कोयला मंत्रालय के सीपीएसईएस ने ‘स्वच्छता अभियान 6’ में रिकॉर्ड उपलब्धियां हासिल कीं

कोयला मंत्रालय के सीपीएसईएस ने 'स्वच्छता अभियान 6' में रिकॉर्ड उपलब्धियां हासिल कीं

कोयला मंत्रालय के सीपीएसईएस ने ‘स्वच्छता अभियान 6’ में रिकॉर्ड उपलब्धियां हासिल कीं

कोयला मंत्रालय के सीपीएसईएस ने 'स्वच्छता अभियान 6' में रिकॉर्ड उपलब्धियां हासिल कीं — विशेष स्वच्छता अभियान 6 के तहत उपलब्धियाँ
आरेख: विशेष स्वच्छता अभियान 6 के तहत उपलब्धियाँ

✎ CPSE के विशेष स्वच्छता अभियान में सफाई, कबाड़ निपटान और फाइल समीक्षा जैसे मापनीय लक्ष्य रखे जाते हैं, जबकि ई-कचरा प्रबंधन में विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) और ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 मुख्य आधार हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन (Governance): लोक उद्यमों का प्रबंधन, DPE की भूमिका और अभिलेख प्रबंधन  |  GS Paper III — पर्यावरण (Environment): ई-कचरा प्रबंधन, विस्तारित उत्पादक दायित्व और चक्रीय अर्थव्यवस्था  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (Economy): सार्वजनिक उपक्रमों की गैर-कर आय और अनुपयोगी परिसंपत्तियों का निपटान
  • Prelims: ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 (E-Waste (Management) Rules, 2022), विस्तारित उत्पादक दायित्व (Extended Producer Responsibility — EPR), CPSE (Central Public Sector Enterprises) और DPE की नोडल भूमिका, स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission), 2 अक्टूबर 2014, सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 (Public Records Act, 1993), चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy), कोयला क्षेत्र की सहायक कंपनियां: SECL (छत्तीसगढ़), WCL (नागपुर), CIL (कोलकाता), सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन और कार्यस्थल पर मासिक धर्म स्वच्छता
  • Essay: “सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता: आदत से संस्था तक” — अभियान-आधारित सुधार की सीमाएं और स्थायित्व की शर्तें, “कचरे से संपदा: ई-कचरा और अनुपयोगी सामग्री प्रबंधन में सार्वजनिक उपक्रमों की भूमिका”

त्वरित पुनरावृत्ति: CPSE के विशेष स्वच्छता अभियान में सफाई, कबाड़ निपटान और फाइल समीक्षा जैसे मापनीय लक्ष्य रखे जाते हैं, जबकि ई-कचरा प्रबंधन में विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) और ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 मुख्य आधार हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

कोयला मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले CPSE ने ‘विशेष स्वच्छता अभियान 6’ के दौरान उल्लेखनीय परिणाम दर्ज किए हैं। अभियान 31 अक्टूबर तक चला, और इसके आंकड़े 26 अक्टूबर 2026 को PIB द्वारा जारी विज्ञप्ति में सार्वजनिक किए गए। 1,565 स्थानों की सफाई का लक्ष्य था, जबकि 1,696 स्थानों की सफाई पूरी हुई। कुल 130.16 लाख वर्ग फुट क्षेत्र साफ़ हुआ, जो 101.80 लाख वर्ग फुट के निर्धारित लक्ष्य से अधिक है। 16,158 मीट्रिक टन कबाड़ का निपटान हुआ, जो 10,909 मीट्रिक टन के अनुमान से अधिक है, और इससे लगभग 53.94 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई। अभिलेख प्रबंधन के मोर्चे पर 78,635 भौतिक एवं ई-फाइलों की समीक्षा हुई, जिनमें से 70,093 फाइलें हटाई या समाप्त की गईं। इसके अलावा SECL मुख्यालय में ई-कचरा संग्रह हेतु रीसाइकल कबाड़ से बनी कचरा पेटी, CIL मुख्यालय कैंटीन का नवीनीकरण और ‘सिलेंट्रो’ नामकरण, WCL द्वारा जनजातीय छात्राओं के लिए शैक्षिक सहायता, बच्चों के लिए ‘कचरे से चमत्कार’ कार्यशालाएं तथा CIL मुख्यालय में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें जैसी पहलें भी इसी अभियान का हिस्सा रहीं। परीक्षा की दृष्टि से यह समाचार सार्वजनिक उपक्रमों में स्वच्छता को मापनीय लक्ष्यों के साथ संस्थागत बनाने के एक व्यावहारिक उदाहरण के रूप में महत्वपूर्ण है।

पृष्ठभूमि

  • स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को हुई। इसका उद्देश्य खुले में शौच से मुक्ति और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार था। इसके बाद स्वच्छता को केवल सफाई के बजाय व्यवहार परिवर्तन और प्रशासनिक संस्कृति से जोड़कर देखा जाने लगा।
  • DPE (लोक उद्यम विभाग) समय-समय पर CPSE में विशेष स्वच्छता अभियान चलाता है। ये अभियान एक निश्चित अवधि में स्पष्ट लक्ष्यों, जैसे क्षेत्र की सफाई, कबाड़ निपटान और फाइलों की समीक्षा, के साथ चलते हैं और उनकी प्रगति की निगरानी की जाती है।
  • भारत में ई-कचरा प्रबंधन के लिए ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 लागू हैं, जिनमें उत्पादकों पर विस्तारित उत्पादक दायित्व की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के अपशिष्ट का संग्रह, पृथक्करण और वैज्ञानिक निपटान सुनिश्चित करना है।
  • सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 सरकारी अभिलेखों के रखरखाव और उनके निपटान से संबंधित प्रक्रियाओं का आधार है। फाइलों की समीक्षा और निष्प्रयोज्य अभिलेखों को हटाना इन्हीं प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अनुरूप होता है।
  • कोयला क्षेत्र में खनन और परिचालन के कारण बड़ी मात्रा में पुराने उपकरण, स्क्रैप और अनुपयोगी सामग्री जमा होती है। इसका व्यवस्थित निपटान पर्यावरणीय दायित्व के साथ-साथ सार्वजनिक उपक्रमों के लिए राजस्व का स्रोत भी बनता है।

विशेष स्वच्छता अभियान क्या है?

  • यह DPE के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत CPSE में चलाया जाने वाला एक समयबद्ध अभियान है, जिसमें कार्यालय परिसरों, गोदामों और कार्यस्थलों की सफाई पर ज़ोर होता है।
  • इस अभियान की सफलता को मापने के लिए सामान्यतः तीन प्रकार के संकेतक रखे जाते हैं: साफ़ किया गया क्षेत्र, निपटाया गया कबाड़ और समीक्षित तथा निष्पादित फाइलें।
  • कबाड़ (स्क्रैप) के निपटान में सार्वजनिक उपक्रम अनुपयोगी सामग्री को नियमों के अनुसार नीलाम या बेचकर राजस्व प्राप्त करते हैं। इसे सरकारी खजाने में जाने वाली गैर-कर आय के रूप में देखा जाता है।
  • ई-कचरा वह इलेक्ट्रॉनिक और विद्युत उपकरणों का अपशिष्ट है जो उपयोग से बाहर हो गया हो। इसके पृथक्करण और निपटान के लिए ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के तहत उत्पादकों, उपभोक्ताओं और अधिकृत पुनर्चक्रकों की भूमिकाएं तय की गई हैं।
  • विस्तारित उत्पादक दायित्व का अर्थ है कि उत्पादक अपने उत्पाद के जीवनचक्र के अंत तक उसके अपशिष्ट के संग्रह और पुनर्चक्रण की जिम्मेदारी उठाएं। यह चक्रीय अर्थव्यवस्था की अवधारणा से जुड़ा है।
  • अभिलेखों की समीक्षा और अनुपयोगी फाइलों को हटाना सार्वजनिक अभिलेख नियमों के अनुरूप होना चाहिए, ताकि महत्वपूर्ण रिकॉर्ड सुरक्षित रहें और कार्यालय की कार्यक्षमता बढ़े।
  • इस तरह के अभियानों की स्थायी उपयोगिता तभी है जब वे अल्पकालिक सफाई से आगे बढ़कर नियमित प्रक्रियाओं, प्रशिक्षण और निगरानी तंत्र में बदल जाएं।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
विशेष स्वच्छता अभियान 6 का दायरा केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (CPSE) स्तर पर एक निश्चित अवधि (31 अक्टूबर तक) का केंद्रित अभियान, जिसमें कार्यस्थल की सफाई, ई-कचरा प्रबंधन और अभिलेख प्रबंधन एक साथ शामिल हैं।
लक्ष्य से अधिक उपलब्धि 1,565 स्थानों के लक्ष्य के मुकाबले 1,696 स्थानों की सफाई हुई; 101.80 लाख वर्ग फुट के लक्ष्य के मुकाबले 130.16 लाख वर्ग फुट क्षेत्र साफ हुआ। यह कार्य-निष्पादन के मापन में मात्रात्मक लक्ष्य-निर्धारण की उपयोगिता दर्शाता है।
कबाड़ निपटान से राजस्व 16,158 मीट्रिक टन कबाड़ (10,909 मीट्रिक टन के अनुमानित लक्ष्य से अधिक) का निपटान हुआ, जिससे लगभग 53.94 करोड़ रुपये की आय सरकारी खजाने में आई। कबाड़ को संसाधन के रूप में देखने का यह उदाहरण है।
संचिकाओं की समीक्षा और हटाना 59,593 संचिकाओं के लक्ष्य के मुकाबले 78,635 भौतिक और ई-संचिकाओं की समीक्षा हुई, और 70,093 संचिकाएं हटाई या समाप्त की गईं। इससे कार्यालय प्रक्रियाओं के सरलीकरण और अभिलेख प्रबंधन में सुधार का संकेत मिलता है।
ई-कचरा संग्रह हेतु नवाचार एसईसीएल (SECL) मुख्यालय में रीसाइकल किए गए कबाड़ से बनी कचरा पेटी से ई-कचरे का व्यवस्थित संग्रह और पृथक्करण संभव हुआ, जो ई-कचरा नियमों के अनुरूप निपटान की दिशा में कदम है।
कार्यस्थल कल्याण पहलें सीआईएल (CIL) मुख्यालय कैंटीन का आधुनिकीकरण, सैनिटरी नैपकिन बिक्री मशीनें और डब्ल्यूसीएल (WCL) द्वारा छात्राओं को शैक्षिक सहायता, कार्यस्थल की स्वच्छता को सामाजिक समावेशन और महिला-अनुकूल वातावरण से जोड़ती हैं।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • कबाड़ निपटान से लगभग 53.94 करोड़ रुपये की आय हुई, जो अनुत्पादक सार्वजनिक संपत्ति को राजस्व-स्रोत में बदलने का व्यावहारिक उदाहरण है।
  • परिसंपत्तियों के प्रबंधन से सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की परिचालन दक्षता और संसाधन-उपयोग में सुधार का संकेत मिलता है।
  • चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की अवधारणा के अनुरूप कबाड़ और ई-कचरे का पुन: उपयोग एवं पुनर्चक्रण संसाधन-दक्षता बढ़ाता है।

पर्यावरणीय महत्व

  • ई-कचरे का व्यवस्थित संग्रह, पृथक्करण और निपटान भूमि, जल और वायु प्रदूषण के जोखिम को कम करता है, क्योंकि ई-कचरे में सीसा और पारा जैसे विषैले तत्व होते हैं।
  • पर्यावरणीय दायित्व की भावना को बच्चों के स्तर तक ले जाने के लिए ‘कचरे से चमत्कार’ जैसी कार्यशालाएं व्यवहार-परिवर्तन में सहायक हैं।

प्रशासनिक महत्व

  • संचिकाओं की समीक्षा और डिजिटलीकरण से अभिलेख प्रबंधन सुदृढ़ होता है और निर्णय-प्रक्रिया तेज होती है।
  • अनावश्यक संचिकाओं को हटाने से भंडारण-स्थान और प्रशासनिक बोझ घटता है, जो सुशासन के सिद्धांतों के अनुरूप है।

सामाजिक और कार्यस्थल-कल्याण महत्व

  • मासिक धर्म स्वच्छता उत्पादों की उपलब्धता महिला कर्मचारियों की गरिमा और कार्यस्थल पर उनकी सहभागिता को बढ़ाती है।
  • जनजातीय और खनन क्षेत्रों की छात्राओं के लिए शैक्षिक सहायता सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के लक्ष्य से जुड़ती है।

चुनौतियाँ

1. ई-कचरे का अनौपचारिक प्रसंस्करण

  • ई-कचरे का बड़ा हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्र में असुरक्षित तरीकों से तोड़ा जाता है, जिससे श्रमिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर जोखिम बढ़ता है।
  • संस्थागत संग्रह के बावजूद औपचारिक पुनर्चक्रण तक पहुंच सीमित होने पर अपशिष्ट का रिसाव बना रहता है।
  • उत्पादकों की विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (Extended Producer Responsibility) का प्रभावी क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण है।

2. कबाड़ आय की अस्थिरता

  • कबाड़ से होने वाली आय धातु बाजार के मूल्य-उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती है, इसलिए यह स्थिर और पूर्वानुमेय स्रोत नहीं है।
  • एक बार के अभियान की आय को नियमित राजस्व मानना वित्तीय नियोजन में भ्रम पैदा कर सकता है।

3. अभियान-आधारित बनाम निरंतर व्यवस्था

  • विशेष अभियानों से अल्पकालिक उपलब्धियां दिखती हैं, पर स्वच्छता की आदतों को संस्थागत बनाने के लिए निरंतर निगरानी आवश्यक है।
  • अभियान समाप्त होने के बाद कार्य-निष्पादन में गिरावट का खतरा बना रहता है।

4. उपलब्धि-मापन और दस्तावेजीकरण

  • स्थानों, वर्ग फुट, मीट्रिक टन और संचिकाओं की संख्या जैसे संकेतक मात्रा बताते हैं, पर गुणवत्ता और दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन अलग से करना होगा।
  • संचिकाओं को हटाने या समाप्त करने की प्रक्रिया में अभिलेख-संरक्षण के नियमों और पारदर्शिता का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।

5. सार्वजनिक उपक्रमों में संसाधन-संतुलन

  • कार्यस्थल-कल्याण पहलों (कैंटीन, सुविधाएं) और मुख्य उत्पादन-लक्ष्यों के बीच संसाधनों का संतुलन बनाना प्रबंधन की चुनौती है।
  • कर्मचारियों और आगंतुकों की सुविधा के साथ लागत-प्रभावशीलता का मूल्यांकन आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
ई-कचरे का असुरक्षित निपटान अनौपचारिक क्षेत्र में पृथक्करण से श्रमिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर जोखिम बना रहता है।
कबाड़ से आय की अनिश्चितता बाजार मूल्य पर निर्भरता के कारण आय स्थिर नहीं रहती और इसे नियमित राजस्व मानना उचित नहीं।
अभियान की निरंतरता समाप्ति के बाद स्वच्छता और अभिलेख-प्रबंधन के मानक गिरने का खतरा रहता है।
उपलब्धि का गुणात्मक मूल्यांकन केवल स्थानों, क्षेत्र और मात्रा के आंकड़े गुणवत्ता और दीर्घकालिक प्रभाव को नहीं दर्शाते।
संचिका-निस्तारण में पारदर्शिता बड़ी संख्या में संचिकाएं हटाने के लिए अभिलेख-संरक्षण और स्पष्ट प्रक्रिया आवश्यक है।
संसाधन-आवंटन का संतुलन कल्याणकारी सुविधाओं और उत्पादन-लक्ष्यों के बीच लागत-लाभ का संतुलन बनाना चुनौती है।

आगे की राह

  • ई-कचरे के संग्रह को उत्पादकों की विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी के ढांचे से जोड़कर अधिकृत पुनर्चक्रकों तक पहुंचाया जाए।
  • कबाड़ निपटान से प्राप्त आय का वार्षिक लेखा-जोखा और बाजार-मूल्य का पारदर्शी रिकॉर्ड रखा जाए।
  • विशेष अभियानों को वार्षिक स्वच्छता-कैलेंडर के रूप में नियमित किया जाए, ताकि उपलब्धियां स्थायी व्यवहार में बदलें।
  • उपलब्धि-संकेतकों में मात्रा के साथ गुणवत्ता, कर्मचारी-संतुष्टि और पर्यावरणीय प्रभाव को भी शामिल किया जाए।
  • संचिका-निस्तारण के लिए स्पष्ट मानक प्रक्रिया बनाई जाए, जिसमें अभिलेख-संरक्षण और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति अनिवार्य हो।
  • ई-कचरा पृथक्करण के बारे में कर्मचारियों और आगंतुकों के लिए निरंतर जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएं।
  • सफल मॉडलों (जैसे रीसाइकल कबाड़ से बनी कचरा पेटी) का अन्य CPSE और कार्यालयों में मानकीकृत प्रसार हो।
  • कल्याणकारी पहलों का लागत-लाभ मूल्यांकन कर उन्हें उत्पादन-लक्ष्यों के साथ संतुलित रूप से आगे बढ़ाया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (Central Public Sector Enterprises – CPSEs) · ई-कचरा प्रबंधन (E-Waste Management) · ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 · विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility – EPR) · स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) · संस्थागत स्वच्छता और सार्वजनिक प्रशासन · अभिलेख प्रबंधन और डिजिटलीकरण (Record Management and Digitisation) · अनुच्छेद 48क और मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51क(छ)) · चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) · कार्यस्थल पर मासिक धर्म स्वच्छता और लैंगिक समावेशन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48A (पर्यावरण संरक्षण का राज्य का नीति-निर्देशक दायित्व)
  • अनुच्छेद 51A(छ) (प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन का मौलिक कर्तव्य)

अवधारणा प्रवाह

विशेष स्वच्छता अभियान 6 के तहत CPSE ने निर्धारित अवधि में कार्यस्थलों और अभिलेखों की सफाई का केंद्रित कार्य शुरू किया।  →  कबाड़ और ई-कचरे का व्यवस्थित संग्रह, पृथक्करण और निपटान हुआ।  →  कबाड़ के निपटान से सरकारी खजाने में आय आई और कार्यस्थल पर जगह खाली हुई।  →  संचिकाओं की समीक्षा और डिजिटलीकरण से प्रशासनिक कार्यक्षमता और अभिलेख-प्रबंधन में सुधार हुआ।  →  स्वच्छ और सुविधाजनक कार्यस्थल से कर्मचारियों की कार्य-उत्पादकता और सामाजिक समावेशन को बल मिला।  →  अभियान के परिणाम लक्ष्य से अधिक रहे, जिससे संस्थागत स्वच्छता और सुशासन के नए मानक स्थापित होने की संभावना बनी।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेसल कन्वेंशन (Basel Convention) खतरनाक अपशिष्टों, जिनमें कुछ प्रकार का ई-कचरा भी शामिल है, के सीमापारीय आवागमन और उनके निपटान को नियंत्रित करता है।
2. ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 में उत्पादकों पर विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) का प्रावधान लागू होता है।
3. ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 केवल सरकारी कार्यालयों के कचरे पर लागू होते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: भारत बेसल कन्वेंशन का पक्षकार है और यह खतरनाक अपशिष्टों के सीमापारीय आवागमन को नियंत्रित करता है। कथन 2 सही है: ई-कचरा नियमों में उत्पादकों के लिए EPR का ढांचा है, जिसके अंतर्गत लक्ष्य-आधारित संग्रह और पुनर्चक्रण की जिम्मेदारी तय की जाती है। कथन 3 गलत है: ये नियम उपभोक्ताओं, उत्पादकों, डिस्मेंटलर्स और रीसाइक्लर्स सहित व्यापक व्यवस्था पर लागू होते हैं, केवल सरकारी कार्यालयों पर नहीं।

Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक को संबंधित मंत्रालय से सुमेलित कीजिए:

सूची-I (कार्यक्रम/अधिनियम)
A. ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022
B. स्वच्छ भारत मिशन (शहरी)
C. कोल इंडिया लिमिटेड

सूची-II (मंत्रालय)
1. आवास और शहरी कार्य मंत्रालय
2. कोयला मंत्रालय
3. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय

सही सुमेलन चुनिए:

  1. A-1, B-2, C-3
  2. A-3, B-1, C-2
  3. A-2, B-3, C-1
  4. A-3, B-2, C-1

उत्तर: A-3, B-1, C-2 — ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 का प्रशासनिक मंत्रालय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (A-3) है। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के अंतर्गत आता है (B-1)। कोल इंडिया लिमिटेड कोयला मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है (C-2)।

Q3. कथन (A): संविधान का अनुच्छेद 46 राज्य को अनुसूचित जनजातियों के शैक्षिक हितों को विशेष रूप से बढ़ावा देने का निर्देश देता है।

कारण (R): नीति-निदेशक तत्वों को किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (a) (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (b) (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (c) (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
  4. (d) (A) गलत है, किंतु (R) सही है।

उत्तर: (b) (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है। — अनुच्छेद 46 नीति-निदेशक तत्वों (भाग IV) में आता है, इसलिए कथन (A) सही है। अनुच्छेद 37 के अनुसार नीति-निदेशक तत्व न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, अतः (R) भी सही है। किंतु न्या-प्रवर्तनीयता का अभाव अनुच्छेद 46 के लक्ष्य की व्याख्या नहीं करता, इसलिए (R) (A) की सही व्याख्या नहीं है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा चलाए गए स्वच्छता अभियानों में स्थान के प्रबंधन, ई-कचरे के पृथक्करण और अभिलेखों के डिजिटलीकरण को शामिल किया गया है। क्या इस प्रकार के अभियान सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को केवल एक मौसमी गतिविधि के बजाय एक संस्थागत व्यवस्था बना सकते हैं? ई-कचरा प्रबंधन के नियामक ढांचे के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि यदि ऐसे अभियान केवल आंकड़ों की उपलब्धि (जैसे कबाड़ निपटान से आय) पर केंद्रित हो जाएं, तो सार्वजनिक प्रशासन और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व पर क्या प्रभाव पड़ेगा। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर-कंकाल (Model-Answer Skeleton):

1. भूमिका: केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (CPSEs) कोयला मंत्रालय के अंतर्गत; ‘विशेष स्वच्छता अभियान 6’ में लक्ष्य से अधिक सफाई (130.16 लाख वर्ग फुट बनाम 101.80 लाख वर्ग फुट लक्ष्य), 16,158 मीट्रिक टन कबाड़ निपटान (लक्ष्य 10,909 मीट्रिक टन), लगभग 53.94 करोड़ रुपये की आय और 78,635 फाइलों की समीक्षा तथा 70,093 फाइलों का हटाया/समाप्त किया जाना।

2. संस्थागतकरण का पक्ष (हाँ):
– स्वच्छता को निरंतर प्रक्रिया बनाने हेतु स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) का ढांचा और सतत निगरानी तंत्र।
– ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 में विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) का प्रावधान; संग्रह-पुनर्चक्रण लक्ष्य और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की निगरानी।
– बेसल कन्वेंशन के अंतर्गत खतरनाक अपशिष्टों के नियंत्रित निपटान की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता।
– लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 और डिजिटल अभिलेखन से पारदर्शिता तथा प्रशासनिक दक्षता।
– संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 48क (पर्यावरण संरक्षण का राज्य का दायित्व) और मौलिक कर्तव्य अनुच्छेद 51क(छ) (प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा)।
– पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय Almitra H. Patel बनाम भारत संघ (2000) — अपशिष्ट प्रबंधन पर न्यायिक दृष्टि।

3. सीमाएं और संशय:
– स्वच्छता का मापन मात्रात्मक लक्ष्यों (स्थान, टन, फाइल) पर केंद्रित होने से गुणवत्तापूर्ण पृथक्करण और दीर्घकालिक प्रभाव की उपेक्षा का जोखिम।
– कबाड़ से आय को प्रोत्साहन बनाना: इससे अपशिष्ट उत्पादन कम करने (रोकथाम, सिद्धांत ‘कम करो, पुनः उपयोग करो, पुनर्चक्रण करो’) की प्राथमिकता कमजोर हो सकती है।
– असंगठित क्षेत्र के अपशिष्ट बीनने वालों की भूमिका और उनकी आजीविका का समावेशन।
– चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की अवधारणा के संदर्भ में केवल निपटान नहीं, डिज़ाइन स्तर पर सुधार की आवश्यकता।

4. संतुलित निष्कर्ष: संस्थागतकरण के लिए मात्रात्मक उपलब्धि के साथ गुणात्मक संकेतकों (पृथक्करण की शुद्धता, EPR अनुपालन, पर्यावरणीय लेखापरीक्षा) को अपनाना; दूसरे पक्ष के रूप में, प्रशासनिक सुधार (ई-ऑफिस, अभिलेख प्रबंधन) को स्वच्छता के साथ जोड़ना उचित, पर पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को वित्तीय लाभ से ऊपर रखना अनिवार्य।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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