कर्नाटक कैबिनेट ने सन्नति विकास प्राधिकरण विधेयक को मंजूरी दी

कर्नाटक कैबिनेट ने सन्नति विकास प्राधिकरण विधेयक को मंजूरी दी

सन्नती विकास प्राधिकरण विधेयकबजट घोषणा2025-26 में प्रस्तावितमंत्रिमंडल स्वीकृतिविधेयक को मंजूरीविधानमंडल प्रस्तुतिशीतकालीन सत्र मेंसंरक्षण व विकासवैधानिक ढाँचा
सन्नती विकास प्राधिकरण विधेयक

✎ सन्नती (कलबुर्गी, कर्नाटक) का अशोक अभिलेख और कनगनहल्ली का अधोलोक महा चैत्य मौर्य-सातवाहन काल के दक्कन के बौद्ध केंद्र हैं, और सन्नती विकास प्राधिकरण विधेयक, 2026 इनके संरक्षण व विकास के लिए राज्य स्तर का वैधानिक प्राधिकरण…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भारतीय विरासत और संस्कृति (बौद्ध धर्म, मौर्य एवं सातवाहन काल, अशोक के अभिलेख, स्थापत्य)  |  GS Paper II — शासन और संविधान (राज्य विधानमंडल में विधेयक, वैधानिक प्राधिकरण, स्थानीय निकायों का प्रतिनिधित्व, भूमि अधिग्रहण)
  • Prelims: अशोक के अभिलेख (Ashokan Edicts) और ब्राह्मी लिपि, प्राकृत भाषा में अभिलेख, कनगनहल्ली (Kanaganahalli) — अधोलोक महा चैत्य (Adholoka Maha Chaitya), सातवाहन काल और उनके बौद्ध स्थल (जैसे अमरावती, नागार्जुनकोंडा), भीमा नदी (कृष्णा नदी की सहायक नदी), भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्व स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958 (AMASR Act), संविधान का अनुच्छेद 49 और समवर्ती सूची की प्रविष्टि 40 (पुरातत्व स्थल)
  • Essay: विकास और धरोहर संरक्षण के बीच संतुलन: क्या स्थानीय विकास प्राधिकरण सांस्कृतिक स्थलों के लिए प्रभावी उपकरण हैं?, धरोहर-आधारित पर्यटन: आर्थिक अवसर और सांस्कृतिक संवेदनशीलता

त्वरित पुनरावृत्ति: सन्नती (कलबुर्गी, कर्नाटक) का अशोक अभिलेख और कनगनहल्ली का अधोलोक महा चैत्य मौर्य-सातवाहन काल के दक्कन के बौद्ध केंद्र हैं, और सन्नती विकास प्राधिकरण विधेयक, 2026 इनके संरक्षण व विकास के लिए राज्य स्तर का वैधानिक प्राधिकरण प्रस्तावित करता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

कर्नाटक मंत्रिमंडल ने सन्नती विकास प्राधिकरण विधेयक, 2026 (Sannati Development Authority Bill, 2026) को स्वीकृति दी है। इसका उद्देश्य कलबुर्गी जिले के चित्तापुर तालुक में स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल सन्नती और पास के कनगनहल्ली पुरातात्विक स्थल के संरक्षण व विकास के लिए वैधानिक ढाँचा प्रदान करना है, ताकि इन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के विरासत, सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके। विधेयक को राज्य विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत किया जाना अपेक्षित है। प्राधिकरण का प्रस्ताव 2025-26 के राज्य बजट में घोषित किया गया था। विधेयक में अधिसूचित क्षेत्र में विकास गतिविधियों के लिए प्राधिकरण की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य करने और विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का प्रावधान भी शामिल है।

पृष्ठभूमि

  • 1986 में एक प्राकृतिक आपदा में सन्नती के चंद्रलंबा मंदिर परिसर का एक भाग क्षतिग्रस्त हुआ। मूर्ति बदलते समय ग्रामीणों को उसके पाद-पीठ (पणिपीठ) पर अंकित लेख मिला, जिसे अभिलेखविदों ने प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में लगभग 2,000 वर्ष पुराना अशोक का अभिलेख पढ़ा।
  • इस अभिलेख के आधार पर पुरातत्वविद लगभग 3 किलोमीटर दूर कनगनहल्ली गाँव में भीमा नदी के तट पर एक गड्ढेनुमा संरचना तक पहुँचे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने 1994 में यहाँ उत्खनन आरंभ किया।
  • चार वर्षों के उत्खनन में अधोलोक महा चैत्य (Great Stupa of the Netherworlds) के अवशेष मिले, जिसका निर्माण मौर्य और सातवाहन काल में तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से तीसरी शताब्दी ईस्वी के बीच माना जाता है। यहाँ से अशोक और उनकी रानियों व परिचारिकाओं का पत्थर का मूर्तिशिल्प भी मिला, जिस पर ‘रया असोको’ (राजा अशोक) अंकित है।
  • दक्कन क्षेत्र में बौद्ध सभ्यता के प्रमुख केंद्रों में सन्नती और कनगनहल्ली का विशेष महत्व है। मौर्य शासन के अभिलेख और सातवाहन काल के स्थल यह दर्शाते हैं कि दक्षिण भारत में बौद्ध धर्म का प्रसार कई शताब्दियों तक रहा।
  • भारत में पुरातात्विक स्थलों का संरक्षण मुख्यतः केंद्रीय कानून (AMASR Act, 1958) और राज्य विधियों के माध्यम से होता है। राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों का प्रबंधन केंद्र के अधीन ASI करता है, जबकि स्थानीय विकास और नियोजन से संबंधित विषय राज्य सूची के अंतर्गत आते हैं।

सन्नती विकास प्राधिकरण विधेयक, 2026 (Sannati Development Authority Bill, 2026) क्या है?

  • यह राज्य स्तर पर प्रस्तावित विधेयक है, जिसका उद्देश्य सन्नती और कनगनहल्ली के संरक्षण व विकास के लिए वैधानिक ढाँचा तैयार करना है।
  • प्राधिकरण की अध्यक्षता कलबुर्गी जिले के प्रभारी मंत्री करेंगे, और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री सह-अध्यक्ष होंगे।
  • सदस्यों में संबंधित विभागों के मंत्री, विधायक, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
  • प्राधिकरण एक व्यापक विकास योजना तैयार कर उसे सरकार की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत करेगा।
  • अधिसूचित क्षेत्र में किसी भी विकास गतिविधि के लिए प्राधिकरण की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी, जिससे अनियंत्रित निर्माण को रोका जा सके।
  • विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का प्रावधान भी विधेयक में है। राज्य में भूमि अधिग्रहण राज्य विधियों और केंद्रीय कानून, उचित प्रतिकर और पारदर्शिता में उचित प्रतिकर एवं पुनर्वास अधिनियम, 2013 के दायरे में होता है।
  • विधेयक का उद्देश्य संरक्षण, स्थानीय विकास और पर्यटन, तीनों के बीच संतुलन बनाना है। यह सांस्कृतिक स्थलों के लिए विशेष प्राधिकरण बनाने के राज्य-स्तरीय प्रयोग का उदाहरण है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
भौगोलिक अवस्थिति कर्नाटक के कलबुर्गी जिले की चित्तापुर तालुका में भीमा नदी के तट पर स्थित; दक्कन क्षेत्र के प्रमुख बौद्ध केंद्रों में से एक
अशोकीय शिलालेख (Ashokan Edicts) 1986 में प्राकृतिक आपदा से चंद्रलंबा मंदिर परिसर की क्षति के बाद मूर्ति के पीठ (पणिपीठ) पर प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में लेख मिला, जिसे लगभग 2,000 वर्ष पुराना अशोकीय शिलालेख माना गया
कन्नगनहल्ली उत्खनन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा 1994 से चार वर्ष तक चले उत्खनन में अधोलोक महा चैत्य (महास्तूप) के अवशेष प्राप्त हुए
कालखंड मौर्य और सातवाहन काल, लगभग तीसरी सदी ईसा पूर्व से तीसरी सदी ईस्वी तक
अशोक का शिल्प-चित्रण रानियों और परिचारिकाओं के साथ सम्राट अशोक का पत्थर का शिल्प, जिस पर ‘राय असोको’ (राजा अशोक) का लेख अंकित है; मौर्यकालीन मूर्तिकला का महत्वपूर्ण उदाहरण

महत्व

सांस्कृतिक और ऐतिहासिक

  • सन्नती बौद्ध सभ्यता के प्रसार को दक्कन क्षेत्र में समझने का महत्वपूर्ण स्रोत है, जहाँ मौर्य और सातवाहन दोनों शासकों के प्रभाव के साक्ष्य मिलते हैं
  • अशोकीय लेख यह दर्शाते हैं कि मौर्य साम्राज्य का धम्म-संदेश दक्षिण भारत तक पहुँचा था
  • महास्तूप के अवशेष स्तूप-स्थापत्य और बौद्ध अनुष्ठानों के विकास को समझने में सहायक हैं

पर्यटन और आर्थिक

  • बौद्ध सर्किट के विकास से धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है
  • स्थानीय स्तर पर होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और गाइड सेवाओं जैसे रोज़गार सृजित होने की संभावना है
  • पर्यटन-आधारित आर्थिक गतिविधि से स्थानीय अर्थव्यवस्था में विविधता आ सकती है

शासकीय और प्रशासनिक

  • प्रस्तावित विधेयक एक वैधानिक ढाँचा प्रदान करता है, जिससे विकास कार्यों में एकरूपता और जवाबदेही आती है
  • अधिसूचित क्षेत्र में विकास गतिविधियों के लिए प्राधिकरण की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होने से अनियंत्रित निर्माण पर रोक का प्रावधान है
  • विकास योजना प्रस्तुत करने की व्यवस्था से विरासत-संरक्षण और स्थानीय विकास के बीच समन्वय की नीति-प्रक्रिया स्पष्ट होती है

क्षेत्रीय और सामाजिक

  • स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों को सदस्य बनाने से विकास-निर्णय में स्थानीय भागीदारी सुनिश्चित होती है
  • सन्नती और कन्नगनहल्ली को एक साथ संरक्षित करने से समग्र (landscape-level) संरक्षण दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है

चुनौतियाँ

1. संरक्षण और विकास के बीच संतुलन

  • पर्यटन-आधारित विकास के दबाव में पुरातात्विक अवशेषों के आसपास निर्माण से क्षति का खतरा बढ़ सकता है
  • पूर्व स्वीकृति का प्रावधान तभी प्रभावी होगा जब निर्माण-नियमों की स्पष्ट और सार्वजनिक परिभाषा हो

2. भूमि अधिग्रहण और उचित प्रतिकर

  • विधेयक में भूमि अधिग्रहण का प्रावधान है, जिससे प्रभावित परिवारों के हित और पुनर्वास का प्रश्न उठता है
  • भूमि अधिग्रहण संपत्ति के अधिकार से जुड़ा है, जो अब संवैधानिक विधिक अधिकार के रूप में संरक्षित है
  • सार्वजनिक उद्देश्य और निजी हित के बीच पारदर्शी प्रक्रिया आवश्यक है

3. प्राधिकरण का शासन-ढाँचा

  • प्राधिकरण का अध्यक्ष जिला प्रभारी मंत्री होगा, जिससे कार्यकारी नियंत्रण केंद्रित हो सकता है
  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और राज्य पुरातत्व विभाग की भूमिकाओं के बीच समन्वय का स्पष्ट उल्लेख आवश्यक है
  • विकास योजना की स्वीकृति का अधिकार राज्य सरकार के पास है; स्थानीय निकायों की वास्तविक भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए

4. दीर्घकालिक शोध और दस्तावेज़ीकरण

  • 1994 से चले उत्खनन के बाद भी कई पुरातात्विक तथ्यों का पूर्ण अध्ययन और प्रकाशन शेष माना जा सकता है
  • अवशेषों के संरक्षण, प्रदर्शन और डिजिटल अभिलेखीकरण के लिए स्थायी वित्तीय व्यवस्था आवश्यक है

5. पर्यटन की वहन-क्षमता

  • अधिक पर्यटक आने से स्थल पर भीड़, कचरा और जल-संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है
  • भीमा नदी तट का पारिस्थितिक संतुलन विकास परियोजनाओं से प्रभावित हो सकता है

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
अनियंत्रित निर्माण पुरातात्विक अवशेषों के निकट निर्माण से भौतिक क्षति और मूल स्वरूप में बदलाव का खतरा
भूमि अधिग्रहण प्रभावित परिवारों के प्रतिकर, पुनर्वास और आजीविका पर प्रभाव
संस्थागत समन्वय ASI, राज्य पुरातत्व विभाग और स्थानीय निकायों के बीच अधिकार-क्षेत्र की अस्पष्टता
पर्यटन का दबाव वहन-क्षमता से अधिक भीड़ से पर्यावरण और स्थल की संवेदनशीलता पर असर
वित्तीय निरंतरता संरक्षण, शोध और रखरखाव के लिए दीर्घकालिक बजट और मानव संसाधन की उपलब्धता

आगे की राह

  • विधेयक में ASI और राज्य पुरातत्व विभाग के साथ समन्वय की स्पष्ट व्यवस्था की जाए, ताकि अधिकार-क्षेत्र में भ्रम न रहे
  • अधिसूचित क्षेत्र की सीमा और निर्माण-नियम सार्वजनिक रूप से परिभाषित किए जाएँ
  • विकास योजना में विरासत-प्रभाव और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन को अनिवार्य किया जाए
  • भूमि अधिग्रहण में पारदर्शी प्रक्रिया, उचित प्रतिकर और पुनर्वास के प्रावधान सुनिश्चित किए जाएँ
  • स्थानीय निकायों और ग्रामीण समुदाय को निर्णय-प्रक्रिया और पर्यटन-लाभ दोनों में भागीदार बनाया जाए
  • पर्यटन के लिए वहन-क्षमता का निर्धारण हो और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था बने
  • उत्खनन-अभिलेखों, शिलालेखों और शिल्पों का डिजिटल संग्रह तैयार कर सार्वजनिक शोध के लिए उपलब्ध कराया जाए
  • शोध, संरक्षण और रखरखाव के लिए स्थायी बजटीय प्रावधान सुनिश्चित किया जाए

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

सन्नती पुरातात्विक स्थल (Sannati Archaeological Site) · अशोकीय अभिलेख (Ashokan Edicts) · अधोलोक महाचैत्य (Adholoka Maha Chaitya) · ब्राह्मी लिपि और प्राकृत भाषा (Brahmi Script and Prakrit) · प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्वीय स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958 (Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act, 1958) · राष्ट्रीय महत्व के स्मारक (Monuments of National Importance) · संघ सूची की प्रविष्टि 40 (Union List Entry 40) · समवर्ती सूची और भूमि अधिग्रहण (Concurrent List and Land Acquisition) · राज्य विकास प्राधिकरण (State Development Authority) · अनुच्छेद 49 (Article 49) · विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site) · बौद्ध विरासत पर्यटन (Buddhist Heritage Tourism)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 49 — राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों का संरक्षण (DPSP)
  • अनुच्छेद 300A — संपत्ति का अधिकार; भूमि अधिग्रहण
  • सातवीं अनुसूची, राज्य सूची प्रविष्टि 12 — राज्य में पुरातात्विक स्थल
  • सातवीं अनुसूची, समवर्ती सूची प्रविष्टि 42 — भूमि अधिग्रहण का विषय

अवधारणा प्रवाह

1986 में प्राकृतिक आपदा से चंद्रलंबा मंदिर परिसर को क्षति  →  मूर्ति के पीठ पर अशोकीय लेख की खोज, जिससे कन्नगनहल्ली की ओर संकेत मिला  →  ASI द्वारा 1994 से उत्खनन; महा चैत्य और अशोक-शिल्प की प्राप्ति  →  स्थल का बौद्ध और मौर्यकालीन ऐतिहासिक महत्व स्थापित होना  →  बजट 2025-26 में विकास प्राधिकरण की घोषणा  →  मंत्रिमंडल द्वारा सन्नती विकास प्राधिकरण विधेयक, 2026 को स्वीकृति; शीतकालीन सत्र में प्रस्तुति की संभावना  →  प्राधिकरण द्वारा विकास योजना, पूर्व स्वीकृति और भूमि अधिग्रहण के माध्यम से संरक्षण और पर्यटन विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अशोक के अभिलेख कुछ क्षेत्रों में प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण मिलते हैं।
2. अशोक के सभी अभिलेख केवल संस्कृत भाषा में लिखे गए थे।
3. प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्वीय स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958 के अंतर्गत संरक्षित स्मारक के चारों ओर निषिद्ध क्षेत्र की सीमा 100 मीटर तक हो सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: सन्नती और कर्नाटक के कई अन्य स्थलों के अभिलेख प्राकृत में ब्राह्मी लिपि में हैं। कथन 2 गलत है, क्योंकि अशोक के अभिलेख प्राकृत, यूनानी-अरामेइक (कंधार) और खरोष्ठी (शाहबाजगढ़ी) जैसी भाषाओं व लिपियों में मिलते हैं, संस्कृत में नहीं। कथन 3 सही है, क्योंकि संशोधित नियमों के अनुसार संरक्षित स्मारक के चारों ओर 100 मीटर तक निषिद्ध और 200 मीटर तक विनियमित क्षेत्र होता है।

Q2. कथन (A): किसी राज्य विधानमंडल द्वारा प्रस्तावित विरासत स्थल विकास प्राधिकरण विधेयक में भूमि अधिग्रहण का प्रावधान किया जा सकता है।
कारण (R): भूमि अधिग्रहण संघ सूची में आता है और इस पर केवल संसद कानून बना सकती है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  3. (A) सही है, लेकिन (R) गलत है
  4. (A) गलत है, लेकिन (R) सही है

उत्तर: (A) सही है, लेकिन (R) गलत है — भूमि अधिग्रहण समवर्ती सूची की प्रविष्टि 42 में आता है, संघ सूची में नहीं। इसलिए (R) गलत है। भूमि राज्य सूची का विषय है और समवर्ती विषय पर राज्य विधानमंडल भी कानून बना सकते हैं, बशर्ते वे केंद्रीय कानून के विरुद्ध न हों; अतः (A) सही है। यह प्रश्न संघीय विधायी व्यवस्था की समझ की परख करता है।

Q3. निम्नलिखित स्तंभों का मिलान कीजिए:
स्तंभ I (अशोकीय अभिलेख स्थल)
1. शाहबाजगढ़ी
2. कंधार
3. लुंबिनी

स्तंभ II (अभिलेख की भाषा/लिपि)
a. खरोष्ठी लिपि
b. यूनानी और अरामेइक भाषा-लिपि
c. ब्राह्मी लिपि

सही मिलान चुनिए:

  1. 1-a, 2-b, 3-c
  2. 1-b, 2-a, 3-c
  3. 1-a, 2-c, 3-b
  4. 1-c, 2-a, 3-b

उत्तर: 1-a, 2-b, 3-c — शाहबाजगढ़ी (पाकिस्तान) के अभिलेख खरोष्ठी लिपि में हैं। कंधार (अफगानिस्तान) का द्विभाषी अभिलेख यूनानी और अरामेइक में है। लुंबिनी स्तंभ लेख ब्राह्मी लिपि और प्राकृत में है, जैसे सन्नती का अभिलेख। अशोक के अभिलेखों की लिपि और भाषा में भौगोलिक विविधता UPSC में बार-बार पूछी जाती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ सन्नती जैसे बौद्ध-पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण के लिए राज्य स्तर पर विशेष विकास प्राधिकरण गठित करने का प्रस्ताव संरक्षण और विकास के बीच संतुलन की दृष्टि से कितना उपयुक्त है? प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्वीय स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958 के ढांचे के संदर्भ में समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि यदि ऐसे प्राधिकरणों की संरक्षण संबंधी शक्तियाँ केंद्रीय संरक्षित स्मारक नियमों से टकराएँ, तो कौन-सी संवैधानिक व्यवस्था लागू होगी और क्यों। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल उत्तर के बिंदु:

1. भूमिका: सन्नती (कलबुर्गी, कर्नाटक) में 1986 में चंद्रलंबा मंदिर परिसर में पाए गए पेडस्टल अभिलेख से अशोकीय अभिलेख की पहचान, 1994 से ASI उत्खनन, अधोलोक महाचैत्य (मौर्य व सातवाहन काल, तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से तीसरी शताब्दी ईस्वी) और ‘रायः अशोक’ अंकित मूर्ति का उल्लेख। विधेयक की मुख्य विशेषताएँ: प्राधिकरण की अध्यक्षता जिला प्रभारी मंत्री करेंगे, विकास योजना का प्रस्ताव, निर्धारित क्षेत्र में पूर्व अनुमोदन की अनिवार्यता, और भूमि अधिग्रहण का प्रावधान।

2. संवैधानिक ढांचा: अनुच्छेद 49 (राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों का संरक्षण राज्य का दायित्व); संघ सूची की प्रविष्टि 40 (राष्ट्रीय महत्व के प्राचीन स्मारक, संसद द्वारा घोषित); राज्य सूची की प्रविष्टि 5 (स्थानीय शासन) व प्रविष्टि 18 (भूमि); समवर्ती सूची की प्रविष्टि 42 (भूमि अधिग्रहण); अनुच्छेद 48A और 51A(छ) (पर्यावरण संरक्षण)। पर्यावरण सुरक्षा के लिए 42वें संशोधन से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख।

3. केंद्रीय कानून: AMASR अधिनियम, 1958 के अंतर्गत ASI द्वारा संरक्षित स्मारक, निषिद्ध क्षेत्र (100 मीटर) और विनियमित क्षेत्र (200 मीटर), 2010 के संशोधन और नियम; प्राचीन और पुरातात्विक स्थल व विरासत के अन्य कानून जैसे प्राचीन कला निधि (Antiquities and Art Treasures Act, 1972) का उल्लेख।

4. राज्य कानून: कर्नाटक नगर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम, 1961 की भूमिका; विशेष प्राधिकरण बनाम सामान्य नगर नियोजन संस्थाओं का तुलनात्मक विश्लेषण; स्थानीय निकायों की सहभागिता।

5. न्यायिक दृष्टिकोण: M.C. Mehta बनाम भारत संघ (ताज ट्रेपेज़ियम मामला, 1996) में सांस्कृतिक धरोहर और पर्यावरण संरक्षण पर न्यायालय की टिप्पणी; विकास परियोजनाओं में ‘सतत विकास’ (Sustainable Development) और सावधानी सिद्धांत (Precautionary Principle)।

6. संतुलित दृष्टिकोण और तर्क: समर्थन में—विशेष प्राधिकरण से एकीकृत योजना, अवैध निर्माण पर रोक, पर्यटन और स्थानीय आजीविका, विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Convention, 1972, भारत द्वारा 1977 में अनुमोदित) के दावे की संभावना। आलोचना में—पुरातत्व ASI के क्षेत्राधिकार से टकराव, भूमि अधिग्रहण से स्थानीय विस्थापन, राजनीतिक/प्रशासनिक नियंत्रण से विशेषज्ञता की कमी, और बहु-संस्था समन्वय की चुनौती।

7. परिणाम उपसाध्य प्रश्न: केंद्रीय कानून के विरुद्ध राज्य कानून पर संविधान के अनुच्छेद 254 (संघ-राज्य विधियों में असंगति) का सिद्धांत लागू होगा; समवर्ती विषय में संसद की विधि प्रभावी होगी, बशर्ते राज्य विधि को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त न हो। प्रायः ‘प्रभुत्व’ के लिए अनुच्छेद 254(2) का उल्लेख।

8. निष्कर्ष: संरक्षण मानकों को केंद्र-राज्य समन्वय, ASI की तकनीकी भूमिका और स्थानीय सहभागिता के साथ जोड़ना; सुझाव—स्पष्ट सीमांकन, पुरातात्विक प्रभाव आकलन और सार्वजनिक परामर्श।

स्रोत: The Hindu

Karnataka PCS (KPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: हाल ही में कर्नाटक मंत्रिमंडल ने सन्नति को एक विरासत स्थल के रूप में विकसित करने के लिए एक विकास प्राधिकरण विधेयक को मंजूरी दी है। सन्नति किस नदी के तट पर स्थित है?

  1. कृष्णा
  2. कावेरी
  3. तुंगभद्रा
  4. शरावती

उत्तर: कृष्णा — सन्नति, जो अपने बौद्ध अवशेषों के लिए प्रसिद्ध है, कृष्णा नदी के तट पर स्थित है।

Mains: कर्नाटक के विरासत पर्यटन को बढ़ावा देने में सन्नति विकास प्राधिकरण विधेयक की संभावित भूमिका का विश्लेषण करें। यह विधेयक राज्य की सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक विकास को कैसे प्रभावित कर सकता है?


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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