07 Nov पटना में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन: नगर निगम की नई योजना
✎ नगरीय ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संविधान के अनुच्छेद 243W और बारहवीं अनुसूची के तहत नगरपालिका का दायित्व है, और इसकी दक्षता स्रोत पर पृथक्करण, सेवा मॉडल की जवाबदेही तथा GPS आधारित निगरानी पर निर्भर करती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन (स्थानीय शासन और नगरपालिकाओं की भूमिका, 74वाँ संविधान संशोधन) | GS Paper III — पर्यावरण (ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (नगरीय वित्त और सेवा प्रदायगी में दक्षता)
- Prelims: अनुच्छेद 243W और बारहवीं अनुसूची, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016, स्रोत पर कचरा पृथक्करण (Segregation at Source), स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) (Swachh Bharat Mission-Urban), स्वच्छ सर्वेक्षण (Swachh Survekshan), नगर निगम और राज्य वित्त आयोग (अनुच्छेद 243I और 243Y), विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility), GPS आधारित वाहन निगरानी
- Essay: नगरीय सफाई: स्वच्छ शहर, स्वस्थ नागरिक — स्थानीय निकायों की क्षमता और जवाबदेही, सेवा प्रदायगी में दक्षता: सार्वजनिक सेवाओं का निजी भागीदारी और तकनीक के साथ संयोजन
त्वरित पुनरावृत्ति: नगरीय ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संविधान के अनुच्छेद 243W और बारहवीं अनुसूची के तहत नगरपालिका का दायित्व है, और इसकी दक्षता स्रोत पर पृथक्करण, सेवा मॉडल की जवाबदेही तथा GPS आधारित निगरानी पर निर्भर करती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
पटना नगर निगम ने शहर में कचरा उठाव की व्यवस्था बदलने की योजना बनाई है, जिसके तहत अलग-अलग अंचलों की जिम्मेदारी दो एजेंसियों को सौंपी जाएगी। नगर निगम के अनुसार इससे सालाना 24 करोड़ रुपये से अधिक की बचत का अनुमान है। साथ ही सफाईकर्मियों की संख्या बढ़ाने और कचरा वाहनों की GPS तथा रियल टाइम ट्रैकिंग से निगरानी का प्रस्ताव है। यह बदलाव दीपावली और छठ जैसे त्योहारों के दौरान चल रहे विशेष सफाई अभियान, छठ घाटों की डीप क्लीनिंग और स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत के समानांतर सामने आया है, इसलिए यह शहरी सेवा प्रबंधन के व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
पृष्ठभूमि
- संविधान के 74वें संशोधन (1992) द्वारा नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा मिला। अनुच्छेद 243W के तहत राज्य विधानमंडल नगरपालिकाओं को शक्तियाँ और दायित्व सौंप सकते हैं। बारहवीं अनुसूची की ग्यारहवीं मद में ‘लोक स्वास्थ्य, स्वच्छता संरक्षण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन’ शामिल है, जो नगरपालिकाओं का प्रमुख कार्य है।
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अंतर्गत स्रोत पर कचरे का पृथक्करण, गीले और सूखे कचरे का अलग संग्रह, परिवहन, प्रसंस्करण और निपटान की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों पर डाली गई है। इन नियमों में विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व का प्रावधान भी है।
- स्वच्छ भारत मिशन (शहरी), जिसे आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs) द्वारा चलाया जाता है, शहरी स्वच्छता के ढांचागत और व्यवहारिक दोनों पहलुओं पर केंद्रित है। स्वच्छ सर्वेक्षण इसके प्रदर्शन की वार्षिक तुलना और रैंकिंग का माध्यम है।
- शहरी स्थानीय निकायों में सफाई सेवा का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक रूप से नगर निगम के अपने कर्मचारियों और वाहनों से दिया जाता रहा है। कई शहरों में इसे ठेका आधारित या बहु-एजेंसी मॉडल से चलाने का प्रयोग हुआ है, जिसमें लागत, जवाबदेही और सेवा स्तर के बीच संतुलन बनाना चुनौती रहता है।
- बड़े शहरों में कचरा उठाव में वाहनों की आवाजाही, ईंधन और रखरखाव पर होने वाला व्यय नगरीय निकायों के बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसलिए रूट अनुकूलन, GPS निगरानी और डेटा आधारित मॉनिटरिंग को सेवा दक्षता बढ़ाने का उपकरण माना जाता है।
नगरीय ठोस अपशिष्ट प्रबंधन क्या है?
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थानों से निकले कचरे का संग्रह, परिवहन, पृथक्करण, प्रसंस्करण और अंतिम निपटान शामिल है।
- यह नगरपालिका का संवैधानिक दायित्व है, क्योंकि ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन’ बारहवीं अनुसूची में स्थानीय निकायों के कार्यों में दर्ज है।
- कचरा उठाव (Collection) इस श्रृंखला का पहला चरण है। इसकी दक्षता इस पर निर्भर करती है कि मार्ग योजना, वाहनों की संख्या, कर्मचारी बल और निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
- सेवा प्रदायगी के लिए विभागीय व्यवस्था, ठेका आधारित व्यवस्था और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) जैसे मॉडल अपनाए जाते हैं। किसी भी मॉडल में अनुबंध की शर्तें, प्रदर्शन मापदंड और नियमित निरीक्षण आवश्यक हैं।
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 स्रोत पर पृथक्करण पर बल देते हैं, ताकि जैविक कचरे का कम्पोस्टिंग और बायोमेथेनेशन तथा अकार्बनिक कचरे का पुनर्चक्रण आसान हो सके।
- GPS और रियल टाइम ट्रैकिंग से वाहनों के मार्ग, फेरों की संख्या और कार्य समय की निगरानी होती है। इससे सेवा में पारदर्शिता आती है और शिकायत निवारण सुदृढ़ होता है।
- त्योहारों जैसे अल्पकालिक अवसरों पर कचरे की मात्रा बढ़ती है, इसलिए दो पालियों में कार्य, अतिरिक्त वाहन और डीप क्लीनिंग जैसे उपाय अस्थायी मांग-प्रबंधन के रूप में अपनाए जाते हैं।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से जल-जनित और वेक्टर-जनित रोगों की रोकथाम के लिए कचरा निपटान और जल-स्थलों की सफाई अनिवार्य है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्त्व |
|---|---|
| विकेंद्रित कार्य-विभाजन | शहर के अलग-अलग अंचलों में कचरा उठाव की जिम्मेदारी दो एजेंसियों को सौंपने से जवाबदेही क्षेत्र-वार तय होगी और सेवा में एकरूपता आएगी। |
| सालाना बचत का अनुमान | नगर निगम के अनुसार सालाना 24 करोड़ रुपये से अधिक की बचत का अनुमान है, जो नगरीय वित्त प्रबंधन में दक्षता का संकेत है। |
| सफाईकर्मियों की संख्या में वृद्धि | जनशक्ति बढ़ाने से दैनिक कचरा संग्रह और सड़क सफाई की क्षमता बढ़ती है, विशेषकर उच्च अपशिष्ट वाले त्योहारी दिनों में। |
| GPS और वास्तविक समय ट्रैकिंग | वैश्विक स्थिति निर्धारण प्रणाली (GPS) से कचरा वाहनों की आवाजाही पर निगरानी संभव होती है, जिससे ठेकेदारी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ती है। |
| दो पालियों में कचरा उठाव | सुबह और शाम दोनों पालियों में संग्रह से त्योहारों के दौरान कचरे का जमाव कम होता है और जन-स्वास्थ्य जोखिम घटता है। |
| डोर-टू-डोर संग्रह और अतिरिक्त वाहन | घर-घर से कचरा संग्रह ठोस अपशिष्ट के स्रोत पर पृथक्करण की नींव है, और अतिरिक्त वाहन इस सेवा का विस्तार करते हैं। |
महत्व
आर्थिक महत्त्व
- सालाना 24 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित बचत नगर निगम के संसाधनों के बेहतर उपयोग का उदाहरण है।
- सेवा-वितरण में निजी एजेंसियों की भागीदारी से सार्वजनिक धन के उपयोग में मूल्य-आधारित (value for money) दृष्टिकोण अपनाया जाता है।
- बचत की राशि को अन्य नगरीय ढांचागत कार्यों में लगाया जा सकता है, जिससे नगरीय आर्थिक संवृद्धि को सहायता मिलती है।
प्रशासनिक महत्त्व
- जीपीएस और वास्तविक समय ट्रैकिंग से ई-गवर्नेंस और डिजिटल निगरानी का व्यावहारिक प्रयोग होता है।
- क्षेत्र-वार एजेंसी-आवंटन से नगर निगम की निगरानी और दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया स्पष्ट होती है।
पर्यावरणीय और स्वास्थ्य महत्त्व
- नियमित कचरा उठाव से खुले में कचरा जलाने और जल-जमाव की स्थिति घटती है, जो वायु और जल प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ा है।
- घाटों की डीप क्लीनिंग और ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव से जल-जनित और संक्रामक रोगों के प्रसार की रोकथाम में सहायता मिलती है।
सामाजिक और सांस्कृतिक महत्त्व
- छठ घाटों और संपर्क सड़कों की सफाई से श्रद्धालुओं की सुविधा और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
- 6,000 से अधिक नई स्ट्रीट लाइट और 33,000 से अधिक मरम्मत किए गए प्रकाश उपकरण रात में आवागमन की सुरक्षा बढ़ाते हैं।
चुनौतियाँ
1. कचरा उठाव में सेवा-गुणवत्ता की निगरानी
- दो एजेंसियों के बीच सेवा-स्तर के मानक समान रखना और उनके कार्य का मूल्यांकन करना कठिन हो सकता है।
- जीपीएस डेटा होने के बावजूद उसका नियमित विश्लेषण और कार्रवाई में उपयोग सुनिश्चित करना चुनौती है।
- ठेकेदार आधारित व्यवस्था में जवाबदेही की स्पष्ट रूपरेखा और दंड-प्रावधान आवश्यक हैं।
यूपीएससी लिंक: शासन में पारदर्शिता, ई-गवर्नेंस और सेवा-वितरण में जवाबदेही (GS-2)
2. ठोस अपशिष्ट का पृथक्करण और प्रसंस्करण
- कचरा उठाव में तेजी के बावजूद स्रोत पर गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण सुनिश्चित न हो तो पुनर्चक्रण और निपटान की लागत बढ़ती है।
- संग्रहित कचरे का वैज्ञानिक निपटान, जैसे कंपोस्टिंग और लैंडफिल प्रबंधन, इस योजना का अगला चरण होना चाहिए।
- अपशिष्ट के अंतिम निपटान का ढांचा स्पष्ट न हो तो संग्रह की सफलता अधूरी रहती है।
यूपीएससी लिंक: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण (GS-3)
3. नगरीय वित्त और सेवाओं का निजीकरण
- बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता से नगर निगम की स्थायी प्रशासनिक क्षमता पर प्रश्न उठ सकता है।
- अनुबंध की शर्तें और भुगतान-व्यवस्था यदि कमजोर हों तो अपेक्षित बचत वास्तविक नहीं हो पाती।
- सफाईकर्मियों की भर्ती और उनके सेवा-शर्तों पर स्पष्ट नीति आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: नगरीय स्थानीय शासन की वित्तीय स्थिति और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (GS-2)
4. त्योहारी भीड़ और मौसमी दबाव
- दीपावली और छठ जैसे अवसरों पर कचरे की मात्रा में अचानक वृद्धि होती है, जिससे अस्थायी व्यवस्था पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।
- घाटों पर भीड़ प्रबंधन, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के साथ सफाई का समन्वय आवश्यक है।
- अस्थायी लाइटों और अस्थायी ढांचों के बाद उनके निपटान की व्यवस्था भी चुनौती बनती है।
यूपीएससी लिंक: आपदा और सार्वजनिक सुरक्षा प्रबंधन में स्थानीय प्रशासन की भूमिका (GS-2)
5. सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता
- कचरे का लंबे समय तक जमाव मच्छर-जनित और जल-जनित रोगों को बढ़ावा देता है।
- ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव अस्थायी उपाय है, जबकि दीर्घकालिक समाधान स्रोत पर कचरा-नियंत्रण है।
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता की नगरीय चुनौतियाँ (GS-2 और GS-3)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सेवा-मानक की एकरूपता | दो अलग एजेंसियों के बीच कार्य-गुणवत्ता में अंतर से शहर के विभिन्न भागों में असमान सफाई हो सकती है। |
| वास्तविक बचत का सत्यापन | 24 करोड़ रुपये से अधिक की बचत अनुमान है; वास्तविक बचत के लिए लेखा-परीक्षण और भुगतान-व्यवस्था की पारदर्शिता आवश्यक है। |
| पृथक्करण और निपटान | संग्रह के बाद कचरे का पृथक्करण और वैज्ञानिक निपटान सुनिश्चित न होने पर समस्या केवल स्थानांतरित होती है। |
| डेटा का उपयोग | जीपीएस और ट्रैकिंग से प्राप्त आंकड़ों का नियमित विश्लेषण न होने पर तकनीकी निवेश का लाभ सीमित रहता है। |
| मौसमी दबाव | त्योहारों के दौरान अतिरिक्त वाहन और कर्मी बढ़ाने से लागत और प्रबंधन दोनों पर अस्थायी भार पड़ता है। |
| सफाईकर्मियों का कल्याण | बढ़ी हुई संख्या के साथ उनकी सुरक्षा, वेतन और कार्य-परिस्थितियों पर ध्यान देना आवश्यक है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) (Swachh Bharat Mission – Urban)
आगे की राह
- कचरा उठाव के लिए दोनों एजेंसियों के साथ स्पष्ट सेवा-स्तर समझौता (Service Level Agreement) तैयार कर मानक, समय-सीमा और दंड-प्रावधान तय किए जाएँ।
- जीपीएस और वास्तविक समय ट्रैकिंग के आंकड़ों को नगर निगम के सार्वजनिक डैशबोर्ड पर उपलब्ध कराकर नागरिक-निगरानी को बढ़ावा दिया जाए।
- बचत के दावे की स्वतंत्र लेखा-परीक्षा कराई जाए, ताकि अनुमानित और वास्तविक बचत का अंतर स्पष्ट हो सके।
- स्रोत पर ही गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण को अनिवार्य करने के लिए जागरूकता और प्रवर्तन दोनों सुनिश्चित किए जाएँ।
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुरूप कंपोस्टिंग, पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक लैंडफिल की व्यवस्था को संग्रह के साथ जोड़ा जाए।
- सफाईकर्मियों की भर्ती, सुरक्षा उपकरण और सेवा-शर्तों पर स्पष्ट नीति बनाई जाए, ताकि बढ़ी हुई संख्या के साथ कार्य-गुणवत्ता बनी रहे।
- त्योहारी और मौसमी दबाव के लिए पूर्व-योजना (contingency plan) बनाई जाए, जिसमें अतिरिक्त वाहनों और कर्मियों का पहले से आवंटन हो।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) · 74वाँ संविधान संशोधन (74th Constitutional Amendment) · नगर निगम (Municipal Corporation) की कार्यात्मक स्वायत्तता · स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 (Swachh Bharat Mission (Urban) 2.0) · स्रोत पर पृथक्करण (Segregation at Source) · विस्तारित उत्पादक दायित्व (Extended Producer Responsibility) · स्वच्छ सर्वेक्षण (Swachh Survekshan) · सेवा-स्तरीय मानक (Service Level Benchmarks) · आउटसोर्सिंग और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Outsourcing and Public-Private Partnership) · प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle) · जीपीएस आधारित वाहन निगरानी (GPS-based Vehicle Monitoring) · सफाई कर्मचारियों का कल्याण और सामाजिक सुरक्षा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 243W: नगरपालिकाओं को शक्तियाँ और कार्य सौंपने का राज्य का दायित्व
- बारहवीं अनुसूची: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नगरपालिका का कार्य-क्षेत्र
अवधारणा प्रवाह
शहर में बढ़ता कचरा और त्योहारों के दौरान अतिरिक्त अपशिष्ट का दबाव बढ़ना। → नगर निगम द्वारा कचरा उठाव का क्षेत्र-वार विभाजन कर दो एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपना। → जीपीएस और वास्तविक समय ट्रैकिंग से वाहनों की निगरानी और सेवा का डिजिटल सत्यापन। → सफाईकर्मियों की संख्या और दो पालियों के संचालन से संग्रह की दक्षता और नियमितता में वृद्धि। → अनुमानित रूप से सालाना 24 करोड़ रुपये से अधिक की बचत और उसका नगरीय सेवाओं में पुनर्निवेश। → स्वच्छ सड़कों, घाटों और बेहतर प्रकाश व्यवस्था से जन-स्वास्थ्य सुरक्षा और नागरिक संतोष में सुधार।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की बारहवीं अनुसूची में ‘लोक स्वास्थ्य, स्वच्छता संरक्षण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन’ विषय नगरपालिकाओं के कार्यों के रूप में सम्मिलित है।
2. अनुच्छेद 243-I के अंतर्गत राज्य वित्त आयोग के गठन का प्रावधान है।
3. संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन’ विषय सूचीबद्ध है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन बारहवीं अनुसूची की मद 6 में है। कथन 2 सही है: राज्य वित्त आयोग अनुच्छेद 243-I के तहत गठित होता है। कथन 3 गलत है: ग्यारहवीं अनुसूची में पंचायतों के कार्य सूचीबद्ध हैं, नगरपालिकाओं के नहीं।
Q2. नीचे दो कथन (A और R) दिए गए हैं।
कथन (A): नगर निगम द्वारा कचरा उठाव के लिए जीपीएस और वास्तविक-समय अनुवीक्षण अपनाने से सेवा की जवाबदेही बढ़ सकती है।
कारण (R): वाहनों की गतिविधि का सत्यापित डेटा ठेका-भुगतान को सेवा-प्रदर्शन से जोड़ने में सहायक होता है।
नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सही है, किंतु R गलत है
- A गलत है, किंतु R सही है
उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है — कचरा वाहनों की जीपीएस निगरानी से सेवा की भौतिक उपस्थिति और मार्ग-पालन का सत्यापन होता है, जिससे जवाबदेही बढ़ती है। यही सत्यापित डेटा भुगतान को प्रदर्शन से जोड़ने का आधार बनता है, अतः R, A की सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलन-सूची पर विचार कीजिए:
सूची-I (अवधारणा)
A. प्रदूषक भुगतान सिद्धांत
B. विस्तारित उत्पादक दायित्व
C. स्रोत पर पृथक्करण
D. स्वच्छ सर्वेक्षण
सूची-II (विवरण)
1. अपशिष्ट उत्पन्न करने वाला उसके उपचार और निपटान की लागत वहन करे
2. उत्पाद के निर्माता या आयातक का उत्पाद के जीवन-चक्र के अंत तक दायित्व
3. कचरे को उसके उत्पत्ति-स्थल पर ही श्रेणीवार अलग करना
4. आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा नगरों की स्वच्छता का वार्षिक मूल्यांकन
सही सुमेलन का चयन कीजिए:
- A-1, B-2, C-3, D-4
- A-2, B-1, C-3, D-4
- A-1, B-3, C-2, D-4
- A-4, B-2, C-3, D-1
उत्तर: A-1, B-2, C-3, D-4 — प्रदूषक भुगतान सिद्धांत का अर्थ है कि प्रदूषण करने वाला लागत वहन करे (A-1)। विस्तारित उत्पादक दायित्व में निर्माता का दायित्व उत्पाद के अंत तक रहता है (B-2)। स्रोत पर पृथक्करण उत्पत्ति-स्थल पर होता है (C-3)। स्वच्छ सर्वेक्षण का आयोजन आवास और शहरी कार्य मंत्रालय करता है (D-4)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ पटना नगर निगम द्वारा शहर के अलग-अलग अंचलों में कचरा उठाव का दायित्व दो एजेंसियों को सौंपने की योजना नगरपालिका सेवाओं के निजीकरण की ओर एक व्यावहारिक कदम है। आउटसोर्सिंग से लागत-कुशलता और सेवा-गुणवत्ता में सुधार की अपेक्षा की जाती है, किंतु इससे जवाबदेही और श्रमिक-कल्याण से जुड़े प्रश्न भी उठते हैं। 74वें संविधान संशोधन के संदर्भ में इस दृष्टिकोण का समीक्षात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि स्रोत पर पृथक्करण और स्थानीय नागरिक भागीदारी के बिना केवल ठेका-परिवर्तन और वाहन-निगरानी से शहरी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के दीर्घकालिक लक्ष्य किस सीमा तक प्राप्त हो सकते हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 243W के अंतर्गत राज्य विधानमंडल नगरपालिकाओं को बारहवीं अनुसूची के विषय सौंपता है, जिसमें मद 6 लोक स्वास्थ्य, स्वच्छता संरक्षण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन है। अनुच्छेद 243S के अंतर्गत वार्ड समितियों का प्रावधान स्थानीय भागीदारी का माध्यम है। अनुच्छेद 243I और 243Y नगरपालिका वित्त से जुड़े हैं। नीतिगत ढाँचा: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय) में स्रोत पर पृथक्करण, उपयोगकर्ता शुल्क और विस्तारित उत्पादक दायित्व के प्रावधान हैं। CPHEEO का नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मैनुअल (2016) सेवा-स्तरीय मानक और संचालन-मॉडल बताता है। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 और स्वच्छ सर्वेक्षण से प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन जुड़ते हैं। न्यायिक दृष्टि: सुप्रीम कोर्ट का Almitra H. Patel बनाम भारत संघ (2000) निर्णय नगरपालिका ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक निपटान पर नगर निकायों की जिम्मेदारी स्थापित करता है। पक्ष-विपक्ष: आउटसोर्सिंग के पक्ष में प्रतिस्पर्धा से लागत में कमी, तकनीक-आधारित निगरानी और सेवा-मानक का स्पष्ट अनुबंध; विपक्ष में ठेकेदार पर निर्भरता, प्रदर्शन-मापन में जटिलता, जवाबदेही का बँटवारा और सफाई कर्मचारियों की नौकरी-सुरक्षा व वेतन की चिंता। सफाई कर्मचारी आयोग अधिनियम (1993) और कर्मचारी-कल्याण के प्रावधान संतुलन के लिए प्रासंगिक हैं। समापन: पटना की योजना में बताई गई वार्षिक लगभग 24 करोड़ रुपये की बचत एक अनुमान है, जिसे स्वतंत्र लेखा-परीक्षण से सत्यापित करना आवश्यक है। निष्कर्ष में सुझाव दें कि स्रोत पर पृथक्करण, उपयोगकर्ता शुल्क का प्रभावी संग्रह और डेटा-आधारित अनुवीक्षण मिलकर ही दीर्घकालिक परिणाम देते हैं।
स्रोत: amarujala.com
Bihar PCS (BPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: पटना नगर निगम द्वारा कचरा उठाव प्रणाली में बदलाव के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. नई प्रणाली के तहत, कचरा उठाव का कार्य निजी एजेंसियों को सौंपा जाएगा।
2. इस योजना से नगर निगम को प्रति वर्ष लगभग 100 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है।
3. यह पहल पटना शहर में स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 3 — प्रश्न में दिए गए टॉपिक के अनुसार, पटना नगर निगम कचरा उठाव के लिए नई योजना बना रहा है, जिसमें निजी एजेंसियों को शामिल किया जाएगा और इसका उद्देश्य स्वच्छता में सुधार करना है। हालांकि, बचत की राशि का उल्लेख नहीं किया गया है।
Mains: पटना नगर निगम द्वारा कचरा उठाव प्रणाली में प्रस्तावित बदलावों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। इस नई योजना से शहर की स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन पर क्या संभावित प्रभाव पड़ सकते हैं? (लगभग 150 शब्द)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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