13 Aug CAG रिपोर्ट: ग्रीन इंडिया मिशन के 98% लक्ष्य पूरी तरह विफल, जानिए कारण
Forest cover targetsAfforestation landscapesFinancial oversightMonitoring mechanismsPlanning systemsGovernance gaps✎ CAG की रिपोर्ट ने हरित भारत मिशन के वन आवरण लक्ष्यों में 98% की भारी कमी और खराब योजना तथा वित्तीय कुप्रबंधन को उजागर किया है, जो जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, संरक्षण | GS Paper III — आर्थिक विकास | GS Paper II — शासन, जवाबदेही एवं पारदर्शिता
- Prelims: हरित भारत मिशन (GIM), नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG), वन आवरण, जलवायु परिवर्तन, कार्बन पृथक्करण, राष्ट्रीय कार्य योजना जलवायु परिवर्तन पर (NAPCC)
- Essay: पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास, शासन में जवाबदेही और पारदर्शिता, जलवायु परिवर्तन से निपटने में भारत की चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: CAG की रिपोर्ट ने हरित भारत मिशन के वन आवरण लक्ष्यों में 98% की भारी कमी और खराब योजना तथा वित्तीय कुप्रबंधन को उजागर किया है, जो जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने हरित भारत मिशन (Green India Mission – GIM) के प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट में मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में गंभीर कमियों को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वन आवरण बढ़ाने के लक्ष्य में लगभग 98% की कमी देखी गई है, जबकि वन आवरण की गुणवत्ता में सुधार के लक्ष्य में 92% की कमी पाई गई है। CAG ने खराब योजना, वित्तीय कुप्रबंधन, विभिन्न योजनाओं के बीच समन्वय की कमी और कमजोर निगरानी को इन विफलताओं का मुख्य कारण बताया है।
पृष्ठभूमि
- हरित भारत मिशन (GIM) जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (National Action Plan on Climate Change – NAPCC) के आठ मिशनों में से एक है।
- इसका उद्देश्य भारत के घटते वन आवरण की रक्षा, पुनर्स्थापन और वृद्धि करना तथा जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करना है।
- मिशन का लक्ष्य 1.4 मिलियन हेक्टेयर वन/वृक्ष आवरण में सुधार करना और 1.4 मिलियन हेक्टेयर अतिरिक्त वन आवरण बढ़ाना था।
- CAG ने 2015-16 से 2024-25 की अवधि के लिए 16 राज्यों में GIM के कार्यान्वयन का प्रदर्शन ऑडिट किया।
- रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वृक्षारोपण के लिए जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक संवेदनशील क्षेत्रों के बजाय कम प्राथमिकता वाले परिदृश्यों का चयन किया गया।
हरित भारत मिशन (GIM) क्या है?
- यह जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के तहत आठ मिशनों में से एक है।
- इसका प्राथमिक उद्देश्य भारत के घटते वन आवरण की रक्षा, पुनर्स्थापन और वृद्धि करना है।
- मिशन का लक्ष्य वन/वृक्ष आवरण को बढ़ाना, वन और गैर-वन भूमि की गुणवत्ता में सुधार करना है।
- यह पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं, जैसे जैव विविधता, जल विज्ञान सेवाओं और कार्बन पृथक्करण (carbon sequestration) को बेहतर बनाने पर भी केंद्रित है।
- इसका एक महत्वपूर्ण उद्देश्य वनों के आसपास रहने वाले परिवारों की वन-आधारित आजीविका आय में वृद्धि करना भी है।
- यह मिशन वन विभाग, राज्य सरकारों और स्थानीय समुदायों के सहयोग से कार्यान्वित किया जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| वन/वृक्ष आवरण में वृद्धि | पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं में सुधार और जलवायु परिवर्तन से निपटने में सहायक। |
| वन और गैर-वन भूमि की गुणवत्ता में सुधार | जैव विविधता, जल विज्ञान सेवाओं और कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) को बढ़ावा देना। |
| वन-आधारित आजीविका आय में वृद्धि | वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले समुदायों के लिए आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना। |
| जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता | मिशन के तहत वृक्षारोपण स्थलों के चयन में महत्वपूर्ण मानदंड। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- यह रिपोर्ट भारत के हरित आवरण को बढ़ाने और सुधारने के प्रयासों में महत्वपूर्ण कमियों को उजागर करती है, जो जलवायु परिवर्तन (Climate Change) शमन लक्ष्यों के लिए एक चुनौती है।
- वन आवरण में कमी से जैव विविधता (Biodiversity) का नुकसान हो सकता है और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं (Ecosystem Services) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
शासन और जवाबदेही
- CAG की रिपोर्ट सरकारी कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) के महत्व को रेखांकित करती है।
- योजना, वित्तीय प्रबंधन और निगरानी में कमियां सार्वजनिक धन के प्रभावी उपयोग पर सवाल उठाती हैं।
नीति निर्माण पर प्रभाव
- यह रिपोर्ट भविष्य की पर्यावरण नीतियों और कार्यक्रमों के डिजाइन और कार्यान्वयन में सुधार के लिए महत्वपूर्ण इनपुट प्रदान करती है।
- यह विभिन्न योजनाओं के अभिसरण (Convergence) और अंतर-विभागीय समन्वय की आवश्यकता पर बल देती है।
चुनौतियाँ
1. लक्ष्यों की प्राप्ति में कमी
- वन आवरण बढ़ाने के लक्ष्य में लगभग 98% की कमी और वन आवरण की गुणवत्ता में सुधार के लक्ष्य में लगभग 92% की कमी दर्ज की गई है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन
2. योजना और कार्यान्वयन में खामियां
- वृक्षारोपण के लिए गलत स्थलों का चुनाव, विभिन्न योजनाओं के अभिसरण का अभाव, वित्तीय कुप्रबंधन और अनुचित योजना जैसी कमियां पाई गईं।
यूपीएससी लिंक: सरकारी नीतियों का कार्यान्वयन
3. निगरानी और पारदर्शिता का अभाव
- कई राज्यों द्वारा सार्वजनिक वेब लिंक प्रदान करने में विफलता, फुलाया हुआ डेटा और अतिरंजित उपलब्धियां, तथा GIS विश्लेषण में साइटों पर कोई ध्यान देने योग्य परिवर्तन न होना।
यूपीएससी लिंक: शासन में पारदर्शिता
4. जलवायु परिवर्तन संवेदनशीलता की अनदेखी
- जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक संवेदनशील क्षेत्रों के बजाय कम से मध्यम प्राथमिकता वाले परिदृश्यों का चयन किया गया।
यूपीएससी लिंक: जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| वन आवरण लक्ष्य की प्राप्ति | 1.4 मिलियन हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले केवल 0.03 मिलियन हेक्टेयर में वृद्धि, 98% की कमी। |
| वन आवरण गुणवत्ता में सुधार | 1.4 मिलियन हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले केवल 0.11 मिलियन हेक्टेयर में सुधार, 92% की कमी। |
| वृक्षारोपण स्थलों का चयन | जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक संवेदनशील क्षेत्रों की अनदेखी कर कम प्राथमिकता वाले स्थलों का चयन। |
| वित्तीय प्रबंधन | वित्तीय कुप्रबंधन और विभिन्न योजनाओं के अभिसरण का अभाव। |
| निगरानी और मूल्यांकन | सार्वजनिक वेब लिंक प्रदान करने में विफलता, फुलाया हुआ डेटा और GIS विश्लेषण में कोई बदलाव नहीं। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय हरित भारत मिशन (National Green India Mission)
आगे की राह
- वृक्षारोपण स्थलों के चयन के लिए वैज्ञानिक मानदंडों को अपनाना, विशेषकर जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों को प्राथमिकता देना।
- विभिन्न हरित आवरण योजनाओं के बीच प्रभावी अभिसरण और समन्वय सुनिश्चित करना।
- वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करना और धन के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ाना।
- मिशन के कार्यान्वयन की प्रभावी निगरानी के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करना, जिसमें सार्वजनिक रूप से सुलभ वेब लिंक और नियमित GIS विश्लेषण शामिल हों।
- डेटा की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र सत्यापन और ऑडिट प्रक्रियाओं को मजबूत करना।
- स्थानीय समुदायों को योजना और कार्यान्वयन प्रक्रिया में शामिल करना ताकि आजीविका के अवसरों को बढ़ावा दिया जा सके और स्वामित्व की भावना पैदा की जा सके।
- प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन और दंड का प्रावधान करना ताकि राज्यों और कार्यान्वयन एजेंसियों को लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
हरित भारत मिशन · वन आवरण लक्ष्य · नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) · पर्यावरण शासन · जलवायु परिवर्तन अनुकूलन · वन आधारित आजीविका · पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ · वित्तीय कुप्रबंधन · योजनागत कमियाँ · सतत विकास लक्ष्य
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करना’}
अवधारणा प्रवाह
CAG रिपोर्ट में कमियां उजागर → ग्रीन इंडिया मिशन के लक्ष्यों में कमी → योजना, वित्त और निगरानी में खामियां → पर्यावरणीय और जलवायु लक्ष्यों पर नकारात्मक प्रभाव → शासन और नीति सुधार की आवश्यकता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. हरित भारत मिशन (Green India Mission) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह राष्ट्रीय हरित भारत मिशन, भारत के जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के तहत आठ मिशनों में से एक है।
2. इसका मुख्य उद्देश्य वन और वृक्ष आवरण में वृद्धि करना तथा पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं में सुधार करना है।
3. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की हालिया रिपोर्ट में मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में 98% की कमी बताई गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। हरित भारत मिशन (GIM) वास्तव में जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के तहत आठ मिशनों में से एक है, जिसका उद्देश्य भारत के वन आवरण को बढ़ाना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना है। कथन 2 भी सही है। मिशन का व्यापक उद्देश्य वन/वृक्ष आवरण में वृद्धि करना, वन/गैर-वन भूमि की गुणवत्ता में सुधार करना और जैव विविधता, जल विज्ञान सेवाओं तथा कार्बन पृथक्करण सहित पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं में सुधार करना है। कथन 3 भी सही है। CAG की हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि 1.4 मिलियन हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले वन आवरण में केवल 0.03 मिलियन हेक्टेयर की वृद्धि हुई, जो लगभग 98% की कमी दर्शाता है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के कार्यों और शक्तियों का सबसे सटीक वर्णन करता है?
- CAG भारत सरकार के लिए बजट तैयार करता है और उसे संसद में प्रस्तुत करता है।
- CAG भारत सरकार के मंत्रालयों और विभागों के लिए नीतिगत निर्णय लेता है।
- CAG केंद्र और राज्य सरकारों के खातों का लेखा-परीक्षण करता है तथा अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति/राज्यपाल को प्रस्तुत करता है।
- CAG भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का प्रबंधन करता है।
- CAG भारत सरकार के लिए बजट तैयार करता है और उसे संसद में प्रस्तुत करता है।
उत्तर: CAG केंद्र और राज्य सरकारों के खातों का लेखा-परीक्षण करता है तथा अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति/राज्यपाल को प्रस्तुत करता है। — CAG का मुख्य कार्य केंद्र और राज्य सरकारों के सभी प्राप्तियों और व्यय का लेखा-परीक्षण करना है, जिसमें सरकारी कंपनियों और निगमों का लेखा-परीक्षण भी शामिल है। CAG अपनी लेखा-परीक्षा रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जो उन्हें संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाते हैं। यह बजट तैयार नहीं करता, न ही नीतिगत निर्णय लेता है और न ही सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का प्रबंधन करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ हरित भारत मिशन (Green India Mission) के लक्ष्यों को प्राप्त करने में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा उजागर की गई कमियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। भारत में पर्यावरण शासन और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति पर इन कमियों के क्या निहितार्थ हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: हरित भारत मिशन (GIM) का संक्षिप्त परिचय और इसके उद्देश्यों का उल्लेख। CAG की हालिया रिपोर्ट के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता।
2. CAG द्वारा उजागर की गई कमियाँ: रिपोर्ट में बताई गई मुख्य कमियों का विस्तृत वर्णन करें, जैसे:
क. वन आवरण लक्ष्यों की प्राप्ति में भारी कमी (98% तक)।
ख. वृक्षारोपण के लिए गलत स्थलों का चयन, जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक संवेदनशील क्षेत्रों की उपेक्षा।
ग. विभिन्न योजनाओं के अभिसरण (convergence) का अभाव।
घ. वित्तीय कुप्रबंधन और अनुचित योजना।
ङ. समन्वय की कमी और निगरानी में अक्षमता (जैसे सार्वजनिक वेब लिंक प्रदान करने में विफलता)।
च. फुलाया हुआ डेटा और अतिरंजित उपलब्धियाँ।
3. पर्यावरण शासन पर निहितार्थ:
क. नीति निर्माण और कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी।
ख. पर्यावरणीय नीतियों की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न।
ग. अंतर-मंत्रालयी समन्वय की आवश्यकता।
घ. डेटा की विश्वसनीयता और निगरानी तंत्र में सुधार की आवश्यकता।
4. सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) पर निहितार्थ:
क. SDG 15 (स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र) और SDG 13 (जलवायु कार्रवाई) पर सीधा नकारात्मक प्रभाव।
ख. वन आधारित आजीविका (SDG 1) और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं (SDG 6, 11) पर अप्रत्यक्ष प्रभाव।
ग. भारत की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं (जैसे पेरिस समझौता) को पूरा करने में चुनौतियाँ।
5. निष्कर्ष: इन कमियों को दूर करने के लिए सुधारात्मक उपायों का सुझाव दें, जैसे बेहतर योजना, प्रभावी निगरानी, वित्तीय जवाबदेही और सभी हितधारकों के बीच समन्वय। भारत के हरित भविष्य और सतत विकास के लिए इन मिशनों की सफलता का महत्व।
स्रोत: Times of India
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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