29 Oct अमित शाह ने चक्रवात अरनब के बाद चार राज्यों को राहत का आश्वासन दिया
✎ आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत आपदा में पहली जिम्मेदारी राज्य की होती है, जबकि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल केंद्र के समन्वय में बचाव, राहत और नुकसान के आकलन में सहायता करते हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — आपदा प्रबंधन (Disaster Management), मौसम विज्ञान और जलवायु | GS Paper II — शासन व्यवस्था: केंद्र-राज्य संबंध और संघीय ढांचे में आपदा प्रबंधन की भूमिका
- Prelims: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA — National Disaster Management Authority), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF — National Disaster Response Force) और इसकी धारा 44 के अंतर्गत स्थापना, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF — State Disaster Response Force), अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (IMCT — Inter-Ministerial Central Team) और नुकसान का आकलन, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD — India Meteorological Department) द्वारा चक्रवात का वर्गीकरण (अवदाब से अति प्रचंड चक्रवात तक), उत्तर हिंद महासागर में चक्रवातों के नामकरण की प्रणाली (WMO/ESCAP पैनल), बंगाल की खाड़ी में मानसून-पश्चात चक्रवात और आंध्र प्रदेश-ओडिशा तट
- Essay: आपदा प्रबंधन में केंद्र और राज्य की साझा जिम्मेदारी: सहकारी संघवाद की कसौटी, पूर्व चेतावनी और समुदाय-आधारित तैयारी से आपदा-जोखिम में कमी
त्वरित पुनरावृत्ति: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत आपदा में पहली जिम्मेदारी राज्य की होती है, जबकि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल केंद्र के समन्वय में बचाव, राहत और नुकसान के आकलन में सहायता करते हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात अर्नब (Cyclone Arnab) ने आंध्र प्रदेश के तट को पार किया, जिससे आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पुडुचेरी और छत्तीसगढ़ प्रभावित हुए। आंध्र प्रदेश में पांच लोगों की मृत्यु हुई और राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों, किसानों, मछुआरों और व्यवसायियों के लिए राहत और मुआवज़ा पैकेज की घोषणा की। ओडिशा के दक्षिणी क्षेत्र में कम से कम 17 जिलों में भारी वर्षा हुई। केंद्रीय गृह मंत्री ने संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात कर हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बलों द्वारा बचाव और राहत अभियान चलाए जाने की जानकारी दी, और नुकसान के आकलन के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल भेजे जाने की बात कही। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार चक्रवात कमजोर होकर गहरे अवदाब में बदल गया था।
पृष्ठभूमि
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत आपदा प्रबंधन की संस्थागत संरचना बनी: राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य स्तर पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला स्तर पर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण। आपदा प्रबंधन में पहली जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है, जबकि गंभीर आपदा में केंद्र सहायता करता है।
- अक्टूबर 2014 में विशाखापट्टनम के निकट तट से टकराया चक्रवात हुदहुद (Cyclone Hudhud) आंध्र प्रदेश और ओडिशा के लिए बड़ी आपदा था। उसके अनुभव से पूर्व चेतावनी, निकासी और बिजली-संचार बहाली जैसी व्यवस्थाओं पर बल दिया गया।
- बंगाल की खाड़ी में मानसून की वापसी के समय (अक्टूबर-दिसंबर) चक्रवात अधिक बनते हैं। इन चक्रवातों से तेज़ हवाएं, तटीय बाढ़, तूफानी लहरें और व्यापक वर्षा होती है।
- भारत ने सेंदाई आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढांचा (Sendai Framework for Disaster Risk Reduction) को अपनाया है, जो आपदा-पूर्व जोखिम न्यूनीकरण पर जोर देता है।
चक्रवात और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र क्या है?
- चक्रवात निम्न दाब वाला तीव्र घूर्णी तूफान है, जो गर्म समुद्री सतह (आमतौर पर 26 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान), कोरिओलिस बल और वायुमंडलीय अस्थिरता के मेल से बनता है।
- भारत मौसम विज्ञान विभाग चक्रवातों को हवा की गति के आधार पर वर्गीकृत करता है: निम्न दाब क्षेत्र, अवदाब, गहरा अवदाब, चक्रवाती तूफान, गंभीर चक्रवाती तूफान, अति गंभीर चक्रवाती तूफान और अति प्रचंड चक्रवात।
- उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र के चक्रवातों के नाम विश्व मौसम विज्ञान संगठन और एस्कैप (ESCAP) की पैनल व्यवस्था के अंतर्गत सदस्य देशों द्वारा सुझाए गए नामों से तय होते हैं।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 44 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल का गठन किया गया है, जो प्रशिक्षित बटालियनों के माध्यम से बचाव और राहत कार्य करता है। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल राज्य सरकार के अधीन कार्य करते हैं।
- आपदा में राहत के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि और राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि जैसी वित्तीय व्यवस्था है। वित्त आयोग की सिफारिश पर राष्ट्रीय आपदा राहत कोष और राष्ट्रीय आपदा शमन कोष का भी प्रावधान है।
- अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल केंद्र सरकार द्वारा भेजे जाते हैं, जो क्षति का संयुक्त आकलन करते हैं और राज्य द्वारा मांगी गई अतिरिक्त सहायता की अनुशंसा करते हैं।
- पूर्व चेतावनी प्रणाली, तटीय आश्रय स्थल, निकासी योजना और समुदाय की भागीदारी आपदा-जोखिम कम करने के मुख्य उपाय हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्त्व |
|---|---|
| चक्रवात की प्रकृति | आंध्र प्रदेश तट पर स्थलपात (Landfall) के बाद चक्रवाती तूफ़ान गहरे अवदाब (Deep Depression) में कमज़ोर हुआ और बाद में निम्न दाब क्षेत्र बनने की संभावना है। इससे आपदा की तीव्रता और अवधि का आकलन होता है। |
| प्रभावित राज्य | आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पुडुचेरी और छत्तीसगढ़ में केंद्र ने संपर्क साधा। तेलंगाना और झारखंड में भी वर्षा से प्रभाव दिखा, जो बहु-राज्यीय आपदा प्रबंधन की आवश्यकता दर्शाता है। |
| मानवीय क्षति | आंध्र प्रदेश में पाँच लोगों की मृत्यु हुई। ओडिशा के दक्षिणी भाग के कम से कम 17 ज़िले भारी वर्षा से प्रभावित हुए। |
| राष्ट्रीय बल की तैनाती | राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (National Disaster Response Force) और राज्य आपदा मोचन बलों (State Disaster Response Forces) ने बचाव और राहत अभियान शुरू किए। यह आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के ढाँचे के भीतर कार्य है। |
| केंद्रीय सहायता तंत्र | अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (Inter-Ministerial Central Team) क्षति का आकलन कर आगे की सहायता की आवश्यकता तय करेंगे। यह केंद्र-राज्य समन्वय की प्रक्रिया है। |
| पूर्व-उदाहरण से तुलना | चक्रवात हुदहुद (2014), जिसने विशाखापत्तनम क्षेत्र को प्रभावित किया था, की स्मृति इस घटना से जुड़ी है। तुलना से शहरी अवसंरचना की सुभेद्यता (Vulnerability) स्पष्ट होती है। |
महत्व
प्रशासनिक एवं संघीय महत्त्व
- केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों से सीधा संवाद केंद्र और राज्यों के बीच आपदा के समय सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का व्यावहारिक उदाहरण है।
- आपदा प्रबंधन में राज्य सरकार प्रथम उत्तरदायी इकाई होती है, जबकि केंद्र सहायता, बल और संसाधन उपलब्ध कराता है।
आपदा प्रबंधन ढाँचा
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority) राष्ट्रीय नीति और दिशानिर्देश तैयार करता है।
- राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा मोचन बल प्रशिक्षित विशेष इकाइयाँ हैं, जिनकी तैनाती से त्वरित बचाव संभव होता है।
मौसम पूर्वानुमान की भूमिका
- भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) के बुलेटिन से चक्रवात की दिशा, तीव्रता और कमज़ोर होने की स्थिति का समय रहते पता चलता है, जिससे निकासी और सावधानी के निर्णय लिए जाते हैं।
- पूर्वानुमान की सटीकता ही प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) की प्रभावशीलता तय करती है।
वित्तीय एवं राहत-संबंधी पक्ष
- राज्य द्वारा मृतकों के परिजनों, किसानों, मछुआरों और व्यापारियों के लिए राहत और मुआवज़ा पैकेज की घोषणा राज्य आपदा मोचन निधि से संबंधित वित्तीय प्रक्रिया का हिस्सा है।
- आपदा के बाद क्षति आकलन (Damage Assessment) राहत-राशि के निर्धारण का आधार बनता है, इसलिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल की रिपोर्ट महत्त्वपूर्ण है।
चुनौतियाँ
1. शहरी अवसंरचना की सुभेद्यता
- हुदहुद की तरह इस बार भी हरित आवरण को नुकसान, बिजली के खंभे गिरना और मोबाइल नेटवर्क बाधित होना दर्शाता है कि शहरी आपदा-रोधी डिज़ाइन की कमी है।
- लंबे समय तक बिजली कटौती से संचार और आवश्यक सेवाएँ प्रभावित होती हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-III: आपदा प्रबंधन; शहरी अवसंरचना और सुभेद्यता
2. बहु-राज्यीय समन्वय की चुनौती
- एक ही चक्रवाती प्रणाली ने चार राज्यों और दो अन्य राज्यों को प्रभावित किया, जिससे बलों, संसाधनों और सूचना के समन्वय की आवश्यकता बढ़ी।
- राज्यों की क्षमता में अंतर से राहत की गति प्रभावित हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: GS-II: केंद्र-राज्य संबंध; सहकारी संघवाद
3. क्षति आकलन और राहत-वितरण में विलंब
- प्रभावित ज़िलों की संख्या बढ़ने पर सटीक क्षति आकलन कठिन होता है।
- राहत के वितरण में पारदर्शिता और पात्रता निर्धारण की समस्या आती है, विशेषकर मछुआरों और किसानों के लिए।
यूपीएससी लिंक: GS-II: सरकारी नीतियों का क्रियान्वयन; GS-III: आपदा प्रबंधन
4. जलवायु-जनित तीव्र वर्षा का बढ़ता जोखिम
- चक्रवात के बाद झारखंड और तेलंगाना जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में भी भारी वर्षा दर्ज हुई, जिससे जोखिम का क्षेत्र विस्तृत हो रहा है।
- बार-बार आने वाली आपदाएँ स्थानीय आजीविका और अवसंरचना पर दीर्घकालिक दबाव डालती हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-III: जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभाव; आपदा जोखिम न्यूनीकरण
5. तटीय समुदायों की आजीविका पर संकट
- मछुआरे और तटीय किसान सबसे पहले प्रभावित होते हैं, और मछली पकड़ने पर रोक से उनकी आय घटती है।
- आपदा-पश्चात आजीविका पुनर्स्थापना की योजनाएँ विलंबित होने पर ग़रीबी का जोखिम बढ़ता है।
यूपीएससी लिंक: GS-I: तटीय समाज; GS-III: समावेशी विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| जीवन-हानि | आंध्र प्रदेश में पाँच मृत्यु; प्रारंभिक चेतावनी और निकासी की प्रभावशीलता पर प्रश्न। |
| कृषि एवं मत्स्य क्षेत्र | दक्षिणी ओडिशा के प्रभावित ज़िलों में फ़सल और मछली-पालन को नुकसान की आशंका। |
| शहरी अवसंरचना | हरित आवरण, बिजली के खंभे और मोबाइल नेटवर्क को क्षति; पुनर्स्थापना में समय लगेगा। |
| बहु-राज्यीय समन्वय | चार राज्यों और अन्य क्षेत्रों में एक साथ बलों और संसाधनों की आवश्यकता। |
| क्षति आकलन में विलंब | अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल की रिपोर्ट के बाद ही सहायता राशि तय होगी, जिससे राहत में देरी हो सकती है। |
आगे की राह
- प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को ज़िला और ग्राम स्तर तक सुदृढ़ किया जाए, ताकि निकासी के निर्णय समय पर लिए जा सकें।
- अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल की रिपोर्ट शीघ्र तैयार हो और राहत-राशि का वितरण समयबद्ध हो।
- शहरी बिजली और दूरसंचार अवसंरचना में भूमिगत केबल और आपदा-रोधी खंभों जैसे उपायों को प्राथमिकता दी जाए।
- तटीय क्षेत्रों में मछुआरों और किसानों के लिए आपदा-पूर्व बीमा और आजीविका-सहायता तंत्र विकसित किया जाए।
- राज्य आपदा मोचन बलों के नियमित प्रशिक्षण और उपकरणों के उन्नयन पर बल दिया जाए।
- आपदा जोखिम न्यूनीकरण योजनाओं को ज़िला आपदा प्रबंधन योजनाओं में समाहित कर उनकी नियमित समीक्षा की जाए।
- बहु-राज्यीय आपदाओं के लिए साझा संचार और समन्वय प्रोटोकॉल को मानकीकृत किया जाए।
- हरित आवरण की बहाली और वृक्षारोपण को शहरी आपदा-प्रबंधन नीति से जोड़ा जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
आपदा प्रबंधन (Disaster Management) · राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority – NDMA) · राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (National Disaster Response Force – NDRF) · राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (State Disaster Response Force – SDRF) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) · चक्रवात (Cyclone) और चक्रवात-पश्चात पुनर्वास · आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) · सेंदाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework for Disaster Risk Reduction) · अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (Inter-Ministerial Central Team – IMCT) · आपदा-पश्चात आवश्यकता आकलन (Post Disaster Needs Assessment – PDNA) · राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि (National Disaster Response Fund) · पूर्व चेतावनी प्रणाली (Early Warning System)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 280: वित्त आयोग की सिफ़ारिश पर राज्य आपदा मोचन निधि का आवंटन
- अनुच्छेद 282: राहत-हेतु केंद्रीय और राज्य अनुदान का संवैधानिक आधार
अवधारणा प्रवाह
बंगाल की खाड़ी या अरब सागर पर निम्न दाब प्रणाली का विकास और चक्रवात का गठन → आंध्र प्रदेश तट पर स्थलपात (Landfall) और तीव्र वर्षा व तेज़ हवाओं से व्यापक क्षति → भारत मौसम विज्ञान विभाग के बुलेटिन से चक्रवात का गहरे अवदाब में कमज़ोर होना और निगरानी → राज्य आपदा मोचन बलों और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की तैनाती तथा बचाव-राहत अभियान → केंद्र सरकार द्वारा मुख्यमंत्रियों से संपर्क और अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दलों का क्षति-आकलन के लिए भेजा जाना → क्षति-आकलन रिपोर्ट के आधार पर राज्य आपदा मोचन निधि और केंद्रीय सहायता से राहत-वितरण तथा पुनर्वास
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है।
2. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की स्थापना राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 44 के अंतर्गत की गई है।
3. चक्रवात-पूर्व चेतावनी जारी करना तथा मौसम संबंधी बुलेटिन देना भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का कार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: NDMA का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है (धारा 3)। कथन 2 सही है: NDRF का गठन धारा 44 के अंतर्गत होता है। कथन 3 भी सही है, परंतु इसे आपदा प्रबंधन अधिनियम का प्रावधान मानना भ्रामक होगा; यह IMD का मौसम-विज्ञानी कार्य है। अतः यहाँ ‘केवल दो’ को सही उत्तर माना गया है, क्योंकि प्रश्न अधिनियम-आधारित कथनों तक सीमित है और कथन 3 अधिनियम का प्रावधान नहीं है।
Q2. अभिकथन (A): चक्रवात स्थल से टकराने (landfall) के बाद अपनी तीव्रता खोकर कमजोर अवदाब (depression) में बदल जाते हैं।
कारण (R): स्थल पर पहुँचने के बाद चक्रवात को समुद्र से गर्म और नम वायु की निरंतर आपूर्ति नहीं मिल पाती।
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — चक्रवात की ऊर्जा का मुख्य स्रोत समुद्र की सतह से मिलने वाली गर्म और नम वायु तथा संघनन से निकली गुप्त ऊष्मा है। स्थल पर आने के बाद यह स्रोत कट जाता है, इसलिए तीव्रता घटती है। अतः (R) (A) की सही व्याख्या है।
Q3. सूची-I (IMD द्वारा प्रयुक्त उष्णकटिबंधीय तंत्र) को सूची-II (पवन गति का पारंपरिक परिसर) से सुमेलित कीजिए:
सूची-I:
1. गहरा अवदाब (Deep Depression)
2. चक्रवाती तूफान (Cyclonic Storm)
3. गंभीर चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm)
सूची-II:
a. 17 से 27 नॉट
b. 28 से 33 नॉट
c. 34 से 47 नॉट
d. 48 से 63 नॉट
सही सुमेलन चुनिए:
- 1-a, 2-b, 3-c
- 1-b, 2-c, 3-d
- 1-c, 2-d, 3-a
- 1-d, 2-a, 3-b
उत्तर: 1-b, 2-c, 3-d — IMD के पारंपरिक वर्गीकरण में अवदाब 17-27 नॉट, गहरा अवदाब 28-33 नॉट, चक्रवाती तूफान 34-47 नॉट और गंभीर चक्रवाती तूफान 48-63 नॉट की पवन गति से बनता है। अतः सही सुमेलन 1-b, 2-c, 3-d है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ आपदा प्रबंधन में राज्यों की प्राथमिक भूमिका और केंद्र की समन्वयकारी भूमिका के बीच संतुलन, भारतीय संघवाद की एक परीक्षा है। चक्रवात अर्णब जैसी घटनाओं में बचाव और राहत के लिए NDRF और SDRF की तत्काल सक्रियता तथा अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दलों के भेजे जाने के प्रस्ताव को ध्यान में रखते हुए, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के ढाँचे में सहकारी संघवाद की व्यावहारिक सीमाओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि क्या आपदा-पश्चात पुनर्वास के लिए मानक-आधारित केंद्रीय सहायता तंत्र राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और संघीय सहयोग दोनों को अधिक प्रभावी ढंग से साध सकता है? (15 Marks)
रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON:
1. भूमिका: चक्रवात अर्णब (IMD के अनुसार चक्रवाती तूफान से गहरे अवदाब और फिर निम्न दाब क्षेत्र में कमजोर होना, आंध्र प्रदेश तट पर पार होना, दक्षिणी ओडिशा के 17 जिलों में भारी वर्षा) के उदाहरण से शुरुआत करें। 2014 के चक्रवात हुदहुद से तुलना करें।
2. संवैधानिक और वैधानिक ढाँचा: आपदा प्रबंधन राज्यों की प्राथमिक जिम्मेदारी है; राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत NDMA (धारा 3, 6), NDRF (धारा 44), SDRF (धारा 48) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि (धारा 46) की व्यवस्था। अनुच्छेद 355 के अंतर्गत संघ का राज्यों को बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से संरक्षण का कर्तव्य, तथा अनुच्छेद 280 के अंतर्गत वित्त आयोग की भूमिका का उल्लेख करें।
3. केंद्र की भूमिका के पक्ष-विपक्ष: समन्वय, विशेषज्ञ बल, संसाधन और IMCT के माध्यम से आकलन जैसे सकारात्मक पक्ष; राज्य सरकारों की स्थानीय जानकारी, दायित्व और निर्णय-शक्ति की अनदेखी, केंद्रीय सहायता में विलंब तथा राजनीतिक-प्रशासनिक असमन्वय जैसे प्रश्न।
4. ढाँचागत चुनौतियाँ: मानकीकृत राहत मानदंडों की कमी, आपदा-पश्चात आवश्यकता आकलन (PDNA) की समयबद्धता, चक्रवात आश्रय स्थल, पूर्व चेतावनी प्रणाली (CWDS) और तटीय मैंग्रोव-हरित आवरण के क्षरण का प्रभाव।
5. नीतिगत उदाहरण: ओडिशा का 1999 के सुपर साइक्लोन के बाद विकसित चक्रवात-जोखिम न्यूनीकरण मॉडल; राष्ट्रीय चक्रवात जोखिम न्यूनीकरण परियोजना (NCRMP); सेंदाई फ्रेमवर्क (2015-2030) की प्राथमिकताएँ, विशेषकर ‘जोखिम समझना’ और ‘तैयारी बढ़ाना’।
6. संतुलित दृष्टिकोण: केंद्र की सहायता को मानक-आधारित और पूर्वानुमेय बनाने तथा राज्यों की क्षमता-निर्माण पर बल देने का तर्क; अत्यधिक केंद्रीकरण से राज्य-दायित्व के क्षरण का जोखिम।
7. निष्कर्ष: सहकारी संघवाद के अंतर्गत स्पष्ट भूमिका-विभाजन, पूर्वानुमेय वित्तीय तंत्र और आपदा-जोखिम को विकास-योजना में समाहित करने का संतुलित समाधान।
स्रोत: orissapost.com
Chhattisgarh PCS (CGPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: छत्तीसगढ़ राज्य में चक्रवात से प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्वास कार्यों के लिए केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में दिए गए आश्वासन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा राज्य/केंद्र शासित प्रदेश इस आश्वासन का हिस्सा नहीं था?
- आंध्र प्रदेश
- ओडिशा
- पुडुचेरी
- महाराष्ट्र
उत्तर: महाराष्ट्र — केंद्र सरकार द्वारा चक्रवात से प्रभावित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पुडुचेरी एवं छत्तीसगढ़ को शामिल किया गया था, जबकि महाराष्ट्र इस सूची में नहीं था।
Mains: छत्तीसगढ़ राज्य में चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रभावी प्रबंधन हेतु राज्य सरकार द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीतियों का वर्णन कीजिए। साथ ही, केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किए गए आश्वासन के आलोक में राज्य की तैयारी एवं पुनर्वास प्रक्रिया में सुधार के लिए सुझाव दीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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