30 Oct भारत की UNSC चुनाव रणनीति: AI और समुद्री सुरक्षा को प्राथमिकता
✎ सुरक्षा परिषद् के 10 अस्थायी सदस्यों का चुनाव महासभा दो-तिहाई बहुमत से दो वर्ष के लिए करती है, और भारत की 2028–2029 की दावेदारी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, समुद्री सुरक्षा तथा SAGAR दृष्टिकोण केंद्र में हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् की संरचना और सुधार, भारत की भूमिका, समुद्री और तकनीकी शासन) | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा और सुरक्षा चुनौतियाँ (समुद्री सुरक्षा, गैर-राज्य अभिकर्ता, प्रौद्योगिकी का दुरुपयोग) | GS Paper III — विज्ञान और प्रौद्योगिकी (कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोग और उसके जोखिम)
- Prelims: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC): 15 सदस्य, जिनमें 5 स्थायी और 10 अस्थायी, अनुच्छेद 23, संयुक्त राष्ट्र चार्टर: सुरक्षा परिषद् के अस्थायी सदस्यों का निर्वाचन और कार्यकाल, संयुक्त राष्ट्र समुद्री विधि अभिसमय (UNCLOS), 1982: अंतरराष्ट्रीय जलसीमा और नौवहन की स्वतंत्रता, होर्मुज़ जलसंधि (Strait of Hormuz): फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला मार्ग, सूचना संलयन केंद्र–हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR): भारतीय नौसेना द्वारा संचालित, सागर (SAGAR): Security and Growth for All in the Region, 2015 में प्रस्तुत दृष्टिकोण, अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO): समुद्री सुरक्षा और नाविकों से संबंधित मानक, समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness): उपग्रह चित्र, रडार और पोत-ट्रैकिंग आँकड़े
- Essay: प्रौद्योगिकी मानव सुरक्षा को सुदृढ़ करे, न कि उसे कमजोर करे: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दोहरे उपयोग की चुनौती, साझा समुद्री विरासत (maritime commons) की सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता: नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था की परीक्षा
त्वरित पुनरावृत्ति: सुरक्षा परिषद् के 10 अस्थायी सदस्यों का चुनाव महासभा दो-तिहाई बहुमत से दो वर्ष के लिए करती है, और भारत की 2028–2029 की दावेदारी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, समुद्री सुरक्षा तथा SAGAR दृष्टिकोण केंद्र में हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में ‘उभरती प्रौद्योगिकियाँ और समुद्री सुरक्षा’ विषय पर हुई खुली बहस में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और समुद्री सुरक्षा, 2028–2029 के कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्यता हेतु भारत की प्राथमिकताएँ हैं। यह बहस उस समय हुई जब होर्मुज़ जलसंधि में तीन तेल टैंकरों के समुद्री सुरुंगों से टकराने और जलने की सूचना मिली थी, जिससे वाणिज्यिक नौवहन के जोखिम स्पष्ट हुए। भारत ने वाणिज्यिक पोतों पर हमलों की निंदा की और नौवहन की स्वतंत्रता, बाधारहित वैध समुद्री व्यापार तथा नाविकों की सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय विधि के अनुरूप बनाए रखने पर बल दिया। भारत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा उपग्रह चित्रों और पोत-ट्रैकिंग आँकड़ों के विश्लेषण से समुद्री क्षेत्र जागरूकता बढ़ाने के प्रस्ताव के साथ सहयोग की पेशकश की और सूचना साझाकरण के मॉडल के रूप में IFC-IOR का उल्लेख किया।
पृष्ठभूमि
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में अस्थायी सदस्यों का चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा किया जाता है। इनका कार्यकाल दो वर्ष का होता है और वे तुरंत पुनर्निर्वाचन के पात्र नहीं होते। चुनाव में भौगोलिक वितरण का ध्यान रखा जाता है और दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है।
- सुरक्षा परिषद् का प्राथमिक दायित्व अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना है। अनुच्छेद 24 के अंतर्गत सदस्य राष्ट्र इस दायित्व के लिए परिषद् को कार्य सौंपते हैं।
- UNCLOS, 1982 समुद्री क्षेत्रों पर व्यापक विधिक ढाँचा प्रदान करता है। इसमें प्रादेशिक जल, अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और खुले समुद्र में नौवहन की स्वतंत्रता के प्रावधान हैं।
- भारत ने 2015 में ‘सागर’ (SAGAR) दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जिसमें क्षेत्र के सभी देशों के लिए सुरक्षा और विकास पर बल दिया गया है। IFC-IOR की स्थापना 2018 में हुई, और इसमें 12 साझेदार हैं।
- सुरक्षा परिषद् की यह खुली बहस ग्रीस की अध्यक्षता में आयोजित हुई। इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ग्रीस के विदेश मंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और समुद्री सुरक्षा पर उच्च-स्तरीय चर्चा की थी।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् की अस्थायी सदस्यता और समुद्री सुरक्षा का ढाँचा क्या है?
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख अंग है, जिसके 15 सदस्य होते हैं। इनमें 5 स्थायी सदस्य (चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन, अमेरिका) और 10 अस्थायी सदस्य हैं।
- अस्थायी सदस्यों का चुनाव महासभा करती है। चुनाव में क्षेत्रीय समूहों के आधार पर प्रतिनिधित्व का सिद्धांत अपनाया जाता है।
- सुरक्षा परिषद् के निर्णयों को अंतरराष्ट्रीय विधि में बाध्यकारी माना जाता है, विशेषकर जब वे अध्याय VII के अंतर्गत लिए जाएँ।
- नौवहन की स्वतंत्रता UNCLOS का एक मूल सिद्धांत है। वाणिज्यिक पोतों पर हमले सीधे तौर पर इस सिद्धांत और नाविकों के अधिकारों से जुड़े हैं।
- समुद्री क्षेत्र जागरूकता का अर्थ है समुद्र में होने वाली गतिविधियों की पहचान, विश्लेषण और समय पर सूचना। इसमें उपग्रह चित्र, रडार, AIS जैसे पोत-ट्रैकिंग आँकड़े और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण सहायक होते हैं।
- सूचना संलयन केंद्र (IFC) सूचना साझाकरण का मंच है, जिसमें विभिन्न देशों के समुद्री सूचना अधिकारी एक साथ काम करते हैं। भारत का IFC-IOR भारतीय नौसेना की मेजबानी में कार्य करता है।
- गैर-राज्य अभिकर्ता, जैसे आतंकवादी समूह, नई तकनीकों के दुरुपयोग का खतरा पैदा कर सकते हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सूचना-साझाकरण आवश्यक माने जाते हैं।
- समुद्री सुरक्षा का आर्थिक पक्ष भी महत्वपूर्ण है। पोतों पर हमलों से आपूर्ति शृंखला बाधित होती है और विकासशील देशों पर ऊँची लागत तथा आर्थिक अनिश्चितता का अधिक बोझ पड़ता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| उम्मीदवारी का लक्ष्य | भारत 2028–2029 के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता का उम्मीदवार है। यह दो वर्ष का कार्यकाल होता है और सदस्यता महासभा द्वारा चुनी जाती है। |
| प्राथमिकता के दो विषय | कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और समुद्री सुरक्षा को भारत ने अपनी उम्मीदवारी के मुख्य एजेंडे के रूप में चिह्नित किया है। इससे भारत की नीति का तकनीकी और सामुद्रिक आयाम सामने आता है। |
| खुली बहस का आयोजन | यह बहस ग्रीस की परिषद अध्यक्षता के अंतर्गत आयोजित हुई थी। विषय था उभरती प्रौद्योगिकियाँ और समुद्री सुरक्षा, जिसका संबंध शांति और सुरक्षा के निहितार्थों से है। |
| सागर दृष्टिकोण | सागर (SAGAR: Security and Growth for All in the Region) भारत का क्षेत्रीय सहयोग का दृष्टिकोण है। इसमें सुरक्षा और आर्थिक विकास को साथ रखा गया है। भारत ने इसी के आधार पर समुद्री सहयोग का प्रस्ताव रखा। |
| सूचना संलयन केंद्र | सूचना संलयन केंद्र–हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR) वर्ष 2018 में स्थापित हुआ और भारतीय नौसेना इसकी मेज़बानी करती है। स्रोत के अनुसार इसके 12 साझेदार हैं। यह सूचना-साझाकरण पर आधारित क्षेत्रीय सहयोग का उदाहरण है। |
| वाणिज्यिक पोतों पर हमले | होरमुज़ जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों पर सुरंगों से हुए हमलों का उल्लेख बहस में हुआ। इससे नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री व्यापार की सुरक्षा का प्रश्न सामने आया। |
महत्व
कूटनीतिक
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उम्मीदवारी के दौरान भारत ने अपने एजेंडे को ठोस विषयों से जोड़ा है, जिससे उसकी वैश्विक भूमिका का तर्क मज़बूत होता है।
- ग्रीस के साथ उच्च-स्तरीय चर्चा को आगे बढ़ाने की बात कहकर भारत ने द्विपक्षीय सहयोग को बहुपक्षीय मंच से जोड़ा।
- अस्थायी सदस्य के रूप में भारत की भूमिका उसे नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के विकास में सक्रिय स्थान देगी।
सामुद्रिक और रणनीतिक
- हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री क्षेत्र जागरूकता बढ़ाने के लिए सूचना-साझाकरण का व्यावहारिक ढांचा (IFC-IOR) पहले से उपलब्ध है।
- नौवहन की स्वतंत्रता और वैध समुद्री वाणिज्य की सुरक्षा भारत की समुद्री नीति का केंद्रीय तत्व है, क्योंकि भारत का व्यापार बड़े हिस्से में समुद्री मार्गों पर निर्भर है।
- होरमुज़ जैसे संकरे जलमार्गों में व्यवधान ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा पर सीधा प्रभाव डालता है।
तकनीकी और आर्थिक
- उपग्रह चित्र, रडार और पोत-ट्रैकिंग आँकड़ों के विश्लेषण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता समुद्री निगरानी को अधिक प्रभावी बना सकती है।
- वाणिज्यिक पोतों पर हमलों से आपूर्ति शृंखला बाधित होती है और विकासशील देशों पर लागत का बोझ अधिक पड़ता है, जैसा भारत ने रेखांकित किया।
मानवीय और नैतिक
- नाविकों (seafarers) की सुरक्षा को भारत ने प्राथमिकता के रूप में रखा है, जो समुद्री कानून के मानवीय पक्ष को उजागर करता है।
- प्रौद्योगिकी का उद्देश्य मानव सुरक्षा को मज़बूत करना और असमानता न बढ़ाना होना चाहिए, यह सिद्धांत भारत ने सामने रखा।
चुनौतियाँ
1. प्रौद्योगिकी का दुरुपयोग
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत निगरानी तकनीक का उपयोग गैर-राज्य तत्व भी कर सकते हैं, जैसा महासचिव के चीफ़ ऑफ़ कैबिनेट ने चेतावनी दी।
- तकनीक का दोहरा उपयोग (dual use) होने से इसके नियमन की जटिलता बढ़ती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आंतरिक सुरक्षा और नई प्रौद्योगिकी की चुनौतियाँ
2. समुद्री मार्गों पर भौतिक खतरे
- सुरंगों और हमलों से वाणिज्यिक पोत प्रभावित होते हैं और नाविकों के जीवन को खतरा रहता है।
- संकरे जलडमरूमध्यों में एक घटना भी वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर व्यापक असर डाल सकती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2 और GS-3: अंतरराष्ट्रीय संबंध, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा
3. अंतरराष्ट्रीय विधि का अनुपालन
- नौवहन की स्वतंत्रता और निर्दोष मार्ग जैसे सिद्धांत समुद्री विधि संहिता (UNCLOS) में निहित हैं, परंतु इनके व्यवहार में लागू होने पर मतभेद रहते हैं।
- नई तकनीक से जुड़े खतरों के लिए अभी स्पष्ट बहुपक्षीय मानदंड सीमित हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-2: अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ और अंतरराष्ट्रीय विधि
4. सूचना-साझाकरण में विश्वास की कमी
- प्रभावी समुद्री निगरानी के लिए देशों के बीच डेटा साझा करना आवश्यक है, किंतु संवेदनशील सैन्य सूचना साझा करने में संकोच रहता है।
- साझेदारी का दायरा बढ़ाने के लिए समान मानक और भरोसेमंद ढांचे की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: क्षेत्रीय समूह और भारत के पड़ोस व हिंद महासागर से जुड़े सहयोग
5. विकासशील देशों पर असमान प्रभाव
- युद्ध-सदृश समुद्री व्यवधान से ढुलाई और बीमा की लागत बढ़ती है, जिसका सबसे अधिक बोझ विकासशील देशों पर पड़ता है।
- तकनीकी क्षमता के अभाव में ये देश समुद्री निगरानी प्रणालियों के लाभ से वंचित रह सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-2 और GS-3: विकास, असमानता और आर्थिक सुरक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| तकनीक का दोहरा उपयोग | कृत्रिम बुद्धिमत्ता का नागरिक और सैन्य दोनों उपयोग संभव है, जिससे दुरुपयोग रोकना कठिन होता है। |
| गैर-राज्य तत्वों का खतरा | आतंकवादी संगठन नई तकनीक का उपयोग समुद्री हमलों या निगरानी में बाधा डालने के लिए कर सकते हैं। |
| सुरंगों से जोखिम | होरमुज़ जलडमरूमध्य जैसे मार्गों पर सुरंगें वाणिज्यिक पोतों और नाविकों के लिए तत्काल खतरा हैं। |
| नियम-निर्माण की कमी | नई तकनीक से जुड़े समुद्री खतरों के लिए स्पष्ट और सर्वमान्य बहुपक्षीय मानदंड अभी सीमित हैं। |
| सूचना-साझाकरण की सीमाएँ | संवेदनशील डेटा साझा करने में विश्वास की कमी क्षेत्रीय निगरानी को कमज़ोर करती है। |
| विकासशील देशों की असमान क्षमता | तकनीकी और वित्तीय संसाधनों के अभाव में ये देश समुद्री सुरक्षा के लाभों से पीछे रह जाते हैं। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- सागर (SAGAR: Security and Growth for All in the Region) दृष्टिकोण
- सूचना संलयन केंद्र–हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR)
आगे की राह
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सैन्य और नागरिक उपयोग के लिए स्पष्ट नैतिक एवं परिचालन मानदंड बहुपक्षीय मंच पर विकसित किए जाएँ।
- उपग्रह, रडार और पोत-ट्रैकिंग आँकड़ों के विश्लेषण के लिए समुद्री क्षेत्र जागरूकता तंत्र को क्षेत्रीय स्तर पर मज़बूत किया जाए।
- सूचना संलयन केंद्र–हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR) की साझेदारी का विस्तार करते हुए डेटा-सुरक्षा और गोपनीयता के मानक तय किए जाएँ।
- नौवहन की स्वतंत्रता और वैध समुद्री वाणिज्य की रक्षा के लिए समुद्री विधि संहिता (UNCLOS) के सिद्धांतों के अनुपालन को सुदृढ़ किया जाए।
- नाविकों की सुरक्षा हेतु प्रशिक्षण, बीमा और आपातकालीन प्रतिक्रिया के अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल को व्यवहार में लाया जाए।
- विकासशील देशों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिए क्षमता-निर्माण और प्रौद्योगिकी-हस्तांतरण के साझा कार्यक्रम अपनाए जाएँ।
- गैर-राज्य तत्वों द्वारा तकनीक के दुरुपयोग को रोकने के लिए साइबर और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) · कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) · समुद्री क्षेत्र-जागरूकता (Maritime Domain Awareness) · नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) · संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council) · अस्थायी सदस्यता (Non-permanent Membership) · SAGAR (Security and Growth for All in the Region) · IFC-IOR (Information Fusion Centre – Indian Ocean Region) · संयुक्त राष्ट्र समुद्री विधि अभिसमय (UNCLOS) · होर्मुज जलसंधि (Strait of Hormuz) · उभरती प्रौद्योगिकी (Emerging Technologies) · गैर-राज्य अभिनेता (Non-state Actors)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 51 — अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का संवर्धन, अंतरराष्ट्रीय विधि का सम्मान
अवधारणा प्रवाह
नई तकनीकों (कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उपग्रह निगरानी) से समुद्री क्षेत्र की निगरानी क्षमता बढ़ती है। → उसी तकनीक के दुरुपयोग और गैर-राज्य तत्वों के खतरे से समुद्री सुरक्षा के नए जोखिम पैदा होते हैं। → होरमुज़ जैसे मार्गों पर सुरंगों और हमलों से वाणिज्यिक पोत और नाविक प्रभावित होते हैं। → पोतों पर खतरे से आपूर्ति शृंखला बाधित होती है और विकासशील देशों पर लागत का बोझ बढ़ता है। → इन चुनौतियों के समाधान के लिए भारत सूचना-साझाकरण, सागर दृष्टिकोण और बहुपक्षीय सहयोग का प्रस्ताव रखता है। → संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उम्मीदवारी के माध्यम से भारत इन विषयों को नियम-निर्माण के मंच पर ले जाने का प्रयास करता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. परिषद के कुल पंद्रह सदस्य होते हैं, जिनमें से पाँच स्थायी सदस्य होते हैं।
2. अस्थायी सदस्यों का चुनाव महासभा द्वारा दो वर्ष की अवधि के लिए किया जाता है।
3. इन सदस्यों के चुनाव के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का साधारण बहुमत पर्याप्त है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: परिषद में 15 सदस्य होते हैं, जिनमें 5 स्थायी (चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन, अमेरिका) और 10 अस्थायी होते हैं (अनुच्छेद 23, संयुक्त राष्ट्र चार्टर)। कथन 2 सही है: अस्थायी सदस्य दो वर्ष के कार्यकाल हेतु महासभा द्वारा चुने जाते हैं। कथन 3 गलत है: महासभा में ऐसे चुनाव के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों (A और R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): समुद्री सुरक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण से समुद्री क्षेत्र-जागरूकता बढ़ाई जा सकती है।
कारण (R): उपग्रह चित्रों, रडार और पोत-ट्रैकिंग आँकड़ों के विश्लेषण से संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाया जा सकता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
- A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
- A सही है, किंतु R गलत है
- A गलत है, किंतु R सही है
उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है — कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं। भारत के प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा उपग्रह, रडार और पोत-ट्रैकिंग आँकड़ों के विश्लेषण से समुद्री क्षेत्र-जागरूकता में सुधार और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान संभव है। कारण सीधे उसी प्रक्रिया की व्याख्या करता है, इसलिए R, A की सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित सूचियों का मिलान कीजिए:
सूची I (नीति/व्यवस्था): 1. SAGAR 2. IFC-IOR 3. UNCLOS 4. समुद्री सुरंगों (automatic submarine contact mines) से संबंधित हेग अभिसमय (1907)
सूची II (विशेषता): a. स्वचालित पनडुब्बी संपर्क सुरंगों के बिछाने पर नियम निर्धारित करना b. भारतीय नौसेना द्वारा संचालित, नई दिल्ली के निकट स्थित सूचना-संलयन केंद्र c. सुरक्षा और सबके लिए क्षेत्रीय विकास का दृष्टिकोण d. समुद्री क्षेत्रों, उच्च समुद्रों और नौवहन अधिकारों से संबंधित व्यापक विधिक ढाँचा
सही मिलान का चयन कीजिए:
- 1-c, 2-b, 3-d, 4-a
- 1-a, 2-c, 3-b, 4-d
- 1-b, 2-d, 3-a, 4-c
- 1-d, 2-a, 3-c, 4-b
उत्तर: 1-c, 2-b, 3-d, 4-a — SAGAR का अर्थ है Security and Growth for All in the Region (c)। IFC-IOR भारतीय नौसेना द्वारा संचालित है और नई दिल्ली के निकट स्थित है (b)। UNCLOS, 1982 समुद्री क्षेत्रों, उच्च समुद्रों और नौवहन अधिकारों का व्यापक ढाँचा देता है (d)। 1907 का हेग अभिसमय VIII स्वचालित पनडुब्बी संपर्क सुरंगों के बिछाने को नियंत्रित करता है (a)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ उभरती प्रौद्योगिकी और समुद्री सुरक्षा के बीच बढ़ता संबंध अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यवस्था के लिए अवसर और जोखिम दोनों प्रस्तुत करता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समुद्री क्षेत्र-जागरूकता को समुद्री सुरक्षा का प्रभावी साधन मानने के तर्क की समालोचनात्मक परीक्षा कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि यदि ऐसी प्रणालियों का दुरुपयोग गैर-राज्य अभिनेताओं द्वारा किया जाए, या इनकी निगरानी क्षमता नौवहन की स्वतंत्रता को सीमित करने लगे, तो अंतरराष्ट्रीय विधि और संस्थागत सहयोग के सामने कौन-सी चुनौतियाँ उत्पन्न होंगी? (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की संरचना: (1) भूमिका: भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद उम्मीदवारी (2028-29 के अस्थायी सदस्यता हेतु) और खुली बहस में प्रस्तुत तीन आयाम, अर्थात मानव सुरक्षा, अवसर और समुद्री साझा क्षेत्र का सुरक्षित होना। (2) तर्क की परीक्षा: कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा उपग्रह चित्रों, रडार और पोत-ट्रैकिंग आँकड़ों के विश्लेषण से समुद्री क्षेत्र-जागरूकता (Maritime Domain Awareness) में सुधार और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान; भारतीय नौसेना की भूमिका; SAGAR दृष्टिकोण (2015) और IFC-IOR (2018) का उदाहरण जिसमें 12 साझेदार बताए गए हैं। (3) विधिक ढाँचा: संयुक्त राष्ट्र समुद्री विधि अभिसमय (UNCLOS, 1982) के अनुच्छेद 87 (उच्च समुद्रों की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 17 (निर्दोष मार्ग), अनुच्छेद 38 (पारगमन मार्ग, जलसंधियों के संदर्भ में) तथा 1907 का हेग अभिसमय VIII; भारत का समुद्री क्षेत्र अधिनियम, 1976। होर्मुज जलसंधि में समुद्री सुरंगों से तेल टैंकरों को क्षति जैसी घटनाओं का संदर्भ। (4) संतुलित दृष्टि: प्रौद्योगिकी के समर्थक इसे निवारण और पारदर्शिता का साधन मानते हैं; आलोचक निगरानी के दुरुपयोग, संप्रभुता और डेटा गोपनीयता (भारत का डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023) की चिंता उठाते हैं; विकासशील देशों पर परिवहन लागत का असमान बोझ। (5) गैर-राज्य अभिनेता: आतंकवादी समूहों द्वारा तकनीक का दुरुपयोग, संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रतिनिधि की चेतावनी; सुरक्षा परिषद की प्राथमिक जिम्मेदारी (अनुच्छेद 24) और अनुच्छेद 39 के अंतर्गत कार्रवाई। (6) समाधान: वैश्विक डिजिटल संधि (Global Digital Compact, 2024) जैसे बहुपक्षीय ढाँचे, सूचना-साझेदारी तंत्र, क्षमता-निर्माण तथा विधिक मानकों का विकास; निष्कर्ष में संतुलित स्थिति कि तकनीक तभी सुरक्षा बढ़ाएगी जब वह नौवहन की स्वतंत्रता और मानव सुरक्षा के अधीन रहे।
स्रोत: orissapost.com
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