02 Nov हॉर्नबिल महोत्सव: नागालैंड PAP नियम वापसी की मांग क्यों कर रहा है?
✎ PAP विदेशी नागरिकों के लिए केंद्र द्वारा अधिसूचित संरक्षित क्षेत्रों में प्रवेश-नियमन की व्यवस्था है, जिसका विधिक आधार विदेशी अधिनियम, 1946 और विदेशी (संरक्षित क्षेत्र) आदेश, 1958 है, तथा इसका नियंत्रण अंततः केंद्र सरकार के पास…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध (केंद्र सरकार के विधिक अधिकार बनाम राज्य सरकार की विकास आकांक्षाएँ; अनुच्छेद 371A के संदर्भ में नागालैंड की विशेष स्थिति) | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा (सीमावर्ती क्षेत्रों का प्रबंधन, विदेशी नागरिकों की आवाजाही का नियमन) और पर्यटन व आर्थिक विकास
- Prelims: संरक्षित क्षेत्र परमिट (Protected Area Permit — PAP), विदेशी (संरक्षित क्षेत्र) आदेश, 1958 (Foreigners (Protected Areas) Order, 1958), विदेशी अधिनियम, 1946 (Foreigners Act, 1946), आंतरिक रेखा परमिट (Inner Line Permit — ILP), बंगाल पूर्वी सीमांत विनियमन, 1873 (Bengal Eastern Frontier Regulation, 1873), अनुच्छेद 371A (नागालैंड से संबंधित विशेष उपबंध), गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs — MHA) की सीमावर्ती राज्यों में परमिट संबंधी भूमिका, हॉर्नबिल महोत्सव (Hornbill Festival), कोहिमा, नागालैंड
- Essay: सीमा सुरक्षा और सीमावर्ती राज्यों का सतत् विकास: क्या विशेष प्रवेश-नियम आर्थिक एकीकरण में बाधा बनते हैं?, पर्यटन, संस्कृति और संघवाद: राज्य की आकांक्षाएँ और केंद्र की सुरक्षा-दृष्टि के बीच समन्वय
त्वरित पुनरावृत्ति: PAP विदेशी नागरिकों के लिए केंद्र द्वारा अधिसूचित संरक्षित क्षेत्रों में प्रवेश-नियमन की व्यवस्था है, जिसका विधिक आधार विदेशी अधिनियम, 1946 और विदेशी (संरक्षित क्षेत्र) आदेश, 1958 है, तथा इसका नियंत्रण अंततः केंद्र सरकार के पास है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
नागालैंड सरकार ने केंद्र सरकार से संरक्षित क्षेत्र परमिट (PAP) व्यवस्था को पूरी तरह वापस लेने का आग्रह किया है। यह मांग राज्य के प्रमुख सांस्कृतिक एवं पर्यटन आयोजन हॉर्नबिल महोत्सव से पहले सामने आई है, जो इस वर्ष 1 से 10 दिसंबर तक कोहिमा में आयोजित होगा और जिसमें एक लाख से अधिक आगंतुकों के आने का अनुमान है। राज्य सरकार का तर्क है कि यह व्यवस्था निवेश, आर्थिक संवृद्धि और पर्यटकों के प्रवाह में बाधा डालती है। दिसंबर 2024 में इस व्यवस्था को पुनः लागू किया गया था, जिसका कारण सुरक्षा बताया गया था। मुख्यमंत्री ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर इसे वापस लेने की माँग की है, जबकि उप मुख्यमंत्री, जो राज्य के गृह एवं सीमा मामलों के मंत्री भी हैं, ने कहा है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की कोई बड़ी समस्या नहीं है। इस प्रकरण में केंद्र और राज्य के दृष्टिकोण का अंतर स्पष्ट है, और यह संघीय ढाँचे में परमिट-नियमन की व्यवस्था पर विचार का विषय बन गया है।
पृष्ठभूमि
- विदेशी अधिनियम, 1946 के अंतर्गत केंद्र सरकार को विदेशियों की आवाजाही नियंत्रित करने की शक्ति प्राप्त है; इसी के आधार पर विदेशी (संरक्षित क्षेत्र) आदेश, 1958 जारी हुआ, जिसके तहत पूर्वोत्तर के अनेक राज्य शामिल किए गए।
- पूर्वोत्तर में भारतीय नागरिकों के प्रवेश हेतु आंतरिक रेखा परमिट की व्यवस्था औपनिवेशिक काल के बंगाल पूर्वी सीमांत विनियमन, 1873 से जुड़ी है; PAP इससे भिन्न है और मुख्यतः विदेशी नागरिकों से संबंधित है।
- वर्ष 2011 में मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड के लिए PAP में छूट दी गई थी, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
- दिसंबर 2024 में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए यह व्यवस्था पुनः लागू की गई, जिसके बाद से नागालैंड सरकार इसे पूर्णतः हटाने की माँग कर रही है।
- नागालैंड 1 दिसंबर 1963 को राज्य बना; संविधान का अनुच्छेद 371A उसे नागा प्रथागत विधि और भूमि-स्वामित्व से संबंधित विशेष संरक्षण प्रदान करता है।
संरक्षित क्षेत्र परमिट (PAP) क्या है?
- संरक्षित क्षेत्र परमिट वह प्रशासनिक अनुमति है, जिसके बिना विदेशी नागरिक केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित संरक्षित क्षेत्रों में प्रवेश नहीं कर सकते।
- इसका विधिक आधार विदेशी अधिनियम, 1946 है, और क्षेत्रों की अधिसूचना विदेशी (संरक्षित क्षेत्र) आदेश, 1958 के अंतर्गत होती है।
- यह व्यवस्था मुख्यतः भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगे उन क्षेत्रों पर लागू होती है, जिन्हें सुरक्षा कारणों से केंद्र ने संरक्षित या प्रतिबंधित घोषित किया है।
- PAP का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में विदेशी नागरिकों की आवाजाही की निगरानी करना और सुरक्षा-संवेदनशील क्षेत्रों को नियंत्रित रखना है।
- आंतरिक रेखा परमिट (ILP) भारतीय नागरिकों के लिए बाह्य प्रवेश-नियमन से जुड़ा है, जबकि PAP विदेशी नागरिकों के लिए है; दोनों को एक-दूसरे से अलग समझना आवश्यक है।
- संरक्षित क्षेत्रों को केंद्र सरकार घोषित और संशोधित करती है, इसलिए इसे वापस लेने या संशोधित करने का अंतिम निर्णय भी केंद्र के पास है।
- पर्यटन के संदर्भ में यह व्यवस्था विदेशी पर्यटकों के लिए प्रक्रियागत बाधा बन सकती है, जिसकी ओर नागालैंड सरकार और पूर्व पुलिस महानिदेशक ने ध्यान दिलाया है।
- नीति-विश्लेषण में यह प्रश्न उठता है कि सुरक्षा-आवश्यकता और राज्य के आर्थिक विकास के बीच संतुलन कैसे साधा जाए, जिसमें केंद्र-राज्य परामर्श की भूमिका महत्वपूर्ण है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| संरक्षित क्षेत्र परमिट (Protected Area Permit – PAP) | विदेशी नागरिकों के लिए केंद्र द्वारा अधिसूचित संरक्षित या प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश हेतु अनिवार्य अनुमति, जो सीमावर्ती राज्यों में लागू है |
| विधिक आधार: विदेशी (संरक्षित क्षेत्र) आदेश, 1958 | यह आदेश विदेशी अधिनियम, 1946 (Foreigners Act, 1946) के अंतर्गत जारी हुआ, जिसका प्रशासन गृह मंत्रालय के पास है |
| लागू क्षेत्र | अधिकांश पूर्वोत्तर राज्य, जिनमें नागालैंड भी शामिल है; सीमावर्ती और सुरक्षा-संवेदनशील क्षेत्रों पर केंद्रीय नियंत्रण का उपकरण |
| 2011 की शिथिलता | पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड के लिए PAP व्यवस्था में ढील दी गई थी |
| दिसंबर 2024 में पुनः लागू | सुरक्षा कारणों का हवाला देकर PAP व्यवस्था फिर से लागू की गई, जिसके बाद राज्य सरकार ने इसे पूरी तरह हटाने की माँग की |
| हॉर्नबिल महोत्सव (Hornbill Festival) | कोहिमा में 1 से 10 दिसंबर तक आयोजित; एक लाख से अधिक आगंतुकों, जिनमें विदेशी पर्यटक भी हैं, के कारण राज्य का प्रमुख सांस्कृतिक एवं पर्यटन आयोजन |
महत्व
पर्यटन और आर्थिक महत्व
- PAP व्यवस्था विदेशी पर्यटकों की आवाजाही और उनके ठहराव को प्रभावित करती है, जिससे पर्यटन आधारित आय पर सीधा असर पड़ता है
- राज्य सरकार के अनुसार अनुमति प्रक्रिया की जटिलता के कारण विदेशी पर्यटकों की संख्या में गिरावट आई है
- निवेश और आर्थिक संवृद्धि के लिए अवसंरचना तथा बाहरी संपर्क आवश्यक हैं, जिन पर प्रतिबंध बाधा बनते हैं
संघीय और प्रशासनिक महत्व
- विदेशी नागरिकों से संबंधित विषय संघ सूची में आते हैं, अतः राज्य की माँग का अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के स्तर पर होता है
- राज्य सरकार का गृह मंत्रालय को पत्र और मंत्रालय द्वारा अध्ययन का आश्वासन, केंद्र-राज्य समन्वय की प्रक्रिया को दर्शाता है
सुरक्षा और सीमा प्रबंधन
- PAP व्यवस्था का मूल उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में विदेशी उपस्थिति की निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित करना है
- सुरक्षा स्थिति के आकलन और विकास-आकांक्षाओं के बीच संतुलन बनाना नीति-निर्माण की मुख्य चुनौती है
सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
- राज्य सरकार के अनुसार लगातार प्रतिबंध युवाओं में असंतोष और अलगाव की भावना पैदा कर रहे हैं
- सांस्कृतिक आयोजनों की सफलता स्थानीय समुदायों की सहभागिता और उनके आर्थिक लाभ से जुड़ी होती है
चुनौतियाँ
1. सुरक्षा बनाम विकास का संतुलन
- केंद्र सरकार सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा को प्राथमिकता देती है, जबकि राज्य शांति की स्थिति का हवाला देकर विकास की माँग करता है
- सुरक्षा आकलन के मानदंड और उनकी समीक्षा की पारदर्शिता पर प्रश्न उठते हैं
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा; केंद्र-राज्य संबंध
2. प्रशासनिक जटिलता और अनुमति प्रक्रिया
- विदेशी पर्यटकों के लिए अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया लंबी और जटिल बताई गई है
- एक ही पर्यटन गंतव्य को बढ़ावा देने और उस तक पहुँच को सीमित करने के बीच विरोधाभास दिखाई देता है
यूपीएससी लिंक: सुशासन; नौकरशाही में सुधार
3. संघीय अधिकार क्षेत्र की सीमाएँ
- विदेशी नागरिकों से जुड़े विषय पर राज्य सरकार के पास निर्णय लेने की सीधी शक्ति नहीं है
- राज्य की भूमिका केवल प्रस्ताव और सिफारिश तक सीमित रहती है
यूपीएससी लिंक: संघवाद; संघ सूची और राज्य सूची के विषय
4. पर्यटन विकास में बाधा
- विदेशी पर्यटकों की कम आमद से होटल, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ता है
- पर्यटन पर निर्भर राज्य की आर्थिक संवृद्धि सीमित रह सकती है
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था; सेवा क्षेत्र और पर्यटन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता |
|---|---|
| सुरक्षा आकलन | शांति की स्थिति और सुरक्षा खतरे के बीच स्पष्ट मानदंडों का अभाव |
| अनुमति प्रक्रिया | विदेशी पर्यटकों के लिए लंबी और जटिल औपचारिकताएँ |
| निवेश और पर्यटन | प्रतिबंधों के कारण राज्य की आर्थिक संभावनाएँ सीमित होने की आशंका |
| सामाजिक असंतोष | युवाओं में अलगाव और निराशा की भावना का बढ़ना |
| संघीय समन्वय | केंद्र और राज्य के बीच निर्णय प्रक्रिया की धीमी गति |
आगे की राह
- PAP व्यवस्था की नियमित समीक्षा के लिए स्पष्ट मानदंड और समय-सीमा तय की जाए, ताकि सुरक्षा स्थिति के आधार पर निर्णय हो सके
- पर्यटन-सघन अवधि के लिए विदेशी पर्यटकों हेतु सरल और समयबद्ध ऑनलाइन अनुमति प्रक्रिया अपनाई जाए
- सुरक्षा स्थिति में सुधार वाले राज्यों के लिए चरणबद्ध शिथिलता की नीति पर विचार किया जाए
- केंद्र और राज्य सरकार के बीच नियमित समन्वय तंत्र स्थापित हो, ताकि प्रस्तावों पर समयबद्ध प्रतिक्रिया मिल सके
- PAP और ILP जैसी व्यवस्थाओं के उद्देश्य, लागू क्षेत्र और प्रक्रिया का सार्वजनिक एवं स्पष्ट विवरण उपलब्ध कराया जाए
- सीमावर्ती राज्यों में सुरक्षा और विकास की संयुक्त योजना बनाई जाए, जिसमें स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित हो
- पर्यटन अवसंरचना, परिवहन और संपर्क में निवेश बढ़ाकर पर्यटन को स्थायी आर्थिक आधार दिया जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
संरक्षित क्षेत्र परमिट · पूर्वोत्तर राज्य · नागालैंड · हॉर्नबिल महोत्सव · पर्यटन संवर्धन · आर्थिक विकास · सुरक्षा चिंताएँ · केंद्र-राज्य संबंध · विदेशी (संरक्षित क्षेत्र) आदेश, 1958 · निवेश के अवसर
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 355: राज्यों की बाहरी और आंतरिक अशांति से सुरक्षा का केंद्रीय दायित्व
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 17: नागरिकता, देशीयकरण और विदेशियों से संबंधित विषय
अवधारणा प्रवाह
1958 में विदेशी (संरक्षित क्षेत्र) आदेश के तहत पूर्वोत्तर सहित सीमावर्ती राज्यों में PAP व्यवस्था लागू हुई → 2011 में पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड के लिए PAP में शिथिलता दी गई → दिसंबर 2024 में सुरक्षा कारणों से PAP व्यवस्था पुनः लागू हुई, जिससे विदेशी पर्यटकों की अनुमति प्रक्रिया कठिन हुई → अनुमति की जटिलता और आवाजाही पर प्रतिबंध से विदेशी पर्यटकों की संख्या और निवेश की संभावनाएँ प्रभावित हुईं → राज्य सरकार ने सितंबर में गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर PAP हटाने की माँग की, और हॉर्नबिल महोत्सव से पहले यह मुद्दा सामने आया → केंद्र सरकार द्वारा प्रस्ताव के अध्ययन और निर्णय पर ही इस व्यवस्था में आगे का बदलाव निर्भर है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. संरक्षित क्षेत्र परमिट (PAP) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संरक्षित क्षेत्र परमिट भारत सरकार द्वारा जारी किया जाता है।
2. यह परमिट भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं से लगे राज्यों के उन क्षेत्रों में विदेशियों को जाने की अनुमति देता है जिन्हें केंद्र द्वारा संरक्षित या प्रतिबंधित घोषित किया गया है।
3. यह व्यवस्था मुख्य रूप से पूर्वोत्तर राज्यों में लागू है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि PAP भारत सरकार द्वारा जारी किया जाता है। कथन 2 सही है क्योंकि PAP विदेशियों को अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं से लगे संरक्षित या प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने की अनुमति देता है। कथन 3 सही है क्योंकि PAP व्यवस्था मुख्य रूप से पूर्वोत्तर राज्यों में लागू है, जिसमें नागालैंड भी शामिल है।
Q2. नागालैंड सरकार द्वारा संरक्षित क्षेत्र परमिट (PAP) को वापस लेने की मांग के पीछे मुख्य कारण क्या है?
- राज्य में कानून और व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति।
- PAP के कारण निवेश के अवसरों, आर्थिक विकास और पर्यटन प्रवाह में बाधा।
- राज्य में स्थानीय आबादी द्वारा PAP का विरोध।
- केंद्र सरकार द्वारा PAP नियमों का अनुपालन न करना।
उत्तर: PAP के कारण निवेश के अवसरों, आर्थिक विकास और पर्यटन प्रवाह में बाधा। — नागालैंड सरकार का दावा है कि PAP व्यवस्था और संबंधित प्रतिबंध निवेश के अवसरों, आर्थिक विकास और राज्य के वार्षिक हॉर्नबिल महोत्सव में पर्यटकों के प्रवाह में बाधा डालते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ संरक्षित क्षेत्र परमिट (PAP) व्यवस्था क्या है और पूर्वोत्तर राज्यों में इसके लागू होने के क्या निहितार्थ हैं? नागालैंड सरकार द्वारा PAP को पूरी तरह से वापस लेने की मांग के कारणों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** संरक्षित क्षेत्र परमिट (PAP) की परिभाषा और इसका उद्देश्य (विदेशी (संरक्षित क्षेत्र) आदेश, 1958 के तहत)।
2. **PAP व्यवस्था के निहितार्थ:**
* **सुरक्षा:** अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं से लगे संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करना।
* **प्रशासनिक चुनौतियाँ:** परमिट प्राप्त करने की प्रक्रिया की जटिलता, नौकरशाही बाधाएँ।
* **विकास पर प्रभाव:** पर्यटन, निवेश और आर्थिक गतिविधियों पर संभावित प्रतिबंधात्मक प्रभाव।
3. **नागालैंड सरकार की मांग के कारण:**
* **पर्यटन संवर्धन:** हॉर्नबिल महोत्सव जैसे आयोजनों के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने में बाधा।
* **आर्थिक विकास:** निवेश और व्यापार के अवसरों में कमी।
* **अलगाव की भावना:** राज्य के युवाओं में ‘अनावश्यक निराशा और अलगाव की भावना’ पैदा होना।
* **बदलती सुरक्षा स्थिति:** राज्य का शांतिपूर्ण और कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार का दावा।
4. **समालोचनात्मक परीक्षण:**
* **केंद्र-राज्य संतुलन:** सुरक्षा चिंताओं और विकास आकांक्षाओं के बीच संतुलन।
* **नीतिगत पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता:** एक अलग ऐतिहासिक और सुरक्षा वातावरण में बनी नीति की वर्तमान प्रासंगिकता।
* **अन्य राज्यों के उदाहरण:** मणिपुर और मिजोरम के लिए PAP में छूट का संदर्भ।
5. **निष्कर्ष:** केंद्र और राज्य के बीच संवाद और एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता, जो सुरक्षा और विकास दोनों लक्ष्यों को पूरा करे।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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