उत्तराखंड विधानसभा: अनुपूरक बजट में गैरसैंण जलापूर्ति बांध की घोषणा

उत्तराखंड विधानसभा: अनुपूरक बजट में गैरसैंण जलापूर्ति बांध की घोषणा

उत्तराखंड विधानसभा: अनुपूरक बजट में गैरसैंण जलापूर्ति बांध की घोषणा

उत्तराखंड विधानसभा: अनुपूरक बजट में गैरसैंण जलापूर्ति बांध की घोषणा — उत्तराखंड विधानसभा में प्रस्तावित बजट आवंटन (करोड़ रुपये)
आरेख: उत्तराखंड विधानसभा में प्रस्तावित बजट आवंटन (करोड़ रुपये)

✎ अनुपूरक बजट का संवैधानिक आधार अनुच्छेद 205 है और किसी भी व्यय के लिए संचित निधि से राशि निकालने हेतु विधानमंडल की स्वीकृति (विनियोग विधेयक, अनुच्छेद 204) अनिवार्य है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — शासन व्यवस्था (राज्य विधानमंडल की वित्तीय शक्तियां, संचित निधि और अनुपूरक अनुदान की संवैधानिक प्रक्रिया)  |  सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — संघवाद और स्थानीय शासन (राज्य वित्त आयोग, स्थानीय निकायों को अनुदान, वित्तीय संघवाद)  |  सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — अर्थव्यवस्था (सार्वजनिक वित्त, राजस्व और पूंजीगत व्यय, राजकोषीय घाटा का प्रबंधन)  |  सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य (आयुष्मान भारत PM-JAY, कल्याणकारी पेंशन योजनाएं)  |  सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I — भारतीय भूगोल और पर्यावरण (पर्वतीय क्षेत्रों में जल आपूर्ति, हिमालयी क्षेत्र की विकास चुनौतियां)
  • Prelims: अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) और अनुच्छेद 205, संचित निधि (Consolidated Fund) — अनुच्छेद 266, आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) — अनुच्छेद 267, राजस्व व्यय और पूंजीगत व्यय में अंतर, राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) — अनुच्छेद 243-I और 243-Y, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana — PMGSY), जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission), आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (Ayushman Bharat PM-JAY)
  • Essay: राजकोषीय संघवाद और राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता: संसाधनों के वितरण में संतुलन की चुनौती, पर्वतीय राज्यों में विकास: भौगोलिक कठिनाइयां, जल सुरक्षा और सतत अवसंरचना

त्वरित पुनरावृत्ति: अनुपूरक बजट का संवैधानिक आधार अनुच्छेद 205 है और किसी भी व्यय के लिए संचित निधि से राशि निकालने हेतु विधानमंडल की स्वीकृति (विनियोग विधेयक, अनुच्छेद 204) अनिवार्य है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

उत्तराखंड विधानसभा का सत्र मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को चमोली जिले के गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में शुरू हुआ। सत्र के पहले दिन राज्य सरकार ने सदन में 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया, जिसमें राजस्व मद के लिए 3,679.86 करोड़ रुपये और पूंजीगत मद के लिए 4,164.32 करोड़ रुपये का प्रावधान है। इस बजट में गैरसैंण जलापूर्ति बांध परियोजना के लिए 122 करोड़ रुपये, नवीन राज्य डेटा सेंटर के लिए 40 करोड़ रुपये और हरिद्वार-गंगा कॉरिडोर के लिए 30 करोड़ रुपये रखे गए हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, खेल, ग्रामीण विकास और कुंभ मेले के अवसंरचना कार्यों के लिए भी धनराशि प्रस्तावित है। स्थानीय निकायों को राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप 721 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव भी इसी बजट का हिस्सा है। यह समाचार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राज्य विधानमंडल की वित्तीय शक्तियों, संचित निधि से व्यय की संवैधानिक प्रक्रिया और पर्वतीय राज्य में जल आपूर्ति तथा अवसंरचना की प्राथमिकताओं को एक साथ दिखाता है।

पृष्ठभूमि

  • उत्तराखंड 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों को अलग करके भारत के 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। वर्ष 2007 में इसका नाम उत्तरांचल से बदलकर उत्तराखंड किया गया।
  • गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में विधानसभा भवन बनाया गया है। राज्य सरकार ने वर्ष 2014 में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया, जबकि स्थायी राजधानी के प्रश्न पर विभिन्न मत रहे हैं। यहां सत्र आयोजित होने से पर्वतीय क्षेत्र में प्रशासनिक केंद्रीकरण के विकेंद्रीकरण पर बहस जुड़ी रहती है।
  • राज्यों का बजट हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत में प्रस्तुत होता है। यदि किसी मद में वर्ष के दौरान व्यय की आवश्यकता बजट प्रावधान से अधिक हो जाए, तो सरकार अनुपूरक अनुदान के माध्यम से अतिरिक्त राशि के लिए विधानमंडल की स्वीकृति लेती है।
  • जल जीवन मिशन की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी। राज्यों में इस मिशन के अंतर्गत ठेकेदारों के लंबित भुगतान की समस्या बार-बार सामने आती है, जिसके कारण इस बजट में बकाया भुगतान के लिए 300 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
  • पंचायती राज और नगरपालिका संस्थाओं को वित्तीय सहायता देने के लिए संविधान के 73वें और 74वें संशोधन (1992) के तहत राज्य वित्त आयोग के गठन का प्रावधान किया गया, जिससे स्थानीय निकायों के वित्त की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित होती है।

अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) क्या है?

  • अनुपूरक बजट वह वित्तीय प्रस्ताव है जिसके माध्यम से वित्तीय वर्ष के दौरान अप्रत्याशित या अतिरिक्त व्यय के लिए विधानमंडल से अतिरिक्त अनुदान मांगा जाता है। इसका संवैधानिक आधार अनुच्छेद 205 है, जो अनुपूरक, अतिरिक्त और अधिक अनुदानों से संबंधित है।
  • राज्य की किसी भी राशि का व्यय संचित निधि (अनुच्छेद 266) से तभी किया जा सकता है जब विधानमंडल ने उसे विनियोग विधेयक (अनुच्छेद 204) द्वारा स्वीकृत कर दिया हो। इसलिए अनुपूरक बजट पर भी विनियोग विधेयक पारित कराना आवश्यक होता है।
  • आकस्मिकता निधि (अनुच्छेद 267) से अप्रत्याशित व्यय के लिए अस्थायी अग्रिम लिया जा सकता है, किंतु उसकी पूर्ति बाद में विधानमंडल की स्वीकृति से की जाती है। इसी कारण अनुपूरक बजट को आकस्मिकता निधि की भरपाई से भी जोड़ा जाता है।
  • राजस्व व्यय वह व्यय है जो सरकार के दैनिक प्रशासन, वेतन, ब्याज भुगतान और अनुदानों पर होता है, जबकि पूंजीगत व्यय से परिसंपत्तियों का निर्माण होता है, जैसे सड़क, बांध, भवन और डेटा सेंटर। इस बजट में दोनों मदों के लिए प्रावधान अलग-अलग दिखाए गए हैं।
  • राज्य वित्त आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 243-I (पंचायत) और 243-Y (नगरपालिका) के अंतर्गत होता है। यह राज्य और स्थानीय निकायों के बीच करों और अनुदानों के बंटवारे की सिफारिश करता है।
  • पर्वतीय राज्यों में जल आपूर्ति के लिए बांध और जलाशय परियोजनाएं ऊंचाई, भूस्खलन और कम जनसंख्या घनत्व जैसी चुनौतियों के कारण अधिक लागत वाली होती हैं, इसलिए उनके लिए अलग से वित्तीय प्रावधान आवश्यक होता है।
  • सामान्य लेखा दृष्टि से अनुपूरक बजट राजकोषीय घाटे पर सीधा प्रभाव डाल सकता है। इसलिए वित्तीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन से जुड़े नियमों के अनुपालन की निगरानी विधानमंडल की समितियां और नियंत्रक-महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के माध्यम से की जाती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्त्व
अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) की कुल राशि उत्तराखंड सरकार ने 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया, जिसमें राजस्व मद के लिए 3,679.86 करोड़ रुपये और पूंजीगत मद के लिए 4,164.32 करोड़ रुपये हैं। चालू वित्तीय वर्ष में मूल बजट के अतिरिक्त व्यय के लिए यह संसदीय-विधायी प्रक्रिया है।
गैरसैंण जलापूर्ति बांध परियोजना इसके लिए 122 करोड़ रुपये का प्रावधान है। यह पहाड़ी राज्य में जल-आपूर्ति के अवसंरचनात्मक विकास और राजधानी क्षेत्र के नगरीय ढांचे से जुड़ा कदम है।
राज्य स्तरीय डेटा केंद्र (State Data Centre) इसके लिए 40 करोड़ रुपये रखे गए हैं। यह ई-गवर्नेंस और सरकारी सेवाओं के डिजिटल वितरण की आधारभूत सुविधा है।
स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा आयुष्मान योजना के लिए 100 करोड़ रुपये, गोल्डन कार्ड के लिए 125 करोड़ रुपये, तथा पिथौरागढ़ और रुद्रपुर में मेडिकल व नर्सिंग कॉलेजों के लिए 160 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और मानव संसाधन दोनों पर बल मिलता है।
ग्रामीण और स्थानीय निकाय वित्त ग्रामीण, शहरी और स्थानीय निकायों को राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप 721 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव है। इससे स्थानीय स्वशासन की वित्तीय स्वायत्तता मज़बूत होती है।
कृषि खरीद और अवस्थापना अन्नपूर्ति योजना के तहत धान और गेहूं की खरीद के लिए 1,100 करोड़ रुपये तथा अवस्थापना विकास के लिए 500 करोड़ रुपये रखे गए हैं। यह खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आय से जुड़ा प्रावधान है।

महत्व

आर्थिक महत्त्व

  • अनुपूरक बजट के माध्यम से मूल बजट में अप्रत्याशित या छूटे हुए व्यय को विधिवत् शामिल किया जाता है, जिससे आर्थिक नीति की वैधानिकता बनी रहती है।
  • पूंजीगत मद में 4,164.32 करोड़ रुपये का आवंटन सड़क, जल, ऊर्जा और डेटा केंद्र जैसी परिसंपत्तियों के निर्माण से आर्थिक संवृद्धि की संभावना बढ़ाता है।
  • ठेकेदारों के बकाया भुगतान के लिए जल जीवन मिशन में 300 करोड़ रुपये का प्रावधान निर्माण क्षेत्र की नकदी प्रवाह (Cash Flow) समस्या को कम करता है।

सामाजिक महत्त्व

  • आयुष्मान योजना, गोल्डन कार्ड और कल्याणकारी पेंशन के प्रावधान से स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के लाभार्थियों की पहुँच बढ़ती है।
  • खेल विश्वविद्यालय (35 करोड़ रुपये), महिला स्पोर्ट्स कॉलेज चंपावत (10 करोड़ रुपये) और पदक विजेता खिलाड़ियों के पुरस्कार (15 करोड़ रुपये) से खेल-संरचना का विस्तार होता है।
  • डिजिटल लर्निंग के लिए 200 करोड़ रुपये का आवंटन उच्च शिक्षा और विद्यालयी शिक्षा में डिजिटल असमानता घटाने की दिशा में है।

पर्यावरणीय और सांस्कृतिक महत्त्व

  • ट्राउट प्रोत्साहन योजना (28 करोड़ रुपये) और नंदा देवी राजजात (20 करोड़ रुपये) के प्रावधान जलीय संसाधनों के उपयोग और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण से जुड़े हैं।
  • हरिद्वार-गंगा कॉरिडोर (30 करोड़ रुपये) और कुंभ मेले की अवस्थापना (290 करोड़ रुपये) में नदी-तट विकास और भीड़ प्रबंधन जैसे पहलुओं पर ध्यान अपेक्षित है।

संघीय और प्रशासनिक महत्त्व

  • राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप स्थानीय निकायों को धनराशि देना सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप राज्य-स्तरीय वित्तीय हस्तांतरण का उदाहरण है।
  • विधानसभा में अनुपूरक बजट का पारित होना कार्यपालिका की वित्तीय जवाबदेही और विधायी नियंत्रण की व्यवस्था को दर्शाता है।

चुनौतियाँ

1. राजकोषीय दबाव

  • एक ही सत्र में 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट राज्य के राजकोषीय संतुलन पर दबाव का संकेत देता है।
  • राजस्व मद में व्यय बढ़ने से राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रित रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
  • अनुपूरक प्रावधानों पर निर्भरता से मूल बजट के यथार्थवादी अनुमान पर प्रश्न उठते हैं।

2. ठेकेदारों के बकाया भुगतान की समस्या

  • जल जीवन मिशन में ठेकेदारों के बकाया भुगतान के लिए 300 करोड़ रुपये का प्रावधान यह बताता है कि पूर्व प्रतिबद्धताओं का समय पर निपटारा नहीं हो पाया।
  • भुगतान में विलंब से ठेकेदारों की कार्यशील पूंजी प्रभावित होती है और परियोजनाओं की गुणवत्ता तथा गति पर असर पड़ता है।

3. स्थानीय निकायों की वित्तीय स्वायत्तता

  • राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के बावजूद स्थानीय निकायों को समय पर और पर्याप्त संसाधन देना एक सतत चुनौती है।
  • ग्रामीण और शहरी निकायों के बीच संसाधन-वितरण का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

4. पहाड़ी भूगोल और अवस्थापना की ऊँची लागत

  • गैरसैंण जैसे पहाड़ी और भूकंप-प्रवण क्षेत्रों में बांध, सड़क और भवन निर्माण की लागत मैदानी क्षेत्रों से अधिक होती है।
  • भूस्खलन, मौसमी बाधाएँ और सीमित निर्माण-अवधि परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन को प्रभावित करती हैं।

5. खाद्य खरीद का वित्तीय भार

  • अन्नपूर्ति योजना के तहत धान और गेहूं की खरीद के लिए 1,100 करोड़ रुपये का प्रावधान राज्य के वित्त पर दीर्घकालिक दायित्व बनाता है।
  • खरीद प्रणाली में भंडारण, परिवहन और वितरण की क्षमता भी साथ-साथ सुदृढ़ करनी होती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

समस्या चिंता का विषय
राजकोषीय संतुलन अनुपूरक व्यय से राजस्व घाटे और राजकोषीय घाटे पर दबाव बढ़ सकता है।
ठेकेदारों का बकाया पुराने देयकों के लंबित रहने से परियोजनाओं की गुणवत्ता और समयसीमा प्रभावित होती है।
स्थानीय निकायों को संसाधन राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों का समय पर और पूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा।
पर्वतीय परियोजनाओं की लागत गैरसैंण जैसे क्षेत्र में निर्माण-लागत और पर्यावरणीय संवेदनशीलता दोनों चुनौतियाँ हैं।
खाद्य खरीद का दायित्व धान और गेहूं की खरीद का भार बजट पर दीर्घकालिक असर डाल सकता है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • आयुष्मान योजना
  • जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission)
  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana)
  • ट्राउट प्रोत्साहन योजना
  • नंदा देवी राजजात योजना
  • किसान पेंशन योजना
  • मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना

आगे की राह

  • अनुपूरक बजट पर निर्भरता घटाने के लिए मूल बजट में वास्तविक व्यय-अनुमान तैयार करना और पिछले वर्षों के व्यय-रुझानों का विश्लेषण करना आवश्यक है।
  • ठेकेदारों के बकाया भुगतान के लिए समयबद्ध भुगतान-प्रणाली और ई-भुगतान तंत्र अपनाए जाने चाहिए, ताकि निर्माण कार्य में विश्वास बना रहे।
  • राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप स्थानीय निकायों को नियमित और पूर्वानुमेय हस्तांतरण सुनिश्चित करना चाहिए।
  • पर्वतीय क्षेत्रों की परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण को प्रारंभिक चरण में ही अनिवार्य किया जाना चाहिए।
  • जल परियोजनाओं में जल-संरक्षण, वर्षा जल संचयन और स्थानीय जल-स्रोतों के संरक्षण को समेकित रूप से शामिल करना उपयुक्त होगा।
  • खरीद-नीति के साथ भंडारण और परिवहन की अवसंरचना का विकास करने से खाद्यान्न की बर्बादी और अतिरिक्त लागत दोनों घटेंगे।
  • बजट में प्रस्तावित प्रत्येक योजना के लिए परिणाम-आधारित संकेतक (Outcome Indicators) तय कर सदन में नियमित समीक्षा की व्यवस्था की जानी चाहिए।
  • डिजिटल लर्निंग और डेटा केंद्र जैसी परियोजनाओं में साइबर सुरक्षा और डेटा-संरक्षण मानकों को प्रारंभ से ही सुनिश्चित करना होगा।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 202: वार्षिक वित्तीय विवरण, बजट प्रक्रिया का आधार
  • अनुच्छेद 203: विधानमंडल में अनुमानों पर मतदान
  • अनुच्छेद 205: अनुपूरक, अतिरिक्त और अधिक अनुदान
  • अनुच्छेद 266: राज्य की संचित निधि से व्यय
  • अनुच्छेद 243I: राज्य वित्त आयोग का गठन
  • अनुच्छेद 243Y: स्थानीय निकायों हेतु वित्त आयोग की सिफारिशें

अवधारणा प्रवाह

राज्य सरकार मूल बजट के बाद अतिरिक्त या छूटे हुए व्यय की पहचान करती है।  →  अनुपूरक बजट को राजस्व मद और पूंजीगत मद में विभाजित कर विधानसभा के पटल पर रखा जाता है।  →  विधानमंडल अनुच्छेद 205 के अंतर्गत अनुदान पर विचार और मतदान करता है।  →  पारित अनुदान राज्य की संचित निधि से जारी होकर योजनाओं और परियोजनाओं में व्यय होता है।  →  राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार स्थानीय निकायों को धनराशि हस्तांतरित की जाती है।  →  गैरसैंण जलापूर्ति बांध, सड़क, स्वास्थ्य और कुंभ अवसंरचना जैसी परिसंपत्तियों का निर्माण होता है।  →  परिसंपत्तियों और सेवाओं से जल-आपूर्ति, स्वास्थ्य पहुँच और आर्थिक गतिविधि में सुधार की अपेक्षा की जाती है।

स्रोत: amarujala.com


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