30 Oct वायुसेना उप प्रमुख नियुक्त: एयर मार्शल वालिया का कार्यभार संभालने का महत्व
✎ वायुसेना उप प्रमुख वायुसेना का दूसरा सर्वोच्च पद है, जिसे केंद्र सरकार नियुक्त करती है और जो प्रमुख की अनुपस्थिति या रिक्ति में उसके कर्तव्य निभाता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — सुरक्षा (आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा में सशस्त्र बलों की भूमिका; वायुशक्ति और रक्षा तैयारी) | GS Paper II — राजव्यवस्था (संघ कार्यपालिका; राष्ट्रपति की सर्वोच्च कमान और सशस्त्र बलों पर असैनिक नियंत्रण)
- Prelims: वायुसेना उप प्रमुख (Vice Chief of Air Staff), वायुसेना प्रमुख (Chief of Air Staff), एयर मार्शल और एयर चीफ मार्शल की रैंक संरचना, पूर्वी वायु कमान (Eastern Air Command), राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (National Defence Academy), अनुच्छेद 53 — संघ की कार्यपालिका शक्ति और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमान, वायु सेना पदक (Vayu Sena Medal) और अति विशिष्ट सेवा पदक (Ati Vishisht Seva Medal), मिग-21, मिग-23, मिग-27, जगुआर और सुखोई-30 एमकेआई विमान
- Essay: सशस्त्र बलों का व्यावसायिक नेतृत्व और लोकतंत्र में असैनिक-सैन्य संबंध, आत्मनिर्भर रक्षा तैयारी के लिए वायुशक्ति का आधुनिकीकरण और मानव संसाधन विकास
त्वरित पुनरावृत्ति: वायुसेना उप प्रमुख वायुसेना का दूसरा सर्वोच्च पद है, जिसे केंद्र सरकार नियुक्त करती है और जो प्रमुख की अनुपस्थिति या रिक्ति में उसके कर्तव्य निभाता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्र सरकार ने एयर मार्शल इंद्रपाल सिंह वालिया को 1 नवंबर 2026 से वायुसेना का उप प्रमुख (Vice Chief of Air Staff) नियुक्त किया है। वे अभी पूर्वी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ हैं। उन्होंने एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित का स्थान लिया है, जो 31 अक्टूबर 2026 को वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे। यह नियुक्ति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वायुसेना के शीर्ष दो पदों पर एक साथ परिवर्तन हो रहा है। इससे सेवा-नेतृत्व की निरंतरता और उत्तराधिकार की संस्थागत व्यवस्था का व्यावहारिक उदाहरण सामने आता है।
पृष्ठभूमि
- भारतीय वायुसेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी। यह भारतीय सशस्त्र बलों की तीन सेनाओं में से एक है और रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करती है।
- राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (National Defence Academy) की स्थापना 1954 में हुई थी। यहाँ से प्रशिक्षित अधिकारी तीनों सेनाओं में जाते हैं। इस नियुक्ति में वालिया भी इसी संस्थान के पूर्व छात्र हैं।
- वर्ष 2019 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का पद सृजित किया गया, जो सैन्य मामलों के विभाग के प्रमुख के रूप में तीनों सेनाओं के बीच समन्वय का कार्य करता है। उप प्रमुख जैसे पद सेवा-प्रमुखों के स्तर पर परिचालन-नेतृत्व को बनाए रखते हैं।
- सशस्त्र बलों के प्रमुखों और उप प्रमुखों की नियुक्ति केंद्र सरकार करती है। वरिष्ठ सैन्य पदों पर चयन में सेवा-वरिष्ठता, परिचालन अनुभव और कमान-अनुभव को प्रमुख आधार माना जाता है।
- वायुसेना की अग्रिम पंक्ति में मिग-21 से लेकर सुखोई-30 एमकेआई तक कई पीढ़ियों के विमान हैं। ऐसे में इन सभी विमानों का अनुभव रखने वाले अधिकारी का शीर्ष पद पर आना आधुनिकीकरण और परिचालन-दक्षता की दृष्टि से प्रासंगिक है।
वायुसेना उप प्रमुख (Vice Chief of Air Staff) कौन होता है?
- वायुसेना उप प्रमुख वायुसेना प्रमुख के बाद सेवा का दूसरा सर्वोच्च पद है। यह एयर मार्शल रैंक का तीन-सितारा पद होता है।
- वायुसेना उप प्रमुख प्रशासनिक, स्टाफ और परिचालन मामलों में वायुसेना प्रमुख की सहायता करता है और कुछ विषयों में उनके निर्देशों के अनुसार निर्णय-प्रक्रिया में भागीदारी निभाता है।
- वायुसेना प्रमुख का पद रिक्त होने पर उप प्रमुख उसके कर्तव्यों का निर्वहन कर सकता है, जिससे सेवा-प्रमुख के पद पर निरंतरता बनी रहती है।
- सशस्त्र बलों पर संवैधानिक नियंत्रण अनुच्छेद 53 के तहत है, जिसके अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमान भी राष्ट्रपति के पास होती है। उप प्रमुख इसी संवैधानिक ढाँचे के भीतर कार्य करता है।
- वायुसेना में अधिकारियों के सेवा-नियम वायु सेना अधिनियम, 1950 (Air Force Act, 1950) द्वारा शासित होते हैं। इसी अधिनियम की व्यवस्था में वायुसेना के अधिकारियों के अनुशासन और सेवा-शर्तें निर्धारित होती हैं।
- रैंक-संरचना में एयर मार्शल से ऊपर एयर चीफ मार्शल होता है, जो वायुसेना प्रमुख का पद होता है। इसलिए उप प्रमुख और प्रमुख के बीच एक रैंक-स्तर का अंतर होता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| नियुक्ति की प्रकृति | एयर मार्शल इंद्रपाल सिंह वालिया को 1 नवंबर 2026 से वायुसेना उप प्रमुख (Vice Chief of Air Staff, VCAS) नियुक्त किया गया है। यह पद वायुसेना प्रमुख (Chief of Air Staff, CAS) के बाद दूसरा सर्वोच्च परिचालन पद है, जो प्रमुख के कार्यों में सहायता करता है और आवश्यकता पड़ने पर उनका स्थान लेता है। |
| वर्तमान पद से संक्रमण | वे पूर्वी वायु कमान (Eastern Air Command) के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (AOC-in-C) हैं। किसी क्षेत्रीय कमान के प्रमुख से उप प्रमुख बनना वायुसेना के भीतर संचालन-अनुभव और मुख्यालय-स्तरीय नीति-निर्माण के बीच संतुलन का संकेत है। |
| उत्तराधिकार की कड़ी | एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित 31 अक्टूबर 2026 को वायुसेना के 29वें प्रमुख का पदभार ग्रहण करेंगे। इस प्रकार शीर्ष नेतृत्व में निरंतरता बनी रहती है और नेतृत्व-परिवर्तन सुचारु रहता है। |
| लड़ाकू विमान और परिचालन अनुभव | मिग-21, मिग-23, मिग-27, जगुआर और सुखोई-30 एमकेआई के सभी संस्करणों को उड़ाने का अनुभव है। अग्रिम पंक्ति के स्क्वाड्रन और टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (TACDE) की कमान से उनकी सामरिक और युद्ध-विकास संबंधी दक्षता स्पष्ट होती है। |
| कूटनीतिक और स्टाफ अनुभव | जापान और दक्षिण कोरिया स्थित भारतीय दूतावासों में रक्षा अताशे रहे हैं तथा वायु स्टाफ निरीक्षण निदेशालय (DASI) का नेतृत्व किया है। इससे रक्षा-कूटनीति, निरीक्षण-तंत्र और मुख्यालय-प्रक्रियाओं में उनका व्यापक अनुभव सामने आता है। |
महत्व
संस्थागत और प्रशासनिक महत्व
- सशस्त्र सेनाओं में वरिष्ठ पदों का समय पर भरा जाना प्रशासनिक निरंतरता और निर्णय-क्षमता बनाए रखता है।
- उप प्रमुख के रूप में नियुक्ति से वायुसेना मुख्यालय के स्तर पर नीति, योजना और संसाधन-प्रबंधन में अनुभव का सीधा उपयोग संभव होता है।
- सेवा-आधारित वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर चयन की परंपरा नागरिक-सैन्य प्रशासन की पारदर्शिता को भी दर्शाती है।
परिचालन और रणनीतिक महत्व
- पूर्वी वायु कमान के प्रमुख के रूप में उनका अनुभव पूर्वी सीमाओं और समुद्री-वायु क्षेत्र की सुरक्षा-चुनौतियों से जुड़ा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम आयाम है।
- लगभग चार दशकों का सेवाकाल और विविध विमान-प्रणालियों का अनुभव आधुनिकीकरण के दौर में संक्रमण-प्रबंधन के लिए उपयोगी माना जा सकता है।
- उन्नत कमान एवं स्टाफ पाठ्यक्रम (UK) और राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (बांग्लादेश) में प्रशिक्षण से अंतरराष्ट्रीय सैन्य-सिद्धांतों की समझ विकसित होती है।
कूटनीतिक और शैक्षणिक महत्व
- रक्षा अताशे के रूप में जापान और दक्षिण कोरिया में सेवा रक्षा-सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करने से जुड़ी है।
- रक्षा एवं रणनीतिक अध्ययन में तीन स्नातकोत्तर डिग्रियां अकादमिक दृष्टि से सैन्य नेतृत्व में बौद्धिक गहराई का संकेत देती हैं।
चुनौतियाँ
1. संक्रमणकालीन विमान-बेड़ा और आधुनिकीकरण
- पुराने विमान-मंच धीरे-धीरे हटाए जा रहे हैं, जबकि नए मंच और स्वदेशी प्रणालियां समय पर शामिल करना बड़ी चुनौती है।
- बेड़े में विविधता से रखरखाव, प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक्स पर दबाव बढ़ता है।
- आत्मनिर्भर भारत की दिशा में स्वदेशी विमान-निर्माण की गति और गुणवत्ता नीति-स्तर पर निगरानी की मांग करती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: रक्षा प्रौद्योगिकी, स्वदेशीकरण और आंतरिक सुरक्षा
2. पूर्वी सीमा और बहु-मोर्चा सुरक्षा
- पूर्वी वायु कमान के अंतर्गत विस्तृत और भौगोलिक दृष्टि से कठिन क्षेत्र आते हैं, जहां निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण है।
- एक साथ कई मोर्चों पर सुरक्षा-दबाव के कारण वायु-संसाधनों का संतुलित आवंटन आवश्यक है।
- सीमावर्ती अवसंरचना और वायु-क्षेत्र के विकास में समन्वय की कमी परिचालन क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियां और सीमा प्रबंधन
3. संयुक्तता और थिएटर कमांड की अवधारणा
- वायुसेना, थलसेना और नौसेना के बीच संयुक्त कमान-व्यवस्था की दिशा में चर्चा जारी है, परंतु इसके ढांचे पर अभी व्यापक सहमति बननी शेष है।
- वायु-शक्ति के एकीकृत उपयोग के लिए सेवाओं के बीच प्रशिक्षण, सिद्धांत और सूचना-साझाकरण में समन्वय चाहिए।
- सैन्य सुधारों में सेवा-हितों और संयुक्त संरचना के बीच संतुलन साधना कठिन है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: रक्षा सुधार और सशस्त्र बलों का संयुक्तीकरण
4. रक्षा-कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
- रक्षा अताशे जैसी भूमिकाओं में द्विपक्षीय सहयोग को व्यावहारिक परियोजनाओं और प्रशिक्षण-आदान-प्रदान में बदलना चुनौतीपूर्ण है।
- क्षेत्रीय सुरक्षा-वातावरण के बदलते समीकरण रक्षा-साझेदारियों की प्राथमिकताएं तय करते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-2: भारत के विदेश संबंध और रक्षा-कूटनीति
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| नेतृत्व-उत्तराधिकार | शीर्ष पदों पर समय से पहले या देर से परिवर्तन होने पर परिचालन-निर्णयों और योजनाओं में अंतराल आ सकता है। |
| विमान-बेड़े का संक्रमण | पुराने और नए मंचों के एक साथ संचालन से लागत, रखरखाव और प्रशिक्षण पर भारी दबाव पड़ता है। |
| पूर्वी सीमा की परिचालन तैयारी | विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र और कठिन भू-आकृति में निगरानी, आपूर्ति और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना कठिन है। |
| सेवाओं के बीच समन्वय | संयुक्त कमान-व्यवस्था पर आम सहमति के अभाव में संसाधनों का दोहराव और परिचालन-समन्वय की कमियां बनी रह सकती हैं। |
आगे की राह
- संक्रमणकालीन बेड़े के लिए स्पष्ट समय-सारणी बनाकर अपग्रेड, प्रतिस्थापन और रखरखाव की योजना पारदर्शी रूप से सार्वजनिक की जाए।
- पूर्वी वायु कमान जैसी क्षेत्रीय कमानों में अवसंरचना, निगरानी और लॉजिस्टिक्स के लिए निरंतर निवेश सुनिश्चित किया जाए।
- संयुक्त सैन्य सिद्धांत, प्रशिक्षण और सूचना-साझाकरण को संस्थागत रूप देकर सेवाओं के बीच समन्वय को मजबूत किया जाए।
- थिएटर कमान जैसे सुधारों पर व्यापक परामर्श और चरणबद्ध कार्यान्वयन की रूपरेखा तय की जाए।
- स्वदेशी रक्षा-प्रौद्योगिकी और विमान-निर्माण में अनुसंधान एवं विकास को उद्योग और शिक्षा-जगत के साथ जोड़ा जाए।
- रक्षा-अधिकारियों के अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण और रक्षा-अताशे पदों से प्राप्त अनुभव को नीति-निर्माण में व्यवस्थित रूप से उपयोग किया जाए।
- वरिष्ठ नेतृत्व के लिए उत्तराधिकार-नियोजन को पहले से तैयार रखा जाए ताकि परिवर्तन सुचारु और परिचालन-निरंतरता बनी रहे।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सशस्त्र बल (Armed Forces) और सर्वोच्च कमान (Supreme Command) · अनुच्छेद 53 (Article 53) · असैन्य नियंत्रण (Civilian Control of the Military) · रक्षा प्रमुख (Chief of Defence Staff) · संयुक्तता (Jointness) · थिएटर कमान (Theatre Command) · नागरिक-सैन्य संबंध (Civil-Military Relations) · रक्षा मंत्रालय का सैन्य मामले विभाग (Department of Military Affairs) · मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet) · वायु शक्ति (Air Power)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 53: राष्ट्रपति का सर्वोच्च सेनापति होना
अवधारणा प्रवाह
वायुसेना प्रमुख आशुतोष दीक्षित का 31 अक्टूबर 2026 को 29वें प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण करना तय है। → इसके साथ वायुसेना उप प्रमुख का पद रिक्त होने की स्थिति बनती है, जिसे भरना आवश्यक है। → रक्षा मंत्रालय द्वारा पूर्वी वायु कमान के AOC-in-C इंद्रपाल सिंह वालिया को 1 नवंबर 2026 से VCAS नियुक्त किया जाता है। → VCAS के रूप में वे प्रमुख के साथ मुख्यालय-स्तर पर परिचालन, योजना और नीति-समन्वय में भूमिका निभाते हैं। → इससे शीर्ष नेतृत्व में निरंतरता बनी रहती है और वायुसेना की परिचालन तैयारी, आधुनिकीकरण तथा संयुक्तता से जुड़े लक्ष्य आगे बढ़ते हैं।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 53(2) के अंतर्गत रक्षा बलों की सर्वोच्च कमान प्रधानमंत्री में निहित है।
2. रक्षा प्रमुख (CDS) भारत में स्थायी रूप से चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष होते हैं।
3. वायुसेना का प्रमुख विधान वायु सेना अधिनियम, 1950 है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है: अनुच्छेद 53(2) के अनुसार रक्षा बलों की सर्वोच्च कमान राष्ट्रपति में निहित है, और उसका प्रयोग विधि द्वारा विनियमित होता है, प्रधानमंत्री में नहीं। कथन 2 सही है: रक्षा प्रमुख, चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के स्थायी अध्यक्ष होते हैं। कथन 3 सही है: वायु सेना अधिनियम, 1950 भारतीय वायुसेना का मूल विधान है।
Q2. निम्नलिखित सूचियों को सुमेलित कीजिए:
सूची I (वायु कमान/प्रशिक्षण कमान)
A. पूर्वी वायु कमान (Eastern Air Command)
B. प्रशिक्षण कमान (Training Command)
C. रखरखाव कमान (Maintenance Command)
D. मध्य वायु कमान (Central Air Command)
सूची II (मुख्यालय)
1. प्रयागराज
2. शिलांग
3. नागपुर
4. बेंगलुरु
नीचे दिए गए कूटों में से सही उत्तर चुनिए:
- A-2, B-4, C-3, D-1
- A-2, B-1, C-4, D-3
- A-3, B-4, C-2, D-1
- A-4, B-2, C-3, D-1
उत्तर: A-2, B-4, C-3, D-1 — पूर्वी वायु कमान का मुख्यालय शिलांग में है (A-2)। प्रशिक्षण कमान का मुख्यालय बेंगलुरु में है (B-4)। रखरखाव कमान का मुख्यालय नागपुर में है (C-3)। मध्य वायु कमान का मुख्यालय प्रयागराज में है (D-1)।
Q3. निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): सशस्त्र बल भारत के राष्ट्रपति की सर्वोच्च कमान के अधीन हैं।
कारण (R): संविधान का अनुच्छेद 53(2) रक्षा बलों की सर्वोच्च कमान राष्ट्रपति में निहित करता है, और उसका प्रयोग विधि द्वारा विनियमित होता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं, और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन और कारण दोनों सही हैं। अनुच्छेद 53(2) में ही सर्वोच्च कमान राष्ट्रपति में निहित होने और उसके विधि द्वारा विनियमित होने का उल्लेख है, इसलिए कारण अभिकथन की संवैधानिक व्याख्या करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमान संवैधानिक रूप से राष्ट्रपति में निहित है, किंतु सेवा प्रमुखों की नियुक्ति, वरिष्ठता और संयुक्तता की दिशा में हुए सुधारों ने नागरिक नियंत्रण और परिचालन दक्षता के बीच संतुलन को नया स्वरूप दिया है। सशस्त्र बलों पर असैन्य नियंत्रण के संवैधानिक और संस्थागत आधार का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि रक्षा प्रमुख की व्यवस्था और प्रस्तावित थिएटर कमान से वायु शक्ति के एकीकृत उपयोग में कितनी सहायता मिल सकती है। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल उत्तर संकेत:
1. संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 53(1) के अंतर्गत संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है; अनुच्छेद 53(2) के अनुसार रक्षा बलों की सर्वोच्च कमान राष्ट्रपति में निहित है और उसका प्रयोग विधि द्वारा विनियमित होता है। अनुच्छेद 74 के अंतर्गत राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते हैं। सातवीं अनुसूची की संघ सूची की प्रविष्टि 1 सेना, नौसेना और वायुसेना को संघ के अधिकार क्षेत्र में रखती है।
2. विधिक ढांचा: सेना अधिनियम, 1950; नौसेना अधिनियम, 1957; वायु सेना अधिनियम, 1950।
3. सुधार-यात्रा: कारगिल समीक्षा समिति (1999, अध्यक्ष के. सुब्रह्मण्यम; रिपोर्ट 2000) ने रक्षा प्रमुख की सिफारिश की; मंत्रियों के समूह (2001); नरेश चंद्र कार्य दल (2012); शेकटकर समिति (2016) की सिफारिशें। रक्षा प्रमुख का पद 2019 की अधिसूचना द्वारा सृजित हुआ और यह 1 जनवरी 2020 से प्रभावी है; रक्षा मंत्रालय में सैन्य मामले विभाग की स्थापना हुई।
4. नियुक्ति और वरिष्ठता: सेवा प्रमुखों की नियुक्ति मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति द्वारा की जाती है; उप प्रमुख पद का उत्तराधिकार क्रम, कार्यकाल और वरिष्ठता पर चर्चा संस्थागत स्थिरता से जुड़ी है। वर्तमान उदाहरण: वायुसेना उप प्रमुख की नियुक्ति (1 नवंबर 2026 से प्रभावी) और वायुसेना प्रमुख का पदभार ग्रहण।
5. सैद्धांतिक दृष्टि: सैमुअल हंटिंगटन, ‘द सोल्जर एंड द स्टेट’ (1957) में वस्तुनिष्ठ नियंत्रण बनाम व्यक्तिनिष्ठ नियंत्रण की अवधारणा; माइकल डेस्च, ‘सिविल कंट्रोल ऑफ द मिलिट्री’ (1999) में संस्थागत एवं सांस्कृतिक नियंत्रण के बीच भेद; एजेंसी सिद्धांत की दृष्टि से असैन्य नेतृत्व को सैन्य एजेंटों के कार्य की निगरानी करनी होती है।
6. संतुलित दृष्टिकोण: संयुक्तता से संसाधनों का बेहतर उपयोग और निर्णय-प्रक्रिया में तेजी; थिएटर कमान से वायु क्षमता का केंद्रीकृत उपयोग। दूसरी ओर सेवाओं की स्वायत्तता, वायु शक्ति के विशिष्ट गुणों का संरक्षण और संसदीय निगरानी की आवश्यकता पर भी विचार करना होगा। संसदीय रक्षा समिति की भूमिका का उल्लेख करें।
7. निष्कर्ष: असैन्य सर्वोच्चता को संवैधानिक रूप से अक्षुण्ण रखते हुए परिचालन संयुक्तता को संस्थागत रूप से मजबूत करना, यही संतुलित मार्ग है। अपना तर्कपूर्ण मत स्पष्ट कीजिए।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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