29 Oct ओडिशा में चक्रवात अरनब: गंजाम के 300 गांव जलमग्न, हवाई बचाव की तैयारी
✎ आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा मोचन बल राष्ट्रीय स्तर पर और राज्य आपदा त्वरित कार्य बल (जैसे ओडिशा आपदा त्वरित कार्य बल) राज्य स्तर पर पहले उत्तरदाता हैं, जबकि आपदा के समय संसाधनों का समन्वय केंद्र-राज्य…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — आपदा प्रबंधन (Disaster Management), पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव | GS Paper II — शासन व्यवस्था: केंद्र-राज्य समन्वय और संघवाद (Federalism) के संदर्भ में आपदा प्रबंधन
- Prelims: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की संरचना और परिचालन, ओडिशा आपदा त्वरित कार्य बल (ODRAF), राज्य आपदा प्रत्युत्तर निधि (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रत्युत्तर निधि (NDRF Fund), भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा चक्रवात का वर्गीकरण (पवन गति के आधार पर), रुशिकुल्या नदी (Rushikulya River) और ओडिशा का दक्षिणी तट, सेंडाई आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढाँचा (Sendai Framework)
- Essay: आपदा प्रबंधन में तैयारी बनाम प्रतिक्रिया: भारत का बदलता दृष्टिकोण, तटीय क्षेत्रों में चक्रवात और बाढ़ का बढ़ता जोखिम: जलवायु परिवर्तन की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा मोचन बल राष्ट्रीय स्तर पर और राज्य आपदा त्वरित कार्य बल (जैसे ओडिशा आपदा त्वरित कार्य बल) राज्य स्तर पर पहले उत्तरदाता हैं, जबकि आपदा के समय संसाधनों का समन्वय केंद्र-राज्य सहयोग से होता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
ओडिशा के गंजम जिले में भारी वर्षा और अचानक आई बाढ़ से लगभग 300 गाँव संपर्क से कट गए हैं। यह स्थिति चक्रवात अर्नब के प्रभाव से उत्पन्न हुई है। राज्य सरकार ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय के साथ समन्वय करके लोगों की हवाई निकासी की योजना बनाई है। पहले चरण में 120 लोगों को निकालने की योजना है, किंतु बादलों के निम्न स्तर और लगातार वर्षा के कारण हवाई अभियान में विलंब संभव है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और ओडिशा आपदा त्वरित कार्य बल के दल राहत-बचाव कार्य में लगे हैं तथा भारतीय तटरक्षक बल हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराएगा। साथ ही, आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में रेल पुल जलमग्न होने से रेल सेवाएँ बाधित हैं, जिससे फँसे यात्रियों के लिए सड़क मार्ग या नजदीकी रेलवे स्टेशनों पर आश्रय की व्यवस्था की जा रही है। यह घटना अंतर-राज्यीय समन्वय और आपदा के समय आपातकालीन परिवहन की चुनौतियों को उजागर करती है।
पृष्ठभूमि
- ओडिशा का दक्षिणी और मध्य तटीय क्षेत्र बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवातों से बार-बार प्रभावित होता रहा है। वर्ष 1999 के सुपर साइक्लोन ने इस राज्य में व्यापक जन-धन की हानि की थी, जिसके बाद आपदा प्रबंधन की संस्थागत संरचना को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत केंद्र में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला स्तर पर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण गठित किए गए हैं। इसी अधिनियम के तहत राष्ट्रीय आपदा मोचन बल का गठन हुआ है।
- राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की बटालियनें राज्यों में तैनात रहती हैं, जबकि राज्यों के अपने आपदा त्वरित कार्य बल (जैसे ओडिशा आपदा त्वरित कार्य बल) स्थानीय स्तर पर पहले उत्तरदाता के रूप में कार्य करते हैं।
- भारत में चक्रवात की पूर्व चेतावनी का दायित्व भारतीय मौसम विज्ञान विभाग पर है, और इसकी सटीक भविष्यवाणी से निकासी की योजना बनाने में सहायता मिलती है।
- सेंडाई आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढाँचा (2015-2030) भारत सहित सभी सदस्य देशों से आपदा जोखिम में कमी लाने, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली सुदृढ़ करने और समुदाय की भागीदारी बढ़ाने का आह्वान करता है।
आपदा प्रबंधन में हवाई निकासी और बहु-स्तरीय प्रतिक्रिया तंत्र क्या है?
- आपदा प्रबंधन एक चक्रीय प्रक्रिया है, जिसमें शमन (Mitigation), तैयारी (Preparedness), प्रतिक्रिया (Response) तथा पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण (Recovery and Reconstruction) के चरण आते हैं।
- प्रथम उत्तरदाता के रूप में सामान्यतः जिला प्रशासन और राज्य आपदा बल कार्य करते हैं; गंभीर स्थिति में राज्य सरकार केंद्र से सहायता माँगती है, जिसका समन्वय गृह मंत्रालय के आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा किया जाता है।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का अध्यक्ष मुख्यमंत्री होता है, जबकि राज्य कार्यकारी समिति का नेतृत्व सामान्यतः मुख्य सचिव करता है।
- राष्ट्रीय आपदा प्रत्युत्तर निधि और राज्य आपदा प्रत्युत्तर निधि से राहत एवं पुनर्वास के लिए धन उपलब्ध कराया जाता है, जिसकी मात्रा और उपयोग के नियम केंद्रीय सरकार द्वारा निर्धारित होते हैं।
- बाढ़ और चक्रवात में फँसे लोगों की निकासी के लिए सड़क, नाव, हेलीकॉप्टर और रेल, सभी साधनों का उपयोग किया जाता है; हवाई निकासी प्रायः तभी संभव होती है जब दृश्यता और बादलों की ऊँचाई उड़ान के लिए उपयुक्त हो।
- भारतीय तटरक्षक बल समुद्री और तटीय क्षेत्रों में खोज-बचाव तथा हवाई सहायता देता है, जबकि भारतीय वायु सेना और नौसेना भी आवश्यकता पड़ने पर राहत अभियानों में सहयोग करती हैं।
- चक्रवात की तीव्रता भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा निर्धारित पवन गति के आधार पर तय होती है; इसके अनुसार चक्रवात को गहरे अवदाब से लेकर अति प्रचंड चक्रवात तक वर्गीकृत किया जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| चक्रवात आर्नब (Cyclone Arnab) का प्रभाव क्षेत्र | ओडिशा के गंजाम जिले में लगभग 300 गाँव भारी वर्षा और आकस्मिक बाढ़ से जलमग्न होकर शेष क्षेत्र से कट गए हैं। |
| राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (National Disaster Response Force — NDRF) और ओडिशा आपदा त्वरित कार्य बल (Odisha Disaster Rapid Action Force — ODRAF) | बचाव अभियान में दोनों बलों की टीमें तैनात हैं; राज्य ने ODRAF की अतिरिक्त टुकड़ी गंजाम भेजी है। |
| भारतीय तटरक्षक (Indian Coast Guard) की भूमिका | राज्य सरकार के अनुसार तटरक्षक हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराएगा, जो निकासी योजना का मुख्य साधन है। |
| रुशिकुल्या नदी और अस्का क्षेत्र | रुशिकुल्या नदी तीन दिनों की अत्यधिक वर्षा से उफन गई है और अस्का में जल-स्तर खतरे के निशान के निकट है। |
| वायु मार्ग से निकासी (Airlift) | पहले चरण में 120 लोगों को निकालने की योजना है; बादलों की निम्न परत और लगातार वर्षा से इसमें देरी संभव है। |
| रेल संपर्क में व्यवधान | श्रीकाकुलम (आंध्र प्रदेश) में रेल पुल जलमग्न होने से दोनों ओर की रेलगाड़ियाँ रुकी हैं; यात्रियों को नज़दीकी स्टेशनों पर ठहराने की व्यवस्था की जा रही है। |
महत्व
शासन और प्रशासनिक
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) के ढाँचे में राज्य सरकार प्रथम उत्तरदायी इकाई है, जबकि गंभीर स्थिति में केंद्र का सहयोग लिया जाता है।
- राज्य सरकार द्वारा गृह मंत्रालय के साथ समन्वय केंद्र-राज्य सहयोगी संघवाद के व्यावहारिक स्वरूप को दर्शाता है।
- मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक और वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी से स्पष्ट कमान-संरचना का महत्व उजागर होता है।
मानवीय और सामाजिक
- जीवन-रक्षा सभी आपदा-प्रतिक्रिया में सर्वोच्च प्राथमिकता होती है; इसी उद्देश्य से निकासी और आश्रय की व्यवस्था की जा रही है।
- संपर्क-विहीन गाँवों में भोजन, पेयजल और चिकित्सा सुविधा पहुँचाना राहत-कार्य की प्रमुख चुनौती है।
परिवहन और अवसंरचना
- रेल पुल का जलमग्न होना दर्शाता है कि परिवहन अवसंरचना के जल-स्तर-मानक आपदा-जोखिम मूल्यांकन का हिस्सा होने चाहिए।
- सड़क और रेल संपर्क टूटने पर वायु मार्ग अंतिम विकल्प बन जाता है, जिसकी सीमाएँ मौसम पर निर्भर होती हैं।
जल-विज्ञान और पर्यावरणीय
- चक्रवात के साथ नदी-बाढ़ का संयुक्त प्रभाव तटीय क्षेत्रों में बहु-खतरा (Multi-hazard) प्रबंधन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
- नदी-जल-स्तर की निरंतर निगरानी और मौसम पूर्वानुमान की विश्वसनीयता निकासी के समय-निर्धारण के लिए निर्णायक है।
चुनौतियाँ
1. मौसम और दृश्यता की बाधा
- बादलों की निम्न परत और लगातार वर्षा से हेलीकॉप्टर संचालन सीमित हो जाता है, जिससे निकासी में देरी होती है।
- मौसम पर निर्भरता के कारण वायु मार्ग से निकासी की समय-सारिणी निश्चित रूप से तय नहीं की जा सकती।
यूपीएससी लिंक: आपदा प्रबंधन में प्रौद्योगिकी और मौसम पूर्वानुमान की भूमिका (GS-3: आपदा प्रबंधन)
2. संपर्क-विहीन गाँवों तक पहुँच
- जलमग्न गाँवों और बाढ़ग्रस्त सड़कों के कारण बचाव दल का पहुँचना कठिन होता है।
- तटीय ओडिशा की भौगोलिक संरचना, नदी-मुखों और निचले क्षेत्रों के कारण बाढ़ का प्रभाव व्यापक हो जाता है।
यूपीएससी लिंक: भारत की भौगोलिक विशेषताएँ और तटीय क्षेत्रों की संवेदनशीलता (GS-1: भूगोल)
3. बहु-स्तरीय समन्वय की जटिलता
- केंद्रीय बल, राज्य आपदा बल, तटरक्षक, रेलवे और दो राज्यों (ओडिशा और आंध्र प्रदेश) के बीच तालमेल आवश्यक है।
- अंतर-राज्यीय क्षेत्र में जिम्मेदारी का स्पष्ट विभाजन न होने पर कार्य में दोहराव या विलंब हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य संबंध और संघवाद की व्यावहारिक चुनौतियाँ (GS-2: शासन)
4. निकासी से पुनर्वास तक की श्रृंखला
- निकाले गए लोगों के लिए आश्रय-स्थल, भोजन और चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था निकासी जितनी ही आवश्यक है।
- यदि निकासी के बाद पुनर्वास योजना स्पष्ट न हो, तो विस्थापन की अवधि बढ़ जाती है।
यूपीएससी लिंक: आपदा जोखिम न्यूनीकरण और पुनर्वास नीति (GS-3: आपदा प्रबंधन; GS-2: सामाजिक न्याय)
5. नदी-बाढ़ और अवसंरचना की सुरक्षा
- रुशिकुल्या जैसी नदियों का खतरे के निशान के निकट बहना निचले इलाकों में बाढ़ जोखिम को बढ़ाता है।
- रेल पुल जैसी महत्वपूर्ण संरचनाओं का जलमग्न होना अवसंरचना के डिज़ाइन और रखरखाव पर प्रश्न उठाता है।
यूपीएससी लिंक: भारत में नदी-बाढ़ प्रबंधन और आधारभूत संरचना की सुरक्षा (GS-3: अवसंरचना और आपदा प्रबंधन)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता |
|---|---|
| हवाई निकासी में देरी | बादलों की निम्न परत और वर्षा से पहले चरण की 120 लोगों की निकासी भी बाधित हो सकती है। |
| संपर्क-विहीन गाँव | लगभग 300 गाँवों में भोजन, पेयजल और चिकित्सा सहायता पहुँचाना कठिन है। |
| अंतर-राज्यीय समन्वय | रेल और सड़क संपर्क टूटने से ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच यात्रियों और राहत सामग्री का प्रवाह प्रभावित है। |
| नदी का बढ़ता जल-स्तर | रुशिकुल्या नदी के खतरे के निशान के निकट होने से बाढ़ का दायरा बढ़ने का जोखिम है। |
| रेल अवसंरचना की सुरक्षा | जलमग्न रेल पुल से यात्री-गाड़ियों का परिचालन रुका है, जिससे आर्थिक और मानवीय दोनों प्रभाव होते हैं। |
| आश्रय और पुनर्वास | निकाले गए लोगों के लिए अस्थायी आवास और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था पर दबाव है। |
आगे की राह
- मौसम पूर्व-चेतावनी (Early Warning) को निकासी के निर्णय से सीधे जोड़ा जाए, ताकि बादल छँटने की प्रतीक्षा में समय नष्ट न हो।
- वायु मार्ग बाधित होने पर सड़क, नाव और अन्य स्थलीय विकल्पों की पूर्व-योजना तैयार रखी जाए।
- संवेदनशील गाँवों में ग्राम-स्तरीय आपदा प्रबंधन योजना बनाई जाए और चक्रवात-आश्रय स्थलों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित हो।
- रेल और सड़क पुलों के लिए नदी-बाढ़ के जल-स्तर मानक की समीक्षा की जाए और संवेदनशील संरचनाओं की निरंतर निगरानी हो।
- ओडिशा और आंध्र प्रदेश जैसे सीमावर्ती राज्यों के बीच अंतर-राज्यीय समन्वय तंत्र को पहले से सक्रिय रखा जाए।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority — NDMA) के दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (State Disaster Response Fund — SDRF) का समय पर उपयोग हो।
- सेंडाई आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढाँचा (Sendai Framework for Disaster Risk Reduction) के अनुरूप तटीय क्षेत्रों में जोखिम-सूचित भूमि-उपयोग और विकास योजना अपनाई जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
चक्रवात प्रबंधन · आपदा न्यूनीकरण · राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) · राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) · भारतीय तटरक्षक बल · पूर्व चेतावनी प्रणाली · समुदाय-आधारित आपदा प्रबंधन · जलवायु परिवर्तन · तटीय भेद्यता · अंतर-राज्यीय समन्वय · पुनर्वास और पुनर्निर्माण · आपदा लचीलापन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21 — जीवन-रक्षा और राहत-बचाव का दायित्व
- अनुच्छेद 355 — राज्यों की संरक्षा में केंद्र का दायित्व (व्यापक व्याख्या में)
अवधारणा प्रवाह
चक्रवात आर्नब से गंजाम सहित तटीय ओडिशा में अत्यधिक वर्षा होती है। → तीन दिनों की लगातार वर्षा से रुशिकुल्या नदी उफन जाती है और उसका पानी बस्तियों में फैलता है। → लगभग 300 गाँव जलमग्न होकर सड़क और संपर्क से कट जाते हैं। → रेल पुल जलमग्न होने से रेल सेवाएँ बाधित होती हैं और बादलों की निम्न परत से हवाई पहुँच सीमित होती है। → राज्य सरकार गृह मंत्रालय के साथ समन्वय करती है; NDRF, ODRAF और भारतीय तटरक्षक की तैनाती होती है। → पहले चरण में 120 लोगों की हवाई निकासी की योजना है, शेष को सड़क या नज़दीकी रेल स्टेशनों पर आश्रय दिया जाता है। → जीवन-रक्षा के बाद राहत, पुनर्वास और अवसंरचना की पुनर्स्थापना की प्रक्रिया शुरू होती है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
2. भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) केवल समुद्री खोज और बचाव कार्यों के लिए जिम्मेदार है।
3. भारत में आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005, राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों की स्थापना का प्रावधान करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि NDRF केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में आता है। कथन 2 गलत है क्योंकि भारतीय तटरक्षक बल समुद्री खोज और बचाव के अलावा समुद्री पर्यावरण संरक्षण, तस्करी विरोधी अभियानों और आपदा राहत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कथन 3 सही है क्योंकि आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005, भारत में आपदा प्रबंधन के लिए एक संस्थागत ढांचा प्रदान करता है, जिसमें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) शामिल हैं।
Q2. अभिकथन (A): चक्रवात ‘अर्नाब’ के कारण ओडिशा में भारी वर्षा और बाढ़ से 300 से अधिक गाँव जलमग्न हो गए हैं।
कारण (R): तटीय क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा और नदियों का उफान आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता को बढ़ा सकता है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि समाचार रिपोर्ट में चक्रवात ‘अर्नाब’ के कारण ओडिशा के गंजाम जिले में 300 से अधिक गाँवों के जलमग्न होने का उल्लेख है। कारण (R) भी सही है क्योंकि तटीय क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा और नदियों का उफान बाढ़ जैसी आपदाओं का एक प्रमुख कारण है, और यह चक्रवात ‘अर्नाब’ के प्रभाव को स्पष्ट करता है। इसलिए, R, A की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ चक्रवातों से उत्पन्न होने वाली आपदाओं के प्रबंधन में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। भारत में आपदा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत में चक्रवातों की भेद्यता और आपदा प्रबंधन के महत्व पर संक्षिप्त प्रकाश डालें।
2. समन्वय की भूमिका: राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), भारतीय तटरक्षक बल, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकारों जैसी विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के महत्व का विश्लेषण करें। बचाव, राहत, पुनर्वास और पूर्व चेतावनी प्रणालियों में समन्वय के उदाहरण दें।
3. चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण: समन्वय में आने वाली चुनौतियों, जैसे संसाधनों की कमी, संचार अंतराल, अंतर-राज्यीय समन्वय की समस्याएँ, राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी का अभाव, पर चर्चा करें।
4. प्रभावी बनाने के उपाय: आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए ठोस सुझाव दें, जैसे: पूर्व चेतावनी प्रणालियों का सुदृढ़ीकरण, क्षमता निर्माण (विशेषकर स्थानीय स्तर पर), समुदाय-आधारित आपदा प्रबंधन को बढ़ावा देना, आधुनिक तकनीक का उपयोग (जैसे ड्रोन, उपग्रह), जलवायु परिवर्तन अनुकूलन रणनीतियाँ, आपदा-रोधी अवसंरचना का निर्माण, वित्तीय संसाधनों का पर्याप्त आवंटन, और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों का प्रभावी कार्यान्वयन।
5. निष्कर्ष: एक समग्र और बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल देते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: orissapost.com
Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: उड़ीसा सरकार द्वारा चक्रवात ‘अर्नब’ के मद्देनज़र गंजम ज़िले में 300 से अधिक गांवों में फंसे लोगों के लिए किस प्रकार की निकासी योजना लागू करने की योजना बनाई गई है?
- रेल द्वारा निकासी
- सड़क मार्ग द्वारा निकासी
- वायु निकासी (हेलीकॉप्टर)
- नाव द्वारा निकासी
उत्तर: वायु निकासी (हेलीकॉप्टर) — उड़ीसा सरकार ने चक्रवात ‘अर्नब’ के कारण गंजम ज़िले में फंसे लोगों को बचाने के लिए वायु निकासी (हेलीकॉप्टर) का उपयोग करने की योजना बनाई है।
Mains: चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव के कारण गंजम ज़िले में फंसे लोगों की निकासी में आने वाली चुनौतियों और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का वर्णन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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