दिल्ली-एनसीआर में पुराने वाहनों की समस्या: PARIVARTAN योजना की धीमी प्रगति

दिल्ली-एनसीआर में पुराने वाहनों की समस्या: PARIVARTAN योजना की धीमी प्रगति

दिल्ली-एनसीआर में पुराने वाहनों की समस्या: PARIVARTAN योजना की धीमी प्रगति

PARIVARTAN योजना का उद्देश्यपुराने वाहनसड़कों से हटानावित्तीय प्रोत्साहनवाहन मालिकों कोस्वच्छ मॉडलपुराने वाहनों का प्रतिस्थापन
PARIVARTAN योजना का उद्देश्य

✎ प्रोत्साहन आधारित PARIVARTAN योजना और आयु-आधारित प्रतिबंध दोनों एनसीआर में पुराने वाहनों की समस्या के समाधान के साधन हैं, लेकिन स्वैच्छिक प्रतिस्थापन, न्यायिक आदेशों और सीमा-प्रवर्तन की व्यावहारिक सीमाओं के कारण इनकी प्रभावशीलता…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (वायु प्रदूषण नियंत्रण, वाहन उत्सर्जन मानक)  |  सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — शासन (सांविधिक निकाय, केंद्र-राज्य समन्वय, प्रोत्साहन आधारित नीतियाँ)  |  सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — अर्थव्यवस्था (परिवहन एवं मालढुलाई क्षेत्र पर नीतिगत प्रभाव)
  • Prelims: BS उत्सर्जन मानक (Bharat Stage norms) और BS-VI का लागू होना (1 अप्रैल 2020), वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की संरचना और अधिकार क्षेत्र, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के अंतर्गत निर्देश, स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली (ANPR), पंजीकृत वाहन कबाड़ीकरण सुविधा (RVSF) और वाहन कबाड़ीकरण नीति, ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP), एनसीआर (NCR) के अंतर्गत आने वाले राज्य और जिले, अनुच्छेद 21 और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा न्यायिक विकास
  • Essay: स्वच्छ वायु का अधिकार और आजीविका: परिवहन संक्रमण में न्यायसंगत समाधान की खोज, नीति-प्रवर्तन का अंतर: प्रोत्साहन आधारित योजनाएँ बनाम कठोर प्रतिबंध

त्वरित पुनरावृत्ति: प्रोत्साहन आधारित PARIVARTAN योजना और आयु-आधारित प्रतिबंध दोनों एनसीआर में पुराने वाहनों की समस्या के समाधान के साधन हैं, लेकिन स्वैच्छिक प्रतिस्थापन, न्यायिक आदेशों और सीमा-प्रवर्तन की व्यावहारिक सीमाओं के कारण इनकी प्रभावशीलता सीमित रहती है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार की 9,585 करोड़ रुपये की PARIVARTAN योजना का उद्देश्य BS-IV और उससे पुराने ट्रकों व बसों को वित्तीय प्रोत्साहन देकर सड़कों से हटाना तथा उन्हें स्वच्छ मॉडलों से बदलना है। योजना शुरू होने के लगभग चार महीने बाद भी 48,148 वाहन मालिकों ने पंजीकरण कराया है, जबकि अनुमानित लक्ष्य 2.07 लाख है। इसी बीच दिल्ली में 1 नवंबर से गैर-BS-VI पेट्रोल और डीज़ल वाहनों पर शीतकालीन प्रतिबंध लागू हुआ है। इससे यह प्रश्न सामने आया है कि आयु-आधारित प्रतिबंध, प्रोत्साहन योजना और प्रवर्तन तंत्र मिलकर एनसीआर में पुराने वाहनों की समस्या को कितनी प्रभावी ढंग से हल कर पा रहे हैं।

पृष्ठभूमि

  • वाहन उत्सर्जन मानक केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के अंतर्गत निर्धारित होते हैं और BS-VI मानक देश भर में 1 अप्रैल 2020 से लागू हुआ। पुराने वाहन अपेक्षाकृत अधिक प्रदूषक हैं।
  • वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management – CAQM) एक सांविधिक निकाय है, जिसकी स्थापना वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के अंतर्गत दिल्ली-एनसीआर और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए की गई।
  • एनसीआर में लगभग 3.02 करोड़ BS-I से BS-IV वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें से लगभग 48 लाख वाहन दिल्ली से सटे एनसीआर जिलों में हैं। इनमें मालवाहक, बसें और ट्रैक्टर लगभग 2.9 लाख हैं।
  • अगस्त 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने आयु-आधारित जब्ती से जुड़ी बलपूर्वक कार्रवाई पर रोक लगाई, जिससे कबाड़ीकरण अभियान रुका। दिसंबर 2025 में आदेश संशोधित कर केवल BS-IV या उससे स्वच्छ वाहनों को संरक्षण दिया गया, जिससे BS-III या उससे पुराने वाहनों की जब्ती फिर से संभव हुई।
  • सीमा-चौकियों पर मालवाहक वाहनों को वापस भेजने की पर्याप्त व्यवस्था न होने से यातायात जाम की आशंका है, क्योंकि दिल्ली में प्रवेश करने वाले लगभग 40 प्रतिशत मालवाहक वाहन आवश्यक आपूर्ति ले जाते हैं।

PARIVARTAN योजना क्या है?

  • PARIVARTAN योजना केंद्र सरकार की वह वित्तीय प्रोत्साहन योजना है, जिसके अंतर्गत BS-IV और उससे पुराने ट्रकों व बसों को स्वच्छ मॉडलों से बदलने के लिए सहायता दी जाती है।
  • इसका कुल परिव्यय 9,585 करोड़ रुपये है और इसका प्रमुख उद्देश्य पुराने, अधिक प्रदूषक वाहनों को सड़कों से हटाकर परिवहन क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन को कम करना है।
  • यह योजना वाहन कबाड़ीकरण नीति की उस व्यापक दिशा से जुड़ी है, जिसमें जीवन-अवधि पूरी कर चुके वाहनों को पंजीकृत सुविधाओं में विधिवत नष्ट किया जाता है।
  • आयु-आधारित प्रतिबंध और प्रोत्साहन, दोनों उपकरण एक साथ काम करते हैं। प्रतिबंध बाध्यकारी होते हैं, जबकि प्रोत्साहन स्वैच्छिक प्रतिस्थापन को बढ़ावा देते हैं।
  • प्रवर्तन में स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली (ANPR) कैमरे, ईंधन स्टेशनों पर जाँच और सीमा-चौकियों पर निगरानी शामिल होती है।
  • CAQM को एनसीआर राज्यों और दिल्ली सरकार से कबाड़ीकरण, जब्ती और निपटान पर त्रैमासिक रिपोर्ट मांगने का अधिकार है। यह समन्वय का महत्वपूर्ण साधन है।
  • नीति की प्रभावशीलता के लिए वाहन की आयु के साथ उसकी फिटनेस, वास्तविक उत्सर्जन प्रदर्शन और उपयोग को भी ध्यान में रखना आवश्यक माना जा रहा है।
  • पर्यावरणीय न्याय के संदर्भ में अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के अंतर्गत स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार और अनुच्छेद 48A व मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51A(छ)) संबंधी प्रावधान प्रासंगिक हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
योजना का नाम और परिव्यय PARIVARTAN योजना (PARIVARTAN Scheme) का कुल परिव्यय ₹9,585 करोड़ है। इसका उद्देश्य BS-IV और उससे पुराने ट्रकों व बसों को वित्तीय प्रोत्साहन देकर स्वच्छ मॉडलों से बदलना है।
लक्षित लाभार्थी मुख्यतः मालवाहक वाहन, बसें और ट्रैक्टर। ये वाहन अधिक प्रदूषण फैलाते हैं और दिल्ली-NCR में प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में गिने जाते हैं।
प्रगति का आकलन चार महीने बाद 48,148 वाहन मालिकों ने पंजीकरण कराया, जबकि अनुमानित लक्ष्य 2.07 लाख है। अगस्त के अंत में यह संख्या लगभग 1,300 थी, यानी पंजीकरण में तेज़ वृद्धि हुई है, फिर भी लक्ष्य से काफी पीछे है।
संबंधित विनियामक ढाँचा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने अधिक आयु के वाहनों पर कार्रवाई की समीक्षा की है। जीवनकाल समाप्त (end-of-life) वाहनों के लिए पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधाओं (Registered Vehicle Scrapping Facilities) का प्रावधान है।
क्षेत्रीय पैमाना उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में लगभग 3.02 करोड़ BS-I से BS-IV वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें से लगभग 48 लाख दिल्ली से सटे NCR ज़िलों में हैं।
नियंत्रण का तरीका गैर-BS-VI पेट्रोल और डीज़ल वाहनों पर 1 नवंबर से प्रतिबंध लागू हुआ है। ईंधन स्टेशनों पर ANPR कैमरों से वाहनों की आयु की पहचान की जाती है। यह प्रोत्साहन (प्रतिस्थापन) और प्रवर्तन (प्रतिबंध) का मिला-जुला मॉडल है।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण के मौसमी संकट में पुराने डीज़ल वाहनों का योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। इन्हें हटाने या बदलने से कणिका (PM) और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे प्रदूषकों के उत्सर्जन में कमी की संभावना बनती है।
  • BS-VI मानकों वाले वाहन अधिक स्वच्छ ईंधन और उन्नत उत्सर्जन नियंत्रण तकनीक पर आधारित हैं, इसलिए पुराने वाहनों का प्रतिस्थापन उत्सर्जन मानकों के क्रमिक उन्नयन की दिशा में कदम है।

आर्थिक एवं सामाजिक महत्व

  • वाहन प्रतिस्थापन से वाहन उद्योग में मांग बढ़ती है और रोज़गार के अवसर सृजित होते हैं। इससे आर्थिक संवृद्धि की गति पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
  • परिवहन क्षेत्र के छोटे संचालक, जो प्रायः पुराने वाहनों पर निर्भर हैं, वित्तीय सहायता के बिना नए वाहन खरीदने में असमर्थ रहते हैं। इसलिए ऐसी योजनाएँ आजीविका और परिवहन सेवाओं की निरंतरता दोनों से जुड़ी हैं।

शासन और संस्थागत महत्व

  • यह मामला केंद्र, राज्य सरकारों और NCR राज्यों के बीच समन्वित प्रवर्तन की आवश्यकता को दर्शाता है। वायु गुणवत्ता से जुड़े नीतिगत निर्णयों में CAQM जैसी वैधानिक संस्था की भूमिका केंद्र में आती है।
  • वाहन की आयु के बजाय फिटनेस, वास्तविक उत्सर्जन और उपयोग को आधार बनाने का सुझाव नीति-निर्माण में वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण की ओर संकेत करता है।

चुनौतियाँ

1. प्रोत्साहन की सीमित स्वीकार्यता

  • लक्ष्य 2.07 लाख है, जबकि पंजीकरण 48,148 तक पहुँचा है। अर्थात लक्ष्य का लगभग एक-चौथाई भाग ही पूरा हुआ है।
  • वाहन मालिकों के लिए नया वाहन खरीदने की लागत, प्रोत्साहन की राशि और ऋण की सुलभता का संतुलन बिठाना कठिन है। पुराने वाहन की स्क्रैपिंग का आर्थिक लाभ स्पष्ट न होना भी भागीदारी को धीमा करता है।

2. प्रवर्तन की तकनीकी बाधाएँ

  • ईंधन स्टेशनों पर ANPR कैमरों से वाहनों की आयु पहचानने की प्रणाली में परिचालन संबंधी समस्याएँ सामने आई हैं।
  • बॉर्डर पर गैर-अनुपालक मालवाहक वाहनों को वापस भेजने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। लगभग 40 प्रतिशत मालवाहक वाहन आवश्यक आपूर्ति ले जाते हैं, इसलिए सख़्ती से जाम और आपूर्ति बाधित होने का जोखिम है।

3. न्यायिक हस्तक्षेप और कानूनी अनिश्चितता

  • अगस्त 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने आयु-आधारित जब्ती से जुड़ी बलपूर्वक कार्रवाई पर रोक लगाई, जिससे CAQM का स्क्रैपेज आदेश अस्थायी रूप से रुक गया।
  • दिसंबर 2025 में आदेश में संशोधन कर केवल BS-IV या उससे स्वच्छ वाहनों को संरक्षण दिया गया। इसके बाद BS-III और उससे पुराने वाहनों की जब्ती फिर से संभव हुई। इससे नीति की दिशा बार-बार बदलती प्रतीत होती है।

4. आयु बनाम वास्तविक उत्सर्जन का प्रश्न

  • दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव के पत्र में केवल आयु के आधार पर वाहन हटाने के तरीके पर प्रश्न उठाया गया। उन्होंने फिटनेस, वास्तविक उत्सर्जन प्रदर्शन और उपयोग को भी मानदंड बनाने की बात कही।
  • यदि आयु ही एकमात्र मानदंड हो, तो अच्छी तरह रखरखाव वाले स्वच्छ वाहन भी बाहर हो सकते हैं, जबकि खराब उत्सर्जन वाले नए वाहन बच सकते हैं। इसलिए मानदंड की वैज्ञानिकता महत्वपूर्ण है।

5. अंतर-राज्यीय समन्वय की समस्या

  • दिल्ली-NCR में वाहन उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में पंजीकृत हैं, जबकि नियंत्रण दिल्ली में लागू होता है। राज्यों के बीच पंजीकरण, जब्ती और निपटान की प्रक्रियाएँ अलग-अलग होने से प्रवर्तन जटिल होता है।
  • CAQM ने तिमाही रिपोर्ट मांगी थी, फिर भी प्रगति सीमित रही। इससे स्पष्ट है कि आदेश और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच अंतर है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

समस्या चिंता का विषय
नामांकन में कमी 48,148 पंजीकरण बनाम 2.07 लाख लक्ष्य; योजना की पहुँच सीमित है।
ANPR प्रणाली की विफलता ईंधन स्टेशनों पर आयु पहचान में परिचालन दिक्कतें; प्रवर्तन की विश्वसनीयता प्रभावित।
सीमा पर जाम का जोखिम लगभग 40 प्रतिशत मालवाहक वाहन आवश्यक आपूर्ति ले जाते हैं; वापसी व्यवस्था अपर्याप्त।
न्यायिक आदेशों में बदलाव अगस्त 2025 की रोक और दिसंबर 2025 का संशोधन; नीति की स्थिरता पर प्रश्न।
आयु-आधारित मानदंड फिटनेस और वास्तविक उत्सर्जन की अनदेखी; स्वच्छ वाहनों के साथ अन्याय की आशंका।
राज्यों में समन्वय लगभग 3.02 करोड़ पुराने वाहन तीन राज्यों में पंजीकृत; समान प्रवर्तन कठिन।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • PARIVARTAN योजना (PARIVARTAN Scheme)
  • राष्ट्रीय वाहन स्क्रैपेज नीति (National Vehicle Scrappage Policy)

आगे की राह

  • प्रोत्साहन राशि और वित्तपोषण विकल्पों (जैसे आसान ऋण) को सरल बनाकर लाभार्थियों की भागीदारी बढ़ाई जाए।
  • पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधाओं का नेटवर्क NCR राज्यों में विस्तारित किया जाए, ताकि जीवनकाल समाप्त वाहनों का निपटान सुगम हो।
  • ANPR कैमरों की तकनीकी विश्वसनीयता की नियमित जाँच और रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।
  • आयु के साथ फिटनेस जाँच, वास्तविक उत्सर्जन परीक्षण और उपयोग के आँकड़ों को संयुक्त मानदंड बनाया जाए।
  • सीमा पर आवश्यक आपूर्ति वाले वाहनों के लिए अलग मार्ग या त्वरित जाँच व्यवस्था बनाई जाए, ताकि जाम और आपूर्ति बाधा न्यूनतम हो।
  • CAQM, दिल्ली सरकार और NCR राज्यों के बीच तिमाही समीक्षा और साझा डेटा प्रणाली को संस्थागत रूप दिया जाए।
  • सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप स्पष्ट, स्थिर और सार्वजनिक रूप से घोषित प्रवर्तन नियमावली तैयार की जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

PARIVARTAN योजना · वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) · भारत चरण (Bharat Stage) उत्सर्जन मानक · जीवन-अवधि-समाप्त वाहन (End-of-Life Vehicles) · वाहन विखंडन (Vehicle Scrapping) · स्वचालित संख्या-पट्टिका पहचान प्रणाली (ANPR) · अनुच्छेद 21 और स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार · प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle) · सावधानी सिद्धांत (Precautionary Principle) · राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सहकारी संघवाद · न्यायिक हस्तक्षेप और सुप्रीम कोर्ट के आदेश · आर्थिक प्रोत्साहन बनाम प्रवर्तन आधारित नीति

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21 — स्वच्छ वायु और स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार
  • अनुच्छेद 48A — राज्य द्वारा पर्यावरण संरक्षण का निर्देश
  • अनुच्छेद 51A(छ) — प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का मूल कर्तव्य

अवधारणा प्रवाह

दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण और पुराने डीज़ल वाहनों से उत्सर्जन में वृद्धि  →  CAQM द्वारा पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग और प्रतिस्थापन के लिए आदेश और समीक्षा  →  PARIVARTAN योजना के तहत वित्तीय प्रोत्साहन के साथ वाहन मालिकों को प्रतिस्थापन का विकल्प  →  सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों (अगस्त 2025 और दिसंबर 2025) से प्रवर्तन की दिशा और सीमा का निर्धारण  →  1 नवंबर से गैर-BS-VI वाहनों पर प्रतिबंध, ANPR और सीमा-जाँच से प्रवर्तन  →  तकनीकी बाधाएँ, सीमा पर जाम और कम पंजीकरण से योजना के लक्ष्य में अंतर

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) एक वैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना संसद के अधिनियम द्वारा हुई है।
2. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता से संबंधित आयोग के निर्देश, संबंधित राज्य सरकारों के निर्देशों पर प्रभावी होते हैं।
3. यह आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत स्थापित संवैधानिक निकाय है।

उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: CAQM की स्थापना वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के अंतर्गत हुई है। कथन 2 सही है: इस अधिनियम के अनुसार आयोग के निर्देश संबंधित राज्यों के निर्देशों पर प्रभावी होते हैं। कथन 3 गलत है, क्योंकि यह अनुच्छेद 324 के अंतर्गत संवैधानिक निकाय नहीं, बल्कि वैधानिक निकाय है।

Q2. अभिकथन (A): PARIVARTAN योजना के अंतर्गत पुराने वाहनों को हटाने की दिशा में उपलब्धि लक्ष्य से काफी कम रही है।
कारण (R): सर्वोच्च न्यायालय ने दिसंबर 2025 में अपने आदेश में संशोधन कर केवल BS-IV या उससे स्वच्छ वाहनों को संरक्षण प्रदान किया, जिससे BS-III या उससे पुराने वाहनों के जब्ती-कार्यवाही की अनुमति मिली।

उपर्युक्त के संदर्भ में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, परंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — (A) सही है: 48,148 पंजीकरण बनाम लगभग 2.07 लाख के अनुमानित लक्ष्य से स्पष्ट है कि उपलब्धि सीमित है। (R) भी सही है, और यह बताता है कि न्यायालय के संशोधित आदेश से पुराने वाहनों पर कार्यवाही का कानूनी आधार बना, जो सीधे प्रवर्तन की स्थिति को प्रभावित करता है। अतः (R), (A) की व्याख्या करता है।

Q3. नीचे दी गई सूची-I (संवैधानिक प्रावधान) को सूची-II (विषय-वस्तु) से सुमेलित कीजिए:

सूची-I
1. अनुच्छेद 48A
2. अनुच्छेद 51A(छ)
3. अनुच्छेद 21

सूची-II
a. राज्य का पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का दायित्व
b. प्रत्येक नागरिक का वनों, झीलों, नदियों और वन्यजीवों की रक्षा का मूल कर्तव्य
c. जीवन और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार, जिसमें न्यायालयों ने स्वच्छ पर्यावरण को सम्मिलित माना है

सही सुमेलन चुनिए:

  1. 1-a, 2-b, 3-c
  2. 1-b, 2-a, 3-c
  3. 1-a, 2-c, 3-b
  4. 1-c, 2-b, 3-a

उत्तर: 1-a, 2-b, 3-c — अनुच्छेद 48A (राज्य नीति का निदेशक तत्व) पर्यावरण संरक्षण का राज्य का दायित्व बताता है, अतः 1-a। पर्यावरण से संबंधित मूल कर्तव्य अनुच्छेद 51A(छ) में है, जिसका विषय-वस्तु वनों, झीलों, नदियों और वन्यजीवों की रक्षा है, अतः 2-b। स्वच्छ पर्यावरण को अनुच्छेद 21 का अंग मानने की व्याख्या न्यायिक निर्णयों से विकसित हुई है, अतः 3-c। (ध्यान दें: अनुच्छेद 51A(छ) की अंतर्वस्तु अपेक्षित है; क्रमांक के आधार पर विकल्प का मूल्यांकन होगा।)

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पुराने वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने हेतु वित्तीय प्रोत्साहन पर आधारित PARIVARTAN योजना की सीमित उपलब्धि को देखते हुए, प्रोत्साहन-आधारित और प्रवर्तन-आधारित दोनों दृष्टिकोणों की प्रभावशीलता का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि क्या केवल वाहन की आयु को उसे सड़क से हटाने का एकमात्र मानदंड होना चाहिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल उत्तर संकेत-बिंदु:

1. भूमिका: NCR में वायु प्रदूषण की बहु-स्रोती प्रकृति; PARIVARTAN योजना (₹9,585 करोड़) का उद्देश्य BS-IV और पुराने ट्रकों-बसों का प्रतिस्थापन; लक्ष्य लगभग 2.07 लाख बनाम लगभग 48,148 पंजीकरण (चार महीने बाद)।

2. संवैधानिक एवं विधिक ढाँचा: अनुच्छेद 21 (स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार, सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य, 1991); अनुच्छेद 48A (राज्य का दायित्व); अनुच्छेद 51A(छ) (नागरिक का मूल कर्तव्य); पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986; वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981; वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 (आयोग के निर्देशों की प्रभावशीलता); मोटर वाहन अधिनियम, 1988। मोटर वाहन संघ सूची-समवर्ती सूची की प्रविष्टि 35 (सूची-III) में आता है, जिससे केंद्र-राज्य समन्वय आवश्यक है।

3. प्रोत्साहन-आधारित दृष्टिकोण: प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (इंडियन काउंसिल फॉर एन्वायरो-लीगल एक्शन बनाम भारत संघ, 1996) और पिगू (A.C. Pigou) की बाज़ार-आधारित सुधार की अवधारणा के संदर्भ में विश्लेषण; सीमाएँ: वित्तीय सहायता की पहुँच, परिवहन क्षेत्र (लगभग 3.02 करोड़ BS-I से BS-IV वाहन UP, हरियाणा, राजस्थान में; NCR में लगभग 48 लाख) की विशालता, छोटे परिवहनकर्ताओं की वित्तीय क्षमता।

4. प्रवर्तन-आधारित दृष्टिकोण: ANPR कैमरों की परिचालन समस्याएँ; सीमा-चौकियों पर भीड़ (लगभग 40 प्रतिशत माल-वाहन आवश्यक आपूर्ति के हैं); सावधानी सिद्धांत (वेल्लोर सिटिज़न्स वेलफेयर फोरम, 1996) के आधार पर निवारक कार्यवाही का औचित्य।

5. न्यायिक परिप्रेक्ष्य: सुप्रीम कोर्ट का अगस्त 2025 का अस्थायी रोक-आदेश और दिसंबर 2025 का संशोधन (BS-IV या स्वच्छ वाहनों को संरक्षण); MC Mehta बनाम भारत संघ (वाहन प्रदूषण) का संदर्भ।

6. दूसरा प्रश्न पर विचार: आयु बनाम वास्तविक फिटनेस, उत्सर्जन-प्रदर्शन और उपयोग (मुख्य सचिव का जुलाई 2025 का पत्र); वाहन विखंडन नीति 2021 के फिटनेस-परीक्षण प्रावधान; आजीविका का अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(छ)) बनाम पर्यावरणीय दायित्व; आनुपातिकता का सिद्धांत।

7. निष्कर्ष: सम्मिश्र नीति—फिटनेस-आधारित परीक्षण, सार्वजनिक-परिवहन विकल्प, राज्यों के बीच समन्वित डेटा प्रणाली और संतुलित प्रोत्साहन-प्रवर्तन मिश्रण।

स्रोत: The Indian Express


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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