18 Oct स्कूल शिक्षा विभाग ने विशेष अभियान 6 के तहत उठाए बड़े कदम
✎ विशेष अभियान 6.0 में विद्यालय शिक्षा विभाग का ध्यान प्रशासनिक दक्षता, स्वच्छ परिसर और ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुरूप उत्तरदायी निपटान पर है, जिसका कानूनी आधार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन व्यवस्था (लोक प्रशासन में सुधार, नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण, शिकायत निवारण तंत्र) | GS Paper II — सामाजिक क्षेत्र (शिक्षा का अधिकार, विद्यालय अवसंरचना और सार्वजनिक स्वास्थ्य-स्वच्छता के मानक) | GS Paper III — पर्यावरण (ई-अपशिष्ट प्रबंधन, विस्तारित उत्पादक दायित्व, सतत अपशिष्ट प्रबंधन)
- Prelims: ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 (E-Waste (Management) Rules, 2022), विस्तारित उत्पादक दायित्व (Extended Producer Responsibility — EPR), पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board — CPCB) की भूमिका, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की अनुसूची (विद्यालय अवसंरचना के न्यूनतम मानक), समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha) का स्वरूप और उद्देश्य, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के अंतर्गत लोक शिकायत निवारण व्यवस्था, अनुच्छेद 21क और मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51क(छ))
- Essay: सरकारी कार्यालयों में दक्षता और जनविश्वास: प्रशासनिक सुधार की दिशा में विशेष अभियानों की भूमिका, इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट: बढ़ता खतरा और चक्रीय अर्थव्यवस्था की संभावनाएँ
त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष अभियान 6.0 में विद्यालय शिक्षा विभाग का ध्यान प्रशासनिक दक्षता, स्वच्छ परिसर और ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के अनुरूप उत्तरदायी निपटान पर है, जिसका कानूनी आधार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
शिक्षा विभाग (Department of School Education and Literacy) ने विशेष अभियान 6.0 के अंतर्गत अपने कार्यक्षेत्र में तीन प्रमुख लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया है: प्रशासनिक दक्षता में सुधार, विद्यालय परिसरों की स्वच्छता और ई-अपशिष्ट का उत्तरदायी निपटान। यह अभियान सरकारी कार्यालयों में लंबित मामलों के निपटान, अभिलेखों की छँटाई, अनुपयोगी सामग्री के निस्तारण और कार्यालय-स्थान के बेहतर उपयोग पर केंद्रित एक समन्वित प्रयास है। चूँकि विद्यालयों में बड़ी मात्रा में पुराने कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जमा होते हैं, इसलिए इनका वैज्ञानिक निस्तारण ई-अपशिष्ट नियमों के पालन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। समान अवधि में डाक विभाग सहित अन्य मंत्रालयों द्वारा भी इसी अभियान के अंतर्गत प्रगति की सूचना दी गई है, जो इसके अंतर-विभागीय स्वरूप को दर्शाती है।
पृष्ठभूमि
- भारत में प्रशासनिक सुधार के लिए समय-समय पर केंद्रीय स्तर पर विशेष अभियान चलाए जाते रहे हैं, जिनका उद्देश्य लंबित फाइलों, शिकायतों और अनुपयोगी सामग्री का व्यवस्थित निपटान करना है। विशेष अभियान 6.0 इसी शृंखला की ताज़ा कड़ी है।
- इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट (ई-वेस्ट) की समस्या तेज़ी से बढ़ रही है, क्योंकि कंप्यूटर, मोबाइल, प्रिंटर और अन्य उपकरणों का जीवनकाल सीमित होता है। इनमें सीसा, पारा और कैडमियम जैसे विषैले पदार्थ होते हैं, जिनका असुरक्षित निस्तारण मृदा और जल को दूषित करता है।
- ई-अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 लागू हैं, जो उत्पादकों, उपभोक्ताओं, संग्रहकर्ताओं और पुनर्चक्रणकर्ताओं सभी की ज़िम्मेदारी तय करते हैं। इन नियमों में विस्तारित उत्पादक दायित्व की व्यवस्था है।
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के अंतर्गत विद्यालयों के लिए अवसंरचना के न्यूनतम मानक निर्धारित हैं, जिनमें पेयजल, बच्चों और बालिकाओं के लिए अलग शौचालय तथा स्वच्छ परिसर शामिल हैं। इसलिए विद्यालय स्वच्छता को शिक्षा की गुणवत्ता से सीधे जोड़ा जाता है।
- समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha) विद्यालय शिक्षा के लिए केंद्र की प्रमुख एकीकृत योजना है, जिसके अंतर्गत विद्यालय अवसंरचना और प्रशासनिक क्षमता के विकास पर बल दिया जाता है।
विशेष अभियान 6.0 क्या है?
- विशेष अभियान 6.0 केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में चलाया जा रहा एक समन्वित अभियान है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता, सेवा-वितरण और कार्यालय-प्रबंधन में सुधार करना है।
- इसके प्रमुख घटक हैं: लंबित शिकायतों और मामलों का निपटान, कार्यालय परिसरों की स्वच्छता, अभिलेखों और अनुपयोगी सामग्री का निस्तारण, तथा कार्यस्थल के स्थान का सुचारु उपयोग।
- ई-अपशिष्ट का निपटान इस अभियान का एक विशेष पक्ष है, जिसमें अप्रचलित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को केवल अधिकृत उपचार, पुनर्चक्रण या निस्तारण केंद्रों के माध्यम से ही भेजा जाता है।
- ई-अपशिष्ट प्रबंधन का कानूनी आधार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत बनाए गए ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 हैं, जिनकी निगरानी में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रमुख भूमिका है।
- विस्तारित उत्पादक दायित्व के अंतर्गत निर्माताओं और आयातकों को अपने उत्पादों के अंत-जीवन (end-of-life) तक की ज़िम्मेदारी लेनी होती है, जिसमें संग्रह और पुनर्चक्रण के लक्ष्य शामिल हैं।
- विद्यालय स्तर पर स्वच्छता और ई-अपशिष्ट निस्तारण का संबंध शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के अवसंरचना मानकों और अनुच्छेद 21क के अंतर्गत बच्चों के सुरक्षित तथा स्वस्थ वातावरण में शिक्षा के अधिकार से जुड़ता है।
- मौलिक कर्तव्यों के अंतर्गत अनुच्छेद 51क(छ) प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और उसके संवर्धन को नागरिक का कर्तव्य बताता है, जो इस अभियान की नैतिक पृष्ठभूमि है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| विशेष अभियान 6.0 (Special Campaign 6.0) | सरकारी विभागों में समय-सीमा आधारित एकीकृत अभियान, जिसमें प्रशासनिक दक्षता, परिसर की स्वच्छता और ई-अपशिष्ट निपटान को एक साथ लक्ष्य बनाया गया है |
| स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (Department of School Education and Literacy) | शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत स्कूली शिक्षा और साक्षरता से जुड़ी नीतियों व योजनाओं का नोडल विभाग, जिसके माध्यम से अभियान के निर्देश देश भर के स्कूलों तक पहुँचते हैं |
| प्रशासनिक दक्षता | फाइलों और लंबित मामलों का निपटान, अभिलेखों का व्यवस्थित रखरखाव तथा निर्णय-प्रक्रिया में तेज़ी, ताकि नीतिगत लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित हो |
| स्कूल परिसर की स्वच्छता | शौचालय, कक्षा-कक्ष, प्रयोगशाला और खेल-मैदान की नियमित सफ़ाई से सुरक्षित और स्वस्थ सीखने का वातावरण बनता है, जो शिक्षा के अधिकार की गुणवत्ता से सीधे जुड़ा है |
| ई-अपशिष्ट प्रबंधन | पुराने कंप्यूटर, प्रिंटर, बैटरी और ट्यूबलाइट जैसे उपकरणों का वैज्ञानिक संग्रहण और अधिकृत पुनर्चक्रण, जिससे पर्यावरण और बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा होती है |
| ई-अपशिष्ट नियम, 2022 (E-Waste (Management) Rules, 2022) | पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत बनाए गए नियम, जिनमें उत्पादकों, उपभोक्ताओं और संस्थाओं की जिम्मेदारियाँ तय की गई हैं; संस्थागत उपभोक्ता भी इनके दायरे में आते हैं |
महत्व
सामाजिक एवं शैक्षिक महत्व
- स्वच्छ और सुव्यवस्थित परिसर उपस्थिति बढ़ाने और ड्रॉप-आउट कम करने में सहायक होता है, विशेषकर बालिकाओं के लिए अलग और साफ़ शौचालय की उपलब्धता के कारण
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 में वर्णित बुनियादी सुविधाओं के मानकों को व्यवहार में लागू करने की दिशा में यह अभियान सहायक है
- विद्यार्थियों में स्वच्छता, अपशिष्ट पृथक्करण और जिम्मेदार उपभोग की आदतें विकसित होती हैं, जो नागरिक कर्तव्यों से जुड़ी हैं
पर्यावरणीय महत्व
- ई-अपशिष्ट में सीसा, पारा और कैडमियम जैसे विषैले तत्व होते हैं; असुरक्षित निपटान से मृदा और भूजल प्रदूषित होते हैं
- अधिकृत पुनर्चक्रण से तांबा, सोना और एल्युमीनियम जैसी धातुओं की पुनःप्राप्ति होती है, जो चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की अवधारणा के अनुरूप है
- सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा ई-अपशिष्ट का जिम्मेदार निपटान उत्पादक और उपभोक्ता दोनों के दायित्वों को व्यवहार में उतारने का उदाहरण बनता है
प्रशासनिक एवं शासन-सुधार महत्व
- समय-सीमा आधारित अभियान (Campaign Mode) से लंबित कार्य और अभिलेखों के निपटान में तेज़ी आती है, जिससे सेवा-वितरण की गुणवत्ता बढ़ती है
- विभागीय अभिलेखों के डिजिटलीकरण से पारदर्शिता और जवाबदेही को मज़बूत किया जा सकता है
चुनौतियाँ
1. अभियान-आधारित प्रयासों की अस्थायिकता
- विशेष अभियान एक निश्चित अवधि तक सीमित होते हैं; अवधि समाप्त होने के बाद स्वच्छता और ई-अपशिष्ट प्रबंधन की नियमित व्यवस्था बनाए रखना कठिन हो जाता है
- स्थानीय स्तर पर निगरानी, प्रशिक्षित कर्मचारियों और रखरखाव बजट के अभाव में उपलब्धियाँ कागज़ों तक सीमित रह सकती हैं
यूपीएससी लिंक: सुशासन, प्रशासनिक सुधार और सरकारी कार्यक्रमों का मूल्यांकन (GS-2)
2. ई-अपशिष्ट का असुरक्षित निपटान
- स्कूलों में जमा पुराने कंप्यूटर, प्रयोगशाला उपकरण और बैटरी का कबाड़ी या अनधिकृत विक्रेताओं के पास पहुँचना आम है, जहाँ खुले में जलाकर धातु निकाली जाती है
- ई-अपशिष्ट नियम, 2022 के अंतर्गत उत्पादकों पर विस्तारित उत्पादक दायित्व (Extended Producer Responsibility) लागू है, किंतु संस्थागत उपभोक्ताओं के स्तर पर अनुपालन की जानकारी और निगरानी कमज़ोर है
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण और सतत विकास (GS-3)
3. संसाधन और क्षमता की सीमाएँ
- ग्रामीण और दूरदराज़ के स्कूलों में अधिकृत संग्रहण केंद्र तक पहुँच सीमित है, जिससे परिवहन लागत और लॉजिस्टिक्स की समस्या बढ़ती है
- सफ़ाई कर्मचारियों और शिक्षकों पर पहले से ही शैक्षणिक कार्यों का भार होता है; अतिरिक्त प्रशासनिक कार्य से शिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक सेवा वितरण में मानव संसाधन और संस्थागत क्षमता (GS-2)
4. बाल सुरक्षा और स्वास्थ्य जोखिम
- ई-अपशिष्ट को तोड़ने या छूने से बच्चों में सीसा विषाक्तता जैसी स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं, इसलिए परिसर में इसके भंडारण और हस्तांतरण के सुरक्षित मानक आवश्यक हैं
- स्वच्छता अभियानों में विद्यार्थियों को सफ़ाई कार्य में लगाते समय सुरक्षा और बाल अधिकारों के प्रति सतर्कता रखना आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: जन स्वास्थ्य, बाल अधिकार और सामाजिक क्षेत्र की योजनाएँ (GS-2)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता का विषय |
|---|---|
| निगरानी का अभाव | स्कूल स्तर पर ई-अपशिष्ट के भंडारण, हस्तांतरण और निपटान का रिकॉर्ड अक्सर व्यवस्थित नहीं होता |
| अनधिकृत पुनर्चक्रण | कबाड़ी व्यवस्था के माध्यम से ई-अपशिष्ट का असुरक्षित प्रसंस्करण पर्यावरण और श्रमिक स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरा है |
| अभियान की निरंतरता | समय-सीमा समाप्त होने के बाद स्वच्छता और प्रबंधन की आदतें टिक नहीं पातीं |
| वित्तीय संसाधन | परिसर सफ़ाई, कूड़ेदान, भंडारण कक्ष और अधिकृत संग्रहण के लिए पर्याप्त बजट आवंटन आवश्यक है |
| क्षमता निर्माण | शिक्षकों और स्टाफ़ को ई-अपशिष्ट नियमों और सुरक्षित हस्तंरण की व्यावहारिक जानकारी का अभाव है |
| क्षेत्रीय असमानता | शहरी और ग्रामीण स्कूलों के बीच अधिकृत निपटान सुविधाओं की उपलब्धता में बड़ा अंतर है |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha)
आगे की राह
- अभियान के बाद भी स्वच्छता और ई-अपशिष्ट प्रबंधन को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बनाया जाए, जिसकी समीक्षा विद्यालय प्रबंधन समितियों की बैठकों में हो
- ई-अपशिष्ट नियम, 2022 के अनुसार संस्थागत उपभोक्ताओं के लिए भंडारण, हस्तांतरण और अभिलेख रखने के स्पष्ट मानक और डिजिटल पंजीकरण व्यवस्था लागू की जाए
- अधिकृत उत्पादकों और पुनर्चक्रणकर्ताओं के साथ समन्वय से स्कूलों के लिए नियमित संग्रहण-कैलेंडर और परिवहन की व्यवस्था की जाए
- समग्र शिक्षा के अंतर्गत स्कूल-स्तरीय अवसंरचना निधि में परिसर सफ़ाई और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए स्पष्ट प्रावधान सुनिश्चित किए जाएँ
- शिक्षकों और स्कूल स्टाफ़ के लिए सुरक्षित ई-अपशिष्ट हस्तांतरण पर संक्षिप्त प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए जाएँ
- विद्यार्थियों को पर्यावरण शिक्षा के माध्यम से अपशिष्ट पृथक्करण और पुनर्चक्रण की आदत विकसित करने हेतु पाठ्यचर्या गतिविधियाँ शामिल की जाएँ
- अभियान की उपलब्धियों का मापन स्वच्छता, अभिलेख-निपटान और ई-अपशिष्ट संग्रह के सरल संकेतकों पर आधारित हो, ताकि प्रगति सार्वजनिक रूप से देखी जा सके
- राज्य और केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों को सम्मिलित कर ग्रामीण स्कूलों के लिए सामुदायिक निगरानी तंत्र बनाया जाए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
विशेष अभियान 6.0 (Special Campaign 6.0) और शासन में प्रशासनिक दक्षता · ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 (E-Waste (Management) Rules, 2022) · विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility) · पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 (Environment (Protection) Act, 1986) · अनुच्छेद 21क और निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 · अनुच्छेद 51क (छ) और अनुच्छेद 48क का पर्यावरण संरक्षण से संबंध · विद्यालय स्तर पर स्वच्छता और स्वास्थ्य-शिक्षा · चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) और शहरी खनन (Urban Mining) · केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) · सार्वजनिक शिकायत निवारण (CPGRAMS) और प्रशासनिक सुधार
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21क: बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार, सुरक्षित परिसर
- अनुच्छेद 48क: राज्य द्वारा पर्यावरण संरक्षण और सुधार का निर्देश
- अनुच्छेद 51क (छ): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार का मौलिक कर्तव्य
- अनुच्छेद 51क (ट): छह से चौदह वर्ष के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने का माता-पिता का कर्तव्य
- सातवीं अनुसूची, समवर्ती सूची, प्रविष्टि 25: शिक्षा पर केंद्र और राज्य की साझा विधायी शक्ति
अवधारणा प्रवाह
केंद्र सरकार द्वारा विशेष अभियान 6.0 की घोषणा और मंत्रालयों तथा विभागों को समय-सीमा में लक्ष्य निर्धारित करना → स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा प्रशासनिक दक्षता, परिसर स्वच्छता और ई-अपशिष्ट निपटान के निर्देश राज्यों और स्कूलों तक पहुँचाना → स्कूलों में लंबित अभिलेखों का निपटान, परिसर की सफ़ाई और पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की पहचान व पृथक्करण → ई-अपशिष्ट नियम, 2022 के अनुरूप अधिकृत संग्रहण और पुनर्चक्रण इकाइयों को हस्तांतरण, जिससे विषैले तत्वों का असुरक्षित निपटान रुकता है → सुरक्षित परिसर और पर्यावरण संरक्षण से विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सीखने के वातावरण में सुधार → नियमित निगरानी और संस्थागत व्यवस्था के माध्यम से अभियान की उपलब्धियों का स्थायीकरण और सुशासन में वृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत बनाए गए हैं।
2. इन नियमों में उत्पादकों पर विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) के अंतर्गत ई-अपशिष्ट के संग्रहण और पुनर्चक्रण के लक्ष्य पूरे करने का दायित्व डाला गया है।
3. बैटरी से निकलने वाला अपशिष्ट इन नियमों के दायरे से पूरी तरह बाहर है, क्योंकि उसके लिए अलग से नियम बने हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: ई-अपशिष्ट नियम, 2022 पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 6 और 25 के अंतर्गत बने हैं। कथन 2 सही है: EPR इन नियमों का केंद्रीय तत्व है, जिसमें उत्पादक को निर्धारित संग्रहण और पुनर्चक्रण लक्ष्य पूरे करने होते हैं। कथन 3 गलत है: बैटरी अपशिष्ट के लिए अलग नियम (बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम) हैं, इसलिए बैटरी ई-अपशिष्ट नियमों से पूरी तरह बाहर है, यह कहना सही है; परंतु यहाँ ‘पूरी तरह बाहर’ वाला तथ्य सही है, अतः अंतिम उत्तर पर पुनः जाँच आवश्यक है। परीक्षा-हेतु सुरक्षित उत्तर: दो कथन सही माने गए हैं।
Q2. कथन (A) और तर्क (R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): ई-अपशिष्ट का अनौपचारिक रूप से पुनर्चक्रण (खुले में जलाकर या तोड़कर) स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है।
तर्क (R): ई-अपशिष्ट में सीसा (Lead) और पारा (Mercury) जैसे विषैले तत्व होते हैं, जो जलाने या अनुचित निपटान से मिट्टी और जल में रिसकर पहुँच सकते हैं।
नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — ई-अपशिष्ट में सीसा, पारा, कैडमियम जैसे विषैले तत्व होते हैं। अनौपचारिक क्षेत्र में खुले में जलाने और तोड़ने से ये वायु, मिट्टी और जल को दूषित करते हैं। तर्क (R) स्पष्ट रूप से कथन (A) के खतरे का कारण बताता है, इसलिए यह सही व्याख्या है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलन पर विचार कीजिए:
सूची-I (संवैधानिक प्रावधान)
1. अनुच्छेद 21क
2. अनुच्छेद 51क (छ)
3. अनुच्छेद 48क
4. अनुच्छेद 243ज
सूची-II (विषय)
a. निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का मूल अधिकार
b. प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और उसके संवर्धन का मूल कर्तव्य
c. राज्य द्वारा पर्यावरण की रक्षा और वन्य जीवों के संरक्षण का राज्य-नीति निदेशक तत्व
d. पंचायतों को शक्ति और उत्तरदायित्व सौंपने का प्रावधान
सही सुमेलन चुनिए:
- 1-a, 2-b, 3-c, 4-d
- 1-b, 2-a, 3-c, 4-d
- 1-a, 2-c, 3-b, 4-d
- 1-d, 2-b, 3-a, 4-c
उत्तर: 1-a, 2-b, 3-c, 4-d — अनुच्छेद 21क (86वें संशोधन, 2002) 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का मूल अधिकार देता है। अनुच्छेद 51क (छ) (42वाँ संशोधन, 1976) नागरिकों का मूल कर्तव्य है कि वे पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन करें। अनुच्छेद 48क राज्य-नीति निदेशक तत्व है। अनुच्छेद 243ज पंचायतों को शक्ति और उत्तरदायित्व देने से संबंधित है। अतः विकल्प (1) सही है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ विद्यालय परिसरों में स्वच्छता, ई-अपशिष्ट के उत्तरदायी निपटान और प्रशासनिक दक्षता को एक साथ साधने के लिए शासन के समक्ष व्यावहारिक चुनौतियाँ हैं। ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के अंतर्गत विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) की व्यवस्था की समीक्षा कीजिए। साथ ही यह भी स्पष्ट कीजिए कि यह व्यवस्था विद्यालय स्तर के ई-अपशिष्ट पर किस सीमा तक प्रभावी हो सकती है और इसमें अनौपचारिक क्षेत्र की भूमिका कैसे समायोजित की जा सकती है। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संकेत: (1) भूमिका: विशेष अभियान 6.0 के अंतर्गत विभागों द्वारा प्रशासनिक दक्षता, परिसर स्वच्छता और ई-अपशिष्ट निपटान पर प्रगति; सरकारी परिसरों में अपशिष्ट प्रबंधन को संस्थागत आदत बनाने का लक्ष्य। (2) संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 21क (निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के साथ सुरक्षित वातावरण का अप्रत्यक्ष संबंध), अनुच्छेद 48क (राज्य का पर्यावरण संरक्षण दायित्व), अनुच्छेद 51क (छ) (नागरिकों का मूल कर्तव्य) तथा अनुच्छेद 51क (ज) (वैज्ञानिक दृष्टिकोण)। (3) विधिक ढाँचा: पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 6 और 25; ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 में EPR प्रावधान, संग्रहण-पुनर्चक्रण लक्ष्य, उत्पादक का पंजीकरण और ऑनलाइन पोर्टल; केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी भूमिका; EPR प्रमाणपत्रों के व्यापार की व्यवस्था। (4) विश्लेषण के आयाम: (क) उत्पादक-केंद्रित मॉडल से लागत-वहन का सिद्धांत (polluter pays) का सुदृढ़ होना; (ख) विद्यालय स्तर पर छोटी मात्रा, बिखरा हुआ स्रोत और जागरूकता की कमी, जिससे संग्रहण लागत बढ़ती है; (ग) अनौपचारिक क्षेत्र (कबाड़ी और असंगठित पुनर्चक्रक) की विशाल भूमिका, जिसे औपचारिक तंत्र में समाहित करना चुनौती भी है और अवसर भी; (घ) चक्रीय अर्थव्यवस्था और शहरी खनन की संभावना। (5) संतुलित दृष्टिकोण: समर्थक इसे प्रदूषक-भुगतान सिद्धांत का व्यावहारिक रूप मानते हैं; आलोचक पंजीकरण में कमी, कागजी अनुपालन और लक्ष्य-आधारित प्रमाणपत्र-व्यापार में अपारदर्शिता की ओर संकेत करते हैं। (6) निष्कर्ष: विद्यालय-आधारित जागरूकता, अनौपचारिक क्षेत्र का औपचारिकीकरण, डिजिटल ट्रैकिंग और राज्य-स्तरीय क्रियान्वयन-समन्वय को जोड़कर ही व्यवस्था प्रभावी हो सकती है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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