दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण: बस किराया बढ़ेगा, माल ढुलाई प्रभावित

दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण: बस किराया बढ़ेगा, माल ढुलाई प्रभावित

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ठंड में प्रदूषण नियंत्रण प्रक्रियाबीएस-IV वाहन रोकनवंबर 1 सेबीएस-VI मानकअनिवार्यपरिवहन लागत बढ़15-20%आपूर्ति बाधितनाशवान वस्तुएंप्रदूषण घटेठंड में
ठंड में प्रदूषण नियंत्रण प्रक्रिया

✎ GRAP एक चरणबद्ध आपातकालीन ढाँचा है, जिसमें वायु गुणवत्ता बिगड़ने के साथ प्रतिबंध कठोर होते हैं, और इसके समन्वय का दायित्व सांविधिक संस्था CAQM पर है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण (वायु प्रदूषण, पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विधि और संस्थाएँ)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (परिवहन, माल ढुलाई और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला)  |  GS Paper II — शासन (सांविधिक निकाय, अंतर-राज्यीय समन्वय और केंद्र-राज्य संबंध)
  • Prelims: CAQM (वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग), GRAP (ग्रैडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान), BS-VI उत्सर्जन मानक और भारत स्टेज (Bharat Stage) मानकों का क्रम, वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अंतर्गत परमिट के प्रकार (राष्ट्रीय, पर्यटक और अनुबंध परमिट), आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और उसके अंतर्गत आने वाले राज्य
  • Essay: पर्यावरण संरक्षण और आजीविका के बीच संतुलन: क्या प्रदूषण-नियंत्रण उपायों का आर्थिक भार असमान रूप से छोटे परिवहन-संचालकों और उपभोक्ताओं पर पड़ता है?, अंतर-राज्यीय वायु प्रदूषण की चुनौती में सहकारी संघवाद और सांविधिक संस्थाओं की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: GRAP एक चरणबद्ध आपातकालीन ढाँचा है, जिसमें वायु गुणवत्ता बिगड़ने के साथ प्रतिबंध कठोर होते हैं, और इसके समन्वय का दायित्व सांविधिक संस्था CAQM पर है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

दिल्ली सरकार ने शीत-कालीन कार्य योजना के अंतर्गत रविवार से दिल्ली में प्रवेश पर उन पेट्रोल और डीज़ल वाहनों पर रोक लगाने का निर्णय लिया है, जो बीएस-VI मानक के अनुरूप नहीं हैं और दिल्ली के बाहर पंजीकृत हैं। परिवहन-संचालकों ने चेतावनी दी है कि इससे बस किराए में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है और आवश्यक वस्तुओं, विशेषकर नाशवान खाद्य पदार्थों की आपूर्ति बाधित हो सकती है। पर्यटक परमिट वाली बसों को इस बार पिछले वर्षों के विपरीत छूट न मिलने से त्योहारी और पर्यटन मौसम में वित्तीय हानि की आशंका जताई गई है। लगभग 2.5 लाख माल वाहक वाहन प्रभावित होने का अनुमान है। यह मुद्दा वायु गुणवत्ता प्रबंधन, परिवहन अर्थव्यवस्था और छोटे व्यवसायों की आजीविका के बीच के संबंध को दर्शाता है, इसलिए परीक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।

पृष्ठभूमि

  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शीत ऋतु में वायु प्रदूषण गंभीर हो जाता है, क्योंकि कम तापमान, धीमी हवाएँ और तापीय उलटाव (Temperature Inversion) के कारण प्रदूषक कण वायुमंडल की निचली परत में टिके रहते हैं। पराली जलाना, वाहनीय उत्सर्जन, निर्माण-धूल और औद्योगिक उत्सर्जन इसके प्रमुख स्रोत माने जाते हैं।
  • वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 भारत में वायु प्रदूषण नियंत्रण के मूल विधिक ढाँचे हैं। वर्ष 2021 में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों के लिए CAQM का गठन किया गया, जिसे समन्वित नीति और निर्देश जारी करने की शक्ति दी गई।
  • GRAP को वर्ष 2017 में पर्यावरण प्रदूषण (नियंत्रण एवं निवारण) प्राधिकरण (EPCA) द्वारा अधिसूचित किया गया था। इसमें वायु गुणवत्ता के बिगड़ते स्तर के अनुसार चरणबद्ध प्रतिबंध लागू होते हैं, और गंभीर चरणों में बाहरी राज्यों के वाहनों के प्रवेश पर सीमित रोक तक लगाई जा सकती है।
  • भारत में बीएस-VI (Bharat Stage VI) उत्सर्जन मानक 1 अप्रैल 2020 से लागू हैं। यह बीएस-IV की तुलना में वाहनों से होने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड और कणीय पदार्थ के उत्सर्जन को काफी कम करने के लिए बनाया गया था।
  • प्रभावित वर्ग में अधिकतर छोटे बस-संचालक और ट्रक मालिक हैं, जिनके वाहन ऋण पर लिए गए हैं। पुराने बीएस-IV वाहनों के पुनर्विक्रय मूल्य में भारी गिरावट भी इस नीति के आर्थिक प्रभाव का एक संकेतक है।

GRAP और बीएस-VI मानक क्या हैं?

  • GRAP (ग्रैडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के स्तर के आधार पर चार चरणों में बँटी एक आपातकालीन कार्य योजना है। स्तर जितना गंभीर होता है, प्रतिबंध उतने ही कठोर होते जाते हैं।
  • GRAP के अंतर्गत निर्माण गतिविधियों पर रोक, डीज़ल जनरेटर पर नियंत्रण, सड़क-धूल नियंत्रण और वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध जैसे उपाय शामिल हैं।
  • CAQM राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता से संबंधित नीतियों के समन्वय और उनके क्रियान्वयन की निगरानी करने वाली सर्वोच्च सांविधिक संस्था है। इसमें राज्य सरकारों के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ सदस्य होते हैं।
  • बीएस (Bharat Stage) मानक केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली के अंतर्गत निर्धारित किए जाते हैं। ये वाहनों से निकलने वाले प्रदूषकों (जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कणीय पदार्थ) की अधिकतम सीमा तय करते हैं।
  • बीएस-VI मानक में सल्फर की मात्रा को अत्यंत कम करने का प्रावधान है, जिससे उत्सर्जन-नियंत्रण तकनीक (जैसे SCR और DPF) का उपयोग संभव होता है।
  • मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अंतर्गत परमिट का वर्गीकरण होता है। पर्यटक परमिट वाहन पर्यटकों को ढोने के लिए होते हैं, जबकि माल-परिवहन के लिए राष्ट्रीय परमिट और अनुबंध परमिट का प्रयोग होता है। परमिट की शर्तें और उनमें छूट संबंधित प्राधिकरण के आदेशों पर निर्भर करती हैं।
  • वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपायों से संबंधित न्यायिक दृष्टि यह है कि स्वच्छ वायु को अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के अंतर्गत माना गया है, जबकि अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण संरक्षण का निर्देश देता है और अनुच्छेद 51A(छ) नागरिकों पर पर्यावरण की रक्षा का मौलिक कर्तव्य डालता है। इसके साथ अनुच्छेद 19(1)(छ) के अंतर्गत व्यापार और व्यवसाय की स्वतंत्रता के अधिकार पर उचित निर्बंधन लगाए जा सकते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्त्व
प्रतिबंध का स्वरूप दिल्ली में राजधानी के बाहर पंजीकृत उन पेट्रोल और डीजल वाहनों के प्रवेश पर रोक, जो BS-VI उत्सर्जन मानक (BS-VI Emission Norms) के अनुरूप नहीं हैं। यह शीतकालीन कार्य योजना (Winter Action Plan) का हिस्सा है।
लागू होने की तिथि और अवधि नवंबर 1 से लागू, और लगभग तीन महीने की अवधि के लिए, जो शीतकालीन प्रदूषण का सबसे गंभीर मौसम माना जाता है।
छूट की स्थिति पिछले वर्षों के विपरीत, पर्यटक परमिट वाली बसों को इस बार छूट नहीं दी गई है। इससे अंतरराज्यीय पर्यटन सेवाएँ सीधे प्रभावित होती हैं।
प्रभावित वाहन वर्ग यात्री बसें, माल वाहक ट्रक (Goods Carriers) और निजी तथा राज्य परिवहन सेवाएँ। अनुमान है कि लगभग 2.5 लाख माल वाहक वाहन प्रभावित हो सकते हैं।
आपूर्ति श्रृंखला पर असर फल, सब्ज़ी, दूध और अंडे जैसी नाशवान वस्तुएँ सड़क मार्ग से आती हैं। आजादपुर और गाज़ीपुर जैसे थोक बाज़ारों में आपूर्ति में देरी और कीमतों में वृद्धि की आशंका है।
नियामक ढाँचा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management – CAQM) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उससे लगे क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता के समन्वय और निर्देश के लिए जिम्मेदार है।

महत्व

पर्यावरणीय महत्त्व

  • शीतकाल में वायु प्रदूषण के स्रोतों, विशेषकर पुराने और अधिक उत्सर्जन वाले वाहनों, को नियंत्रित करने का यह एक स्रोत-आधारित हस्तक्षेप है।
  • BS-VI मानक वाले वाहनों को प्राथमिकता देकर वाहन उत्सर्जन के स्तर को चरणबद्ध रूप से घटाने की नीति को बल मिलता है।
  • वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index – AQI) में सुधार के लिए मौसम-विशेष उपायों का उदाहरण मिलता है।

सामाजिक और उपभोक्ता पक्ष

  • बस किराये में 15-20 प्रतिशत तक वृद्धि की आशंका से त्योहारी मौसम में यात्रियों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।
  • सीमित परिवहन विकल्पों के कारण निम्न आय वर्ग के यात्रियों की गतिशीलता प्रभावित होती है।

आर्थिक और आजीविका पक्ष

  • छोटे परिवहन संचालक, जिन्होंने वाहन ऋण पर खरीदे हैं, EMI भुगतान के संकट में फँस सकते हैं।
  • BS-IV वाहनों के पुनर्विक्रय मूल्य में गिरावट (उदाहरण: 15 लाख से 9 लाख रुपये) से परिसंपत्ति मूल्य पर सीधा असर पड़ता है।
  • नाशवान वस्तुओं की आपूर्ति में बाधा से खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) पर दबाव बन सकता है।

प्रशासनिक और शासन पक्ष

  • बहु-राज्यीय क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के लिए केंद्र, राज्यों और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
  • नीति लागू करने से पहले हितधारकों के साथ परामर्श और संक्रमण-काल की व्यवस्था का महत्त्व उभरता है।

चुनौतियाँ

1. पर्यावरण संरक्षण और आजीविका के बीच संतुलन

  • प्रदूषण नियंत्रण के उपाय वाहन मालिकों की आजीविका पर सीधा प्रभाव डालते हैं।
  • पुराने वाहनों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के बाहर करने से परिवहन क्षेत्र में असंतोष बढ़ता है।

2. अंतरराज्यीय व्यापार और आवागमन पर प्रतिबंध

  • संविधान का अनुच्छेद 301 भारत में व्यापार, वाणिज्य और मेलजोल की स्वतंत्रता देता है।
  • ऐसे प्रतिबंध अनुच्छेद 302 से 305 की सीमाओं और अनुच्छेद 19(6) के अंतर्गत ‘युक्तियुक्त’ होने चाहिए, इसलिए उनके औचित्य की समीक्षा आवश्यक है।

3. आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला

  • फल, सब्ज़ी, दूध और अंडे जैसी वस्तुएँ अलग-अलग राज्यों से सड़क मार्ग द्वारा आती हैं।
  • आपूर्ति बाधित होने से थोक बाज़ारों में कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे उपभोक्ता पर असर पड़ता है।

4. वाहन क्षेत्र में संक्रमण और पुनर्विक्रय मूल्य

  • BS-IV से BS-VI की ओर संक्रमण में पुराने वाहनों की परिसंपत्ति का मूल्य तेज़ी से घटता है।
  • वाहन ऋण और EMI के दायित्व छोटे संचालकों के लिए जोखिम बढ़ाते हैं।

5. त्योहारी और पर्यटन मौसम में मांग-आपूर्ति असंतुलन

  • त्योहारी मौसम में यात्रा की मांग चरम पर होती है, जबकि वाहनों की उपलब्धता घटती है।
  • पर्यटन क्षेत्र को इससे अल्पकालिक लेकिन गहरा आर्थिक नुकसान हो सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

समस्या चिंता
बस किराये में वृद्धि 15-20 प्रतिशत तक वृद्धि से यात्रियों, विशेषकर त्योहारी यात्रियों पर बोझ
माल वाहक वाहनों का प्रभाव लगभग 2.5 लाख माल वाहक वाहन प्रभावित होने से माल ढुलाई में बाधा
नाशवान वस्तुओं की आपूर्ति फल, सब्ज़ी, दूध और अंडों की थोक बाज़ारों तक पहुँच में देरी
वाहन परिसंपत्ति का मूल्य पुराने वाहनों के पुनर्विक्रय मूल्य में गिरावट और EMI भुगतान का संकट
पर्यटन सेवाओं पर असर पर्यटक परमिट वाली बसों पर प्रतिबंध से पर्यटन आय में कमी
छोटे संचालकों की स्थिति बड़े संचालकों की तुलना में छोटे संचालकों के पास वैकल्पिक मार्ग और पूंजी सीमित

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • शीतकालीन कार्य योजना (Winter Action Plan)
  • ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (Graded Response Action Plan – GRAP)

आगे की राह

  • संक्रमण-काल की व्यवस्था: पुराने वाहनों के लिए चरणबद्ध समय-सीमा और स्पष्ट छूट-नियम तय किए जाएँ, ताकि अचानक आर्थिक झटका न लगे।
  • वैकल्पिक परिवहन में निवेश: इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों के लिए सार्वजनिक परिवहन का विस्तार किया जाए, ताकि यात्री और माल ढुलाई दोनों की निरंतरता बनी रहे।
  • आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा: नाशवान वस्तुओं के लिए अलग प्राथमिकता मार्ग और सीमा-बिंदुओं पर त्वरित स्थानांतरण (Transshipment) की व्यवस्था की जाए।
  • वित्तीय सहायता: छोटे परिवहन संचालकों के लिए ऋण पुनर्गठन और वाहन पुनर्विक्रय के लिए बाज़ार-समर्थन जैसे उपायों पर विचार किया जाए।
  • अंतरराज्यीय समन्वय: CAQM के माध्यम से दिल्ली और पड़ोसी राज्यों के बीच प्रतिबंधों की एकरूप और पूर्वानुमेय नीति बनाई जाए।
  • पूर्व-सूचना और पारदर्शिता: प्रतिबंध लागू होने से पहले अधिसूचना, छूट की शर्तें और शिकायत निवारण की प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए।
  • डेटा-आधारित मूल्यांकन: प्रतिबंध से वायु गुणवत्ता में वास्तविक सुधार और आर्थिक प्रभाव का स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाए।
  • दीर्घकालिक दृष्टि: स्रोत-आधारित नियंत्रण (उद्योग, निर्माण, धूल, पराली) के साथ परिवहन-आधारित उपायों को संतुलित रूप से लागू किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वायु प्रदूषण (Air Pollution) · वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management) · क्रमबद्ध अनुक्रिया कार्य योजना (Graded Response Action Plan – GRAP) · भारत स्टेज उत्सर्जन मानक (Bharat Stage Emission Norms) · अंतर-राज्यीय व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता (Freedom of Trade, Commerce and Intercourse) – अनुच्छेद 301 · संचरण की स्वतंत्रता (Freedom of Movement) – अनुच्छेद 19(1)(घ) · स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार – अनुच्छेद 21 · प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle) · सावधानी सिद्धांत (Precautionary Principle) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) · आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति शृंखला · सार्वजनिक परिवहन का आधुनिकीकरण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: स्वच्छ वायु को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना गया
  • अनुच्छेद 48A: राज्य का पर्यावरण संरक्षण का नीति-निर्देश
  • अनुच्छेद 51A(g): नागरिकों का प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का कर्तव्य
  • अनुच्छेद 19(1)(g): परिवहन व्यवसाय करने की स्वतंत्रता प्रभावित
  • अनुच्छेद 301: अंतरराज्यीय व्यापार और आवागमन की स्वतंत्रता
  • सातवीं अनुसूची, संघ सूची/समवर्ती सूची: मोटर वाहन और पर्यावरण से जुड़े विषयों का विधायी विभाजन

अवधारणा प्रवाह

शीतकाल में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ना और गंभीर श्रेणी में पहुँचना  →  CAQM और दिल्ली सरकार द्वारा शीतकालीन कार्य योजना के अंतर्गत गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाना  →  पर्यटक परमिट सहित बसों और माल वाहक वाहनों का संचालन सीमित होना  →  बस किराये में 15-20 प्रतिशत वृद्धि और नाशवान वस्तुओं की आपूर्ति में बाधा  →  थोक बाज़ारों में कीमतें बढ़ना और छोटे संचालकों की आय तथा EMI भुगतान पर दबाव  →  नीति का मूल्यांकन और संक्रमण-काल की व्यवस्था के माध्यम से संतुलन स्थापित करना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपायों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग एक वैधानिक निकाय है, जिसका गठन वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के अंतर्गत किया गया है।
2. क्रमबद्ध अनुक्रिया कार्य योजना (GRAP) में प्रदूषण की गंभीरता के अनुसार चरणबद्ध उपाय निर्धारित किए गए हैं।
3. भारत स्टेज-IV उत्सर्जन मानक पूरे देश में 1 अप्रैल 2020 से लागू हैं और भारत स्टेज-VI मानक अभी केवल दिल्ली में लागू हैं।

उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: आयोग वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 द्वारा स्थापित वैधानिक निकाय है। कथन 2 सही है: GRAP वायु गुणवत्ता सूचकांक के स्तर के अनुसार चरणबद्ध (Stage I से IV) कार्रवाई तय करता है। कथन 3 गलत है: भारत स्टेज-VI मानक 1 अप्रैल 2020 से पूरे देश में लागू हैं, और BS-IV उन्हीं से पहले का मानक था।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): राज्यों की सीमाओं के पार माल और वाहनों की आवाजाही पर लोक हित में प्रतिबंध भारत में केवल भाग XIII के प्रावधानों की सीमा के भीतर ही लगाए जा सकते हैं।
कारण (R): अनुच्छेद 301 में अंतर-राज्यीय व्यापार, वाणिज्य और संसर्ग की स्वतंत्रता की गारंटी दी गई है, किंतु यह भाग XIII के अन्य प्रावधानों के अधीन है।

उपर्युक्त के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, किंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — अनुच्छेद 301 स्वतंत्रता की गारंटी देता है, पर इसे अनुच्छेद 302 से 305 सहित भाग XIII के अन्य प्रावधानों के अधीन रखा गया है। अतः लोक हित में संसद अनुच्छेद 302 के अंतर्गत प्रतिबंध लगा सकती है, और राज्य विधानमंडल अनुच्छेद 304 के अंतर्गत सीमित शर्तों के साथ। इसलिए (R) (A) की सही व्याख्या है।

Q3. निम्नलिखित सूचियों को सुमेलित कीजिए:
सूची I (अधिनियम)
A. वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981
B. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
C. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021
D. मोटर यान अधिनियम, 1988

सूची II (प्रमुख विषय)
1. पर्यावरण संरक्षण के लिए केंद्र सरकार को व्यापक शक्तियाँ देने वाला छत्र-विधान
2. एनसीआर के वायु-बेसिन हेतु अंतर-राज्यीय वैधानिक आयोग का आधार
3. वाहनों के पंजीकरण, लाइसेंस और परमिट से संबंधित केंद्रीय विधि
4. वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण हेतु राज्य व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से संबंधित विधि

सही सुमेलन चुनिए:

  1. A-1, B-2, C-3, D-4
  2. A-2, B-3, C-4, D-1
  3. A-4, B-1, C-2, D-3
  4. A-3, B-4, C-1, D-2

उत्तर: A-4, B-1, C-2, D-3 — वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 वायु प्रदूषण पर केंद्रीय व राज्य बोर्डों को अधिकार देता है (A-4)। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 छत्र-विधान है (B-1)। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 NCR के लिए वैधानिक आयोग का आधार है (C-2)। मोटर यान अधिनियम, 1988 वाहन पंजीकरण व परमिट से संबंधित है (D-3)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ वायु प्रदूषण से निपटने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश पर रोक जैसे उपाय आवश्यक माने जाते हैं, किंतु इनसे सार्वजनिक परिवहन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर भार भी पड़ता है। अनुच्छेद 19(5), अनुच्छेद 21 और भाग XIII के संदर्भ में ऐसे प्रतिबंधों के संवैधानिक एवं नीतिगत आयामों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि सहकारी संघवाद के सिद्धांतों के अंतर्गत प्रदूषण नियंत्रण और आजीविका के बीच टकराव को किस प्रकार कम किया जा सकता है। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर संरचना: (1) भूमिका: दिल्ली की शीतकालीन वायु गुणवत्ता समस्या, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा GRAP के अंतर्गत गैर-BS-VI वाहनों पर प्रवेश प्रतिबंध, और परिवहन संघों द्वारा बस किराये में 15-20% वृद्धि तथा लगभग 2.5 लाख माल वाहकों पर प्रभाव की चेतावनी का संक्षिप्त उल्लेख। (2) संवैधानिक आयाम: (क) अनुच्छेद 21 के अंतर्गत स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार, जिसे सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य (1991) में मान्यता मिली; (ख) अनुच्छेद 19(1)(घ) के अंतर्गत संचरण की स्वतंत्रता, जिस पर अनुच्छेद 19(5) के तहत लोक हित में उचित निर्बंधन लग सकते हैं; (ग) अनुच्छेद 301-304 के अंतर्गत अंतर-राज्यीय व्यापार की स्वतंत्रता और उसके अपवाद, विशेषकर अनुच्छेद 302 और 304(ख) की राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति की अपेक्षा। (घ) अनुच्छेद 48क (राज्य का कर्तव्य) और अनुच्छेद 51क(छ) (मौलिक कर्तव्य) का उल्लेख। (3) विधिक-नीतिगत आधार: वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981; पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986; वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021, जिसके तहत आयोग के निर्देश संबंधित राज्यों पर बाध्यकारी हैं। (4) न्यायिक दृष्टिकोण: एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ (ओलियम गैस रिसाव) में पूर्ण दायित्व सिद्धांत; विलोर सिटिजन्स वेलफेयर फोरम (1996) में सावधानी सिद्धांत और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत। (5) संतुलित दृष्टि: (क) पक्ष में तर्क: जीवन और स्वास्थ्य का अधिकार, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय में कमी; (ख) विपक्ष/चिंता: छोटे ऑपरेटरों और ऋण-आधारित वाहन मालिकों पर असमान भार, आपूर्ति शृंखला पर प्रभाव (सेब हिमाचल व जम्मू-कश्मीर से, आलू उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा से, प्याज महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान से; आजादपुर व गाज़ीपुर मंडियाँ), और पुराने वाहनों की घटती पुनर्विक्रय कीमत (उदाहरण: 15 लाख से 9 लाख रुपये)। (6) दूसरा भाग (सहकारी संघवाद): अंतर-राज्यीय समन्वय, CAQM और राज्य सरकारों के बीच परामर्श, समान मानकों का आधार, वाहन स्क्रैपेज नीति (2021) और स्वच्छ ईंधन/इलेक्ट्रिक व सीएनजी बसों के बेड़े का आधुनिकीकरण, संक्रमण-अवधि के लिए चरणबद्ध कार्यान्वयन तथा प्रभावित वर्गों के लिए सहायता तंत्र। (7) निष्कर्ष: आनुपातिकता के सिद्धांत के आधार पर उपायों का मूल्यांकन, जिसमें प्रतिबंध न्यूनतम आवश्यक हों और स्वास्थ्य लाभ व आजीविका हानि के बीच स्पष्ट संतुलन हो।

स्रोत: The Indian Express


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