भारतीय रक्षा बलों के आधुनिकीकरण पर सलाहकार समिति की बैठक

भारतीय रक्षा बलों के आधुनिकीकरण पर सलाहकार समिति की बैठक

भारतीय रक्षा बलों के आधुनिकीकरण पर सलाहकार समिति की बैठक

भारतीय रक्षा बलों का आधुनिकीकरणचुनौतियाँसुरक्षा खतरेप्राथमिकताएँ6 क्षेत्रों की पहचानसंसाधनबजट आवंटनउत्पादनस्वदेशी विनिर्माणक्षमतापरिचालन श्रेष्ठता
भारतीय रक्षा बलों का आधुनिकीकरण

✎ रक्षा उत्पादन 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपए और रक्षा निर्यात 2014 के 2,000 करोड़ रुपए से कम से लगभग 40,000 करोड़ रुपए हुआ है; लक्ष्य 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपए उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपए…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — सुरक्षा (आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा, रक्षा प्रौद्योगिकी और सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (रक्षा बजट, पूंजीगत व्यय, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत)  |  GS Paper II — शासन (रक्षा मंत्रालय की नीतियां, संस्थागत तंत्र और सलाहकार समिति की भूमिका)
  • Prelims: रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) के अंतर्गत पूंजी अधिग्रहण और रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure), iDEX (Innovations for Defence Excellence) योजना और स्टार्ट-अप की भागीदारी, सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (Positive Indigenisation List), रक्षा औद्योगिक गलियारे (Defence Industrial Corridors) — उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु, रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा — स्वचालित मार्ग में 74 प्रतिशत तक, डीआरडीओ (DRDO) की स्थापना और कार्य, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की भूमिका और संयुक्तता, संघ सूची की प्रविष्टि 1 और 2 (रक्षा और सैन्य बल)
  • Essay: तकनीक-संचालित युद्ध के युग में सेना का आधुनिकीकरण: अवसर और चुनौतियां, आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग: उत्पादन से निर्यात तक की यात्रा

त्वरित पुनरावृत्ति: रक्षा उत्पादन 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपए और रक्षा निर्यात 2014 के 2,000 करोड़ रुपए से कम से लगभग 40,000 करोड़ रुपए हुआ है; लक्ष्य 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपए उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपए निर्यात है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 3 नवंबर 2026 को राजस्थान के जैसलमेर में ‘भारतीय रक्षा बलों के आधुनिकीकरण’ पर रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में उभरती सुरक्षा चुनौतियों और बदलते युद्ध परिदृश्यों के अनुरूप तकनीकी रूप से सक्षम, आधुनिक और परिचालन की दृष्टि से चुस्त सेना के निर्माण पर चर्चा हुई। चर्चा में क्षमता विकास, तीनों सेनाओं में संयुक्तता, स्वदेशी रक्षा विनिर्माण, उभरती एवं विघटनकारी प्रौद्योगिकियां, रक्षा अनुसंधान एवं नवाचार तथा संसाधनों के प्रभावी उपयोग को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट को रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपए तथा इसमें पूंजीगत परिव्यय को 2.19 लाख करोड़ रुपए बताया गया। रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपए और रक्षा निर्यात लगभग 40,000 करोड़ रुपए तक पहुंचने का उल्लेख किया गया। सरकार ने 2029 तक रक्षा उत्पादन 3 लाख करोड़ रुपए और रक्षा निर्यात 50,000 करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

पृष्ठभूमि

  • स्वतंत्रता के बाद भारत की रक्षा नीति का मुख्य आधार विदेशी आयात पर निर्भरता रहा, जिससे रक्षा उत्पादन में स्वदेशी क्षमता का विकास धीमा रहा।
  • कारगिल युद्ध (1999) के बाद गठित उच्चस्तरीय समीक्षा समिति की सिफारिशों से रक्षा सुधारों, एकीकृत नेतृत्व और सैन्य आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर व्यापक सहमति बनी।
  • रक्षा अधिग्रहण में पारदर्शिता, समयबद्धता और स्वदेशी सामग्री को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया में संशोधन किए गए हैं।
  • वर्ष 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत रक्षा क्षेत्र में सुधारों, सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहन दिया गया।
  • चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के पद के सृजन (2019) से तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त योजना और संयुक्त परिचालन को संस्थागत आधार मिला।

रक्षा आधुनिकीकरण क्या है?

  • रक्षा आधुनिकीकरण का अर्थ है सशस्त्र बलों को अगली पीढ़ी के प्लेटफार्मों, हथियार प्रणालियों, संचार तंत्र और प्रौद्योगिकियों से लैस करना, ताकि उनकी युद्ध क्षमता और परिचालन तत्परता बढ़े।
  • पूंजी अधिग्रहण (Capital Acquisition) के अंतर्गत नए हथियारों और उपकरणों की खरीद, स्वदेशी विकास और उत्पादन के लिए बजटीय आवंटित पूंजीगत परिव्यय का उपयोग किया जाता है।
  • संघ सूची की प्रविष्टि 1 (भारत की रक्षा) और प्रविष्टि 2 (सैन्य बल) के अंतर्गत रक्षा विषय पूर्णतः केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
  • डीआरडीओ रक्षा अनुसंधान एवं विकास का प्रमुख संस्थान है, जबकि रक्षा से जुड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और निजी उद्योग उत्पादन में सहभागी होते हैं।
  • iDEX जैसी पहलें स्टार्ट-अप और नवप्रवर्तकों को रक्षा समस्याओं के समाधान से जोड़ती हैं, जिससे नवाचार को परिचालन स्तर तक पहुंचाने में तेजी आती है।
  • सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची के माध्यम से ऐसे उपकरणों और घटकों की सूची बनाई जाती है, जिनका आयात रोककर उन्हें घरेलू स्तर पर बनाया जाना है।
  • संयुक्तता का अर्थ है थल, जल और वायु सेना के बीच साझा योजना, साझा संसाधनों और समन्वित परिचालन, जो बहु-क्षेत्रीय अभियानों में निर्णायक होता है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
बैठक का स्वरूप रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति द्वारा 3 नवंबर 2026 को जैसलमेर में ‘भारतीय रक्षा बलों के आधुनिकीकरण’ पर आयोजित बैठक। इससे नीति-निर्माण में सशस्त्र बलों और मंत्रालय के बीच परामर्शी संवाद की संस्थागत भूमिका स्पष्ट होती है।
छह प्राथमिकता क्षेत्र क्षमता विकास, संयुक्तता एवं एकीकरण, स्वदेशी रक्षा विनिर्माण, उभरती एवं विघटनकारी प्रौद्योगिकियां, रक्षा अनुसंधान एवं नवाचार, और संसाधनों का प्रभावी उपयोग। ये क्षेत्र आधुनिकीकरण की नीतिगत दिशा को परिभाषित करते हैं।
रक्षा बजट 2026-27 कुल रक्षा बजट 7.85 लाख करोड़ रुपए है, जिसमें आधुनिकीकरण और पूंजीगत खरीद के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपए का पूंजीगत परिव्यय (Capital Outlay) शामिल है। पूंजीगत व्यय का अनुपात सशस्त्र बलों की दीर्घकालिक क्षमता-निर्माण की प्रतिबद्धता दर्शाता है।
रक्षा उत्पादन में वृद्धि वित्त वर्ष 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपए, जो स्वदेशी विनिर्माण क्षमता के विस्तार का संकेत है।
रक्षा निर्यात में वृद्धि वर्ष 2014 में 2,000 करोड़ रुपए से कम से बढ़कर लगभग 40,000 करोड़ रुपए, जिससे भारत के रक्षा निर्यात आधार के विविधीकरण का संकेत मिलता है।
2029 के लक्ष्य रक्षा उत्पादन 3 लाख करोड़ रुपए और रक्षा निर्यात 50,000 करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य, जो आगामी नीतिगत मूल्यांकन के लिए मापदंड बनेगा।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात में वृद्धि से औद्योगिक आधार और रोजगार सृजन को बल मिलता है।
  • निजी क्षेत्र, एमएसएमई (MSME) और स्टार्ट-अप की भागीदारी से विनिर्माण श्रृंखला में नए उद्यमों के प्रवेश का अवसर बनता है।
  • आयात पर निर्भरता घटने से विदेशी मुद्रा पर दबाव कम होने की संभावना रहती है।

रणनीतिक महत्व

  • उभरते युद्ध परिदृश्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), मानव रहित प्लेटफॉर्म, साइबर और अंतरिक्ष क्षमताओं को अपनाने से परिचालन श्रेष्ठता बढ़ती है।
  • तीनों सेनाओं में संयुक्तता से बहु-क्षेत्रीय अभियानों में समन्वित प्रतिक्रिया संभव होती है।
  • स्वदेशी अनुसंधान और विनिर्माण से आपूर्ति श्रृंखला संबंधी संवेदनशीलता कम होती है।

संस्थागत और शासन महत्व

  • प्राथमिकताओं की स्पष्ट पहचान और समयबद्ध लक्ष्य निर्धारण से बजटीय संसाधनों के उपयोग में जवाबदेही बढ़ती है।
  • सशस्त्र बल, DRDO, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (DPSUs), निजी उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच समन्वय का ढांचा सुदृढ़ होता है।

चुनौतियाँ

1. बजट और पूंजीगत व्यय का उपयोग

  • पूंजीगत परिव्यय का समय पर और पूर्ण उपयोग आधुनिकीकरण की गति तय करता है। परियोजनाओं में विलंब से लागत-वृद्धि और क्षमता-अंतराल दोनों बढ़ते हैं।
  • वेतन और पेंशन जैसे राजस्व व्यय का बढ़ता हिस्सा पूंजीगत खरीद के लिए उपलब्ध गुंजाइश को सीमित करता है।

2. अधिग्रहण प्रक्रिया की जटिलता

  • लंबी खरीद प्रक्रिया, बहु-स्तरीय स्वीकृतियां और परीक्षण चक्र तकनीकी अप्रचलन का जोखिम बढ़ाते हैं।
  • सेवाओं की आवश्यकताओं और उद्योग की क्षमताओं के बीच संवाद की कमी से परियोजनाएं अटक सकती हैं।

3. प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता की सीमाएं

  • उन्नत इंजन, सेंसर, सेमीकंडक्टर और उच्च-गुणवत्ता सामग्री के लिए अब भी कई उप-प्रणालियां आयात पर निर्भर हैं।
  • निजी क्षेत्र की पूंजी-जोखिम उठाने की क्षमता और अनुसंधान में निवेश अपेक्षा से कम होने की स्थिति में स्वदेशीकरण की गति धीमी हो सकती है।

4. अनुसंधान से परिचालन तक का अंतर

  • DRDO द्वारा विकसित प्रणालियों का सेवाओं में समावेश तभी होता है जब परीक्षण, उपयोगकर्ता-मूल्यांकन और उत्पादन-तैयारी में समन्वय हो।
  • नवाचार को परिचालन क्षमता में बदलने की प्रक्रिया में समय और लागत दोनों का दबाव बना रहता है।

5. संयुक्तता और तीनों सेनाओं में समन्वय

  • थिएटर कमांड जैसी संयुक्त संरचनाओं पर सहमति और उनका क्रियान्वयन अब भी चर्चा और चरणबद्ध सुधार की प्रक्रिया में है।
  • अलग-अलग सेवाओं की खरीद-प्राथमिकताओं में दोहराव से संसाधनों का अपव्यय हो सकता है।

6. साइबर, अंतरिक्ष और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के लिए नए ढांचे

  • इन क्षेत्रों में मानक, डेटा-सुरक्षा और विधिक ढांचे का विकास अभी प्रारंभिक चरण में है।
  • सिविल और सैन्य उपयोग के बीच दोहरे-उपयोग प्रौद्योगिकियों के नियमन की स्पष्टता आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
पूंजीगत व्यय का क्रियान्वयन बजट आवंटन और वास्तविक व्यय के बीच अंतर से आधुनिकीकरण की समय-सारणी प्रभावित हो सकती है।
आयात निर्भरता उन्नत उप-प्रणालियों और कच्चे माल पर आयात-निर्भरता स्वदेशी उत्पादन के लक्ष्य को सीमित कर सकती है।
अनुसंधान से उत्पादन तक का संक्रमण परीक्षण, प्रमाणन और उत्पादन-हस्तांतरण में विलंब से प्रौद्योगिकी का परिचालन लाभ घटता है।
एमएसएमई और स्टार्ट-अप की पहुंच उच्च गुणवत्ता मानकों, वित्त और परीक्षण सुविधाओं तक सीमित पहुंच से छोटे उद्यमों की भागीदारी सीमित रहती है।
तीनों सेनाओं में समन्वय अलग-अलग आवश्यकताओं और खरीद-योजनाओं से संयुक्त क्षमता-निर्माण में दोहराव की संभावना बनी रहती है।
नई प्रौद्योगिकियों का नियमन कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियों और साइबर क्षेत्र में नैतिक, विधिक और सुरक्षा मानकों की स्पष्टता अभी विकसित हो रही है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मेक इन इंडिया (Make in India)
  • आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat)

आगे की राह

  • पूंजीगत परिव्यय के समयबद्ध उपयोग के लिए परियोजना-वार निगरानी और प्रगति-मूल्यांकन तंत्र को सुदृढ़ किया जाए।
  • अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल बनाते हुए परीक्षण, स्वीकृति और अनुबंध के चरणों की समय-सीमा तय की जाए।
  • स्वदेशी उप-प्रणालियों, इंजन, सेंसर और सेमीकंडक्टर के लिए घरेलू आपूर्ति श्रृंखला के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए।
  • DRDO, DPSUs, निजी उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच संयुक्त अनुसंधान और प्रौद्योगिकी-हस्तांतरण के स्पष्ट मॉडल बनाए जाएं।
  • एमएसएमई और स्टार्ट-अप के लिए परीक्षण सुविधाओं, मानक-प्रमाणन और वित्तीय सहायता तक पहुंच आसान की जाए।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियों और साइबर क्षमताओं के लिए नैतिक, विधिक और सुरक्षा मानकों का स्पष्ट ढांचा विकसित किया जाए।
  • तीनों सेनाओं की संयुक्त योजना और साझा अवसंरचना के उपयोग को प्रोत्साहित कर दोहराव कम किया जाए।
  • रक्षा निर्यात के लक्ष्य के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों, गुणवत्ता-प्रमाणन और विपणन-सहायता का तंत्र मजबूत किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 53: राष्ट्रपति में सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमान, नागरिक नियंत्रण का आधार
  • अनुच्छेद 246 और सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 1: ‘भारत की रक्षा’ संघ का विषय

अवधारणा प्रवाह

उभरते सुरक्षा खतरे और बदलते युद्ध परिदृश्य से नई क्षमताओं की आवश्यकता उत्पन्न होती है।  →  सलाहकार समिति छह प्राथमिकता क्षेत्रों की पहचान कर नीतिगत दिशा तय करती है।  →  रक्षा बजट और पूंजीगत परिव्यय के माध्यम से अधिग्रहण और आधुनिकीकरण के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं।  →  स्वदेशी अनुसंधान, DRDO और घरेलू उद्योग की भागीदारी से रक्षा उत्पादन बढ़ता है।  →  उत्पादन में वृद्धि से आयात-निर्भरता घटती है और रक्षा निर्यात के अवसर बनते हैं।  →  परिचालन क्षमता में सुधार और समयबद्ध क्रियान्वयन से 2029 के लक्ष्यों की प्राप्ति का मूल्यांकन होता है।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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