07 Aug AI से भारत में नौकरियां बढ़ीं, नौकरियां गईं से ज्यादा: नोमुरा रिपोर्ट
✎ नोमुरा की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) नौकरियों के नुकसान की तुलना में अधिक रोजगार सृजित कर रही है, लेकिन इसके प्रभाव से एक 'दो-स्तरीय श्रम बाजार' उभर रहा है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
- Prelims: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोजगार सृजन, श्रम बाजार, कौशल विकास, चौथी औद्योगिक क्रांति, नोमुरा रिपोर्ट
- Essay: कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भारतीय अर्थव्यवस्था का भविष्य, तकनीकी प्रगति और सामाजिक परिवर्तन: भारत के लिए अवसर और चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: नोमुरा की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) नौकरियों के नुकसान की तुलना में अधिक रोजगार सृजित कर रही है, लेकिन इसके प्रभाव से एक ‘दो-स्तरीय श्रम बाजार’ उभर रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
नोमुरा की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के कारण जितनी नौकरियाँ समाप्त हो रही हैं, उससे कहीं अधिक नई नौकरियाँ सृजित हो रही हैं। इस रिपोर्ट में भारत को AI के रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने के लिए एक महत्वपूर्ण ‘ग्राउंड जीरो’ बताया गया है, क्योंकि यहाँ एक विशाल कार्यबल है और AI-संबंधित गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।
पृष्ठभूमि
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) मशीनों द्वारा मानव बुद्धि का अनुकरण करने की क्षमता है, जिसमें सीखना, समस्या-समाधान और निर्णय लेना शामिल है।
- भारत, जो पारंपरिक रूप से बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए वैश्विक बैक ऑफिस रहा है, अब AI के रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को मापने के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक बन गया है।
- नोमुरा रिपोर्ट ने एशिया में 69 AI-संबंधित घटनाक्रमों का अध्ययन किया, जिनमें से अधिकांश 2022 और अगस्त 2026 के बीच हुए।
- रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 83,100 AI-संबंधित नौकरियाँ सृजित हुईं, जबकि छंटनी और कर्मचारियों के कंपनी छोड़ने के कारण 31,921 पद समाप्त हुए।
- एशिया भर में, अध्ययन अवधि के दौरान AI-संबंधित नियुक्तियाँ 1,30,758 पदों तक पहुँच गईं, जिसमें प्रौद्योगिकी क्षेत्र का 90% से अधिक योगदान था।
- रिपोर्ट यह भी बताती है कि AI के कारण एक ‘दो-स्तरीय श्रम बाजार’ (two-tier labour market) उभर रहा है, जहाँ प्रवेश-स्तर के श्रमिकों की मांग कम हो रही है, जबकि अनुभवी पेशेवरों की मांग बढ़ रही है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और भारतीय श्रम बाजार
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एक व्यापक क्षेत्र है जिसमें मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (Natural Language Processing) और रोबोटिक्स जैसी प्रौद्योगिकियाँ शामिल हैं।
- भारत में AI का प्रभाव विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेवाओं और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में देखा जा रहा है।
- रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश छंटनी सहायक टीमों में हुई है जिन्हें चैटबॉट (Chatbots) द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है, जबकि अधिकांश नई नियुक्तियाँ IT-सेवा स्नातकों की हैं जिन्हें AI की मांग के कारण काम पर रखा गया है।
- यह प्रवृत्ति इस धारणा के विपरीत है कि AI बड़े पैमाने पर नौकरियों का नुकसान करेगा, और इसके बजाय यह दर्शाता है कि प्रारंभिक चरण में रोजगार सृजन ने विस्थापन की भरपाई की है।
- हालांकि, रिपोर्ट यह भी स्वीकार करती है कि AI का प्रभाव कार्यबल में असमान है, जिससे लाभार्थियों और प्रतिकूल रूप से प्रभावित होने वालों के अलग-अलग समूह बन रहे हैं।
- विस्थापित श्रमिक शायद ही कभी सीधे AI इंजीनियरिंग भूमिकाओं में परिवर्तित होते हैं, जिससे कुल आंकड़ों में ‘वितरणात्मक पीड़ा’ (distributional pain) छिपी रहती है।
- भारत में कौशल विकास (Skill Development) और पुनः कौशल (Reskilling) कार्यक्रम AI-संचालित अर्थव्यवस्था के लिए कार्यबल को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
- यह विश्लेषण व्यापक श्रम बाजार प्रवृत्तियों का एक संकेत है, न कि पूर्ण रोजगार माप, क्योंकि एशिया के श्रम बाजार खंडित हैं और अध्ययन समाचार रिपोर्टों पर आधारित था।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| भारत में AI-संबंधित नौकरियों में वृद्धि | नोमुरा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में AI के कारण जितनी नौकरियाँ समाप्त हुई हैं, उससे कहीं अधिक AI-संबंधित नई नौकरियाँ सृजित हुई हैं। यह वैश्विक धारणा के विपरीत है कि AI बड़े पैमाने पर रोज़गार छीन रहा है। |
| भारत ‘ग्राउंड ज़ीरो’ | भारत को AI के रोज़गार पर पड़ने वाले प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए ‘ग्राउंड ज़ीरो’ माना गया है, क्योंकि यहाँ विशाल कार्यबल है और AI का सबसे बड़ा पूर्ण प्रभाव (absolute impact) देखा जा रहा है। |
| दो-स्तरीय श्रम बाज़ार | AI के बढ़ते उपयोग से भारत जैसे देशों में दो-स्तरीय श्रम बाज़ार का उदय हो रहा है, जहाँ प्रवेश-स्तर के श्रमिकों की मांग कम हो रही है, जबकि अनुभवी पेशेवरों की मांग बढ़ रही है। |
| एशिया में AI का प्रभाव | एशिया में AI-संबंधित नियुक्तियाँ नौकरी के नुकसान से अधिक रही हैं, जिसमें प्रौद्योगिकी क्षेत्र का 90% से अधिक योगदान है। वित्तीय सेवा क्षेत्र में लगभग 60% नौकरियाँ समाप्त हुई हैं। |
| उत्पादकता लाभ | नंदन नीलेकणि जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि AI से उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- AI-संचालित आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth): AI-संबंधित नौकरियों के सृजन से भारत की आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा मिल सकता है, विशेषकर सेवा क्षेत्र में।
- नवाचार और उत्पादकता में वृद्धि: AI प्रौद्योगिकियों को अपनाने से विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार और उत्पादकता में वृद्धि होगी, जिससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
- जनसांख्यिकीय लाभांश का उपयोग: AI-संबंधित कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करके भारत अपने विशाल युवा कार्यबल का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकता है।
सामाजिक महत्व
- कौशल अंतराल (Skill Gap) का प्रबंधन: दो-स्तरीय श्रम बाज़ार के उदय से कौशल अंतराल की समस्या बढ़ सकती है, जिसके लिए सरकार और उद्योगों को मिलकर कार्यबल को पुनः कौशल (reskill) और उन्नत कौशल (upskill) प्रदान करने की आवश्यकता होगी।
- समावेशी विकास: यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि AI क्रांति के लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचें और कोई भी पीछे न छूटे, विशेषकर वे श्रमिक जिनकी नौकरियाँ AI के कारण प्रभावित हुई हैं।
शासनिक महत्व
- नीति निर्माण में AI का एकीकरण: सरकार को AI के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को ध्यान में रखते हुए नीतियाँ बनानी होंगी, जिसमें शिक्षा, रोज़गार और सामाजिक सुरक्षा शामिल हैं।
- डेटा गोपनीयता और नैतिकता: AI के बढ़ते उपयोग के साथ डेटा गोपनीयता (Data Privacy) और AI नैतिकता (AI Ethics) से संबंधित चुनौतियों का समाधान करना महत्वपूर्ण होगा।
चुनौतियाँ
1. कौशल अंतराल और पुनः कौशल की आवश्यकता
- AI के कारण कुछ पारंपरिक नौकरियाँ समाप्त हो रही हैं, जबकि AI-संबंधित नई नौकरियों के लिए विशिष्ट कौशल की आवश्यकता होती है।
- विस्थापित श्रमिकों को AI इंजीनियरिंग भूमिकाओं में संक्रमण करना मुश्किल होता है, जिससे व्यापक कौशल अंतराल पैदा होता है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: भारतीय अर्थव्यवस्था और रोज़गार
2. दो-स्तरीय श्रम बाज़ार का उदय
- प्रवेश-स्तर के श्रमिकों की मांग में कमी आ रही है, जबकि अनुभवी पेशेवरों की मांग बढ़ रही है।
- यह श्रम बाज़ार में असमानता को बढ़ा सकता है और सामाजिक-आर्थिक विभाजन पैदा कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: समावेशी विकास और संबंधित मुद्दे
3. वितरणात्मक दर्द (Distributional Pain)
- कुल मिलाकर नौकरियों में वृद्धि के बावजूद, AI का प्रभाव कार्यबल में असमान है, जिससे कुछ समूहों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित होना पड़ रहा है।
- जिनकी नौकरियाँ जाती हैं, उन्हें नई AI-संबंधित भूमिकाओं में समायोजित करना कठिन होता है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: विकास और रोज़गार
4. डेटा की अपर्याप्तता और खंडित श्रम बाज़ार
- एशिया के श्रम बाज़ार खंडित हैं और अध्ययन मुख्य रूप से समाचार रिपोर्टों पर आधारित है, जिससे व्यापक श्रम बाज़ार प्रवृत्तियों का सटीक माप मुश्किल हो जाता है।
- AI के वास्तविक प्रभाव का आकलन करने के लिए अधिक व्यापक और विश्वसनीय डेटा की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन-III: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| कौशल बेमेल (Skill Mismatch) | AI-संचालित नौकरियों के लिए आवश्यक विशिष्ट कौशल और मौजूदा कार्यबल के कौशल के बीच अंतर। |
| रोज़गार विस्थापन | चैटबॉट जैसे AI उपकरणों द्वारा सहायक टीमों की जगह लेने से कुछ पारंपरिक नौकरियों का नुकसान। |
| सामाजिक असमानता | दो-स्तरीय श्रम बाज़ार के कारण आय और अवसरों में असमानता का बढ़ना। |
| डेटा गोपनीयता और सुरक्षा | AI प्रणालियों द्वारा बड़ी मात्रा में डेटा के उपयोग से उत्पन्न होने वाली गोपनीयता और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ। |
| नैतिक AI विकास | AI प्रणालियों में पूर्वाग्रह (bias) और भेदभाव से बचने के लिए नैतिक दिशानिर्देशों की आवश्यकता। |
आगे की राह
- कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार: AI-संबंधित कौशल जैसे डेटा साइंस, मशीन लर्निंग और AI प्रोग्रामिंग में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए मौजूदा कौशल विकास कार्यक्रमों को अद्यतन करना।
- पुनः कौशल और उन्नत कौशल पर ध्यान: उन श्रमिकों के लिए विशेष कार्यक्रम विकसित करना जिनकी नौकरियाँ AI के कारण विस्थापित हुई हैं, ताकि उन्हें नई भूमिकाओं के लिए तैयार किया जा सके।
- शिक्षा प्रणाली में सुधार: AI और डिजिटल साक्षरता को स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में एकीकृत करना ताकि भविष्य के कार्यबल को तैयार किया जा सके।
- उद्योग-अकादमिक सहयोग: AI क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करना।
- सामाजिक सुरक्षा जाल: AI के कारण नौकरी गंवाने वाले श्रमिकों के लिए मजबूत सामाजिक सुरक्षा जाल और संक्रमणकालीन सहायता प्रदान करना।
- नैतिक AI के लिए नियामक ढाँचा: AI के विकास और उपयोग के लिए एक नैतिक और नियामक ढाँचा स्थापित करना, जिसमें डेटा गोपनीयता, पारदर्शिता और जवाबदेही शामिल हो।
- उद्यमिता को प्रोत्साहन: AI-आधारित स्टार्टअप्स और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रभाव · रोजगार सृजन · श्रम बाजार · कौशल अंतराल · तकनीकी प्रगति · भारत में AI · दो-स्तरीय श्रम बाजार · नीतिगत हस्तक्षेप · आर्थिक संवृद्धि · डिजिटल कौशल
अवधारणा प्रवाह
AI प्रौद्योगिकी का विकास और अंगीकरण → कुछ पारंपरिक नौकरियों का विस्थापन (विशेषकर सहायक भूमिकाओं में) → AI-संबंधित नई नौकरियों का सृजन (विशेषकर IT सेवाओं में) → कौशल अंतराल का उदय और दो-स्तरीय श्रम बाज़ार का निर्माण → पुनः कौशल और उन्नत कौशल की आवश्यकता → उत्पादकता में वृद्धि और आर्थिक संवृद्धि की संभावनाएँ
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. नोमुरा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रभाव के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. AI भारत में नौकरियों में कटौती की तुलना में अधिक रोजगार सृजित कर रहा है।
2. AI के कारण वित्तीय सेवा क्षेत्र में सर्वाधिक नौकरियाँ समाप्त हुई हैं।
3. रिपोर्ट के अनुसार, AI के बढ़ते उपयोग से भारत में एक ‘दो-स्तरीय श्रम बाजार’ (two-tier labour market) का निर्माण हो रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। नोमुरा रिपोर्ट बताती है कि भारत में AI से संबंधित नौकरियों में वृद्धि, नौकरियों के नुकसान से अधिक है। कथन 2 सही है। रिपोर्ट के अनुसार, एशिया में AI के कारण समाप्त हुई लगभग 60% नौकरियाँ वित्तीय सेवा क्षेत्र में थीं। कथन 3 सही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि AI के बढ़ते उपयोग से भारत जैसे देशों में दो-स्तरीय श्रम बाजार बन रहा है, जहाँ प्रवेश-स्तर के श्रमिकों की मांग कम हो रही है और अनुभवी पेशेवरों की मांग बढ़ रही है।
Q2. कथन (A): नोमुरा रिपोर्ट के अनुसार, भारत AI के रोजगार प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए ‘ग्राउंड जीरो’ (ground zero) बन गया है।
कारण (R): भारत के विशाल कार्यबल और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए वैश्विक बैक ऑफिस के रूप में इसकी भूमिका के कारण AI का इस पर सबसे बड़ा पूर्ण प्रभाव पड़ रहा है।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भारत का विशाल कार्यबल और वैश्विक बैक ऑफिस के रूप में इसकी स्थिति इसे AI के रोजगार प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए ‘ग्राउंड जीरो’ बनाती है, क्योंकि यह नौकरियों में कटौती, भर्ती पर रोक और भर्ती में AI के ‘सबसे बड़े पूर्ण प्रभाव’ का अनुभव कर रहा है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते उपयोग से भारत में उभर रहे ‘दो-स्तरीय श्रम बाजार’ की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए। इस संदर्भ में, AI-प्रेरित विस्थापन से निपटने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा क्या नीतिगत हस्तक्षेप किए जा सकते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव और भारत के श्रम बाजार पर इसके महत्व का संक्षिप्त परिचय।
2. **’दो-स्तरीय श्रम बाजार’ की अवधारणा:**
* नोमुरा रिपोर्ट के निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए इस अवधारणा को विस्तार से समझाएँ।
* एक स्तर पर, प्रवेश-स्तर के श्रमिकों की घटती मांग और चैटबॉट जैसे AI उपकरणों द्वारा सहायक भूमिकाओं के प्रतिस्थापन पर प्रकाश डालें।
* दूसरे स्तर पर, व्यापार संचालन की गहरी समझ रखने वाले अनुभवी पेशेवरों और AI-संबंधित कौशल वाले व्यक्तियों की बढ़ती मांग पर चर्चा करें।
* यह भी स्पष्ट करें कि कैसे विस्थापित श्रमिक आसानी से AI इंजीनियरिंग भूमिकाओं में परिवर्तित नहीं हो पाते, जिससे असमान प्रभाव पैदा होता है।
3. **AI-प्रेरित विस्थापन से निपटने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप:**
* **कौशल विकास और पुनः कौशल (Reskilling):** मौजूदा कार्यबल के लिए AI-संबंधित कौशल में प्रशिक्षण कार्यक्रम। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) जैसी संस्थाओं की भूमिका।
* **शिक्षा प्रणाली में सुधार:** स्कूली और उच्च शिक्षा में AI, डेटा साइंस और कोडिंग को एकीकृत करना। STEM शिक्षा पर जोर।
* **सामाजिक सुरक्षा जाल:** विस्थापित श्रमिकों के लिए अस्थायी आय सहायता या बेरोजगारी लाभ जैसे उपाय।
* **उद्यमिता को बढ़ावा:** AI-आधारित स्टार्टअप्स और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता और इन्क्यूबेशन केंद्र।
* **सार्वजनिक-निजी भागीदारी:** उद्योग और सरकार के बीच सहयोग ताकि कौशल आवश्यकताओं की पहचान की जा सके और तदनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जा सकें।
* **नैतिक AI विकास:** AI के नैतिक और समावेशी उपयोग के लिए नियामक ढाँचा विकसित करना, जिससे रोजगार पर नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सके।
* **डेटा-संचालित नीति निर्माण:** श्रम बाजार के रुझानों की नियमित निगरानी और AI के रोजगार प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए मजबूत डेटा संग्रह प्रणाली।
4. **निष्कर्ष:** AI के अवसरों का लाभ उठाने और चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक संतुलित और दूरदर्शी नीतिगत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें, ताकि भारत की जनसांख्यिकीय लाभांश को बनाए रखा जा सके और समावेशी आर्थिक संवृद्धि सुनिश्चित की जा सके।
स्रोत: Times of India
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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