वाणिज्य सचिव की यूरोपीय आयोग के अधिकारियों संग उच्च-स्तरीय बैठकें

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भारत-यूरोपीय संघ व्यापार वार्तावार्ता आरंभ2007 मेंउच्च-स्तरीय बैठकेंवाणिज्य सचिव द्वाराउद्योग इनपुटव्यावहारिक चिंताएँसमझौता वार्ताजारी है
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार वार्ता

✎ यूरोपीय संघ भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से है; व्यापक एवं संतुलित व्यापार एवं निवेश समझौता वार्ता और कार्बन सीमा समायोजन तंत्र भारत-यूरोपीय संघ आर्थिक संबंधों के दो केंद्रीय मुद्दे हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (भारत और यूरोपीय संघ; द्विपक्षीय एवं क्षेत्रीय समूह)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (अंतरराष्ट्रीय व्यापार; मुक्त व्यापार समझौते; निर्यात संवर्धन; पर्यावरण और व्यापार का संबंध)
  • Prelims: यूरोपीय संघ (European Union) के प्रमुख संस्थान: यूरोपीय आयोग, यूरोपीय संसद और यूरोपीय परिषद, व्यापक एवं संतुलित व्यापार एवं निवेश समझौता (Broad-based Trade and Investment Agreement), कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (Carbon Border Adjustment Mechanism — CBAM), भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (India-EU Trade and Technology Council), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत वाणिज्य विभाग और उसके सचिव की भूमिका, विश्व व्यापार संगठन (WTO) और बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था, मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement) और सीमा शुल्क रियायतें, भारत-यूरोपीय संघ व्यापार नीति मंच (India-EU Trade Policy Forum)
  • Essay: बहुपक्षीय व्यवस्था के कमजोर पड़ने के दौर में द्विपक्षीय और क्षेत्रीय व्यापार समझौतों की भूमिका, पर्यावरणीय मानकों के नाम पर व्यापार: कार्बन सीमा समायोजन तंत्र और विकासशील देशों की चिंताएँ

त्वरित पुनरावृत्ति: यूरोपीय संघ भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से है; व्यापक एवं संतुलित व्यापार एवं निवेश समझौता वार्ता और कार्बन सीमा समायोजन तंत्र भारत-यूरोपीय संघ आर्थिक संबंधों के दो केंद्रीय मुद्दे हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने ब्रसेल्स में यूरोपीय आयोग के अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ उच्च-स्तरीय बैठकें कीं। यह भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार एवं निवेश संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए नियमित द्विपक्षीय संवाद का हिस्सा है। ऐसी बैठकों में सामान्यतः मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता की प्रगति, बाज़ार पहुँच से जुड़े मुद्दे, तकनीकी व्यापार बाधाएँ और यूरोपीय संघ के नियामक उपाय, जैसे कार्बन सीमा समायोजन तंत्र, चर्चा में आते हैं। उद्योग प्रतिनिधियों की भागीदारी से निर्यातकों की व्यावहारिक चिंताएँ भी नीति-निर्माताओं तक पहुँचती हैं। प्रेस विज्ञप्ति में बैठकों के ठोस निष्कर्षों का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है, इसलिए परीक्षा की दृष्टि से इस घटना को द्विपक्षीय आर्थिक कूटनीति के सामान्य ढाँचे के संदर्भ में समझना उपयोगी है।

पृष्ठभूमि

  • भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार वार्ता वर्ष 2007 में आरंभ हुई थी, जिसे व्यापक एवं संतुलित व्यापार एवं निवेश समझौते के रूप में आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया। वार्ता में कई चरणों में रुकावटें और पुनरारंभ आए हैं।
  • यूरोपीय संघ भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। वस्तुओं और सेवाओं दोनों के व्यापार में इसका महत्वपूर्ण स्थान है।
  • भारत और यूरोपीय संघ ने वर्ष 2022 में व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की स्थापना की, जिसका उद्देश्य व्यापार, प्रौद्योगिकी, आपूर्ति शृंखला और स्वच्छ प्रौद्योगिकी जैसे विषयों पर समन्वय बढ़ाना है।
  • यूरोपीय संघ ने कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए कार्बन सीमा समायोजन तंत्र लागू करने की प्रक्रिया अपनाई है, जिसका चरणबद्ध कार्यान्वयन वर्ष 2026 से वित्तीय दायित्वों के साथ शुरू हुआ है। इससे इस्पात, एल्युमिनियम, सीमेंट जैसे उत्पादों के निर्यातकों पर प्रभाव पड़ता है।
  • विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अंतर्गत पर्यावरणीय उपायों को व्यापार में भेदभाव न करने के सिद्धांत के अनुरूप होना चाहिए, और इस पर विकसित तथा विकासशील देशों के बीच विचार-विमर्श जारी है।

भारत-यूरोपीय संघ व्यापार संबंध क्या है?

  • यूरोपीय संघ यूरोप के 27 सदस्य देशों का राजनीतिक और आर्थिक संघ है, जिसकी व्यापार नीति का अधिकार यूरोपीय आयोग के पास है। इसलिए व्यापार वार्ता यूरोपीय आयोग के माध्यम से होती है।
  • व्यापक एवं संतुलित व्यापार एवं निवेश समझौता एक ऐसा समझौता है जिसमें वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार के साथ निवेश, बौद्धिक संपदा, सरकारी खरीद और सतत विकास जैसे विषय शामिल किए जाते हैं।
  • मुक्त व्यापार समझौते में दो या अधिक देश आपसी शुल्क और गैर-शुल्क बाधाएँ घटाने पर सहमत होते हैं, जबकि प्रत्येक देश बाहरी देशों के प्रति अपनी शुल्क नीति स्वतंत्र रूप से तय करता है।
  • गैर-शुल्क बाधाओं में मानक, प्रमाणन, तकनीकी नियम और पर्यावरणीय आवश्यकताएँ आती हैं, जो निर्यात की लागत और पहुँच को प्रभावित करती हैं।
  • कार्बन सीमा समायोजन तंत्र आयातित उत्पादों पर उनके उत्पादन में हुए कार्बन उत्सर्जन के आधार पर मूल्य-समायोजन लागू करने की व्यवस्था है, ताकि यूरोपीय उद्योग और आयातित वस्तुओं के बीच जलवायु नीति की लागत में समानता बनी रहे।
  • भारत के लिए कार्बन सीमा समायोजन तंत्र का मुद्दा जलवायु-न्याय और साझा किंतु विभेदित उत्तरदायित्व के सिद्धांत से भी जुड़ता है, क्योंकि यह विकसित और विकासशील देशों की भिन्न परिस्थितियों का प्रश्न उठाता है।
  • वाणिज्य सचिव प्रशासनिक स्तर पर व्यापार वार्ता का समन्वय करते हैं, जबकि अंतिम राजनीतिक निर्णय संबंधित सरकारी प्रक्रियाओं और मंत्रिस्तरीय स्वीकृति से होते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
बैठकों का स्वरूप वाणिज्य सचिव स्तर पर यूरोपीय आयोग के अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों से उच्च-स्तरीय संवाद, जिसमें सरकार-से-सरकार और सरकार-उद्योग दोनों स्तरों पर समन्वय होता है।
यूरोपीय संघ की व्यापार नीति का ढाँचा यूरोपीय संघ की साझा व्यापार नीति और व्यापार समझौतों की वार्ता का अधिकार यूरोपीय आयोग के पास है। इसलिए आयोग के अधिकारियों से सीधा संवाद वार्ता की दिशा तय करने में निर्णायक होता है।
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार संबंध यूरोपीय संघ भारत के प्रमुख व्यापारिक और निवेश भागीदारों में से एक है। वस्तु व्यापार के साथ सेवा व्यापार और निवेश प्रवाह भी इस संबंध के केंद्र में हैं।
मुक्त व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement) की वार्ता 2022 में पुनः आरंभ हुई थी। इसका उद्देश्य व्यापक और संतुलित समझौते तक पहुँचना है।
उद्योग की भागीदारी उद्योग प्रतिनिधियों की उपस्थिति से बाजार पहुँच की व्यावहारिक बाधाएँ, मानक-संबंधी अपेक्षाएँ और आपूर्ति शृंखला की चुनौतियाँ वार्ता के एजेंडा में सीधे आती हैं।
प्रेस विज्ञप्ति की सीमा स्रोत में बैठकों के विस्तृत एजेंडा या किसी निर्णय का उल्लेख नहीं है। इसलिए विश्लेषण सामान्य संरचना और ज्ञात वार्ता-मुद्दों तक सीमित रखना चाहिए।

महत्व

आर्थिक

  • बाजार पहुँच का विस्तार: यूरोपीय संघ के बड़े उपभोक्ता बाजार तक शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं में कमी से भारतीय निर्यातकों को लाभ मिल सकता है।
  • व्यापार विविधीकरण: किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता घटाकर निर्यात-आधार को व्यापक बनाने में सहायता मिलती है।
  • निवेश और प्रौद्योगिकी प्रवाह: नियमों की स्पष्टता से यूरोपीय निवेश और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को प्रोत्साहन मिल सकता है।
  • आपूर्ति शृंखला का एकीकरण: मूल्य शृंखला में भारत की भागीदारी बढ़ाने के अवसर खुलते हैं।

रणनीतिक और कूटनीतिक

  • नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था के प्रति साझा प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करने का अवसर मिलता है।
  • एक बड़े विकसित आर्थिक क्षेत्र के साथ संबंध गहरे होने से भारत की आर्थिक कूटनीति का दायरा बढ़ता है।
  • बहु-ध्रुवीय वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में भारत की स्थिति और सौदेबाज़ी क्षमता मजबूत हो सकती है।

शासन और संस्थागत

  • वाणिज्य विभाग की भूमिका नीति-निर्माण, वार्ता-समन्वय और हितधारक परामर्श के केंद्र के रूप में स्पष्ट होती है।
  • सरकार और उद्योग के बीच नियमित संवाद से नीतिगत प्रतिक्रिया अधिक व्यावहारिक बनती है।

चुनौतियाँ

1. कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM)

  • यूरोपीय संघ का कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (Carbon Border Adjustment Mechanism – CBAM) इस्पात, एल्यूमीनियम और सीमेंट जैसे उत्सर्जन-सघन उत्पादों के आयात पर कार्बन-संबंधी दायित्व लगाता है।
  • इसका संक्रमणकालीन चरण 2023 से लागू हुआ है, जिससे निर्यातकों पर उत्सर्जन आँकड़ों के रिपोर्टिंग का बोझ बढ़ा है।
  • यह तंत्र उत्पादन-प्रक्रिया के पर्यावरणीय प्रदर्शन को व्यापार-लागत से जोड़ता है, जिससे छोटे उत्पादकों पर अधिक दबाव पड़ता है।

2. गैर-शुल्क बाधाएँ और मानक-संबंधी नियम

  • यूरोपीय संघ के कठोर उत्पाद-मानक, खाद्य सुरक्षा और पशु-स्वास्थ्य विनियम गैर-शुल्क बाधाओं (Non-Tariff Barriers) के रूप में कार्य करते हैं।
  • सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी उपायों की वैज्ञानिक आधार-युक्त जाँच आवश्यक है, ताकि नियम संरक्षणवाद का साधन न बनें।
  • पंजीकरण, ट्रेसेबिलिटी और दस्तावेज़ीकरण की लागत विशेषकर लघु और मध्यम उद्यमों के लिए बाधा बनती है।

3. सेवा क्षेत्र और व्यावसायिक गतिशीलता

  • सेवा व्यापार में पेशेवरों की अस्थायी आवाजाही, मान्यता और योग्यता-पारस्परिकता जैसे मुद्दे वार्ता में जटिल रहते हैं।
  • डिजिटल सेवाओं में डेटा प्रवाह और गोपनीयता के नियम भारत और यूरोपीय संघ के दृष्टिकोण में भिन्न हैं।

4. बहु-स्तरीय वार्ता ढाँचा

  • यूरोपीय संघ में समझौते के अंतिम अनुमोदन के लिए यूरोपीय आयोग के अलावा सदस्य देशों और यूरोपीय संसद की सहमति भी आवश्यक होती है।
  • इससे वार्ता की समय-सीमा अनिश्चित रहती है और प्रतिबद्धताओं में पुनर्विचार की संभावना बनी रहती है।

5. व्यापार उपचारी उपाय और संरक्षणवाद का जोखिम

  • एंटी-डंपिंग, प्रतिकारी शुल्क और सुरक्षोपाय (Safeguard) जैसे उपाय दोनों ओर से लागू होते हैं और व्यापार में अनिश्चितता बढ़ाते हैं।
  • भारत में ऐसे मामलों की जाँच वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) द्वारा की जाती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) उत्सर्जन-सघन निर्यात की लागत बढ़ना और रिपोर्टिंग का बोझ
गैर-शुल्क बाधाएँ मानक, पंजीकरण और प्रमाणन की जटिलता से बाजार पहुँच सीमित होना
सेवा और डिजिटल व्यापार पेशेवर गतिशीलता, मान्यता और डेटा-नियमों पर मतभेद
वार्ता की संस्थागत प्रक्रिया यूरोपीय संघ के बहु-स्तरीय अनुमोदन से समय-सीमा की अनिश्चितता
संरक्षणवादी उपाय एंटी-डंपिंग और सुरक्षोपाय से व्यापार में अचानक अवरोध

आगे की राह

  • कार्बन सीमा समायोजन तंत्र के अनुपालन हेतु उत्सर्जन-आँकड़ों की विश्वसनीय मापन और सत्यापन प्रणाली विकसित की जाए।
  • लघु और मध्यम उद्यमों को मानक, प्रमाणन और दस्तावेज़ीकरण में सहायता देने के लिए तकनीकी सहायता केंद्र सुदृढ़ किए जाएँ।
  • सेवा क्षेत्र में पेशेवर योग्यता की पारस्परिक मान्यता पर संस्थागत संवाद को नियमित किया जाए।
  • वार्ता के दौरान उद्योग, राज्य सरकारों और विशेषज्ञों के साथ परामर्श की पारदर्शी प्रक्रिया बनाए रखी जाए।
  • गैर-शुल्क बाधाओं की पहचान के लिए एक संरचित शिकायत-निवारण तंत्र स्थापित किया जाए।
  • WTO के नियमों के अनुरूप विवादों के समाधान के लिए बहुपक्षीय मंचों का भी उपयोग किया जाए।
  • निर्यात-विविधीकरण के लिए यूरोपीय संघ के साथ-साथ अन्य बाजारों में भी समानांतर व्यापार-कूटनीति को गति दी जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

भारत-यूरोपीय संघ संबंध · मुक्त व्यापार समझौता · व्यापार और निवेश · भू-राजनीतिक सहयोग · डिजिटल अर्थव्यवस्था · हरित परिवर्तन · आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन · कृषि व्यापार · सेवा व्यापार · बौद्धिक संपदा अधिकार

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 253: अंतरराष्ट्रीय संधियों के कार्यान्वयन हेतु संसद की विधि-निर्माण शक्ति
  • अनुच्छेद 301: व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता का सिद्धांत
  • सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 41: विदेशों के साथ व्यापार और वाणिज्य

अवधारणा प्रवाह

भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता जारी है।  →  वाणिज्य सचिव द्वारा यूरोपीय आयोग के अधिकारियों से उच्च-स्तरीय वार्ता होती है।  →  उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बैठकों से बाजार पहुँच और नियामकीय बाधाओं की व्यावहारिक जानकारी मिलती है।  →  इन इनपुट्स से शुल्क, गैर-शुल्क बाधाओं और सेवा व निवेश प्रावधानों पर भारत का वार्ता-रुख तय होता है।  →  CBAM जैसे नए नियम और सुरक्षोपाय जैसे उपाय व्यापार-लागत और अनिश्चितता बढ़ाते हैं, जिन्हें वार्ता में संबोधित करना होता है।  →  सफल समझौते से निर्यात-विविधीकरण, निवेश प्रवाह और आपूर्ति शृंखला एकीकरण को बल मिलता है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यूरोपीय संघ (EU) 27 सदस्य देशों का एक राजनीतिक और आर्थिक संघ है.
2. भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वर्तमान में लागू है.
3. यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है.
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है, यूरोपीय संघ 27 सदस्य देशों का एक राजनीतिक और आर्थिक संघ है। कथन 2 गलत है, भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अभी भी बातचीत के चरण में है और लागू नहीं हुआ है। कथन 3 गलत है, यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार नहीं है; अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।

Q2. अभिकथन (A): भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए उच्च-स्तरीय बैठकें महत्वपूर्ण हैं।
कारण (R): ये बैठकें मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चल रही वार्ताओं को गति प्रदान करती हैं और व्यापार बाधाओं को दूर करने में मदद करती हैं।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि उच्च-स्तरीय बैठकें व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक हैं। कारण (R) भी सही है क्योंकि ये बैठकें FTA वार्ताओं को आगे बढ़ाती हैं और व्यापार बाधाओं को संबोधित करती हैं। R, A की सही व्याख्या है क्योंकि बैठकों का मुख्य उद्देश्य व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना है, जो FTA वार्ताओं और बाधाओं को दूर करने से सीधे जुड़ा है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार संबंधों को मजबूत करने के महत्व पर चर्चा कीजिए। इस संदर्भ में, मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वर्तमान स्थिति और इसके संभावित लाभों का भी विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर में निम्नलिखित बिंदु शामिल होने चाहिए:
1. **परिचय:** भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक और वर्तमान व्यापार संबंधों का संक्षिप्त परिचय। यूरोपीय संघ को भारत के एक महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदार के रूप में स्थापित करना।
2. **व्यापार संबंधों को मजबूत करने का महत्व:**
* **आर्थिक संवृद्धि:** दोनों क्षेत्रों के लिए आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन की क्षमता।
* **बाजार पहुंच:** भारतीय उत्पादों और सेवाओं के लिए यूरोपीय संघ के विशाल बाजार तक पहुंच, और यूरोपीय संघ के लिए भारतीय बाजार तक पहुंच।
* **विविधीकरण:** आपूर्ति श्रृंखलाओं का विविधीकरण और भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करना।
* **तकनीकी सहयोग:** डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित ऊर्जा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग।
* **भू-राजनीतिक साझेदारी:** वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में साझा मूल्यों और हितों पर आधारित रणनीतिक साझेदारी।
3. **मुक्त व्यापार समझौता (FTA) की वर्तमान स्थिति:**
* **वार्ता का चरण:** वर्तमान में चल रही वार्ताओं का उल्लेख।
* **प्रमुख मुद्दे:** जिन प्रमुख मुद्दों पर बातचीत चल रही है (जैसे टैरिफ, गैर-टैरिफ बाधाएं, बौद्धिक संपदा अधिकार, श्रम और पर्यावरण मानक, डेटा गोपनीयता)।
* **चुनौतियाँ:** वार्ताओं में आने वाली चुनौतियाँ और गतिरोध।
4. **FTA के संभावित लाभ:**
* **टैरिफ में कमी:** टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करके द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि।
* **निवेश प्रोत्साहन:** दोनों दिशाओं में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को बढ़ावा।
* **सेवा क्षेत्र का विस्तार:** भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए यूरोपीय संघ के बाजार में बेहतर पहुंच।
* **मानकीकरण:** व्यापार प्रक्रियाओं और मानकों का सामंजस्य।
* **उपभोक्ता लाभ:** उपभोक्ताओं के लिए उत्पादों की अधिक विविधता और कम कीमतें।
5. **निष्कर्ष:** भारत-यूरोपीय संघ संबंधों के भविष्य की संभावनाओं और FTA के सफल समापन के महत्व पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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