मालदीव के विदेश नीति बदलाव पर भारत को स्पष्ट लाल रेखाएं तय करनी चाहिए: विश्लेषण

मालदीव के विदेश नीति बदलाव पर भारत को स्पष्ट लाल रेखाएं तय करनी चाहिए: विश्लेषण

मालदीव के विदेश नीति बदलाव पर भारत को स्पष्ट लाल रेखाएं तय करनी चाहिए: विश्लेषण

मालदीव की विदेश नीति में बदलावभारत-मालदीव संबंधमालदीव-पाकिस्तान संबंधविदेश नीति का उद्देश्यभारत-मालदीव संबंधों में विविधतामालदीव-पाकिस्तान संबंधों में निकटताहस्ताक्षरित समझौते20 MoU (सामाजिक-आर्थिक, रक्षा, साइबर स20 MoU (सामाजिक-आर्थिक, रक्षा, साइबर सव्यापार लक्ष्यव्यापार 13 मिलियन से 200 मिलियन डॉलरव्यापार लक्ष्य स्पष्ट नहींसीधी उड़ानेंलक्ष्य: सीधी उड़ानें शुरू करनाउल्लेख नहींऋण सहायताभारत द्वारा ट्रेज़री बिल, ऋण पुनर्गठन,उल्लेख नहींक्षेत्रीय प्रभावहिंद महासागर क्षेत्र में भारत के सामरिहिंद महासागर क्षेत्र में भारत के प्रभा
मालदीव की विदेश नीति में बदलाव

✎ मालदीव की विदेश नीति का विविधीकरण संप्रभु अधिकार है, पर हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सुरक्षा-चिंताओं के संदर्भ में भारत को अपनी रणनीतिक सीमाएँ स्पष्ट और सुसंगत रूप से व्यक्त करनी होती हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंध, क्षेत्रीय समूह और भारत के हित)  |  GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा और सामुद्रिक सुरक्षा (हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियाँ, तटीय और समुद्री सुरक्षा)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (विकास सहायता, मुद्रा अदला-बदली और राजकोषीय सहयोग के माध्यम से कूटनीतिक लाभ)
  • Prelims: मालदीव (Maldives) और उसकी राजनीतिक-भौगोलिक स्थिति, हिंद महासागर क्षेत्र (IOR), सागर (SAGAR) दृष्टिकोण: सुरक्षा और सभी के लिए विकास (Security and Growth for All in the Region), कोलंबो सुरक्षा संवाद (Colombo Security Conclave), सार्क (SAARC) और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग, मुद्रा अदला-बदली (Currency Swap) और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की भूमिका, समझौता ज्ञापन (MoU) और द्विपक्षीय समझौतों का स्वरूप, ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) से जुड़े क्षेत्रीय घटनाक्रम
  • Essay: छोटे पड़ोसी देशों की संप्रभु पसंद और बड़े पड़ोसी की सुरक्षा चिंताओं के बीच संतुलन: क्या कूटनीति में ‘लाल रेखाएँ’ स्पष्ट करना उचित है?, आर्थिक सहायता बनाम रणनीतिक प्रभाव: विकास सहयोग भारत की पड़ोस-नीति का साधन कैसे बनता है?

त्वरित पुनरावृत्ति: मालदीव की विदेश नीति का विविधीकरण संप्रभु अधिकार है, पर हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सुरक्षा-चिंताओं के संदर्भ में भारत को अपनी रणनीतिक सीमाएँ स्पष्ट और सुसंगत रूप से व्यक्त करनी होती हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने हाल में पाकिस्तान की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा की। इस दौरान दोनों देशों ने सामाजिक-आर्थिक विकास, साइबर सुरक्षा, मादक पदार्थों की तस्करी, रक्षा और सामुद्रिक सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में 20 समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों ने व्यापार को 13 मिलियन डॉलर से बढ़ाकर 200 मिलियन डॉलर करने और सीधी उड़ानें शुरू करने का लक्ष्य रखा है। यह घटनाक्रम इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि मालदीव अपनी विदेश नीति में विविधता ला रहा है और भारत के साथ निकट संबंधों के साथ-साथ अन्य देशों के साथ रक्षा एवं सामुद्रिक सहयोग बढ़ा रहा है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के सामरिक हितों और सुरक्षा-चिंताओं के संदर्भ में नीतिगत विमर्श शुरू हुआ है।

पृष्ठभूमि

  • मालदीव 1965 में ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ और 1968 में गणराज्य बना। भारत उसके सबसे पहले मान्यता देने वाले देशों में से एक था तथा दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंध हैं।
  • भारत की ‘सबसे पहले पड़ोसी’ (Neighbourhood First) नीति और सागर (SAGAR) दृष्टिकोण में हिंद महासागर क्षेत्र के देशों की सुरक्षा और विकास को प्राथमिकता दी गई है। मालदीव इस नीति का केंद्रीय भागीदार माना जाता है।
  • 2023-24 में मालदीव की नई सरकार के अनुरोध पर भारतीय सैन्य कर्मियों को वापस बुलाया गया। इसके बाद दोनों देशों के संबंधों में नए सिरे से संतुलन की आवश्यकता उभरी।
  • मालदीव पर भारी ऋण भार है। इसी कारण भारत ने ट्रेज़री बिल (T-bills) के विस्तार, ऋण पुनर्गठन, क्रेडिट लाइन और मुद्रा अदला-बदली जैसी वित्तीय सहायता दी है, जिससे भारत का आर्थिक प्रभाव बढ़ा है।
  • पाकिस्तान ने सार्क के पुनर्जीवन की बात की है, चीन और बांग्लादेश व अफ़गानिस्तान के साथ त्रिपक्षीय बैठकें की हैं और बंगाल की खाड़ी में अपनी नौसैनिक उपस्थिति बढ़ाने की योजना बताई है। इन पहलों को भारत के क्षेत्रीय प्रभाव के संदर्भ में देखा जा रहा है।

मालदीव की विदेश नीति का विविधीकरण क्या है?

  • विविधीकरण का अर्थ है किसी एक देश या गुट पर निर्भरता घटाकर अनेक देशों के साथ संबंधों का विस्तार करना, ताकि राष्ट्रीय हित और आर्थिक विकल्प व्यापक हों।
  • मालदीव एक छोटा द्वीपीय देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन और आयात पर निर्भर है। इसलिए विकास-वित्त के नए स्रोत उसकी नीति की प्रमुख प्रेरणा हैं।
  • रक्षा क्षेत्र में मालदीव ने पाकिस्तान, चीन और तुर्की के साथ रक्षा सहयोग के समझौते किए हैं। तुर्की से एक पोत और कई मानव-रहित हवाई वाहन (UAV) प्राप्त होने की बात कही गई है।
  • मालदीव ने संयुक्त अरब अमीरात से बख़्तरबंद वाहन लिए हैं और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सामुद्रिक रक्षा गठबंधन से भी जुड़ा है।
  • भारत की दृष्टि से हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा, द्वीपों पर सैन्य पहुँच और तटीय निगरानी महत्त्वपूर्ण है। इसी कारण मालदीव की नीतिगत दिशा भारत के लिए सामरिक महत्त्व रखती है।
  • भारत ने अब तक सहायता, ऋण-राहत और मुद्रा अदला-बदली के माध्यम से प्रभाव बनाए रखा है। यह लेन-देन आधारित और दीर्घकालिक संबंधों का मिश्रण है।
  • राजनयिक दृष्टि से किसी भी देश की संप्रभु पसंद का सम्मान और अपनी सुरक्षा-चिंताओं की स्पष्ट अभिव्यक्ति, दोनों साथ-साथ चलने चाहिए। इसी संतुलन को लाल रेखाएँ स्पष्ट करने की अवधारणा से जोड़ा जाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
राज्य यात्रा (State Visit) मालदीव राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू की तीन दिवसीय पाकिस्तान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 20 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें सामाजिक-आर्थिक विकास, साइबर सुरक्षा, नशीले पदार्थों की तस्करी, रक्षा और सामुद्रिक सुरक्षा शामिल हैं।
व्यापार और कनेक्टिविटी का लक्ष्य द्विपक्षीय व्यापार को लगभग 13 मिलियन डॉलर से बढ़ाकर अगले दो वर्षों में 200 मिलियन डॉलर करने तथा सीधी उड़ानें शुरू करने की योजना है। मालदीव ने निवेश के अवसर खोजने के लिए व्यापार मंच भी आयोजित किया।
बहु-पक्षीय रक्षा साझेदारियाँ मालदीव के चीन, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात के साथ रक्षा संबंध हैं। तुर्की से पोत और मानवरहित हवाई वाहन (UAV) मिले हैं, जबकि UAE से बख़्तरबंद वाहन खरीदे गए हैं। मालदीव सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सामुद्रिक रक्षा गठबंधन का भी सदस्य बना है।
भारत की वित्तीय सहायता ट्रेज़री बिल (T-Bill) के विस्तार (150 मिलियन डॉलर), ऋण पुनर्गठन, 4,850 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा तथा मुद्रा अदला-बदली (Currency Swap) के रूप में 400 मिलियन डॉलर और 30 अरब रुपये की व्यवस्था की गई है।
हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) का संदर्भ मालदीव हिंद महासागर में भारत की सामुद्रिक स्थिति के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इसी कारण इस क्षेत्र में किसी भी बाहरी साझेदारी का प्रभाव भारत की सुरक्षा गणना से जुड़ जाता है।

महत्व

कूटनीतिक एवं रणनीतिक

  • छोटे पड़ोसी देशों द्वारा विदेश नीति के विविधीकरण से यह स्पष्ट होता है कि संप्रभु राष्ट्र अपनी साझेदारियाँ स्वयं चुनते हैं, जिसे भारत को अपनी पड़ोसी नीति में स्वीकार करना होगा।
  • पाकिस्तान के साथ बढ़ती निकटता से दक्षिण एशिया में भारत की प्रभावी भूमिका को संतुलित करने का प्रयास दिखता है।
  • भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह संवाद और दबाव के बीच संतुलन बनाए रखे, ताकि सुरक्षा हित सुरक्षित रहें और संबंधों में अनावश्यक तनाव न बढ़े।

सामुद्रिक सुरक्षा

  • हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत के व्यापार और ऊर्जा आयात के लिए महत्वपूर्ण है, और मालदीव की भौगोलिक स्थिति इसे केंद्र में रखती है।
  • रक्षा और सामुद्रिक सुरक्षा पर समझौतों से बाहरी नौसैनिक उपस्थिति के बारे में भारत की चिंताएँ बढ़ती हैं।
  • पाकिस्तान द्वारा बंगाल की खाड़ी में नौसैनिक उपस्थिति बढ़ाने की योजना भी क्षेत्रीय सामुद्रिक संतुलन पर प्रभाव डालती है।

आर्थिक

  • भारत की ऋण, ट्रेज़री बिल विस्तार और मुद्रा अदला-बदली जैसी सहायता मालदीव की भुगतान संतुलन और विदेशी मुद्रा आवश्यकताओं को सहारा देती है।
  • व्यापार लक्ष्य और सीधी उड़ानों की योजनाएँ क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण की दिशा में संकेत हैं, परंतु इनका मूल्यांकन ठोस परियोजनाओं के आधार पर होना चाहिए।
  • आर्थिक सहायता से भारत को दीर्घकालिक सद्भाव प्राप्त होता है, जो विदेश नीति में ‘सॉफ्ट पावर’ का एक साधन है।

क्षेत्रीय सहयोग

  • पाकिस्तान द्वारा SAARC के पुनर्जीवन तथा भारत के बिना नए दक्षिण एशियाई गुट के प्रस्ताव से क्षेत्रीय संस्थागत ढाँचे में विभाजन की आशंका उत्पन्न होती है।
  • चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान के बीच त्रिपक्षीय बैठकें दक्षिण एशिया में बहु-ध्रुवीय सहयोग की प्रवृत्ति को दर्शाती हैं।

चुनौतियाँ

1. हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की स्थिति को चुनौती

  • पाकिस्तान की यात्रा को भारत की सामुद्रिक उपस्थिति और हितों को चुनौती देने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
  • मालदीव की रक्षा साझेदारियों के विस्तार से भारत की सामुद्रिक निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता के समक्ष नई जटिलताएँ उत्पन्न होती हैं।

2. पड़ोसी देशों के साथ संप्रभुता और हितों के बीच संतुलन

  • मालदीव की स्वायत्त विदेश नीति का सम्मान करते हुए भारत के सुरक्षा हितों की रक्षा करना एक नाजुक संतुलन है।
  • अत्यधिक दबाव से मालदीव के भीतर भारत-विरोधी भावना बढ़ने का जोखिम है, जबकि अनदेखी से भारत का प्रभाव घट सकता है।

3. दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग में ध्रुवीकरण

  • SAARC के पुनर्जीवन और भारत के बिना नए गुट के प्रस्ताव से क्षेत्रीय संस्थाओं के कमजोर होने की संभावना है।
  • कश्मीर और सिंधु जल संधि का संयुक्त वक्तव्य में उल्लेख द्विपक्षीय मुद्दों के अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

4. आर्थिक सहायता पर आधारित प्रभाव की सीमाएँ

  • ऋण, ट्रेज़री बिल विस्तार और मुद्रा अदला-बदली पर निर्भरता से भारत को लाभ मिलता है, परंतु इससे भारत के वित्तीय जोखिम भी जुड़े रहते हैं।
  • आर्थिक सहायता को रणनीतिक लाभ में बदलने के लिए स्पष्ट शर्तें और परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है।

5. रक्षा आयात में विविधीकरण का प्रभाव

  • मालदीव द्वारा अनेक देशों से रक्षा उपकरण लेने से उसकी रक्षा प्रणालियों में अंतरसंचालनीयता (Interoperability) की समस्या आ सकती है।
  • बाहरी रक्षा साझेदारियों से भारत की सुरक्षा सूचना और रक्षा सहयोग की प्राथमिकता पर असर पड़ सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
सामुद्रिक उपस्थिति हिंद महासागर में बाहरी नौसैनिक और रक्षा संबंधों से भारत की सुरक्षा गणना प्रभावित हो सकती है।
क्षेत्रीय संस्थाएँ SAARC के विकल्प के रूप में भारत के बिना गुट बनाने का प्रस्ताव दक्षिण एशियाई सहयोग को विभाजित कर सकता है।
द्विपक्षीय संवेदनशीलता कश्मीर और सिंधु जल संधि जैसे मुद्दों का बहुपक्षीय वक्तव्यों में आना भारत की नीति के लिए संवेदनशील है।
वित्तीय जोखिम ऋण, मुद्रा अदला-बदली और ट्रेज़री बिल पर निर्भरता से भारत के लिए वित्तीय और कूटनीतिक दायित्व बने रहते हैं।
संप्रभुता बनाम दबाव अत्यधिक दबाव से मालदीव की स्वायत्तता पर प्रश्न उठेंगे और द्विपक्षीय विश्वास कमजोर हो सकता है।

आगे की राह

  • भारत को अपने सुरक्षा हितों से जुड़ी ‘लाल रेखाएँ’ कूटनीतिक माध्यमों से स्पष्ट और पूर्वानुमेय रूप में बतानी चाहिए, ताकि मालदीव सहित सभी पड़ोसी देश अपेक्षाएँ समझ सकें।
  • आर्थिक सहायता को परियोजना-आधारित, पारदर्शी और दीर्घकालिक शर्तों के साथ जोड़ा जाना चाहिए, जिससे मालदीव की वित्तीय स्थिरता और भारत के हित दोनों सुरक्षित रहें।
  • हिंद महासागर में सामुद्रिक निगरानी, डोमेन जागरूकता (Maritime Domain Awareness) और तटीय सुरक्षा क्षमताओं को मज़बूत करना आवश्यक है।
  • कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन (Colombo Security Conclave) जैसे क्षेत्रीय सुरक्षा मंचों का प्रभावी उपयोग कर सामुद्रिक सुरक्षा पर साझा समझ विकसित की जानी चाहिए।
  • मालदीव की संप्रभुता और स्वायत्त निर्णय के सम्मान के साथ, रक्षा और सुरक्षा सहयोग में भारत की प्राथमिकता को ठोस प्रस्तावों द्वारा बनाए रखना चाहिए।
  • दक्षिण एशिया में बहुपक्षीय संवाद को पुनर्जीवित करने के प्रयासों में भारत को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, ताकि क्षेत्रीय संस्थाएँ विभाजन के बजाय सहयोग का मंच बनी रहें।
  • द्विपक्षीय मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की प्रवृत्ति से निपटने के लिए भारत को अपने पक्ष को तथ्यों और संवाद के माध्यम से स्पष्ट करना चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मालदीव-भारत संबंध · हिंद महासागर क्षेत्र · भू-राजनीतिक हित · रणनीतिक स्वायत्तता · विदेश नीति विविधीकरण · सुरक्षा चिंताएँ · आर्थिक कूटनीति · पड़ोसी पहले नीति · क्षेत्रीय शक्ति संतुलन · रक्षा सहयोग

अवधारणा प्रवाह

मालदीव द्वारा विदेश नीति का विविधीकरण और राष्ट्रीय स्वायत्तता पर बल  →  पाकिस्तान की राज्य यात्रा और 20 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर  →  चीन, तुर्की, UAE और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ रक्षा और सामुद्रिक साझेदारियों का विस्तार  →  पाकिस्तान द्वारा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के प्रभाव को संतुलित करने और क्षेत्रीय संस्थाओं में नए समीकरण बनाने का प्रयास  →  भारत की आर्थिक सहायता (ट्रेज़री बिल, ऋण पुनर्गठन, मुद्रा अदला-बदली) से मालदीव के साथ दीर्घकालिक सद्भाव बनाए रखने की नीति  →  भारत के सामने विकल्प: स्पष्ट लाल रेखाओं के साथ संवाद और सहयोग का संतुलन  →  सुरक्षा हितों की रक्षा और द्विपक्षीय विश्वास के बीच संतुलित विदेश नीति

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मालदीव ने हाल ही में पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग पर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
2. भारत ने मालदीव को ऋण पुनर्गठन और मुद्रा विनिमय (currency swap) सुविधाएँ प्रदान की हैं।
3. मालदीव, चीन और तुर्किये के साथ भी रक्षा साझेदारी कर रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की हालिया पाकिस्तान यात्रा के दौरान रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। कथन 2 सही है। भारत ने मालदीव को आर्थिक सहायता के रूप में ऋण पुनर्गठन, क्रेडिट लाइन और मुद्रा विनिमय सुविधाएँ प्रदान की हैं। कथन 3 सही है। मालदीव ने पाकिस्तान के अलावा चीन और तुर्किये के साथ भी रक्षा सहयोग समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।

Q2. अभिकथन (A): भारत के लिए हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में मालदीव की रणनीतिक स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कारण (R): मालदीव की विदेश नीति का विविधीकरण भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा सकता है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सत्य है क्योंकि मालदीव हिंद महासागर में भारत की सुरक्षा और व्यापार मार्गों के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बिंदु है। कारण (R) भी सत्य है क्योंकि मालदीव का अन्य देशों, विशेषकर भारत के प्रतिद्वंद्वियों के साथ रक्षा संबंध स्थापित करना भारत की सुरक्षा हितों को प्रभावित कर सकता है। R, A की सही व्याख्या है क्योंकि मालदीव की रणनीतिक स्थिति के कारण ही उसकी विदेश नीति में बदलाव भारत के लिए चिंता का विषय बन जाता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ हिंद महासागर क्षेत्र में मालदीव की बदलती विदेश नीति भारत के भू-रणनीतिक हितों को कैसे प्रभावित कर सकती है? भारत को अपनी ‘पड़ोसी पहले’ नीति के तहत इस स्थिति का प्रबंधन कैसे करना चाहिए? (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर में निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए:
1. **परिचय:** मालदीव के भू-रणनीतिक महत्व और हाल ही में उसकी विदेश नीति में आए बदलावों का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **भारत के भू-रणनीतिक हितों पर प्रभाव:**
* **सुरक्षा चिंताएँ:** हिंद महासागर में भारत की सुरक्षा पर संभावित प्रभाव, विशेषकर चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ मालदीव के बढ़ते रक्षा संबंधों के संदर्भ में।
* **व्यापार और संचार मार्ग:** समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव।
* **क्षेत्रीय शक्ति संतुलन:** हिंद महासागर में भारत के पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र में कमी।
* **आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी:** समुद्री सुरक्षा सहयोग में संभावित चुनौतियाँ।
3. **भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति के तहत प्रबंधन:**
* **आर्थिक कूटनीति:** मालदीव को आर्थिक सहायता, ऋण पुनर्गठन और विकास परियोजनाओं के माध्यम से संबंधों को मजबूत करना। (उदाहरण: $150 मिलियन के टी-बिल का विस्तार, ₹4,850 करोड़ की क्रेडिट लाइन, $400 मिलियन और ₹30 बिलियन के मुद्रा विनिमय)।
* **सुरक्षा सहयोग:** संयुक्त सैन्य अभ्यास, क्षमता निर्माण और खुफिया जानकारी साझा करने के माध्यम से रक्षा संबंधों को बनाए रखना।
* **जन-केंद्रित दृष्टिकोण:** मालदीव के लोगों के साथ सांस्कृतिक, शैक्षिक और स्वास्थ्य संबंधों को बढ़ावा देना।
* **स्पष्ट ‘रेड लाइन्स’ स्थापित करना:** भारत की सुरक्षा चिंताओं को स्पष्ट रूप से संप्रेषित करना और यह सुनिश्चित करना कि मालदीव की संप्रभु पसंद भारत के हितों को बाधित न करे।
* **बहुपक्षीय मंचों का उपयोग:** सार्क (SAARC), बिम्सटेक (BIMSTEC) जैसे क्षेत्रीय मंचों पर सहयोग बढ़ाना।
4. **निष्कर्ष:** भारत-मालदीव संबंधों के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संतुलित और सक्रिय दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल देना।

स्रोत: The Indian Express


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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