05 Nov मंत्रिमंडल ने सभी अग्निवीरों को रक्षा बलों में समाहित करने का मार्ग प्रशस्त किया

✎ अग्निपथ योजना के अंतर्गत 25 प्रतिशत अग्निवीर नियमित सेवा में बने रहेंगे, शेष 75 प्रतिशत को स्वेच्छा से दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा का विकल्प मिलेगा, और उसके बाद सभी इच्छुक एवं योग्य अग्निवीर नियमित सैनिक बन सकेंगे।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन और संविधान (Polity): संघ मंत्रिमंडल की भूमिका, संसदीय उत्तरदायित्व और रक्षा नीति निर्माण की प्रक्रिया | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा और रक्षा: सशस्त्र बलों की भर्ती, सेवा-नीति और सैन्य तत्परता (Military Preparedness) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था और रोजगार: युवा रोजगार, कौशल विकास और सेवा-निवृत्ति पश्चात पुनर्वास
- Prelims: अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme), अग्निवीर और नियमित सैनिक का अंतर, अनुच्छेद 33 (संसद द्वारा सशस्त्र बलों के मूल अधिकारों में संशोधन की शक्ति), अनुच्छेद 53 और 75 (संघ की कार्यपालिका और मंत्रिपरिषद की सामूहिक उत्तरदायित्व), सेवा निधि पैकेज (Seva Nidhi Package), सेना अधिनियम, 1950; नौसेना अधिनियम, 1957; वायुसेना अधिनियम, 1950, रक्षा मंत्रालय और सैन्य मामलों का विभाग (Department of Military Affairs), मंत्रिमंडलीय सुरक्षा समिति (Cabinet Committee on Security)
- Essay: युवा शक्ति, सैन्य दक्षता और राष्ट्रीय सुरक्षा: अल्पकालिक सेवा मॉडल की सीमाएं और संभावनाएं, सार्वजनिक नीति में फीडबैक-आधारित संशोधन: नीति-सुधार का एक केस अध्ययन
त्वरित पुनरावृत्ति: अग्निपथ योजना के अंतर्गत 25 प्रतिशत अग्निवीर नियमित सेवा में बने रहेंगे, शेष 75 प्रतिशत को स्वेच्छा से दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा का विकल्प मिलेगा, और उसके बाद सभी इच्छुक एवं योग्य अग्निवीर नियमित सैनिक बन सकेंगे।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अग्निपथ योजना के अंतर्गत भर्ती हुए अग्निवीरों के लिए एक नया मार्ग तय किया है। रक्षा बलों द्वारा चार वर्ष की सेवा के दौरान किए गए मूल्यांकन में अग्निवीरों के कौशल, प्रेरणा, शारीरिक तंदुरुस्ती, अनुशासन और तकनीकी दक्षता को सकारात्मक पाया गया। पूर्व व्यवस्था के अनुसार योग्यता के आधार पर 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सेवा का अवसर मिलता रहेगा। अब शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को स्वेच्छा से दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा अवधि का विकल्प दिया गया है, जिसके पूरा होने पर सभी अग्निवीर इच्छा और निर्धारित चयन मानदंडों की शर्त पर नियमित सैनिक बनने के पात्र होंगे। सरकार के अनुसार यह निर्णय भारतीय रक्षा बलों की सिफारिशों, योजना के चार वर्षों के फीडबैक और अग्निवीरों की आकांक्षाओं व संगठनात्मक दक्षता के बीच सामंजस्य पर आधारित है। इसी के साथ दूसरी सेवा अवधि में अधिक पारिश्रमिक, उन्नत सेवा निधि पैकेज और वरिष्ठता संबंधी लाभ देने की घोषणा की गई है।
पृष्ठभूमि
- अग्निपथ योजना की घोषणा जून 2022 में हुई थी। इसके अंतर्गत सशस्त्र बलों में सैनिकों की भर्ती अल्पकालिक चार वर्ष की सेवा के लिए की जाती है, जिन्हें अग्निवीर कहा जाता है। इससे पहले सैनिकों की भर्ती मुख्यतः दीर्घकालिक सेवा के लिए होती थी।
- योजना के मूल उद्देश्यों में सशस्त्र बलों की औसत आयु को कम रखना, युवाओं को अनुशासित और कौशल-सम्पन्न बनाना तथा सेवा-निवृत्ति से जुड़े वित्तीय दायित्वों को संतुलित करना शामिल था।
- चार वर्ष की सेवा के बाद अग्निवीरों के लिए सेवा निधि पैकेज का प्रावधान है, जिसमें अग्निवीर और सरकार दोनों का योगदान होता है। यह राशि सेवा-निवृत्ति के समय एकमुश्त दी जाती है।
- सशस्त्र बलों की सेवा-शर्तें मुख्यतः सेना अधिनियम, 1950, नौसेना अधिनियम, 1957 और वायुसेना अधिनियम, 1950 तथा उनके अंतर्गत बने नियमों से संचालित होती हैं। इन्हीं ढांचों के भीतर भर्ती और सेवा-अवधि से संबंधित बदलाव किए जाते हैं।
- सशस्त्र बलों के सदस्यों के मूल अधिकारों को अनुशासन और सैन्य आवश्यकताओं के अनुरूप सीमित करने का अधिकार अनुच्छेद 33 के अंतर्गत संसद को दिया गया है। सेवा-शर्तों में नीतिगत बदलाव अधिकतर कार्यपालिका के निर्णय और विधिक ढांचे के संयोजन से होते हैं।
अग्निपथ योजना क्या है?
- अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) सशस्त्र बलों में सैनिकों की भर्ती की एक नई व्यवस्था है, जिसके अंतर्गत युवाओं को चार वर्ष की अवधि के लिए अग्निवीर के रूप में भर्ती किया जाता है।
- इस योजना के अंतर्गत चार वर्ष की सेवा के बाद योग्यता के आधार पर केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सेवा में बनाए रखने की पूर्व व्यवस्था थी।
- नई व्यवस्था में शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों के लिए स्वेच्छा पर आधारित दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा अवधि का विकल्प जोड़ा गया है।
- दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा के बाद सभी अग्निवीर इच्छा और चयन मानदंडों की शर्त पर नियमित सैनिक बनने के पात्र होंगे। इस प्रकार अल्पकालिक सेवा दीर्घकालिक सेवा के मार्ग में परिवर्तित होती है।
- अग्निवीरों के लिए दूसरी सेवा अवधि में अधिक पारिश्रमिक, उन्नत सेवा निधि पैकेज और वरिष्ठता संबंधी लाभ प्रस्तावित हैं।
- रक्षा बलों द्वारा किए गए वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन में अग्निवीरों के कौशल, शारीरिक तंदुरुस्ती, मनोबल, अनुशासन और तकनीकी अनुकूलन क्षमता में सुधार पाया गया है।
- योजना के अंतर्गत भर्ती का भौगोलिक दायरा बढ़ा है, भर्ती प्रक्रिया अधिक मानकीकृत और पारदर्शी हुई है, तथा रक्षा बलों की विभिन्न शाखाओं में महिलाओं के लिए अवसर खुले हैं।
- मंत्रिमंडल का यह निर्णय संघ सरकार की कार्यपालिका शक्ति के अंतर्गत लिया गया है, जिसके लिए संसदीय विधि में अलग से संशोधन की आवश्यकता नहीं बताई गई है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| चार वर्ष की सेवा का मूल्यांकन | रक्षा बलों के आकलन में अग्निवीरों के समग्र कार्य-निष्पादन पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। कौशल, प्रेरणा, शारीरिक तंदुरुस्ती और तकनीकी दक्षता में उत्कृष्ट प्रदर्शन दर्ज हुआ। |
| योग्यता-आधारित नियमित सेवा | पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार 25 प्रतिशत अग्निवीरों को योग्यता के आधार पर रक्षा बलों में नियमित सेवा का अवसर मिलेगा। |
| दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा अवधि | शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को स्वेच्छा के आधार पर दो वर्ष की एक और सेवा अवधि का विकल्प दिया जाएगा। यह निर्णय रक्षा बलों की सिफारिशों के आधार पर मंत्रिमंडल (Union Cabinet) ने स्वीकृत किया है। |
| नियमित सैनिक के रूप में समाहन | अतिरिक्त सेवा पूरी होने पर इच्छा और निर्धारित चयन मानदंडों की शर्त पर सभी अग्निवीरों की नियमित सैनिकों के रूप में भर्ती होगी। |
| दूसरी सेवा अवधि के लाभ | अधिक पारिश्रमिक, उन्नत सेवा निधि पैकेज और वरिष्ठता संबंधी लाभ प्रदान किए जाएंगे। |
| योजना की उपलब्धियाँ | भर्ती का भौगोलिक दायरा बढ़ा, प्रक्रिया अधिक मानकीकृत और पारदर्शी हुई तथा रक्षा बलों की विभिन्न शाखाओं में महिलाओं के लिए अवसर खुले। |
महत्व
सामरिक और संगठनात्मक
- संगठनात्मक आवश्यकताओं और कार्यकारी व सामरिक दक्षता के उद्देश्य से किए गए वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन से प्रशिक्षित और अनुभवी जनशक्ति को बनाए रखने का आधार मिलता है।
- शारीरिक तंदुरुस्ती, मनोबल, प्रेरणा और अनुशासन के उच्च स्तर से युद्ध-तत्परता और संगठनात्मक सामंजस्य को बल मिलता है।
- तकनीकी अनुकूलन क्षमता में वृद्धि से आधुनिक हथियार प्रणालियों और उपकरणों के संचालन में दक्षता बढ़ती है।
नीति-निर्माण और शासन
- नीति का मूल्यांकन चार वर्ष बाद प्राप्त फीडबैक और विस्तृत आकलन के आधार पर किया गया, जो साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण का उदाहरण है।
- भर्ती प्रक्रिया के मानकीकरण और पारदर्शिता से प्रशासनिक विश्वसनीयता बढ़ती है।
सामाजिक और मानव संसाधन
- अग्निवीरों की आकांक्षाओं और संगठनात्मक दक्षता के बीच सामंजस्य स्थापित करना इस निर्णय का मूल उद्देश्य बताया गया है।
- भर्ती के दायरे का विस्तार विभिन्न जिलों के युवाओं तक अवसरों की पहुँच को बढ़ाता है।
- सेवा के दौरान शैक्षणिक योग्यता में वृद्धि और महिलाओं के लिए नए अवसर सामाजिक समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
आर्थिक
- उन्नत सेवा निधि पैकेज और अधिक पारिश्रमिक से सेवा-अवधि के बाद की आर्थिक सुरक्षा का आधार मजबूत होता है।
- नियमित सैनिकों के रूप में समाहन से दीर्घकालिक रोजगार की निश्चितता मिलती है।
चुनौतियाँ
1. नियमित पदों की सीमा और चयन की अनिश्चितता
- दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा के बाद सभी अग्निवीरों के लिए नियमित पद उपलब्ध होने चाहिए, जबकि संगठन की वास्तविक आवश्यकता सीमित हो सकती है।
- इच्छा और चयन मानदंड दोनों की शर्त होने से बड़ी संख्या में युवाओं के लिए अनिश्चितता बनी रहती है।
यूपीएससी लिंक: GS-II: सरकारी नीतियों और हस्तक्षेपों का मूल्यांकन; GS-III: रक्षा बलों का सुदृढ़ीकरण
2. सेवा-संक्रमण और पुनर्वास
- जिन अग्निवीरों का चयन नहीं होगा, उनके लिए नागरिक जीवन में रोजगार और कौशल के उपयोग की स्पष्ट व्यवस्था आवश्यक है।
- सेवा निधि और पारिश्रमिक से प्राप्त बचत का उत्पादक उपयोग सुनिश्चित करने हेतु वित्तीय साक्षरता और परामर्श की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: GS-II: सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ; GS-III: रोजगार और कौशल विकास
3. सार्वजनिक वित्त और दीर्घकालिक दायित्व
- अधिक पारिश्रमिक, सेवा निधि पैकेज और वरिष्ठता लाभ से रक्षा बजट पर दीर्घकालिक वित्तीय भार बढ़ता है।
- नियमित सैनिकों की संख्या बढ़ने पर पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति दायित्वों का प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: GS-III: भारतीय अर्थव्यवस्था, सार्वजनिक वित्त और राजकोषीय प्रबंधन
4. सैन्य सेवा और नागरिक रोजगार के बीच सामंजस्य
- युवाओं की आकांक्षाओं और संगठन की आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाए रखना नीति की केंद्रीय चुनौती है।
- स्वैच्छिक विकल्प की प्रकृति के कारण नीति का प्रभाव भर्ती के समय की अपेक्षाओं और चयन के परिणामों पर निर्भर करेगा।
यूपीएससी लिंक: GS-II: शासन में नीति निर्माण और हितधारक परामर्श की प्रक्रिया
5. समावेशन और अवसरों की समान पहुँच
- महिलाओं के लिए रक्षा बलों की शाखाओं में अवसरों का विस्तार हुआ है, परंतु चयन और प्रशिक्षण में समान पहुँच सुनिश्चित करना आवश्यक है।
- देश के विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों से भर्ती में प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाए रखना चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: GS-I: भारतीय समाज में महिलाओं की भूमिका; GS-II: सामाजिक समावेशन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| नियमित पदों की सीमित संख्या | सभी अग्निवीरों के समाहन के लिए पदों और संगठनात्मक आवश्यकता का तालमेल बनाए रखना कठिन हो सकता है। |
| चयन की शर्त से अनिश्चितता | इच्छा और चयन मानदंड दोनों पूरे करने की शर्त से बड़ी संख्या में युवाओं का भविष्य अनिश्चित रह सकता है। |
| सेवा-संक्रमण | सेवा के बाद नागरिक जीवन में रोजगार और कौशल के उपयोग की व्यवस्था पर्याप्त होनी चाहिए। |
| वित्तीय भार | बढ़े हुए पारिश्रमिक और दीर्घकालिक सेवा दायित्वों का रक्षा बजट पर प्रभाव पड़ेगा। |
| समावेशन | महिलाओं और विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना आवश्यक है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme)
- सेवा निधि पैकेज (Seva Nidhi Package)
आगे की राह
- चयन मानदंड, नियमित पदों की संख्या और समय-सारिणी को पारदर्शी रूप से सार्वजनिक किया जाए, ताकि अग्निवीरों के लिए योजना की स्पष्टता बनी रहे।
- दूसरी सेवा अवधि के दौरान कौशल प्रशिक्षण और नागरिक रोजगार से जुड़े संक्रमण कार्यक्रम विकसित किए जाएँ।
- सेवा निधि और पारिश्रमिक से जुड़े लाभों के बारे में वित्तीय साक्षरता और परामर्श सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।
- नियमित सैनिकों की संख्या और रक्षा बजट के दीर्घकालिक प्रभाव का स्वतंत्र विश्लेषण कर उसे सार्वजनिक किया जाए।
- महिलाओं के लिए सभी शाखाओं में चयन और प्रशिक्षण की समान पहुँच सुनिश्चित करने हेतु निगरानी तंत्र सुदृढ़ किया जाए।
- भर्ती के भौगोलिक दायरे का विस्तार करते समय वंचित क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधित्व पर ध्यान दिया जाए।
- सेवा के दौरान मनोवैज्ञानिक परामर्श और स्वास्थ्य सहायता को नियमित प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया जाए।
- नीति के प्रभाव का मूल्यांकन समय-समय पर फीडबैक के आधार पर किया जाए, जिससे संगठनात्मक दक्षता और युवाओं की आकांक्षाओं में संतुलन बना रहे।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) · अग्निवीर (Agniveer) · सशस्त्र बल में भर्ती और कार्यकाल-आधारित सेवा (Short-term Service in Armed Forces) · अनुच्छेद 33 (Article 33) और सशस्त्र बलों के मूल अधिकार पर सीमा · अनुच्छेद 75(3) और सामूहिक उत्तरदायित्व (Collective Responsibility) · संघ सूची की प्रविष्टि 1 और 2 (Union List Entries 1 and 2) · सैन्य सुधार और शेखतकर समिति (Shekatkar Committee) · कारगिल समीक्षा समिति (Kargil Review Committee) · सेवा निधि और पेंशन-आधारित व्यय (Seva Nidhi and Pension Burden) · सैन्य कौशल और संगठनात्मक दक्षता (Military Skill and Organisational Efficiency) · रक्षा मंत्रालय और कार्मिक नीति (Defence Ministry and Personnel Policy)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 33: सशस्त्र बलों के सदस्यों के मौलिक अधिकारों में संशोधन का अधिकार
- अनुच्छेद 77: भारत सरकार के कार्य-संचालन में मंत्रिमंडल के निर्णय की औपचारिक प्रक्रिया
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची: प्रविष्टि 1 और 2 में रक्षा और सशस्त्र बल संघ का विषय
अवधारणा प्रवाह
अग्निवीरों के चार वर्ष के कार्य-निष्पादन का रक्षा बलों द्वारा वस्तुनिष्ठ आकलन → आकलन में सकारात्मक निष्कर्ष और योजना पर विस्तृत फीडबैक प्राप्त होना → रक्षा बलों की सिफारिशों पर मंत्रिमंडल द्वारा 75 प्रतिशत अग्निवीरों के लिए दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा को स्वीकृति → अतिरिक्त सेवा के बाद इच्छा और चयन मानदंडों की शर्त पर नियमित सैनिकों के रूप में भर्ती → सभी अग्निवीरों के रक्षा बलों में समाहन का मार्ग प्रशस्त होना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अग्निपथ योजना वर्ष 2022 में घोषित की गई थी, जिसके अंतर्गत सशस्त्र बलों में भर्ती अल्पकालिक सेवा के आधार पर की जाती है।
2. अग्निवीरों को पुरानी पेंशन योजना के अंतर्गत पेंशन का पूर्ण लाभ प्राप्त होता है।
3. संविधान का अनुच्छेद 33 संसद को यह शक्ति देता है कि वह सशस्त्र बलों के सदस्यों के मूल अधिकारों को उनके कर्तव्यों के उचित पालन के लिए सीमित या परिवर्तित कर सके।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है, क्योंकि अग्निपथ योजना को जून 2022 में मंजूरी मिली थी और इसमें चार वर्ष की सेवा का प्रावधान है। कथन 2 गलत है, क्योंकि अग्निवीर नियमित पेंशन योजना के दायरे में नहीं आते और उन्हें सेवा निधि का प्रावधान मिलता है। कथन 3 सही है, क्योंकि अनुच्छेद 33 संसद को सशस्त्र बलों के मूल अधिकारों में विधि द्वारा परिवर्तन या सीमा लगाने की शक्ति देता है।
Q2. निम्नलिखित स्तंभों का सही मिलान कीजिए:
स्तंभ I
(a) अनुच्छेद 33
(b) अनुच्छेद 75(3)
(c) संघ सूची की प्रविष्टि 2 (नौसेना, सेना और वायु सेना से संबंधित)
स्तंभ II
1. मंत्रिपरिषद का लोक सभा के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व
2. सशस्त्र बलों के मूल अधिकारों पर विधि द्वारा सीमा लगाने की संसद की शक्ति
3. नौसेना, सेना और वायु सेना से संबंधित विधायी विषय
सही कूट चुनिए:
- (a)-1, (b)-2, (c)-3
- (a)-2, (b)-1, (c)-3
- (a)-3, (b)-1, (c)-2
- (a)-2, (b)-3, (c)-1
उत्तर: (a)-2, (b)-1, (c)-3 — अनुच्छेद 33 सशस्त्र बलों के मूल अधिकारों पर संसद द्वारा विधि से सीमा लगाने से संबंधित है, इसलिए (a)-2 सही है। अनुच्छेद 75(3) मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व की व्यवस्था करता है, इसलिए (b)-1 सही है। संघ सूची की प्रविष्टि 2 नौसेना, सेना और वायु सेना से संबंधित है, इसलिए (c)-3 सही है।
Q3. अभिकथन (A): मंत्रिमंडल द्वारा अग्निवीरों की सेवा अवधि बढ़ाने का निर्णय सभी संबंधित मंत्रियों पर बाध्यकारी होता है।
कारण (R): संविधान के अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद लोक सभा के समक्ष सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।
सही उत्तर चुनिए:
- A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सही है, किंतु R गलत है
- A गलत है, किंतु R सही है
उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है — मंत्रिमंडल के सामूहिक निर्णय सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत के कारण सभी मंत्रियों पर बाध्यकारी होते हैं। यह सिद्धांत अनुच्छेद 75(3) से निकलता है, इसलिए R, A की सही व्याख्या है। यह कथन संवैधानिक सिद्धांत की समझ की परख करता है, किसी नीति-विवाद की नहीं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ अग्निपथ योजना के अंतर्गत सेवा-अवधि का मॉडल सैन्य संगठन की दक्षता और अग्निवीरों की आकांक्षाओं दोनों को प्रभावित करता है। हाल के मंत्रिमंडलीय निर्णय के आलोक में, इस मॉडल का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि संगठनात्मक निरंतरता और कार्मिक-सुधार के बीच संतुलन बनाने के लिए किन संस्थागत उपायों की आवश्यकता है। (15 Marks)
रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON:
1. भूमिका: अग्निपथ योजना की घोषणा (जून 2022) और मंत्रिमंडल द्वारा 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सेवा तथा शेष 75 प्रतिशत को दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा का विकल्प देने का निर्णय; चार वर्ष के मूल्यांकन के आधार पर निर्णय का उल्लेख।
2. संवैधानिक ढांचा: अनुच्छेद 33 (संसद द्वारा सशस्त्र बलों के मूल अधिकारों पर विधि से सीमा); संघ सूची की प्रविष्टि 1 (भारत की रक्षा) और प्रविष्टि 2 (नौसेना, सेना, वायु सेना); अनुच्छेद 73 (संघ की कार्यपालिक शक्ति का विस्तार); अनुच्छेद 75(3) (सामूहिक उत्तरदायित्व) के माध्यम से नीति-निर्णय की वैधता।
3. योजना के पक्ष में तर्क: युवा और अपेक्षाकृत कम आयु वाले सैनिकों से सेना की औसत आयु कम रखने का लक्ष्य; रक्षा बलों द्वारा शारीरिक स्वास्थ्य, अनुशासन और तकनीकी दक्षता में उत्कृष्ट प्रदर्शन का आकलन; भर्ती का दायरा बढ़ना, भर्ती प्रक्रिया का मानकीकरण और महिलाओं के लिए अवसर।
4. आलोचनात्मक पक्ष: स्थायी सैनिकों की संख्या और अनुभव-संचय पर प्रभाव; पेंशन-व्यय में बचत बनाम सेवानिवृत्ति पश्चात् सामाजिक सुरक्षा; कारगिल समीक्षा समिति (1999) की सिफारिशों के अनुरूप सैन्य कार्मिक सुधार की आवश्यकता, तथा शेखतकर समिति (2016-17) द्वारा रक्षा मंत्रालय के संगठनात्मक पुनर्गठन पर दिए गए सुझावों से तुलना।
5. संतुलित दृष्टिकोण: सेवा निधि, वरिष्ठता-लाभ और उच्च पारिश्रमिक जैसे प्रोत्साहनों की भूमिका; संसदीय स्थायी समिति (रक्षा) की निगरानी; नीति-मूल्यांकन के लिए पारदर्शी आंकड़ों और स्वतंत्र समीक्षा की आवश्यकता।
6. निष्कर्ष: योजना के दीर्घकालिक प्रभाव का मूल्यांकन आंकड़ों पर आधारित हो; संवैधानिक मर्यादा, सैन्य आवश्यकता और कार्मिक-कल्याण के बीच संतुलित नीति-निर्माण आवश्यक है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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