04 Oct महाराष्ट्र में ग्रीन इंडिया मिशन: सीएजी ने बताए पौधों के मरने के कारण
✎ CAG रिपोर्ट ने महाराष्ट्र में हरित भारत मिशन के कार्यान्वयन में गंभीर वित्तीय कुप्रबंधन और संस्थागत विफलताओं को उजागर किया है, जिससे जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में बाधा उत्पन्न हुई है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू | GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी, संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और गिरावट, पर्यावरण प्रभाव आकलन
- Prelims: हरित भारत मिशन, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG), राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC), पेरिस समझौता, राज्य वन विकास एजेंसी (SFDA), पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC)
- Essay: पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास में शासन की भूमिका, जलवायु परिवर्तन से निपटने में भारत की प्रतिबद्धताएँ और चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: CAG रिपोर्ट ने महाराष्ट्र में हरित भारत मिशन के कार्यान्वयन में गंभीर वित्तीय कुप्रबंधन और संस्थागत विफलताओं को उजागर किया है, जिससे जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में बाधा उत्पन्न हुई है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने महाराष्ट्र में हरित भारत मिशन (Green India Mission – GIM) के कार्यान्वयन में गंभीर कमियों को उजागर किया है। रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताएँ, लगाए गए पौधों की खराब उत्तरजीविता दर और संस्थागत तंत्रों के लगभग पूर्ण पतन का उल्लेख किया गया है, जिससे यह योजना अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में विफल रही है।
पृष्ठभूमि
- हरित भारत मिशन (GIM) को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा 2014 में लॉन्च किया गया था।
- इसका उद्देश्य 2015-16 और 2024-25 के बीच 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हरित आवरण की रक्षा, बहाली और वृद्धि करना है।
- यह भारत की राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (National Action Plan on Climate Change – NAPCC) के तहत आठ मिशनों में से एक है।
- पेरिस समझौते (Paris Agreement) के तहत भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं का यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें वन और वृक्ष आवरण का विस्तार प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है।
- महाराष्ट्र में, नंदुरबार, भोर और वाडसा की चार तालुकों में 35 स्थलों का चयन किया गया था।
- CAG रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र निर्धारित समय-सीमा के भीतर योजना के लगभग सभी प्रमुख लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफल रहा है।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) और हरित भारत मिशन (GIM) क्या है?
- नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG): यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत स्थापित एक स्वतंत्र संवैधानिक प्राधिकरण है। यह भारत सरकार और राज्य सरकारों के सभी प्राप्तियों और व्यय का लेखा-परीक्षण करता है, जिससे सार्वजनिक धन के उचित उपयोग और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
- हरित भारत मिशन (GIM): यह भारत के जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के तहत आठ मिशनों में से एक है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के घटते वन आवरण की रक्षा, बहाली और विस्तार करना है, साथ ही जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन और शमन में योगदान करना है।
- मिशन के उद्देश्य: वन और वृक्ष आवरण को बढ़ाना, वन-आधारित आजीविका में सुधार करना, और जलवायु परिवर्तन के लिए वन पारिस्थितिकी प्रणालियों की अनुकूलन क्षमता को बढ़ाना।
- राज्य वन विकास एजेंसी (SFDA): यह वनीकरण और पारिस्थितिकी-विकास कार्यक्रमों को लागू करने वाली सर्वोच्च राज्य-स्तरीय संस्था है। GIM के तहत, SFDA को पुनर्गठित किया जाना था, जिसमें मुख्यमंत्री या उनके नामित मंत्री अध्यक्ष होते।
- महाराष्ट्र में SFDA की विफलता: CAG ने पाया कि महाराष्ट्र में SFDA का कभी पुनर्गठन नहीं किया गया और 2014-15 से 2024-25 के बीच इसने एक भी बैठक नहीं की।
- वित्तीय कुप्रबंधन: CAG रिपोर्ट में बताया गया है कि SFDA द्वारा ₹12.75 करोड़ के उपयोग की रिपोर्ट की गई, जबकि वास्तव में केवल ₹0.29 करोड़ का उपयोग किया गया था।
- राज्य संचालन समिति (SSC): GIM के तहत जिला नियोजन निकायों को मार्गदर्शन देने के लिए अप्रैल 2016 में गठित SSC ने नौ वर्षों में निर्धारित 18 बैठकों के मुकाबले केवल एक बार बैठक की।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| हरित भारत मिशन (Green India Mission – GIM) | यह भारत की जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (National Action Plan on Climate Change – NAPCC) के आठ मिशनों में से एक है, जो देश के हरित आवरण को बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है। |
| नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General – CAG) की भूमिका | CAG भारत सरकार और राज्य सरकारों के खर्चों का ऑडिट करता है, जिससे सार्वजनिक धन के उचित उपयोग और योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है। |
| राज्य वन विकास एजेंसी (State Forest Development Agency – SFDA) | यह राज्यों में वनीकरण और पर्यावरण-विकास कार्यक्रमों को लागू करने वाली सर्वोच्च संस्था है, जिसे केंद्रीय मंत्रालय से धन प्राप्त होता है। |
| पेरिस समझौता (Paris Agreement) | यह एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जिसका उद्देश्य वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को सीमित करना है। भारत की वन और वृक्ष आवरण बढ़ाने की प्रतिबद्धता इसके तहत आती है। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- वन आवरण में वृद्धि से कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) बढ़ता है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहायक है।
- वनीकरण जैव विविधता (Biodiversity) के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
शासन और जवाबदेही
- CAG की रिपोर्ट सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करती है, जिससे सार्वजनिक धन का दुरुपयोग रोका जा सके।
- संस्थागत तंत्रों की विफलता को उजागर करना भविष्य की योजनाओं के बेहतर प्रबंधन के लिए आवश्यक सुधारों की पहचान करने में मदद करता है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ
- हरित भारत मिशन जैसी पहलें पेरिस समझौते के तहत भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण हैं, जिससे वैश्विक मंच पर देश की साख बनी रहती है।
चुनौतियाँ
1. संस्थागत विफलताएँ
- राज्य वन विकास एजेंसी (SFDA) का पुनर्गठन न होना और इसकी तथा राज्य संचालन समिति (State Steering Committee – SSC) की बैठकों का नियमित रूप से न होना।
- योजना के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार प्रमुख संस्थाओं का निष्क्रिय रहना, जिससे निर्णय लेने और निगरानी में कमी आई।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. वित्तीय कुप्रबंधन
- निधियों के उपयोग के संबंध में गलत रिपोर्टिंग और वास्तविक खर्च की तुलना में अधिक राशि का दावा करना।
- योजना के लिए अलग बैंक खाता न खोलना और गैर-लाभार्थी जिलों को धन हस्तांतरित करना, जबकि वास्तविक लाभार्थियों को कुछ भी नहीं मिला।
यूपीएससी लिंक: सरकारी बजटिंग, वित्तीय प्रशासन
3. लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफलता
- महाराष्ट्र द्वारा हरित भारत मिशन के तहत निर्धारित अधिकांश प्रमुख लक्ष्यों को समय-सीमा के भीतर प्राप्त करने में विफलता।
- पौधों के जीवित रहने की दर (Survival Rate) के दावों में विसंगतियां और कागजों पर ही अधिक पौधे दिखाए जाना।
यूपीएससी लिंक: सरकारी नीतियों का कार्यान्वयन
4. निगरानी और मूल्यांकन की कमी
- योजना के कार्यान्वयन की प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन तंत्र की कमी, जिससे अनियमितताओं का पता नहीं चल पाया।
- CAG ऑडिट के माध्यम से ही इन विफलताओं का उजागर होना, जो दर्शाता है कि आंतरिक निगरानी कमजोर थी।
यूपीएससी लिंक: सरकारी योजनाओं की निगरानी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| SFDA का पुनर्गठन नहीं | योजना के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक संस्थागत सुधारों का अभाव। |
| बैठकों का अभाव | निर्णय लेने, समन्वय और निगरानी तंत्र का निष्क्रिय होना। |
| निधियों का गलत उपयोग | सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताएं। |
| लक्ष्य प्राप्ति में विफलता | पर्यावरणीय लक्ष्यों और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में बाधा। |
| पौधों की कम उत्तरजीविता | वनीकरण प्रयासों की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- हरित भारत मिशन (Green India Mission)
आगे की राह
- राज्य वन विकास एजेंसी (SFDA) और राज्य संचालन समिति (SSC) का तत्काल पुनर्गठन और उनकी नियमित बैठकों को सुनिश्चित करना।
- हरित भारत मिशन जैसी योजनाओं के लिए एक मजबूत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली स्थापित करना, जिसमें अलग बैंक खाते और निधियों के उपयोग की सख्त निगरानी शामिल हो।
- निधियों के उपयोग और योजना की प्रगति की वास्तविक समय पर निगरानी के लिए एक प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन तंत्र विकसित करना।
- पौधों की उत्तरजीविता दर (Survival Rate) की स्वतंत्र और विश्वसनीय ऑडिटिंग सुनिश्चित करना, ताकि कागजों पर दिखाए गए दावों और जमीनी हकीकत में अंतर को दूर किया जा सके।
- योजना के कार्यान्वयन में शामिल अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही तय करना और वित्तीय अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना।
- स्थानीय समुदायों और पंचायती राज संस्थाओं को वनीकरण प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल करना, जिससे स्वामित्व और दीर्घकालिक रखरखाव सुनिश्चित हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
हरित भारत मिशन · नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) · राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना · पेरिस समझौता · वनीकरण · वन विकास एजेंसी · संस्थागत विफलता · पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय · राजकोषीय कुप्रबंधन · जलवायु प्रतिबद्धता · सतत विकास · जवाबदेही
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा और सुधार करना’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 149’, ‘note’: ‘CAG के कर्तव्य और शक्तियाँ’}
अवधारणा प्रवाह
हरित भारत मिशन का शुभारंभ → राज्य वन विकास एजेंसी (SFDA) को कार्यान्वयन का जिम्मा → संस्थागत विफलताएँ और वित्तीय कुप्रबंधन → लक्ष्यों की अप्राप्ति और पौधों की मृत्यु → CAG द्वारा ऑडिट और विफलताओं का खुलासा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. हरित भारत मिशन (Green India Mission) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 2014 में शुरू किया गया एक प्रमुख कार्यक्रम है।
2. यह भारत की राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (National Action Plan on Climate Change) के आठ मिशनों में से एक है।
3. इसका उद्देश्य केवल वनीकरण के माध्यम से भारत के हरित आवरण को बढ़ाना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई भी नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। हरित भारत मिशन पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 2014 में शुरू किया गया था। कथन 2 भी सही है। यह राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना के आठ मिशनों में से एक है। कथन 3 गलत है। इसका उद्देश्य केवल वनीकरण नहीं, बल्कि मौजूदा हरित आवरण की सुरक्षा, बहाली और वृद्धि करना भी है।
Q2. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. CAG भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है और केवल सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया द्वारा ही हटाया जा सकता है।
2. CAG संघ और राज्यों के खातों से संबंधित अपनी रिपोर्ट सीधे संसद को प्रस्तुत करता है।
3. CAG का मुख्य कार्य सरकार के व्यय की लेखापरीक्षा करना और यह सुनिश्चित करना है कि धन का उपयोग विधिवत और कुशलता से किया गया है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई भी नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। CAG की नियुक्ति और हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है। कथन 2 गलत है। CAG अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जो उन्हें संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाते हैं। कथन 3 सही है। CAG का मुख्य कार्य सरकार के व्यय की लेखापरीक्षा करना और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ हाल ही में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने हरित भारत मिशन के कार्यान्वयन में कई कमियों को उजागर किया है। भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में ऐसे कार्यक्रमों के महत्व पर चर्चा कीजिए और इन कमियों को दूर करने के लिए आवश्यक संस्थागत सुधारों का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: हरित भारत मिशन (GIM) का संक्षिप्त परिचय और इसकी प्रासंगिकता, विशेषकर भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं (पेरिस समझौता, NAPCC) के संदर्भ में।
मुख्य भाग:
1. हरित भारत मिशन का महत्व: भारत के वन आवरण को बढ़ाने, जैव विविधता संरक्षण, कार्बन पृथक्करण और जलवायु परिवर्तन शमन में इसकी भूमिका। पेरिस समझौते के तहत भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्यों को प्राप्त करने में इसका योगदान।
2. CAG द्वारा उजागर की गई कमियाँ: महाराष्ट्र के संदर्भ में वित्तीय कुप्रबंधन (निधियों का दुरुपयोग, अप्रयुक्त निधियाँ), संस्थागत विफलताएँ (राज्य वन विकास एजेंसी (SFDA) का पुनर्गठन न होना, बैठकों का अभाव), और लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफलता (पौधों की कम उत्तरजीविता दर) का उल्लेख।
3. इन कमियों के निहितार्थ: जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति में बाधा, सार्वजनिक धन की बर्बादी, पर्यावरणीय क्षरण, और शासन में विश्वास की कमी।
4. आवश्यक संस्थागत सुधार: SFDA जैसी कार्यान्वयन एजेंसियों का पुनर्गठन और सशक्तिकरण, नियमित बैठकों और निगरानी तंत्र को अनिवार्य करना, निधियों के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना, बैंक खातों का समय पर संचालन, क्षमता निर्माण और डेटा-आधारित रिपोर्टिंग को बढ़ावा देना, नागरिक समाज और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना।
निष्कर्ष: एक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल देना, जिसमें मजबूत निगरानी, जवाबदेही और प्रभावी कार्यान्वयन तंत्र शामिल हों ताकि भारत अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं को सफलतापूर्वक पूरा कर सके और सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त कर सके।
स्रोत: The Indian Express
Maharashtra PCS (MPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: महाराष्ट्राच्या ‘ग्रीन इंडिया मिशन’ अंतर्गत रुजवलेल्या झाडांच्या मोठ्या प्रमाणावर मर राहिल्याचे कारण म्हणून CAG ने कोणते प्रमुख अपयश नमूद केले आहे?
- A. वन विभागाकडून वनस्पतींच्या निवडीमध्ये पारंपारिक ज्ञानाचा अभाव
- B. रोपवाटिकांमध्ये अपुरी देखभाल आणि नियमित पाणीपुरवठा नसणे
- C. वनस्पतींच्या लागवडीसाठी जमिनीच्या निवडीमध्ये जैवविविधता लक्षात न घेणे
- D. स्थानिक समुदायांच्या सहभागाचा पूर्ण अभाव आणि त्यांचे प्रशिक्षण नसणे
उत्तर: C. वनस्पतींच्या लागवडीसाठी जमिनीच्या निवडीमध्ये जैवविविधता लक्षात न घेणे — CAGच्या अहवालानुसार, वनस्पतींच्या लागवडीसाठी जमिनीच्या निवडीमध्ये जैवविविधता लक्षात न घेणे हे प्रमुख अपयश होते, ज्यामुळे मोठ्या प्रमाणावर झाडे मरून गेली.
Mains: महाराष्ट्राच्या ‘ग्रीन इंडिया मिशन’ अंतर्गत रुजवलेल्या झाडांच्या मोठ्या प्रमाणावर मर राहिल्याच्या कारणांचे विश्लेषण करा. या अपयशामुळे राज्याच्या पर्यावरणीय आणि आर्थिक धोरणांवर काय परिणाम झाला आहे? तुमचे उत्तर महाराष्ट्राच्या संदर्भात द्या.
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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