01 Nov AI से कैसे बना ताइवान दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था?
✎ ताइवान की तीव्र संवृद्धि AI-प्रेरित निवेश और सेमीकंडक्टर निर्यात पर आधारित है, और GDP की वास्तविक वृद्धि मुद्रास्फीति का समायोजन करने के बाद मापी जाती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — अर्थव्यवस्था (राष्ट्रीय आय, आर्थिक संवृद्धि के घटक, निवेश और निर्यात) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (सेमीकंडक्टर और उन्नत चिप निर्माण) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (वैश्विक आपूर्ति शृंखला और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी पर निर्भरता)
- Prelims: सकल घरेलू उत्पाद (GDP) — वास्तविक और नाममात्र अवधारणा, सेमीकंडक्टर चिप और फाउंड्री मॉडल, सकल स्थायी पूंजी निर्माण (Gross Fixed Capital Formation), व्यापार शेष (Trade Balance) और व्यापार अधिशेष, बाजार पूंजीकरण (Market Capitalisation), सेमीकंडक्टर इंडिया कार्यक्रम (Semicon India Programme), भारत सेमीकंडक्टर मिशन (India Semiconductor Mission — ISM), मुद्रास्फीति का समायोजन और GDP डिफ्लेटर
- Essay: कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती प्रौद्योगिकी: क्या आर्थिक संवृद्धि का नया स्रोत एक या कुछ देशों तक सीमित रह सकता है?, तकनीकी विशेषज्ञता पर आधारित अर्थव्यवस्थाएँ: छोटे आकार के देश भी वैश्विक आर्थिक महत्व कैसे प्राप्त करते हैं?
त्वरित पुनरावृत्ति: ताइवान की तीव्र संवृद्धि AI-प्रेरित निवेश और सेमीकंडक्टर निर्यात पर आधारित है, और GDP की वास्तविक वृद्धि मुद्रास्फीति का समायोजन करने के बाद मापी जाती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
ताइवान की वास्तविक GDP में जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में 14.36 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो 2025 की वार्षिक वृद्धि दर 8.76 प्रतिशत से कहीं अधिक है। ताइवान के महानिदेशालय (Directorate General of Budget, Accounting and Statistics) ने 2026 के लिए 11.05 प्रतिशत और 2027 के लिए 6.04 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया है, जबकि कुछ अर्थशास्त्री इसे इससे भी ऊँचा मानते हैं। इस तीव्र संवृद्धि का मुख्य कारण कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े वैश्विक निवेश की लहर है, जिसकी धुरी ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) है। निवेश और निर्यात मिलकर इस वृद्धि के लगभग 80 प्रतिशत के लिए उत्तरदायी रहे। स्रोत के अनुसार, इसी अवधि में भारत की GDP वृद्धि दर पहली दो तिमाहियों में 8.6 प्रतिशत और 7.8 प्रतिशत रही, जिससे यह तुलनात्मक संदर्भ में उच्च होते हुए भी ताइवान से पीछे दिखती है। इसलिए यह घटना बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मानकों और संवृद्धि के स्रोतों के विश्लेषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
पृष्ठभूमि
- ताइवान 2025 में नाममात्र GDP के आधार पर विश्व की लगभग 22वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। उसका GDP लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि भारत का लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर है, अर्थात् आकार में भारत लगभग 4 गुना है।
- TSMC विश्व की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर चिप निर्माता कंपनी है और एनवीडिया (Nvidia) जैसी कंपनियों की प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। स्रोत के अनुसार 2026 में इसका शुद्ध राजस्व लगभग 175 बिलियन डॉलर रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष से 43 प्रतिशत अधिक है।
- वैश्विक स्तर पर AI अवसंरचना, जैसे डेटा सेंटर और उन्नत प्रोसेसर, में भारी पूंजी निवेश हो रहा है। इस निवेश का सीधा लाभ उन देशों को मिल रहा है जो चिप निर्माण की आपूर्ति शृंखला के उच्च मूल्य वाले चरणों पर स्थित हैं।
- जुलाई-सितंबर 2026 में ताइवान का निवेश 26.36 प्रतिशत और निर्यात 21.12 प्रतिशत बढ़ा। सितंबर में निर्यात 61 प्रतिशत बढ़कर 87.22 अरब डॉलर हुआ और व्यापार अधिशेष 23.63 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा।
- स्रोत में उल्लिखित OCBC के अर्थशास्त्री हर्बर्ट वोंग के अनुसार AI का प्रभाव निर्यात से आगे बढ़कर घरेलू उपकरण व्यय, क्षमता विस्तार और व्यापक आर्थिक गतिविधि तक फैल रहा है।
- भारत ने भी सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सेमीकंडक्टर इंडिया कार्यक्रम (Semicon India Programme) लागू किया है, जिसका प्रशासनिक नियंत्रण इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के पास है।
सेमीकंडक्टर उद्योग और उससे जुड़ी आर्थिक संवृद्धि क्या है?
- सेमीकंडक्टर (अर्धचालक) वे पदार्थ हैं जिनकी विद्युत चालकता चालक और अचालक के बीच होती है। इन्हीं से बने एकीकृत परिपथ (चिप) कंप्यूटर, मोबाइल, वाहन और AI प्रणालियों के मूल घटक हैं।
- फाउंड्री मॉडल में कंपनी स्वयं चिप डिज़ाइन नहीं करती, बल्कि दूसरी कंपनियों के डिज़ाइन के अनुसार चिप का निर्माण करती है। TSMC इसी मॉडल का सबसे बड़ा उदाहरण है।
- GDP की वास्तविक वृद्धि मुद्रास्फीति के प्रभाव को घटाकर मापी जाती है, जबकि नाममात्र वृद्धि में कीमत परिवर्तन शामिल रहता है। इसलिए स्रोत में दी गई 14.36 प्रतिशत की दर वास्तविक संदर्भ में है।
- GDP के व्यय पक्ष में निजी उपभोग, सकल स्थायी पूंजी निर्माण (निवेश), सरकारी व्यय और शुद्ध निर्यात (निर्यात घटा आयात) शामिल होते हैं। ताइवान में निवेश और शुद्ध निर्यात दोनों की भूमिका प्रमुख रही।
- सकल स्थायी पूंजी निर्माण में मशीनों, संयंत्रों और भवनों पर किया गया नया निवेश गिना जाता है। उच्च तकनीक वाले विनिर्माण में यह अंश तेजी से बढ़ता है और इसका गुणक प्रभाव (Multiplier Effect) अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ता है।
- बाजार पूंजीकरण किसी कंपनी के बकाया शेयरों के कुल बाजार मूल्य को दर्शाता है। यह कंपनी के मूल्यांकन का सूचक है, पर यह देश की GDP का माप नहीं है।
- आपूर्ति शृंखला पर अत्यधिक निर्भरता एक रणनीतिक जोखिम भी है, क्योंकि किसी एक क्षेत्र में व्यवधान पूरे वैश्विक उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण कई देश चिप विनिर्माण में विविधीकरण की नीतियाँ अपना रहे हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| वास्तविक वृद्धि दर | 2026 की जुलाई-सितंबर तिमाही में ताइवान का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product – GDP) 14.36% बढ़ा। 2025 में पूरे वर्ष की वृद्धि 8.76% थी। |
| प्रमुख चालक | निवेश में 26.36% और निर्यात में 21.12% की वृद्धि हुई। इन दोनों घटकों ने इस तिमाही की लगभग 80% वृद्धि में योगदान दिया। |
| TSMC की केंद्रीय भूमिका | ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) विश्व की सबसे बड़ी अर्धचालक चिप निर्माता है। यूरोपीय अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक अर्थव्यवस्था केंद्र (ECIPE) के जनवरी के अनुमान के अनुसार ताइवान के GDP में इसका हिस्सा लगभग 8.9% था। |
| व्यापार अधिशेष | सितंबर 2026 में ताइवान का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) 23.63 अरब डॉलर का रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा। इसी महीने निर्यात 61% बढ़कर 87.22 अरब डॉलर हो गया। |
| आर्थिक आकार की स्थिति | 2025 में ताइवान विश्व की 22वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। इसका GDP लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि भारत का लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर है। |
महत्व
आर्थिक
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) से जुड़े पूँजी-व्यय ने ताइवान की आर्थिक संवृद्धि को तेज़ किया है। यह वृद्धि मुख्यतः निवेश और निर्यात के माध्यम से आई है।
- वास्तविक GDP का अर्थ है कि वृद्धि मुद्रास्फीति (Inflation) का प्रभाव घटाने के बाद मापी गई है। इसलिए 14.36% की वृद्धि को उत्पादन में वास्तविक विस्तार के रूप में पढ़ा जाना चाहिए।
- 2026 के लिए सरकारी पूर्वानुमान 11.05% और 2027 के लिए 6.04% है। कुछ अर्थशास्त्रियों के अनुसार यह अनुमान कम हो सकता है।
औद्योगिक और तकनीकी
- ताइवान की अर्थव्यवस्था अर्धचालक मूल्य शृंखला के उच्च-तकनीकी और उच्च-मूल्य वाले हिस्से में केंद्रित है। यही इसकी प्रतिस्पर्धी शक्ति का आधार है।
- ओसीबीसी (OCBC) के अर्थशास्त्री हरबर्ट वोंग के अनुसार एआई की तेज़ी अब निर्यात से आगे बढ़कर स्थानीय उपकरण व्यय, क्षमता विस्तार और व्यापक आर्थिक गतिविधि तक फैल रही है। इसे चक्र का विस्तार (Spillover) कहा जा सकता है।
रणनीतिक और भू-राजनीतिक
- विश्व की उन्नत अर्धचालक चिप आपूर्ति का बड़ा हिस्सा एक ही क्षेत्र और एक ही कंपनी से आता है। इससे ताइवान का आर्थिक महत्व वैश्विक आपूर्ति शृंखला की सुरक्षा से जुड़ जाता है।
- एआई-आधारित डेटा केंद्रों और उन्नत कंप्यूटिंग की माँग से यह संबंध और गहरा हुआ है। इसलिए अर्धचालक उद्योग अब केवल आर्थिक नहीं, रणनीतिक विषय भी है।
भारत के संदर्भ में तुलनात्मक दृष्टि
- ‘सबसे तेज़ बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था’ का वर्गीकरण आधार और वृद्धि दर दोनों पर निर्भर करता है। ताइवान का आकार भारत से काफी छोटा है, इसलिए उसकी ऊँची वृद्धि दर का आधार भिन्न है।
- भारत की 2026 की पहली दो तिमाहियों की वृद्धि दर 8.6% और 7.8% रही। यह ऊँची है, परंतु ताइवान की दर के समान नहीं है। यह अंतर उद्योग-संरचना और निवेश-चक्र के भेद को दर्शाता है।
चुनौतियाँ
1. संकेंद्रण जोखिम (Concentration Risk)
- वृद्धि का बड़ा हिस्सा एक कंपनी और एक तकनीकी क्षेत्र पर टिका है। इस कंपनी के उत्पादन, लागत या बाज़ार-स्थिति में झटका पूरे देश की वृद्धि को प्रभावित कर सकता है।
- TSMC का राजस्व 2026 में 175 अरब डॉलर अनुमानित है, जो पिछले वर्ष से 43% अधिक है। यह दर्शाता है कि एक ही उद्योग पर निर्भरता कितनी गहरी हो चुकी है।
यूपीएससी लिंक: GS3: अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक असंतुलन और आपूर्ति शृंखला की सुरक्षा
2. एआई निवेश चक्र की स्थिरता
- वर्तमान वृद्धि का आधार वैश्विक एआई निवेश की तेज़ी है। यदि वैश्विक माँग घटती है या निवेश धीमा होता है, तो निर्यात और पूँजी-व्यय दोनों पर दबाव आ सकता है।
- चक्रीय तेज़ी और दीर्घकालिक संवृद्धि में अंतर करना आवश्यक है। 2027 के लिए 6.04% का अनुमान इसी सामान्यीकरण की ओर संकेत करता है।
यूपीएससी लिंक: GS3: आर्थिक संवृद्धि के चालक और व्यापार चक्र
3. बाह्य माँग पर निर्भरता
- निर्यात में 21.12% की वृद्धि और रिकॉर्ड व्यापार अधिशेष बाहरी बाज़ारों की माँग पर निर्भर हैं। व्यापार संरक्षणवाद या शुल्क नीतियों में बदलाव सीधे इस वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं।
- घरेलू उपभोग का हिस्सा इस चित्र में अपेक्षाकृत छोटा दिखता है। इसलिए वृद्धि का लाभ व्यापक घरेलू आय तक पहुँचने की सीमाएँ बनी रहती हैं।
यूपीएससी लिंक: GS3: अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निर्यात-आधारित विकास
4. भू-राजनीतिक जोखिम
- अर्धचालक उत्पादन का केंद्र होने के कारण ताइवान की आर्थिक स्थिति क्षेत्रीय तनाव और आपूर्ति-बाधा के जोखिम से जुड़ी रहती है।
- ऐसे जोखिम वैश्विक चिप आपूर्ति को भी प्रभावित करते हैं, जिससे दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाएँ अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होती हैं।
यूपीएससी लिंक: GS2: भारत के पड़ोस और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भू-राजनीति; GS3: आपूर्ति शृंखला की सुरक्षा
5. आँकड़ों और अनुमानों की व्याख्या
- वास्तविक और नाममात्र GDP, तिमाही और वार्षिक अनुमान, तथा स्वतंत्र विश्लेषकों के संशोधित अनुमान अलग-अलग तस्वीर दे सकते हैं। आँकड़ों को उनके संदर्भ में पढ़ना आवश्यक है।
- ‘सबसे तेज़ बढ़ती’ जैसे शीर्षक छोटे आधार और उच्च-वृद्धि वाले क्षेत्र के कारण भ्रामक हो सकते हैं। इसलिए तुलना करते समय आकार और अवधि दोनों का ध्यान रखना चाहिए।
यूपीएससी लिंक: GS3: राष्ट्रीय आय के आँकड़े और उनकी सीमाएँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अर्धचालक पर निर्भरता | एक कंपनी और एक क्षेत्र पर अत्यधिक केंद्रण से वृद्धि का जोखिम बढ़ता है। |
| चक्रीय तेज़ी | एआई निवेश में मंदी आने पर निवेश और निर्यात दोनों घट सकते हैं। |
| निर्यात पर अत्यधिक निर्भरता | व्यापार नीतियों और बाहरी माँग में बदलाव से वृद्धि अस्थिर हो सकती है। |
| वृद्धि का व्यापक वितरण | पूँजी-प्रधान क्षेत्र की वृद्धि का लाभ व्यापक रोज़गार और घरेलू आय तक पहुँचना अनिश्चित है। |
| भू-राजनीतिक तनाव | क्षेत्रीय तनाव या आपूर्ति-बाधा वैश्विक चिप आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है। |
| आँकड़ों की व्याख्या | वास्तविक वृद्धि, आधार प्रभाव और अनुमानों के संशोधन से तुलना भ्रामक हो सकती है। |
आगे की राह
- औद्योगिक नीति में आपूर्ति शृंखला का विविधीकरण करना, ताकि किसी एक क्षेत्र या कंपनी पर निर्भरता कम हो।
- अर्धचालक और उच्च-तकनीकी विनिर्माण में घरेलू क्षमता, कौशल और अनुसंधान एवं विकास (Research and Development – R&D) में दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहित करना।
- निर्यात-आधारित वृद्धि के साथ घरेलू माँग और उत्पादकता बढ़ाने वाले उपायों को संतुलित करना, ताकि वृद्धि का आधार व्यापक बने।
- वृद्धि के लाभ को रोज़गार और कौशल-विकास के माध्यम से श्रमिकों तक पहुँचाने पर ध्यान देना, ताकि पूँजी-प्रधान विकास का असमान प्रभाव कम हो।
- भू-राजनीतिक जोखिमों के प्रति आकस्मिक योजना (Contingency Planning) तैयार करना और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के माध्यम से आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- वृद्धि-दर की तुलना करते समय वास्तविक आँकड़ों, अर्थव्यवस्था के आकार और आधार-वर्ष के प्रभाव को साथ में देखना, ताकि निष्कर्ष सटीक हों।
- एआई-आधारित विकास के नैतिक, डेटा-सुरक्षा और विनियामक पहलुओं पर स्पष्ट नीतिगत ढाँचा विकसित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
वास्तविक बनाम नॉमिनल सकल घरेलू उत्पाद (Real vs Nominal GDP) · आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) · कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) · अर्धचालक विनिर्माण (Semiconductor Manufacturing) · निवेश-संचालित संवृद्धि (Investment-led Growth) · व्यापार शेष (Trade Surplus) · आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) · एकाग्रता जोखिम (Concentration Risk) · भारत अर्धचालक मिशन (India Semiconductor Mission) · उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (Production Linked Incentive) · समावेशी संवृद्धि (Inclusive Growth) · सृजनात्मक विनाश (Creative Destruction)
अवधारणा प्रवाह
विश्व में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के लिए उन्नत चिप और डेटा केंद्रों की माँग बढ़ती है। → ताइवान में TSMC जैसी कंपनियाँ उत्पादन और क्षमता विस्तार में भारी निवेश करती हैं। → इस निवेश से निर्माण, उपकरण और सेवाओं की गतिविधि बढ़ती है, और वास्तविक GDP में तेज़ वृद्धि होती है। → चिप निर्यात में वृद्धि से व्यापार अधिशेष बढ़ता है और निर्यात वृद्धि का बड़ा योगदान बनता है। → निवेश और निर्यात मिलकर लगभग 80% वृद्धि समझाते हैं, जिससे वृद्धि एक ही चालक पर अधिक निर्भर हो जाती है। → आगे चलकर वैश्विक माँग, भू-राजनीतिक जोखिम और चक्र की स्थिरता तय करेंगे कि यह तेज़ी कितनी टिकाऊ रहेगी।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (Real GDP) में कीमत-परिवर्तन (मुद्रास्फीति) का प्रभाव समायोजित किया जाता है।
2. बाज़ार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद में से शुद्ध अप्रत्यक्ष कर घटाने पर प्राप्त मान को कारक लागत पर सकल घरेलू उत्पाद कहा जाता है।
3. सकल घरेलू उत्पाद प्रतिहारक (GDP Deflator) नॉमिनल और वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात का 100 गुना होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: सभी — कथन 1 सही है: वास्तविक GDP आधार वर्ष की स्थिर कीमतों पर मापा जाता है, इसलिए उसमें कीमत-वृद्धि का प्रभाव हटा रहता है। कथन 2 सही है: कारक लागत पर GDP = बाज़ार कीमत पर GDP − (अप्रत्यक्ष कर − सहायिकी)। कथन 3 भी सही है: प्रतिहारक = (नॉमिनल GDP ÷ वास्तविक GDP) × 100।
Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक में एक कथन अभिकथन (A) और एक कारण (R) दिया गया है।
अभिकथन (A): किसी देश की आर्थिक संवृद्धि की तुलना के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि-दर नॉमिनल सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि-दर से अधिक उपयुक्त मानी जाती है।
कारण (R): वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद में मूल्य-स्तर के परिवर्तन का प्रभाव हटा दिया जाता है, जिससे उत्पादन की वास्तविक मात्रा में हुई वृद्धि का आकलन हो पाता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (b) (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (c) (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
- (d) (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
उत्तर: (a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — अभिकथन सही है, क्योंकि वास्तविक वृद्धि-दर उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन दिखाती है और मूल्य-प्रभाव से मुक्त होती है। कारण भी सही है और अभिकथन की सीधी व्याख्या करता है।
Q3. निम्नलिखित सूचियों का सही मिलान कीजिए:
सूची I (अवधारणा)
1. वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद
2. सकल घरेलू उत्पाद प्रतिहारक
3. नॉमिनल सकल घरेलू उत्पाद
4. सकल मूल्य वर्धन (GVA)
सूची II (परिभाषा)
A. चालू कीमतों पर उत्पादन का मूल्य
B. आधार वर्ष की स्थिर कीमतों पर उत्पादन का मूल्य
C. नॉमिनल और वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद का अनुपात (×100)
D. उत्पाद करों और सहायिकियों के प्रभाव से पहले, क्षेत्रवार मूल्य-वर्धन का योग
सही उत्तर चुनिए:
- 1-A, 2-B, 3-C, 4-D
- 1-B, 2-C, 3-A, 4-D
- 1-C, 2-A, 3-D, 4-B
- 1-B, 2-D, 3-A, 4-C
उत्तर: 1-B, 2-C, 3-A, 4-D — वास्तविक GDP आधार वर्ष की स्थिर कीमतों पर उत्पादन है (1-B)। प्रतिहारक नॉमिनल और वास्तविक GDP का अनुपात (×100) है (2-C)। नॉमिनल GDP चालू कीमतों पर मापा गया मान है (3-A)। GVA बाज़ार कीमत के बजाय आधारभूत कीमत पर क्षेत्रवार मूल्य-वर्धन का योग है (4-D)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ ताइवान के उदाहरण से स्पष्ट होता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़ा निवेश और निर्यात किसी अर्थव्यवस्था की आर्थिक संवृद्धि को तीव्र गति दे सकते हैं। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही यह भी बताइए कि क्या ऐसी संवृद्धि समावेशी और टिकाऊ हो सकती है, और भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था के संदर्भ में उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन तथा अर्धचालक नीति इसे किस सीमा तक संस्थागत रूप दे सकती है। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल उत्तर के बिंदु: (1) परिचय और अवधारणा: सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वास्तविक और नॉमिनल अवधारणा; वास्तविक संवृद्धि में मूल्य-प्रभाव का समायोजन; उद्धरण यह बताएँ कि आँकड़े ताइवान के महानिदेशालय (Directorate General of Budget, Accounting and Statistics) के हैं। (2) ताइवान के तथ्य: 2025 में संवृद्धि 8.76 प्रतिशत; 2026 की जुलाई-सितंबर तिमाही में वास्तविक संवृद्धि 14.36 प्रतिशत; 2026 के पूर्ण वर्ष का सरकारी अनुमान 11.05 प्रतिशत और 2027 का 6.04 प्रतिशत; अर्थशास्त्रियों के अनुसार वास्तविक संवृद्धि इससे अधिक हो सकती है। (3) संरचना: निवेश की वृद्धि 26.36 प्रतिशत और निर्यात 21.12 प्रतिशत, दोनों मिलाकर लगभग 80 प्रतिशत संवृद्धि; सितंबर में व्यापार शेष 23.63 अरब डॉलर और निर्यात में 61 प्रतिशत वृद्धि। TSMC का 2026 का अनुमानित शुद्ध राजस्व लगभग 175 अरब डॉलर (43 प्रतिशत अधिक); ECIPE के अनुमान (जनवरी) के अनुसार TSMC का योगदान ताइवान की GDP में लगभग 8.9 प्रतिशत। (4) सैद्धांतिक ढाँचा: रॉबर्ट सोलो का संवृद्धि मॉडल और सोलो अवशेष (तकनीकी प्रगति का योगदान); जोसेफ शुम्पीटर की सृजनात्मक विनाश की अवधारणा, जिसमें नवाचार से संरचनात्मक परिवर्तन होता है। (5) आलोचनात्मक विश्लेषण: एकाग्रता जोखिम (एक कंपनी और एक भौगोलिक क्षेत्र पर निर्भरता); निवेश-चक्र की अस्थिरता; पूँजी-गहन उद्योग में सीमित रोजगार और समावेशिता का प्रश्न; उपकरण और कच्चे माल में आयात-निर्भरता; भू-राजनीतिक जोखिम से आपूर्ति शृंखला का व्यवधान; वृद्धि-दर का निर्यात-बाज़ार पर निर्भर होना। (6) भारत के संदर्भ में: भारत की 2026 की पहली दो तिमाहियों की संवृद्धि 8.6 प्रतिशत और 7.8 प्रतिशत (लेख के अनुसार); भारत अर्धचालक मिशन (India Semiconductor Mission) के अंतर्गत विनिर्माण और परीक्षण-संयोजन इकाइयों को सहायता; उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ; IndiaAI मिशन; डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 का डेटा-शासन पक्ष। (7) संतुलित मत और निष्कर्ष: तीव्र संवृद्धि और समावेशी विकास में अंतर; घरेलू मूल्य-वर्धन, कौशल विकास, अनुसंधान एवं विकास और आपूर्ति शृंखला के विविधीकरण पर बल; नीति-निर्माण के लिए दीर्घकालिक दृष्टि।
स्रोत: The Indian Express
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