच्छेद 48A: राज्य पर्यावरण संरक्षण और सुधार का दायित्व
- अनुच्छेद 51A(g): नागरिकों का पर्यावरण-संरक्षण का मूल कर्तव्य
- सातवीं अनुसूची: मोटर वाहन और पर्यावरण विषयों पर समवर्ती सूची की भूमिका
अवधारणा प्रवाह
शीतकाल में तापमान-प्रतिलोमन और कम हवा की गति से प्रदूषक वायुमंडल में फँस जाते हैं → एनसीआर में वाहनों का भारी दबाव और सीमा-क्षेत्र पर जाम उत्सर्जन बढ़ाते हैं → यातायात कर्मी की तैनाती, ट्रकों का परिधीय मार्गों की ओर मोड़ना और बसों पर मानक लागू होते हैं → PUC प्रवर्तन, चालान और जब्ती से नियम-उल्लंघन पर दंडात्मक नियंत्रण होता है → GRAP और शीतकालीन कार्य योजना के तहत चरणबद्ध प्रतिबंध लागू होकर वायु गुणवत्ता में सुधार की अपेक्षा की जाती है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal) पर्यावरण संरक्षण और वनों तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों के प्रभावी और शीघ्र निपटान के लिए स्थापित किया गया है।
2. राष्ट्रीय हरित अधिकरण का निर्णय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत एक सिविल न्यायालय के निर्णय के समान बाध्यकारी होता है।
3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत की गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना पर्यावरण से संबंधित मामलों के त्वरित निपटान के लिए की गई थी। कथन 2 सही है। NGT के निर्णय सिविल न्यायालयों के समान बाध्यकारी होते हैं। कथन 3 गलत है। NGT की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत की गई थी, न कि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से ईंधन BS-VI उत्सर्जन मानकों का पालन करता है/करते हैं?
1. संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG)
2. बिजली
3. BS-VI-अनुपालक डीज़ल
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — दिए गए समाचार के अनुसार, दिल्ली-NCR में केवल बिजली, संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG) या BS-VI-अनुपालक डीज़ल पर चलने वाली बसों को ही अनुमति दी जाएगी। इसका अर्थ है कि ये सभी ईंधन BS-VI उत्सर्जन मानकों के अनुरूप माने जाते हैं।
Q3. अभिकथन (A): शीत ऋतु से पहले दिल्ली और NCR में वायु प्रदूषण एक गंभीर चिंता का विषय बन जाता है।
कारण (R): वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियाँ और पराली जलाना इस क्षेत्र में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है, क्योंकि शीत ऋतु में दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। कारण (R) भी सही है, क्योंकि वाहनों का उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियाँ और पराली जलाना इस क्षेत्र में वायु प्रदूषण के मुख्य स्रोत हैं। इसके अलावा, ये कारण सीधे तौर पर शीत ऋतु में प्रदूषण बढ़ने की व्याख्या करते हैं, क्योंकि ठंडी और स्थिर हवा प्रदूषकों को निचले वायुमंडल में फँसा लेती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए अंतर-राज्यीय सहयोग के महत्व का परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, वायु गुणवत्ता प्रबंधन में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) की भूमिका का भी मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या और इसके बहु-राज्यीय आयामों का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **अंतर-राज्यीय सहयोग का महत्व:**
* **प्रदूषण की प्रकृति:** वायु प्रदूषण भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, इसलिए प्रभावी नियंत्रण के लिए पड़ोसी राज्यों का सहयोग आवश्यक है।
* **वाहनीय उत्सर्जन:** NCR के विभिन्न शहरों से दिल्ली में वाहनों की आवाजाही और इसके लिए समन्वित यातायात प्रबंधन की आवश्यकता।
* **औद्योगिक और कृषि स्रोत:** पड़ोसी राज्यों में औद्योगिक उत्सर्जन और पराली जलाने जैसी गतिविधियों का दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर प्रभाव।
* **एकीकृत नीति निर्माण:** प्रदूषण नियंत्रण के लिए साझा रणनीतियाँ और प्रवर्तन तंत्र विकसित करना।
* **संसाधनों का साझाकरण:** प्रौद्योगिकी, विशेषज्ञता और मानव संसाधनों का प्रभावी उपयोग।
3. **ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) की भूमिका:**
* **परिचय:** GRAP क्या है (पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (EPCA) द्वारा तैयार और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित)।
* **उद्देश्य:** वायु गुणवत्ता के बिगड़ने पर आपातकालीन उपायों को लागू करना।
* **चरणबद्ध दृष्टिकोण:** वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के विभिन्न स्तरों के आधार पर प्रतिबंधों का क्रमिक प्रवर्तन (जैसे ‘खराब’, ‘बहुत खराब’, ‘गंभीर’, ‘अति गंभीर’ श्रेणियाँ)।
* **कार्यान्वयन:** निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध, डीज़ल जनरेटर सेट का उपयोग, ट्रकों का डायवर्जन, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना आदि।
* **प्रभावशीलता:** प्रदूषण के उच्च स्तरों के दौरान त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना, हालांकि इसकी सीमाओं पर भी चर्चा की जा सकती है (जैसे प्रवर्तन में चुनौतियाँ, दीर्घकालिक समाधानों की आवश्यकता)।
4. **निष्कर्ष:** वायु प्रदूषण एक जटिल समस्या है जिसके लिए अंतर-राज्यीय सहयोग और GRAP जैसे तंत्रों का प्रभावी कार्यान्वयन अनिवार्य है, साथ ही दीर्घकालिक और संरचनात्मक सुधारों पर भी ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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