06 Nov INDIA AND MYANMAR COMMENCE INAUGURAL TRI-SERVICES JOINT HADR EXERCISE ‘RAHAT MITRA’
✎ HADR में सैन्य सहायता नागरिक प्रशासन के सहायक के रूप में 'अंतिम विकल्प' सिद्धांत और ओस्लो दिशानिर्देशों के अनुरूप दी जाती है, जबकि भारत-म्यांमार 'राहत मित्र' अभ्यास 'एक्ट ईस्ट' और SAGAR दृष्टि के तहत पहला त्रि-सेवा HADR सहयोग है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (पड़ोसी देशों के साथ द्विपक्षीय रक्षा सहयोग, भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका) | GS Paper III — आपदा प्रबंधन (आपदा जोखिम न्यूनीकरण, आपदा प्रबंधन में सशस्त्र बलों की भूमिका, सेंडाई फ्रेमवर्क) | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा एवं रक्षा (सशस्त्र बलों का संयुक्त प्रशिक्षण और त्रि-सेवा समन्वय)
- Prelims: मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR), त्रि-सेवा अभ्यास (Tri-Services Exercise): थलसेना, नौसेना और वायुसेना का संयुक्त प्रशिक्षण, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), सेंडाई फ्रेमवर्क फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (2015–2030), सागर (SAGAR) सिद्धांत और कलादान बहु-आयामी पारगमन परिवहन परियोजना, आसियान आपदा प्रबंधन केंद्र (AHA Centre), जकार्ता, ओस्लो दिशानिर्देश (Oslo Guidelines) — विदेशी सैन्य संसाधनों का आपदा राहत में उपयोग
- Essay: आपदा प्रबंधन में सशस्त्र बलों की भूमिका: सहायता से साझेदारी तक, पड़ोसी देशों के साथ रक्षा कूटनीति और मानवीय सहयोग: क्षेत्रीय स्थिरता का आधार
त्वरित पुनरावृत्ति: HADR में सैन्य सहायता नागरिक प्रशासन के सहायक के रूप में ‘अंतिम विकल्प’ सिद्धांत और ओस्लो दिशानिर्देशों के अनुरूप दी जाती है, जबकि भारत-म्यांमार ‘राहत मित्र’ अभ्यास ‘एक्ट ईस्ट’ और SAGAR दृष्टि के तहत पहला त्रि-सेवा HADR सहयोग है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत और म्यांमार ने अपने-अपने त्रि-सेवा बलों के बीच पहले संयुक्त मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभ्यास ‘राहत मित्र’ का आरंभ किया है। यह अभ्यास दोनों देशों के रक्षा सहयोग में एक नया पड़ाव है, क्योंकि इसमें थलसेना, नौसेना और वायुसेना तीनों सेवाएँ एक साथ आपदा-प्रतिक्रिया के परिदृश्यों पर काम करेंगी। इसका उद्देश्य आपदा की स्थिति में समन्वित खोज-बचाव, राहत सामग्री के वितरण और परिवहन की व्यावहारिक क्षमता का विकास करना है। भारत के लिए यह ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में पड़ोसी देशों के साथ विश्वास-निर्माण की दिशा में भी महत्त्वपूर्ण है। प्रेस विज्ञप्ति में अभ्यास के स्थान, अवधि और भागीदारी के विस्तृत आँकड़े उपलब्ध न होने की स्थिति में परीक्षा की दृष्टि से इसे मुख्यतः संस्थागत और नीतिगत संदर्भ में समझना उचित है।
पृष्ठभूमि
- मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) की अवधारणा के अंतर्गत भूकंप, बाढ़, चक्रवात और महामारी जैसी आपदाओं में राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए सैन्य एवं नागरिक संसाधनों का समन्वित उपयोग होता है। भारत में आपदा प्रबंधन का वैधानिक ढाँचा आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 पर आधारित है, जिसके तहत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) कार्य करते हैं।
- भारत में नागरिक प्रशासन के सहायक के रूप में सशस्त्र बलों की भूमिका सामान्यतः ‘अंतिम विकल्प’ के सिद्धांत पर आधारित है, अर्थात् जब नागरिक तंत्र की क्षमता अपर्याप्त हो, तभी सैन्य सहायता ली जाती है। इस सिद्धांत के कारण सैन्य अभ्यास नागरिक प्रशासन के साथ समन्वय पर विशेष बल देते हैं।
- सेंडाई फ्रेमवर्क फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (2015–2030) को 2015 में जापान के सेंडाई में आयोजित तृतीय संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मेलन में अपनाया गया। इसका केंद्रीय बिंदु आपदा के बाद प्रतिक्रिया के बजाय आपदा-पूर्व जोखिम न्यूनीकरण और क्षमता-निर्माण पर है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग एक प्रमुख स्तंभ है।
- भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और सागर (SAGAR — सभी के लिए सुरक्षा और विकास) सिद्धांत के अंतर्गत म्यांमार भारत के पूर्वी पड़ोस और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण साझेदार है। कलादान बहु-आयामी पारगमन परिवहन परियोजना इसी संपर्क-आधारित सहयोग का उदाहरण है।
- भारत ने म्यांमार में मार्च 2025 के भूकंप के समय ‘ऑपरेशन ब्रह्म’ के अंतर्गत राहत सामग्री और बचाव सहायता भेजी थी। ऐसे वास्तविक अनुभव संयुक्त अभ्यासों की आवश्यकता और प्रासंगिकता को सुदृढ़ करते हैं।
मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) क्या है?
- HADR (Humanitarian Assistance and Disaster Relief) से आशय उन सैन्य और असैन्य गतिविधियों से है जो प्राकृतिक या मानव-जनित आपदा के समय जीवन रक्षा, राहत सामग्री वितरण, चिकित्सा सहायता और आधारभूत संरचना की बहाली के लिए की जाती हैं।
- HADR को सामान्यतः दो चरणों में देखा जाता है: तत्काल प्रतिक्रिया (खोज-बचाव, आपातकालीन चिकित्सा, भोजन और आश्रय) और दीर्घकालिक सहायता (पुनर्वास और पुनर्निर्माण)।
- सशस्त्र बलों की क्षमता विशेष रूप से परिवहन (वायु और समुद्री), संचार, इंजीनियरिंग और संगठित संरचना में निहित होती है, जिसके कारण वे आपदा के पहले घंटों में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।
- त्रि-सेवा अभ्यास में थलसेना, नौसेना और वायुसेना का एक साथ प्रशिक्षण होता है, जिससे सेवाओं के बीच समन्वय, एकीकृत कमान और संयुक्त संचालन की क्षमता विकसित होती है। भारत में यह संयुक्त संचालन की दिशा में रक्षा सुधारों का भी हिस्सा है।
- ओस्लो दिशानिर्देश (1994) विदेशी सैन्य संसाधनों के आपदा राहत में उपयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक प्रदान करते हैं। इनमें यह सिद्धांत निहित है कि सैन्य सहायता मानवीय सिद्धांतों के अनुरूप, प्रभावित देश की सहमति से और नागरिक एजेंसियों के समन्वय में होनी चाहिए।
- क्षेत्रीय स्तर पर आसियान का आपदा प्रबंधन केंद्र (AHA Centre) और आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) के अंतर्गत HADR विशेषज्ञ कार्य समूह जैसे मंच सहयोग के ढाँचे प्रदान करते हैं।
- बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवात और भूकंप जैसी आपदाओं की आवृत्ति को देखते हुए, साझा HADR क्षमता पड़ोसी देशों के साथ सुरक्षा-सहयोग का व्यावहारिक आधार बनती है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| अभ्यास का स्वरूप | मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (Humanitarian Assistance and Disaster Relief – HADR) पर केंद्रित संयुक्त अभ्यास, जिसमें भारत और म्यांमार के सशस्त्र बल साझा राहत-अभियान का प्रशिक्षण लेते हैं। |
| त्रि-सेवा भागीदारी | थल सेना, नौसेना और वायु सेना तीनों की भागीदारी से यह अभ्यास समन्वित सैन्य-नागरिक आपदा प्रतिक्रिया की क्षमता को परखता है। यह भारत की संयुक्त (Joint) युद्ध एवं सहायता संरचना के विकास से जुड़ा है। |
| पहला संस्करण | इसे दोनों देशों के बीच पहला त्रि-सेवा HADR अभ्यास बताया गया है। इसलिए यह द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में एक नया आयाम जोड़ता है और भविष्य के अभ्यासों के लिए आधार तैयार करता है। |
| द्विपक्षीय संबंध | म्यांमार भारत का निकटवर्ती पड़ोसी है और दोनों देशों के बीच लगभग 1,643 किलोमीटर लंबी स्थलीय सीमा है। ऐसे अभ्यास सीमा-पार सहयोग और आपसी विश्वास को मज़बूत करते हैं। |
| नीतिगत संदर्भ | भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ (Act East Policy) के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ रक्षा, सुरक्षा और सामुद्रिक सहयोग को प्राथमिकता दी गई है। यह अभ्यास उसी ढाँचे में एक व्यावहारिक कदम है। |
महत्व
सामरिक और कूटनीतिक
- भारत-म्यांमार रक्षा संबंधों में सहयोग के नए और व्यावहारिक क्षेत्र का विस्तार होता है।
- एक्ट ईस्ट नीति के अंतर्गत दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ विश्वास-निर्माण के उपायों को सशक्त करता है।
- बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोगात्मक सुरक्षा-वातावरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मानवीय और आपदा प्रबंधन
- आपदा के समय सैन्य संसाधनों के त्वरित और समन्वित उपयोग की व्यावहारिक तैयारी होती है।
- खोज एवं बचाव, चिकित्सा सहायता और राहत-सामग्री के वितरण में दोनों देशों की क्षमताएँ साझा होती हैं।
- सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़, चक्रवात और भूकंप जैसी आपदाओं के प्रति संयुक्त प्रतिक्रिया-तंत्र मज़बूत होता है।
परिचालन और संस्थागत
- त्रि-सेवा समन्वय से सशस्त्र बलों में अंतर-सेवा (Inter-Services) तालमेल और संयुक्त नियोजन का अनुभव मिलता है।
- विभिन्न सेवाओं के बीच संचार, लॉजिस्टिक्स और कमांड-नियंत्रण की प्रक्रियाएँ परखी जाती हैं।
- भविष्य में बहुपक्षीय HADR अभ्यासों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) की समझ विकसित होती है।
चुनौतियाँ
1. नागरिक-सैन्य समन्वय
- आपदा राहत में सैन्य बलों और नागरिक एजेंसियों के बीच भूमिकाओं का स्पष्ट विभाजन आवश्यक होता है।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य सहायता के लिए मानवीय सिद्धांतों और समन्वय-दिशानिर्देशों का पालन करना होता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आपदा प्रबंधन; GS-2: सरकार के विभिन्न अंगों के बीच समन्वय
2. संप्रभुता और सीमा-प्रबंधन
- सीमा-पार सैन्य गतिविधियों में मेज़बान देश की संप्रभुता और प्रशासनिक अधिकारों का सम्मान अनिवार्य है।
- सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा-चुनौतियों के बीच सहयोग को संतुलित रखना आवश्यक होता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आंतरिक सुरक्षा और सीमा-प्रबंधन; GS-2: भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंध
3. म्यांमार की आंतरिक परिस्थितियाँ
- पड़ोसी देश में राजनीतिक अस्थिरता के कारण द्विपक्षीय सहयोग की निरंतरता पर अनिश्चितता बनी रहती है।
- सहयोग का दायरा केवल सरकारों के बीच संबंधों तक सीमित न रहे, इसके लिए व्यापक जन-संपर्क और विश्वास आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंध; GS-2: भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों का प्रभाव
4. अंतर-सेवा और अंतर-संचालनीयता
- विभिन्न देशों की सेनाओं के बीच प्रक्रियाओं, भाषा और उपकरणों में भिन्नता से परिचालन में बाधा आ सकती है।
- साझा प्रशिक्षण और मानकीकृत प्रक्रियाओं के बिना संयुक्त कार्रवाई की प्रभावशीलता सीमित रहती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आंतरिक सुरक्षा के लिए सुरक्षा बलों की भूमिका; GS-3: रक्षा तैयारी
5. क्षेत्रीय प्रभाव-संतुलन
- दक्षिण-पूर्व एशिया में बाहरी शक्तियों की बढ़ती उपस्थिति से रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनता है।
- भारत को अपनी सहयोगात्मक पहलों को क्षेत्रीय स्थिरता और पारदर्शिता के ढाँचे में प्रस्तुत करना होता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंध; GS-2: भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों का प्रभाव
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| नागरिक-सैन्य समन्वय | आपदा के समय सैन्य और नागरिक एजेंसियों की भूमिकाएँ स्पष्ट न हों तो राहत-कार्य में दोहराव या देरी हो सकती है। |
| संप्रभुता और सीमा-प्रबंधन | सीमा-पार सैन्य गतिविधियों में मेज़बान देश की संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करना होता है। |
| म्यांमार की आंतरिक स्थिति | राजनीतिक अस्थिरता से द्विपक्षीय सहयोग की दीर्घकालिक निरंतरता प्रभावित हो सकती है। |
| अंतर-संचालनीयता | भिन्न प्रक्रियाओं और उपकरणों के कारण संयुक्त अभियानों में तकनीकी और परिचालन बाधाएँ आ सकती हैं। |
| क्षेत्रीय प्रभाव-संतुलन | दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच पहलों की पारदर्शिता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है। |
आगे की राह
- अभ्यास के बाद सीखे गए सबक (Lessons Learnt) का दस्तावेजीकरण कर भविष्य के संस्करणों में लागू किया जाए।
- सैन्य और नागरिक आपदा प्रबंधन एजेंसियों के बीच संयुक्त प्रशिक्षण और समन्वय-तंत्र को संस्थागत रूप दिया जाए।
- साझा मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) और संचार-प्रोटोकॉल पर द्विपक्षीय सहमति को और स्पष्ट किया जाए।
- सीमावर्ती राज्यों और स्थानीय प्रशासन को अभ्यास की योजना और सहायता-व्यवस्था में शामिल किया जाए।
- मानवीय सहायता के सिद्धांतों के अनुरूप तटस्थता, निष्पक्षता और मेज़बान देश की सहमति को सदैव प्राथमिकता दी जाए।
- आसियान और बिम्सटेक (BIMSTEC) जैसे बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से क्षेत्रीय आपदा-प्रतिक्रिया नेटवर्क को विस्तार दिया जाए।
- भारतीय आपदा प्रबंधन संस्थाओं की क्षमता-वृद्धि और सैन्य-नागरिक समन्वय पर नियमित समीक्षा की व्यवस्था की जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (Humanitarian Assistance and Disaster Relief: HADR) · त्रि-सेवा समन्वय (Tri-Services Coordination) · सैन्य कूटनीति (Military Diplomacy) · आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) · राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) · सेंडाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework) · पूर्वी दिशा में देखो नीति (Act East Policy) · नागरिक-सैन्य समन्वय (Civil-Military Coordination) · ओस्लो दिशानिर्देश (Oslo Guidelines) · संप्रभुता और मानवीय पहुँच का संतुलन · क्षेत्रीय अंतर-संचालनीयता (Regional Interoperability)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 51: अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 1: देश की रक्षा का विषय
अवधारणा प्रवाह
भारत और म्यांमार के बीच रक्षा-सहयोग की प्रतिबद्धता → पहले त्रि-सेवा संयुक्त HADR अभ्यास ‘राहत मित्र’ का आरंभ → तीनों सेवाओं का समन्वित प्रशिक्षण: खोज, बचाव, चिकित्सा और राहत-वितरण → सैन्य-नागरिक समन्वय, संचार और लॉजिस्टिक्स की व्यावहारिक परख → अनुभव और सीखे गए सबक का उपयोग भविष्य के अभ्यासों और क्षेत्रीय आपदा-प्रतिक्रिया में → द्विपक्षीय विश्वास, एक्ट ईस्ट नीति और क्षेत्रीय स्थिरता को सुदृढ़ीकरण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं।
2. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की स्थापना आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 44 के अंतर्गत की गई है।
3. सेंडाई फ्रेमवर्क एक विधिक रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: NDMA की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। कथन 2 सही है: NDRF का गठन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 44 के अंतर्गत हुआ है। कथन 3 गलत है: सेंडाई फ्रेमवर्क (2015-2030) एक स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी ढाँचा है, जिसे जापान के सेंडाई में आयोजित तृतीय संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मेलन में अपनाया गया था।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): नौसेना, थलसेना और वायुसेना के संयुक्त मानवीय सहायता अभ्यास पड़ोसी देशों के बीच आपदा के समय क्षेत्रीय प्रतिक्रिया क्षमता को बढ़ाते हैं।
कारण (R): आपदा प्रतिक्रिया में रसद, संचार और कमान संरचनाओं का विभिन्न सेवाओं और देशों के बीच समन्वय आवश्यक होता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — (A) और (R) दोनों सही हैं। अंतर-सेवा और अंतर-देश अभ्यास से कमान, संचार और रसद प्रक्रियाओं में अंतर-संचालनीयता (Interoperability) बढ़ती है, जो वास्तविक आपदा में प्रतिक्रिया क्षमता का आधार है। अतः (R), (A) की सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलन पर विचार कीजिए:
सूची-I (संस्था/समझौता)
A. AADMER
B. AHA केंद्र
C. सेंडाई फ्रेमवर्क
D. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF)
सूची-II (विशेषता)
1. आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 44 के अंतर्गत गठित
2. मुख्यालय जकार्ता में
3. वर्ष 2015 में जापान के सेंडाई में अपनाया गया
4. आसियान आपदा प्रबंधन एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया समझौता
सही सुमेलन चुनिए:
- A-4, B-2, C-3, D-1
- A-2, B-4, C-1, D-3
- A-1, B-3, C-2, D-4
- A-3, B-1, C-4, D-2
उत्तर: A-4, B-2, C-3, D-1 — A (AADMER) का पूरा नाम ASEAN Agreement on Disaster Management and Emergency Response है, अतः A-4। B (AHA केंद्र, ASEAN Coordinating Centre for Humanitarian Assistance) का मुख्यालय जकार्ता में है, अतः B-2। C (सेंडाई फ्रेमवर्क) 2015 में सेंडाई में अपनाया गया, अतः C-3। D (NDRF) का गठन धारा 44 के अंतर्गत हुआ, अतः D-1।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत और म्यांमार द्वारा आरंभ किया गया त्रि-सेवा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभ्यास ‘राहत मित्र’ पड़ोस-नीति में सैन्य बलों की भूमिका के एक नए आयाम को रेखांकित करता है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि आपदा राहत में विदेशी सैन्य संपत्तियों के उपयोग के लिए किन संस्थागत और विधिक सुरक्षोपायों की आवश्यकता होती है। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की संरचना (मॉडल उत्तर-कंकाल):
1. परिचय: ‘राहत मित्र’ को भारत-म्यांमार सहयोग में पहला त्रि-सेवा HADR अभ्यास मानते हुए, म्यांमार के साथ लगभग 1,643 किलोमीटर लंबी स्थलीय सीमा और बंगाल की खाड़ी/अंडमान सागर में समुद्री निकटता का उल्लेख करें।
2. पड़ोस-नीति का संदर्भ: पूर्वी दिशा में देखो नीति (Act East Policy) और कलादान बहु-आयामी परिवहन परियोजना जैसे संपर्क-ढाँचे; बिम्सटेक (BIMSTEC) में आपदा प्रबंधन सहयोग। सैन्य-कूटनीति के रूप में विश्वास-निर्माण, अंतर-संचालनीयता और रक्षा-उद्योग से परे ‘सॉफ्ट पावर’ का तर्क।
3. समालोचनात्मक पक्ष: सेना की प्रतिक्रिया-गति और परिवहन क्षमता बनाम नागरिक नेतृत्व की प्राथमिकता; सेना के अधिक दिखने से मेज़बान देश की संप्रभुता-संवेदनशीलता; आपदा प्रतिक्रिया का सैन्यीकरण होने का खतरा; मानवीय सिद्धांतों (मानवता, निष्पक्षता, तटस्थता) पर प्रश्न।
4. भारत का घरेलू ढाँचा: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA, अध्यक्ष: प्रधानमंत्री), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA), और धारा 44 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF); राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (2019)। सैन्य बलों की भूमिका ‘सहायक’ (aid to civil authority) की है।
5. अंतरराष्ट्रीय मानक: सेंडाई फ्रेमवर्क (2015-2030) की चार प्राथमिकताएँ (जोखिम की समझ, शासन का सुदृढ़ीकरण, लचीलेपन में निवेश, तैयारी में वृद्धि); ओस्लो दिशानिर्देश (विदेशी सैन्य एवं सिविल रक्षा संपत्तियों के उपयोग पर) — अनुरोध-आधारित सहायता, मेज़बान देश की सहमति, और अंतिम उपाय (last resort) का सिद्धांत। आसियान का AADMER और AHA केंद्र (जकार्ता) क्षेत्रीय ढाँचे के रूप में।
6. ‘ऑपरेशन दोस्त’ (2023, तुर्की-सीरिया भूकंप) जैसे उदाहरणों से भारतीय बलों की अंतरराष्ट्रीय राहत-क्षमता का प्रमाण; सहमति, समन्वय और पारदर्शिता।
7. संतुलित निष्कर्ष: सैन्य बल अनिवार्य पूरक हैं, पर नागरिक प्राधिकरण, मेज़बान सहमति और मानवीय सिद्धांतों के भीतर रहकर ही सैन्य सहायता वैध और प्रभावी होती है; ‘राहत मित्र’ जैसे अभ्यास को विश्वास-निर्माण के साधन के रूप में देखना।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- INDIA AND MYANMAR COMMENCE INAUGURAL TRI-SERVICES JOINT HADR EXERCISE ‘RAHAT MITRA’ - November 6, 2026
- Semicon 2.0 Web Portal Launched; 12 Applicants Approved - November 6, 2026
- झारखंड HC: भाइयों की खरीदी जमीन में बहन का हिस्सा नहीं - November 6, 2026

No Comments