20 Oct दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण: 1 नवंबर से लागू होंगे 10 प्रमुख उपाय
✎ वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण के समन्वित प्रबंधन का वैधानिक निकाय है, जबकि GRAP AQI-आधारित चरणबद्ध आपातकालीन उपायों का ढाँचा है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण (वायु प्रदूषण, शहरी प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण से संबंधित कानून और संस्थाएँ) | GS Paper II — शासन (केंद्र-राज्य समन्वय, सांविधिक निकाय, संघवाद और दिल्ली की प्रशासनिक संरचना) | GS Paper III — पर्यावरण एवं परिवहन (सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा, उत्सर्जन मानक, इलेक्ट्रिक व CNG वाहन)
- Prelims: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) — वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अंतर्गत नहीं, बल्कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 द्वारा गठित, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) — वैधानिक निकाय, राष्ट्रीय स्तर पर वायु व जल प्रदूषण का नियामक, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) — मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अंतर्गत अनिवार्य, भारत स्टेज (BS) उत्सर्जन मानक — BS-VI मानक और उसका वाहन-प्रकार के आधार पर लागू होना, ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) — AQI के स्तर के अनुसार चरणबद्ध आपातकालीन उपाय, ANPR (Automatic Number Plate Recognition) — स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) — 2019 में आरंभ, PM10 और PM2.5 में कमी का लक्ष्य, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 — केंद्र सरकार को पर्यावरण संरक्षण के व्यापक अधिकार, अनुच्छेद 21 (स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार) और अनुच्छेद 48A (राज्य का पर्यावरण संरक्षण का कर्तव्य)
- Essay: शहरी वायु प्रदूषण और नागरिक सहभागिता: क्या केवल प्रतिबंध पर्याप्त हैं?, सतत विकास में पारिस्थितिक संतुलन और आर्थिक गतिविधियों के बीच संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण के समन्वित प्रबंधन का वैधानिक निकाय है, जबकि GRAP AQI-आधारित चरणबद्ध आपातकालीन उपायों का ढाँचा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
दिल्ली सरकार ने 2026-27 के लिए 10-बिंदु शीतकालीन कार्य योजना की घोषणा की है, जो 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहेगी। इस योजना में बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) वाले तथा निर्धारित जीवनकाल पार कर चुके वाहनों को चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर ईंधन न देने का प्रावधान है, गैर-दिल्ली पंजीकृत पेट्रोल-डीज़ल वाहनों पर BS-VI मानक की शर्त लागू होगी, निर्माण और ध्वस्तीकरण गतिविधियों पर चरणबद्ध प्रतिबंध लगेंगे और सरकारी व निजी कार्यालयों के 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए घर से कार्य अनिवार्य किया गया है। योजना का क्रियान्वयन वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), स्थानीय निकायों, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) जैसी एजेंसियों के समन्वय से किया जाएगा। यह प्रसंग इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसमें बहु-एजेंसी समन्वय, वाहन-आधारित और निर्माण-आधारित उपायों तथा मांग-प्रबंधन (पार्किंग शुल्क, सार्वजनिक परिवहन पर बल) का एक साथ प्रयोग दिखाई देता है।
पृष्ठभूमि
- दिल्ली-NCR में शीतकाल में वायु प्रदूषण गंभीर हो जाता है, क्योंकि कम तापमान, धीमी हवाओं और तापीय प्रतिलोभन (Temperature Inversion) के कारण प्रदूषक कणों का फैलाव सीमित हो जाता है।
- पड़ोसी राज्यों में फसल अवशेष जलाना, वाहनों का धुआँ, औद्योगिक उत्सर्जन, धूल और निर्माण गतिविधियाँ इस समस्या के प्रमुख स्रोत माने जाते हैं।
- सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों पर पूर्व में गठित पर्यावरण प्रदूषण (निवारण एवं नियंत्रण) प्राधिकरण (EPCA) की भूमिका को 2021 के कानून द्वारा CAQM में समाहित किया गया, जिसे NCR और सटे क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता के समन्वित प्रबंधन का अधिकार दिया गया।
- GRAP को CAQM द्वारा AQI के स्तर के अनुसार चरणबद्ध रूप से लागू किया जाता है; शीतकालीन कार्य योजना इसी ढाँचे के पूरक के रूप में दीर्घकालिक, मौसम-आधारित उपाय प्रस्तुत करती है।
- वायु प्रदूषण नियंत्रण में केंद्र और राज्य की भूमिकाएँ संवैधानिक रूप से बँटी हुई हैं; पर्यावरण संरक्षण समवर्ती सूची में आता है, इसलिए केंद्र और राज्य दोनों के बीच समन्वय अनिवार्य हो जाता है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और दिल्ली की शीतकालीन कार्य योजना क्या है?
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management) एक वैधानिक निकाय है, जिसे वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के अंतर्गत स्थापित किया गया है। इसका कार्यक्षेत्र दिल्ली-NCR और सटे राज्यों के क्षेत्र हैं।
- CAQM के पास विभिन्न राज्य सरकारों और एजेंसियों को वायु प्रदूषण नियंत्रण के निर्देश देने तथा उनका पालन सुनिश्चित कराने की शक्तियाँ हैं। इसी के अंतर्गत GRAP लागू किया जाता है।
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर का नियामक निकाय है, जो वायु गुणवत्ता मानक तय करने और निगरानी में भूमिका निभाता है।
- प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) यह दर्शाता है कि वाहन निर्धारित उत्सर्जन सीमा के भीतर है। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अंतर्गत इसे वाहन के पास रखना अनिवार्य है।
- भारत स्टेज (BS) उत्सर्जन मानक वाहनों से निकलने वाले प्रदूषकों की सीमा तय करते हैं। BS-VI मानक अधिक कठोर हैं और इनका पालन न करने वाले वाहनों पर परिवहन-आधारित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
- ANPR प्रणाली कैमरों और सॉफ़्टवेयर के माध्यम से वाहन की नंबर प्लेट पहचानती है, जिससे पेट्रोल पंप जैसे बिंदुओं पर प्रवर्तन सुगम होता है।
- इस योजना की प्रकृति मिश्रित है: इसमें प्रवर्तन (ईंधन और प्रवेश पर रोक), मांग-प्रबंधन (पार्किंग शुल्क, घर से कार्य), सार्वजनिक परिवहन का विस्तार (मेट्रो और बस राइडरशिप लक्ष्य) और निर्माण स्थलों की निगरानी (CCTV) शामिल हैं।
- पर्यावरण से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों में अनुच्छेद 21 के अंतर्गत स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार की व्याख्या, अनुच्छेद 48A में राज्य का कर्तव्य और अनुच्छेद 51A(छ) में नागरिकों का मूल कर्तव्य सम्मिलित हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| शीतकालीन कार्य योजना की अवधि | 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू; शीतकालीन महीनों में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को मौसमी स्तर पर लक्षित करती है |
| ईंधन नीति: “No PUC, No Fuel” | वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (Pollution Under Control Certificate – PUCC) न रखने वाले और निर्धारित आयु-सीमा पार कर चुके वाहनों को ANPR (Automatic Number Plate Recognition) प्रणाली वाले 500 पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं मिलेगा |
| बाहरी वाहनों पर प्रवेश प्रतिबंध | दिल्ली के बाहर पंजीकृत, BS-VI उत्सर्जन मानक पूरे न करने वाले पेट्रोल और डीजल वाहनों का शहर में प्रवेश रोका जाएगा; CNG और विद्युत वाहन इससे मुक्त हैं |
| निर्माण गतिविधियों पर रोक | 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल उत्पन्न करने वाले ध्वंस और खुले सिविल निर्माण पर पूर्ण रोक; 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक सभी प्रकार के निर्माण व ध्वंस पर व्यापक प्रतिबंध |
| घर से कार्य (WFH) और कार्यालय समय | सरकारी और निजी कार्यालयों के 50% कर्मचारियों के लिए घर से कार्य या सप्ताह में दो दिन घर से कार्य; नगर निगम और दिल्ली सरकार के कार्यालयों के समय में संशोधन |
| पार्किंग शुल्क दोगुना | अधिकृत पार्किंग स्थलों पर शुल्क दोगुना (मेट्रो पार्किंग को छोड़कर), जिससे निजी वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित करने का उद्देश्य है |
महत्व
पर्यावरणीय (Environmental)
- वाहन उत्सर्जन, धूल और निर्माण गतिविधि, तीनों प्रमुख स्रोतों को एक साथ लक्षित करने वाला बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण अपनाया गया है
- पुराने और BS-VI से नीचे के वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सड़क से हटाने का प्रयास वायु गुणवत्ता सुधार के दीर्घकालिक लक्ष्य से जुड़ता है
- विद्युत और CNG वाहनों को छूट देना स्वच्छ ईंधन और स्वच्छ परिवहन तकनीक की ओर प्रोत्साहन का संकेत देता है
शासन और प्रवर्तन (Governance)
- ANPR प्रणाली, AI-आधारित निगरानी और निर्माण स्थलों पर 100% CCTV कवरेज से प्रवर्तन को डिजिटल स्वरूप दिया जा रहा है
- Malba App पर पंजीकरण को भवन-योजना अनुमोदन के लिए अनिवार्य करना निर्माण नियमों के अनुपालन की पारदर्शिता बढ़ाता है
- ई-शासन (e-Governance) के साधनों का उपयोग नागरिक सेवाओं और नियामक निगरानी दोनों में होता है
संघीय और संस्थागत समन्वय (Cooperative Federalism and Institutional Coordination)
- केंद्र, दिल्ली सरकार, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management – CAQM), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board – CPCB), स्थानीय निकाय, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) के बीच बहु-एजेंसी समन्वय आवश्यक है
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अंतर-राज्यीय वाहन प्रवेश से जुड़े नियम क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं
सार्वजनिक परिवहन और शहरी गतिशीलता (Urban Mobility)
- दिल्ली मेट्रो के दैनिक यात्री लक्ष्य को 72 लाख और DTC बसों के लक्ष्य को 42 लाख तक ले जाने का उद्देश्य निजी वाहनों पर निर्भरता घटाना है
- वर्तमान में 6,840 बसों में से 5,088 विद्युत बसें हैं, जो परिवहन के विद्युतीकरण की दिशा दर्शाती हैं
- “दिल्ली मेट्रो सारथी” ऐप के माध्यम से अंतिम-मील संपर्क (last-mile connectivity) सुधारने का अभियान सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने का प्रयास है
चुनौतियाँ
1. आजीविका और सामाजिक प्रभाव
- निर्माण पर लंबी अवधि की रोक से दैनिक मजदूरों और निर्माण श्रमिकों की आय पर सीधा असर पड़ सकता है
- निर्माण गतिविधियों के रुकने से आवास और आधारभूत संरचना परियोजनाओं में देरी और लागत वृद्धि की स्थिति बन सकती है
- कम वेतन वाले कर्मचारियों के लिए घर से कार्य की व्यवस्था सभी के लिए समान रूप से लागू नहीं होती
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय एवं रोजगार (GS-II और GS-III)
2. प्रवर्तन की क्षमता और गैर-अनुपालन
- 500 पेट्रोल पंपों पर ANPR आधारित ईंधन निषेध का प्रभावी क्रियान्वयन तकनीकी अवसंरचना और मानव संसाधन पर निर्भर है
- पंजीकरण रिकॉर्ड में त्रुटियों या बाहरी वाहनों की पहचान में कठिनाई से अनुचित अपवर्जन या गैर-अनुपालन की संभावना बनती है
- प्रतिबंधों के बावजूद नियमों से बचने के लिए अवैध ईंधन स्रोतों या वैकल्पिक मार्गों के उपयोग का जोखिम रहता है
यूपीएससी लिंक: शासन में ई-गवर्नेंस और प्रशासनिक प्रवर्तन (GS-II)
3. केंद्र-राज्य और अंतर-एजेंसी समन्वय
- दिल्ली की संवैधानिक स्थिति विशिष्ट है; पुलिस, भूमि और सेवाओं के नियंत्रण में केंद्र और राज्य सरकार की भूमिकाएँ अलग-अलग हैं
- CAQM, CPCB, स्थानीय निकाय और दिल्ली पुलिस के बीच जवाबदेही का स्पष्ट विभाजन न होने पर क्रियान्वयन में बाधा आ सकती है
- पड़ोसी राज्यों के साथ सामंजस्य के बिना बाहरी वाहन प्रतिबंध और क्षेत्रीय प्रदूषण का समाधान अधूरा रहता है
यूपीएससी लिंक: संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध (GS-II)
4. सार्वजनिक परिवहन की क्षमता
- मेट्रो और बसों पर यात्री भार बढ़ाने के लक्ष्य के लिए पर्याप्त बेड़ा, आवृत्ति और कनेक्टिविटी आवश्यक है
- निजी वाहन से सार्वजनिक परिवहन की ओर स्थायी परिवर्तन तभी होगा जब सेवा की विश्वसनीयता और सुविधा बढ़े
- पार्किंग शुल्क वृद्धि का प्रभाव उन यात्रियों पर अधिक पड़ता है जिनके पास सार्वजनिक परिवहन का विकल्प सीमित है
यूपीएससी लिंक: शहरी परिवहन और अवसंरचना (GS-III)
5. मौसमी उपायों की सीमा
- यह योजना मुख्यतः शीतकालीन महीनों के लिए है, जबकि प्रदूषण के स्रोत वर्ष भर सक्रिय रहते हैं
- वाहन और निर्माण से जुड़े उपाय तभी प्रभावी होंगे जब उद्योग, ऊर्जा और कृषि जैसे अन्य स्रोतों पर भी समान ध्यान हो
- अल्पकालिक आपातकालीन उपायों और दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधारों के बीच संतुलन बनाना चुनौती है
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण और नियंत्रण (GS-III)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| आजीविका | दैनिक मजदूरों और निर्माण श्रमिकों की आय पर निर्माण प्रतिबंध का सीधा प्रभाव |
| प्रवर्तन | ANPR और CCTV तंत्र की विश्वसनीयता, डेटा की सटीकता और गैर-अनुपालन की रोकथाम |
| संघीय समन्वय | केंद्र, दिल्ली सरकार, CAQM, CPCB और स्थानीय निकायों के बीच स्पष्ट जवाबदेही का अभाव होने का जोखिम |
| परिवहन क्षमता | मेट्रो और बस सेवाओं की क्षमता, आवृत्ति और कनेक्टिविटी लक्ष्य के अनुरूप न होने की संभावना |
| सीमा-पार प्रदूषण | बाहरी वाहन प्रतिबंध के बावजूद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में व्यापक क्षेत्रीय समन्वय की आवश्यकता |
| मौसमी दृष्टिकोण | केवल शीतकालीन अवधि पर केंद्रित उपाय वर्ष भर के स्रोतों को संबोधित नहीं करते |
आगे की राह
- प्रवर्तन के लिए ANPR, CCTV और Malba App जैसे डिजिटल तंत्र के साथ नियमित डेटा साझाकरण और सार्वजनिक निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
- CAQM की समन्वय भूमिका को स्पष्ट करते हुए केंद्र, दिल्ली सरकार, CPCB, स्थानीय निकायों और दिल्ली पुलिस के बीच जिम्मेदारियों का लिखित विभाजन हो
- निर्माण प्रतिबंध की अवधि में दैनिक मजदूरों और निर्माण श्रमिकों के लिए आय सहायता या वैकल्पिक रोजगार के उपाय पर विचार किया जाए
- सार्वजनिक परिवहन की क्षमता बढ़ाने के लिए बेड़े का विस्तार, बस आवृत्ति में सुधार और अंतिम-मील कनेक्टिविटी पर निवेश हो
- पार्किंग शुल्क और परिवहन नीतियों के प्रभाव का मूल्यांकन कम आय वर्ग पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखकर किया जाए
- पड़ोसी राज्यों के साथ क्षेत्रीय समन्वय से सीमा-पार वाहन और उत्सर्जन पर साझा नियम और निगरानी विकसित की जाए
- वाहन उत्सर्जन, धूल और औद्योगिक स्रोतों के वर्ष भर नियंत्रण हेतु दीर्घकालिक कार्य योजना बनाई जाए
- योजना के परिणामों का वायु गुणवत्ता आंकड़ों के आधार पर स्वतंत्र मूल्यांकन कर अगले मौसम की नीति में सुधार किया जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
वायु प्रदूषण · शीतकालीन कार्य योजना · प्रदूषण नियंत्रण · पर्यावरण संरक्षण · शहरी शासन · सार्वजनिक स्वास्थ्य · सतत विकास · वाहनों से उत्सर्जन · निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध · वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग · केंद्र-राज्य समन्वय · नागरिक भागीदारी
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21 — स्वच्छ वायु सहित जीवन का अधिकार (न्यायिक व्याख्या)
- अनुच्छेद 48क — पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का राज्य का दायित्व
- अनुच्छेद 51क(छ) — पर्यावरण की रक्षा का मौलिक कर्तव्य
- अनुच्छेद 239क क (Article 239AA) — दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की विशेष संवैधानिक व्यवस्था
अवधारणा प्रवाह
शीतकालीन मौसम में तापमान गिरने और हवा की गति कम होने से प्रदूषक जमीन के पास टिकते हैं → वाहन उत्सर्जन, धूल और निर्माण गतिविधि से वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता है → दिल्ली सरकार, केंद्र, CAQM और CPCB की समन्वित योजना से 1 नवंबर से 28 फरवरी तक 10-सूत्री कार्य योजना लागू होती है → ईंधन निषेध, बाहरी वाहन प्रतिबंध, निर्माण रोक और घर से कार्य के माध्यम से वाहन यातायात और उत्सर्जन घटाने का प्रयास होता है → पार्किंग शुल्क वृद्धि और मेट्रो व बस क्षमता विस्तार से निजी वाहन के उपयोग में कमी और सार्वजनिक परिवहन में वृद्धि की अपेक्षा की जाती है → प्रवर्तन, निगरानी और मूल्यांकन से योजना की प्रभावशीलता तय होती है और अगले मौसम की नीति का आधार बनती है
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management – CAQM) एक सांविधिक निकाय है जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए स्थापित किया गया है।
2. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board – CPCB) पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत गठित एक सांविधिक संगठन है।
3. ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नीति का उद्देश्य केवल BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा करने वाले वाहनों को ईंधन उपलब्ध कराना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। CAQM को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के तहत स्थापित किया गया है। कथन 2 गलत है। CPCB का गठन जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत किया गया था, न कि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत। कथन 3 गलत है। ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नीति का उद्देश्य वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (Pollution Under Control Certificate – PUCC) वाले वाहनों को ही ईंधन उपलब्ध कराना है, न कि केवल BS-VI मानकों वाले वाहनों को।
Q2. अभिकथन (A): दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए शीतकालीन कार्य योजना लागू की है जिसमें वाहनों पर प्रतिबंध और निर्माण गतिविधियों पर रोक जैसे उपाय शामिल हैं।
कारण (R): वायु प्रदूषण का स्तर सर्दियों के महीनों में भौगोलिक और मौसमी कारकों के कारण बढ़ जाता है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए शीतकालीन कार्य योजना लागू की है जिसमें वाहनों पर प्रतिबंध और निर्माण गतिविधियों पर रोक जैसे उपाय शामिल हैं। कारण (R) भी सही है क्योंकि सर्दियों में तापमान में गिरावट, हवा की गति में कमी और पराली जलाने जैसे कारकों के कारण प्रदूषण बढ़ जाता है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या है क्योंकि प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण ही ऐसी कार्य योजनाओं की आवश्यकता होती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ वायु प्रदूषण भारत के शहरी क्षेत्रों के लिए एक गंभीर चुनौती है, जिसके सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण पर दूरगामी परिणाम होते हैं। इस संदर्भ में, दिल्ली सरकार द्वारा लागू की गई शीतकालीन कार्य योजना के प्रमुख उपायों का विश्लेषण कीजिए। साथ ही, वायु प्रदूषण से निपटने में केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: वायु प्रदूषण की गंभीरता और इसके प्रभावों का संक्षिप्त उल्लेख।
2. दिल्ली की शीतकालीन कार्य योजना के प्रमुख उपाय (विश्लेषण):
a. ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नीति और पुराने वाहनों पर प्रतिबंध।
b. BS-VI उत्सर्जन मानकों का पालन न करने वाले बाहरी वाहनों पर रोक।
c. निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर प्रतिबंध (विभिन्न चरणों में)।
d. सरकारी और निजी कार्यालयों में ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) नीति।
e. पार्किंग शुल्क में वृद्धि और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा।
f. AI-सक्षम निगरानी प्रणाली और नागरिक भागीदारी पर जोर।
3. प्रभावी समन्वय की आवश्यकता (चर्चा):
a. केंद्र सरकार की भूमिका: नीति निर्माण, वित्तीय सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन (जैसे CAQM, CPCB)।
b. राज्य सरकार की भूमिका: योजनाओं का क्रियान्वयन, प्रवर्तन, अंतर-विभागीय समन्वय।
c. स्थानीय निकायों की भूमिका: जमीनी स्तर पर निगरानी, अपशिष्ट प्रबंधन, धूल नियंत्रण।
d. पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय: पराली जलाने, औद्योगिक उत्सर्जन जैसे क्षेत्रीय मुद्दों पर।
e. नागरिक भागीदारी का महत्व: जागरूकता, नियमों का पालन, शिकायत निवारण।
4. निष्कर्ष: एक समग्र, बहु-आयामी और समन्वित दृष्टिकोण की अनिवार्यता पर बल।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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