31 Oct तटीय आंध्र प्रदेश: चक्रवातों और मौसम प्रतिबंधों से मछुआरों की आर्थिक बदहाली
✎ चक्रवात-जनित मौसम प्रतिबंधों से होने वाली आजीविका-हानि के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के मानदंड और मुख्यमंत्री राहत कोष के राज्य-विशिष्ट प्रावधान अलग-अलग ढाँचे हैं, और आपदा राहत की वास्तविक पर्याप्तता इन्हीं के समन्वय पर…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — आपदा प्रबंधन (चक्रवात, आपदा प्रबंधन अधिनियम, राहत कोष, आपदा जोखिम न्यूनीकरण) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — शासन (केंद्र-राज्य संबंध, संघवाद, राज्य आपदा राहत कोष और मुख्यमंत्री राहत कोष के बीच अंतर) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — अर्थव्यवस्था (समुद्री मत्स्य पालन, आजीविका और समावेशी विकास)
- Prelims: राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (State Disaster Response Fund — SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (National Disaster Response Fund — NDRF), आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) की धारा 46 के तहत कोषों का गठन, मुख्यमंत्री राहत कोष (Chief Minister’s Relief Fund — CMRF) और राज्य द्वारा जारी सरकारी आदेश (G.O.), भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department — IMD) की चक्रवात श्रेणियाँ: अवदाब, गहरा अवदाब, चक्रवाती तूफ़ान, गंभीर चक्रवाती तूफ़ान, अति गंभीर चक्रवाती तूफ़ान, बंगाल की खाड़ी में चक्रवात की उत्पत्ति और इसके प्रभाव वाले तटीय क्षेत्र (आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु), गोदावरी नदी का मुहाना और यनम (पुदुचेरी का एक क्षेत्र, जो आंध्र प्रदेश के तट से लगा है), राष्ट्रीय नीली अर्थव्यवस्था और मत्स्य पालन से संबंधित योजनाएँ, जैसे प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana — PMMSY), पूर्वी तट पर वार्षिक मत्स्य ग्रहण प्रतिबंध (मानसून-पूर्व अवधि में मछली पकड़ने पर रोक) और उसका उद्देश्य
- Essay: आपदा के बाद राहत से आगे बढ़कर लचीलापन निर्माण: तटीय समुदायों की आजीविका सुरक्षा कैसे सुनिश्चित हो?, जलवायु परिवर्तन के दौर में चक्रवात की बढ़ती आवृत्ति और मत्स्य क्षेत्र का भविष्य
त्वरित पुनरावृत्ति: चक्रवात-जनित मौसम प्रतिबंधों से होने वाली आजीविका-हानि के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के मानदंड और मुख्यमंत्री राहत कोष के राज्य-विशिष्ट प्रावधान अलग-अलग ढाँचे हैं, और आपदा राहत की वास्तविक पर्याप्तता इन्हीं के समन्वय पर निर्भर करती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
बंगाल की खाड़ी में बनी लगातार अवदाब प्रणालियों और गंभीर चक्रवाती तूफ़ान ‘अर्नब’ के कारण आंध्र प्रदेश के तटीय मछुआरों की आजीविका गंभीर संकट में है। भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी बार-बार की चेतावनियों और अनिवार्य मछली पकड़ने के प्रतिबंधों से समुद्री व्यापार ठप है और स्थानीय आपूर्ति शृंखला बाधित हुई है। जून से अब तक चार प्रमुख मौसम चेतावनियों के कारण संचयी नुकसान ₹36 करोड़ से अधिक आँका गया है। विशाखापत्तनम शहरी जिले में 750 यांत्रिक ट्रॉलर और 1,890 मोटर तथा फाइबर नौकाओं पर निर्भर परिवार प्रभावित हैं। मछुआरा संगठनों ने राज्य सरकार को ज्ञापन देकर क्षतिग्रस्त उपकरणों और नौकाओं के लिए 100 प्रतिशत मुआवज़े तथा सात दिनों के लिए प्रतिदिन ₹600 के निर्वाह भत्ते की माँग की है। उनका तर्क है कि राहत की राशि राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के सीमित मानदंडों के बजाय मुख्यमंत्री राहत कोष के विस्तारित प्रावधानों के अनुरूप तय होनी चाहिए। यह मामला आपदा राहत के वित्तीय ढाँचे, मानदंडों की व्याख्या और मत्स्य क्षेत्र की आजीविका सुरक्षा के बीच संतुलन से जुड़ा है।
पृष्ठभूमि
- भारत का लंबा समुद्र तट है और मत्स्य क्षेत्र लाखों तटीय परिवारों की आजीविका का स्रोत है; आंध्र प्रदेश के समुद्री मछुआरों की संख्या राज्य में बड़ी है, जिनमें से अधिकांश छोटे और पारंपरिक नाव-आधारित मछुआरे हैं।
- बंगाल की खाड़ी में मानसून के बाद और उसके आसपास चक्रवात अधिक बनते हैं, जिनका स्थल-पात (landfall) अक्सर आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु के तटों पर होता है।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) और राष्ट्रीय व राज्य स्तर के आपदा कोष बनाए गए हैं।
- राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष का उपयोग मुख्यतः अधिसूचित आपदाओं में राहत और पुनर्वास के लिए होता है, जिसकी दरें और मानदंड केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित होते हैं; राज्य अतिरिक्त राहत के लिए अपने स्वयं के कोष और नीतियाँ अपना सकते हैं।
- पूर्वी तट पर वार्षिक मानसून-पूर्व मछली पकड़ने के प्रतिबंध का उद्देश्य मत्स्य संसाधनों के प्रजनन की सुरक्षा है; इसके बावजूद चक्रवात-जनित मौसम प्रतिबंध मछुआरों की वार्षिक आय पर अलग से दबाव डालते हैं।
चक्रवात-जनित मौसम प्रतिबंध और मत्स्य क्षेत्र पर उनका प्रभाव क्या है?
- चक्रवात एक निम्न-दाब प्रणाली है, जिसमें केंद्र के चारों ओर तेज़ हवाएँ चक्राकार गति से चलती हैं; बंगाल की खाड़ी में इसकी उत्पत्ति गर्म समुद्री सतह और अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियों में होती है।
- भारत मौसम विज्ञान विभाग हवा की गति के आधार पर अवदाब, गहरा अवदाब, चक्रवाती तूफ़ान, गंभीर चक्रवाती तूफ़ान और अति गंभीर चक्रवाती तूफ़ान जैसी श्रेणियाँ तय करता है; श्रेणी के अनुसार चेतावनी और सावधानी के स्तर बदलते हैं।
- चेतावनी के दौरान समुद्र में नौकायन पर प्रतिबंध मछुआरों की सुरक्षा के लिए लगाया जाता है; इससे उत्पादन रुकता है, जबकि नौकाओं का रखरखाव, बर्फ़, ईंधन और ऋण की लागत बनी रहती है।
- मत्स्य मूल्य-शृंखला में नीलामीकर्ता, बर्फ़ आपूर्तिकर्ता, परिवहन कर्मी और थोक विक्रेता भी प्रभावित होते हैं, इसलिए आपदा का असर उत्पादन से आगे बढ़कर पूरे स्थानीय अर्थतंत्र तक फैलता है।
- राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष से मिलने वाली राहत आमतौर पर संरचनात्मक क्षति (जैसे नौका डूबना या आंशिक क्षति) के आकलन और तय मानदंडों पर आधारित होती है, जबकि आजीविका-हानि और निर्वाह भत्ते के लिए राज्य अलग नीतिगत प्रावधान बना सकता है।
- मुख्यमंत्री राहत कोष राज्य सरकार का अपना कोष है, जिसके तहत राज्य अपनी नीति के अनुसार अतिरिक्त अनुग्रह राशि और अन्य सहायता तय करता है; इसके लिए जारी सरकारी आदेश (G.O.) में प्रावधान स्पष्ट किए जाते हैं।
- दीर्घकालिक समाधान के लिए मत्स्य बंदरगाहों की मज़बूती, नौकाओं का बीमा, प्रारंभिक चेतावनी का सामुदायिक प्रसार और वैकल्पिक आजीविका की व्यवस्था आवश्यक है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| चक्रवात अर्णब (Cyclone Arnab) | 28 अक्टूबर 2026 को यानम के निकट तट से टकराया; इसके कारण छह दिनों का अनिवार्य मत्स्यन प्रतिबंध लागू हुआ |
| मौसम चेतावनियाँ और प्रतिबंध | जून से अब तक चार प्रमुख मौसम चेतावनियाँ जारी हुईं; 23 सितंबर को काकीनाड़ा पार करने वाले अवदाब (Depression) सहित निम्न दाब प्रणालियों से बार-बार मत्स्यन बाधित हुआ |
| मत्स्य बेड़े की स्थिति | विशाखापत्तनम शहरी ज़िले में 750 यांत्रिक ट्रॉलर और 1,890 मोटर व फाइबर नौकाएँ हैं; प्रतिकूल मौसम के कारण 60 प्रतिशत से अधिक बेड़ा लंगर पर खड़ा है |
| प्रत्यक्ष संरचनात्मक क्षति | विशाखापत्तनम मत्स्य पत्तन (Fishing Harbour) पर लगभग 5 करोड़ रुपये की प्रारंभिक प्रत्यक्ष हानि; 7 यांत्रिक नौकाएँ डूबीं और 65 को आंशिक क्षति हुई |
| संचयी व्यापार हानि | जून से अब तक चार चेतावनियों के कारण कुल हानि 36 करोड़ रुपये से अधिक; अकेले अर्णब से लगभग 20 करोड़ रुपये का व्यापार नुकसान |
| बाज़ार मूल्य | ट्यूना, सीयर, पॉम्फ्रेट, झींगा और केकड़े जैसी प्रजातियों के अलाभकारी मूल्य से मछुआरों के साथ विक्रेता, नीलामीकर्ता, बर्फ़ आपूर्तिकर्ता और परिवहन संचालक भी प्रभावित |
महत्व
आर्थिक
- मत्स्य क्षेत्र में व्यापार, नीलामी, बर्फ़ आपूर्ति और परिवहन जैसी सहायक गतिविधियाँ एक-दूसरे पर निर्भर हैं, इसलिए एक बंदरगाह पर रुकावट पूरी आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करती है।
- तटीय अर्थव्यवस्था में मत्स्य उत्पादन का योगदान निर्यात और स्थानीय रोज़गार दोनों में है; लंबे समय तक बेड़े के खड़े रहने से इसकी आर्थिक निरंतरता टूटती है।
सामाजिक
- सीमांत आजीविका वाले परिवारों के पास बचत कम होती है, इसलिए बार-बार की आय हानि ऋणग्रस्तता और खाद्य असुरक्षा का खतरा बढ़ाती है।
- मत्स्य समुदाय में महिलाएँ और युवा प्रसंस्करण, विक्रय और सहायक कार्यों में लगे रहते हैं; उनकी आय भी इस संकट से प्रभावित होती है।
प्रशासनिक और संघीय
- आपदा राहत में राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (State Disaster Response Fund – SDRF) के मानक और राज्य के अपने मुख्यमंत्री राहत कोष (Chief Minister’s Relief Fund – CMRF) के प्रावधानों के बीच नीतिगत चयन का प्रश्न उठता है।
- मौसम पूर्वानुमान का कार्य भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department – IMD) करता है, जबकि प्रतिबंध, राहत और पुनर्वास राज्य सरकार के स्तर पर लागू होते हैं; दोनों के बीच समन्वय आवश्यक है।
चुनौतियाँ
1. बार-बार मौसम प्रतिबंधों से आय में अनिश्चितता
- प्रतिकूल मौसम हर महीने पाँच से सात दिनों तक रहने से मत्स्यन दिवस घट जाते हैं और मछुआरों की नियमित आय टिक नहीं पाती।
- एक ही मौसम में कई चेतावनियाँ आने से नुकसान संचयी हो जाता है, जबकि पारंपरिक बीमा और राहत ढाँचे आमतौर पर एकल आपदा को ध्यान में रखकर बने होते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आपदा प्रबंधन; तटीय क्षेत्र में जलवायु-जनित जोखिम
2. संरचनात्मक क्षति और पूँजी का अभाव
- यांत्रिक नौकाओं और गियर का डूबना या क्षतिग्रस्त होना सीधे पूँजी-क्षरण है, जिसकी पुनःस्थापना छोटे मछुआरों के लिए कठिन होती है।
- मत्स्य पत्तन जैसी साझा अवसंरचना की मरम्मत और सुरक्षित लंगरगाह का अभाव जोखिम को और बढ़ाता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: मत्स्य क्षेत्र का आधारभूत ढाँचा; कृषि और संबद्ध क्षेत्र
3. अलाभकारी बाज़ार मूल्य और मूल्य-श्रृंखला की कमज़ोरी
- मूल्य अस्थिरता और मौसमी आपूर्ति कटौती के कारण उच्च मूल्य वाली प्रजातियों की कीमतें भी मछुआरों के लिए लाभकारी नहीं रहतीं।
- भंडारण, शीत-श्रृंखला और विपणन सुविधाओं की कमी से मछली जल्दी खराब होती है, जिससे सौदेबाज़ी की शक्ति बिचौलियों के पक्ष में चली जाती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: कृषि विपणन और मूल्य-श्रृंखला; खाद्य प्रसंस्करण
4. राहत मानकों और वास्तविक हानि के बीच अंतर
- SDRF के मानक राष्ट्रीय स्तर पर तय हैं और इनमें क्षति के प्रकार तथा सीमा का निर्धारण होता है; मछुआरा संगठन इन्हें सीमित मानते हैं।
- राज्य द्वारा CMRF के विस्तारित प्रावधानों को लागू करने का प्रश्न वित्तीय औचित्य, पात्रता और राज्य के संसाधनों से जुड़ा है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध; GS-3: आपदा राहत की नीतिगत संरचना
5. सामाजिक सुरक्षा और आय-समर्थन की कमी
- मत्स्यन बंद रहने के दौरान दैनिक निर्वाह भत्ते की माँग इस बात को रेखांकित करती है कि आजीविका-आधारित सामाजिक सुरक्षा कवच अभी सीमित है।
- असंगठित श्रम की प्रकृति के कारण पंजीकरण, पहचान और लाभ-वितरण में कठिनाई आती है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: सामाजिक क्षेत्र की योजनाएँ; असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता |
|---|---|
| संचयी मौसम हानि | एक ही मौसम में चार चेतावनियों से 36 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान; बचत और ऋण-क्षमता पर दबाव |
| संरचनात्मक क्षति | नौकाओं का डूबना और आंशिक क्षति; पूँजी-पुनःस्थापना की लागत छोटे मछुआरों की पहुँच से बाहर |
| अलाभकारी मूल्य | प्रमुख प्रजातियों की कीमतों में गिरावट; विपणन और भंडारण सुविधाओं का अभाव |
| राहत मानकों का विवाद | SDRF मानक बनाम CMRF विस्तार; पात्रता, दायरा और वित्तीय औचित्य पर मतभेद |
| आश्रित आजीविकाएँ | विक्रेता, बर्फ़ आपूर्तिकर्ता और परिवहन संचालक भी प्रभावित; आपूर्ति श्रृंखला का टूटना |
| आगामी जोखिम | 2 नवंबर से संभावित एक और तूफ़ान; तैयारी और पूर्व-चेतावनी के बावजूद आजीविका-क्षति की आशंका |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (State Disaster Response Fund – SDRF)
- मुख्यमंत्री राहत कोष (Chief Minister’s Relief Fund – CMRF)
- प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana – PMMSY)
आगे की राह
- मौसम-आधारित प्रतिबंधों के दौरान आय-हानि का आकलन एक मानक प्रक्रिया से हो, ताकि राहत का निर्णय साक्ष्य पर आधारित हो।
- पूर्व-चेतावनी को स्थानीय मछुआरा समुदाय तक समय पर और भाषायी रूप से सुलभ माध्यमों से पहुँचाया जाए, और सुरक्षित लंगरगाह की व्यवस्था की जाए।
- मत्स्य पत्तन और सुरक्षित लंगरगाहों जैसी साझा अवसंरचना में मरम्मत और उन्नयन को प्राथमिकता दी जाए।
- आपदा-जनित नौका और गियर क्षति के लिए बीमा कवरेज का विस्तार किया जाए, जिसमें प्रीमियम सहायता और दावा-निपटान की गति पर ध्यान हो।
- SDRF और राज्य के CMRF प्रावधानों के बीच समन्वय का स्पष्ट ढाँचा तैयार हो, ताकि पात्रता और भुगतान में भ्रम न रहे।
- शीत-भंडारण, परिवहन और विपणन सुविधाओं के विकास से अलाभकारी मूल्य की समस्या को मूल्य-श्रृंखला के स्तर पर संबोधित किया जाए।
- मौसम-प्रतिबंध की अवधि के लिए निर्वाह-सहायता की व्यवस्था पर विचार हो, और इसे असंगठित मत्स्य श्रमिकों के पंजीकरण से जोड़ा जाए।
- राज्य और केंद्र के बीच आपदा-वित्त, मत्स्य प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन के लिए संस्थागत समन्वय सुदृढ़ हो।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: जीविका के अधिकार का मत्स्य आजीविका से संबंध
- अनुच्छेद 280: वित्त आयोग की सिफ़ारिशों से SDRF का आधार
- अनुच्छेद 267(2): राज्य आकस्मिकता निधि से प्रारंभिक राहत-व्यय
- सातवीं अनुसूची: राज्य सूची की प्रविष्टि 21 (मत्स्य पालन)
अवधारणा प्रवाह
निम्न दाब प्रणाली और अवदाब का विकास, जिसके बाद चक्रवात अर्णब बना → भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा चेतावनी जारी और मत्स्यन पर अनिवार्य प्रतिबंध → नौकाओं का लंगर पर रुकना; 60 प्रतिशत से अधिक बेड़े की गतिविधि ठप → मत्स्य पत्तन पर संरचनात्मक क्षति और व्यापार-हानि का संचयी प्रभाव → विक्रेता, नीलामीकर्ता, बर्फ़ आपूर्ति और परिवहन श्रृंखला का टूटना; अलाभकारी मूल्य से आय में और गिरावट → SDRF मानक के अंतर्गत राहत-प्रस्ताव और CMRF विस्तार की माँग के बीच नीतिगत निर्णय की प्रतीक्षा
स्रोत: The Hindu
Andhra Pradesh PCS (APPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: तटीय आंध्र प्रदेश के मत्स्य पालकों को चक्रवातों और बार-बार लगने वाली मौसम संबंधी पाबंदियों के कारण गंभीर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई प्रमुख योजना कौन सी है?
- A. मत्स्य संपदा योजना
- B. मत्स्य किसान क्रेडिट कार्ड योजना
- C. मत्स्य सुरक्षा बीमा योजना
- D. मत्स्य उद्यमिता विकास योजना
उत्तर: B. मत्स्य किसान क्रेडिट कार्ड योजना — आंध्र प्रदेश सरकार ने मत्स्य किसान क्रेडिट कार्ड योजना के माध्यम से मत्स्य पालकों को वित्तीय सहायता प्रदान की है, जिससे वे चक्रवातों और मौसम संबंधी पाबंदियों के कारण होने वाले नुकसान से उबर सकें।
Mains: तटीय आंध्र प्रदेश में मत्स्य पालकों के सामने उत्पन्न वित्तीय संकट के प्रमुख कारणों की चर्चा करते हुए, इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार द्वारा अपनाए गए नीति उपायों का मूल्यांकन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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