03 Nov यमन और अफगानिस्तान में गहराता स्वास्थ्य संकट: एक विश्लेषण
✎ संघर्ष-क्षेत्रों में मानवीय सहायता मानवता, निष्पक्षता, तटस्थता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों पर चलती है, जबकि संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा मिशन का अस्तित्व सुरक्षा परिषद् के कार्यादेश पर टिका होता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (संयुक्त राष्ट्र की भूमिका, शांति रक्षा और मानवीय सहायता) | GS Paper II — सामाजिक न्याय (स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच और कमज़ोर वर्गों का संरक्षण)
- Prelims: MINURSO (पश्चिमी सहारा में संयुक्त राष्ट्र मिशन) और इसकी स्थापना का आधार, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् का संकल्प 690 (1991), OCHA (Office for the Coordination of Humanitarian Affairs) और मानवीय समन्वय ढाँचा, पश्चिमी सहारा: संयुक्त राष्ट्र की गैर-स्वशासी क्षेत्रों (Non-Self-Governing Territories) की सूची में सम्मिलित, बदख़्शाँ (Badakhshan) प्रांत की अवस्थिति: अफ़ग़ानिस्तान का उत्तर-पूर्वी भाग, ताइज़ (Taiz): यमन का दक्षिण-पश्चिमी शहर, जहाँ घेराबंदी से आपूर्ति बाधित है, हैजा और तीव्र अतिसार: दूषित जल से फैलने वाले रोग, जिनेवा संधियों का अतिरिक्त प्रोटोकॉल I, अनुच्छेद 54 (नागरिकों की भुखमरी पर प्रतिबंध), शांति रक्षा के मूल सिद्धांत: पक्षों की सहमति, निष्पक्षता और आत्मरक्षा के अतिरिक्त बल-प्रयोग न करना
- Essay: सीमाओं के पार मानवीय सहायता: तटस्थता, निष्पक्षता और पहुँच के बीच संतुलन, शांति रक्षा मिशनों का जीवन-चक्र: आरंभ, विस्तार और चरणबद्ध समापन
त्वरित पुनरावृत्ति: संघर्ष-क्षेत्रों में मानवीय सहायता मानवता, निष्पक्षता, तटस्थता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों पर चलती है, जबकि संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा मिशन का अस्तित्व सुरक्षा परिषद् के कार्यादेश पर टिका होता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी ताज़ा समाचार-सारांश में तीन अलग-अलग घटनाक्रम रेखांकित किए गए हैं। पहला, यमन के ताइज़ शहर में घेराबंदी के कारण वाणिज्यिक आपूर्ति रुक गई है और लगभग ढाई लाख लोग आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हो गए हैं, जिनमें पाँच वर्ष से कम आयु के 1.86 लाख से अधिक बच्चे और 23,000 गर्भवती महिलाएँ शामिल हैं। दूसरा, अफ़ग़ानिस्तान में मानवीय सहायता के धन में कटौती से बदख़्शाँ जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्र सीमित हो रहे हैं या बंद हो रहे हैं। तीसरा, पश्चिमी सहारा में संयुक्त राष्ट्र का MINURSO मिशन इसलिए समाप्ति की ओर है क्योंकि सुरक्षा परिषद् ने उसके कार्यादेश (mandate) का नवीनीकरण नहीं किया, और उसकी परिसमापन अवधि आरंभ हो गई है। इस प्रकार एक ओर मानवीय आवश्यकता बढ़ रही है और दूसरी ओर एक शांति मिशन का चरणबद्ध समापन हो रहा है।
पृष्ठभूमि
- यमन में गृहयुद्ध और क्षेत्रीय संघर्ष के चलते देश की बड़ी आबादी पर मानवीय संकट का भार है। OCHA के अनुसार लगभग 4.2 करोड़ की कुल आबादी में से 52 लाख लोग इस गर्मी के नए तनाव से पहले ही विस्थापित थे, और अगस्त से अब तक लगभग 3 लाख और लोग अपने घरों से बेदखल हुए हैं।
- ताइज़ की घेराबंदी में सभी सड़कें बंद होने से दवाओं और खाद्य सामग्री की आपूर्ति ठप है। एक सप्ताह में ही तीव्र अतिसार और संदिग्ध हैजा के 1,400 से अधिक मामले दर्ज होना जल और स्वच्छता ढाँचे की गिरावट का संकेत है।
- अफ़ग़ानिस्तान लगभग 22 लाख से अधिक लोगों की सहायता-आवश्यकता के साथ विश्व के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक है। वहाँ भोजन उपलब्ध होने के बावजूद उसकी कीमत लाखों लोगों की पहुँच से बाहर है, जिससे कुपोषण बढ़ रहा है।
- MINURSO की स्थापना 1991 में सुरक्षा परिषद् के संकल्प 690 द्वारा हुई थी, ताकि पश्चिमी सहारा में युद्धविराम की निगरानी हो और जनमत-संग्रह की तैयारी की जा सके। लंबे समय तक इसका स्वरूप एक सीमित अवधि के मिशन जैसा रहा, जिसके कार्यादेश का आगे विस्तार सुरक्षा परिषद् के निर्णय पर निर्भर करता है।
- मानवीय सहायता के वर्तमान ढाँचे की नींव संयुक्त राष्ट्र महासभा के संकल्प 46/182 (1991) में है, जिसने मानवीय सहायता के समन्वय के लिए केंद्रीय व्यवस्था बनाई। OCHA इसी ढाँचे के अंतर्गत अंतर-एजेंसी समन्वय और धन-अपील का कार्य करता है।
मानवीय सहायता और शांति रक्षा मिशन क्या हैं?
- मानवीय सहायता का उद्देश्य युद्ध, प्राकृतिक आपदा या अन्य संकट में नागरिकों के जीवन और गरिमा की रक्षा करना है। इसके मार्गदर्शक सिद्धांत मानवता, निष्पक्षता, तटस्थता और स्वतंत्रता हैं, जिन्हें संकल्प 46/182 में मान्यता मिली है।
- OCHA संयुक्त राष्ट्र का वह कार्यालय है जो आपात स्थितियों में विभिन्न एजेंसियों की गतिविधियों का समन्वय करता है, धन की अपील तैयार करता है और मानवीय पहुँच के मुद्दों पर रिपोर्ट जारी करता है। यह स्वयं सहायता नहीं देता, बल्कि सहायता पहुँचाने वाली एजेंसियों का समन्वय करता है।
- संघर्ष-क्षेत्रों में पहुँच (access) सबसे बड़ी चुनौती है। घेराबंदी या असुरक्षा के कारण सड़कें बंद होने पर सहायता रोकना जनसंख्या पर सीधा प्रभाव डालता है। जिनेवा संधियों के अतिरिक्त प्रोटोकॉल I के अनुच्छेद 54 के अनुसार नागरिकों की भुखमरी को युद्ध-पद्धति के रूप में प्रयोग करना वर्जित है, और रोम संविधि इसे युद्ध-अपराध की श्रेणी में रखती है।
- संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा मिशन सुरक्षा परिषद् के आदेश पर स्थापित और संचालित होते हैं। उनके मूल सिद्धांत हैं: संबंधित पक्षों की सहमति, निष्पक्षता और आत्मरक्षा या कार्यादेश की रक्षा के अतिरिक्त बल-प्रयोग न करना।
- मिशन का कार्यादेश नवीनीकृत न होने पर उसका परिसमापन होता है। इसमें सैन्य पर्यवेक्षकों और नागरिक कर्मियों की वापसी, परिसरों का चरणबद्ध बंद होना, संपत्ति का निपटान या हस्तांतरण, संचार और रसद प्रणालियों को हटाना, अभिलेखों का संग्रहण और स्थानीय अनुबंधों की समाप्ति शामिल है।
- परिसमापन की देखरेख संचालन सहायता विभाग (UN Department of Operational Support) जैसी इकाइयाँ करती हैं, जबकि प्रशासनिक, वित्तीय और सुरक्षा पर्यवेक्षण संयुक्त राष्ट्र अपने पास रखता है।
- पश्चिमी सहारा संयुक्त राष्ट्र की गैर-स्वशासी क्षेत्रों की सूची में है और इसकी संप्रभुता पर पक्षों में मतभेद है। इसलिए इस क्षेत्र से जुड़े किसी भी मिशन के समापन को केवल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् की प्रक्रिया और प्रासंगिक संकल्पों के संदर्भ में समझना उचित है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| यमन के तइज़ में स्वास्थ्य संकट | शहर की घेराबंदी से वाणिज्यिक आपूर्ति बंद है और लगभग 2.5 लाख लोग आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हो गए हैं, जिनमें 1,86,000 से अधिक पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चे और 23,000 गर्भवती महिलाएँ शामिल हैं |
| जलजनित रोगों का प्रसार | एक सप्ताह में तीव्र दस्त और संदिग्ध हैजा के 1,400 से अधिक मामले दर्ज हुए; संदूषित पानी इसका मुख्य कारण है, इसलिए स्वच्छता और जल आपूर्ति सीधे जन-स्वास्थ्य से जुड़ी है |
| यमन में आंतरिक विस्थापन | अगस्त से लगभग 3 लाख लोग विस्थापित हुए हैं; इससे पहले ही लगभग 42 लाख की आबादी में से 52 लाख लोग विस्थापित थे |
| अफ़गानिस्तान में वित्तीय कटौती | मानवीय सेवाओं में धन की कमी से स्वास्थ्य केंद्र सीमित या बंद हो रहे हैं; बदख़्शाँ प्रांत के किशिम जिला अस्पताल में कुपोषण बढ़ने की चिंता है |
| पश्चिमी सहारा में MINURSO का चरणबद्ध समापन | सुरक्षा परिषद द्वारा अधिदेश नवीनीकृत न किए जाने के बाद लगभग 160 सैन्य पर्यवेक्षक वापस बुलाए जाएँगे और 13 सुविधाएँ व टीम स्थल बंद होंगे; शांति-रक्षा मिशन के परिसमापन की प्रक्रिया शुरू हो गई है |
महत्व
मानवीय
- संघर्ष-ग्रस्त क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का बने रहना जीवन-रक्षा के लिए अनिवार्य है; मातृ और शिशु स्वास्थ्य सबसे पहले प्रभावित होता है
- जल और स्वच्छता की कमी से हैजा जैसे रोग फैलते हैं, जिससे संकट स्वास्थ्य-आपातकाल में बदल सकता है
- विस्थापित परिवारों को भोजन, स्वच्छता सामग्री और नकद सहायता पहुँचाना राहत-व्यवस्था का केंद्रीय कार्य है
अंतरराष्ट्रीय विधि
- सशस्त्र संघर्ष में नागरिक आबादी और चिकित्सा सुविधाओं की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय मानवीय विधि (International Humanitarian Law) के तहत आती है, जिसका आधार 1949 के जिनेवा समझौते हैं
- घेराबंदी में मानवीय मार्गों की अनुमति का प्रश्न अंतरराष्ट्रीय विधि के पालन की कसौटी बनता है
संस्थागत और राजनयिक
- शांति-रक्षा मिशन का समापन यह दर्शाता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अधिदेश पर निर्भर है और मिशन की अवधि सदस्य देशों की सहमति से तय होती है
- परिसमापन में अभिलेखों का संग्रह, संपत्ति का हस्तांतरण और पर्यावरणीय दायित्व जैसे प्रशासनिक पक्ष संस्थागत क्षमता की परीक्षा होते हैं
वित्तीय
- मानवीय सहायता अधिकतर दानदाता देशों के स्वैच्छिक अंशदान पर निर्भर है; धन में कटौती सीधे सेवा-वितरण को प्रभावित करती है
- खाद्य उपलब्ध होने के बावजूद महँगा होना बताता है कि केवल आपूर्ति नहीं, बल्कि क्रय-शक्ति भी संकट का कारण है
चुनौतियाँ
1. घेराबंदी में मानवीय पहुँच का अवरुद्ध होना
- सड़कें बंद होने से दवाइयाँ, ईंधन और खाद्य सामग्री शहर तक नहीं पहुँच पा रही हैं
- चिकित्सा सुविधाओं की सुरक्षा और निर्बाध मानवीय गलियारे सुनिश्चित करना पक्षकारों की सहमति पर निर्भर करता है
- बारह अस्पतालों के बंद होने का खतरा बताता है कि संकट आपूर्ति से आगे बढ़कर ढाँचे के ध्वंस तक पहुँच गया है
यूपीएससी लिंक: GS-II: अंतरराष्ट्रीय संबंध और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका
2. मानवीय सहायता के लिए वित्तीय अनिश्चितता
- अफ़गानिस्तान में फंडिंग कटौती से दूरस्थ क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएँ सबसे पहले प्रभावित होती हैं
- सहायता का स्वैच्छिक स्वरूप दीर्घकालिक योजना को कठिन बनाता है और अचानक सेवा-बंदी का जोखिम रहता है
- पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं में कटौती से कुपोषण जैसे संकट गहराते हैं, जिनका प्रभाव बाद में कई गुना बढ़ जाता है
यूपीएससी लिंक: GS-II: सामाजिक क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय सहायता तंत्र
3. शांति-रक्षा मिशनों का परिसमापन और उसके बाद का शून्य
- MINURSO का अधिदेश सुरक्षा परिषद द्वारा नवीनीकृत न होने से मिशन समाप्त हो रहा है और निगरानी-तंत्र सीमित होगा
- मिशन के पर्यवेक्षक और अभिलेख हटने से स्थिति की स्वतंत्र जानकारी और विश्वास-निर्माण के उपाय प्रभावित हो सकते हैं
- परिसमापन का कार्य पर्यावरण-संवेदी ढंग से और चरणबद्ध तरीके से करना प्रशासनिक चुनौती है
यूपीएससी लिंक: GS-II: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और शांति-रक्षा
4. जलजनित रोग और जन-स्वास्थ्य जोखिम
- संदूषित पानी से हैजा और तीव्र दस्त का फैलाव तेज़ी से होता है, विशेषकर विस्थापन शिविरों में
- स्वच्छ जल, शौचालय और अपशिष्ट प्रबंधन का अभाव रोग-नियंत्रण को कठिन बनाता है
- स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ता भार उपलब्ध संसाधनों को और सीमित कर देता है
यूपीएससी लिंक: GS-II: स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र; GS-III: आपदा प्रबंधन
5. आंतरिक विस्थापन और सुरक्षित आश्रय
- लगभग 3 लाख लोगों के नए विस्थापन से आवास, भोजन और स्वच्छता की माँग अचानक बढ़ी है
- पहले से विस्थापित 52 लाख लोगों के कारण सहायता-तंत्र पर स्थायी दबाव बना हुआ है
- विस्थापित व्यक्तियों की सुरक्षा और उनकी पहुँच को सुनिश्चित करना मानवीय विधि की चुनौती है
यूपीएससी लिंक: GS-I: प्रवासन और जनसंख्या विस्थापन; GS-II: मानवाधिकार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| मानवीय पहुँच | घेराबंदी से दवाइयों और खाद्य की आपूर्ति रुकने पर सबसे अधिक असर बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ता है |
| फंडिंग में कटौती | दूरस्थ क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्र बंद होने से पोषण और उपचार की निरंतरता टूटती है |
| मिशन समापन का शून्य | MINURSO के हटने से निगरानी और विश्वास-निर्माण का एक स्थापित माध्यम कमज़ोर होता है |
| जलजनित रोग | संदूषित पानी से हैजा का खतरा विस्थापन क्षेत्रों में तेज़ी से बढ़ता है |
| विस्थापन का दबाव | नए और पुराने विस्थापितों की संयुक्त संख्या राहत-व्यवस्था की क्षमता से अधिक हो सकती है |
आगे की राह
- घेराबंदी वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्साकर्मियों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मानवीय विधि का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए
- मानवीय गलियारों और आपूर्ति मार्गों के लिए सभी पक्षों के बीच निरंतर संवाद और सहमति का तंत्र बनाया जाए
- मानवीय सहायता के लिए बहुवर्षीय और पूर्वानुमानित वित्तीय व्यवस्था की दिशा में दानदाताओं का समन्वय बढ़ाया जाए
- जलजनित रोगों की रोकथाम के लिए जल, स्वच्छता और निगरानी प्रणाली को आपातकालीन स्तर पर मज़बूत किया जाए
- दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों और समुदाय-आधारित पोषण कार्यक्रमों के माध्यम से सेवा-पहुँच बनाए रखी जाए
- शांति-रक्षा मिशनों के परिसमापन में अभिलेखों के संरक्षण, संपत्ति के हस्तांतरण और पर्यावरणीय दायित्वों का पारदर्शी पालन किया जाए
- विवादित क्षेत्रों में मिशन समाप्त होने के बाद भी स्थिति की विश्वसनीय जानकारी के वैकल्पिक तंत्रों पर विचार किया जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
शांति स्थापना मिशन (UN Peacekeeping Mission) का आदेश (Mandate) और उसका नवीनीकरण · सुरक्षा परिषद (Security Council) की भूमिका · मिशन का परिसमापन (Liquidation) और चरणबद्ध समापन · संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अध्याय VI और अध्याय VII · गैर-स्वशासित क्षेत्र (Non-Self-Governing Territory) और आत्मनिर्णय का अधिकार · मानवीय सहायता के सिद्धांत (Humanitarian Principles) · मानवीय पहुँच (Humanitarian Access) और मानवीय संकट · प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा (Primary Health Care) और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage) · कॉलरा (Cholera) और जल-जनित रोग · सहायता कटौती (Funding Shortfall) का स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रभाव
अवधारणा प्रवाह
यमन के तइज़ में घेराबंदी और सड़कें बंद होने से वाणिज्यिक आपूर्ति रुकी → आपूर्ति रुकने से दवाइयों और ईंधन की कमी हुई और कई अस्पताल बंद होने के कगार पर पहुँचे → स्वास्थ्य सेवाएँ घटने और जल-स्वच्छता बिगड़ने से हैजा व तीव्र दस्त के मामले बढ़े → संघर्ष और विस्थापन से लगभग 3 लाख लोग नए सिरे से राहत-आश्रित हुए → अफ़गानिस्तान में फंडिंग कटौती से स्वास्थ्य केंद्र सीमित होकर कुपोषण बढ़ा → सुरक्षा परिषद द्वारा MINURSO का अधिदेश नवीनीकृत न होने से मिशन का चरणबद्ध परिसमापन शुरू हुआ
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए, जो पश्चिमी सहारा में संयुक्त राष्ट्र मिशन (MINURSO) से संबंधित हैं:
1. इस मिशन की स्थापना सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव द्वारा युद्धविराम की निगरानी और जनमत संग्रह की तैयारी के लिए की गई थी।
2. इस मिशन के आदेश (Mandate) का नवीनीकरण संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा प्रतिवर्ष किया जाता है।
3. पश्चिमी सहारा संयुक्त राष्ट्र की गैर-स्वशासित क्षेत्रों की सूची में शामिल है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: MINURSO की स्थापना 1991 में सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव से हुई थी और इसका उद्देश्य युद्धविराम की निगरानी तथा जनमत संग्रह की तैयारी करना था। कथन 2 गलत है, क्योंकि मिशन के आदेश का नवीनीकरण सुरक्षा परिषद करती है, महासभा नहीं। कथन 3 सही है, क्योंकि पश्चिमी सहारा संयुक्त राष्ट्र की गैर-स्वशासित क्षेत्रों की सूची में है। अतः सही कथन दो हैं।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): यूरोप और एशिया के कई युद्धग्रस्त क्षेत्रों की तरह यमन के तायज़ (Taiz) में भी जल-जनित कॉलरा का प्रकोप तेजी से फैलता है।
कारण (R): कॉलरा का रोगाणु (Vibrio cholerae) मुख्यतः दूषित जल और मल-मौखिक मार्ग (Faecal-Oral Route) से फैलता है।
उपर्युक्त के संबंध में सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, परन्तु (R) गलत है।
- (A) गलत है, परन्तु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — कॉलरा का प्रसार मुख्यतः दूषित पेयजल और मल-मौखिक मार्ग से होता है, इसलिए (R) सही है। युद्धग्रस्त क्षेत्रों में जल-आपूर्ति और स्वच्छता ध्वस्त होने से कॉलरा का प्रकोप बढ़ता है, अतः (R) ही (A) की सही व्याख्या है। यह प्रश्न कथन के कारण-प्रभाव संबंध की समझ को परखता है।
Q3. निम्नलिखित संयुक्त राष्ट्र निकायों/संस्थाओं को उनके कार्यों से सुमेलित कीजिए:
सूची I (निकाय) सूची II (कार्य)
A. मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) 1. मानवीय सहायता का समन्वय
B. सुरक्षा परिषद 2. अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना तथा शांति मिशनों का आदेश देना
C. संचालन सहायता विभाग (DOS) 3. क्षेत्रीय मिशनों को रसद और प्रशासनिक सहायता देना
D. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) 4. विकासशील देशों में सतत विकास परियोजनाओं को सहायता देना
सही सुमेलन चुनिए:
- A-1, B-2, C-3, D-4
- A-2, B-1, C-3, D-4
- A-1, B-3, C-2, D-4
- A-4, B-2, C-1, D-3
उत्तर: A-1, B-2, C-3, D-4 — OCHA मानवीय सहायता का समन्वय करता है (A-1)। सुरक्षा परिषद शांति और सुरक्षा बनाए रखती है तथा शांति मिशनों का आदेश देती है (B-2)। संचालन सहायता विभाग मिशनों को रसद और प्रशासनिक सहायता देता है (C-3)। UNDP विकास परियोजनाओं में सहयोग करता है (D-4)। अतः सही सुमेलन विकल्प (A) है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ शांति स्थापना मिशन प्रायः तब समाप्त होते हैं जब सुरक्षा परिषद उनका आदेश नवीनीकृत नहीं करती, न कि तब जब संघर्ष का समाधान हो जाता है। इस कथन का समीक्षात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि ऐसे मिशनों के परिसमापन के दौरान मानवीय पहुँच और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ते हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON:
1. भूमिका: पश्चिमी सहारा (MINURSO) का हालिया परिसमापन: सुरक्षा परिषद द्वारा आदेश का नवीनीकरण न होना, लगभग 160 सैन्य पर्यवेक्षकों की स्वदेश वापसी, 13 सुविधाओं/टीम स्थलों का चरणबद्ध बंद होना, लगभग 180 नागरिक कर्मियों का जाना; संचालन सहायता विभाग (DOS) की निगरानी में परिसमापन।
2. कानूनी-संस्थागत आधार: संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अध्याय VI (शांतिपूर्ण समाधान) और अध्याय VII (अनुच्छेद 39-42, प्रवर्तन); शांति स्थापना चार्टर में स्पष्ट रूप से उल्लिखित नहीं है, इसे डैग हैमरस्कोल्ड ने ‘अध्याय VI और आधा’ कहा; मूल सिद्धांत: पक्षों की सहमति, निष्पक्षता, आत्मरक्षा के अतिरिक्त बल-प्रयोग न करना।
3. मिशन का ऐतिहासिक संदर्भ: 1991 का युद्धविराम, सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 690 द्वारा स्थापना, जनमत संग्रह (आत्मनिर्णय) का लक्ष्य अब तक पूरा न होना; गैर-स्वशासित क्षेत्र और आत्मनिर्णय का अधिकार (चार्टर का अनुच्छेद 1(2) और 55) ; मोरक्को और पोलिसारियो फ्रंट के दृष्टिकोण का संतुलित उल्लेख।
4. तुलनात्मक उदाहरण: UNMIL (लाइबेरिया, 2018 में समापन), UNAMID (दारफुर, 2020 में समापन), UNMIT (तिमोर-लेस्ते, 2012 में समापन) से चरणबद्ध वापसी के सबक।
5. सैद्धांतिक दृष्टि: डॉयल और सैंबानिस (2000) के अध्ययन में शांति स्थापना की सफलता और उदार शांति-निर्माण (Liberal Peacebuilding) पर बहस; ‘मिशन-थकान’ और दाता-हितों की भूमिका।
6. परिणाम पर उप-प्रश्न: परिसमापन के दौरान अभिलेखों का संग्रह (Archiving), स्थानीय अनुबंधों की समाप्ति, कर्मियों की सुरक्षा, पर्यावरण-दायित्व; मानवीय पहुँच में कमी, सूचना-शून्यता और पुनः संघर्ष का जोखिम।
7. निष्कर्ष: संतुलित मत कि समापन कूटनीतिक निर्णय है, पर उसके बाद स्थानीय सुरक्षा, मानवीय सिद्धांतों (मानवता, निष्पक्षता, तटस्थता, स्वतंत्रता) और संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता के लिए संस्थागत सेतु आवश्यक है।
स्रोत: news.un.org
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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