नशामुक्त भारत अभियान: 96,700 युवाओं ने लिया राष्ट्रव्यापी साइक्लोथॉन और वॉकथॉन में भाग

नशामुक्त भारत अभियान: 96,700 युवाओं ने लिया राष्ट्रव्यापी साइक्लोथॉन और वॉकथॉन में भाग

नशामुक्त भारत अभियान: 96,700 युवाओं ने लिया राष्ट्रव्यापी साइक्लोथॉन और वॉकथॉन में भाग

नशा मुक्त युवा अभियान प्रक्रियाअभियान शुरू100 सप्ताहजन-जागरूकतानुक्कड़ नाटकसमुदायिक भागीदारीसाइक्लोथॉनस्वस्थ जीवनशैलीवॉकथॉननशा मुक्तिमाँग में कमी
नशा मुक्त युवा अभियान प्रक्रिया

✎ अनुच्छेद 47 राज्य को मादक द्रव्यों के निषेध का निदेश देता है, जबकि मादक द्रव्य नियंत्रण का विधिक आधार राष्ट्रीय मादक द्रव्य एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 है और माँग-कमी के लिए युवा-केंद्रित जन-जागरूकता अभियान (जैसे माय…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भारतीय समाज (युवा से जुड़े मुद्दे, सामाजिक सशक्तीकरण)  |  GS Paper II — शासन (सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप; योजनाओं के डिज़ाइन और क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियाँ)
  • Prelims: माय भारत (MY Bharat), राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), राष्ट्रीय मादक द्रव्य एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS Act, 1985), अनुच्छेद 47 (राज्य द्वारा नशीले पदार्थों के निषेध का निदेश), नशा मुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyaan), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), एकल मादक द्रव्य अभिसमय, 1961 (Single Convention on Narcotic Drugs, 1961), प्लॉगिंग (Plogging) और 26 जून — मादक द्रव्य दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी अंतरराष्ट्रीय दिवस
  • Essay: युवा शक्ति: नशा मुक्त समाज से विकसित राष्ट्र तक, सामुदायिक सहभागिता और सतत जन-जागरूकता: मादक द्रव्य समस्या के समाधान का मार्ग

त्वरित पुनरावृत्ति: अनुच्छेद 47 राज्य को मादक द्रव्यों के निषेध का निदेश देता है, जबकि मादक द्रव्य नियंत्रण का विधिक आधार राष्ट्रीय मादक द्रव्य एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 है और माँग-कमी के लिए युवा-केंद्रित जन-जागरूकता अभियान (जैसे माय भारत-एनएसएस का नशा मुक्त युवा अभियान) महत्वपूर्ण है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

माय भारत-राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) ने युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत 100 सप्ताह के ‘विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान’ के सातवें सप्ताह में 30-31 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रव्यापी साइक्लोथॉन, वॉकथॉन और दौड़ आयोजित कीं। इनमें देशभर के 200 से अधिक संस्थानों से 96,700 से अधिक प्रतिभागी जुड़े। अभियान का विषय ‘स्वस्थ युवा, नशामुक्त युवा (शक्ति एवं सेवा)’ रहा और इसमें नुक्कड़ नाटक, नारा-लेखन, संगीत, प्लॉगिंग तथा डिजिटल माध्यमों का उपयोग हुआ। समाचार इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि यह मादक द्रव्य निवारण को केवल कानूनी प्रवर्तन तक सीमित न रखकर जन-जागरूकता, स्वास्थ्य-संवर्धन और सामुदायिक सेवा से जोड़ने के एक बहुआयामी मॉडल को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में मादक द्रव्यों के दुरुपयोग से निपटने के लिए विधिक ढांचा मुख्यतः राष्ट्रीय मादक द्रव्य एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 के अंतर्गत है, जो मादक द्रव्यों के उत्पादन, कब्ज़े, व्यापार और तस्करी को दंडनीय अपराध बनाता है। मादक द्रव्य नियंत्रण में समन्वय का मुख्य केंद्र नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो है, जो गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  • संविधान का अनुच्छेद 47 राज्य को पोषाहार स्तर और जीवन-स्तर ऊँचा करने तथा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मादक पेयों और मादक द्रव्यों के निषेध की दिशा में प्रयास करने का निदेश देता है। यह राज्य नीति का निदेशक तत्व है, जिसके आधार पर नशा-निषेध नीतियाँ विकसित होती हैं।
  • राष्ट्रीय सेवा योजना की स्थापना 1969 में हुई थी और इसका आदर्श वाक्य ‘मैं नहीं, आप’ (Not Me But You) है। वर्तमान में युवा और खेल संबंधी कार्यक्रमों का समन्वय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के माध्यम से होता है, जबकि माय भारत युवाओं के लिए एक सहभागी मंच के रूप में कार्य करता है।
  • नशा मुक्त भारत अभियान सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा जागरूकता और पुनर्वास-उन्मुख दृष्टिकोण से संचालित किया जाता रहा है। इस पृष्ठभूमि में युवा-केंद्रित अभियान मांग-पक्ष (माँग में कमी) और सामुदायिक रोकथाम को जोड़ने का प्रयास करते हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकल मादक द्रव्य अभिसमय, 1961 और संयुक्त राष्ट्र मादक द्रव्य एवं अपराध कार्यालय (UNODC) मादक द्रव्य नियंत्रण के वैश्विक ढांचे का हिस्सा हैं। भारत इन प्रतिबद्धताओं के अंतर्गत आता है, और माँग-कमी (Demand Reduction) को नियंत्रण की एक प्रमुख रणनीति माना जाता है।

माय भारत-राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) का नशा मुक्त युवा अभियान क्या है?

  • यह एक बहु-सप्ताही राष्ट्रव्यापी अभियान है, जिसका नाम ‘विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान’ है और यह 100 सप्ताह की अवधि के लिए निर्धारित है।
  • अभियान में युवाओं को मादक द्रव्यों के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूक करने के साथ फिटनेस, स्वस्थ जीवन-शैली और सामुदायिक सेवा अपनाने पर बल दिया जाता है।
  • सप्ताह-वार विषय रखे गए हैं; दूसरे माह का विषय ‘स्वस्थ युवा, नशामुक्त युवा (शक्ति एवं सेवा)’ है।
  • गतिविधियों में साइकिल रैलियाँ (10–15 किमी), वॉकथॉन व दौड़ (3–5 किमी), नुक्कड़ नाटक, नारा-लेखन और संगीत आयोजन शामिल हैं, ताकि नशीले पदार्थों, साथियों के दबाव और पुनर्वास जैसे विषयों पर सार्वजनिक संवाद बने।
  • प्लॉगिंग के माध्यम से दौड़ या जॉगिंग के साथ सड़कों से कचरा संग्रह किया जाता है, जिससे पर्यावरणीय जिम्मेदारी को अभियान से जोड़ा जाता है। संग्रहित कचरा स्थानीय नगर निकायों को सौंपा गया।
  • माय भारत और एनएसएस युवा स्वयंसेवकों के नेतृत्व में सामुदायिक भागीदारी को सुदृढ़ करते हैं; डिजिटल माध्यमों पर #NashaMuktYuva जैसे हैशटैग के प्रयोग से संदेश का प्रसार किया जाता है।
  • इस मॉडल की विशेषता यह है कि यह माँग-कमी, स्वास्थ्य-संवर्धन, पर्यावरण और सामुदायिक सेवा को एक ही मंच पर जोड़ता है, जिससे यह आपसी सहभागिता पर आधारित दीर्घकालिक जन-आंदोलन की दिशा में कदम माना जा सकता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अभियान का स्वरूप यह 100 सप्ताह का ‘विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान’ है और समाचार 7वें सप्ताह की गतिविधियों से जुड़ा है। दूसरे माह की थीम ‘स्वस्थ युवा, नशामुक्त युवा’ (शक्ति एवं सेवा) है।
संस्थागत ढांचा माय भारत (MY Bharat) और राष्ट्रीय सेवा योजना (National Service Scheme) मिलकर इसे लागू कर रहे हैं। राष्ट्रीय सेवा योजना युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है।
भागीदारी का पैमाना 200 से अधिक संस्थानों से 96,700 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। इसमें छात्र, एनएसएस स्वयंसेवक, स्कूली समूह, महिला समूह और वरिष्ठ नागरिक शामिल थे।
गतिविधियों की बहु-आयामी प्रकृति साइकिल रैली (10–15 किमी), वॉकथॉन और दौड़ (3–5 किमी), नुक्कड़ नाटक, नारा-लेखन, संगीत, प्लॉगिंग और सामूहिक ‘नशा मुक्त संकल्प’ जैसी गतिविधियां एक साथ चलीं।
डिजिटल संचार युवा एंबेसडरों ने #NashaMuktYuva हैशटैग के साथ इंस्टाग्राम पर रील्स और तस्वीरें साझा कीं। इससे सामुदायिक संदेश का दायरा बढ़ा।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • नशे के सेवन के हानिकारक प्रभावों पर जन-जागरूकता बढ़ाना और युवाओं को साथियों के दबाव तथा नशे की लत से बचाव के बारे में संवाद में लाना।
  • नुक्कड़ नाटक और नारा-लेखन जैसे माध्यमों से संदेश को स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक संदर्भ में पहुंचाना, जिससे नशे की रोकथाम सामुदायिक विमर्श का विषय बने।
  • स्कूली समूहों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की भागीदारी से पीढ़ियों के बीच संवाद और सामाजिक एकजुटता को प्रोत्साहन।

स्वास्थ्य और शारीरिक कल्याण

  • साइकिल रैली, वॉकथॉन और दौड़ के माध्यम से फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली को व्यवहार का हिस्सा बनाने का प्रयास।
  • नशा-मुक्ति को केवल कानून-प्रवर्तन का विषय न मानकर सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से देखना, जो रोकथाम पर आधारित नीति की भावना के अनुरूप है।

पर्यावरणीय और नागरिक दायित्व

  • प्लॉगिंग के माध्यम से सड़कों से कचरा उठाना और अलग-अलग छांटे गए कचरे को स्थानीय नगर निकायों को सौंपना, जिससे स्थानीय अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली के साथ तालमेल बना।
  • सामुदायिक सेवा के माध्यम से नागरिक कर्तव्य की भावना को व्यवहार में उतारना।

शासन और नीति-क्रियान्वयन की दृष्टि से

  • युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की संस्थाओं का उपयोग करके लक्षित समूह तक पहुंचने का मॉडल, जिसमें स्वयंसेवी नेटवर्क और शैक्षणिक संस्थान साझेदार हैं।
  • सप्ताह-वार थीम और 100 सप्ताह की अवधि से निरंतर अभियान-आधारित व्यवहार परिवर्तन की रणनीति का संकेत मिलता है।

चुनौतियाँ

1. व्यवहार परिवर्तन की दीर्घकालिकता

  • एक सप्ताह की रैली या नारा-लेखन से नशे की आदत में स्थायी बदलाव सुनिश्चित नहीं होता। जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन के बीच का अंतर बड़ा है।
  • नशे की लत के इलाज और पुनर्वास (रिकवरी) के लिए सतत परामर्श और चिकित्सीय ढांचे की आवश्यकता होती है, जो केवल जागरूकता अभियानों से पूरी नहीं होती।

2. प्रभाव-मापन और आंकड़ों की स्पष्टता

  • घोषित कुल भागीदारी (96,700 से अधिक) और श्रेणी-वार आंकड़ों (वॉकथॉन व दौड़ में 23,300 से अधिक, साइक्लोथॉन में 8,000 से अधिक, प्लॉगिंग में 11,400 से अधिक) का योग स्पष्ट रूप से नहीं मिलता। इसलिए भागीदारी को नशे में कमी के परिणाम के रूप में नहीं पढ़ा जा सकता।
  • भागीदारी की संख्या को व्यवहारिक परिणाम (जैसे नशे के सेवन में कमी) से जोड़ने के लिए आधारभूत और अनुवर्ती सर्वेक्षण की आवश्यकता है।

3. नशे की आपूर्ति और प्रवर्तन का पक्ष

  • जागरूकता अभियान मांग-पक्ष को संबोधित करते हैं, जबकि नशीले पदार्थों की तस्करी और आपूर्ति पर नियंत्रण के लिए प्रवर्तन तंत्र अलग से सुदृढ़ होना चाहिए।
  • नशीले पदार्थों से संबंधित विधिक ढांचा मुख्यतः नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टांसेज़ अधिनियम, 1985 (NDPS Act, 1985) के अंतर्गत आता है, जिसका प्रवर्तन अलग एजेंसियों के समन्वय पर निर्भर करता है।

4. समावेशन और पहुंच की सीमा

  • आयोजन मुख्यतः संस्थानों और शहरी सार्वजनिक स्थलों पर केंद्रित दिखते हैं। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं तक इसी स्तर की पहुंच सुनिश्चित करना चुनौती है।
  • नशे की समस्या का सबसे अधिक बोझ कुछ आर्थिक रूप से कमजोर और हाशिये के समुदायों पर पड़ता है, जिन तक सामान्य संचार माध्यम कम पहुंचते हैं।

5. संसाधन और दीर्घकालिक वित्त-पोषण

  • स्वयंसेवकों, प्रशिक्षकों और आयोजन-सामग्री पर निरंतर व्यय की आवश्यकता होती है। स्वयंसेवी-आधारित मॉडल की स्थिरता पर प्रश्न उठते हैं।
  • स्थानीय नगर निकायों द्वारा कचरे के संग्रह और निस्तारण की क्षमता पर प्लॉगिंग जैसी पहल का दीर्घकालिक प्रभाव निर्भर करता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

समस्या चिंता का विषय
आंकड़ों का संबंध कुल भागीदारी और श्रेणी-वार आंकड़ों का योग स्पष्ट नहीं है; भागीदारी को नशे में कमी से जोड़ना कठिन है।
व्यवहार परिवर्तन सप्ताह-भर के आयोजन से स्थायी आदत-परिवर्तन की गारंटी नहीं मिलती।
पुनर्वास का अभाव जागरूकता के बाद नशे के आदी लोगों के उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था अलग से सुदृढ़ करनी होगी।
प्रवर्तन बनाम मांग-पक्ष आपूर्ति और तस्करी पर नियंत्रण के बिना मांग-पक्ष के प्रयास अधूरे रहते हैं।
भौगोलिक पहुंच शहरी और संस्थागत केंद्रों पर ध्यान से ग्रामीण और वंचित क्षेत्र छूट सकते हैं।
स्वयंसेवी मॉडल की स्थिरता स्वयंसेवकों की निरंतरता और संसाधनों पर निर्भरता अभियान की दीर्घकालिकता को प्रभावित कर सकती है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय सेवा योजना (National Service Scheme)
  • माय भारत (MY Bharat)
  • नशा मुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyaan)

आगे की राह

  • भागीदारी के आंकड़ों के साथ आधारभूत (baseline) और अनुवर्ती सर्वेक्षण करके नशे के सेवन में वास्तविक कमी को मापा जाए।
  • नुक्कड़ नाटक और नारा-लेखन जैसी गतिविधियों को विद्यालय और महाविद्यालय के पाठ्यक्रम-सहायक कार्यक्रमों से जोड़ा जाए, ताकि प्रभाव निरंतर बना रहे।
  • नशा-मुक्ति अभियान के साथ उपचार, परामर्श और पुनर्वास केंद्रों की पहुंच को समानांतर रूप से बढ़ाया जाए।
  • ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों और पंचायत स्तर की संस्थाओं को साझेदार बनाकर पहुंच का विस्तार किया जाए।
  • प्रवर्तन एजेंसियों, स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक न्याय विभाग के बीच समन्वय तंत्र बनाया जाए, ताकि मांग-पक्ष और आपूर्ति-पक्ष दोनों पर एक साथ काम हो।
  • प्लॉगिंग के साथ नगर निकायों की अपशिष्ट-संग्रह और छंटाई क्षमता को सुदृढ़ किया जाए, ताकि स्वयंसेवी प्रयास स्थानीय व्यवस्था में समाहित हो सकें।
  • स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण, मान्यता और प्रेरणा के लिए स्थिर संस्थागत ढांचा तैयार किया जाए, जिससे स्वयंसेवी मॉडल टिकाऊ बने।
  • डिजिटल माध्यमों के उपयोग के साथ स्थानीय भाषाओं में सटीक और वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि संदेश भ्रामक न हो।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मांग-आधारित न्यूनीकरण (Demand Reduction) और आपूर्ति-पक्ष नियंत्रण (Supply Reduction) · मादक द्रव्य (Narcotic Drugs) का दुरुपयोग और युवा स्वास्थ्य · राष्ट्रीय सेवा योजना (National Service Scheme) · माय भारत (MY Bharat) और युवा-नेतृत्व वाला सामुदायिक अभियान · अनुच्छेद 47 और राज्य का पोषण व लोक स्वास्थ्य संबंधी कर्तव्य · नशीले पदार्थ नियंत्रण कानून: मादक द्रव्य और मनःप्रभावी पदार्थ (नियंत्रित पदार्थ) अधिनियम, 1985 (NDPS Act, 1985) · नशा मुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyaan) · सहकर्मी दबाव (Peer Pressure) और सामाजिक अधिगम (Social Learning) · प्लॉगिंग और स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) के साथ समन्वय · नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान: विकसित भारत के लिए नेतृत्व

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 47: नशीले पदार्थों के हानिकारक सेवन पर रोक और जन-स्वास्थ्य सुधार का राज्य का कर्तव्य
  • अनुच्छेद 51A(छ): पर्यावरण की रक्षा और सुधार का मौलिक कर्तव्य

अवधारणा प्रवाह

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत माय भारत और राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा 100 सप्ताह के अभियान की योजना और थीम-निर्धारण।  →  200 से अधिक संस्थानों में साइकिल रैली, वॉकथॉन, दौड़, नुक्कड़ नाटक और प्लॉगिंग जैसी गतिविधियों का आयोजन।  →  नशे के हानिकारक प्रभावों और साथियों के दबाव पर जन-जागरूकता और सामुदायिक संवाद का निर्माण।  →  फिटनेस, स्वस्थ जीवनशैली और स्थानीय सफाई जैसे व्यवहार को प्रोत्साहन, जिससे युवाओं में सामूहिक जिम्मेदारी की भावना बढ़ती है।  →  सामूहिक ‘नशा मुक्त संकल्प’ और डिजिटल साझेदारी के माध्यम से व्यक्तिगत प्रतिबद्धता का सार्वजनिक विस्तार।  →  दीर्घकाल में नशे के सेवन में कमी, जो उपचार, पुनर्वास और प्रवर्तन के समानांतर प्रयासों पर निर्भर करेगी।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय सेवा योजना (National Service Scheme) की स्थापना वर्ष 1969 में हुई थी।
2. वर्तमान में राष्ट्रीय सेवा योजना युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अधीन कार्य करती है।
3. राष्ट्रीय सेवा योजना का आदर्श-वाक्य ‘Service Before Self’ है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. इनमें से कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं: राष्ट्रीय सेवा योजना की स्थापना 1969 में हुई और यह युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत आती है। कथन 3 गलत है, क्योंकि इसका आदर्श-वाक्य ‘Not Me But You’ (मैं नहीं, आप) है; ‘Service Before Self’ रोटरी क्लब से जुड़ा वाक्य है।

Q2. कथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): अनुच्छेद 47 राज्य को मादक पेय और ऐसी दवाओं के, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, प्रतिषेध (prohibition) की दिशा में प्रयास करने का निर्देश देता है।
कारण (R): राज्य नीति के निदेशक तत्व न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय हैं, इसलिए राज्य को इन्हें लागू करना अनिवार्य है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, किंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) सही है, किंतु (R) गलत है। — कथन (A) सही है, क्योंकि अनुच्छेद 47 में पोषाहार, जीवन-स्तर और लोक स्वास्थ्य के साथ मादक पेय व हानिकारक दवाओं के प्रतिषेध का उल्लेख है। कारण (R) गलत है, क्योंकि राज्य नीति के निदेशक तत्व अनुच्छेद 37 के अनुसार न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं।

Q3. निम्नलिखित सूचियों का सुमेलन कीजिए:
सूची-I (संस्था/प्रावधान)
A. मादक द्रव्य और मनःप्रभावी पदार्थ (नियंत्रित पदार्थ) अधिनियम, 1985
B. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (Narcotics Control Bureau)
C. अनुच्छेद 47
D. राष्ट्रीय युवा नीति, 2014

सूची-II (विवरण)
1. मादक पदार्थों से जुड़े अपराधों की जाँच और समन्वय करने वाली राष्ट्रीय स्तर की नोडल एजेंसी
2. राज्य पर मादक द्रव्यों के प्रतिषेध का निर्देश देने वाला राज्य नीति का निदेशक तत्व
3. मादक द्रव्यों की तस्करी और सेवन से संबंधित अपराधों के लिए दंड और प्रक्रिया का प्रावधान करने वाला विधान
4. युवाओं के सशक्तीकरण और विकास के लिए नीतिगत रूपरेखा

सही उत्तर चुनिए:

  1. A-3, B-1, C-2, D-4
  2. A-1, B-3, C-4, D-2
  3. A-2, B-4, C-1, D-3
  4. A-4, B-2, C-3, D-1

उत्तर: A-3, B-1, C-2, D-4 — NDPS अधिनियम, 1985 दंड और प्रक्रिया का विधान है (A-3)। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है, जो गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है (B-1)। अनुच्छेद 47 राज्य नीति का निदेशक तत्व है (C-2) और राष्ट्रीय युवा नीति, 2014 युवा विकास का नीतिगत ढाँचा है (D-4)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ नशा मुक्त युवा जैसे युवा-नेतृत्व वाले सामुदायिक अभियान मादक द्रव्यों के दुरुपयोग की रोकथाम में कितने प्रभावी हो सकते हैं? आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि मांग-पक्ष पर केवल जागरूकता के माध्यम से आपूर्ति-पक्ष की चुनौती का समाधान क्यों संभव नहीं है। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की रूपरेखा: (1) भूमिका: हाल के 100 सप्ताह के नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान का उल्लेख करते हुए मांग-पक्ष और आपूर्ति-पक्ष की अवधारणा स्पष्ट कीजिए। (2) संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 47 में राज्य का लोक स्वास्थ्य सुधार और मादक पेय व हानिकारक दवाओं के प्रतिषेध का कर्तव्य; अनुच्छेद 37 के अनुसार यह न्यायोचित नहीं है, इसलिए नीति-क्रियान्वयन पर बल। (3) विधिक ढाँचा: मादक द्रव्य और मनःप्रभावी पदार्थ (नियंत्रित पदार्थ) अधिनियम, 1985 की धारा 27 (सेवन) और धारा 37 (जमानत की कठोर शर्तें) तथा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की भूमिका। (4) संस्थागत पहल: राष्ट्रीय सेवा योजना, माय भारत (MY Bharat) प्लेटफॉर्म, नशा मुक्त भारत अभियान (मंत्रालय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता); अभियान के आँकड़े (96,700 से अधिक प्रतिभागी, 200 से अधिक संस्थान, नुक्कड़ नाटक व प्लॉगिंग) के उदाहरण। (5) मूल्यांकन के पक्ष: प्रभावी पक्ष: सहकर्मी दबाव (Peer Pressure) के प्रति सामाजिक अधिगम (Albert Bandura का सामाजिक अधिगम सिद्धांत) से युवाओं का व्यवहार बदल सकता है; स्थानीय स्तर पर स्वयंसेवी जुड़ाव; प्लॉगिंग से स्वच्छ भारत मिशन के साथ समन्वय। सीमाएँ: उपस्थिति और सेल्फी-आधारित गतिविधियों से दीर्घकालीन व्यवहार-परिवर्तन का मापन कठिन; पुनर्वास (Recovery) की व्यवस्था की कमी; मापन के लिए राष्ट्रीय सर्वेक्षण आधारित आँकड़ों की आवश्यकता। (6) आपूर्ति-पक्ष का तर्क: अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क, वित्तीय प्रवाह और अवैध आपूर्ति पर नियंत्रण के लिए कानून प्रवर्तन, सीमा प्रबंधन और समन्वय (NCB, राज्य पुलिस) आवश्यक; केवल जागरूकता से आपूर्ति नहीं रुकती। (7) वैकल्पिक मत: अपराधीकरण-मुक्ति (Decriminalisation) का पुर्तगाल मॉडल (2001) बनाम कठोर दंड-आधारित दृष्टिकोण; संतुलित नीति का तर्क। (8) निष्कर्ष: मांग और आपूर्ति दोनों पक्षों का समन्वित दृष्टिकोण, UNODC की विश्व ड्रग रिपोर्ट के संदर्भ में, और युवा सहभागिता को पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने की आवश्यकता।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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