31 Oct सरदार पटेल की जयंती: पीएम ने व्यक्त किया श्रद्धांजलि, जानिए महत्व
✎ सरदार पटेल की जयंती (31 अक्टूबर) राष्ट्रीय एकता दिवस है; उन्होंने गृह मंत्री के रूप में रियासतों के भारत में विलय का नेतृत्व किया, और अखिल भारतीय सेवाओं की संकल्पना (अनुच्छेद 312) को मज़बूती दी।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — आधुनिक भारतीय इतिहास (रियासतों का विलय, बारदोली सत्याग्रह, स्वतंत्रता के बाद का एकीकरण) | GS Paper II — राजव्यवस्था (संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध, अखिल भारतीय सेवाएँ, गृह मंत्रालय की भूमिका)
- Prelims: राष्ट्रीय एकता दिवस (National Unity Day), एकता की प्रतिमा (Statue of Unity), केवड़िया, गुजरात, अनुच्छेद 312 (अखिल भारतीय सेवाएँ), विलय पत्र (Instrument of Accession), अनुच्छेद 1 और पहली अनुसूची (संघ के राज्यक्षेत्र), बारदोली सत्याग्रह (1928), जूनागढ़ में जनमत संग्रह और हैदराबाद में पुलिस कार्रवाई (1948), संविधान सभा की मूल अधिकार सलाहकार समिति
- Essay: राष्ट्र-निर्माण में प्रशासनिक एकीकरण की भूमिका: विविधता में एकता का व्यावहारिक पक्ष, लौह-पुरुष की विरासत और लोकतांत्रिक संघवाद के समक्ष चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: सरदार पटेल की जयंती (31 अक्टूबर) राष्ट्रीय एकता दिवस है; उन्होंने गृह मंत्री के रूप में रियासतों के भारत में विलय का नेतृत्व किया, और अखिल भारतीय सेवाओं की संकल्पना (अनुच्छेद 312) को मज़बूती दी।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत के उपप्रधानमंत्री और पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती (31 अक्टूबर) के अवसर पर प्रधानमंत्री ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति ने भी उनकी जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर को राष्ट्रीय एकता दिवस (National Unity Day) के रूप में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य देश की एकता, अखंडता और रियासतों के विलय में पटेल के योगदान को स्मरण करना है। इस समाचार का परीक्षा-उपयोगी पक्ष यह है कि यह स्वतंत्र भारत में राज्यों के एकीकरण, प्रशासनिक ढाँचे के निर्माण और संघीय व्यवस्था की मज़बूती से जुड़े ऐतिहासिक और संवैधानिक प्रश्नों को सामने लाता है।
पृष्ठभूमि
- भारत की स्वतंत्रता (1947) के समय लगभग 560 से अधिक देसी रियासतें थीं, जिन्हें ब्रिटिश सत्ता के समाप्त होने के बाद भारत या पाकिस्तान में विलय का विकल्प चुनना था। सरदार पटेल ने गृह मंत्रालय के माध्यम से इस प्रक्रिया का नेतृत्व किया।
- जूनागढ़ का विलय जनमत संग्रह के बाद हुआ, जबकि हैदराबाद रियासत का विलय सितंबर 1948 की सैन्य कार्रवाई (पुलिस कार्रवाई) के बाद संभव हुआ।
- बारदोली सत्याग्रह (1928) में संगठित किसान आंदोलन के नेतृत्व के कारण उन्हें सरदार की उपाधि मिली, जो उनकी संगठन-क्षमता का प्रतीक मानी जाती है।
- संविधान सभा में पटेल मूल अधिकार, अल्पसंख्यक और जनजातीय क्षेत्रों संबंधी सलाहकार समिति के सदस्य थे, जिससे संवैधानिक ढाँचे के निर्माण में उनकी भूमिका स्पष्ट होती है।
- भारत सरकार ने वर्ष 2014 में 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया, और इसी दिन 2018 में गुजरात के केवड़िया में एकता की प्रतिमा (Statue of Unity) का अनावरण हुआ।
राष्ट्रीय एकता दिवस और सरदार पटेल की विरासत क्या है?
- सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) स्वतंत्र भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री थे। उनकी जयंती 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है।
- रियासतों के एकीकरण में विलय पत्र (Instrument of Accession) की केंद्रीय भूमिका थी। इसके द्वारा रियासतें रक्षा, विदेश और संचार जैसे विषयों पर केंद्र के अधिकार को स्वीकार करती थीं।
- पटेल ने रियासतों के साथ बातचीत में समझौते और प्रशासनिक दबाव, दोनों साधनों का प्रयोग किया। इस प्रक्रिया से संघीय भारत का भौगोलिक और राजनीतिक स्वरूप निर्धारित हुआ।
- अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) की संकल्पना को पटेल ने मज़बूती से आगे बढ़ाया। संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार राज्यसभा दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित कर संसद द्वारा नई अखिल भारतीय सेवा के सृजन की व्यवस्था करती है।
- भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) को पटेल के प्रशासनिक दृष्टिकोण से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए उन्हें भारत की प्रशासनिक संरचना का एक प्रमुख निर्माता माना जाता है।
- एकता की प्रतिमा (Statue of Unity) गुजरात के केवड़िया में स्थित है। यह स्मारक राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में विकसित किया गया है।
- पटेल की विरासत को भारतीय संघवाद की व्यावहारिक कसौटी के रूप में पढ़ा जाता है, जहाँ केंद्र की एकीकृत शक्ति और राज्यों की स्वायत्तता के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| जन्म तिथि और अवसर | सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) की जयंती 31 अक्टूबर को मनाई जाती है। इसी दिन को राष्ट्रीय एकता दिवस (Rashtriya Ekta Diwas) के रूप में भी मनाया जाता है। |
| राष्ट्रीय नेतृत्व की भूमिका | प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति द्वारा श्रद्धांजलि देने की परंपरा यह दर्शाती है कि राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को संस्थागत स्वीकृति प्राप्त है। |
| रियासतों का एकीकरण | स्वतंत्रता के समय लगभग 562 रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करने में उनकी केंद्रीय भूमिका रही। इसे भारत के भौगोलिक और राजनीतिक एकीकरण का आधार माना जाता है। |
| गृह मंत्री के रूप में कार्य | स्वतंत्र भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में उन्होंने प्रशासनिक एकरूपता, कानून-व्यवस्था और केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने का प्रयास किया। |
| संविधान सभा में योगदान | मौलिक अधिकार और अल्पसंख्यक समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संविधान निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। |
| स्मारक और प्रतीक | गुजरात के केवड़िया में स्थित एकता की प्रतिमा (Statue of Unity) उनके सम्मान में स्थापित विश्व की एक प्रमुख प्रतिमा है। |
महत्व
संवैधानिक और प्रशासनिक
- रियासतों के एकीकरण से भारत का भौगोलिक स्वरूप निश्चित हुआ, जो संविधान के अनुच्छेद 1 में ‘भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का संघ होगा’ की व्याख्या का व्यावहारिक आधार है।
- पहली अनुसूची में राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों की सूची में समाहित होने वाली अधिकांश इकाइयाँ इसी एकीकरण प्रक्रिया से जुड़ी हैं।
- अखिल भारतीय सेवाओं की संस्थागत नींव को सुदृढ़ करने में उनकी भूमिका को प्रशासनिक इतिहास में विशेष स्थान प्राप्त है।
राष्ट्रीय एकता और सामाजिक
- राष्ट्रीय एकता दिवस के माध्यम से बहुलवादी भारत में साझा नागरिक पहचान और राष्ट्रीय एकजुटता का संदेश दिया जाता है।
- बारदोली सत्याग्रह (1928) में किसानों के संगठन के नेतृत्व से उनकी जन-आधारित नेतृत्व शैली को पहचान मिली।
सांस्कृतिक और स्मरणीय
- सार्वजनिक स्मरण समारोह युवा पीढ़ी को संविधान निर्माण और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से परिचित कराते हैं।
- एकता की प्रतिमा जैसे स्मारक पर्यटन और इतिहास-शिक्षा के माध्यम बनते हैं।
चुनौतियाँ
1. ऐतिहासिक विवरणों का सटीक मूल्यांकन
- रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया में बल, कूटनीति और वार्ता, तीनों की भूमिका रही। इन विधियों का संतुलित विश्लेषण आवश्यक है।
- सीमित दृष्टिकोण से देखने पर ऐतिहासिक जटिलताएँ और क्षेत्रीय संवेदनशीलताएँ अनदेखी रह सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: आधुनिक भारतीय इतिहास: रियासतों का एकीकरण; नीतिशास्त्र में ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का मूल्यांकन
2. संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध
- संघ और राज्यों के बीच शक्तियों के संतुलन की समस्या आज भी विमर्श का विषय है।
- एकीकरण के समय की केंद्रीकृत प्रशासनिक दृष्टि और वर्तमान सहकारी संघवाद के बीच संबंध को समझना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय राजव्यवस्था: संघवाद; केंद्र-राज्य संबंध
3. स्मरण से नीति तक का अंतर
- वार्षिक श्रद्धांजलि और समारोह तभी सार्थक होते हैं जब उनसे प्रशासनिक एकरूपता और राष्ट्रीय एकता के ठोस उपाय जुड़ें।
- केवल प्रतीकात्मक आयोजन नीति-निर्माण में प्रभाव नहीं डालते।
यूपीएससी लिंक: शासन और लोक प्रशासन: नीति-क्रियान्वयन की चुनौतियाँ
4. विविधता में एकता का व्यावहारिक प्रबंधन
- भाषायी, धार्मिक और क्षेत्रीय विविधता के बीच राष्ट्रीय एकीकरण को बनाए रखना निरंतर चुनौती है।
- क्षेत्रीय आकांक्षाओं और राष्ट्रीय एकता के बीच संतुलन बनाना आज भी आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय समाज: विविधता और राष्ट्रीय एकीकरण; आंतरिक सुरक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| ऐतिहासिक व्याख्या | एकीकरण की प्रक्रिया का एकपक्षीय चित्रण तथ्यात्मक विश्लेषण को कमजोर कर सकता है। |
| संघीय संतुलन | केंद्रीकरण और राज्यों की स्वायत्तता के बीच संतुलन की चुनौती बनी रहती है। |
| प्रतीकवाद बनाम कार्यान्वयन | स्मरण समारोहों से आगे बढ़कर प्रशासनिक सुधार लागू करना कठिन रहा है। |
| सामाजिक एकजुटता | विविध समुदायों के बीच विश्वास और सह-अस्तित्व बनाए रखना निरंतर कार्य है। |
| क्षेत्रीय संवेदनशीलता | किसी एक क्षेत्र या समूह के योगदान को अधिक या कम आँकने से सामाजिक तनाव उत्पन्न हो सकता है। |
आगे की राह
- सरदार पटेल के योगदान को स्रोत-आधारित और संतुलित दृष्टि से पढ़ाने पर बल दिया जाए।
- केंद्र-राज्य सहयोग के लिए अंतर-राज्यीय परिषद और नीति आयोग जैसे मंचों की भूमिका को प्रभावी बनाया जाए।
- अखिल भारतीय सेवाओं में क्षमता-निर्माण और उत्तरदायी प्रशासन को सुदृढ़ किया जाए।
- राष्ट्रीय एकता से जुड़े शैक्षणिक कार्यक्रमों में संविधान और बहुलवाद की समझ को शामिल किया जाए।
- स्मारकों और राष्ट्रीय स्थलों को इतिहास-शिक्षा और स्थानीय विकास से जोड़ा जाए।
- विविधता में एकता के लिए सामुदायिक संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
रियासत मंत्रालय (Ministry of States) · विलय पत्र (Instrument of Accession) · लैप्स ऑफ पैरामाउंटसी (Lapse of Paramountcy) · रियासतों का एकीकरण · प्रिवी पर्स का उन्मूलन · अनुच्छेद 1 (Union of States) · अनुच्छेद 3 (नए राज्यों का निर्माण) · अनुच्छेद 312 (अखिल भारतीय सेवाएँ) · संघवाद (Federalism) · राज्य पुनर्गठन आयोग (States Reorganisation Commission) · राष्ट्रीय एकता दिवस (National Unity Day) · एस.आर. बोम्मई वाद (S.R. Bommai Case)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 1: भारत का राज्यों का संघ होना, एकीकरण से संबंधित
- पहली अनुसूची: राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों की सूची, एकीकृत इकाइयों का समावेश
अवधारणा प्रवाह
स्वतंत्रता के समय लगभग 562 रियासतें भारत और पाकिस्तान में विलय के विकल्प के बीच थीं → सरदार पटेल के नेतृत्व में विलय-पत्र और वार्ता के माध्यम से रियासतों का भारतीय संघ में एकीकरण → एकीकृत इकाइयों का पहली अनुसूची में समावेश और भौगोलिक-प्रशासनिक पुनर्गठन → भारत के संघीय ढाँचे और अखिल भारतीय सेवाओं की स्थिरता में वृद्धि → राष्ट्रीय एकता दिवस और प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति द्वारा श्रद्धांजलि के माध्यम से स्मरण → स्मरण से प्रेरित नीति-विमर्श: संघवाद, एकता और प्रशासनिक उत्तरदायित्व की समकालीन चुनौतियाँ
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विलय पत्र (Instrument of Accession) वह दस्तावेज़ था जिसके द्वारा रियासतों के शासक रक्षा, विदेश कार्य और संचार जैसे विषयों पर भारत संघ में शामिल होते थे।
2. जूनागढ़ का भारत में विलय 1948 में हुए जनमत संग्रह के बाद पूरा हुआ।
3. राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 सरदार वल्लभभाई पटेल के कार्यकाल में पारित हुआ था।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- इनमें से कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: विलय पत्र में रक्षा, विदेश कार्य और संचार विषय भारत संघ को सौंपे जाते थे। कथन 2 सही है: जूनागढ़ पर जनमत संग्रह (1948) के बाद वह भारत में शामिल हुआ। कथन 3 गलत है: पटेल का निधन दिसंबर 1950 में हुआ, जबकि राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 में पारित हुआ।
Q2. कथन (A): भारत में अखिल भारतीय सेवाएँ संसद द्वारा विधि बनाकर सृजित की जाती हैं, परंतु इससे पहले राज्यसभा को दो-तिहाई बहुमत से संकल्प पारित करना आवश्यक होता है।
कारण (R): अनुच्छेद 312 राज्यसभा को राष्ट्रीय हित में ऐसा संकल्प पारित करने का अधिकार देता है, जिसके आधार पर संसद नई अखिल भारतीय सेवा के सृजन हेतु विधि बनाती है।
नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — अनुच्छेद 312 के अंतर्गत राज्यसभा दो-तिहाई उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के बहुमत से संकल्प पारित करती है, तभी संसद अखिल भारतीय सेवा का सृजन कर सकती है। यह प्रक्रिया IAS और IPS जैसी सेवाओं के संवैधानिक आधार को स्पष्ट करती है, इसलिए (R), (A) की सही व्याख्या है।
Q3. एकता की प्रतिमा (Statue of Unity) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- यह महाराष्ट्र में गोदावरी नदी के तट पर स्थित है।
- यह गुजरात में नर्मदा नदी के तट पर, केवड़िया में स्थित है।
- यह राजस्थान में चंबल नदी के तट पर स्थित है।
- यह ओडिशा में महानदी के तट पर स्थित है।
उत्तर: यह गुजरात में नर्मदा नदी के तट पर, केवड़िया में स्थित है। — एकता की प्रतिमा गुजरात के केवड़िया में नर्मदा नदी के तट पर स्थित है और इसका लोकार्पण 31 अक्टूबर 2018 को हुआ। यह सरदार पटेल की जयंती (31 अक्टूबर) से जुड़ी है, जिसे राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ स्वतंत्रता के समय लगभग 565 रियासतों का भारत संघ में विलय एक जटिल प्रशासनिक और संवैधानिक चुनौती थी। इस विलय की प्रक्रिया ने भारतीय संघवाद के स्वरूप को किस प्रकार प्रभावित किया, इसकी विवेचना कीजिए। साथ ही, बताइए कि नए राज्यों के निर्माण और सीमाओं के पुनर्गठन की संवैधानिक व्यवस्था (अनुच्छेद 3) ने संघीय ढाँचे को किस सीमा तक लचीला बनाया है। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर संरचना: (1) पृष्ठभूमि: भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के अंतर्गत ब्रिटिश सर्वोच्चता (Paramountcy) का अंत और लैप्स ऑफ पैरामाउंटसी के कारण रियासतों की कानूनी स्थिति; रियासतों का तीन श्रेणियों (भारत में विलय, पाकिस्तान में विलय के प्रयास, स्वतंत्र रहने का दावा) में वर्गीकरण। (2) प्रक्रिया: रियासत मंत्रालय (Ministry of States) के अंतर्गत सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका तथा वी.पी. मेनन की सचिव के रूप में भूमिका; विलय पत्र (Instrument of Accession) के माध्यम से रक्षा, विदेश कार्य और संचार का हस्तांतरण; स्थगन समझौता (Standstill Agreement); जूनागढ़ का जनमत संग्रह (1948); हैदराबाद में पुलिस कार्रवाई (ऑपरेशन पोलो, 1948); पुनर्गठित संघ (जैसे सौराष्ट्र, मत्स्य संघ) का गठन। (3) संवैधानिक परिणाम: अनुच्छेद 1 के अंतर्गत भारत को राज्यों का संघ कहा गया; प्रिवी पर्स का उन्मूलन 26वें संशोधन (1971) द्वारा; अनुच्छेद 312 के अंतर्गत अखिल भारतीय सेवाओं की व्यवस्था, जिसे पटेल से जोड़ा जाता है। (4) बहस का संतुलन: प्रशासनिक एकीकरण बनाम लोकतांत्रिक सहमति और बल प्रयोग की नैतिक-राजनीतिक आलोचना; के.सी. ह्वेयर (K.C. Wheare) द्वारा भारत को अर्ध-संघीय (Quasi-federal) कहना; ग्रैनविल ऑस्टिन (Granville Austin) की पुस्तक The Indian Constitution: Cornerstone of a Nation में संघवाद के सहकारी स्वरूप का विश्लेषण। (5) अनुच्छेद 3 और पुनर्गठन: फज़ल अली आयोग (1953) और राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 द्वारा भाषायी आधार पर राज्यों का पुनर्गठन; 2000 में छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड का निर्माण; अनुच्छेद 3 के परंतुक के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा राज्य विधानमंडल से विचार माँगने की प्रक्रिया; संघीय ढाँचे पर न्यायिक दृष्टिकोण के लिए एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994) का उल्लेख, जिसमें संघवाद को संविधान की मूल संरचना का भाग माना गया। (6) निष्कर्ष: एकीकरण ने राष्ट्रीय एकता की नींव रखी, जबकि अनुच्छेद 3 ने संघ को परिवर्तनशील बनाया; दोनों के बीच संतुलन और सहकारी संघवाद की आवश्यकता पर तटस्थ मूल्यांकन।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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