दिल्ली प्रदूषण निगरानी में खामियां: GRAP-III के बीच कई स्टेशन निष्क्रिय

दिल्ली प्रदूषण निगरानी में खामियां: GRAP-III के बीच कई स्टेशन निष्क्रिय

दिल्ली प्रदूषण निगरानी में खामियां: GRAP-III के बीच कई स्टेशन निष्क्रिय

GRAP का कार्यान्वयनवायु गुणवत्ताआँकड़े एकत्रआँकड़ों काविश्लेषणGRAP चरणलागू करनाआपातकालीनउपाय
GRAP का कार्यान्वयन

✎ GRAP के चरण AQI पर आधारित हैं, इसलिए CAAQMS डेटा की निरंतरता ही आपातकालीन उपायों की विश्वसनीयता तय करती है: निगरानी में अंधापन, नीति में भी अंधापन पैदा करता है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण (Environment): वायु प्रदूषण, वायु गुणवत्ता मानक और आपातकालीन उपाय  |  GS Paper II — शासन: सांविधिक निकाय (Statutory Bodies), केंद्र-राज्य समन्वय और नीति-निर्माण में डेटा की भूमिका
  • Prelims: वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI), PM2.5 और PM10 का अंतर, GRAP (Graded Response Action Plan) के चरण, CAQM (Commission for Air Quality Management) की संरचना और शक्तियाँ, CPCB और DPCC की भूमिका, राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS), 2009, CAAQMS (Continuous Ambient Air Quality Monitoring Station), पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981
  • Essay: स्वच्छ हवा का अधिकार: जीवन के अधिकार से पर्यावरणीय न्याय तक, आँकड़ों की विश्वसनीयता और सुशासन: जब नीति का आधार ही अधूरा हो

त्वरित पुनरावृत्ति: GRAP के चरण AQI पर आधारित हैं, इसलिए CAAQMS डेटा की निरंतरता ही आपातकालीन उपायों की विश्वसनीयता तय करती है: निगरानी में अंधापन, नीति में भी अंधापन पैदा करता है।

💬 Doubt on this topic? Ask Aanya, your free AI study-buddy, for an instant explanation. Ask Aanya →

यह खबर चर्चा में क्यों?

दिवाली से ठीक दो दिन पहले दिल्ली के कई प्रमुख वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आधिकारिक आँकड़ों में खाली पाए गए। Indian Express के विश्लेषण के अनुसार शुक्रवार को लगभग एक दर्जन स्टेशनों पर कणीय प्रदूषण (Particulate Pollution) के आँकड़ों में अंतराल दर्ज हुए। उसी दिन 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 382 रहा और लगातार पाँचवें दिन वायु ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बनी रही। इस स्थिति में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उससे सटे क्षेत्रों के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने GRAP के अंतर्गत चरण-III के आपातकालीन उपाय लागू किए। समाचार का केंद्रीय प्रश्न यह है कि जिन आँकड़ों के आधार पर GRAP के चरण तय होते हैं, उनमें निरंतरता न होने पर आपातकालीन उपायों की सटीकता और नीति-निर्णयों की विश्वसनीयता पर क्या प्रभाव पड़ता है।

पृष्ठभूमि

  • संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार की न्यायिक व्याख्या में स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार शामिल किया गया है। अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण संरक्षण का निर्देश देता है, और अनुच्छेद 51A(छ) नागरिकों पर पर्यावरण की रक्षा का मौलिक कर्तव्य डालता है।
  • वैधानिक ढाँचा: वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत केंद्रीय तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मानक निर्धारण, निगरानी और प्रवर्तन की जिम्मेदारी निभाते हैं।
  • मानक और निगरानी: राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS), 2009 के तहत PM2.5, PM10 सहित कई प्रदूषकों के लिए मानक निर्धारित हैं। इन मानकों की जाँच स्वचालित और निरंतर निगरानी स्टेशनों से होती है।
  • CAQM की स्थापना: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उससे सटे क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उससे सटे क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 (Commission for Air Quality Management in NCR and Adjoining Areas Act, 2021) के अंतर्गत CAQM गठित किया गया। यह एक बहु-राज्यीय सांविधिक निकाय है, जिसके पास संबंधित राज्यों और एजेंसियों के लिए निर्देश जारी करने की शक्ति है।
  • GRAP की पृष्ठभूमि: GRAP की शुरुआत पर्यावरण प्रदूषण (निवारण एवं नियंत्रण) प्राधिकरण (EPCA) के समय हुई थी। वायु गुणवत्ता के बिगड़ते स्तर के अनुसार इसके चरण क्रमशः कड़े होते हैं, और अब इसका कार्यान्वयन CAQM द्वारा किया जाता है।

वायु गुणवत्ता निगरानी तंत्र और GRAP क्या है?

  • वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) एक एकीकृत संख्या है जो प्रमुख प्रदूषकों के आधार पर वायु की स्थिति बताती है। इसकी श्रेणियाँ हैं: अच्छी (0–50), संतोषजनक (51–100), मध्यम (101–200), खराब (201–300), बहुत खराब (301–400), गंभीर (401–500)।
  • PM2.5 वे कण हैं जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम है और ये फेफड़ों के भीतर गहराई तक पहुँचते हैं। PM10 का व्यास 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। दोनों का अलग-अलग स्रोत और स्वास्थ्य प्रभाव होता है।
  • CAAQMS स्वचालित स्टेशन होते हैं जो प्रदूषकों और मौसम मापदंडों (तापमान, पवन गति आदि) को लगातार मापते हैं। ये आँकड़े टेलीमेट्री (Telemetry) अर्थात दूरसंचार प्रणाली के माध्यम से केंद्रीय सर्वर पर भेजे जाते हैं।
  • GRAP एक चरणबद्ध आपातकालीन योजना है। सामान्यतः ‘गंभीर’ श्रेणी (AQI 401–450) में चरण-III लागू होता है, जिसमें निर्माण गतिविधियों पर रोक, डीजल जनरेटर और कुछ वाहनों पर प्रतिबंध जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं। AQI 450 से ऊपर चरण-IV लागू होता है।
  • डेटा अंतराल का अर्थ है किसी स्टेशन से आँकड़ों का न आना। मानक प्रक्रिया के अनुसार, यदि कोई स्टेशन लगातार तीन घंटे तक आँकड़े न भेजे तो केंद्रीय सर्वर स्वचालित अलर्ट जारी करता है और नोडल अधिकारी खराबी का कारण जाँचते हैं।
  • निगरानी में कमी का प्रभाव: जिन क्षेत्रों के आँकड़े अनुपलब्ध हैं, वहाँ प्रदूषण की वास्तविक स्थिति का अनुमान कम सटीक होता है। इससे स्थानिक स्तर पर लक्षित हस्तक्षेप, स्वास्थ्य चेतावनी और GRAP चरण तय करने की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
  • सुशासन की दृष्टि से निगरानी ढाँचे में निरंतरता, रखरखाव, समयबद्ध अलर्ट-प्रणाली और जवाबदेही तय करना आवश्यक है, ताकि नीतिगत उपाय वास्तविक और विश्वसनीय आँकड़ों पर आधारित हों।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index, AQI) की स्थिति 24-घंटे का औसत AQI 382 रहा, जो ‘अत्यंत खराब’ (Very Poor) श्रेणी में आता है। पूर्वानुमान ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी का है, इसलिए GRAP के अगले चरण की आवश्यकता बनती है।
ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (Graded Response Action Plan, GRAP) का चरण-III वायु गुणवत्ता बिगड़ने के साथ आपातकालीन उपायों को चरणबद्ध रूप से लागू किया जाता है। चरण-III में निर्माण गतिविधियों पर रोक जैसे कड़े उपाय शामिल होते हैं और इसका निर्णय वायु गुणवत्ता के स्तर से जुड़ा होता है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management in NCR and Adjoining Areas, CAQM) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता के समन्वित प्रबंधन की वैधानिक संस्था है। GRAP के चरणों को लागू करने का निर्देश इसी के द्वारा दिया जाता है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board, CPCB) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की भूमिका केंद्रीय और राज्य स्तर की निगरानी एजेंसियाँ मिलकर आंकड़े जुटाती हैं। आंकड़ों की सार्वजनिक उपलब्धता इन्हीं के नेटवर्क पर निर्भर है।
निगरानी केंद्रों के आंकड़ों में अंतराल (Data Gaps) PM2.5 और PM10 जैसे प्रमुख प्रदूषकों के घंटेवार आंकड़ों में कई घंटों की रिक्तता रही। इससे आपातकालीन निर्णयों के लिए उपलब्ध वास्तविक-समय आंकड़ों की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
प्रदूषकों का स्वरूप: PM2.5 और PM10 PM2.5 अत्यंत सूक्ष्म कण हैं जो फेफड़ों की गहराई तक पहुँचते हैं, जबकि PM10 अपेक्षाकृत बड़े कण हैं। दोनों का सतत मापन स्वास्थ्य-प्रभाव और स्रोत-विश्लेषण के लिए आवश्यक है।

महत्व

पर्यावरणीय एवं स्वास्थ्य संबंधी

  • वायु गुणवत्ता के ‘गंभीर’ स्तर की ओर बढ़ने से श्वसन रोगों और हृदय संबंधी जोखिमों में वृद्धि की आशंका रहती है, इसलिए सतत और विश्वसनीय आंकड़े जन-स्वास्थ्य चेतावनी के आधार बनते हैं।
  • PM2.5 जैसे सूक्ष्म कणों के घंटेवार आंकड़े न मिलने से प्रदूषण के उतार-चढ़ाव का सही अनुमान नहीं लग पाता, जिससे संवेदनशील वर्गों के लिए समय पर सावधानी नहीं बरती जा सकती।

प्रशासनिक एवं नीति-निर्माण संबंधी

  • GRAP जैसे चरणबद्ध आपातकालीन ढाँचे में कौन-सा चरण लागू होगा, यह वायु गुणवत्ता के आंकड़ों पर निर्भर है। आंकड़ों में रिक्तता से निर्णय की समयबद्धता और सटीकता दोनों प्रभावित होती हैं।
  • निगरानी नेटवर्क की विश्वसनीयता नीति-मूल्यांकन का आधार है। बिना निर्बाध आंकड़ों के यह आकलन करना कठिन होता है कि किसी उपाय से वास्तविक सुधार हुआ या नहीं।

संघीय समन्वय संबंधी

  • केंद्रीय बोर्ड (CPCB), राज्य समिति (DPCC) और CAQM के बीच सूचना-प्रवाह का सुचारु होना सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की व्यावहारिक कसौटी है।
  • स्वचालित अलर्ट प्रणाली और नोडल अधिकारियों की भूमिका यह दर्शाती है कि तकनीकी तंत्र और मानव-जवाबदेही को साथ चलना होता है।

विधिक एवं संवैधानिक संदर्भ

  • स्वच्छ वायु को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना गया है। इसलिए निगरानी व्यवस्था की विफलता नागरिक-अधिकारों से भी जुड़ती है।
  • वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत प्रदूषण-निगरानी की वैधानिक जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से निर्धारित है।

चुनौतियाँ

1. निगरानी आंकड़ों में निरंतरता का अभाव

  • कई केंद्रों पर कुछ घंटों से लेकर लगातार 86 घंटों तक आंकड़े उपलब्ध नहीं रहे, जिससे वास्तविक-समय निगरानी का उद्देश्य कमजोर हुआ।
  • एक ही केंद्र पर सभी 24 मापदंडों का एक साथ बंद होना बताता है कि समस्या केवल सेंसर तक सीमित नहीं, बल्कि बिजली, संचार या डेटा-प्रवाह के स्तर पर भी हो सकती है।

2. उपकरण रखरखाव और तकनीकी जवाबदेही

  • निगरानी उपकरणों के नियमित रखरखाव, अंशांकन (Calibration) और मरम्मत की समयबद्ध व्यवस्था न होने पर आंकड़ों की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है।
  • सिस्टम में चेतावनी तंत्र होने के बावजूद, तीन घंटे की विफलता के बाद अलर्ट मिलने और समस्या सुलझने के बीच का अंतराल अधिक रहता है।

3. बहु-संस्थागत समन्वय की जटिलता

  • केंद्रीय बोर्ड, राज्य समिति, CAQM और स्थानीय निकाय अलग-अलग भूमिकाओं में कार्य करते हैं। जवाबदेही का स्पष्ट विभाजन न होने पर समस्या का समाधान बाधित होता है।
  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कई राज्यों और नगर निकायों के बीच आंकड़ा-साझाकरण और कार्रवाई का समन्वय चुनौतीपूर्ण बना रहता है।

4. आपातकालीन उपायों की विश्वसनीयता

  • GRAP जैसे चरणबद्ध उपाय तभी प्रभावी होते हैं जब वायु गुणवत्ता का वास्तविक और पूर्वानुमानित आंकड़ा समय पर उपलब्ध हो।
  • आंकड़ों में अंतराल से चरण-निर्धारण में देरी या अनुमान पर आधारित निर्णय का जोखिम बढ़ता है, जिससे नीति की साख प्रभावित हो सकती है।

5. सार्वजनिक विश्वास और पारदर्शिता

  • जब जनता को प्रकाशित AQI और वास्तविक स्थिति में असंगति दिखती है, तो नीतिगत चेतावनियों पर भरोसा कम होता है।
  • आंकड़ों के अंतराल के कारणों और सुधार की समय-सीमा की सार्वजनिक घोषणा से विश्वास बनाए रखने में सहायता मिलती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
निगरानी केंद्रों के आंकड़ों में रिक्तता वास्तविक-समय निर्णयों और जन-चेतावनी की विश्वसनीयता घटती है।
लंबे समय तक चलने वाली विफलताएँ कुछ केंद्र 86 घंटों तक निष्क्रिय रहे, जिससे निगरानी नेटवर्क की मजबूती पर प्रश्न उठता है।
एक साथ सभी मापदंडों का बंद होना यह संकेत देता है कि समस्या सेंसर के साथ-साथ बिजली या संचार ढाँचे में भी हो सकती है।
संस्थाओं के बीच समन्वय केंद्र, राज्य और आयोग के बीच सूचना और कार्रवाई की स्पष्ट जिम्मेदारी आवश्यक है।
GRAP चरण-निर्धारण पर प्रभाव अधूरे आंकड़ों पर आधारित निर्णय से उपाय या तो देर से लागू हो सकते हैं या अनावश्यक रूप से कठोर हो सकते हैं।
सार्वजनिक भरोसा आंकड़ों और वास्तविक स्थिति में असंगति से नीतिगत अपीलों का प्रभाव कम होता है।

आगे की राह

  • निगरानी केंद्रों के लिए बिजली और संचार का बैकअप सुनिश्चित किया जाए, ताकि एक साथ सभी मापदंडों के बंद होने की घटनाएँ न्यूनतम हों।
  • दूरमिति (Telemetry) विफलता पर अलर्ट का समय तीन घंटे से घटाकर कम किया जाए तथा नोडल अधिकारियों के लिए निश्चित समाधान-समय (Resolution Time) तय हो।
  • उपकरणों के नियमित रखरखाव, अंशांकन और निष्क्रिय केंद्रों की सार्वजनिक सूची के लिए स्पष्ट मानक-संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure) बने।
  • CPCB, DPCC और CAQM के बीच वास्तविक-समय आंकड़ा-साझाकरण के लिए साझा डेटा प्लेटफ़ॉर्म और समन्वय समिति का प्रावधान किया जाए।
  • आंकड़ों में अंतराल की स्थिति में GRAP चरण-निर्धारण के लिए वैकल्पिक स्रोतों (जैसे पड़ोसी केंद्रों के आंकड़े या उपग्रह आधारित अनुमान) का उपयोग विधिवत रूप से परिभाषित किया जाए।
  • नए निगरानी केंद्र लगाने के साथ-साथ मौजूदा केंद्रों की गुणवत्ता-ऑडिट को नियमित किया जाए।
  • आंकड़ों की गुणवत्ता, निष्क्रियता के कारण और सुधार की समय-सीमा को सार्वजनिक रूप से प्रकाशित किया जाए, ताकि सूचना के माध्यम से जनविश्वास बना रहे।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management – CAQM) · ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (Graded Response Action Plan – GRAP) · वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index – AQI) · केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board – CPCB) · सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (Continuous Ambient Air Quality Monitoring Station – CAAQMS) · कण पदार्थ (PM2.5 और PM10) · निगरानी आंकड़ों में अंतराल (Data Gap) · स्वच्छ वायु का अधिकार और अनुच्छेद 21 · अनुच्छेद 48A और मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51A(छ)) · राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme – NCAP) · सहकारी संघवाद और अंतर-राज्यीय समन्वय · सूचना का अधिकार और पारदर्शिता

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21: स्वच्छ वायु जीवन के अधिकार का अंग
  • अनुच्छेद 48A: राज्य का पर्यावरण संरक्षण का दायित्व
  • अनुच्छेद 51A(छ): नागरिकों का पर्यावरण संरक्षण कर्तव्य

अवधारणा प्रवाह

शीत ऋतु में पराली दहन, वाहन उत्सर्जन, धूल और पटाखों जैसे स्रोतों से PM2.5 और PM10 का स्तर बढ़ता है।  →  निगरानी केंद्र इन प्रदूषकों के घंटेवार आंकड़े CPCB और DPCC के केंद्रीय सर्वर पर भेजते हैं।  →  सर्वर की दूरमिति में विफलता या बिजली-संचार बाधा से कुछ केंद्रों के आंकड़े रुक जाते हैं और कई घंटों तक रिक्तता बनी रहती है।  →  आंकड़ों की रिक्तता के कारण वायु गुणवत्ता का वास्तविक स्तर पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाता।  →  AQI के ‘अत्यंत खराब’ से ‘गंभीर’ स्तर की ओर बढ़ने के आंकड़ों के आधार पर CAQM GRAP का चरण-III लागू करता है।  →  चरण-III के उपाय (जैसे निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध) लागू होते हैं, और अगली समीक्षा में आंकड़ों की विश्वसनीयता के आधार पर उनकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन होता है।  →  नीति-सुधार के रूप में निगरानी तंत्र की मजबूती और पारदर्शिता बढ़ाकर अगली बार निर्णय-प्रक्रिया को सुदृढ़ किया जाता है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उससे सटे क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की स्थापना एक संसदीय अधिनियम के अंतर्गत की गई है।
2. ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के विभिन्न चरणों में लागू किए जाने वाले उपायों के निर्देश आयोग द्वारा जारी किए जाते हैं।
3. आयोग का क्षेत्राधिकार केवल दिल्ली की प्रशासनिक सीमा तक सीमित है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. इनमें से कोई नहीं, क्योंकि कोई भी कथन सही नहीं है

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के अंतर्गत गठित हुआ। कथन 2 सही है: GRAP के चरण-वार उपाय आयोग के निर्देश से लागू होते हैं। कथन 3 गलत है, क्योंकि आयोग का क्षेत्र एनसीआर और उससे सटे राज्यों के क्षेत्रों तक विस्तृत है।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों से आंकड़ों में अंतराल होने पर आपातकालीन उपायों की समयबद्धता और प्रभावशीलता घट सकती है।
कारण (R): GRAP के चरणों का निर्धारण वायु गुणवत्ता सूचकांक की श्रेणी के आधार पर होता है, इसलिए अनुपलब्ध आंकड़े चरण-निर्धारण में विलंब कर सकते हैं।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, परंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — GRAP के चरण वायु गुणवत्ता सूचकांक की श्रेणी से जुड़े हैं, अतः आंकड़ों का अभाव निर्णय में विलंब कर सकता है। यह कारण कथन की सही व्याख्या है। मूल्यांकन में निरंतर और विश्वसनीय आंकड़ों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

Q3. निम्नलिखित सुमेलों पर विचार कीजिए:

सूची I (संस्था/निकाय)
A. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB)
B. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC)
C. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM)

सूची II (भूमिका)
1. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए वैधानिक निकाय, जो GRAP के लागू होने का समन्वय करता है
2. दिल्ली राज्य के स्तर पर कार्यरत राज्य-स्तरीय प्रदूषण नियंत्रण एजेंसी
3. राष्ट्रीय स्तर पर परिवेशी वायु गुणवत्ता की निगरानी और मानकों के समन्वय हेतु केंद्रीय निकाय

सही सुमेलन चुनिए:

  1. A-3, B-2, C-1
  2. A-2, B-3, C-1
  3. A-3, B-1, C-2
  4. A-1, B-3, C-2

उत्तर: A-3, B-2, C-1 — CPCB राष्ट्रीय स्तर पर वायु गुणवत्ता निगरानी और मानक-समन्वय का केंद्रीय निकाय है (A-3)। DPCC दिल्ली की राज्य-स्तरीय एजेंसी है (B-2)। CAQM एनसीआर के लिए वैधानिक आयोग है, जो GRAP का समन्वय करता है (C-1)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ वायु प्रदूषण नियंत्रण में विश्वसनीय और सतत निगरानी आंकड़ों को नीति-निर्माण का आधार माना जाता है। दिल्ली-एनसीआर में हालिया दीपावली-पूर्व काल के उदाहरण के संदर्भ में भारत के वायु गुणवत्ता निगरानी तंत्र की संस्थागत एवं तकनीकी सीमाओं की समालोचनात्मक परीक्षा कीजिए। साथ ही बताइए कि निगरानी आंकड़ों में अंतराल होने पर आपातकालीन उपायों की प्रभावशीलता पर क्या प्रभाव पड़ता है और इसे सुधारने के लिए किन उपायों की आवश्यकता है? (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर संरचना (लगभग 250 शब्द):

1. भूमिका: दिल्ली-एनसीआर में PM2.5 और PM10 के आंकड़ों में अंतराल, GRAP-III का लागू होना, और AQI का ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी की ओर बढ़ना; आंकड़ों के आधार पर नीति-निर्णय की निर्भरता रेखांकित करें।

2. संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 21 के अंतर्गत स्वच्छ पर्यावरण और स्वस्थ जीवन का अधिकार (MC Mehta बनाम भारत संघ तथा Subhash Kumar बनाम बिहार राज्य, 1991 के निर्णय); अनुच्छेद 48A (राज्य का पर्यावरण संरक्षण का दायित्व) और अनुच्छेद 51A(छ) (नागरिकों का मौलिक कर्तव्य)।

3. वैधानिक एवं संस्थागत ढांचा: वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अंतर्गत CPCB और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड; पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986; वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के अंतर्गत CAQM और GRAP का क्रियान्वयन; सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित EPCA की पृष्ठभूमि; राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के लक्ष्य (2017 के आधार वर्ष से 2024 तक 20-30 प्रतिशत कमी) का उल्लेख।

4. निगरानी तंत्र की सीमाएं (आलोचनात्मक विश्लेषण): (क) CAAQMS स्टेशनों का रखरखाव, बिजली और टेलीमेट्री संचार की विफलता; (ख) लगातार 86 घंटे तक ITO के PM10 मॉनिटर के बंद रहने जैसे तथ्य; (ग) NSIT द्वारका और नजफगढ़ जैसे स्टेशनों पर पूर्ण आंकड़ा-अभाव; (घ) DPCC के सर्वर द्वारा तीन लगातार घंटों की अनुपलब्धता पर अलर्ट का मानक प्रचालन प्रोटोकॉल, जिसमें अलर्ट के बाद भी समाधान में विलंब संभव है; (ङ) नए स्टेशनों की स्थापना के बावजूद रखरखाव-क्षमता का अभाव।

5. प्रभाव: आंकड़ों के अभाव से GRAP चरणों का समय पर निर्धारण प्रभावित; जनता के बीच विश्वास में कमी; स्वास्थ्य-चेतावनी में विलंब; नीति-मूल्यांकन और जवाबदेही कमजोर।

6. संतुलित दृष्टिकोण: एक ओर त्वरित, क्षेत्र-व्यापी आपातकालीन कार्रवाई की आवश्यकता, दूसरी ओर निगरानी के आधार पर होने वाली कार्रवाई की वैधता और संसाधन-लागत; अंतर-राज्यीय समन्वय (पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान) की सहकारी संघवाद-आधारित चुनौती।

7. सुधार के उपाय: बैकअप उपकरण और रीयल-टाइम डेटा-रिडंडेंसी; स्वतंत्र तृतीय-पक्ष ऑडिट; आंकड़ों के अंतराल का सार्वजनिक प्रकटीकरण (सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की पारदर्शिता भावना के अनुरूप); उपकरण-उपलब्धता के लिए जवाबदेही-तंत्र; स्थानीय निकायों और राज्य एजेंसियों के बीच स्पष्ट उत्तरदायित्व।

8. निष्कर्ष: विश्वसनीय आंकड़े स्वच्छ वायु के अधिकार की व्यावहारिक शर्त हैं; तकनीकी मजबूती, पारदर्शिता और संस्थागत समन्वय के संयोजन से ही GRAP जैसे आपातकालीन उपाय प्रभावी हो सकते हैं।

स्रोत: The Indian Express


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


Related guides on our sites

No Comments

Post A Comment