03 Nov दिल्ली प्रदूषण: कारण, GRAP चरण II और प्रभाव

✎ वायु प्रदूषण का बढ़ना प्रतिकूल मौसम और सीमापार फसल अवशेष दहन के संयोग से होता है, और CAQM GRAP के चरणबद्ध उपायों के माध्यम से दिल्ली-NCR में समन्वित नियंत्रण लागू करता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण (वायु प्रदूषण और वायु गुणवत्ता प्रबंधन) | GS Paper II — शासन (सांविधिक निकाय, अंतर-राज्यीय समन्वय और सहकारी संघवाद) | GS Paper III — कृषि (फसल अवशेष प्रबंधन और कृषि पद्धतियों का पर्यावरणीय प्रभाव)
- Prelims: वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) और उसकी श्रेणियाँ, CAQM (Commission for Air Quality Management), GRAP (Graded Response Action Plan), PM2.5 और PM10 कणिका पदार्थ, IITM (Indian Institute of Tropical Meteorology), पुणे, CPCB (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड), BS-VI उत्सर्जन मानक, हैप्पी सीडर (Happy Seeder) और फसल अवशेष प्रबंधन
- Essay: वायु प्रदूषण की सीमापार प्रकृति और सहकारी संघवाद: साझा पर्यावरणीय संसाधनों के प्रबंधन की चुनौतियाँ, कृषि उत्पादकता, किसानों की आजीविका और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: वायु प्रदूषण का बढ़ना प्रतिकूल मौसम और सीमापार फसल अवशेष दहन के संयोग से होता है, और CAQM GRAP के चरणबद्ध उपायों के माध्यम से दिल्ली-NCR में समन्वित नियंत्रण लागू करता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 117 (‘मध्यम’) से बढ़कर रविवार को 261 (‘खराब’) और सोमवार को 324 (‘अति खराब’) तक पहुँच गया। इस गिरावट पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-NCR में GRAP के चरण II को लागू करने का निर्देश दिया। आयोग ने प्रदूषण बढ़ने का कारण प्रतिकूल मौसमी दशाओं को बताया, जबकि इंडियन एक्सप्रेस के विश्लेषण के अनुसार सीमा पार पंजाब (पाकिस्तान) में फसल अवशेष दहन की घटनाएँ भी दिल्ली के प्रदूषण भार को बढ़ा रही हैं। भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) ने 5 नवंबर तक दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘अति खराब’ श्रेणी में बने रहने का पूर्वानुमान जताया है। इस स्थिति में निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, सड़क सफाई, सार्वजनिक परिवहन के विस्तार और गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश पर रोक जैसे उपाय लागू किए गए हैं।
पृष्ठभूमि
- वर्ष 2021 में संसद ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और सटे क्षेत्रों के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम पारित किया, जिसके तहत CAQM की स्थापना हुई। इसका अधिकार क्षेत्र दिल्ली के साथ हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के NCR क्षेत्रों तक फैला है।
- GRAP पहली बार वर्ष 2016 में पर्यावरण प्रदूषण (नियंत्रण एवं निवारण) प्राधिकरण (EPCA) की पहल पर लागू हुआ था। वर्तमान में इसके चरण AQI के स्तर और मौसमी पूर्वानुमान के आधार पर सक्रिय किए जाते हैं, और CAQM इसके क्रियान्वयन का समन्वय करता है।
- अक्टूबर-नवंबर में धान की कटाई के बाद उत्तर-पश्चिमी भारत के कई भागों में फसल अवशेष दहन बढ़ता है। यह हवा के साथ दिल्ली-NCR तक पहुँचकर शीत-ऋतु के प्रदूषण को गंभीर बनाता है।
- शीत-ऋतु में कम तापमान, धीमी हवा और तापीय प्रतिलोमन (Temperature Inversion) के कारण प्रदूषक कण सतह के पास जमा रहते हैं और तेजी से फैल नहीं पाते। इसी कारण एक ही समय में स्थानीय और बाहरी स्रोतों का असर अधिक दिखता है।
- वायु प्रदूषण के नियंत्रण का कानूनी आधार वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 है। संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत स्वच्छ पर्यावरण में जीने के अधिकार की न्यायिक व्याख्या भी इस विषय से जुड़ी है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन और GRAP क्या है?
- वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 0 से 500 तक के पैमाने पर वायु की स्थिति बताता है। इसकी श्रेणियाँ हैं: अच्छा (0–50), संतोषजनक (51–100), मध्यम (101–200), खराब (201–300), अति खराब (301–400), गंभीर (401–500)।
- PM2.5 वे सूक्ष्म कण हैं जिनका व्यास लगभग 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये श्वसन तंत्र में गहराई तक पहुँचते हैं, इसलिए AQI की गणना में इनका महत्व सबसे अधिक माना जाता है।
- GRAP एक आपातकालीन और चरणबद्ध कार्ययोजना है। बढ़ते AQI के साथ इसके चरण क्रमशः सख्त होते हैं, जिनमें निर्माण गतिविधियों पर रोक, डीजल जनरेटर का सीमित उपयोग और सार्वजनिक परिवहन के विस्तार जैसे उपाय शामिल हैं।
- CAQM के पास दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता से जुड़े निर्देश जारी करने, राज्यों के बीच समन्वय करने और नियामक एजेंसियों को निर्देश देने की शक्तियाँ हैं। इस प्रकार यह अंतर-राज्यीय समन्वय का एक सांविधिक निकाय है।
- CPCB वायु गुणवत्ता की निगरानी और मानक निर्धारण करने वाली राष्ट्रीय एजेंसी है। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत इसकी भूमिका तकनीकी डेटा और मानक-निर्धारण से जुड़ी है।
- फसल अवशेष दहन के विकल्पों में इन-सिटू प्रबंधन (जैसे हैप्पी सीडर और सुपर सीडर मशीनें, जो अवशेषों को काटकर सीधे बुवाई करती हैं) और एक्स-सिटू प्रबंधन (अवशेषों का अन्य उपयोग) शामिल हैं। बायो-डीकंपोजर जैसी तकनीकें भी अवशेष को गलाने में प्रयोग की जाती हैं।
- BS-VI मानक भारत में वाहनों के उत्सर्जन का नवीनतम मानक है। इसी आधार पर गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध जैसे उपाय लागू किए जाते हैं, जिससे वाहन-जनित प्रदूषण पर नियंत्रण संभव हो।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index) की स्थिति | 31 अक्टूबर को 117 (मध्यम) से बढ़कर रविवार को 261 (खराब) और सोमवार को 324 (अति खराब) हो गया; यह दो दिनों में तीव्र वृद्धि है |
| प्रशासनिक कदम | आयोग (CAQM) ने दिल्ली-NCR में GRAP चरण-II लागू किया और गैर-BS-VI वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगाई |
| प्रमुख कारण | प्रतिकूल मौसम विज्ञान स्थितियाँ तथा कृषि अवशेष दहन से उत्पन्न धुआँ, जो सीमा-पार (पाकिस्तान के पंजाब) और देश के भीतर दोनों स्रोतों से आ रहा है |
| पूर्वानुमान | भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के अनुसार 5 नवंबर तक ‘अति खराब’ श्रेणी बने रहने का अनुमान है; उसके बाद के छह दिनों में स्थिति ‘अति खराब’ से ‘खराब’ के बीच रहने का अनुमान है |
| संस्थागत भूमिका | दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) ने सप्ताह के दिनों में 20 अतिरिक्त ट्रिप की घोषणा की और निर्माण स्थलों पर 250 से अधिक एंटी-स्मॉग गन व मिस्टिंग प्रणालियाँ लगाईं |
महत्व
पर्यावरणीय (Environmental)
- वायु गुणवत्ता सूचकांक में वृद्धि का मुख्य कारण PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कणों का बढ़ा हुआ भार है, जो कम हवा की गति और तापमान प्रतिलोमन में धरती के पास जमा हो जाते हैं
- सीमा-पार प्रदूषण यह दर्शाता है कि वायु प्रदूषण की प्रकृति स्थानीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और अंतर-राज्यीय (और कभी-कभी अंतरराष्ट्रीय) होती है
स्वास्थ्य एवं सामाजिक
- अति खराब वायु गुणवत्ता में श्वसन रोग, आँखों में जलन और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ता है; बुजुर्ग, बच्चे और अस्थमा के रोगी सबसे अधिक प्रभावित होते हैं
- बाहर काम करने वाले सुरक्षा कर्मियों और श्रमिकों को इलेक्ट्रिक हीटर उपलब्ध कराने का निर्देश सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ लकड़ी व बायोमास जलाने को रोकने का उपाय भी है
शासन एवं प्रशासनिक (Governance)
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) अधिनियम, 2021 के तहत गठित आयोग दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान सहित NCR के राज्यों में समन्वित कार्रवाई का केंद्र है
- GRAP एक स्तरीय (Tiered) ढाँचा है, जिसमें वायु गुणवत्ता सूचकांक के स्तर के अनुसार क्रमिक प्रतिबंध लागू होते हैं; इससे पूर्वानुमान-आधारित प्रशासन संभव होता है
अंतरराष्ट्रीय एवं सीमा-पार आयाम (International)
- सीमा-पार वायु प्रदूषण पर्यावरणीय कूटनीति और द्विपक्षीय या क्षेत्रीय सहयोग का विषय बन जाता है, जिसमें तथ्य-आधारित डेटा साझाकरण महत्वपूर्ण है
- एक देश की कृषि नीति का प्रभाव दूसरे देश की वायु गुणवत्ता पर पड़ना अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण शासन की सीमाओं को उजागर करता है
चुनौतियाँ
1. बहु-राज्य समन्वय की चुनौती
- प्रदूषण स्रोत (कृषि अवशेष, परिवहन, निर्माण, उद्योग) कई प्रशासनिक इकाइयों में फैले हैं, इसलिए किसी एक प्राधिकरण का अकेला प्रयास पर्याप्त नहीं होता
- दिल्ली की प्रशासनिक संरचना में केंद्र, राज्य सरकार और स्थानीय निकायों की भूमिकाएँ अलग-अलग हैं, जिससे निर्णयों के क्रियान्वयन में समन्वय की कमी दिखती है
यूपीएससी लिंक: GS2: संघीय व्यवस्था और अंतर-राज्यीय समन्वय, वैधानिक निकाय
2. कृषि अवशेष दहन का आर्थिक दबाव
- धान की कटाई के बाद खेत को अगली फसल के लिए जल्दी तैयार करने की आर्थिक विवशता किसानों को अवशेष जलाने की ओर ले जाती है
- अवशेष प्रबंधन की मशीनों (जैसे हैप्पी सीडर) की लागत और उपलब्धता से जुड़ी व्यावहारिक समस्याएँ बनी रहती हैं
यूपीएससी लिंक: GS3: कृषि अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण
3. सीमा-पार प्रदूषण और कूटनीतिक सीमाएँ
- प्रदूषक कणों की सीमा-पार आवाजाही के लिए कोई एक देश अकेले समाधान नहीं दे सकता; इसके लिए आँकड़ा-साझाकरण और सहयोग तंत्र चाहिए
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीमा-पार वायु प्रदूषण के लिए बाध्यकारी तंत्र सीमित हैं, इसलिए स्थिति का आकलन और नियंत्रण कठिन हो जाता है
यूपीएससी लिंक: GS2: भारत के हित से जुड़े अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण मुद्दे, द्विपक्षीय सहयोग
4. मौसम पर आधारित अनिश्चितता और प्रवर्तन
- प्रतिकूल मौसम में प्रदूषण का स्तर उत्सर्जन घटाने के बावजूद बढ़ सकता है, इसलिए केवल प्रतिबंधों से परिणाम की गारंटी नहीं मिलती
- निर्माण स्थलों, ढाबों और डीजल जनरेटर पर निगरानी और प्रवर्तन के लिए पर्याप्त मानव संसाधन और तकनीकी क्षमता आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: GS3: पर्यावरण प्रदूषण और उसका नियंत्रण, आपदा प्रबंधन के सिद्धांत
5. सार्वजनिक परिवहन की क्षमता और जन-सहभागिता
- सार्वजनिक परिवहन पर अधिक निर्भरता के लिए पर्याप्त सेवा-क्षमता, आरामदायक और सुलभ विकल्प आवश्यक हैं; अल्पकालिक विस्तार (जैसे अतिरिक्त ट्रिप) स्थायी समाधान नहीं है
- पार्किंग शुल्क बढ़ाने जैसे उपायों का प्रभाव आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर अलग पड़ सकता है, इसलिए उसे संतुलित रखना आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: GS3: अवसंरचना और शहरी परिवहन; GS2: सामाजिक न्याय
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| कृषि अवशेष दहन | आर्थिक विवशता और मशीनों की उपलब्धता के कारण किसानों का विकल्प सीमित रहना |
| सीमा-पार प्रदूषण | प्रदूषक कणों की सीमा-पार आवाजाही पर अकेले देश के उपाय सीमित प्रभाव डालते हैं |
| बहु-राज्य समन्वय | कई राज्यों और स्थानीय निकायों के बीच नीति और क्रियान्वयन में एकरूपता की कमी |
| मौसम-आधारित अनिश्चितता | प्रतिकूल मौसम में प्रतिबंधों का परिणाम अपेक्षा से कम दिखना और जनता में अविश्वास |
| प्रवर्तन क्षमता | निर्माण स्थलों और छोटे उत्सर्जन स्रोतों पर निगरानी के लिए मानव संसाधन की कमी |
| जन-स्वास्थ्य जोखिम | अति खराब वायु गुणवत्ता में संवेदनशील वर्गों पर स्वास्थ्य का दीर्घकालिक दबाव |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- ग्रैप (Graded Response Action Plan): वायु गुणवत्ता सूचकांक के स्तर के अनुसार क्रमिक कार्रवाई की ढाँचागत योजना, जिसे CAQM ने दिल्ली-NCR में लागू किया
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme): गैर-प्राप्ति शहरों में वायु प्रदूषण कम करने का राष्ट्रीय ढाँचा, जिसमें दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित हैं
- फसल अवशेष प्रबंधन पर केंद्रीय क्षेत्र योजना (Crop Residue Management Scheme): कृषि अवशेष के इन-सिटू और एक्स-सिटू प्रबंधन के लिए वित्तीय सहायता
आगे की राह
- कृषि अवशेष प्रबंधन के लिए मशीनों की उपलब्धता, किराया-सेवा केंद्र और फसल अवशेष के वैकल्पिक उपयोग (जैसे बायोमास आधारित ऊर्जा) को बढ़ावा देना चाहिए
- धान की फसल की कटाई के मौसम से पहले ही किसानों के साथ संवाद, प्रोत्साहन राशि और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए
- सीमा-पार प्रदूषण पर द्विपक्षीय और क्षेत्रीय स्तर पर डेटा साझाकरण तथा वैज्ञानिक सहयोग का तंत्र विकसित करना चाहिए
- CAQM और राज्य सरकारों के बीच नियमित समन्वय बैठकों और साझा निगरानी डेटाबेस से नीति-निर्णय को तेज़ किया जा सकता है
- वायु गुणवत्ता सूचकांक के पूर्वानुमान (IITM और CPCB जैसे संस्थानों के आँकड़ों) को पहले से सार्वजनिक कर नागरिक-स्तर की तैयारी सुनिश्चित करनी चाहिए
- सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की क्षमता, आवृत्ति और सुलभता को दीर्घकालिक रूप से बढ़ाना चाहिए, ताकि निजी वाहनों पर निर्भरता घटे
- निर्माण स्थलों और छोटे उत्सर्जन स्रोतों के लिए डिजिटल निगरानी और पारदर्शी प्रवर्तन प्रणाली अपनानी चाहिए
- बाहरी श्रमिकों और संवेदनशील वर्गों के लिए स्वास्थ्य सलाह, सुरक्षा उपाय और चिकित्सा सुविधाओं की पहुँच सुनिश्चित करनी चाहिए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
वायु प्रदूषण · वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) · ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) · वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) · पराली जलाना · शहरी प्रदूषण · पर्यावरण संरक्षण · सार्वजनिक स्वास्थ्य · अंतर-राज्यीय सहयोग · सतत विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: स्वच्छ वायु को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना गया है
- अनुच्छेद 48A: राज्य पर पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का नीति-निर्देश
- अनुच्छेद 51A(g): नागरिकों का पर्यावरण संरक्षण का मूल कर्तव्य
- अनुच्छेद 239AA: दिल्ली की विशेष संवैधानिक व्यवस्था और शासन-संरचना
अवधारणा प्रवाह
प्रतिकूल मौसम (कम हवा की गति और तापमान प्रतिलोमन) से प्रदूषक कण धरती के पास जमा होते हैं → सीमा-पार और देश के भीतर कृषि अवशेष दहन से PM2.5 और PM10 का भार बढ़ता है → वायु गुणवत्ता सूचकांक तेज़ी से बढ़कर 117 से 261 और फिर 324 तक पहुँचता है → CAQM द्वारा GRAP चरण-II की सक्रियता से क्रमिक नियंत्रण उपाय लागू होते हैं → वाहन प्रवेश पर रोक, निर्माण स्थलों की जाँच, डीजल जनरेटर व ईंधन पर प्रतिबंध और सार्वजनिक परिवहन का विस्तार होता है → सार्वजनिक स्वास्थ्य पर दबाव बढ़ता है और IITM के पूर्वानुमान के आधार पर अगली कार्रवाई की समीक्षा होती है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) एक सांविधिक निकाय है जो दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण से संबंधित मुद्दों को संबोधित करता है।
2. ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत अधिसूचित किया गया है।
3. ‘बहुत खराब’ श्रेणी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 301 से 400 के बीच होता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। CAQM का गठन संसद के एक अधिनियम द्वारा किया गया है, जो इसे एक सांविधिक निकाय बनाता है। कथन 2 सही है। GRAP को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत अधिसूचित किया गया था। कथन 3 सही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, 301-400 AQI को ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रखा गया है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा उपाय ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चरण II के तहत नहीं आता है?
- गैर-BS-VI वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर प्रतिबंध
- निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण मानदंडों का सख्त निरीक्षण
- सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में वृद्धि
- सभी प्रकार के निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध
उत्तर: सभी प्रकार के निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध — GRAP के चरण II में गैर-BS-VI वाहनों पर प्रतिबंध, निर्माण स्थलों का निरीक्षण और सार्वजनिक परिवहन में वृद्धि शामिल है। सभी प्रकार के निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध GRAP के चरण IV के तहत आता है, न कि चरण II के तहत।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण की समस्या के प्रमुख कारणों का विश्लेषण कीजिए। इस समस्या से निपटने में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण की गंभीरता और इसके ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंचने का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **प्रमुख कारण:**
* **मानवजनित कारण:** पराली जलाना (विशेषकर पड़ोसी राज्यों में), वाहनों से होने वाला उत्सर्जन (डीजल जनरेटर सहित), औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण और विध्वंस गतिविधियों से निकलने वाली धूल, खुले में कचरा जलाना।
* **भौगोलिक और मौसमी कारण:** स्थलरुद्ध क्षेत्र, सर्दियों में हवा की धीमी गति और तापमान का व्युत्क्रमण (Temperature Inversion) जो प्रदूषकों को निचले वायुमंडल में फंसा लेता है।
* **अंतर-राज्यीय कारक:** पड़ोसी राज्यों और सीमा पार से आने वाले प्रदूषक।
3. **GRAP की भूमिका का मूल्यांकन:**
* **सकारात्मक पहलू:**
* प्रदूषण के स्तर के आधार पर वर्गीकृत और चरणबद्ध प्रतिक्रिया तंत्र प्रदान करता है।
* विभिन्न हितधारकों (राज्य सरकारें, स्थानीय निकाय, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) के बीच समन्वय स्थापित करता है।
* तत्काल और मध्यम अवधि के उपायों (जैसे निर्माण प्रतिबंध, वाहनों पर नियंत्रण, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना) को लागू करने में मदद करता है।
* वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) जैसे सांविधिक निकाय द्वारा निगरानी और प्रवर्तन।
* **चुनौतियाँ और सीमाएँ:**
* प्रवर्तन में चुनौतियाँ और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी।
* दीर्घकालिक संरचनात्मक समाधानों की बजाय अक्सर तात्कालिक उपायों पर अधिक ध्यान।
* पड़ोसी राज्यों के साथ प्रभावी समन्वय की कमी, विशेषकर पराली जलाने के मुद्दे पर।
* आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रभाव को संतुलित करने की चुनौती।
* नागरिकों की भागीदारी और जागरूकता का अभाव।
4. **निष्कर्ष:** वायु प्रदूषण एक बहुआयामी समस्या है जिसके लिए GRAP जैसे तात्कालिक उपायों के साथ-साथ दीर्घकालिक, समन्वित और स्थायी समाधानों की आवश्यकता है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना, सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करना और कृषि पद्धतियों में सुधार शामिल है।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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