07 Nov ओडिशा की ‘केजी से पीजी’ योजना: उच्च शिक्षा में नामांकन वृद्धि

✎ आकांक्षी जिलों सहित राज्य स्तर पर निःशुल्क शिक्षा योजनाएँ सार्वभौमिक पहुँच बढ़ाती हैं, परंतु शिक्षा का मौलिक अधिकार अनुच्छेद 21क के तहत केवल 6 से 14 वर्ष के बालकों तक सीमित है, जबकि उच्च शिक्षा में यह राज्य की नीतिगत पहल है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — राजव्यवस्था एवं शासन (शिक्षा से संबंधित संवैधानिक प्रावधान, राज्य सरकार की योजनाएँ, संघ-राज्य संबंध) | GS Paper II — सामाजिक क्षेत्र (शिक्षा, आकांक्षी जिले एवं समावेशी विकास)
- Prelims: अनुच्छेद 21क (शिक्षा का अधिकार, 6 से 14 वर्ष), अनुच्छेद 41 एवं 45 (राज्य नीति के निदेशक तत्व), समवर्ती सूची (प्रविष्टि 25) और संघ सूची (प्रविष्टि 66), सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), अखिल भारतीय उच्चतर शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE), पीएम-उषा (PM-USHA), आकांक्षी जिला कार्यक्रम (नीति आयोग)
- Essay: शिक्षा का सार्वभौमिकरण: निःशुल्क शिक्षा राज्य की प्राथमिकता कैसे बने?, उच्च शिक्षा में पहुँच, गुणवत्ता और समानता: नामांकन बढ़ाने से आगे की चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: आकांक्षी जिलों सहित राज्य स्तर पर निःशुल्क शिक्षा योजनाएँ सार्वभौमिक पहुँच बढ़ाती हैं, परंतु शिक्षा का मौलिक अधिकार अनुच्छेद 21क के तहत केवल 6 से 14 वर्ष के बालकों तक सीमित है, जबकि उच्च शिक्षा में यह राज्य की नीतिगत पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
ओडिशा सरकार की केजी से पीजी तक निःशुल्क शिक्षा योजना (ज्ञानोदय शिक्षारु समृद्धि योजना) के वर्तमान शैक्षणिक सत्र में नियमित स्नातक पाठ्यक्रमों में 1,78,937 विद्यार्थियों ने नामांकन लिया है, जो पिछले शैक्षणिक सत्र के 1,64,179 से 14,758 अधिक है। राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री ने समीक्षा बैठक के बाद बताया कि आकांक्षी जिलों में कालाहांडी (99.09 प्रतिशत) और कोरापुट (98.82 प्रतिशत) में नामांकन दर सर्वाधिक रही। इसके साथ ही बैठक में रिक्त शिक्षण व गैर-शिक्षण पदों को भरने, राज्य चयन बोर्ड की भर्ती प्रक्रिया और पीएम-उषा के अंतर्गत परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा भी की गई। 48 राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में नए प्राचार्य पद सृजित किए गए हैं, जिससे सभी 66 ऐसे महाविद्यालयों में स्वीकृत प्राचार्य पद उपलब्ध हो गए हैं।
पृष्ठभूमि
- भारत में शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, जबकि उच्च शिक्षा के मानकों के समन्वय और निर्धारण के संबंध में संघ सूची की प्रविष्टि 66 संघ सरकार को भूमिका देती है। इसलिए राज्य सरकारें अपने स्तर पर शिक्षा से संबंधित योजनाएँ चलाती हैं।
- 86वें संविधान संशोधन (2002) द्वारा अनुच्छेद 21क जोड़ा गया, जिसमें 6 से 14 वर्ष के बालकों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया। इसका कार्यान्वयन शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के माध्यम से होता है। उच्च शिक्षा के लिए ऐसा कोई संवैधानिक निर्देश नहीं है, इसलिए उच्च शिक्षा में शुल्क-मुक्ति राज्य की नीतिगत पहल का विषय है।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 ने उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को 2035 तक 50 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा है, और इस दिशा में पहुँच, समता और गुणवत्ता पर बल दिया है।
- पीएम-उषा (प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान) केंद्र प्रायोजित योजना है, जो पूर्ववर्ती राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) के स्थान पर राज्यों के उच्च शिक्षा संस्थानों के विकास के लिए संसाधन उपलब्ध कराती है।
- नीति आयोग का आकांक्षी जिला कार्यक्रम (2018) पिछड़े जिलों में स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सामाजिक संकेतकों में तीव्र सुधार के लिए शुरू किया गया था। कालाहांडी, कोरापुट, बलांगीर, मलकानगिरी और नुआपाड़ा ओडिशा के आकांक्षी जिलों में शामिल हैं।
सार्वभौमिक निःशुल्क शिक्षा क्या है?
- निःशुल्क शिक्षा का अर्थ है सरकारी संस्थानों में ट्यूशन शुल्क न लेना, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुँच आसान होती है।
- संवैधानिक रूप से 6 से 14 वर्ष तक के बालकों के लिए निःशुल्क शिक्षा मौलिक अधिकार है (अनुच्छेद 21क), जबकि अनुच्छेद 41 राज्य को आर्थिक क्षमता और विकास की सीमा के भीतर शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करने का निदेश देता है।
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 स्कूली शिक्षा के लिए प्रक्रियात्मक ढाँचा देता है; उच्च शिक्षा के लिए ऐसी विधिक बाध्यता नहीं है, इसलिए राज्य अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार योजनाएँ तैयार करते हैं।
- ऐसी योजनाओं का वित्तीय भार राज्य के बजट पर पड़ता है, इसलिए इनके प्रभाव का मूल्यांकन नामांकन, ठहराव दर और राजकोषीय घाटे के संदर्भ में किया जाता है।
- नामांकन में वृद्धि पहुँच का संकेतक है, परंतु गुणवत्ता के लिए शिक्षकों की उपलब्धता, प्रयोगशाला और पुस्तकालय जैसी सुविधाएँ, तथा पाठ्यक्रम की प्रासंगिकता आवश्यक हैं।
- रिक्त पदों को भरना और राज्य चयन बोर्ड जैसी संस्थाओं के माध्यम से पारदर्शी भर्ती सुनिश्चित करना इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन की प्रमुख शर्त है।
- उच्च शिक्षा के प्रशासनिक ढाँचे में प्राचार्य और अन्य पदों का सृजन संस्थागत क्षमता और जवाबदेही बढ़ाने का माध्यम है।
- अखिल भारतीय उच्चतर शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) और UGC के आँकड़े राज्यों के नामांकन और अवसंरचना की तुलना के लिए प्रमुख स्रोत हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| गयानोदय शिक्षारु समृद्धि योजना (Gyanodaya Shiksharu Samruddhi Scheme) | नर्सरी से स्नातकोत्तर स्तर तक की शिक्षा को सरकारी संस्थानों में शुल्क-मुक्त बनाती है। इसे राज्य की ओर से प्रस्तुत किया गया है, जिसमें नर्सरी से पीजी तक की निरंतरता का लक्ष्य है। |
| नियमित स्नातक पाठ्यक्रमों में नामांकन वृद्धि | वर्तमान शैक्षणिक सत्र में 1,78,937 छात्र नामांकित हुए, जबकि पिछले सत्र में 1,64,179 थे। इस प्रकार 14,758 अतिरिक्त प्रवेश दर्ज हुए। यह आँकड़ा मंत्री द्वारा समीक्षा बैठक में साझा किया गया। |
| आकांक्षी जिलों में प्रवेश दर | कालाहांडी (99.09 प्रतिशत), कोरापुट (98.82 प्रतिशत), बलांगीर (95.57 प्रतिशत), मलकानगिरि (95.37 प्रतिशत) और नुआपाड़ा (94.64 प्रतिशत) में प्रवेश दर ऊँची रही। यह आकांक्षी जिला कार्यक्रम के लक्ष्यों से जुड़ा संकेतक है। |
| महाविद्यालयों में प्राचार्य पदों का सृजन | 48 सरकारी डिग्री महाविद्यालयों में नए प्राचार्य पद सृजित हुए। अब राज्य के 66 ऐसे महाविद्यालयों में स्वीकृत प्राचार्य पद हैं, जबकि पहले केवल 18 में थे। इससे प्रशासनिक नेतृत्व की संरचना मज़बूत होती है। |
| विश्वविद्यालयों का युक्तिकरण और रिक्त पदों की भर्ती | 17 राज्य विश्वविद्यालयों में युक्तिकरण के बाद 262 नए पद सृजित हुए। महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में 1,819 शिक्षण पदों पर भर्ती जारी है। राज्य चयन बोर्ड ने पिछले दो वर्षों में 2,800 से अधिक रिक्तियों के परिणाम घोषित किए। |
महत्व
सामाजिक एवं शैक्षिक
- शुल्क-मुक्त शिक्षा से आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुँच बढ़ती है।
- नामांकन में वृद्धि सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio) के सुधार में सहायक हो सकती है, जो अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) में मापा जाता है।
- आकांक्षी जिलों में ऊँची प्रवेश दर से क्षेत्रीय असमानता घटाने का प्रयास दिखता है।
प्रशासनिक एवं संस्थागत
- प्राचार्य पदों के सृजन से महाविद्यालयों का शैक्षणिक और प्रशासनिक नेतृत्व सुदृढ़ होता है।
- युक्तिकरण से 17 विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक संरचना अधिक व्यवस्थित होती है।
- राज्य चयन बोर्ड द्वारा भर्ती परीक्षाओं का संचालन शिक्षक-नियुक्ति की पारदर्शी प्रक्रिया का उदाहरण है।
नीतिगत एवं संघीय
- शिक्षा समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है, इसलिए राज्य द्वारा केंद्र की योजनाओं (जैसे PM-USHA) के साथ तालमेल बनाकर कार्यक्रम चलाना संघीय व्यवस्था का व्यावहारिक रूप है।
- शिक्षा को सार्वजनिक निवेश मानकर मानव संसाधन विकास के लक्ष्य को राज्य स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
चुनौतियाँ
1. राजकोषीय भार और स्थायित्व
- नर्सरी से स्नातकोत्तर तक शुल्क माफ़ी से नामांकन बढ़ने पर राज्य के बजट पर दीर्घकालिक दायित्व बढ़ता है।
- नामांकन में वृद्धि के अनुपात में संसाधन, छात्रावास और शिक्षक-छात्र अनुपात का विस्तार भी आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक वित्त; राज्य बजट और राजकोषीय प्रबंधन
2. शिक्षकों और कर्मचारियों की रिक्तियाँ
- 1,819 शिक्षण पदों की भर्ती जारी होने के बावजूद बड़ी संख्या में रिक्तियाँ बनी हुई हैं।
- रिक्त पदों के कारण नामांकन में वृद्धि का गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर दबाव पड़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: उच्च शिक्षा में मानव संसाधन; लोक सेवा भर्ती संस्थाएँ
3. गुणवत्ता बनाम पहुँच
- नामांकन के आँकड़ों से शिक्षा की गुणवत्ता, अधिगम परिणाम या रोज़गारपरकता का अनुमान नहीं लगता।
- पहुँच बढ़ाने के साथ पाठ्यक्रम सुधार, मूल्यांकन और कौशल-आधारित शिक्षा पर ध्यान देना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: शिक्षा में गुणवत्ता; कौशल विकास
4. निजी संस्थानों और अनौपचारिक लागतों का प्रश्न
- योजना सरकारी संस्थानों तक सीमित है, इसलिए निजी संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र इसके दायरे से बाहर रहते हैं।
- शुल्क-मुक्त नीति के बावजूद पुस्तकों, परिवहन और आवास पर होने वाला व्यय छात्रों के लिए बाधा बन सकता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय; शिक्षा तक समान पहुँच
5. प्रशासनिक क्षमता और समय-सीमा का पालन
- परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश से स्पष्ट है कि क्रियान्वयन में विलंब एक चुनौती है।
- विश्वविद्यालयों के युक्तिकरण और नए पदों के बाद भी प्रशासनिक प्रक्रियाओं की गति पर नज़र रखना ज़रूरी है।
यूपीएससी लिंक: लोक प्रशासन; सुशासन और क्रियान्वयन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| राजकोषीय दायित्व | शुल्क-मुक्त शिक्षा से बढ़ते नामांकन के साथ राज्य के व्यय में निरंतर वृद्धि होगी। |
| रिक्त शिक्षण पद | 1,819 पदों की भर्ती बाकी है, जिससे शिक्षण गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। |
| नामांकन बनाम गुणवत्ता | नामांकन के आँकड़े अधिगम परिणाम और रोज़गारपरकता को नहीं दर्शाते। |
| योजना का दायरा | केवल सरकारी संस्थानों को शामिल करने से निजी संस्थानों के छात्र बाहर रहते हैं। |
| अप्रत्यक्ष लागत | पुस्तकों, परिवहन और आवास का व्यय गरीब छात्रों के लिए बाधा बन सकता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA)
- आकांक्षी जिला कार्यक्रम (Aspirational Districts Programme)
आगे की राह
- नामांकन वृद्धि के साथ छात्रावास, पुस्तकालय और प्रयोगशाला जैसी भौतिक अवसंरचना का समानांतर विस्तार किया जाए।
- शिक्षण पदों की भर्ती को समय-सीमा में पूरा करने के लिए राज्य चयन बोर्ड की प्रक्रिया को और सुव्यवस्थित किया जाए।
- नामांकन के साथ अधिगम परिणाम, स्नातक दर और रोज़गार-योग्यता जैसे संकेतकों को भी नियमित रूप से मापा जाए।
- पुस्तक, परिवहन और आवास सहायता जैसे अप्रत्यक्ष व्ययों के लिए लक्षित छात्रवृत्ति व्यवस्था पर विचार किया जाए।
- आकांक्षी जिलों में डिजिटल कनेक्टिविटी और परामर्श सेवाओं के माध्यम से छात्रों की उच्च शिक्षा में सहभागिता बढ़ाई जाए।
- राज्य और केंद्र की योजनाओं (PM-USHA) के बीच समन्वय से संसाधनों के दोहराव से बचा जाए।
- राजकोषीय योजना में शिक्षा व्यय के दीर्घकालिक अनुमान शामिल किए जाएँ, ताकि योजना का स्थायित्व सुनिश्चित हो।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ज्ञानोदय शिक्षारु समृद्धि योजना (Gyanodaya Shiksharu Samruddhi Scheme) · निःशुल्क शिक्षा का अधिकार और अनुच्छेद 21क (Article 21A) · सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio) · समवर्ती सूची की प्रविष्टि 25 (Entry 25 of Concurrent List) · राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (National Education Policy 2020) · आकांक्षी जिले (Aspirational Districts) · प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) · राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) · राज्य लोक सेवा या चयन बोर्ड द्वारा भर्ती की रिक्तियाँ · उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बनाम पहुँच (Access vs Quality) · सार्वजनिक व्यय और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता · समावेशी उच्च शिक्षा (Inclusive Higher Education)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 41: शिक्षा के अधिकार की आर्थिक सीमाओं में राज्य का दायित्व
- अनुच्छेद 45: प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा का निर्देश
- अनुच्छेद 46: कमज़ोर वर्गों के शैक्षिक हितों का संवर्धन
- सातवीं अनुसूची, समवर्ती सूची: शिक्षा पर राज्य और केंद्र की साझा विधायी शक्ति
अवधारणा प्रवाह
राज्य सरकार द्वारा नर्सरी से स्नातकोत्तर तक सरकारी संस्थानों में शुल्क-मुक्त शिक्षा लागू → शुल्क बाधा हटने से आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के छात्रों की नियमित स्नातक पाठ्यक्रमों में भागीदारी बढ़ी → नामांकन 1,64,179 से बढ़कर 1,78,937 हुआ और आकांक्षी जिलों में प्रवेश दर ऊँची रही → नामांकन बढ़ने से महाविद्यालयों में प्राचार्य पदों का सृजन और 262 विश्वविद्यालय पदों का युक्तिकरण हुआ → रिक्त शिक्षण पदों पर राज्य चयन बोर्ड द्वारा भर्ती से शिक्षण क्षमता और गुणवत्ता को सहारा मिलने की अपेक्षा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 21क के अंतर्गत 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार प्राप्त है।
2. अनुच्छेद 45 में 86वें संविधान संशोधन द्वारा छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा का प्रावधान जोड़ा गया।
3. अनुच्छेद 41 के अंतर्गत सभी बच्चों को उच्च शिक्षा निःशुल्क उपलब्ध कराना मौलिक अधिकार के रूप में घोषित है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- इनमें से कोई नहीं, क्योंकि सभी कथन गलत हैं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 21क (86वाँ संशोधन, 2002) के अंतर्गत 6-14 वर्ष के बच्चों का शिक्षा का मौलिक अधिकार है। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 45 अब छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की देखभाल और शिक्षा से संबंधित राज्य का निर्देश है। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 41 राज्य नीति का निदेशक तत्त्व है, मौलिक अधिकार नहीं, और उच्च शिक्षा इसमें शामिल नहीं है।
Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक कथन के लिए एक कथन (A) और एक कारण (R) दिया गया है।
कथन (A): राज्य सरकारें अपने स्तर पर उच्च शिक्षा में निःशुल्क नामांकन की योजनाएँ लागू कर सकती हैं।
कारण (R): शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में आती है, जिसकी प्रविष्टि 25 में शिक्षा का उल्लेख है, और इस पर संघ तथा राज्य दोनों विधि बना सकते हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — समवर्ती सूची की प्रविष्टि 25 में शिक्षा (संघ सूची की प्रविष्टि 63-66 के अधीन) दर्ज है, इसलिए राज्य अपने क्षेत्राधिकार में शिक्षा संबंधी योजनाएँ बना सकते हैं। इसी संवैधानिक ढाँचे से राज्य-स्तरीय निःशुल्क शिक्षा योजनाओं की वैधानिक गुंजाइश बनती है।
Q3. निम्नलिखित सूचियों को सुमेलित कीजिए:
सूची I (संवैधानिक प्रावधान)
a. अनुच्छेद 21क
b. अनुच्छेद 45
c. अनुच्छेद 46
d. अनुच्छेद 15(5)
सूची II (विषय-वस्तु)
1. 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार
2. छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा
3. अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य दुर्बल वर्गों के शैक्षिक हितों की वृद्धि
4. शैक्षणिक संस्थाओं में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान (अल्पसंख्यक संस्थाओं को छोड़कर, निजी संस्थाओं सहित)
सही सुमेलन चुनिए:
- a-1, b-2, c-3, d-4
- a-2, b-1, c-3, d-4
- a-1, b-2, c-4, d-3
- a-3, b-2, c-1, d-4
उत्तर: a-1, b-2, c-3, d-4 — अनुच्छेद 21क मौलिक अधिकार है (1)। अनुच्छेद 45 प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा से संबंधित है (2)। अनुच्छेद 46 दुर्बल वर्गों के शैक्षिक हितों से संबंधित राज्य का निर्देश है (3)। अनुच्छेद 15(5) (93वाँ संशोधन) शैक्षणिक संस्थाओं में विशेष प्रावधान का अधिकार देता है (4)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राज्यों द्वारा पूर्व-प्राथमिक से स्नातकोत्तर स्तर तक निःशुल्क शिक्षा देने की योजनाएँ उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ाने का एक साधन बनती जा रही हैं। इन योजनाओं के प्रभावों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उन संवैधानिक, वित्तीय और संस्थागत शर्तों की विवेचना कीजिए जिनके बिना ऐसी योजनाएँ उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित नहीं कर सकतीं। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की संरचना: (1) परिचय: ओडिशा की ज्ञानोदय शिक्षारु समृद्धि योजना को समाचार के आधार पर रखें: 2025-26 के सत्र में नियमित स्नातक पाठ्यक्रमों में नामांकन 1,64,179 से बढ़कर 1,78,937 हुआ, यानी 14,758 की वृद्धि; आकांक्षी जिलों में कालाहांडी (99.09 प्रतिशत) और कोरापुट (98.82 प्रतिशत) में उच्च प्रतिशत; इस 99.09 प्रतिशत के आँकड़े की परिभाषा (प्रवेश दर या स्वीकृति अनुपात) स्पष्ट नहीं, इसलिए सावधानी से उद्धृत करें। (2) संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 21क (86वाँ संशोधन, 2002) और इसके क्रियान्वयन हेतु निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 केवल 6-14 वर्ष तक सीमित है, अतः उच्च शिक्षा हेतु राज्य की योजना संवैधानिक बाध्यता से परे नीतिगत विकल्प है; अनुच्छेद 41 और 46 (राज्य नीति के निदेशक तत्त्व) तथा अनुच्छेद 15(5) (93वाँ संशोधन) का सामाजिक न्याय आधार; समवर्ती सूची की प्रविष्टि 25 और संघ सूची की प्रविष्टि 66 (उच्च शिक्षा के मानकों का समन्वय) का संघीय ढाँचा; न्यायिक दृष्टि से उन्नीकृष्णन बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (1993) में शिक्षा के अधिकार को अनुच्छेद 21 का अंग मानना और मोहिनी जैन बनाम कर्नाटक राज्य (1992) का संदर्भ। (3) पहुँच के सकारात्मक प्रभाव: सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio) और समावेशी उच्च शिक्षा; राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का लक्ष्य 2035 तक सकल नामांकन अनुपात 50 प्रतिशत करना; आकांक्षी जिलों (नीति आयोग का आकांक्षी जिला कार्यक्रम, 2018) में वंचित वर्गों की भागीदारी; अखिल भारतीय उच्चतर शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) के आँकड़ों से तुलना। (4) गुणवत्ता और प्रशासनिक चुनौतियाँ: रिक्त पद; राज्य द्वारा 1,819 शिक्षण पदों पर भर्ती की प्रक्रिया; 66 सरकारी डिग्री कॉलेजों में प्राचार्य पद (पहले केवल 18 में स्वीकृत), 17 राज्य विश्वविद्यालयों में 262 नए पद; यशपाल समिति (2009) की रिपोर्ट ‘Rethinking Higher Education’ की चेतावनी कि मात्रात्मक विस्तार के साथ गुणवत्ता न घटे; कोठारी आयोग (1964-66) का शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का 6 प्रतिशत व्यय का सुझाव। (5) वित्तीय पक्ष: निःशुल्क योजना से सार्वजनिक व्यय में दीर्घकालिक दायित्व; राजकोषीय संघवाद, वित्त आयोग द्वारा करों के हस्तांतरण (अनुच्छेद 280) की भूमिका; विकल्प के रूप में लक्षित सहायता बनाम सार्वभौमिक निःशुल्क शिक्षा। (6) संतुलित दृष्टिकोण: समानता बनाम गुणवत्ता का द्वंद्व; अमर्त्य सेन के क्षमता दृष्टिकोण (capability approach) से शिक्षा को स्वतंत्रता का साधन मानना और उसके साथ संस्थागत क्षमता, शिक्षक संख्या और शोध-गुणवत्ता की अनिवार्यता। (7) निष्कर्ष: संवैधानिक दिशा और वित्तीय स्थिरता, तथा भर्ती एवं प्रशासनिक सुधारों के साथ समन्वय का आवश्यक होना।
स्रोत: orissapost.com
Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: ओडिशा के उच्च शिक्षा मंत्री के अनुसार, ‘केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा’ योजना का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- A) राज्य में प्राथमिक विद्यालयों की संख्या बढ़ाना।
- B) स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में छात्रों के नामांकन को बढ़ावा देना।
- C) स्नातक पाठ्यक्रमों में छात्रों के नामांकन को बढ़ावा देना।
- D) तकनीकी शिक्षा संस्थानों में सीटों की संख्या बढ़ाना।
उत्तर: C) स्नातक पाठ्यक्रमों में छात्रों के नामांकन को बढ़ावा देना। — ओडिशा के मंत्री के बयान के अनुसार, ‘केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा’ योजना ने स्नातक पाठ्यक्रमों में नामांकन को बढ़ावा दिया है।
Mains: ओडिशा सरकार की ‘केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा’ योजना का विश्लेषण करें। यह योजना राज्य में उच्च शिक्षा के परिदृश्य को कैसे प्रभावित कर रही है, विशेष रूप से स्नातक पाठ्यक्रमों में नामांकन के संदर्भ में? ओडिशा के संदर्भ में इसके संभावित लाभों और चुनौतियों पर चर्चा करें।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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