23 Oct सी-डैक और बैंक ऑफ इंडिया का क्वांटम प्रौद्योगिकी हेतु सहयोग
✎ क्वांटम प्रौद्योगिकी का बैंकिंग में मुख्य उपयोग उत्तर-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी और सुरक्षित संचार के माध्यम से वित्तीय डेटा की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है, और C-DAC जैसी सरकारी संस्थाओं की भागीदारी इसे स्वदेशी तकनीकी…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — Science and Technology (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारत की उपलब्धियाँ; उभरती प्रौद्योगिकियाँ; साइबर सुरक्षा) | GS Paper III — Economy (बैंकिंग क्षेत्र में सुधार; सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक; वित्तीय क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन)
- Prelims: क्वांटम प्रौद्योगिकी (Quantum Technology), क्वांटम बिट (Qubit) और अधिसंरचना का अर्थ, क्वांटम कुंजी वितरण (Quantum Key Distribution – QKD), उत्तर-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (Post-Quantum Cryptography), राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (National Quantum Mission) — DST द्वारा कार्यान्वित, C-DAC — MeitY के अंतर्गत स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था; PARAM श्रृंखला, बैंक ऑफ इंडिया — सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक; वित्त मंत्रालय (वित्तीय सेवाएँ विभाग) के अधीन
- Essay: तकनीकी आत्मनिर्भरता और प्रौद्योगिकीय संप्रभुता: क्या स्वदेशी क्वांटम तकनीक भारत की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है?, क्वांटम युग में साइबर सुरक्षा की चुनौती: वित्तीय तंत्र के लिए तैयारी
त्वरित पुनरावृत्ति: क्वांटम प्रौद्योगिकी का बैंकिंग में मुख्य उपयोग उत्तर-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी और सुरक्षित संचार के माध्यम से वित्तीय डेटा की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है, और C-DAC जैसी सरकारी संस्थाओं की भागीदारी इसे स्वदेशी तकनीकी संप्रभुता से जोड़ती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
C-DAC (Centre for Development of Advanced Computing) और बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) ने बैंकिंग अनुप्रयोगों के लिए स्वदेशी क्वांटम प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने हेतु साथ मिलकर काम करने का निर्णय लिया है। यह सहयोग इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम संचार भविष्य में वर्तमान एन्क्रिप्शन पद्धतियों को प्रभावित कर सकते हैं, जबकि बैंकिंग प्रणाली बड़े पैमाने पर संवेदनशील वित्तीय डेटा और लेन-देन की सुरक्षा पर निर्भर है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के साथ किसी सरकारी वैज्ञानिक संस्था की साझेदारी से यह संकेत मिलता है कि क्वांटम अनुसंधान को केवल प्रयोगशाला तक सीमित न रखकर वास्तविक वित्तीय सेवाओं में उपयोग की दिशा में ले जाने का प्रयास हो रहा है।
पृष्ठभूमि
- भारत का राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (National Quantum Mission) अप्रैल 2023 में मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत किया गया था, जिसका कार्यान्वयन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा किया जा रहा है। इसके अंतर्गत क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम संवेदन और मेट्रोलॉजी, तथा क्वांटम सामग्री और उपकरण जैसे चार प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित अनुसंधान हब बनाए गए हैं।
- C-DAC भारत की एक प्रमुख वैज्ञानिक संस्था है, जो इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत कार्य करती है। उच्च-निष्पादन कंप्यूटिंग (High Performance Computing) में PARAM श्रृंखला के सुपरकंप्यूटर इसकी पहचान हैं।
- बैंकिंग क्षेत्र में डिजिटल लेन-देन, साइबर खतरों और डेटा सुरक्षा की चुनौतियाँ लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में एन्क्रिप्शन और सुरक्षित संचार की आवश्यकता वित्तीय संस्थाओं के लिए केंद्रीय महत्व रखती है।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी राष्ट्रीय मानक एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (NIST) ने अगस्त 2024 में उत्तर-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी के पहले मानकीकृत एल्गोरिदम घोषित किए, जिससे इस विषय पर वैश्विक ध्यान और बढ़ा है।
क्वांटम प्रौद्योगिकी क्या है?
- क्वांटम प्रौद्योगिकी वह प्रौद्योगिकी है जो क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों, जैसे अध्यारोपण (Superposition) और उलझाव (Entanglement), पर आधारित है।
- क्वांटम कंप्यूटिंग में सूचना की मूल इकाई क्वांटम बिट (Qubit) होती है, जो एक साथ कई अवस्थाओं में हो सकती है। इससे कुछ विशेष प्रकार की गणनाएँ पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में कहीं तेज़ी से की जा सकती हैं।
- क्वांटम संचार में क्वांटम कुंजी वितरण (QKD) जैसी विधियों से गोपनीय कुंजी का आदान-प्रदान इस प्रकार किया जाता है कि किसी तीसरे पक्ष द्वारा हस्तक्षेप का पता चल जाए।
- उत्तर-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी ऐसे एल्गोरिदम पर आधारित है जो भविष्य के शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटरों के हमलों का सामना कर सकें। इसमें यह आशंका भी शामिल है कि आज एकत्र किए गए एन्क्रिप्टेड डेटा को भविष्य में डिक्रिप्ट किया जा सकता है (Harvest Now, Decrypt Later)।
- बैंकिंग में संभावित अनुप्रयोगों में सुरक्षित लेन-देन, संवेदनशील डेटा का दीर्घकालिक संरक्षण, धोखाधड़ी की पहचान तथा जटिल वित्तीय मॉडलिंग और अनुकूलन (Optimisation) की समस्याएँ शामिल हो सकती हैं।
- स्वदेशी क्वांटम प्रौद्योगिकी का महत्व इसलिए है कि इससे संवेदनशील वित्तीय अवसंरचना के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होती है और तकनीकी संप्रभुता सुदृढ़ होती है।
- क्वांटम प्रौद्योगिकी का विकास अभी प्रारंभिक एवं अनुसंधान-प्रधान चरण में है, इसलिए व्यावसायिक उपयोग के लिए परीक्षण, मानकीकरण और कुशल मानव संसाधन आवश्यक हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| सहयोगी संस्थाएँ | C-DAC (Centre for Development of Advanced Computing), जो इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत उन्नत कंप्यूटिंग का अनुसंधान एवं विकास करने वाली संस्था है, और सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक Bank of India, जो बैंकिंग सेवाओं का व्यावहारिक उपयोगकर्ता है। अनुसंधान क्षमता और वित्तीय क्षेत्र की आवश्यकता का एक मंच पर आना इस पहल की मूल विशेषता है। |
| उद्देश्य | स्वदेशी क्वांटम प्रौद्योगिकियों को बैंकिंग अनुप्रयोगों तक ले जाना। इसका अर्थ है कि विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करके देश में विकसित समाधानों को वास्तविक वित्तीय सेवाओं में परखा जाए। |
| तकनीकी क्षेत्र | क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार और उत्तर-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (Post-Quantum Cryptography) जैसे क्षेत्र। बैंकिंग में इनका सीधा संबंध डेटा सुरक्षा, लेनदेन की गोपनीयता और जोखिम विश्लेषण से है। |
| सुरक्षा आयाम | भविष्य में सक्षम क्वांटम कंप्यूटरों से वर्तमान एन्क्रिप्शन पद्धतियाँ कमजोर हो सकती हैं। इसलिए बैंकिंग प्रणाली को पहले से क्वांटम-रोधी (Quantum-safe) सुरक्षा ढाँचे की ओर ले जाना दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए आवश्यक माना जाता है। |
| नीतिगत संदर्भ | यह पहल राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (National Quantum Mission) के व्यापक लक्ष्यों, विशेषकर स्वदेशी क्षमता निर्माण और उद्योग-अकादमिक-सरकार सहयोग, के अनुरूप दिखाई देती है। |
महत्व
आर्थिक
- बैंकिंग क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक विकसित होने से आयातित समाधानों पर निर्भरता घटने की संभावना बनती है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो सकता है।
- वित्तीय संस्थानों की सुरक्षा और लेनदेन की विश्वसनीयता बढ़ने से डिजिटल वित्तीय सेवाओं में जनता का भरोसा सुदृढ़ होता है, जो वित्तीय समावेशन के लिए महत्वपूर्ण है।
- क्वांटम तकनीक में विकसित कौशल और उद्योग-आधारित अनुसंधान से उच्च तकनीकी रोजगार और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बल मिल सकता है।
सामरिक एवं सुरक्षा
- वित्तीय ढाँचा राष्ट्रीय आधारभूत संरचना का अंग है। इसकी सुरक्षा में आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी प्रासंगिक है।
- क्वांटम-रोधी क्रिप्टोग्राफी की दिशा में पहल भविष्य के साइबर खतरों के विरुद्ध तैयारी का संकेत देती है।
वैज्ञानिक एवं तकनीकी
- सार्वजनिक अनुसंधान संस्था और बैंक के बीच सहयोग से प्रयोगशाला के शोध को वास्तविक उपयोग-परिदृश्य में परखने का अवसर मिलता है। इसे अनुसंधान से उद्योग तक (Lab-to-Market) की प्रक्रिया का उदाहरण माना जा सकता है।
- स्वदेशी विकास से वैज्ञानिक स्वभाव और नवाचार की संस्कृति को प्रोत्साहन मिलता है, जो संविधान के मौलिक कर्तव्यों की भावना से जुड़ता है।
चुनौतियाँ
1. तकनीकी परिपक्वता की सीमा
- क्वांटम कंप्यूटिंग अभी प्रयोगात्मक और प्रारंभिक चरण में है। स्थिरता (Qubit Stability) और त्रुटि सुधार (Error Correction) जैसी चुनौतियाँ व्यावसायिक उपयोग की गति को सीमित करती हैं।
- बैंकिंग जैसे संवेदनशील क्षेत्र में कोई भी नई तकनीक तभी अपनाई जा सकती है जब उसकी विश्वसनीयता और मापनीयता (Scalability) प्रमाणित हो।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का विकास; स्वदेशी तकनीक
2. साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण
- वर्तमान एन्क्रिप्शन ढाँचे का क्वांटम युग में कमजोर होना एक गंभीर जोखिम है, जिसे अभी से संबोधित करना आवश्यक है।
- वित्तीय डेटा की गोपनीयता, पहचान प्रमाणीकरण और साइबर घटनाओं से निपटने की व्यवस्था को सुदृढ़ करने की जरूरत बनी रहती है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा में साइबर खतरे; डेटा संरक्षण
3. कौशल और मानव संसाधन की कमी
- क्वांटम भौतिकी, क्वांटम अभियांत्रिकी और क्रिप्टोग्राफी में विशेषज्ञ जनशक्ति सीमित है।
- अकादमिक शोध को उद्योग की व्यावहारिक आवश्यकताओं से जोड़ने के लिए पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण का सुदृढ़ ढाँचा अपेक्षित है।
यूपीएससी लिंक: कौशल विकास; उच्च शिक्षा और अनुसंधान
4. नियामक और मानक निर्धारण
- बैंकिंग में नई तकनीक के उपयोग के लिए सुरक्षा मानक, परीक्षण प्रोटोकॉल और नियामक अनुमोदन की स्पष्ट प्रक्रिया आवश्यक है।
- क्वांटम-रोधी मानकों पर अंतरराष्ट्रीय सहमति विकसित हो रही है। भारत को अपने मानक इस प्रक्रिया के साथ समन्वित रखने होंगे।
यूपीएससी लिंक: बैंकिंग विनियमन; वित्तीय क्षेत्र के सुधार
5. सार्वजनिक-निजी और संस्थागत समन्वय
- अनुसंधान संस्थाओं, सार्वजनिक बैंकों और तकनीकी कंपनियों के बीच दीर्घकालिक समन्वय और स्पष्ट उत्तरदायित्व ढाँचे का अभाव शोध को बाजार तक पहुँचने में बाधा बन सकता है।
यूपीएससी लिंक: सहकारी संघवाद और संस्थागत समन्वय; सार्वजनिक प्रशासन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| तकनीकी परिपक्वता | क्वांटम हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अभी प्रयोगात्मक चरण में हैं; व्यावसायिक स्तर पर विश्वसनीयता सिद्ध करना शेष है। |
| भविष्य का साइबर जोखिम | वर्तमान एन्क्रिप्शन क्वांटम कंप्यूटरों के सामने कमजोर पड़ सकता है, जिससे पहले से तैयारी आवश्यक है। |
| विशेषज्ञ जनशक्ति | क्वांटम विज्ञान और क्रिप्टोग्राफी में कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता सीमित है। |
| नियामक ढाँचा | बैंकिंग में नई तकनीक अपनाने हेतु स्पष्ट मानक, परीक्षण और अनुमोदन की प्रक्रिया अभी विकासाधीन है। |
| संस्थागत समन्वय | अनुसंधान से बाजार तक के सफर में संस्थाओं के बीच दीर्घकालिक और स्पष्ट सहयोग ढाँचे की आवश्यकता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (National Quantum Mission)
आगे की राह
- क्वांटम-रोधी क्रिप्टोग्राफी के लिए बैंकिंग प्रणाली का चरणबद्ध संक्रमण (Migration) योजना बनाकर लागू किया जाए, जिसमें सबसे संवेदनशील प्रणालियों को प्राथमिकता दी जाए।
- पायलट परियोजनाओं के परिणामों को सार्वजनिक मानकों और सुरक्षा दिशा-निर्देशों में बदलने के लिए नियामक संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
- C-DAC जैसी अनुसंधान संस्थाओं और बैंकों के बीच डेटा-साझाकरण और परीक्षण-वातावरण (Testbed) के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल बनाए जाएँ।
- विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों में क्वांटम विज्ञान, भौतिकी और क्रिप्टोग्राफी के पाठ्यक्रम एवं शोध-छात्रवृत्तियों का विस्तार किया जाए।
- स्वदेशी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर घटकों के विकास को प्रोत्साहित करने हेतु सरकारी खरीद में घरेलू समाधानों को प्राथमिकता देने के नियम स्पष्ट किए जाएँ।
- अंतरराष्ट्रीय मानक-निर्धारक मंचों पर भागीदारी बढ़ाकर भारत के दृष्टिकोण को वैश्विक मानकों के विकास में शामिल किया जाए।
- साइबर सुरक्षा ढाँचे को क्वांटम-युग की चुनौतियों के अनुरूप अद्यतन किया जाए और बैंकों के कर्मचारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
क्वांटम प्रौद्योगिकी (Quantum Technology) · राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (National Quantum Mission) · सी-डैक (C-DAC) · क्वांटम-सुरक्षित क्रिप्टोग्राफी (Post-Quantum Cryptography) · क्वांटम कुंजी वितरण (Quantum Key Distribution) · ‘अभी संग्रह करो, बाद में डिक्रिप्ट करो’ जोखिम (Harvest Now, Decrypt Later) · केंद्रीय डिजिटल मुद्रा (Central Bank Digital Currency) · साइबर सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता · आत्मनिर्भर भारत और तकनीकी संप्रभुता · डेटा संरक्षण और निजता का अधिकार (Right to Privacy) · सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और डिजिटल रूपांतरण · कौशल विकास और अनुसंधान-उद्योग सहयोग
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 51A(h): वैज्ञानिक स्वभाव और सुधार की भावना का मौलिक कर्तव्य
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 45: बैंकिंग पर संघ का विधायी विषय
अवधारणा प्रवाह
स्वदेशी क्वांटम प्रौद्योगिकी का अनुसंधान और विकास (C-DAC जैसी संस्थाओं द्वारा) → अनुसंधान का बैंकिंग के वास्तविक उपयोग-परिदृश्यों में परीक्षण (Bank of India के साथ सहयोग) → क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम-रोधी क्रिप्टोग्राफी से डेटा सुरक्षा और लेनदेन की गोपनीयता में सुधार → सुरक्षा मानकों और नियामक दिशा-निर्देशों में परीक्षित समाधानों का समावेश → आयातित तकनीक पर निर्भरता में कमी, वित्तीय स्थिरता और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रगति
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. क्वांटम कुंजी वितरण (Quantum Key Distribution) की सुरक्षा क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों पर आधारित है, जिससे किसी अनधिकृत अवरोधन का पता चल सकता है।
2. क्वांटम बिट (Qubit) किसी भी समय केवल 0 या 1 में से एक अवस्था में ही रह सकता है।
3. शोर का एल्गोरिथ्म (Shor’s Algorithm) पर्याप्त शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर पर बड़ी संख्याओं के गुणनखंडन द्वारा आर.एस.ए. (RSA) जैसी प्रचलित सार्वजनिक-कुंजी क्रिप्टोग्राफी को भंग कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है, क्योंकि QKD में किसी भी प्रयास से क्वांटम अवस्था बदल जाती है और अवरोधन पकड़ में आ जाता है। कथन 2 गलत है, क्योंकि क्वांटम बिट अधिस्थिति (Superposition) में भी हो सकता है। कथन 3 सही है, इसीलिए क्वांटम-सुरक्षित क्रिप्टोग्राफी की आवश्यकता पर चर्चा हो रही है। अतः उत्तर केवल दो है।
Q2. अभिकथन (A): बैंकिंग प्रणाली को आज से ही क्वांटम-सुरक्षित क्रिप्टोग्राफी अपनाने की आवश्यकता है, भले ही व्यावसायिक स्तर के बड़े क्वांटम कंप्यूटर अभी उपलब्ध न हों।
कारण (R): आज एन्क्रिप्ट किया गया संवेदनशील डेटा भविष्य में क्वांटम कंप्यूटर द्वारा डिक्रिप्ट किए जाने के उद्देश्य से अभी संग्रहीत किया जा सकता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — अभिकथन और कारण दोनों सही हैं। ‘अभी संग्रह करो, बाद में डिक्रिप्ट करो’ (Harvest Now, Decrypt Later) का जोखिम ही दीर्घकालिक संवेदनशील वित्तीय डेटा की सुरक्षा के लिए तत्काल तैयारी को आवश्यक बनाता है। अतः कारण, अभिकथन की सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलित सूचियों पर विचार कीजिए:
सूची-I (संस्था/मिशन)
1. सी-डैक (C-DAC)
2. राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (National Quantum Mission)
3. भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India)
सूची-II (प्रशासनिक/वैधानिक आधार)
a. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science and Technology) के अंतर्गत कार्यान्वित
b. इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था
c. भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत स्थापित केंद्रीय बैंक
सही सुमेलन चुनिए:
- 1-a, 2-b, 3-c
- 1-b, 2-a, 3-c
- 1-b, 2-c, 3-a
- 1-c, 2-a, 3-b
उत्तर: 1-b, 2-a, 3-c — सी-डैक इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था है (1-b)। राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का कार्यान्वयन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा किया जाता है (2-a)। भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अंतर्गत RBI की स्थापना हुई है (3-c)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारतीय बैंकिंग में क्वांटम प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग स्वदेशी क्षमता-निर्माण का अवसर भी है और नई सुरक्षा चुनौती भी। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि क्या क्वांटम-सुरक्षित क्रिप्टोग्राफी (Post-Quantum Cryptography) को अभी से अपनाना आवश्यक है, और इसके लिए किन नीतिगत उपायों की आवश्यकता होगी? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना: (1) भूमिका: सी-डैक और बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग का तथ्य, जो राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (National Quantum Mission, 2023 में मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत, कुल परिव्यय लगभग ₹6003.65 करोड़, अवधि 2023-24 से 2030-31, चार थीमैटिक हब: क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम सेंसिंग व मेट्रोलॉजी, क्वांटम सामग्री व उपकरण) के व्यापक ढांचे से जुड़ता है। (2) अवसर का पक्ष: स्वदेशी हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर पर निर्भरता घटाना, आत्मनिर्भर भारत और तकनीकी संप्रभुता, अनुकूलन (optimisation) और जोखिम-मॉडलिंग में संभावित लाभ, तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए सुरक्षित लेन-देन अवसंरचना। (3) चुनौती का पक्ष: शोर का एल्गोरिथ्म (Peter Shor, 1994) द्वारा आर.एस.ए. जैसी प्रणालियों का संभावित भंग; ‘अभी संग्रह करो, बाद में डिक्रिप्ट करो’ जोखिम; NISQ युग में क्वांटम कंप्यूटरों की सीमित स्थिरता और त्रुटि-सुधार की चुनौती; कुशल मानव संसाधन की कमी। (4) तत्काल तैयारी का तर्क: NIST द्वारा 2024 में मानकीकृत पोस्ट-क्वांटम एल्गोरिथ्म का संक्रमण-काल लंबा होने के कारण आज से क्रिप्टो-एजिलिटी आवश्यक; RBI की केंद्रीय डिजिटल मुद्रा (e₹) और UPI जैसे भुगतान ढांचे में सुरक्षा-परत का महत्व। (5) विधिक-नीतिगत आयाम: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (धारा 43A), डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023, और के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2017) में निजता को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार मानने का निर्णय; वित्तीय क्षेत्र के नियामकों (RBI, SEBI) के बीच समन्वय। (6) संतुलित दृष्टिकोण: हाइप बनाम तकनीकी वास्तविकता; आयात-निर्भर बनाम स्वदेशी मानक-निर्माण; सरकारी-निजी-शैक्षणिक सहयोग का मॉडल। (7) निष्कर्ष: अवसर और जोखिम दोनों को साथ लेकर चलने वाली क्रमिक, जोखिम-आधारित नीति का तर्क, जिसमें पोस्ट-क्वांटम माइग्रेशन की समय-सीमा, परीक्षण-बेड, और कौशल-निर्माण शामिल हों।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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