28 Oct आंध्र प्रदेश में चक्रवात अरनब: केंद्र से सहायता की अपील, जानिए मुख्य बिंदु
✎ चक्रवात प्रभावित राज्य पहले राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल से राहत जुटाता है, जबकि केंद्रीय सहायता के लिए विस्तृत ज्ञापन और आपदा पश्चात आवश्यकता आकलन के आधार पर अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल की तैनाती होती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — आपदा प्रबंधन (Disaster Management) | GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (जलवायु परिवर्तन और चक्रवात) | GS Paper II — संघवाद और राज्य-केंद्र संबंध
- Prelims: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority), आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (National Disaster Response Force), राज्य आपदा मोचन बल (State Disaster Response Force), तूफ़ानी लहर (Storm Surge), अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (Inter-Ministerial Central Team), आपदा पश्चात आवश्यकता आकलन (Post Disaster Needs Assessment), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि (National Disaster Response Fund), भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department), चक्रवात का वर्गीकरण (गंभीर और अति गंभीर चक्रवाती तूफ़ान)
- Essay: आपदा के समय सहकारी संघवाद: राज्य की पहल और केंद्रीय सहायता का संतुलन, तटीय समुदायों की सुभेद्यता और जलवायु परिवर्तन के दौर में आपदा जोखिम में कमी
त्वरित पुनरावृत्ति: चक्रवात प्रभावित राज्य पहले राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल से राहत जुटाता है, जबकि केंद्रीय सहायता के लिए विस्तृत ज्ञापन और आपदा पश्चात आवश्यकता आकलन के आधार पर अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल की तैनाती होती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दूरभाष पर बात की और 28 अक्टूबर की तारीख वाले पत्र के माध्यम से अति गंभीर चक्रवाती तूफ़ान आर्नब से हुई क्षति के लिए केंद्रीय सहायता माँगी। बुधवार सुबह यह चक्रवात आंध्र प्रदेश और यनम तट को पार कर गया, जिससे कई तटीय ज़िलों में फ़सलों, मकानों, सड़कों और विद्युत अवसंरचना को व्यापक नुकसान हुआ। राज्य ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के निरंतर समर्थन और आकलन के लिए शीघ्र केंद्रीय दल की तैनाती का अनुरोध किया है। राज्य सरकार ने 28,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया और प्रारंभिक आकलन के समय तक किसी मानव जीवन की हानि की सूचना नहीं थी। यह प्रकरण आपदा के बाद राज्य द्वारा प्रस्तुत आकलन और केंद्र की सहायता प्रक्रिया को समझने का उपयुक्त उदाहरण है।
पृष्ठभूमि
- भारत में चक्रवात प्रमुखतः बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनते हैं। बंगाल की खाड़ी में उठने वाले चक्रवात अक्सर आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों को प्रभावित करते हैं, जिससे यह क्षेत्र चक्रवात-प्रवण माना जाता है।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के बाद भारत में आपदा प्रबंधन का संस्थागत ढाँचा बना, जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य स्तर पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और ज़िला स्तर पर ज़िला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण स्थापित किए गए।
- आपदा के समय प्राथमिक दायित्व राज्य सरकार का होता है। राज्य अपनी आपदा प्रतिक्रिया निधि से तत्काल राहत कार्य करता है, जबकि गंभीर आपदा की स्थिति में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि से केंद्र सहायता देता है।
- केंद्र सरकार सामान्यतः राज्य द्वारा प्रस्तुत विस्तृत ज्ञापन और आपदा पश्चात आवश्यकता आकलन के आधार पर अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल भेजती है। इसके बाद उच्च स्तरीय समिति सहायता राशि पर विचार करती है।
- भारत के 2000 के दशक के बाद के चक्रवातों के अनुभव ने प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, तटीय ज़िलों से समय पर निष्कासन और आश्रय-स्थलों की व्यवस्था पर ज़ोर बढ़ाया है, जिसके परिणामस्वरूप मानव हानि में उल्लेखनीय कमी आई है।
चक्रवात आपदा प्रबंधन ढाँचा क्या है?
- चक्रवात वायुमंडलीय निम्न दाब प्रणाली है, जिसमें हवाएँ घूमते हुए केंद्र के चारों ओर चलती हैं। उष्ण कटिबंधीय महासागरों के ऊपर गर्म और नम वायु के ऊपर उठने से इसका निर्माण होता है।
- भारत मौसम विज्ञान विभाग हवा की गति के आधार पर चक्रवात को अवदाब, गहरा अवदाब, चक्रवात, गंभीर चक्रवाती तूफ़ान, अति गंभीर चक्रवाती तूफ़ान और सुपर चक्रवाती तूफ़ान जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत करता है।
- तूफ़ानी लहर समुद्र के जल स्तर का असामान्य उभार है, जो तट पर भीषण बाढ़ का मुख्य कारण बनती है। इसकी ऊँचाई ज्वार-भाटा रेखा (astronomical tide) के ऊपर मापी जाती है।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत राष्ट्रीय आपदा मोचन बल का गठन किया गया है, जो प्रशिक्षित विशेषज्ञ बल के रूप में आपदा में राहत और बचाव कार्य करता है। प्रत्येक राज्य का अपना राज्य आपदा मोचन बल होता है।
- राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि और राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि आपदा राहत के लिए वित्तीय साधन हैं। राज्य स्तर पर निधि का उपयोग राज्य सरकार करती है, जबकि गंभीर आपदा में केंद्र अतिरिक्त सहायता देता है।
- आपदा पश्चात आवश्यकता आकलन में क्षति का भौतिक और आर्थिक मूल्यांकन किया जाता है, जिसमें मकान, सड़क, विद्युत, कृषि और जल अवसंरचना शामिल होते हैं। इसी आधार पर पुनर्वास और पुनर्निर्माण की योजना बनती है।
- आपदा जोखिम में कमी के लिए निष्कासन, आश्रय-स्थल, मछुआरों के लिए चेतावनी और तटीय भूमि-उपयोग नियमन जैसे उपाय प्रभावी माने जाते हैं। सेंदाई आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढाँचा (2015-2030) भी इसी दृष्टि को आगे बढ़ाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| चक्रवात अर्णब की प्रकृति | अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान (Very Severe Cyclonic Storm) के रूप में वर्गीकृत, जो आंध्र प्रदेश और यानम तट पार कर गया। इसकी गति 115-125 किमी प्रति घंटा और झोंके 140 किमी प्रति घंटा तक दर्ज हुए। |
| तूफानी लहर (Storm Surge) का खतरा | खगोलीय ज्वार (Astronomical Tide) से 1.0 से 1.5 मीटर ऊपर की तूफानी लहर निचले तटीय क्षेत्रों को जलमग्न कर सकती थी। भारी वर्षा के साथ यह खतरा दोगुना हो जाता है। |
| पूर्व-तैयारी और निकासी | 14 जिलों में आपदा प्रतिक्रिया दल सक्रिय किए गए और 28,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया। मछली पकड़ने की सभी नौकाएँ बंदरगाह लौट आईं। |
| बल-तैनाती | 16 राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और 11 राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें तैनात की गईं। प्रारंभिक आकलन में मानव क्षति की कोई सूचना नहीं मिली। |
| अवसंरचना की क्षति | लगभग 180 घर क्षतिग्रस्त हुए, जिनमें अधिकांश क्षति कोनसीमा जिले में केंद्रित रही। 220 से अधिक पेड़ उखड़े, जिनमें से 170 से अधिक सड़कों से हटाए गए। |
महत्व
प्रशासनिक और संघीय महत्व
- आपदा के समय राज्य सरकार पहली प्रतिक्रिया देती है, जबकि केंद्र की सहायता राज्य की क्षमता के पूरक के रूप में आती है। मुख्यमंत्री द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री को लिखा पत्र इसी सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की व्यावहारिक अभिव्यक्ति है।
- राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की सहायता जारी रखने का अनुरोध यह दर्शाता है कि विशेष बचाव और राहत क्षमताएँ राज्य स्तर पर पूरी तरह उपलब्ध नहीं होतीं।
आपदा प्रबंधन के ढाँचे की दृष्टि से महत्व
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला स्तर की समितियाँ बहु-स्तरीय ढाँचा बनाती हैं।
- प्रारंभिक आकलन के बाद राज्य का विस्तृत आकलन प्रस्तुत करना और उसके आधार पर केंद्रीय टीम का भेजा जाना, आपदा-पश्चात सहायता की सामान्य प्रक्रिया है।
मानवीय और आर्थिक महत्व
- समय पर निकासी से मानव क्षति को सीमित रखने में सफलता, आपदा प्रबंधन की प्रभावशीलता का प्रमुख मापदंड मानी जाती है।
- फसल, आवास, सड़क और विद्युत अवसंरचना की क्षति आजीविका और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक असर डालती है, इसलिए पुनर्वास और पुनर्निर्माण की योजना आवश्यक हो जाती है।
चुनौतियाँ
1. क्षति के सटीक आकलन की चुनौती
- प्रारंभिक आकलन में क्षति के आँकड़े अस्थायी होते हैं। फसल, घर और सड़क की वास्तविक हानि का निर्धारण बाद में क्षेत्र-स्तरीय सर्वेक्षण से ही संभव होता है।
- विद्युत आपूर्ति और दूरसंचार बाधित होने से सूचना-प्रवाह धीमा पड़ता है, जिससे आकलन में देरी हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन, संघीय व्यवस्था में प्रशासनिक समन्वय
2. केंद्र-राज्य सहायता की प्रक्रिया
- केंद्रीय सहायता का निर्णय सामान्यतः राज्य के ज्ञापन (Memorandum), अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (IMCT) की रिपोर्ट और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष की उपलब्धता पर आधारित होता है।
- राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के बीच धनराशि के उपयोग की शर्तें अलग होती हैं, जिन्हें समझना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध, आपदा प्रबंधन नीति
3. तटीय क्षेत्रों की भेद्यता
- निचले तटीय क्षेत्रों, नदी-मुहानों और लैगून के आसपास बसी आबादी तूफानी लहर के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होती है।
- बार-बार चक्रवात आने से तटीय आवास और अवसंरचना का लचीलापन (Resilience) परखा जाता है।
यूपीएससी लिंक: भौगोलिक कारक, जलवायु परिवर्तन और आपदा जोखिम
4. आजीविका पर प्रभाव
- मछली पकड़ने पर निर्भर परिवारों के लिए नौकाओं का सुरक्षित लौटना राहत है, परंतु कई दिनों तक मछली पकड़ना बंद रहने से आय घटती है।
- कृषि क्षति से किसानों की आय और ऋण-चक्र पर दबाव बढ़ता है।
यूपीएससी लिंक: कृषि अर्थव्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा और आजीविका
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| क्षति आकलन में देरी | प्रारंभिक आँकड़ों और अंतिम आकलन के बीच अंतर से राहत वितरण प्रभावित हो सकता है। |
| केंद्रीय दल की समय पर तैनाती | आकलन रिपोर्ट के बिना केंद्रीय सहायता का निर्णय लंबित रहता है। |
| तटीय अवसंरचना की कमज़ोरी | बिजली के खंभे और सड़कें तेज़ हवाओं से जल्दी प्रभावित होती हैं, जिससे पुनर्स्थापन में समय लगता है। |
| आवास की सुरक्षा | कच्चे और कमज़ोर ढाँचों वाले घर चक्रवात में सबसे अधिक क्षतिग्रस्त होते हैं। |
| आजीविका की क्षति | मत्स्य पालन और कृषि पर निर्भर परिवार अल्पकालिक राहत के बाद भी आर्थिक संकट में रहते हैं। |
आगे की राह
- केंद्रीय दल को विस्तृत राज्य आकलन के आधार पर शीघ्र भेजा जाए, ताकि राहत और पुनर्वास का निर्णय बिना अनावश्यक विलंब के हो सके।
- क्षति के आँकड़ों को फसल, आवास, सड़क और विद्युत क्षेत्र में अलग-अलग सत्यापित किया जाए और उन्हें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाए।
- तटीय जिलों में तूफानी लहर के मानचित्रण और जोखिम-आधारित भूमि उपयोग योजना को प्राथमिकता दी जाए।
- चक्रवात-रोधी आवास और बिजली के खंभों की भूमिगत या सुदृढ़ व्यवस्था पर दीर्घकालिक निवेश किया जाए।
- आपदा-पूर्व चेतावनी प्रणाली और समुदाय-स्तरीय निकासी अभ्यास को नियमित बनाया जाए।
- मत्स्य पालन और कृषि से जुड़े परिवारों के लिए आय-सहायता और बीमा कवरेज का विस्तार सोचा जाए।
- स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को आपदा प्रबंधन योजना में शामिल करके प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाई जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) · राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority – NDMA) · राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (National Disaster Response Force – NDRF) · राज्य आपदा मोचन बल (State Disaster Response Force – SDRF) · तूफानी लहर (Storm Surge) · चक्रवात (Cyclone) और तटीय भेद्यता · अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (Inter-Ministerial Central Team) · संस्थागत संघवाद और सहकारी संघवाद · आपदा प्रतिक्रिया निधि (Disaster Response Fund) · पूर्व-चेतावनी प्रणाली और आपदा-पूर्व तैयारी · सेंडाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework for Disaster Risk Reduction) · पोस्ट-डिज़ास्टर नीड्स असेसमेंट (Post Disaster Needs Assessment – PDNA)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 275 — राज्यों को संचित निधि से अनुदान की व्यवस्था
- अनुच्छेद 282 — राज्य द्वारा विवेकाधीन सार्वजनिक निधि से अनुदान
- अनुच्छेद 280 — वित्त आयोग द्वारा आपदा राहत निधि की अनुशंसा
अवधारणा प्रवाह
चक्रवात अर्णब का गठन और तट पार करना, जिसके साथ तेज़ हवाएँ, भारी वर्षा और तूफानी लहर का खतरा जुड़ा। → राज्य स्तर पर पूर्व-तैयारी: 14 जिलों में आपदा प्रतिक्रिया दल सक्रिय और 28,000 से अधिक लोगों की निकासी। → प्रारंभिक आकलन: लगभग 180 घरों, 220 से अधिक पेड़ों और सड़क-बिजली अवसंरचना की क्षति का दस्तावेज़ीकरण। → राहत-कार्य: NDRF और SDRF की तैनाती, सड़क-सफाई, बिजली बहाली और चिकित्सा सहायता। → केंद्र से अनुरोध: मुख्यमंत्री का गृह मंत्री को पत्र, NDRF सहायता जारी रखने और केंद्रीय दल भेजने की माँग। → विस्तृत आकलन और केंद्रीय दल का दौरा, फिर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष से सहायता का निर्णय और पुनर्वास योजना।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है।
2. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के कर्मी मुख्यतः केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से लिए जाते हैं।
3. तूफानी लहर (Storm Surge) से तात्पर्य उस अतिरिक्त समुद्री जल-स्तर से है जो हवा और निम्न वायुदाब के कारण खगोलीय ज्वार से ऊपर उठ जाता है।
4. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की स्थापना राज्य सरकार द्वारा की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी चार
उत्तर: केवल तीन — कथन 1 सही है: NDMA का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है (धारा 3)। कथन 2 सही है: NDRF की बटालियनें BSF, CRPF, CISF, ITBP और SSB जैसे बलों के कर्मियों से गठित होती हैं। कथन 3 सही है: तूफानी लहर खगोलीय ज्वार से ऊपर का जल-स्तर है। कथन 4 गलत है: NDRF की स्थापना केंद्र सरकार द्वारा की जाती है, जबकि SDRF राज्य सरकार द्वारा गठित होता है।
Q2. निम्नलिखित अभिकथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): कई चक्रवातों में मानवीय हानि का एक प्रमुख कारण तटीय तूफानी लहर रही है।
कारण (R): तूफानी लहर निम्न-तटीय क्षेत्रों को जलमग्न कर देती है, जहाँ आबादी और बुनियादी ढाँचा अपेक्षाकृत अधिक संकेंद्रित होता है।
नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (b) (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (c) (A) सही है, परंतु (R) गलत है
- (d) (A) गलत है, परंतु (R) सही है
उत्तर: (a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — (A) सही है, क्योंकि ओडिशा (1999 का सुपर साइक्लोन) और अन्य तटीय चक्रवातों में अधिकांश मृत्यु जल-प्लावन और तूफानी लहर से हुईं। (R) भी सही है और (A) की सही व्याख्या करता है, क्योंकि निम्न-तटीय क्षेत्रों में जल-प्रवाह अधिक दूर तक फैलता है और घनी आबादी प्रभावित होती है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलों पर विचार कीजिए:
सूची-I (संस्था)
1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण
2. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण
3. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग
सूची-II (अध्यक्ष / संबद्धता)
A. राज्य का मुख्यमंत्री अध्यक्ष होता है
B. प्रधानमंत्री अध्यक्ष होता है
C. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्य करता है
सही सुमेलन चुनिए:
- 1-A, 2-B, 3-C
- 1-B, 2-A, 3-C
- 1-C, 2-A, 3-B
- 1-B, 2-C, 3-A
उत्तर: 1-B, 2-A, 3-C — 1-B: NDMA का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है। 2-A: राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का अध्यक्ष राज्य का मुख्यमंत्री होता है। 3-C: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन है और चक्रवात की पूर्व-चेतावनी जारी करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में चक्रवात जैसी आपदाओं के बाद केंद्रीय सहायता की प्रक्रिया राज्य के प्रारंभिक आकलन, अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल के सत्यापन और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि से होने वाले वितरण पर आधारित है। इस संस्थागत ढाँचे की समालोचनात्मक परीक्षा कीजिए। साथ ही यह भी बताइए कि यह ढाँचा सहकारी संघवाद की भावना को किस सीमा तक सुदृढ़ करता है और आपदा-पूर्व तैयारी पर इसके क्या प्रभाव पड़ सकते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर संरचना: (1) भूमिका: चक्रवात ‘Arnab’ जैसी घटना में राज्य द्वारा प्रारंभिक आकलन, 28,000 से अधिक निष्कासन, 16 NDRF और 11 SDRF टीमों की तैनाती का उल्लेख करते हुए प्रक्रिया का परिचय। (2) कानूनी ढाँचा: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत NDMA (धारा 3), NDRF (धारा 44), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और SDRF/राष्ट्रीय व राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधियों की व्यवस्था; राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन नीति, 2009। (3) प्रक्रिया की समालोचना: राज्य द्वारा विस्तृत आकलन प्रस्तुत करने के बाद ही केंद्रीय दल की तैनाती; PDNA पद्धति से क्षति और पुनर्निर्माण की गणना; आकलन में विलंब, क्षति के डेटा-मानकीकरण की चुनौती और ‘आपदा की परिभाषा’ पर राज्यों की अलग अपेक्षाएँ। (4) संघवाद: 15वें वित्त आयोग के अनुसार SDRF में केंद्र का सामान्य राज्यों के लिए 75 प्रतिशत अंशदान; सहकारी संघवाद बनाम केंद्रीकृत नियंत्रण का संतुलन; पुंछी आयोग (2010) की केंद्र-राज्य संबंधों पर संस्थागत सहयोग संबंधी सिफ़ारिशें। (5) तुलनात्मक संदर्भ: हुदहुद (2014) और फानी (2019) के पश्चात राहत-प्रक्रिया के अनुभव; सेंडाई फ्रेमवर्क (2015-30) का ‘जोखिम-न्यूनीकरण’ पर बल। (6) तटीय भेद्यता: तटीय विनियमन क्षेत्र अधिसूचना, चक्रवात-प्रतिरोधी आश्रय, IMD की पूर्व-चेतावनी प्रणाली और तूफानी लहर के प्रति मानचित्रण। (7) निष्कर्ष: राहत-केंद्रित से तैयारी-केंद्रित मॉडल की ओर परिवर्तन, निधि-पूर्वानुमान और स्थानीय निकायों की क्षमता-वृद्धि के साथ संतुलित संघीय सहयोग।
स्रोत: The Hindu
Andhra Pradesh PCS (APPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी द्वारा चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास हेतु केंद्र सरकार से विशेष सहायता की मांग करते हुए लिखे गए पत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- आंध्र प्रदेश में हाल ही में आए चक्रवात के कारण राज्य को लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
- मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) से अतिरिक्त सहायता की मांग की है।
- आंध्र प्रदेश सरकार ने चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य हेतु सेना की तैनाती की मांग की है।
- केंद्र सरकार ने पहले ही आंध्र प्रदेश को चक्रवात राहत हेतु 5,000 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत कर दी है।
उत्तर: मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) से अतिरिक्त सहायता की मांग की है। — मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) से अतिरिक्त सहायता की मांग की थी।
Mains: आंध्र प्रदेश में हाल ही में आए चक्रवात के कारण उत्पन्न हुई आपदा प्रबंधन चुनौतियों और राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का विश्लेषण कीजिए। साथ ही, केंद्र सरकार से अपेक्षित राहत एवं पुनर्वास उपायों पर अपने सुझाव प्रस्तुत कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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