भारतीय रक्षा बलों के आधुनिकीकरण पर रक्षा मंत्रालय की समिति बैठक

भारतीय रक्षा बलों के आधुनिकीकरण पर रक्षा मंत्रालय की समिति बैठक

भारतीय रक्षा बलों के आधुनिकीकरण पर रक्षा मंत्रालय की समिति बैठक

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रक्षा आधुनिकीकरण प्रक्रिया

✎ रक्षा आधुनिकीकरण का मूल आधार स्वदेशीकरण, संस्थागत समन्वय (CDS और सैन्य मामले विभाग) और पारदर्शी अधिग्रहण प्रक्रिया (रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया, 2020) है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-III — सुरक्षा (रक्षा तैयारी, आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा चुनौतियाँ, रक्षा प्रौद्योगिकी और स्वदेशीकरण)  |  सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-II — शासन (संघ सरकार के मंत्रालय, परामर्शदात्री समितियाँ और नीति-निर्माण प्रक्रिया)  |  सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-III — अर्थव्यवस्था (मेक इन इंडिया और रक्षा विनिर्माण में निजी निवेश)
  • Prelims: रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure) और इसका वर्ष 2020 का संस्करण, सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (Positive Indigenisation List), रक्षा औद्योगिक गलियारे (Defence Industrial Corridors) — उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु, रक्षा क्षेत्र में स्वचालित मार्ग से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अधिकतम सीमा (74 प्रतिशत), रक्षा मंत्रालय का विभागीय ढाँचा, जिसमें रक्षा उत्पादन विभाग और सैन्य मामले विभाग शामिल हैं, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का पद और उसकी भूमिका, अनुच्छेद 53 (संघ की कार्यपालिका शक्ति) और संघ सूची की प्रविष्टि 1 (रक्षा), पोखरण और जैसलमेर क्षेत्र में थार मरुस्थल की भौगोलिक स्थिति
  • Essay: आत्मनिर्भर भारत के संदर्भ में रक्षा क्षेत्र का स्वदेशीकरण: अवसर और चुनौतियाँ, आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति और सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण

त्वरित पुनरावृत्ति: रक्षा आधुनिकीकरण का मूल आधार स्वदेशीकरण, संस्थागत समन्वय (CDS और सैन्य मामले विभाग) और पारदर्शी अधिग्रहण प्रक्रिया (रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया, 2020) है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में रक्षा मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक राजस्थान के जैसलमेर में हुई, जिसका विषय भारतीय रक्षा बलों का आधुनिकीकरण था। ऐसी बैठकें सशस्त्र बलों की भविष्य की क्षमता-आवश्यकताओं, अधिग्रहण की प्राथमिकताओं और स्वदेशी उत्पादन की दिशा पर शासन-स्तर पर विचार-विमर्श का मंच होती हैं। जैसलमेर का चयन सीमावर्ती पश्चिमी क्षेत्र की रणनीतिक और परिचालन प्रासंगिकता को भी रेखांकित करता है। इस लेख में बैठक के विस्तृत निर्णयों का उल्लेख नहीं किया गया है, क्योंकि स्रोत में उनका विवरण उपलब्ध नहीं है; परीक्षा की दृष्टि से विषय की संवैधानिक, संस्थागत और नीतिगत पृष्ठभूमि को समझना अधिक उपयोगी है।

पृष्ठभूमि

  • भारत का रक्षा तंत्र संघ सूची की प्रविष्टि 1 के अंतर्गत आता है, इसलिए रक्षा नीति और सशस्त्र बलों से जुड़े निर्णय संघ सरकार के अधिकार-क्षेत्र में आते हैं। कार्यपालिका शक्ति अनुच्छेद 53 के अनुसार राष्ट्रपति में निहित है, जिसका प्रयोग वे सर्वोच्च सेनापति के रूप में संवैधानिक रूप से करते हैं।
  • वर्ष 2019 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद सृजित किया गया और सैन्य मामले विभाग की स्थापना की गई, जिससे तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्तता को बढ़ावा देने का प्रयास हुआ।
  • वर्ष 2020 में रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया लागू की गई, जिसका उद्देश्य स्वदेशी डिजाइन, विकास और विनिर्माण (Buy Indian-IDDM) को प्राथमिकता देते हुए अधिग्रहण को पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है।
  • रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जारी की गई है, जिसमें शामिल वस्तुओं का आयात चरणबद्ध रूप से रोका जाता है। साथ ही, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में रक्षा औद्योगिक गलियारे विकसित किए जा रहे हैं।
  • प्रौद्योगिकी विकास के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की प्रमुख भूमिका है, जबकि स्टार्टअप और निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए रक्षा नवाचार संगठन (iDEX) कार्यरत है।

रक्षा आधुनिकीकरण क्या है?

  • रक्षा आधुनिकीकरण से आशय सशस्त्र बलों की युद्ध-क्षमता को नई प्रौद्योगिकी, उन्नत उपकरणों और बेहतर संगठनात्मक ढाँचे से सुसज्जित करने की निरंतर प्रक्रिया से है।
  • इसमें तीन प्रमुख आयाम शामिल हैं: हथियार प्रणालियों और प्लेटफॉर्म का अधिग्रहण, स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास, तथा सेनाओं के प्रशिक्षण और सिद्धांतों में बदलाव।
  • रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया के माध्यम से आवश्यकता-निर्धारण से लेकर अनुबंध और आपूर्ति तक की प्रक्रिया नियमित की जाती है। इसमें बजट आवंटन और प्राथमिकता-निर्धारण की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।
  • स्वदेशीकरण का अर्थ है आयात पर निर्भरता घटाना। इसके लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी उद्योग और लघु उद्योगों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाता है।
  • रक्षा क्षेत्र में स्वचालित मार्ग के अंतर्गत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 74 प्रतिशत तक है, जिससे प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त उत्पादन के अवसर बनते हैं।
  • परामर्शदात्री समितियाँ नीति-निर्माण में विभिन्न हितधारकों के दृष्टिकोण को शामिल करने का माध्यम हैं। ये निर्णय लेने वाली संस्थाएँ नहीं होतीं, बल्कि सलाह और समन्वय का कार्य करती हैं।
  • भारत की सीमाएँ विविध भौगोलिक परिस्थितियों में फैली हैं। पश्चिमी सीमा पर मरुस्थलीय और कठिन भूभाग के कारण वहाँ के लिए विशेष प्रकार के उपकरण और अवसंरचना की आवश्यकता रहती है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
बैठक का स्वरूप रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में रक्षा मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक, जिसका विषय सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण है। यह एक परामर्शी मंच है, कोई कार्यकारी या वैधानिक निकाय नहीं
स्थान: जैसलमेर पश्चिमी सीमा से निकटता और थार मरुस्थल का क्षेत्र। सीमावर्ती क्षेत्र में सशस्त्र बलों की परिचालन तत्परता और मरुस्थलीय परिस्थितियों में उपकरणों की उपयुक्तता जैसे व्यावहारिक पहलू इससे जुड़ते हैं
आधुनिकीकरण का दायरा थलसेना, नौसेना और वायुसेना की क्षमता-उन्नयन से जुड़े सामान्य क्षेत्र, जैसे प्लेटफ़ॉर्म, सेंसर, संचार प्रणाली और डिजिटल युद्धक्षेत्र तकनीक
परिणाम की स्थिति प्रस्तुत स्रोत में बैठक के निर्णयों, निर्देशों या आंकड़ों का विवरण नहीं है। अतः परीक्षा में इस बैठक के किसी विशिष्ट परिणाम का उल्लेख करने से बचें
नीतिगत संदर्भ रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया, स्वदेशीकरण सूचियाँ और रक्षा औद्योगिक गलियारे आधुनिकीकरण के मौजूदा नीतिगत ढाँचे हैं, जिनके संदर्भ में ऐसी बैठकों को समझा जाना चाहिए

महत्व

सामरिक महत्व

  • सशस्त्र बलों की क्षमता-वृद्धि राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रतिरोध (Deterrence) की नींव है। सीमावर्ती राज्यों में तैनाती की तत्परता इसी पर निर्भर करती है
  • आधुनिक प्रणालियाँ युद्ध की प्रकृति बदल रही हैं। इसलिए पारंपरिक और नई तकनीक दोनों में संतुलन आवश्यक है

आर्थिक और औद्योगिक महत्व

  • रक्षा आधुनिकीकरण की मांग से देश के रक्षा उद्योग, विशेषकर MSME और निजी क्षेत्र, को बाज़ार मिलता है
  • स्वदेशीकरण से आयात पर निर्भरता घटती है और विदेशी मुद्रा की बचत होती है। यह आत्मनिर्भर भारत की रणनीति से सीधे जुड़ा है

शासन और संस्थागत महत्व

  • परामर्शदात्री समिति में संसद सदस्यों की भागीदारी से रक्षा नीति पर संसदीय विमर्श और जन-प्रतिनिधियों की समझ मज़बूत होती है
  • रक्षा मंत्रालय, सशस्त्र बल और रक्षा उत्पादन इकाइयों के बीच समन्वय की प्रक्रिया सीधे शासन-क्षमता का परीक्षण है

तकनीकी महत्व

  • स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास (R&D) और स्टार्टअप की भागीदारी से उन्नत तकनीक में आत्मनिर्भरता बढ़ती है। यह दीर्घकालिक लाभ है

चुनौतियाँ

1. बजटीय दबाव और पूंजी व्यय का संतुलन

  • आधुनिकीकरण के लिए पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) की आवश्यकता होती है, जबकि वेतन, पेंशन और रखरखाव जैसे राजस्व व्यय का भार भी बड़ा है
  • सीमित संसाधनों में प्राथमिकता तय करना कठिन होता है। बजट में कटौती या देर से आवंटन परियोजनाओं को प्रभावित करता है

2. अधिग्रहण में विलंब और खरीद प्रक्रिया की जटिलता

  • परियोजनाओं के स्वीकृत होने से लेकर उपकरण मिलने तक लंबा समय लगता है, जिससे तकनीक पुरानी हो सकती है
  • परीक्षण, मूल्य-निर्धारण और अनुबंध की प्रक्रियाएँ जटिल हैं, जिससे निर्णय-प्रक्रिया धीमी होती है

3. तकनीकी निर्भरता और स्वदेशीकरण की सीमाएँ

  • उन्नत प्लेटफ़ॉर्म, इंजन और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के कई महत्वपूर्ण घटक अब भी आयात पर निर्भर हैं
  • स्वदेशी उत्पादन में गुणवत्ता, क्षमता और समय-सीमा का पालन चुनौती है

4. सेवाओं के बीच समन्वय और संयुक्त संरचना

  • थलसेना, नौसेना और वायुसेना की अलग-अलग आवश्यकताओं में समन्वय से संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होता है
  • संयुक्त संचालन के लिए संयुक्त कमान-ढाँचे (Theatre Commands) पर विमर्श जारी है, जिसमें प्रशासनिक और परिचालन पहलू दोनों शामिल हैं

5. पुराने प्लेटफ़ॉर्म और नई तकनीक के बीच संक्रमण

  • पुराने उपकरणों के रखरखाव और उन्नयन पर खर्च बढ़ता है, जबकि नई प्रणालियों के लिए अलग से निवेश चाहिए
  • साइबर, अंतरिक्ष और ड्रोन जैसे नए क्षेत्रों में क्षमता-निर्माण के लिए कुशल मानव संसाधन की कमी है

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
पूंजीगत आवंटन बजट का समय पर और पूरा उपयोग न होने से परियोजनाओं में देरी और लागत-वृद्धि होती है
खरीद प्रक्रिया लंबी स्वीकृति और परीक्षण प्रक्रिया से तकनीकी अप्रचलन का जोखिम रहता है
आयात निर्भरता महत्वपूर्ण घटकों पर विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता से आपूर्ति-श्रृंखला का जोखिम बढ़ता है
MSME और निजी भागीदारी छोटे और मध्यम उद्यमों की वित्तीय एवं तकनीकी क्षमता सीमित होने से स्वदेशी आपूर्ति का विस्तार धीमा रहता है
संयुक्तता सेवाओं के बीच समन्वय की कमी से संसाधनों का दोहराव और परिचालन में बाधा आ सकती है
कौशल और साइबर क्षमता नई तकनीक के संचालन और सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित जनशक्ति की कमी एक बड़ी चुनौती है

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure, DAP), 2020
  • रक्षा उत्पादन एवं निर्यात संवर्धन नीति, 2020 (Defence Production and Export Promotion Policy, DPEPP 2020)
  • रक्षा उत्कृष्टता हेतु नवाचार (Innovations for Defence Excellence, iDEX)

आगे की राह

  • पूंजीगत आवंटन के समय पर उपयोग के लिए परियोजना-वार निगरानी और अनुबंध-प्रबंधन को सुदृढ़ करना आवश्यक है
  • रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया में समय-सीमा का कड़ाई से पालन और परीक्षण-प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाना चाहिए
  • महत्वपूर्ण घटकों के स्वदेशीकरण के लिए अनुसंधान एवं विकास में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की साझेदारी बढ़ानी चाहिए
  • MSME और स्टार्टअप को वित्तीय सहायता, परीक्षण-सुविधा और बाज़ार-पहुँच देकर आपूर्ति-आधार का विस्तार करना चाहिए
  • सेवाओं के बीच संयुक्त योजना और साझा प्रशिक्षण से संसाधनों के दोहराव को कम करना चाहिए
  • साइबर, अंतरिक्ष और मानव रहित प्रणालियों में कुशल जनशक्ति के लिए विशेष प्रशिक्षण और शैक्षणिक सहयोग विकसित करना चाहिए
  • संसदीय परामर्श और रक्षा मंत्रालय की नीति-प्रक्रिया के बीच नियमित संवाद से पारदर्शिता और नीति-सुसंगति बढ़ सकती है

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

रक्षा आधुनिकीकरण (Defence Modernisation) · रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure – DAP) · रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council – DAC) · मुख्य रक्षा स्टाफ अधिकारी (Chief of Defence Staff – CDS) · स्वदेशीकरण और सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (Positive Indigenisation List) · आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) और रक्षा विनिर्माण · रक्षा औद्योगिक गलियारा (Defence Industrial Corridor) · नवाचार के लिए रक्षा उत्कृष्टता (iDEX) · सशस्त्र बलों का एकीकरण और संयुक्तता · रक्षा बजट में पूंजीगत और राजस्व व्यय का संतुलन · रक्षा क्षेत्र में निजी भागीदारी · संघ सूची (Union List) और रक्षा संबंधी संवैधानिक प्रावधान

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 53: संघ की कार्यपालिका शक्ति और रक्षा प्रशासन का संवैधानिक आधार
  • सातवीं अनुसूची, संघ सूची, प्रविष्टि 1 और 2: देश की रक्षा तथा सेनाओं पर संघ का विशेष अधिकार

अवधारणा प्रवाह

सीमा-सुरक्षा और उभरते खतरों के आकलन से आधुनिकीकरण की आवश्यकता तय होती है  →  रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में परामर्शदात्री समिति इन आवश्यकताओं पर विमर्श करती है  →  परामर्श के आधार पर सेवाओं की क्षमता-योजनाएँ रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया के अंतर्गत आती हैं  →  स्वदेशीकरण और DPEPP 2020 के तहत घरेलू उद्योग और स्टार्टअप को अवसर मिलते हैं  →  अनुसंधान, परीक्षण और अनुबंध के बाद उपकरण सशस्त्र बलों में शामिल होते हैं और परिचालन-तत्परता बढ़ती है  →  इससे आयात-निर्भरता घटती है, विदेशी मुद्रा की बचत होती है और राष्ट्रीय सुरक्षा सुदृढ़ होती है

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘रक्षा’ तथा नौसेना, सैन्य एवं वायु सेना संबंधी विषय सातवीं अनुसूची की संघ सूची में सम्मिलित हैं।
2. अनुच्छेद 77 के अंतर्गत संसद को भारत सरकार के कार्य-संचालन के नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है।
3. मुख्य रक्षा स्टाफ अधिकारी (CDS) भारत में स्टाफ प्रमुखों की समिति (Chiefs of Staff Committee) के स्थायी अध्यक्ष होते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: संघ सूची की प्रविष्टि 1 (‘भारत की रक्षा’) और प्रविष्टि 2 (‘नौसेना, सैन्य और वायु सेना’) रक्षा से संबंधित हैं। कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 77(3) के अंतर्गत नियम राष्ट्रपति बनाते हैं, संसद नहीं। कथन 3 सही है: CDS 2019 से स्टाफ प्रमुखों की समिति के स्थायी अध्यक्ष हैं। अतः सही उत्तर ‘केवल दो’ है।

Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक में एक कथन अभिकथन (A) और एक कारण (R) दिए गए हैं।

अभिकथन (A): रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) बड़े पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों के लिए ‘स्वीकृति की आवश्यकता’ (Acceptance of Necessity) प्रदान करती है।
कारण (R): रक्षा अधिग्रहण परिषद रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत नीतिगत और पूंजीगत अधिग्रहण संबंधी निर्णयों की सर्वोच्च संस्था है, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री करते हैं।

नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  3. (A) सही है, परंतु (R) गलत है
  4. (A) गलत है, परंतु (R) सही है

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — DAC की अध्यक्षता रक्षा मंत्री करते हैं और यह ‘स्वीकृति की आवश्यकता’ (AoN) प्रदान करती है, जो रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) का प्रथम चरण है। कारण में दी गई भूमिका अभिकथन को स्पष्ट करती है, इसलिए विकल्प (a) सही है।

Q3. भारत में रक्षा औद्योगिक गलियारे (Defence Industrial Corridors) किन दो राज्यों में स्थापित किए गए हैं?

  1. उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु
  2. गुजरात और महाराष्ट्र
  3. राजस्थान और हरियाणा
  4. ओडिशा और आंध्र प्रदेश

उत्तर: उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु — रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए दो रक्षा औद्योगिक गलियारे उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में घोषित किए गए थे। अन्य विकल्पों के राज्य इस योजना के अंतर्गत नामित गलियारों में शामिल नहीं हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत के सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण को केवल हथियार-खरीद की समस्या के रूप में देखना अपर्याप्त है; यह संस्थागत संरचना, बजट और स्वदेशीकरण का संयुक्त प्रश्न है। इस कथन की समालोचनात्मक परीक्षा कीजिए। साथ ही बताइए कि सशस्त्र बलों की संयुक्तता (Jointness) को गति देने के लिए मुख्य रक्षा स्टाफ अधिकारी की भूमिका कितनी प्रभावी रही है। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर के मुख्य बिंदु: (1) संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 53 और 73 के अंतर्गत संघ की कार्यपालिका शक्ति; सातवीं अनुसूची की संघ सूची की प्रविष्टि 1 और 2 के अंतर्गत रक्षा विषय; अनुच्छेद 77 के अंतर्गत कार्य-संचालन के नियम राष्ट्रपति द्वारा बनाए जाने का उल्लेख। सिविल-सैन्य संबंध और संसदीय नियंत्रण के सिद्धांत का संक्षिप्त संदर्भ। (2) संस्थागत आयाम: 2019 में CDS पद का सृजन; स्टाफ प्रमुखों की समिति का स्थायी अध्यक्ष; रक्षा मंत्रालय में सैन्य मामलों का विभाग (DMA); शेकटकर समिति (2016) की सिफारिशें और उनका आंशिक क्रियान्वयन; थिएटर कमान की बहस और उसके पक्ष-विपक्ष। (3) प्रक्रियात्मक आयाम: रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP 2020) में स्वदेशी श्रेणियों को प्राथमिकता; रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) द्वारा AoN; रक्षा उत्पादन एवं निर्यात संवर्धन नीति (DPEPP 2020); सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियाँ; iDEX के माध्यम से स्टार्टअप की भागीदारी; रक्षा औद्योगिक गलियारे। (4) वित्तीय आयाम: रक्षा बजट में पूंजीगत और राजस्व व्यय का अनुपात; वेतन और पेंशन का बढ़ता हिस्सा; अग्रिम भुगतान और परियोजना विलंब; CAG की लेखापरीक्षा रिपोर्टों का संदर्भ। (5) आत्मनिर्भरता: आयात पर निर्भरता के आँकड़े (SIPRI रिपोर्टों के संदर्भ में सावधानी से); निजी क्षेत्र और सार्वजनिक उपक्रमों की भूमिका; DRDO की अनुसंधान क्षमता। (6) संतुलित दृष्टिकोण: समर्थक तर्क (स्वदेशी क्षमता, रोजगार, रणनीतिक स्वायत्तता) बनाम आलोचनात्मक तर्क (तकनीकी क्षमता में अंतर, नौकरशाही विलंब, बजट की बाध्यता, प्रतिस्पर्धा का अभाव)। (7) निष्कर्ष: संस्थागत सुधार, दीर्घकालिक बजट योजना और स्वदेशी अनुसंधान के समन्वय पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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