30 Oct गुजरात: बनासकांठा में पीएम के भाषण से उठे विकास के नए आयाम
✎ पीएम-किसान सम्मान निधि केंद्र द्वारा पूर्णतः वित्त पोषित प्रत्यक्ष आय सहायता योजना है, जिसमें पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष ₹6,000 तीन समान किश्तों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — शासन (प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से केंद्र प्रायोजित योजनाएं, केंद्र-राज्य संबंध, कृषि जैसे राज्य सूची के विषय में केंद्र की भूमिका) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — भारतीय अर्थव्यवस्था और कृषि (कृषि बजट, किसान आय सहायता, लघु एवं सीमांत किसानों की आर्थिक सुरक्षा, कृषि में पूंजी निर्माण)
- Prelims: पीएम-किसान सम्मान निधि (PM-KISAN): प्रति वर्ष ₹6,000 की प्रत्यक्ष आय सहायता, तीन समान किश्तों में, पात्र भूमिधारक किसान परिवार और बहिष्करण श्रेणियां, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer) और जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) त्रिमूर्ति, अनुच्छेद 246 और राज्य सूची की प्रविष्टि 14 (कृषि), कृषि जनगणना में लघु और सीमांत किसानों के वर्गीकरण की परिभाषा (सीमांत: 1 हेक्टेयर से कम; लघु: 1 से 2 हेक्टेयर), केंद्रीय क्षेत्र की योजना और केंद्र प्रायोजित योजना में अंतर
- Essay: छोटी जोत, बड़ी चुनौती: लघु और सीमांत किसानों के लिए प्रत्यक्ष आय सहायता कृषि संकट का समाधान कहां तक है?, सीधे खातों में नकद अंतरण: कल्याणकारी राज्य में लक्ष्यीकरण, पारदर्शिता और राजकोषीय उत्तरदायित्व का संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: पीएम-किसान सम्मान निधि केंद्र द्वारा पूर्णतः वित्त पोषित प्रत्यक्ष आय सहायता योजना है, जिसमें पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष ₹6,000 तीन समान किश्तों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से दिए जाते हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
30 अक्टूबर 2026 को गुजरात के बनासकांठा में विकास परियोजनाओं के शुभारंभ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने मातृशक्ति, बच्चों तथा किसानों और पशुपालकों से जुड़ी अनेक परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण की जानकारी दी। इसी अवसर पर पीएम-किसान सम्मान निधि की नई किश्त जारी होने की बात कही गई। भाषण में दिए गए सरकारी दावों के अनुसार लगभग 10 करोड़ किसानों के खातों में 18,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी गई, जिसमें गुजरात के 50 लाख से अधिक किसान शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने कृषि बजट में वृद्धि, लघु किसानों की बढ़ती हिस्सेदारी और प्रत्यक्ष आय सहायता के महत्व को भी रेखांकित किया। यह समाचार प्रत्यक्ष आय सहायता की नीति, उसके लाभार्थी-लक्ष्यीकरण और कृषि वित्त की दिशा को समझने के लिए प्रासंगिक है।
पृष्ठभूमि
- कृषि संविधान के अनुसार राज्य सूची का विषय है (राज्य सूची की प्रविष्टि 14), जबकि केंद्र सरकार नीति निर्माण, वित्तीय सहायता और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के माध्यम से हस्तक्षेप करती है।
- भारत में कृषि जनगणना के अनुसार लघु और सीमांत किसानों की संख्या कुल किसानों में बहुत बड़ी है; इसी कारण छोटी जोत वाले किसानों की आय सुरक्षा नीति का केंद्रीय प्रश्न बनी हुई है।
- पीएम-किसान सम्मान निधि की शुरुआत 2019 में हुई। इसे केंद्र सरकार द्वारा पूर्णतः वित्त पोषित प्रत्यक्ष आय सहायता योजना के रूप में लागू किया गया, जिसमें राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचती है।
- प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण की व्यवस्था जन धन, आधार और मोबाइल (JAM) की त्रिमूर्ति पर आधारित है, जिससे मध्यस्थों की भूमिका कम करने और रिसाव रोकने का लक्ष्य रखा गया है।
- आर्थिक दृष्टि से प्रत्यक्ष आय सहायता को कृषि आय सहायता के उस रूप में देखा जाता है जो उत्पादन-आधारित सब्सिडी या मूल्य समर्थन से भिन्न है, क्योंकि इसमें लाभ उत्पादन और बाजार मूल्य से सीधे नहीं जुड़ता।
पीएम-किसान सम्मान निधि क्या है?
- यह केंद्र सरकार की प्रत्यक्ष आय सहायता योजना है, जिसके अंतर्गत पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष ₹6,000 की राशि तीन समान किश्तों में दी जाती है।
- राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका सीमित होती है।
- योजना के तहत भूमिधारक किसान परिवार पात्र हैं, जबकि कुछ श्रेणियों जैसे संस्थागत भूमिधारक, कुछ संवैधानिक पदधारक और उच्च आय वर्ग को बहिष्कृत रखा गया है।
- यह योजना कृषि उत्पादन से जुड़ी सब्सिडी से अलग है; इसका उद्देश्य किसानों की बुनियादी आय और उनकी खेती-संबंधी आवश्यकताओं को सहारा देना है।
- कृषि राज्य सूची का विषय होने के कारण इस योजना का क्रियान्वयन राज्य सरकारों के सहयोग से होता है, जबकि वित्तीय दायित्व केंद्र सरकार वहन करती है।
- लघु और सीमांत किसान इस योजना के सबसे बड़े लक्ष्य समूह हैं, क्योंकि उनकी जोत छोटी होने से उनकी आय पर जोखिम और असुरक्षा अधिक रहती है।
- नीति-विमर्श में यह बहस रहती है कि प्रत्यक्ष आय सहायता, भूमि-सुधार, सिंचाई और बाजार पहुंच जैसे उपायों की तुलना में कितनी प्रभावी है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer) | पीएम किसान सम्मान निधि की राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में पहुँचती है, जिससे मध्यस्थों की भूमिका घटती है और रिसाव की संभावना कम होती है |
| प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) | केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) है, जिसमें पात्र लघु एवं सीमांत किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये तीन समान किश्तों में दिए जाते हैं |
| लक्षित वितरण | भाषण के अनुसार देश के लगभग 85 प्रतिशत किसान छोटे हैं; योजना का मुख्य लक्ष्य-वर्ग यही है |
| एक साथ किश्त का वितरण | इस अवसर पर लगभग 10 करोड़ किसानों के खातों में 18,000 करोड़ रुपये से अधिक भेजे जाने का उल्लेख हुआ |
| परियोजनाओं के साथ आयोजन | विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण तथा किसान सम्मान निधि की नई किश्त एक ही कार्यक्रम में हुई; इनमें मातृशक्ति, बच्चों और पशुपालकों से जुड़ी परियोजनाएं शामिल थीं |
महत्व
आर्थिक
- नकद अंतरण से ग्रामीण क्रय शक्ति बढ़ती है और खेती से बाहर की ग्रामीण मांग को सहारा मिलता है
- लघु एवं सीमांत किसानों की नकदी संबंधी आवश्यकताओं में राहत से बीज, खाद और अन्य आदान खरीदने की क्षमता बनी रहती है
- भाषण में कृषि बजट के 2013-14 की तुलना में पांच गुना से अधिक होने का उल्लेख है; यह सरकारी दावा है और इसकी पुष्टि आधिकारिक बजट दस्तावेजों से करनी चाहिए
सामाजिक-कल्याण
- नियमित आय सहायता से छोटे किसानों की जोखिम उठाने की क्षमता बढ़ने की अपेक्षा की जाती है
- ऋण पर निर्भरता घटने से साहूकारी ऋण के जाल में फँसने की संभावना कम हो सकती है
- मातृशक्ति, बच्चों और पशुपालकों से जुड़ी परियोजनाएं ग्रामीण परिवारों के बहु-आयामी कल्याण की ओर संकेत करती हैं
शासन और प्रशासन
- आधार और बैंक खातों की संबद्धता से लाभार्थी की पहचान और भुगतान की पारदर्शिता बढ़ी है
- केंद्र और राज्य के बीच समन्वय से लाभार्थी-सूची के अद्यतन पर जोर बढ़ा है
- डिजिटल माध्यम से एक साथ करोड़ों लाभार्थियों तक पहुँचना प्रशासनिक क्षमता का उदाहरण है
संघीय परिप्रेक्ष्य
- कृषि राज्य का विषय होने के बावजूद केंद्र सीधे किसानों तक पहुँचता है, जिससे केंद्र-राज्य सहयोग का नया स्वरूप सामने आता है
- राज्य सरकारें अपनी भूमि-अभिलेख व्यवस्था और कृषि योजनाओं के माध्यम से इस योजना की सफलता में भागीदार होती हैं
चुनौतियाँ
1. समावेशन और बहिष्करण की समस्या
- पात्रता प्रायः भूमि-स्वामित्व के अभिलेखों पर आधारित है, इसलिए बटाईदार और काश्तकार किसान छूट सकते हैं
- भूमि-अभिलेखों के डिजिटलीकरण में राज्यों के बीच अंतर है, जिससे पात्रता निर्धारण असमान हो सकता है
- अपात्र व्यक्ति के लाभ लेने और पात्र व्यक्ति के वंचित रहने, दोनों तरह की त्रुटियां संभव हैं
यूपीएससी लिंक: लक्षित सार्वजनिक सेवा वितरण और सामाजिक न्याय (GS-2)
2. राजकोषीय भार और संसाधन प्रबंधन
- प्रति किसान 6,000 रुपये वार्षिक सहायता से बढ़ते लाभार्थियों के साथ कुल व्यय बढ़ता है
- निरंतर नकद अंतरण बनाम पूंजी-निर्माण व्यय के बीच संतुलन बनाना राजकोषीय नीति की चुनौती है
- राजकोषीय घाटे पर दबाव के समय ऐसी योजनाओं की दीर्घकालिक स्थिरता पर प्रश्न उठते हैं
यूपीएससी लिंक: राजकोषीय नीति, राजकोषीय घाटा और सार्वजनिक व्यय (GS-3)
3. आय सहायता बनाम उत्पादकता और संरचनात्मक सुधार
- नकद सहायता आय को सहारा देती है, परंतु उत्पादकता बढ़ाने के लिए सिंचाई, भंडारण और शीत-शृंखला जैसे ढांचे आवश्यक हैं
- छोटी जोत की समस्या बनी रहने पर सहायता का प्रभाव सीमित रह सकता है
- फसल-विविधीकरण और बाजार तक पहुँच के बिना आय में स्थायी वृद्धि कठिन है
यूपीएससी लिंक: भारतीय कृषि की चुनौतियाँ, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि विपणन (GS-3)
4. आंकड़ों का सत्यापन और पारदर्शिता
- भाषण में 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत या लाभ का दावा किया गया, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए विस्तृत गणना-पद्धति आवश्यक है
- लाभार्थियों की संख्या, राशि और वितरण के आंकड़े आधिकारिक स्रोतों से मिलान किए जाने चाहिए
- राजनीतिक मंच से दिए गए आंकड़े और लेखा-परीक्षित आंकड़े में अंतर होने पर नीति-मूल्यांकन कठिन हो जाता है
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक नीति में आंकड़ों की भूमिका और शासन में पारदर्शिता (GS-2 और GS-4)
5. महिला किसानों का भूमि-स्वामित्व
- ग्रामीण भारत में महिलाओं के नाम भूमि-स्वामित्व कम है, जबकि खेती के श्रम में उनकी भागीदारी अधिक है
- भूमि-स्वामित्व पर आधारित पात्रता में महिला कृषक स्वाभाविक रूप से पीछे रह जाती हैं
- संयुक्त पट्टा और भूमि-अभिलेख में महिलाओं का नाम जोड़ने जैसे उपाय इस अंतर को कम कर सकते हैं
यूपीएससी लिंक: लैंगिक न्याय और सामाजिक सशक्तिकरण (GS-1 और GS-2)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| बहिष्करण त्रुटि | बटाईदार और काश्तकार किसान भूमि-अभिलेख के अभाव में योजना से बाहर रह सकते हैं |
| राजकोषीय दबाव | लाभार्थियों की संख्या बढ़ने पर वार्षिक व्यय बढ़ता है और अन्य विकास-व्यय पर प्रभाव पड़ सकता है |
| उत्पादकता का प्रश्न | नकद सहायता के साथ सिंचाई, भंडारण और बाजार-संपर्क न हो तो आय में स्थायी वृद्धि सीमित रहती है |
| आंकड़ों की विश्वसनीयता | सार्वजनिक मंचों से दिए गए संचयी आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है |
| भूमि-विखंडन | छोटी और बिखरी जोतें उत्पादन-लागत बढ़ाती हैं और सहायता के प्रभाव को कम करती हैं |
| लैंगिक अंतर | महिला किसानों का भूमि-स्वामित्व कम होने से वे पात्रता और लाभ दोनों में पीछे रह जाती हैं |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN)
आगे की राह
- भूमि-अभिलेखों के डिजिटलीकरण और अद्यतन के लिए राज्यों के साथ समन्वित अभियान चलाया जाए, ताकि पात्रता का निर्धारण सही हो
- बटाईदार और काश्तकार किसानों की पहचान के लिए वैकल्पिक सत्यापन व्यवस्था पर विचार किया जाए
- लाभार्थी-सूची के नियमित सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) की व्यवस्था हो और परिणाम सार्वजनिक किए जाएं
- नकद सहायता के साथ सिंचाई, कृषि-भंडारण और शीत-शृंखला में निवेश बढ़ाया जाए, ताकि आय सहायता उत्पादकता से जुड़े
- महिला किसानों के नाम भूमि-स्वामित्व और संयुक्त पट्टे में शामिल करने के प्रयास तेज किए जाएं
- सरकारी दावों और आधिकारिक आंकड़ों के मिलान के लिए स्वतंत्र मूल्यांकन और प्रकाशित पद्धति अपनाई जाए
- कृषि बजट और राजकोषीय योजना में दीर्घकालिक स्थिरता का आकलन नियमित रूप से हो
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer, DBT) · प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) · लघु और सीमांत किसान · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) · कृषि: राज्य सूची का विषय · आय-समर्थन बनाम मूल्य-समर्थन · कृषि जनगणना (Agriculture Census) · बटाईदार किसान और भूमि अभिलेख · राजकोषीय दायित्व और समेकित निधि (Consolidated Fund of India) · अनुच्छेद 282 के अंतर्गत अनुदान · न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) · कृषि आय में स्थिरता
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- सातवीं अनुसूची, राज्य सूची की प्रविष्टि 14: कृषि राज्य विषय है
- अनुच्छेद 282: केंद्रीय योजनाओं के वित्तीय आधार का संवैधानिक स्रोत
अवधारणा प्रवाह
भूमि-स्वामित्व अभिलेख और बैंक खाते के आधार पर पात्र लघु एवं सीमांत किसान की पहचान → पीएम किसान सम्मान निधि के अंतर्गत केंद्र द्वारा निर्धारित राशि की किश्त जारी → प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुँचती है → किसानों के हाथ में नकद आय से बीज, खाद और घरेलू व्यय की मांग में वृद्धि → ग्रामीण मांग और खेती की जोखिम-क्षमता में सुधार की संभावना बनती है → इस सुधार को टिकाऊ बनाने के लिए उत्पादकता, भंडारण, बाजार और सत्यापित आंकड़ों की आवश्यकता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना के अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की सहायता तीन किश्तों में दी जाती है।
2. यह योजना पूर्णतः केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) है।
3. कृषि संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची का विषय है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: पीएम-किसान के अंतर्गत 6,000 रुपये वार्षिक सहायता तीन समान किश्तों में दी जाती है। कथन 2 सही है: यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना है और इसका वित्त पोषण केंद्र द्वारा किया जाता है। कथन 3 गलत है: कृषि सातवीं अनुसूची की राज्य सूची (प्रविष्टि 14) का विषय है, संघ सूची का नहीं।
Q2. कथन (A): प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सहायता राशि भेजने से सरकारी योजनाओं में रिसाव और अपव्यय कम हुआ है।
कारण (R): सहायता राशि इलेक्ट्रॉनिक रूप से लाभार्थी के बैंक खाते में सीधे पहुँचती है, जिससे मध्यस्थों की भूमिका घटती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — DBT में राशि सीधे लाभार्थी के खाते में जाती है, इसलिए बिचौलियों के माध्यम से होने वाला रिसाव घटता है। यहाँ कारण (R) कथन (A) की सीधी व्याख्या है। यह तर्क सामान्यतः नीति-मूल्यांकन में भी प्रयोग होता है, परंतु प्रत्येक योजना में अपवंचन और बहिष्करण की स्थितियाँ अलग हो सकती हैं।
Q3. निम्नलिखित सूचियों को सुमेलित कीजिए:
सूची I (विषय/संस्था)
1. कृषि (Agriculture)
2. संविधान का अनुच्छेद 282
3. नीति आयोग (NITI Aayog)
सूची II (विवरण)
A. राज्य सूची की प्रविष्टि
B. केंद्र या राज्य द्वारा सार्वजनिक प्रयोजन के लिए अनुदान का प्रावधान
C. वर्ष 2015 में योजना आयोग के स्थान पर स्थापित संस्था
सही सुमेलन चुनिए:
- 1-B, 2-A, 3-C
- 1-C, 2-B, 3-A
- 1-A, 2-C, 3-B
- 1-A, 2-B, 3-C
उत्तर: 1-A, 2-B, 3-C — कृषि सातवीं अनुसूची की राज्य सूची का विषय है (1-A)। अनुच्छेद 282 केंद्र या राज्य को सार्वजनिक प्रयोजन हेतु अनुदान देने की शक्ति देता है (2-B)। नीति आयोग का गठन 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग के स्थान पर हुआ (3-C)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ प्रत्यक्ष आय-हस्तांतरण योजनाएँ, जैसे पीएम-किसान, छोटे किसानों की आय-सुरक्षा का सीधा साधन हैं, किंतु कृषि राज्य सूची का विषय होने के कारण इनकी सफलता सहकारी संघवाद की व्यवस्था पर भी निर्भर करती है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि प्रत्यक्ष आय-समर्थन और मूल्य-समर्थन या बाज़ार-सुधार के बीच नीतिगत संतुलन किस प्रकार साधा जा सकता है। (15 Marks)
रूपरेखा: 1. संवैधानिक आधार: कृषि सातवीं अनुसूची की राज्य सूची (प्रविष्टि 14) का विषय है; भूमि सुधार और भू-अभिलेख भी राज्य सूची में हैं (प्रविष्टि 18)। केंद्र द्वारा योजनाएँ अनुच्छेद 282 के अंतर्गत अनुदान से और केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में चलाई जाती हैं। सहकारी संघवाद और नीति आयोग की भूमिका का उल्लेख करें।
2. योजना का स्वरूप: पीएम-किसान फरवरी 2019 में आरंभ हुई; पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये तीन किश्तों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) से दिए जाते हैं; संस्थागत भूस्वामी और आयकरदाता जैसी श्रेणियाँ बहिष्कृत हैं।
3. आँकड़े: कृषि जनगणना 2015-16 के अनुसार देश की परिचालन जोतों में लघु और सीमांत किसानों का हिस्सा लगभग 86 प्रतिशत है, जो भाषण में बताए गए 85 प्रतिशत से मेल खाता है। भाषण में बताए गए आँकड़े (लगभग 10 करोड़ किसान, 18,000 करोड़ रुपये से अधिक की किश्त) सरकारी दावे हैं और इन्हें आधिकारिक बजट और लाभार्थी-रिपोर्ट से मिलाना चाहिए।
4. समालोचना के बिंदु: बटाईदार और काश्तकार किसान भूमि-अभिलेख के अभाव में छूट सकते हैं; वितरण सभी जोतों पर समान होने से आय-असमानता पर सीमित प्रभाव; राजकोषीय दायित्व; आय-समर्थन से उत्पादन-संरचना और फसल-विविधीकरण पर प्रभाव नगण्य।
5. तुलनात्मक राज्य-मॉडल: ओडिशा की कालिया (KALIA) और तेलंगाना की रायथु बंधु जैसी राज्य-स्तरीय योजनाएँ, जो केंद्र-राज्य समन्वय का उदाहरण हैं।
6. संतुलन के विकल्प: स्वामीनाथन आयोग (2006) की सिफारिश के अनुसार C2+50 प्रतिशत फार्मूले पर आधारित MSP बहस; प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना; बाज़ार सुधार, भंडारण और कृषि-आधारित उद्योग; आय-समर्थन को मूल्य-समर्थन का पूरक मानने का तर्क।
7. निष्कर्ष: आय-समर्थन को संरचनात्मक सुधारों का पूरक बनाकर, भूमि-अभिलेख सुधार और राज्यों के साथ समन्वय से ही दीर्घकालिक कृषि आय-स्थिरता संभव है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Gujarat PCS (GPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: गुजरात के बनासकांठा जिले में हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई प्रमुख विकास परियोजनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A. इन परियोजनाओं में मुख्य रूप से सौर ऊर्जा परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया है, जिससे राज्य को ‘ऊर्जा आत्मनिर्भर’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
- B. इन परियोजनाओं के अंतर्गत बनासकांठा में एक नया औद्योगिक गलियारा स्थापित किया जाएगा, जो गुजरात के पश्चिमी क्षेत्र को पूर्वी क्षेत्र से जोड़ेगा।
- C. प्रधानमंत्री ने बनासकांठा में ‘वन बंधु कल्याण योजना’ के तहत आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए 500 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की।
- D. इन परियोजनाओं में मुख्यतः कृषि क्षेत्र के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, जिसमें ‘धानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ के अंतर्गत नहरों का निर्माण शामिल है।
उत्तर: C. प्रधानमंत्री ने बनासकांठा में ‘वन बंधु कल्याण योजना’ के तहत आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए 500 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की। — प्रधानमंत्री ने बनासकांठा में आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए ‘वन बंधु कल्याण योजना’ के तहत 500 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की थी।
Mains: गुजरात के बनासकांठा जिले में विकास परियोजनाओं के शुभारंभ के अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए भाषण के संदर्भ में, आदिवासी क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार की संयुक्त पहलों पर प्रकाश डालिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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