रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह फिलीपींस में एडीएमएम-प्लस बैठक में होंगे शामिल

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह फिलीपींस में एडीएमएम-प्लस बैठक में होंगे शामिल

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह फिलीपींस में एडीएमएम-प्लस बैठक में होंगे शामिल

✎ ADMM-Plus आसियान के 11 सदस्यों और 8 संवाद साझेदारों (भारत सहित) का रक्षा-सहयोग मंच है, जिसकी पहली बैठक वर्ष 2010 में हनोई में हुई और जिसमें भारत की भागीदारी एक्ट ईस्ट नीति तथा हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण का हिस्सा है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (भारत और पड़ोस; भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया; क्षेत्रीय संगठन)  |  सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — आंतरिक सुरक्षा (सीमा पार आतंकवाद का प्रतिरोध; समुद्री सुरक्षा)
  • Essay: क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद बनाम सामूहिक सुरक्षा: बहुपक्षीय रक्षा मंच किस सीमा तक प्रभावी हैं?, हिंद-प्रशांत में भारत की भूमिका: नीति की निरंतरता, साझेदारी और सामरिक स्वायत्तता

त्वरित पुनरावृत्ति: ADMM-Plus आसियान के 11 सदस्यों और 8 संवाद साझेदारों (भारत सहित) का रक्षा-सहयोग मंच है, जिसकी पहली बैठक वर्ष 2010 में हनोई में हुई और जिसमें भारत की भागीदारी एक्ट ईस्ट नीति तथा हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण का हिस्सा है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह फिलीपींस के सेबू (Cebu) में 28 से 29 अक्टूबर तक आयोजित 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) में भाग लेने के लिए रवाना हुए। वे इस दो दिवसीय बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे और साझा क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर संबोधन देंगे। मंत्रालय के अनुसार बैठक के दौरान कई द्विपक्षीय वार्ताएँ भी प्रस्तावित हैं, जिनमें मौजूदा रक्षा संबंधों की समीक्षा और नई सामरिक साझेदारी के विकल्प तलाशे जाएँगे। फिलीपींस वर्ष 2026 में ADMM-Plus की अध्यक्षता कर रहा है, इसलिए यह बैठक उसी की मेज़बानी में हो रही है। यह घटनाक्रम भारत की एक्ट ईस्ट नीति के अंतर्गत दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ रक्षा और रणनीतिक संवाद की निरंतरता को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • आसियान की स्थापना 1967 में हुई थी। बाद में आसियान चार्टर (2007) से इसे औपचारिक कानूनी व्यक्तित्व प्राप्त हुआ, जो 2008 से प्रभावी है।
  • आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM) की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा विषयों पर विश्वास-निर्माण और परामर्श को संस्थागत रूप देना था।
  • ADMM-Plus की स्थापना वर्ष 2010 में हुई, जिसमें आसियान सदस्यों के साथ आठ संवाद साझेदार जोड़े गए। वर्ष 2017 से यह बैठक वार्षिक रूप से आयोजित हो रही है।
  • भारत वर्ष 1992 में आसियान का संवाद साझेदार बना। इसके बाद से भारत की आसियान नीति राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा आयामों में विस्तृत होती गई है।
  • आसियान की अध्यक्षता प्रत्येक वर्ष सदस्य देशों के बीच बारी-बारी से बदलती है। वर्ष 2026 की अध्यक्षता फिलीपींस के पास है।

ADMM-Plus क्या है?

  • ADMM-Plus आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM) का विस्तारित स्वरूप है, जिसमें आसियान के सभी सदस्यों के साथ आठ संवाद साझेदार सम्मिलित होते हैं।
  • इसमें आसियान के 11 सदस्य देश हैं: ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, तिमोर-लेस्ते और वियतनाम।
  • आठ संवाद साझेदार हैं: भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड।
  • इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर परामर्श, विश्वास-निर्माण और व्यावहारिक सैन्य सहयोग को बढ़ावा देना है।
  • इसके अंतर्गत विशेषज्ञ कार्य समूह (Experts Working Group) कार्य करते हैं, जो आतंकवाद-रोधी सहयोग, समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता तथा आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर केंद्रित हैं।
  • आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्य समूह की सह-अध्यक्षता भारत और मलेशिया कर रहे हैं (2024–2027 चक्र)।
  • भारत के लिए यह मंच आसियान केंद्रीयता के सिद्धांत के अनुरूप हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक साझेदारी और शांति-स्थिरता के लक्ष्य को आगे बढ़ाने का साधन है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
ADMM-Plus की संरचना 11 ASEAN सदस्य राष्ट्रों और 8 संवाद साझेदारों (भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड) के बीच रक्षा सहयोग का मंच; पहली बैठक 2010 में हनोई में हुई
ADMM की प्रकृति दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (ASEAN) का सर्वोच्च रक्षा परामर्शी और सहयोग तंत्र
भारत की स्थिति 1992 से ASEAN का संवाद साझेदार; भारत की नीति का केंद्र एक्ट ईस्ट नीति (Act East Policy) है
2026 की अध्यक्षता फिलीपींस ADMM-Plus की अध्यक्षता कर रहा है; 28-29 अक्टूबर को सेबू में 13वीं बैठक निर्धारित है
आतंकवाद-रोधी सहयोग भारत और मलेशिया 2024-2027 चक्र के लिए ADMM-Plus के आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्यसमूह (Experts Working Group on Counter-Terrorism) के सह-अध्यक्ष हैं

महत्व

सामरिक (Strategic)

  • हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समुद्री सुरक्षा पर साझा संवाद का अवसर मिलता है
  • ASEAN केंद्रीयता (ASEAN Centrality) के सिद्धांत के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई जाती है
  • भारत की सामरिक साझेदारियों की समीक्षा और नए सहयोग क्षेत्रों की खोज संभव होती है

कूटनीतिक (Diplomatic)

  • बहुपक्षीय मंच पर भारत की सक्रिय भागीदारी उसकी विदेश नीति की निरंतरता को दर्शाती है
  • सदस्य और संवाद साझेदार देशों के रक्षा मंत्रियों से द्विपक्षीय वार्ताएँ आपसी विश्वास बढ़ाने का माध्यम बनती हैं

सुरक्षा सहयोग (Security Cooperation)

  • आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्यसमूह के सह-अध्यक्ष के रूप में भारत की भूमिका क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी प्रयासों में उसके योगदान को रेखांकित करती है
  • साझा सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श से क्षमता निर्माण और सूचना-साझाकरण के अवसर खुलते हैं

चुनौतियाँ

1. परामर्शी प्रकृति की सीमाएँ

  • ADMM-Plus एक परामर्शी और सहयोगात्मक मंच है; इसके निर्णय बाध्यकारी संधि का रूप नहीं लेते
  • सहमति-आधारित कार्यप्रणाली के कारण ठोस परिणाम धीमे और सीमित हो सकते हैं

2. महाशक्तियों के हितों में प्रतिस्पर्धा

  • संवाद साझेदारों में अमेरिका, चीन, रूस और जापान जैसी प्रमुख शक्तियाँ शामिल हैं, जिनके हित हिंद-प्रशांत में आंशिक रूप से भिन्न हैं
  • ऐसे मंच पर संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखना भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती है

3. गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरे

  • आतंकवाद, समुद्री डकैती, साइबर खतरे और सीमा-पार अपराध क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए निरंतर चुनौती हैं
  • इन खतरों से निपटने के लिए सैन्य और असैन्य एजेंसियों के बीच समन्वय आवश्यक है

4. एक्ट ईस्ट नीति का व्यावहारिक क्रियान्वयन

  • रक्षा और सामरिक सहयोग को व्यापार, कनेक्टिविटी और निवेश से जोड़ना एक समन्वित दृष्टिकोण की माँग करता है
  • घोषणाओं और वास्तविक परियोजनाओं के बीच अंतर को कम करना आवश्यक है

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
बहुपक्षीय निर्णय-प्रक्रिया परामर्शी स्वरूप के कारण ठोस और बाध्यकारी परिणामों की सीमा
प्रमुख शक्तियों के हित हिंद-प्रशांत में प्रतिस्पर्धी प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाए रखने की कठिनाई
गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरे आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा और साइबर खतरों के लिए क्षेत्रीय समन्वय की कमी
एक्ट ईस्ट नीति का क्रियान्वयन रक्षा सहयोग और आर्थिक-कनेक्टिविटी परियोजनाओं के बीच समन्वय का अभाव

आगे की राह

  • ADMM-Plus की चर्चाओं को द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के ठोस और मापनीय कार्यक्रमों में बदलना चाहिए
  • आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्यसमूह में सह-अध्यक्ष की भूमिका के माध्यम से सूचना-साझाकरण और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना चाहिए
  • समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता जैसे व्यावहारिक क्षेत्रों में साझा अभ्यास बढ़ाने चाहिए
  • ASEAN केंद्रीयता के सिद्धांत के अनुरूप पारदर्शी और समावेशी संवाद प्रक्रिया को बनाए रखना चाहिए
  • एक्ट ईस्ट नीति के अंतर्गत रक्षा, व्यापार और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के बीच नीतिगत समन्वय सुदृढ़ करना चाहिए
  • संवाद साझेदारों के साथ विश्वास-निर्माण के उपायों को संस्थागत रूप देना चाहिए

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) · आसियान केंद्रीयता (ASEAN Centrality) · एक्ट ईस्ट नीति (Act East Policy) · हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) · संवाद भागीदार (Dialogue Partner) · सामरिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) · आतंकवाद-रोधी सहयोग (Counter-Terrorism Cooperation) · समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) · मैत्री और सहयोग की संधि (Treaty of Amity and Cooperation) · आसियान चार्टर (ASEAN Charter) · दक्षिण चीन सागर (South China Sea) · सर्वसम्मति-आधारित निर्णय प्रक्रिया (Consensus-based Decision Making)

अवधारणा प्रवाह

ASEAN का सर्वोच्च रक्षा परामर्शी तंत्र ADMM है, जिसके अंतर्गत रक्षा सहयोग की चर्चा होती है  →  2010 में ADMM-Plus बना, जिसमें ASEAN सदस्यों के साथ 8 संवाद साझेदार जुड़े  →  2017 से रक्षा मंत्रियों की बैठक वार्षिक रूप से आयोजित होती है और 2026 में फिलीपींस अध्यक्ष है  →  भारत रक्षा मंत्री के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भेजकर द्विपक्षीय और बहुपक्षीय वार्ताओं में भाग लेता है  →  आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्यसमूह जैसे उप-तंत्रों में सहयोग से व्यावहारिक सुरक्षा परिणाम बनते हैं  →  इन प्रक्रियाओं से हिंद-प्रशांत में शांति और स्थिरता तथा एक्ट ईस्ट नीति को सुदृढ़ता मिलती है

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM) आसियान के भीतर सर्वोच्च रक्षा परामर्शी और सहयोगी तंत्र है।
2. ADMM-Plus में आसियान के सदस्य देशों के साथ आठ संवाद भागीदार शामिल हैं, जिनमें भारत भी है।
3. भारत वर्ष 2010 में आसियान का संवाद भागीदार बना।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: रक्षा मंत्रालय के अनुसार ADMM आसियान के भीतर सर्वोच्च रक्षा परामर्शी और सहयोगी तंत्र है। कथन 2 सही है: ADMM-Plus में 11 आसियान सदस्य और आठ संवाद भागीदार (भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड) हैं। कथन 3 गलत है: भारत 1992 में आसियान का संवाद भागीदार बना, 2010 में नहीं; 2010 में ADMM-Plus की पहली बैठक हनोई में हुई थी।

Q2. निम्नलिखित में से दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): भारत की ADMM-Plus में भागीदारी उसकी एक्ट ईस्ट नीति का एक व्यावहारिक साधन है।
कारण (R): एक्ट ईस्ट नीति का उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत के आर्थिक, सांस्कृतिक और सामरिक संबंधों को सुदृढ़ करना है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, किंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — एक्ट ईस्ट नीति (2014) पहले की लुक ईस्ट नीति (1991) का विस्तार है, जिसमें दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ आर्थिक, सांस्कृतिक और सामरिक जुड़ाव पर बल है। ADMM-Plus में भारत की भागीदारी इसी नीति के रक्षा और सामरिक आयाम को दर्शाती है, इसलिए R, A की सही व्याख्या है।

Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा देश आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) का संवाद भागीदार नहीं है?

  1. भारत
  2. रूस
  3. ब्राज़ील
  4. दक्षिण कोरिया

उत्तर: ब्राज़ील — ADMM-Plus के आठ संवाद भागीदार भारत, अमेरिका, चीन, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड हैं। ब्राज़ील इस सूची में नहीं है, इसलिए वह सही उत्तर है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत की एक्ट ईस्ट नीति (Act East Policy) का केंद्रीय सिद्धांत आसियान केंद्रीयता (ASEAN Centrality) माना जाता है, और रक्षा क्षेत्र में ADMM-Plus इस सिद्धांत की व्यावहारिक अभिव्यक्ति है। बहुपक्षीय रक्षा मंचों के माध्यम से भारत के सामरिक हितों की पूर्ति कितनी प्रभावी रही है, इसका आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि आसियान की सर्वसम्मति-आधारित कार्यप्रणाली भारत की अपेक्षाओं को किस सीमा तक सीमित करती है। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल (Skeleton):
1. भूमिका: आसियान की स्थापना 1967 (बैंकॉक घोषणा); आसियान चार्टर 2007 (प्रभावी 2008) के बाद संस्थागत ढाँचा; भारत का आसियान से संबंध 1992 में संवाद भागीदारी से शुरू; 2022 में व्यापक सामरिक भागीदारी (Comprehensive Strategic Partnership)।
2. नीतिगत आधार: लुक ईस्ट नीति (1991) से एक्ट ईस्ट नीति (2014) तक का विकास; आसियान केंद्रीयता का अर्थ, हिंद-प्रशांत संदर्भ में खुले और समावेशी ढाँचे की धारणा; मैत्री और सहयोग की संधि (TAC, 1976) जिसमें भारत 2003 में शामिल हुआ, और अहस्तक्षेप का सिद्धांत।
3. ADMM और ADMM-Plus की संरचना: ADMM की पहली बैठक 2006 (कुआलालंपुर); ADMM-Plus की पहली बैठक 12 अक्टूबर 2010 (हनोई); 11 आसियान सदस्य और आठ संवाद भागीदार; सात विशेषज्ञ कार्य समूह (EWG) जैसे समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, साइबर सुरक्षा, मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR), सैन्य चिकित्सा, शांति-रक्षा और मानवीय खदान कार्रवाई; भारत और मलेशिया का आतंकवाद-रोधी EWG का सह-अध्यक्ष होना (2024-2027); फिलीपींस की 2026 में अध्यक्षता।
4. भारत के लिए लाभ (सकारात्मक पक्ष): सामरिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए बहु-भागीदार संतुलन (hedging); समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग में प्रत्यक्ष भागीदारी; रक्षा संवाद द्वारा द्विपक्षीय बैठकों के अवसर; आपूर्ति शृंखला और समुद्री मार्गों की सुरक्षा के हित।
5. सीमाएँ (आलोचनात्मक पक्ष): सर्वसम्मति-आधारित निर्णय, जिससे बाध्यकारी परिणाम कम; दक्षिण चीन सागर पर सदस्यों में मतभेद; म्यांमार संकट (2021) और आसियान की पाँच-सूत्री सहमति का सीमित क्रियान्वयन; ADMM-Plus में चीन और रूस जैसे भागीदारों की उपस्थिति से संतुलन की जटिलता; आसियान गठबंधन नहीं है, इसलिए सामूहिक रक्षा दायित्व नहीं।
6. संतुलित दृष्टिकोण और निष्कर्ष: यह मंच नियम-आधारित संवाद और विश्वास-निर्माण का साधन है, न कि सुरक्षा गारंटी का; भारत के लिए प्रभावशीलता उसकी द्विपक्षीय पहलों, EWG में सक्रिय भूमिका और क्षमता-निर्माण सहयोग पर निर्भर करती है।
7. उप-प्रश्न का उत्तर: सर्वसम्मति की सीमा को देखते हुए भारत को समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, HADR और साइबर सुरक्षा जैसे व्यावहारिक क्षेत्रों को प्राथमिकता देनी चाहिए, जहाँ सहमति अपेक्षाकृत सुलभ है।

स्रोत: orissapost.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments

Post A Comment