किसानों के लिए पेंशन या जीवन बीमा: आईएटी की कर्नाटक सरकार को सिफारिश

किसानों के लिए पेंशन या जीवन बीमा: आईएटी की कर्नाटक सरकार को सिफारिश

किसानों के लिए पेंशन या जीवन बीमा: आईएटी की कर्नाटक सरकार को सिफारिश

किसानों के लिए सामाजिक सुरक्षा उपायसूखे/कृषि संकटफसल नुकसानआय में अस्थिरताआर्थिक संकटपेंशन/जीवन बीमासामाजिक सुरक्षाकृषि लचीलापनस्थिरताग्रामीण अर्थव्यवस्थासुदृढ़ीकरण
किसानों के लिए सामाजिक सुरक्षा उपाय

✎ किसानों को सूखे जैसे संकटों से बचाने और कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक लचीलापन लाने के लिए किसान पेंशन या जीवन बीमा योजनाओं के साथ-साथ एक एकीकृत सूखा लचीलापन मिशन की आवश्यकता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भारत एवं विश्व का भौतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल)  |  GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके डिजाइन तथा कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय; आपदा प्रबंधन
  • Prelims: कृषक पेंशन योजना, कृषक जीवन बीमा योजना, सूखा लचीलापन मिशन, फसल बीमा, FRUITS डेटा, जल बजटिंग, वाटरशेड विकास, ग्राम पंचायत
  • Essay: भारत में कृषि संकट: कारण, परिणाम और समाधान, जलवायु परिवर्तन और भारतीय कृषि: चुनौतियाँ एवं अवसर

त्वरित पुनरावृत्ति: किसानों को सूखे जैसे संकटों से बचाने और कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक लचीलापन लाने के लिए किसान पेंशन या जीवन बीमा योजनाओं के साथ-साथ एक एकीकृत सूखा लचीलापन मिशन की आवश्यकता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

इंस्टीट्यूशन ऑफ एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजिस्ट्स (IAT) ने कर्नाटक सरकार को किसानों को सूखे जैसे संकटों से बचाने के लिए किसान पेंशन योजना या किसान जीवन बीमा योजना शुरू करने की सिफारिश की है। IAT ने सूखे के प्रभाव को कम करने के लिए तत्काल और दीर्घकालिक दोनों उपायों का सुझाव दिया है, जिसमें एक समर्पित कर्नाटक सूखा लचीलापन मिशन (Karnataka Drought Resilience Mission) की स्थापना भी शामिल है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में कृषि क्षेत्र मानसून पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे सूखे की स्थिति में किसानों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ता है।
  • लघु और सीमांत किसान विशेष रूप से सूखे और अन्य कृषि संबंधी आपदाओं के प्रति संवेदनशील होते हैं, क्योंकि उनके पास जोखिमों से निपटने के लिए सीमित संसाधन होते हैं।
  • वर्तमान में, फसल बीमा योजनाएँ (Crop Insurance Schemes) मौजूद हैं, लेकिन IAT ने किसानों के लिए एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा जाल की आवश्यकता पर बल दिया है, जिसमें पेंशन या जीवन बीमा शामिल हो।
  • जलवायु परिवर्तन के कारण सूखे की घटनाओं और तीव्रता में वृद्धि हुई है, जिससे कृषि नीतियों में ‘सूखा प्रतिक्रिया’ से ‘सूखा लचीलापन’ की ओर बदलाव की आवश्यकता है।
  • किसानों की आय सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को सुनिश्चित करना सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) का एक महत्वपूर्ण घटक है।
  • किसानों की वृद्धावस्था सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, क्योंकि कृषि क्षेत्र में औपचारिक पेंशन योजनाओं का अभाव है।

किसानों के लिए प्रस्तावित पेंशन/जीवन बीमा योजनाएँ और सूखा लचीलापन उपाय

  • किसान पेंशन योजना: यह योजना 65 वर्ष से अधिक आयु के लघु और सीमांत किसानों को नियमित आय सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव करती है, जिससे उनकी वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
  • किसान जीवन बीमा योजना: यह फसल बीमा (Crop Insurance) की तर्ज पर किसानों को जीवन बीमा कवर प्रदान करने का सुझाव देती है, जिससे किसी भी अप्रत्याशित घटना की स्थिति में उनके परिवारों को वित्तीय सहायता मिल सके।
  • कर्नाटक सूखा लचीलापन मिशन: यह कृषि, बागवानी, वाटरशेड विकास, पशुपालन, ग्रामीण विकास और जल संसाधन जैसे विभिन्न विभागों को एकीकृत करके सूखे से निपटने के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण अपनाएगा।
  • फसल हानि मूल्यांकन और मुआवजा: जियो-रेफरेंस्ड, उपग्रह-समर्थित FRUITS (Farmer Registration and Unified beneficiary Information System) डेटा और जमीनी मूल्यांकन के आधार पर फसल नुकसान का त्वरित आकलन और पात्र किसानों को शीघ्र मुआवजा प्रदान करने पर जोर दिया गया है।
  • जल सुरक्षा पर ध्यान: सूखा-प्रवण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत स्तर पर अनिवार्य जल बजटिंग (Water Budgeting) और बांध, खेत तालाब, चेक डैम, रिचार्ज पिट जैसे जल संरक्षण गतिविधियों को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
किसानों के लिए पेंशन/जीवन बीमा किसानों को सूखे जैसी आपदाओं के दौरान आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना और उनकी आजीविका को स्थिर करना।
कर्नाटक सूखा लचीलापन मिशन (Karnataka Drought Resilience Mission) कृषि नीतियों को सूखा प्रतिक्रिया से सूखा लचीलेपन की ओर स्थानांतरित करना, विभिन्न विभागों को एकीकृत करके समन्वित प्रयास सुनिश्चित करना।
ग्राम पंचायत स्तर पर अनिवार्य जल बजटिंग सूखा-प्रवण क्षेत्रों में जल सुरक्षा सुनिश्चित करना, जल संसाधनों का कुशल प्रबंधन और संरक्षण।
भू-संदर्भित, उपग्रह-समर्थित FRUITS डेटा का उपयोग फसल हानि आकलन और मुआवजे के भुगतान की प्रक्रिया को तेज और सटीक बनाना।
तालुक-स्तरीय सूखा रिकवरी फंड जमीनी स्तर पर त्वरित हस्तक्षेप और राहत कार्यों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • किसानों की आय स्थिरता सुनिश्चित करके कृषि क्षेत्र को मजबूत करना, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
  • सूखे के कारण होने वाले फसल नुकसान और आर्थिक संकट को कम करके कृषि उत्पादन में निरंतरता बनाए रखना।

सामाजिक महत्व

  • वृद्ध और सीमांत किसानों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना, जिससे उनकी गरिमापूर्ण आजीविका सुनिश्चित हो सके।
  • किसानों के बीच तनाव और आत्महत्याओं को कम करने में मदद करना, जिससे ग्रामीण समुदायों का कल्याण होगा।

शासन और नीतिगत महत्व

  • आपदा प्रबंधन नीतियों को प्रतिक्रिया-आधारित से लचीलापन-आधारित दृष्टिकोण में बदलना।
  • विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थानों के बीच समन्वय और एकीकरण को बढ़ावा देना, जिससे नीतियों का प्रभावी कार्यान्वयन हो सके।

पर्यावरणीय महत्व

  • जल बजटिंग और टैंक कायाकल्प जैसे उपायों के माध्यम से जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और संरक्षण।
  • सूखा-प्रवण क्षेत्रों में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद करना।

चुनौतियाँ

1. वित्तीय व्यवहार्यता

  • किसानों के लिए पेंशन या जीवन बीमा योजनाओं के लिए आवश्यक बड़े पैमाने पर वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • राज्य और केंद्र सरकारों के बीच वित्तीय बोझ के वितरण का निर्धारण।

2. डेटा संग्रह और सत्यापन

  • पात्र किसानों की पहचान और उनके डेटा का सटीक संग्रह, विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए।
  • फसल हानि आकलन और बीमा दावों के सत्यापन में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करना।

3. अंतर-विभागीय समन्वय

  • विभिन्न विभागों (कृषि, बागवानी, जल संसाधन आदि) के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना, जो अक्सर नौकरशाही बाधाओं के कारण चुनौतीपूर्ण होता है।
  • राज्यों और स्थानीय निकायों के बीच सहयोग सुनिश्चित करना।

4. योजना का कार्यान्वयन

  • जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त मानव संसाधन और तकनीकी विशेषज्ञता की कमी।
  • किसानों के बीच जागरूकता और योजनाओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
किसानों की आय सुरक्षा सूखे और अन्य कृषि आपदाओं के कारण किसानों की आय में अस्थिरता, जिससे ऋणग्रस्तता और संकट बढ़ता है।
जल संसाधनों का प्रबंधन सूखा-प्रवण क्षेत्रों में जल की कमी और इसके कुशल प्रबंधन की आवश्यकता, भूजल स्तर में गिरावट।
कृषि नीति का दृष्टिकोण आपदा के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय आपदा से पहले लचीलापन बनाने पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता।
छोटे और सीमांत किसानों की भेद्यता राज्य के कुल किसानों में से 20% से अधिक 65 वर्ष से अधिक आयु के छोटे और सीमांत किसानों की विशेष भेद्यता।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana)
  • प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (Pradhan Mantri Kisan Maan-Dhan Yojana)

आगे की राह

  • किसानों के लिए एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा तंत्र विकसित करना, जिसमें पेंशन और जीवन बीमा योजनाएं शामिल हों, जिन्हें फसल बीमा के साथ एकीकृत किया जा सके।
  • एक समर्पित ‘सूखा लचीलापन मिशन’ की स्थापना करना, जिसमें कृषि, जल संसाधन, पशुपालन और ग्रामीण विकास जैसे विभिन्न विभागों को एकीकृत किया जाए।
  • ग्राम पंचायत स्तर पर अनिवार्य जल बजटिंग और जल संरक्षण गतिविधियों (जैसे बांध, खेत तालाब, चेक डैम) को बढ़ावा देना।
  • फसल हानि आकलन और मुआवजे के भुगतान के लिए भू-संदर्भित, उपग्रह-समर्थित डेटा (जैसे FRUITS) और रिमोट सेंसिंग तकनीकों का उपयोग करके प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना।
  • तालुक-स्तरीय सूखा रिकवरी फंड और रबी आकस्मिक योजनाओं का निर्माण करना, ताकि जमीनी स्तर पर त्वरित हस्तक्षेप सुनिश्चित हो सके।
  • किसानों को जलवायु-लचीली फसल किस्मों और कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करना।
  • किसानों के लिए ऋण उपलब्धता और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना, ताकि वे एक फसल पर अत्यधिक निर्भर न रहें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

कृषि संकट · सूखा लचीलापन · किसान पेंशन योजना · किसान जीवन बीमा · फसल बीमा · जल सुरक्षा · वाटरशेड विकास · आपदा प्रबंधन · जलवायु परिवर्तन अनुकूलन · कृषि नीति · ग्रामीण विकास · भू-संदर्भित डेटा

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 246: संघ, राज्य और समवर्ती सूचियों के तहत कृषि और जल राज्य सूची के विषय हैं।
  • अनुच्छेद 282: केंद्र और राज्यों द्वारा सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए व्यय करने की शक्ति।
  • अनुच्छेद 301: भारत के राज्यक्षेत्र में व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता।

अवधारणा प्रवाह

सूखा/कृषि संकट  →  किसानों की आय में अस्थिरता/आर्थिक संकट  →  पेंशन/जीवन बीमा की सिफारिश  →  किसानों को सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा  →  कृषि क्षेत्र में लचीलापन और स्थिरता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) का उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाना है।
2. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) किसानों को फसल खराब होने की स्थिति में वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
3. IAT (Institution of Agricultural Technologists) एक नीतिगत वकालत निकाय है जो कृषि विशेषज्ञों से बना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। कथन 2 सही है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों के कारण फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। कथन 3 सही है। IAT (Institution of Agricultural Technologists) कृषि विशेषज्ञों का एक नीतिगत वकालत निकाय है, जैसा कि समाचार में उल्लेख किया गया है।

Q2. कथन (A): सूखे जैसी आपदाओं से किसानों को बचाने के लिए पेंशन या जीवन बीमा कवर की सिफारिश की गई है।
कारण (R): भारत में कृषि क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है और किसानों को अक्सर आय अस्थिरता का सामना करना पड़ता है।

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — कथन (A) सही है, क्योंकि IAT ने किसानों को सूखे जैसी आपदाओं से बचाने के लिए पेंशन या जीवन बीमा कवर की सिफारिश की है। कारण (R) भी सही है, क्योंकि भारतीय कृषि जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है और यह किसानों की आय में अस्थिरता का एक प्रमुख कारण है। कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है, क्योंकि ये उपाय कृषि क्षेत्र की संवेदनशीलता और किसानों की आय अस्थिरता को दूर करने के लिए सुझाए गए हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में कृषि क्षेत्र को सूखे और अन्य जलवायु संबंधी आपदाओं के प्रति अधिक लचीला बनाने के लिए संस्थागत और नीतिगत उपायों पर चर्चा कीजिए। इस संदर्भ में, किसानों के लिए पेंशन या जीवन बीमा योजनाओं की प्रासंगिकता का भी मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत में कृषि क्षेत्र की जलवायु संवेदनशीलता और सूखे के बढ़ते प्रभाव का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **संस्थागत उपाय:**
* **कर्नाटक सूखा लचीलापन मिशन (Karnataka Drought Resilience Mission) जैसे एकीकृत मिशन:** विभिन्न विभागों (कृषि, बागवानी, पशुपालन, जल संसाधन) और संस्थानों (IMD, कृषि विश्वविद्यालय) को एक साथ लाना।
* **ग्राम पंचायत स्तर पर जल बजटिंग:** सूखे-प्रवण क्षेत्रों में जल संसाधनों के प्रबंधन के लिए अनिवार्य जल बजटिंग।
* **तालुक-स्तरीय सूखा रिकवरी फंड:** जमीनी स्तर पर त्वरित हस्तक्षेप के लिए।
* **FRUITS (Farmer Registration and Unified beneficiary Information System) जैसे डेटा का उपयोग:** फसल हानि आकलन और मुआवजे के वितरण को गति देना।
* **टैंक कायाकल्प कार्यक्रम और वाटरशेड विकास:** जल संचयन और भूजल पुनर्भरण के लिए।
3. **नीतिगत उपाय:**
* **प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY):** दावों के त्वरित निपटान और रिमोट सेंसिंग जैसी तकनीकों का उपयोग।
* **तालुक-विशिष्ट रबी आकस्मिक योजनाएं:** स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फसल पैटर्न और कृषि पद्धतियों का अनुकूलन।
* **कृषि नीतियों में बदलाव:** सूखा प्रतिक्रिया से सूखा लचीलापन दृष्टिकोण की ओर।
4. **पेंशन या जीवन बीमा योजनाओं की प्रासंगिकता:**
* **किसानों को वित्तीय सुरक्षा:** विशेषकर वृद्ध और सीमांत किसानों को आय सुरक्षा प्रदान करना।
* **जोखिम प्रबंधन:** फसल बीमा के समान, जीवन बीमा किसानों को अप्रत्याशित घटनाओं से होने वाले वित्तीय झटकों से बचा सकता है।
* **सामाजिक सुरक्षा जाल:** कृषि संकट के दौरान किसानों के कल्याण को सुनिश्चित करना।
* **चुनौतियां:** इन योजनाओं के कार्यान्वयन में वित्तीय व्यवहार्यता, कवरेज और जागरूकता संबंधी चुनौतियां।
5. **निष्कर्ष:** कृषि लचीलेपन के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता, जिसमें संस्थागत सुधार, नीतिगत हस्तक्षेप और सामाजिक सुरक्षा उपाय शामिल हों।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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