AI से भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी दूर होगी: रिपोर्ट

AI can help bridge India's healthcare gap: Report — concept mind map

AI से भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी दूर होगी: रिपोर्ट

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AI in Indian Healthcare System

✎ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भारत में स्वास्थ्य सेवा अंतराल को पाटने, निदान में सुधार करने और विशेषज्ञता का विस्तार करके गुणवत्तापूर्ण देखभाल तक पहुंच बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में उभर रही है, विशेषकर गैर-संचारी रोगों के…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सामाजिक न्याय: स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे, मानव संसाधन  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: सूचना प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टेक्नोलॉजी, बायो-टेक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरूकता
  • Prelims: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति, 2023, गैर-संचारी रोग, स्वास्थ्य सेवा अंतराल, चिकित्सा प्रौद्योगिकी (MedTech)
  • Essay: भारत में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र का भविष्य: चुनौतियाँ और अवसर, तकनीकी नवाचार और सामाजिक विकास: एक सहजीवी संबंध

त्वरित पुनरावृत्ति: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भारत में स्वास्थ्य सेवा अंतराल को पाटने, निदान में सुधार करने और विशेषज्ञता का विस्तार करके गुणवत्तापूर्ण देखभाल तक पहुंच बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में उभर रही है, विशेषकर गैर-संचारी रोगों के बढ़ते बोझ और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी के संदर्भ में।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा द्वारा जारी एक ज्ञान-पत्र के अनुसार, भारत में बढ़ती आबादी, पुरानी बीमारियों का बोझ और डॉक्टरों, नर्सों तथा अस्पताल के बिस्तरों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर दबाव बढ़ रहा है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) विशेषज्ञता का विस्तार करके, निदान में सुधार करके और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच बढ़ाकर इस बढ़ते अंतर को पाटने में मदद कर सकती है, खासकर छोटे अस्पतालों और कम सेवा वाले क्षेत्रों में। यह रिपोर्ट ‘AI इन मेडटेक: रिवोल्यूशनइजिंग हेल्थकेयर थ्रू आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ शीर्षक से इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026 के 9वें संस्करण में जारी की गई।

पृष्ठभूमि

  • भारत की आबादी 2026 में 1.47 अरब होने का अनुमान है, जिसमें 65% से अधिक मौतें अब हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर जैसे गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases – NCDs) के कारण होती हैं।
  • 60 वर्ष और उससे अधिक आयु की आबादी 2036 तक 230 मिलियन को पार कर जाएगी, जिससे दीर्घकालिक स्वास्थ्य सेवा की मांग और बढ़ेगी।
  • स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के बावजूद, भारत में डॉक्टरों (प्रति 10,000 आबादी पर 9.6), नर्सिंग कर्मियों (प्रति 10,000 पर 27.2) और अस्पताल के बिस्तरों (प्रति 10,000 पर 15.9) की वैश्विक औसत से काफी कमी है।
  • भारत में प्रति मिलियन लोगों पर केवल 4 MRI स्कैनर हैं, जबकि वैश्विक औसत 19 है, जो उन्नत नैदानिक क्षमताओं की कमी को दर्शाता है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, AI का उद्देश्य डॉक्टरों की जगह लेना नहीं है, बल्कि निदान, नैदानिक निर्णय लेने और स्क्रीनिंग में सहायता करके विशेषज्ञ क्षमता को बढ़ाना है।
  • भारत ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (Ayushman Bharat Digital Mission), इंडियाAI मिशन (IndiaAI Mission) और राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति, 2023 (National Medical Devices Policy, 2023) जैसी पहलों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा में AI की नींव रखी है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्या है?

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) कंप्यूटर विज्ञान का एक क्षेत्र है जो मशीनों को मानव जैसी बुद्धिमत्ता प्रदर्शित करने में सक्षम बनाता है।
  • इसमें मशीन लर्निंग (Machine Learning), डीप लर्निंग (Deep Learning), प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (Natural Language Processing) और कंप्यूटर विजन (Computer Vision) जैसी तकनीकें शामिल हैं।
  • AI प्रणालियाँ डेटा का विश्लेषण कर सकती हैं, पैटर्न की पहचान कर सकती हैं, निर्णय ले सकती हैं और समस्याओं का समाधान कर सकती हैं।
  • स्वास्थ्य सेवा में AI का उपयोग नैदानिक इमेजिंग (Diagnostic Imaging) के विश्लेषण, बीमारी का पता लगाने, व्यक्तिगत उपचार योजनाओं के विकास और दवा खोज में किया जा सकता है।
  • यह प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य सेवा में विशेषज्ञता का विस्तार करने, उत्पादकता में सुधार करने और देखभाल तक पहुंच में असमानताओं को कम करने में मदद कर सकता है।
  • AI-सक्षम निदान (AI-enabled diagnostics) को पहला बड़े पैमाने का अनुप्रयोग होने की उम्मीद है, जो स्वास्थ्य सेवा वितरण में क्रांति लाएगा।
  • भारत में AI को सफल पायलट परियोजनाओं से नियमित नैदानिक उपयोग तक ले जाने के लिए AI-तैयार स्वास्थ्य डेटा, एक अनुमानित नियामक ढांचा और AI-सक्षम प्रौद्योगिकियों के लिए प्रतिपूर्ति तंत्र (Reimbursement Mechanisms) बनाने की चुनौती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
विशेषज्ञ क्षमता का विस्तार AI निदान में सहायता करके विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को पूरा कर सकता है, खासकर छोटे अस्पतालों और कम सेवा वाले क्षेत्रों में।
निदान में सुधार AI-सक्षम निदान (AI-enabled diagnostics) बीमारियों की पहचान को अधिक सटीक और कुशल बना सकते हैं, जिससे बेहतर उपचार परिणाम प्राप्त होते हैं।
गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच का विस्तार दूरदराज के क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद करता है, जिससे स्वास्थ्य असमानताएं कम होती हैं।
गैर-संचारी रोगों (Non-communicable diseases) का प्रबंधन हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर जैसी पुरानी बीमारियों के बढ़ते बोझ को प्रबंधित करने में AI महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
चिकित्सा निर्णय लेने में सहायता AI डॉक्टरों को नैदानिक निर्णय लेने में सहायता कर सकता है, जिससे उपचार योजनाएं अधिक प्रभावी बन सकती हैं।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • भारत की बढ़ती और वृद्ध होती जनसंख्या की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करता है, जिससे जीवन प्रत्याशा और गुणवत्ता में सुधार होता है।
  • स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में क्षेत्रीय असमानताओं को कम करता है, खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में, जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिलता है।
  • गैर-संचारी रोगों के बढ़ते बोझ से निपटने में मदद करता है, जो भारत में मृत्यु दर का एक प्रमुख कारण बन गए हैं।

आर्थिक महत्व

  • स्वास्थ्य सेवा वितरण की दक्षता और उत्पादकता में सुधार करके लागत कम करने में मदद करता है।
  • चिकित्सा प्रौद्योगिकी (MedTech) क्षेत्र में नवाचार और निवेश को बढ़ावा देता है, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic growth) और रोजगार सृजन होता है।
  • स्वास्थ्य पर्यटन (Medical tourism) को बढ़ावा देने की क्षमता रखता है, क्योंकि उन्नत AI-सक्षम स्वास्थ्य सेवाएँ भारत को एक आकर्षक गंतव्य बना सकती हैं।

प्रशासनिक महत्व

  • स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर बढ़ते दबाव को कम करने में मदद करता है, जिससे सरकार के लिए स्वास्थ्य लक्ष्यों को प्राप्त करना आसान होता है।
  • आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (Ayushman Bharat Digital Mission) जैसी पहलों को मजबूत करता है, जिससे एक एकीकृत और कुशल डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण होता है।

चुनौतियाँ

1. AI-तैयार स्वास्थ्य डेटा का अभाव

  • उच्च गुणवत्ता वाले, मानकीकृत और सुलभ स्वास्थ्य डेटा की कमी AI मॉडल के प्रभावी विकास और तैनाती में बाधा डालती है।
  • डेटा गोपनीयता (Data privacy) और सुरक्षा संबंधी चिंताएं डेटा साझाकरण और उपयोग को जटिल बनाती हैं।

2. नियामक ढांचा (Regulatory framework) और नैतिक मुद्दे

  • AI-सक्षम चिकित्सा प्रौद्योगिकियों के लिए एक स्पष्ट और अनुमानित नियामक ढांचे का अभाव उनके बड़े पैमाने पर अपनाने में बाधा डालता है।
  • AI के उपयोग से जुड़े नैतिक मुद्दे, जैसे एल्गोरिथम पूर्वाग्रह (Algorithmic bias) और जवाबदेही, को संबोधित करना आवश्यक है।

3. बुनियादी ढांचा और डिजिटल साक्षरता

  • दूरदराज के क्षेत्रों में अपर्याप्त डिजिटल बुनियादी ढांचा और इंटरनेट कनेक्टिविटी AI समाधानों को लागू करने में चुनौती पेश करती है।
  • स्वास्थ्य पेशेवरों और आम जनता के बीच डिजिटल साक्षरता और AI उपकरणों के उपयोग की समझ का अभाव एक बाधा है।

4. पुनर्भुगतान तंत्र (Reimbursement mechanisms) का अभाव

  • AI-सक्षम प्रौद्योगिकियों के लिए स्पष्ट पुनर्भुगतान नीतियों की कमी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए उन्हें अपनाने को हतोत्साहित करती है।
  • उच्च प्रारंभिक लागत और निवेश पर प्रतिफल की अनिश्चितता AI समाधानों को अपनाने में बाधा डालती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
चिकित्सकों की कमी भारत में प्रति 10,000 जनसंख्या पर 9.6 डॉक्टर हैं, जबकि वैश्विक औसत 18.3 है, जिससे स्वास्थ्य सेवा वितरण पर दबाव पड़ता है।
नर्सिंग कर्मियों की कमी प्रति 10,000 जनसंख्या पर 27.2 नर्सिंग कर्मी हैं, जबकि वैश्विक औसत 40.5 है, जो रोगी देखभाल की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
अस्पताल के बिस्तरों की कमी प्रति 10,000 जनसंख्या पर 15.9 अस्पताल बिस्तर हैं, जबकि वैश्विक औसत 33 है, जिससे आपातकालीन और नियमित देखभाल दोनों प्रभावित होती हैं।
चिकित्सा उपकरणों की कमी प्रति मिलियन लोगों पर केवल 4 MRI स्कैनर हैं, जबकि वैश्विक औसत 19 है, जो उन्नत निदान तक पहुंच को सीमित करता है।
गैर-संचारी रोगों का बढ़ता बोझ 65% से अधिक मौतें अब हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर जैसे गैर-संचारी रोगों के कारण होती हैं, जिससे दीर्घकालिक देखभाल की मांग बढ़ रही है।
वृद्ध जनसंख्या 2036 तक 60 वर्ष और उससे अधिक आयु की जनसंख्या 230 मिलियन को पार करने का अनुमान है, जिससे दीर्घकालिक स्वास्थ्य सेवा की मांग और बढ़ेगी।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (Ayushman Bharat Digital Mission)
  • IndiaAI मिशन (IndiaAI Mission)
  • राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति, 2023 (National Medical Devices Policy, 2023)

आगे की राह

  • AI-तैयार स्वास्थ्य डेटा इकोसिस्टम का निर्माण करना, जिसमें मानकीकृत डेटा संग्रह, भंडारण और सुरक्षित साझाकरण प्रोटोकॉल शामिल हों।
  • AI-सक्षम चिकित्सा प्रौद्योगिकियों के लिए एक स्पष्ट, अनुमानित और अनुकूल नियामक ढांचा विकसित करना, जिसमें प्रमाणन और अनुमोदन प्रक्रियाएं शामिल हों।
  • AI-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए व्यवहार्य पुनर्भुगतान तंत्र स्थापित करना ताकि स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को इन प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
  • स्वास्थ्य पेशेवरों और आम जनता के बीच AI और डिजिटल स्वास्थ्य साक्षरता को बढ़ावा देना, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-private partnerships) को बढ़ावा देना ताकि AI अनुसंधान, विकास और तैनाती में निवेश को आकर्षित किया जा सके।
  • दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी में सुधार करना ताकि AI-सक्षम समाधानों की पहुंच सुनिश्चित हो सके।
  • AI के उपयोग से संबंधित नैतिक दिशानिर्देश और जवाबदेही तंत्र स्थापित करना ताकि एल्गोरिथम पूर्वाग्रह और डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताओं का समाधान किया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

कृत्रिम बुद्धिमत्ता · स्वास्थ्य सेवा में AI · स्वास्थ्य सेवा अंतराल · आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन · गैर-संचारी रोग · चिकित्सा उपकरण नीति · डिजिटल स्वास्थ्य · स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना · चिकित्सा निदान · विशेषज्ञ क्षमता विस्तार

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषण स्तर और जीवन स्तर में सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

भारत में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर बढ़ता दबाव (जनसंख्या, रोग, कर्मियों की कमी)  →  स्वास्थ्य सेवा अंतराल को पाटने के लिए AI की क्षमता की पहचान  →  AI-सक्षम निदान और विशेषज्ञ क्षमता विस्तार  →  प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार  →  स्वास्थ्य असमानताओं में कमी और बेहतर स्वास्थ्य परिणाम

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति, 2023 का उद्देश्य AI-सक्षम स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों के लिए एक नियामक ढांचा तैयार करना है।
2. भारत में 60 वर्ष से अधिक आयु की जनसंख्या 2036 तक 230 मिलियन से अधिक होने का अनुमान है, जिससे दीर्घकालिक स्वास्थ्य सेवा की मांग बढ़ेगी।
3. भारत में प्रति 10,000 जनसंख्या पर डॉक्टरों की संख्या वैश्विक औसत से अधिक है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति, 2023 का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा उपकरणों के निर्माण और नवाचार को बढ़ावा देना है, न कि विशेष रूप से AI-सक्षम स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों के लिए नियामक ढांचा तैयार करना। AI के लिए नियामक ढांचा अभी भी विकसित किया जा रहा है। कथन 2 सही है क्योंकि रिपोर्ट के अनुसार, 60 वर्ष और उससे अधिक आयु की जनसंख्या 2036 तक 230 मिलियन को पार करने का अनुमान है। कथन 3 गलत है क्योंकि रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रति 10,000 जनसंख्या पर 9.6 डॉक्टर हैं, जबकि वैश्विक औसत 18.3 है, जो वैश्विक औसत से कम है।

Q2. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे सटीक रूप से AI की भूमिका का वर्णन करता है जैसा कि हालिया रिपोर्ट में बताया गया है?

  1. AI डॉक्टरों को पूरी तरह से प्रतिस्थापित कर देगा, जिससे स्वास्थ्य सेवा लागत कम होगी।
  2. AI का उद्देश्य डॉक्टरों की जगह लेना नहीं है, बल्कि निदान और नैदानिक निर्णय लेने में सहायता करके विशेषज्ञ क्षमता को बढ़ाना है।
  3. AI केवल बड़े अस्पतालों में ही प्रभावी है और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के लिए उपयुक्त नहीं है।
  4. AI मुख्य रूप से संचारी रोगों के उपचार पर केंद्रित है, न कि गैर-संचारी रोगों पर।

उत्तर: AI का उद्देश्य डॉक्टरों की जगह लेना नहीं है, बल्कि निदान और नैदानिक निर्णय लेने में सहायता करके विशेषज्ञ क्षमता को बढ़ाना है। — रिपोर्ट स्पष्ट रूप से बताती है कि AI का उद्देश्य डॉक्टरों की जगह लेना नहीं है, बल्कि निदान, नैदानिक निर्णय लेने और स्क्रीनिंग में सहायता करके विशेषज्ञ क्षमता को बढ़ाना है। यह छोटे अस्पतालों और कम सेवा वाले क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच का विस्तार करने में मदद करेगा।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की क्षमता का परीक्षण कीजिए। इस क्षमता को साकार करने में आने वाली प्रमुख चुनौतियों और उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक कदमों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत के स्वास्थ्य सेवा अंतराल (डॉक्टरों, नर्सों, बिस्तरों की कमी, गैर-संचारी रोगों का बढ़ता बोझ, वृद्ध जनसंख्या) का संक्षिप्त उल्लेख करें और AI को इस अंतर को पाटने के एक संभावित समाधान के रूप में प्रस्तुत करें।
2. AI की क्षमता: निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा करें:
क. निदान में सहायता: AI-सक्षम निदान उपकरण कैसे विशेषज्ञता का विस्तार कर सकते हैं, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।
ख. नैदानिक निर्णय लेना: डॉक्टरों को बेहतर और त्वरित निर्णय लेने में मदद।
ग. स्क्रीनिंग और प्रारंभिक पहचान: रोगों की शीघ्र पहचान में भूमिका।
घ. विशेषज्ञ क्षमता का गुणन: डॉक्टरों की कमी को दूर करने में सहायक, उन्हें अधिक रोगियों तक पहुंचने में सक्षम बनाना।
ङ. स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार: छोटे अस्पतालों और कम सेवा वाले क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण देखभाल का विस्तार।
च. उत्पादकता में वृद्धि और असमानताओं में कमी।
3. प्रमुख चुनौतियां:
क. डेटा की उपलब्धता और गुणवत्ता: AI-तैयार स्वास्थ्य डेटा की कमी।
ख. नियामक ढांचा: AI-सक्षम प्रौद्योगिकियों के लिए एक स्पष्ट और अनुमानित नियामक ढांचे का अभाव।
ग. प्रतिपूर्ति तंत्र: AI-आधारित सेवाओं के लिए भुगतान और बीमा कवरेज की कमी।
घ. गोपनीयता और डेटा सुरक्षा संबंधी चिंताएं।
ङ. डिजिटल साक्षरता और बुनियादी ढांचे की कमी, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
च. AI के प्रति डॉक्टरों और रोगियों में विश्वास की कमी।
4. आवश्यक कदम:
क. AI-तैयार स्वास्थ्य डेटा का निर्माण: मानकीकृत डेटा संग्रह और साझाकरण प्रोटोकॉल।
ख. एक सुदृढ़ नियामक और नैतिक ढांचा विकसित करना।
ग. AI-सक्षम प्रौद्योगिकियों के लिए प्रतिपूर्ति तंत्र स्थापित करना।
घ. आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) जैसी पहलों का विस्तार और सुदृढ़ीकरण।
ङ. स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए AI प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण।
च. अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना।
5. निष्कर्ष: भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में AI की परिवर्तनकारी क्षमता को दोहराएं और एक समावेशी व न्यायसंगत स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण में इसके महत्व पर जोर दें, जिसमें मानव विशेषज्ञता और AI का सह-अस्तित्व हो।

स्रोत: Times of India


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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