08 Nov आईएमएफ: एआई निवेश में कमी का ब्याज दरों पर प्रभाव
✎ AI-आधारित निवेश मुद्रास्फीति को बढ़ाकर और वित्तीय जोखिम जोड़कर भी आर्थिक संवृद्धि को सहारा देता है, इसलिए केंद्रीय बैंकों को ब्याज दर तय करते समय मुद्रास्फीति के साथ इस संवृद्धि-जोखिम को भी संतुलित करना होता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था (मौद्रिक नीति, मुद्रास्फीति, वित्तीय स्थिरता, पूंजी प्रवाह) | GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ (अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की भूमिका और उसके प्रकाशन)
- Prelims: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और उसका मुख्यालय (वाशिंगटन, डी.सी.), विश्व आर्थिक परिदृश्य (World Economic Outlook) रिपोर्ट का प्रकाशन और उसकी आवृत्ति, वैश्विक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Global Financial Stability Report), आपूर्ति आघात (Supply Shock) और माँग आघात (Demand Shock) में अंतर, स्टैगफ्लेशन (Stagflation) की अवधारणा, म्यूचुअल फंड में मनी मार्केट फंड और उनका सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर प्रवाह, ब्रेटन वुड्स प्रणाली (Bretton Woods System) और 1944 का सम्मेलन, भारत में मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण: 4 प्रतिशत लक्ष्य, ±2 प्रतिशत सहनशीलता सीमा
- Essay: विकास का इंजन या वित्तीय जोखिम? तकनीकी निवेश और वैश्विक आर्थिक स्थिरता, केंद्रीय बैंक, परिसंपत्ति बाज़ार और मूल्य स्थिरता के बीच संतुलन
त्वरित पुनरावृत्ति: AI-आधारित निवेश मुद्रास्फीति को बढ़ाकर और वित्तीय जोखिम जोड़कर भी आर्थिक संवृद्धि को सहारा देता है, इसलिए केंद्रीय बैंकों को ब्याज दर तय करते समय मुद्रास्फीति के साथ इस संवृद्धि-जोखिम को भी संतुलित करना होता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने 6 नवंबर को वाशिंगटन में कहा कि केंद्रीय बैंकों को मुद्रास्फीति नियंत्रित करने के अगले कदम तय करते समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से उत्पन्न आर्थिक संवृद्धि की संभावित सुस्ती के जोखिम पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने बताया कि AI में निवेश से वृद्धि को गति मिली है और मध्य-पूर्व संघर्ष से जुड़े तेल आपूर्ति आघात का कुछ प्रभाव इसी से संतुलित हुआ है, लेकिन यही निवेश मुद्रास्फीति के दबाव और वित्तीय स्थिरता की चिंताएँ भी बढ़ा रहा है। IMF की अक्टूबर 2026 की विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट में AI से जुड़े निवेश और परिसंपत्ति मूल्यांकन में बड़े समायोजन की सबसे खराब स्थिति का अनुमान लगाया गया है, जिसके अनुसार वर्ष 2028 तक वैश्विक उत्पादन आधार-रेखा अनुमान से 1.1 प्रतिशत कम हो सकता है। इसलिए IMF AI से जुड़े जोखिम को केवल तकनीकी शेयरों का मामला नहीं, बल्कि एक समष्टि-आर्थिक (Macroeconomic) मुद्दा मान रहा है।
पृष्ठभूमि
- विश्व आर्थिक परिदृश्य (World Economic Outlook) रिपोर्ट IMF वर्ष में दो बार, सामान्यतः अप्रैल और अक्टूबर में, जारी करता है। इसमें वैश्विक वृद्धि के आधार-रेखा अनुमान के साथ जोखिम-परिदृश्य (Risk Scenario) भी दिए जाते हैं, जो केवल अनुमान होते हैं, निश्चित भविष्यवाणी नहीं।
- AI से जुड़ा निवेश डेटा केंद्रों, अर्धचालक चिप्स (Semiconductor Chips), ऊर्जा और पूंजी-उपकरणों की माँग बढ़ाता है, जिससे संबंधित उद्योगों में रोज़गार और निवेश बढ़ता है। यदि कंपनियाँ अपेक्षित लाभ न मिलने पर अपनी योजनाएँ घटाती हैं, तो यह वृद्धि-योगदान घटता है और परिसंपत्ति कीमतों पर दबाव पड़ता है।
- आपूर्ति आघात वह स्थिति है जिसमें उत्पादन लागत अचानक बढ़ जाती है, जैसे तेल आपूर्ति में बाधा। ऐसे आघात में मुद्रास्फीति और आर्थिक संवृद्धि में मंदी साथ-साथ आ सकती है, जिसे स्टैगफ्लेशन कहते हैं।
- वैश्विक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के अनुसार कई AI कंपनियों ने बड़ी मात्रा में ऋण लिया है और उनके निवेश व सेवा-आपूर्ति संबंध एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। किसी एक परियोजना के राजस्व लक्ष्य से चूकने पर यह जोखिम निवेशकों और ऋण प्रवाह तक फैल सकता है।
- अमेरिका में अनिश्चितता के समय निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर जाते हैं। LSEG Lipper के आँकड़ों के अनुसार 4 नवंबर को समाप्त सप्ताह में अमेरिकी मनी मार्केट फंडों में 117.97 अरब डॉलर का शुद्ध प्रवाह दर्ज हुआ, जो छह महीने का उच्चतम स्तर था। फिर भी इसी सप्ताह जोखिम-युक्त परिसंपत्तियों से व्यापक पलायन नहीं दिखा, क्योंकि इक्विटी फंडों में शुद्ध प्रवाह बना रहा।
AI निवेश, मुद्रास्फीति और ब्याज दर नीति का संबंध क्या है?
- केंद्रीय बैंक ब्याज दरों के माध्यम से मुद्रास्फीति और आर्थिक संवृद्धि दोनों को प्रभावित करते हैं। ब्याज दर बढ़ाने से माँग घटती है और मुद्रास्फीति नियंत्रित होती है, परंतु निवेश और रोज़गार पर भी इसका असर पड़ता है।
- AI निवेश की तेज़ी माँग बढ़ाकर मुद्रास्फीति पर दबाव डालती है, जबकि उसका अचानक मंदा पड़ना वृद्धि को धीमा कर सकता है। इसलिए केंद्रीय बैंकों के सामने दोनों दिशाओं के जोखिम एक साथ होते हैं।
- परिसंपत्ति मूल्यांकन (Asset Valuation) से तात्पर्य किसी परिसंपत्ति की बाज़ार में आँकी गई कीमत से है। जब अपेक्षाओं पर आधारित मूल्यांकन वास्तविक लाभ से अधिक हो जाते हैं, तो बाज़ार में सुधार (Correction) की संभावना बढ़ जाती है।
- वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) का अर्थ है कि वित्तीय प्रणाली झटके सह सके और ऋण व भुगतान की व्यवस्था सामान्य रहे। ऋण-आधारित निवेश में विफलता बैंकों और निवेश-कोषों के माध्यम से फैल सकती है।
- सुरक्षित परिसंपत्ति की ओर पलायन (Flight to Safety) तब होता है जब निवेशक जोखिम से बचकर सरकारी बॉण्ड या मनी मार्केट फंड जैसे विकल्पों को चुनते हैं। इससे जोखिम-युक्त बाज़ार में पूंजी की कमी हो सकती है।
- मुद्रा नीति का पारेषण (Monetary Policy Transmission) वह प्रक्रिया है जिसमें नीतिगत दर में बदलाव बैंक ऋण दरों, परिसंपत्ति कीमतों और अंततः माँग तक पहुँचता है। इसमें समय लगता है, इसलिए केंद्रीय बैंक आँकड़ों के साथ भविष्य के जोखिमों पर भी ध्यान देते हैं।
- भारत में RBI अधिनियम, 1934 के तहत मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) रेपो दर तय करती है। सरकार द्वारा तय 4 प्रतिशत मुद्रास्फीति लक्ष्य के साथ ±2 प्रतिशत की सहनशीलता सीमा लागू है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्त्व |
|---|---|
| कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) में निवेश | डेटा केंद्र, सेमीकंडक्टर चिप और ऊर्जा की माँग बढ़ाकर निवेश और रोज़गार को गति देता है |
| मुद्रास्फीति (Inflation) पर दबाव | बड़े पैमाने का निवेश माँग बढ़ाता है, जिससे मूल्य-स्थिरता के लिए जोखिम पैदा होता है |
| तेल आपूर्ति झटका | मध्य पूर्व संघर्ष से उत्पन्न झटके के प्रभाव को AI निवेश से होने वाली वृद्धि कुछ हद तक संतुलित कर रहा है |
| परिसंपत्ति मूल्यांकन (Asset Valuation) | ऊँचे मूल्यांकन निवेशक भावना को प्रभावित करते हैं; इनमें समायोजन से बाज़ार में अस्थिरता आ सकती है |
| IMF विश्व आर्थिक दृष्टिकोण (World Economic Outlook), अक्टूबर 2026 | सबसे बुरी स्थिति के परिदृश्य में वर्ष 2028 तक वैश्विक उत्पादन आधार-रेखा से 1.1% कम हो सकता है; यह केवल जोखिम-अनुकरण है, पूर्वानुमान नहीं |
| सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर प्रवाह | सप्ताह ending 4 नवंबर 2026 में अमेरिकी मनी मार्केट फंडों में 117.97 अरब डॉलर का शुद्ध अंतर्प्रवाह हुआ, जो छह माह का उच्चतम स्तर है |
महत्व
आर्थिक (Economic)
- AI निवेश डेटा केंद्र, चिप और अवसंरचना की माँग के माध्यम से पूँजी, उपकरण और ऊर्जा उद्योगों में वृद्धि उत्पन्न करता है
- यह कुछ अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि को सहारा दे रहा है और तेल आपूर्ति झटके के नकारात्मक प्रभाव को आंशिक रूप से ऑफसेट कर रहा है
- यदि कंपनियाँ लाभ-अपेक्षाओं के कमज़ोर होने पर योजनाएँ घटाती हैं, तो यही वृद्धि-योगदान घट सकता है
मौद्रिक नीति (Monetary Policy)
- केंद्रीय बैंकों को ब्याज दर तय करते समय वृद्धि-जोखिम और मुद्रास्फीति-नियंत्रण, दोनों को साथ देखना पड़ता है
- IMF प्रमुख के अनुसार निवेश-प्रेरित वृद्धि में गिरावट को अगले नीतिगत कदम के आकलन में शामिल करना आवश्यक है
- बाज़ार की अस्थिरता जारी रहने पर मूल्य-स्थिरता बनाए रखना केंद्रीय बैंकों के लिए अधिक जटिल हो जाता है
वित्तीय स्थिरता (Financial Stability)
- कई AI कंपनियों को बड़े ऋण जुटाने पड़ते हैं और उनके निवेश व सेवा आपूर्ति संबंध एक-दूसरे से गुँथे हुए हैं
- परियोजनाएँ राजस्व-लक्ष्य पूरे न करें तो निवेशकों और ऋण-प्रवाह पर शृंखलाबद्ध प्रभाव पड़ सकता है
- IMF इसे केवल प्रौद्योगिकी शेयरों की कहानी नहीं, बल्कि समष्टि-आर्थिक (Macroeconomic) मुद्दा मानता है
अंतरराष्ट्रीय (International)
- IMF जैसी बहुपक्षीय संस्थाएँ सदस्य देशों की आर्थिक निगरानी के माध्यम से ऐसे वैश्विक जोखिमों को रेखांकित करती हैं
- सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर बढ़ता प्रवाह दर्शाता है कि वैश्विक पूँजी बाज़ार नीतिगत और आर्थिक अनिश्चितता के प्रति संवेदनशील है
चुनौतियाँ
1. वृद्धि और मुद्रास्फीति के बीच दुविधा
- AI निवेश वृद्धि को सहारा देता है, पर उसी से माँग बढ़ने के कारण मूल्य-दबाव भी बनता है
- ऐसे में ब्याज दर में कटौती या वृद्धि, दोनों के जोखिम मौजूद रहते हैं
यूपीएससी लिंक: GS III: मुद्रास्फीति, मौद्रिक नीति और वृद्धि का संबंध
2. परिसंपत्ति मूल्य समायोजन का जोखिम
- ऊँचे परिसंपत्ति मूल्यांकन और निवेशक भावना में अचानक बदलाव से बाज़ार में तेज़ उतार-चढ़ाव आ सकता है
- मूल्य समायोजन वित्तीय स्थितियों को कड़ा कर सकता है, जिससे वास्तविक अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है
यूपीएससी लिंक: GS III: पूँजी बाज़ार, वित्तीय स्थिरता
3. ऋण-निर्भरता और अंतर्संबंधित जोखिम
- AI कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर ऋण लेने से परियोजना-विफलता की स्थिति में ऋण-चक्र प्रभावित हो सकता है
- निवेश और सेवा आपूर्ति के आपसी संबंध किसी एक कड़ी के कमज़ोर होने पर पूरे तंत्र में प्रभाव फैला सकते हैं
यूपीएससी लिंक: GS III: वित्तीय क्षेत्र, प्रणालीगत जोखिम
4. ऊर्जा और अवसंरचना की बढ़ती माँग
- डेटा केंद्रों और चिप निर्माण के विस्तार से ऊर्जा और पूँजी-उपकरणों की माँग तेज़ी से बढ़ती है
- इससे आपूर्ति-पक्ष की बाधाएँ और लागत-दबाव उत्पन्न हो सकते हैं
यूपीएससी लिंक: GS III: ऊर्जा सुरक्षा, अवसंरचना विकास
5. वैश्विक संकटों का एक साथ प्रभाव
- AI निवेश से जुड़े जोखिम मध्य पूर्व संघर्ष से उपजे तेल आपूर्ति झटके के साथ एक साथ काम कर सकते हैं
- एक साथ आने वाले झटकों से नीति-निर्माताओं के लिए विकल्प सीमित हो जाते हैं
यूपीएससी लिंक: GS II: अंतरराष्ट्रीय संबंध, GS III: वैश्विक आर्थिक झटके
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| मौद्रिक नीति की दिशा | ब्याज दर का निर्णय वृद्धि-जोखिम और मुद्रास्फीति-जोखिम के बीच संतुलन की माँग करता है |
| बाज़ार अस्थिरता | निवेश में कमी की आशंका से परिसंपत्ति कीमतें गिर सकती हैं और वित्तीय स्थितियाँ कड़ी हो सकती हैं |
| ऋण-आधारित निवेश | AI कंपनियों की ऋण-निर्भरता और आपसी संबंध प्रणालीगत जोखिम बढ़ाते हैं |
| परिदृश्य-आधारित अनुमान | IMF का सबसे बुरा परिदृश्य केवल सिमुलेशन है; वास्तविक परिणाम भिन्न हो सकते हैं, इसलिए इसे निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए |
| सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर पलायन | जोखिम-विमुखता बढ़ने से पूँजी प्रवाह की दिशा अचानक बदल सकती है |
आगे की राह
- केंद्रीय बैंकों को ब्याज दर निर्णयों में वृद्धि-जोखिम और मुद्रास्फीति-जोखिम, दोनों का समेकित आकलन करना चाहिए
- AI-संबद्ध ऋण, निवेश प्रतिबद्धताओं और अंतर्संबंधों की निगरानी के लिए वित्तीय स्थिरता विश्लेषण को सुदृढ़ करना चाहिए
- प्रमुख वित्तीय संस्थानों और निवेशकों के लिए तनाव परीक्षण (Stress Testing) में AI-आधारित परिसंपत्ति समायोजन के परिदृश्य शामिल करने चाहिए
- AI कंपनियों की ऋण-स्थिति और निवेश जोखिम से जुड़ी जानकारी के प्रकटीकरण (Disclosure) में पारदर्शिता बढ़ानी चाहिए
- डेटा केंद्रों की ऊर्जा माँग का दीर्घकालिक नियोजन करना चाहिए, ताकि आपूर्ति-पक्ष के दबाव नियंत्रित रहें
- वित्तीय स्थिरता बोर्ड (Financial Stability Board) और IMF जैसे मंचों पर सीमा-पार जोखिमों की साझा निगरानी को प्रोत्साहित करना चाहिए
- भारत के संदर्भ में भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) द्वारा वैश्विक वित्तीय जोखिमों को नीतिगत विचार में शामिल करना चाहिए
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मौद्रिक नीति (Monetary Policy) · मुद्रास्फीति (Inflation) · वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) · परिसंपत्ति मूल्यांकन (Asset Valuation) · कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) निवेश चक्र · धन-प्रभाव (Wealth Effect) · समष्टि-विवेकपूर्ण नीति (Macroprudential Policy) · विश्व आर्थिक दृष्टिकोण (World Economic Outlook) · वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Financial Stability Report) · आपूर्ति-आघात (Supply Shock) · पूंजी प्रवाह (Capital Flows) · मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (Inflation Targeting)
अवधारणा प्रवाह
AI निवेश बढ़ने से डेटा केंद्र, चिप और ऊर्जा की माँग बढ़ती है → इससे वृद्धि और रोज़गार को सहारा मिलता है, पर माँग-दबाव से मुद्रास्फीति का जोखिम भी बनता है → ऊँचे परिसंपत्ति मूल्यांकन और ऋण-निर्भरता से निवेशक भावना संवेदनशील हो जाती है → कंपनियाँ लाभ-अपेक्षाएँ पूरी न होने पर निवेश योजनाएँ घटाती हैं → निवेश में कमी से वृद्धि घटती है, परिसंपत्ति कीमतें गिरती हैं और वित्तीय स्थितियाँ कड़ी होती हैं → केंद्रीय बैंक इन दोनों जोखिमों को संतुलित करते हुए ब्याज दर का निर्णय लेते हैं
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा प्रकाशित ‘विश्व आर्थिक दृष्टिकोण’ रिपोर्ट में वैश्विक वृद्धि और मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान दिए जाते हैं।
2. ‘वैश्विक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट’ (Global Financial Stability Report) भी IMF द्वारा प्रकाशित की जाती है।
3. IMF के प्रबंध निदेशक (Managing Director) की नियुक्ति भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- इनमें से कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं, क्योंकि IMF ‘विश्व आर्थिक दृष्टिकोण’ और ‘वैश्विक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट’ दोनों प्रकाशित करता है। कथन 3 गलत है, क्योंकि IMF के प्रबंध निदेशक का चयन कार्यकारी बोर्ड (Executive Board) द्वारा होता है, न कि किसी एक देश के वित्त मंत्रालय द्वारा। अतः सही उत्तर ‘केवल दो’ है।
Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक में एक अभिकथन (A) और एक कारण (R) दिया गया है:
अभिकथन (A): कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े निवेश उछाल के कारण परिसंपत्ति मूल्यों में तीव्र वृद्धि मुद्रास्फीति-दबाव और वित्तीय स्थिरता के जोखिम को एक साथ बढ़ा सकती है।
कारण (R): परिसंपत्ति मूल्य बढ़ने पर धन-प्रभाव (Wealth Effect) के माध्यम से उपभोक्ताओं और निवेशकों की व्यय-क्षमता बढ़ती है, जिससे कुल मांग में वृद्धि होती है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — परिसंपत्ति मूल्य बढ़ने से धन-प्रभाव के कारण उपभोग और निवेश-व्यय बढ़ते हैं, जिससे मांग-जनित मुद्रास्फीति का दबाव बनता है। साथ ही, अत्यधिक मूल्यांकन और ऋण-आधारित विस्तार से वित्तीय अस्थिरता का जोखिम भी बढ़ता है। अतः (R) सीधे (A) की व्याख्या करता है।
Q3. निम्नलिखित संस्थाओं/रिपोर्टों को सूची-I और उनके विवरणों को सूची-II में दिया गया है:
सूची-I
A. वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट
B. मौद्रिक नीति समिति (MPC)
C. विश्व आर्थिक दृष्टिकोण
D. मुद्रास्फीति लक्ष्य ढांचा
सूची-II
1. भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अर्धवार्षिक रूप से प्रकाशित रिपोर्ट
2. भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45ZB के अंतर्गत गठित छह सदस्यीय समिति
3. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का प्रकाशन
4. केंद्र सरकार द्वारा RBI के परामर्श से अधिसूचित लक्ष्य-ढांचा (धारा 45ZA)
सही सुमेलन चुनिए:
- A-1, B-2, C-3, D-4
- A-3, B-1, C-2, D-4
- A-1, B-4, C-3, D-2
- A-2, B-1, C-4, D-3
उत्तर: A-1, B-2, C-3, D-4 — वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट RBI द्वारा अर्धवार्षिक रूप से प्रकाशित होती है (A-1)। MPC को RBI अधिनियम की धारा 45ZB के तहत गठित किया गया है, जिसमें छह सदस्य होते हैं (B-2)। ‘विश्व आर्थिक दृष्टिकोण’ IMF का प्रकाशन है (C-3)। मुद्रास्फीति लक्ष्य केंद्र सरकार द्वारा RBI के परामर्श से धारा 45ZA के तहत अधिसूचित होता है (D-4)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) से जुड़े पूंजी-निवेश के उछाल ने कई अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि को सहारा दिया है, परंतु इस निवेश के धीमे पड़ने के जोखिम को ब्याज दर-निर्णयों में शामिल करने की मांग भी उठी है। मौद्रिक नीति को परिसंपत्ति बाज़ार की अस्थिरता के प्रति किस सीमा तक प्रतिक्रिया देनी चाहिए, इसका आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि मौद्रिक नीति और वित्तीय स्थिरता नीति के बीच समन्वय न होने पर कौन-से जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1) प्रस्तावना: IMF प्रबंध निदेशक क्रिस्टलीना जॉर्जीवा (Kristalina Georgieva) का 6 नवंबर का वक्तव्य; AI निवेश वृद्धि को सहारा देता है, पर मुद्रास्फीति-दबाव और वित्तीय जोखिम भी बढ़ाता है।
2) वृद्धि-चैनल: डेटा केंद्र, चिप और ऊर्जा की मांग से निवेश और रोज़गार; IMF की अक्टूबर 2026 ‘विश्व आर्थिक दृष्टिकोण’ में दर्शाया गया जोखिम-परिदृश्य (2028 में वैश्विक उत्पादन 1.1 प्रतिशत कम; अमेरिका 1.8 प्रतिशत और एशिया 1.7 प्रतिशत कम), जिसे केवल जोखिम-सिमुलेशन माना गया है, भविष्यवाणी नहीं।
3) मुद्रास्फीति-चैनल: मांग-पक्ष दबाव तथा मध्य-पूर्व संघर्ष से उत्पन्न तेल आपूर्ति-आघात (Supply Shock) का मिश्रित प्रभाव; स्टैगफ्लेशन जोखिम की अवधारणा।
4) परिसंपत्ति और वित्तीय चैनल: धन-प्रभाव (Wealth Effect); हाइमन मिंस्की (Hyman Minsky) की वित्तीय अस्थिरता परिकल्पना के अनुसार उछाल से ऋण-विस्तार और अंततः भंगुरता; AI कंपनियों का ऋण-आधारित वित्तपोषण और परस्पर-जुड़े आपूर्ति-संबंध; IMF की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट।
5) वैचारिक बहस: (क) ‘Lean against the wind’ बनाम ‘Clean up after’ दृष्टिकोण; बेन बर्नान्के और मार्क गर्टलर के शोध का तर्क कि परिसंपत्ति बुलबुले पर सीधी ब्याज-प्रतिक्रिया से बेहतर समष्टि-विवेकपूर्ण उपाय हैं; (ख) टेलर नियम (John Taylor) के अनुसार ब्याज दर का निर्धारण मुद्रास्फीति अंतर और उत्पादन-अंतर पर आधारित होता है, जिसमें परिसंपत्ति कीमतें सीधे शामिल नहीं होतीं; (ग) केनेसियन दृष्टिकोण में ‘पशु-आत्माएँ’ (Animal Spirits) और निवेशक भावना की भूमिका।
6) भारतीय संदर्भ: RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45ZA (मुद्रास्फीति लक्ष्य, केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित) और धारा 45ZB (मौद्रिक नीति समिति); मौद्रिक नीति का लक्ष्य उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत (±2 प्रतिशत सहनशीलता सीमा) के आसपास रखना; RBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट; वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (FSDC, 2010) की समन्वय भूमिका; समष्टि-विवेकपूर्ण उपकरण जैसे प्रति-चक्रीय पूंजी बफर (Countercyclical Capital Buffer, बेसल III) और ऋण-मूल्य अनुपात सीमा।
7) संतुलित मत: ब्याज दर को केवल मुद्रास्फीति-लक्ष्य तक सीमित रखने से परिसंपत्ति बुलबुले की अनदेखी का खतरा; दर को परिसंपत्ति के लिए अधिक कसने से वृद्धि और रोज़गार पर नकारात्मक प्रभाव; अतः समन्वित ढांचा (मौद्रिक + समष्टि-विवेकपूर्ण + वित्तीय नियामक) अधिक उपयुक्त।
8) दूसरा भाग: समन्वय के अभाव में नीति-विरोध, नियामक अंतराल, पूंजी प्रवाह का अचानक उलटाव (जैसे अमेरिका में मनी मार्केट फंडों में बढ़ते निवेश से सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर झुकाव), उभरती अर्थव्यवस्थाओं में विनिमय-दर और बाह्य वित्तपोषण पर दबाव।
9) निष्कर्ष: संस्थागत स्वायत्तता, डेटा-आधारित निगरानी और भविष्य-उन्मुख जोखिम मूल्यांकन के साथ संतुलित निर्णय।
स्रोत: vietnam.vn
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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