01 Nov विशेष अभियान 6: पर्यावरण मंत्रालय ने ई-कचरा निपटान में रिकॉर्ड सफलता हासिल की
✎ ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अंतर्गत उत्पादकों पर विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) लागू है, और ई-कचरे का वैज्ञानिक निपटान CPCB-पंजीकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं और पुनर्नवीनीकरणकर्ताओं के माध्यम से ही कराया जाना चाहिए।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण (ई-कचरा प्रबंधन, विस्तारित उत्पादक दायित्व, चक्रीय अर्थव्यवस्था) | GS Paper II — शासन (प्रशासनिक सुधार, लोक शिकायत निवारण, अभिलेख प्रबंधन)
- Prelims: ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 (E-Waste (Management) Rules, 2022), विस्तारित उत्पादक दायित्व (Extended Producer Responsibility) — EPR, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board) — CPCB, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 (Environment (Protection) Act, 1986), बासेल कन्वेंशन (Basel Convention) — हानिकारक अपशिष्ट के सीमापार आवागमन पर नियंत्रण, प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (Department of Administrative Reforms and Public Grievances) — DARPG, CPGRAMS (केंद्रीय लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली), सामान्य वित्तीय नियम, 2017 (General Financial Rules, 2017) — अप्रयोज्य सामग्री के निपटान से संबंधित प्रावधान
- Essay: ई-कचरा: चक्रीय अर्थव्यवस्था की चुनौती और अवसर, सरकारी कार्यालयों में प्रशासनिक सुधार: स्वच्छता से सुशासन तक
त्वरित पुनरावृत्ति: ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के अंतर्गत उत्पादकों पर विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) लागू है, और ई-कचरे का वैज्ञानिक निपटान CPCB-पंजीकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं और पुनर्नवीनीकरणकर्ताओं के माध्यम से ही कराया जाना चाहिए।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और उसके संगठनों ने 31 अक्टूबर 2026 को ‘विशेष अभियान 6’ सफलतापूर्वक संपन्न किया। इस बार अभियान का मुख्य केंद्र ई-कचरे का प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान रहा, जो प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) के 13 अगस्त 2026 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप था। अभियान 132 चिह्नित स्थलों पर चला। ई-कचरे के लक्ष्य 3271 में से 3099 की उपलब्धि (94.74 प्रतिशत) दर्ज हुई, जबकि निपटान से 64,18,158 रुपये का राजस्व मिला और कार्यालय परिसरों में 32,854 वर्ग फुट जगह खाली हुई। मंत्रालय के सचिव ने नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन में निरीक्षण कर निर्देश दिया कि सभी पृथक्कृत सामग्री का निपटान सीपीसीबी में पंजीकृत ई-कचरा पुनर्चक्रणकर्ताओं, पुनर्नवीनीकरणकर्ताओं और उत्पादकों के माध्यम से वैज्ञानिक ढंग से हो। स्वच्छता पैमाने पर 100 प्रतिशत, जन शिकायतों के निपटान में 99.78 प्रतिशत और राज्य सरकार के संदर्भों में 100 प्रतिशत उपलब्धि रही। वहीं सांसदों के संदर्भों में 78.37 प्रतिशत और तीन महीने से अधिक लंबित संसदीय आश्वासनों में 50 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज हुई, जो प्रशासनिक प्रक्रियाओं में आगे सुधार की गुंजाइश को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- विशेष अभियान की शुरुआत 2021 में DARPG के निर्देश पर हुई थी। इसके बाद यह अभियान एक निरंतर चलने वाली संस्थागत प्रक्रिया बन गया है, जिसका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, अभिलेखों का सुव्यवस्थित रखरखाव और लंबित मामलों का निपटान सुनिश्चित करना है।
- ई-कचरा ऐसे बेकार हो चुके बिजली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हैं जो अपनी उपयोग-अवधि पूरी कर चुके हैं। इनमें सीसा, पारा और कैडमियम जैसे विषैले तत्व होते हैं, जबकि तांबा, सोना और चांदी जैसी मूल्यवान धातुएं भी पुनः प्राप्त की जा सकती हैं।
- ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत बनाए गए हैं। ये नियम 1 अप्रैल 2023 से लागू हुए और इनमें उत्पादकों पर विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) का प्रावधान है, जिसके तहत उत्पादकों को अपने उत्पादों के अंत-जीवन के प्रबंधन की जिम्मेदारी लेनी होती है।
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ई-कचरा से संबंधित उत्पादकों, पुनर्चक्रणकर्ताओं और पुनर्नवीनीकरणकर्ताओं के पंजीकरण की निगरानी करता है। इसलिए सरकारी कार्यालयों से निकले ई-कचरे का निपटान पंजीकृत इकाइयों के माध्यम से कराना नियामकीय अनुपालन का हिस्सा है।
- सरकारी कार्यालयों में अप्रयोज्य वस्तुओं और स्क्रैप का निपटान सामान्य वित्तीय नियम, 2017 के प्रावधानों के अंतर्गत होता है। इसलिए इस अभियान में निपटान से प्राप्त राजस्व को प्रशासनिक दक्षता और सार्वजनिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग से जोड़कर देखा जाता है।
विशेष अभियान 6 क्या है?
- विशेष अभियान 6 DARPG के निर्देशों पर चलने वाले स्वच्छता अभियान की श्रृंखला का छठा संस्करण है, जिसमें सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, अभिलेख प्रबंधन और लंबित मामलों के निपटान पर एक साथ ध्यान दिया जाता है।
- इस संस्करण में ई-कचरे के संग्रह, पृथक्करण और निपटान को प्राथमिकता दी गई, ताकि कार्यालय परिसरों से पुराने उपकरण व्यवस्थित ढंग से हटें और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से उनका प्रबंधन हो।
- ई-कचरे को श्रेणियों में बांटकर लक्ष्य तय किए गए, जैसे सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार उपकरण, उपभोक्ता विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा फोटोवोल्टिक पैनल, बड़े और छोटे विद्युत उपकरण, चिकित्सा उपकरण और प्रयोगशाला उपकरण।
- पृथक्करण का अर्थ है ई-कचरे को उसकी प्रकृति के अनुसार अलग करना, ताकि खतरनाक घटकों का सुरक्षित प्रबंधन हो सके और मूल्यवान धातुओं का पुनर्चक्रण संभव हो।
- निपटान के लिए सीपीसीबी-पंजीकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं, पुनर्नवीनीकरणकर्ताओं और उत्पादकों की सहायता ली जाती है, क्योंकि अनौपचारिक या असुरक्षित प्रक्रियाओं से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर खतरे होते हैं।
- फाइलों की समीक्षा के अंतर्गत भौतिक फाइलों और ई-फाइलों का निरीक्षण किया जाता है, जिससे ई-ऑफिस जैसी डिजिटल प्रणालियों के साथ अभिलेखों का सुव्यवस्थित प्रबंधन सुनिश्चित होता है।
- जन शिकायतों और संसदीय आश्वासनों के निपटान की स्थिति भी अभियान का हिस्सा है, जिससे नागरिक-केंद्रित प्रशासन और उत्तरदायित्व की भावना मजबूत होती है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| अभियान का स्वरूप | 2021 में प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (Department of Administrative Reforms and Public Grievances – DARPG) के निर्देश पर शुरू हुआ सरकारी कार्यालयों का संस्थागत अभियान, जो स्वच्छता, अभिलेख प्रबंधन और लंबित मामलों के निपटान पर केंद्रित है |
| इस वर्ष का मुख्य विषय | ई-कचरे का प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान; यह DARPG के 13 अगस्त 2026 के दिशा-निर्देशों और मानक संचालन प्रक्रिया के अनुरूप है |
| कवरेज | मंत्रालय के 132 चिह्नित स्थान, जिनमें अधीनस्थ कार्यालय और स्वायत्त निकाय शामिल हैं |
| ई-कचरा उपलब्धि | 3271 लक्ष्य के विरुद्ध 3099 उपलब्धि, अर्थात 94.74 प्रतिशत; खिलौने, चिकित्सा उपकरण और प्रयोगशाला उपकरण श्रेणियों में 100 प्रतिशत उपलब्धि |
| वित्तीय और भौतिक लाभ | स्क्रैप और बेकार वस्तुओं के निपटान से 64,18,158 रुपये का राजस्व तथा कार्यालय परिसर में 32,854 वर्ग फुट जगह खाली |
| लंबित मामलों का निपटान | राज्य सरकार के संदर्भ, जन शिकायतों की अपीलें और पीएमओ संदर्भ 100 प्रतिशत; जन शिकायतें 99.78 प्रतिशत; सांसदों से प्राप्त संदर्भ 78.37 प्रतिशत |
महत्व
पर्यावरणीय
- ई-कचरे में सीसा, पारा और कैडमियम जैसे विषैले तत्व होते हैं; असुरक्षित निपटान से मृदा, भूजल और वायु प्रदूषण होता है
- वैज्ञानिक पृथक्करण और पंजीकृत रीसाइक्लिंग से खतरनाक तत्वों का नियंत्रित प्रबंधन संभव होता है
- चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की अवधारणा के अनुसार धातुओं और घटकों की पुनःप्राप्ति से प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव घटता है
प्रशासनिक
- सरकारी कार्यालय स्वयं आचरण का मानक प्रस्तुत करते हैं, जिससे नागरिकों और उद्योग के लिए उदाहरण बनता है
- अभिलेखों और भौतिक तथा ई-फाइलों की समीक्षा से अभिलेख प्रबंधन और ई-शासन की व्यवहारिक क्षमता बढ़ती है
- लंबित संदर्भों और जन शिकायतों के समयबद्ध निपटान से प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत होती है
आर्थिक
- स्क्रैप और बेकार वस्तुओं की बिक्री से सरकारी राजस्व प्राप्त होता है, जो सार्वजनिक संपत्ति के प्रबंधन का एक व्यावहारिक पहलू है
- औपचारिक और पंजीकृत रीसाइक्लिंग इकाइयों के माध्यम से निपटान अनौपचारिक क्षेत्र की तुलना में अधिक पारदर्शी आर्थिक ढांचा बनाता है
चुनौतियाँ
1. अनौपचारिक ई-कचरा क्षेत्र
- ई-कचरे का बड़ा हिस्सा अब भी अनौपचारिक तरीकों से संसाधित होता है, जिससे श्रमिकों और पर्यावरण पर स्वास्थ्य जोखिम बना रहता है
- पंजीकृत रीसाइकलर, रिफर्बिशर और उत्पादकों के नेटवर्क का विस्तार अभी सीमित है
यूपीएससी लिंक: GS-3: पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण और अपशिष्ट प्रबंधन
2. ई-कचरे के नियामक ढांचे का अनुपालन
- विस्तारित उत्पादक दायित्व (Extended Producer Responsibility – EPR) के तहत उत्पादकों की जिम्मेदारी का वास्तविक क्रियान्वयन और निगरानी चुनौतीपूर्ण है
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board – CPCB) के पास पंजीकरण और ट्रैकिंग की क्षमता का विस्तार आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: GS-3: पर्यावरण से संबंधित नियम, संस्थाएं और उनकी भूमिका
3. लंबित संसदीय आश्वासन और संदर्भ
- 3 महीने से अधिक समय से लंबित संसदीय आश्वासनों में केवल 50 प्रतिशत का निपटान हो सका, जो विधायी-कार्यकारी समन्वय की चुनौती दर्शाता है
- सांसदों से प्राप्त संदर्भों का निपटान 78.37 प्रतिशत रहा, जिससे अनुवर्ती तंत्र को सुदृढ़ करने की आवश्यकता रेखांकित होती है
यूपीएससी लिंक: GS-2: संसद, कार्यपालिका की जवाबदेही और प्रशासनिक सुधार
4. अभियान बनाम निरंतर संस्थागत व्यवहार
- विशेष अभियानों की सफलता प्रायः अवधि-विशेष के लक्ष्यों पर आधारित होती है; स्थायी व्यवहार परिवर्तन सुनिश्चित करना कठिन है
- स्वच्छता को संस्थागत बनाने का संकल्प तभी टिकाऊ होगा जब उसे नियमित निरीक्षण और प्रदर्शन-आधारित समीक्षा से जोड़ा जाए
यूपीएससी लिंक: GS-2: प्रशासनिक सुधार और सिविल सेवा में मूल्य तथा नैतिकता
5. आंकड़ों की पारदर्शिता और सत्यापन
- लक्ष्य और उपलब्धि के आंकड़े पोर्टल पर अपलोड होते हैं; उनकी स्वतंत्र सत्यापन प्रणाली का स्पष्ट उल्लेख नहीं है
- प्रतिशत आंकड़ों की तुलना के लिए लक्ष्य-निर्धारण की एकसमान पद्धति आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: GS-2: शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सूचना का अधिकार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| ई-कचरे का अनौपचारिक निपटान | स्वास्थ्य और पर्यावरणीय जोखिम; कर-राजस्व और आंकड़ों से बाहर रहने वाला प्रवाह |
| उत्पादक दायित्व का क्रियान्वयन | उत्पादकों द्वारा संग्रह और पुनर्चक्रण लक्ष्यों की वास्तविक पूर्ति की निगरानी कठिन |
| पंजीकृत इकाइयों की क्षमता | रीसाइक्लिंग क्षमता और तकनीक की भौगोलिक असमानता |
| लंबित संदर्भ और आश्वासन | संसदीय आश्वासनों का 50 प्रतिशत निपटान; अनुवर्ती तंत्र की कमजोरी |
| अल्पकालिक अभियान की सीमा | अभियान समाप्ति के बाद व्यवहार में गिरावट का जोखिम |
| डेटा विश्वसनीयता | स्व-रिपोर्टिंग पर निर्भरता; स्वतंत्र ऑडिट का अभाव |
आगे की राह
- ई-कचरे के संग्रह के लिए सरकारी कार्यालयों में अलग-अलग स्थानों और नियमित संग्रह कार्यक्रम की स्थायी व्यवस्था की जाए
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) में पंजीकृत रीसाइकलर्स की सूची को सार्वजनिक और अद्यतन रखा जाए
- विस्तारित उत्पादक दायित्व के तहत उत्पादकों के संग्रह और पुनर्चक्रण लक्ष्यों की नियमित निगरानी और ऑडिट हो
- लंबित संसदीय आश्वासनों और सांसदों के संदर्भों के लिए समयसीमा-आधारित ट्रैकिंग प्रणाली अपनाई जाए
- अभिलेख प्रबंधन और ई-फाइलों की समीक्षा को प्रदर्शन-आधारित मूल्यांकन से जोड़ा जाए
- कर्मचारियों के लिए ई-कचरा पृथक्करण और सुरक्षित निपटान पर नियमित प्रशिक्षण आयोजित किया जाए
- लक्ष्य-निर्धारण और उपलब्धि मापन के लिए एकसमान मानदंड और स्वतंत्र सत्यापन की व्यवस्था की जाए
- अभियान की सफलता को स्थायी संस्थागत व्यवहार में बदलने हेतु वार्षिक समीक्षा रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ई-कचरा (E-waste) · विस्तारित उत्पादक दायित्व (Extended Producer Responsibility) · ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 (E-Waste (Management) Rules, 2022) · केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) · प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) · स्वच्छता का संस्थागतकरण (Institutionalisation of Cleanliness) · प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle) · चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) · सतत विकास लक्ष्य 12 (SDG 12) · अभिलेख प्रबंधन और ई-फाइल (Record Management and e-File) · सार्वजनिक शिकायत निवारण (Public Grievance Redressal) · पर्यावरणीय अभिशासन (Environmental Governance)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 48क (Article 48A): पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का राज्य का दायित्व
- अनुच्छेद 51क(छ) (Article 51A(g)): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का मौलिक कर्तव्य
अवधारणा प्रवाह
DARPG द्वारा वर्ष 2021 से विशेष अभियान की संस्थागत शुरुआत → 13 अगस्त 2026 को DARPG के दिशा-निर्देश जारी → मंत्रालय और अधीनस्थ कार्यालयों के 132 स्थानों पर ई-कचरे और स्क्रैप का संग्रह व पृथक्करण → CPCB में पंजीकृत रीसाइकलर्स, रिफर्बिशर्स और उत्पादकों के माध्यम से सुरक्षित और वैज्ञानिक निपटान → स्क्रैप निपटान से 64,18,158 रुपये का राजस्व और 32,854 वर्ग फुट कार्यालय जगह की प्राप्ति → लंबित फाइलों, जन शिकायतों और संदर्भों के निपटान के साथ स्वच्छता को संस्थागत रूप देने का संकल्प
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. Consider the following statements regarding the management of electronic waste in India:
1. The E-Waste (Management) Rules, 2022 provide for Extended Producer Responsibility under which producers are obliged to ensure the collection and environmentally sound disposal of e-waste generated from their products.
2. India is a party to the Basel Convention, which regulates the transboundary movement of hazardous wastes, including certain electronic wastes.
3. The special campaigns for cleanliness and disposal of old records in Central Government offices are run by the Ministry of Housing and Urban Affairs.
How many of the above statements are correct?
- Only one
- Only two
- Only three
- All
उत्तर: Only two — कथन 1 सही है: ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 में विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) का प्रावधान है, जिसके तहत उत्पादकों को अपने उत्पादों के ई-कचरे के संग्रह और पर्यावरण-अनुकूल निपटान की व्यवस्था करनी होती है। कथन 2 सही है: भारत बेसल कन्वेंशन का पक्षकार है, जो खतरनाक अपशिष्टों के सीमा-पार आवागमन को नियंत्रित करता है। कथन 3 गलत है: इन विशेष अभियानों की शुरुआत प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) के निर्देश पर हुई थी, न कि आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा।
Q2. Consider the following two statements:
Assertion (A): The Environment (Protection) Act, 1986 serves as the umbrella legislation under which the Central Government frames rules for the management of hazardous wastes, including e-waste.
Reason (R): The Environment (Protection) Act, 1986 empowers the Central Government to take all such measures as it deems necessary for protecting and improving the quality of the environment.
In the light of the above statements, select the correct answer using the codes given below:
- Both A and R are true and R is the correct explanation of A
- Both A and R are true but R is not the correct explanation of A
- A is true but R is false
- A is false but R is true
उत्तर: Both A and R are true and R is the correct explanation of A — पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 एक छत्र-कानून (umbrella legislation) है, और इसी के अंतर्गत खतरनाक अपशिष्ट तथा ई-कचरे से संबंधित नियम बनाए जाते हैं। इस अधिनियम की व्यापक शक्तियाँ ही केंद्र सरकार को पर्यावरण की गुणवत्ता की रक्षा और उसमें सुधार के लिए आवश्यक उपाय करने का आधार देती हैं। अतः R, A की सही व्याख्या है।
Q3. With reference to the Constitution of India, which one of the following Articles lays down the fundamental duty of every citizen ‘to protect and improve the natural environment including forests, lakes, rivers and wild life, and to have compassion for living creatures’?
- Article 48A
- Article 51A(g)
- Article 21
- Article 32
उत्तर: Article 51A(g) — अनुच्छेद 51A(g) मूल कर्तव्यों में से एक है, जो नागरिकों पर प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और उसमें सुधार का दायित्व डालता है। अनुच्छेद 48A राज्य के नीति-निदेशक तत्वों में आता है, जो राज्य पर पर्यावरण संरक्षण का दायित्व डालता है। अनुच्छेद 21 जीवन के अधिकार से संबंधित है, जिसकी व्याख्या में स्वच्छ पर्यावरण को भी शामिल किया गया है, और अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारों के अधिकार से संबंधित है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सरकारी कार्यालयों में ई-कचरे और पुराने अभिलेखों के निपटान को केवल सफाई का अभियान मानना अपर्याप्त है, क्योंकि यह मूलतः संस्थागत अभिशासन का प्रश्न है। ई-कचरा प्रबंधन के विधिक ढाँचे और प्रशासनिक तंत्र के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि ऐसे अभियान समय-समय पर चलने वाले प्रयास बनने के बजाय निरंतर संस्थागत व्यवहार कैसे बन सकते हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर संरचना (Model-answer skeleton):
1. भूमिका: हाल के विशेष अभियान 6 के तथ्य रखें। मंत्रालय और इसके संगठनों में ई-कचरे के निपटान से 64,18,158 रुपये का राजस्व और 32,854 वर्ग फुट जगह खाली हुई। ई-कचरे का लक्ष्य 3,271 इकाई था, जिसमें 3,099 इकाइयों (94.74 प्रतिशत) की उपलब्धि दर्ज हुई। स्वच्छता स्थल 132 में से सभी 132 पर पूरे हुए। लंबित जन शिकायतों में 450 में से 449 और संसदीय आश्वासनों में 16 में से 8 का निपटान हुआ। इसे ‘स्वच्छता और अभिलेख प्रबंधन’ के मिश्रित प्रयास के रूप में रखें।
2. विधिक और नीतिगत ढाँचा:
(क) पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत केंद्र को नियम बनाने की व्यापक शक्तियाँ हैं।
(ख) ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 में विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR), CPCB के पोर्टल पर पंजीकृत रीसाइकलर, रिफर्बिशर और डिस्मैंटलर के माध्यम से निपटान, तथा उत्पादकों के लिए संग्रह-लक्ष्यों का प्रावधान है।
(ग) हानिकारक एवं अन्य अपशिष्ट (प्रबंधन और सीमा-पार आवागमन) नियम, 2016 और बेसल कन्वेंशन, जो खतरनाक अपशिष्ट के सीमा-पार आवागमन पर रोक लगाते हैं।
(घ) संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 48A (राज्य का दायित्व), अनुच्छेद 51A(g) (नागरिकों का मूल कर्तव्य), और अनुच्छेद 21 की व्याख्या में स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार।
3. न्यायिक दृष्टिकोण: विन्सेंट विलेज बनाम भारत संघ जैसे मामलों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों में प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle) और सावधानी सिद्धांत (Precautionary Principle) का विकास। वेल्लोर सिटिज़न्स वेलफेयर फोरम बनाम भारत संघ (1996) में इन सिद्धांतों को मान्यता मिली। अल्मित्रा एच. पटेल बनाम भारत संघ (2000) में नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर बल दिया गया। पाठ्यक्रम में इन्हें ध्यान से जोड़ें।
4. प्रशासनिक तंत्र: DARPG के 2021 से चल रहे विशेष अभियान का संस्थागत स्वरूप, स्वच्छता को कार्यालयी व्यवहार बनाना, ई-फाइलों और भौतिक फाइलों की समीक्षा (क्रमशः 14,164 और 12,234 इकाइयों का लक्ष्य पूरा होना), और सार्वजनिक शिकायत निवारण के लिए CPGRAMS जैसी डिजिटल व्यवस्था।
5. समालोचनात्मक विश्लेषण:
(क) पक्ष: अभियान-आधारित कार्यान्वयन से शीघ्र परिणाम, जवाबदेही का अनुशासन, संसाधनों की वसूली और जगह की बचत, तथा कर्मचारियों में पर्यावरणीय संवेदनशीलता।
(ख) विपक्ष: अभियान की प्रकृति के कारण अनुपालन मौसमी बन सकता है। राजस्व-लक्ष्य अपशिष्ट में कमी (पुनःउपयोग और न्यूनीकरण) के बजाय निपटान को प्राथमिकता दे सकते हैं। लक्ष्य-उपलब्धि के आंकड़े मात्रात्मक हैं, गुणात्मक परिणाम (सुरक्षित पृथक्करण का सत्यापन) अलग से मापे जाने चाहिए। बचे लंबित मामले (जैसे संसदीय आश्वासन 8 से आगे न बढ़ना) बताते हैं कि अभियान की सीमाएँ हैं।
6. आगे का मार्ग: ‘कैडल-टू-ग्रेव’ ट्रैकिंग के लिए EPR पोर्टल से जोड़ना, हरित क्रय नीति (Green Public Procurement), अभिलेखों का पूर्ण डिजिटलीकरण, कर्मचारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण, और मिशन लाइफ (Mission LiFE) की जीवनशैली-आधारित सोच को कार्यालयी आदतों से जोड़ना। सतत विकास लक्ष्य 12 (SDG 12), विशेष रूप से लक्ष्य 12.5 (अपशिष्ट न्यूनीकरण) से इसे जोड़ें।
7. निष्कर्ष: अभियान प्रशासनिक इच्छाशक्ति का संकेत है, पर स्थायी बदलाव के लिए नियमित निगरानी, विधिक अनुपालन और व्यवहार-परिवर्तन की निरंतर प्रक्रिया आवश्यक है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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