31 Jul ISRO-जापान संयुक्त चंद्रयान-5 मिशन: 2028 में लॉन्च की तैयारी, जानें पूरा प्लान
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध (International Relations) | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science and Technology)
- Prelims: चंद्रयान-5 मिशन, LUPEX मिशन, ISRO, JAXA, H3 रॉकेट, चंद्रमा पर जल-बर्फ, अंतरिक्ष सहयोग
- Essay: अंतरिक्ष अन्वेषण में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का महत्व, भारत की बढ़ती अंतरिक्ष शक्ति और वैश्विक भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: चंद्रयान-5 (LUPEX) ISRO और JAXA का एक संयुक्त चंद्र मिशन है, जिसका लक्ष्य 2028 में चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों पर जल-बर्फ का अध्ययन करना है, जिसमें NASA और ESA भी भागीदार हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) के वैज्ञानिकों ने संयुक्त चंद्र मिशन चंद्रयान-5 की तैयारियों की समीक्षा की है। यह मिशन, जिसे लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन (LUPEX) मिशन के नाम से भी जाना जाता है, 2028 में लॉन्च होने वाला है और इसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह तथा उपसतह पर जल एवं जल-बर्फ का अध्ययन करना है।
पृष्ठभूमि
- चंद्रयान-5 मिशन को मार्च 2025 में भारत सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया था, जो अगस्त 2023 में चंद्रयान-3 मिशन की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग के बाद आया है।
- यह भारत और जापान के बीच अपनी तरह का पहला संयुक्त रोवर मिशन है।
- इस मिशन में अमेरिका की नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) भी भाग ले रही हैं, जो रोवर पर अपने पेलोड लगाएंगी।
- चंद्रयान-5 मिशन को जापानी H3 रॉकेट द्वारा लॉन्च किया जाएगा और यह चंद्रमा पर लगभग 100 दिनों तक सक्रिय रहेगा।
- ISRO लैंडर मॉड्यूल का निर्माण कर रहा है, जबकि JAXA रोवर विकसित कर रहा है, जो लैंडिंग के बाद लैंडर से बाहर निकलकर चंद्रमा की सतह पर घूमेगा और डेटा एकत्र करेगा।
- JAXA ने हाल ही में त्सुकुबा स्पेस सेंटर में दूसरा पेलोड ऑपरेशंस सिमुलेशन सफलतापूर्वक किया है।
चंद्रयान-5 (LUPEX) मिशन क्या है?
- चंद्रयान-5, जिसे लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन (LUPEX) मिशन भी कहा जाता है, ISRO और JAXA द्वारा संयुक्त रूप से विकसित एक चंद्र अन्वेषण मिशन है।
- इसका प्राथमिक उद्देश्य चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों में जल और जल-बर्फ की उपस्थिति का विस्तृत अध्ययन करना है, विशेष रूप से सतह और उपसतह दोनों पर।
- मिशन में एक लैंडर मॉड्यूल (ISRO द्वारा निर्मित) और एक रोवर (JAXA द्वारा विकसित) शामिल होगा, जो चंद्रमा की सतह पर उतरकर अन्वेषण करेगा।
- रोवर चंद्रमा की स्थलाकृति का सर्वेक्षण करेगा और विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए डेटा एकत्र करने हेतु सात वैज्ञानिक उपकरणों को ले जाएगा।
- NASA और ESA भी इस मिशन में भागीदार हैं, जिसमें ESA मास स्पेक्ट्रोमीटर और NASA न्यूट्रॉन स्पेक्ट्रोमीटर विकसित कर रहा है।
- मिशन 2028 में जापानी H3 रॉकेट पर लॉन्च होने की उम्मीद है और इसका परिचालन जीवनकाल लगभग 100 दिन होगा।
- यह मिशन भविष्य के चंद्र अन्वेषण और संभावित मानव बस्तियों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगा, खासकर जल संसाधनों की उपलब्धता के संबंध में।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| मिशन का नाम | चंद्रयान-5 / लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन मिशन (LUPEX) |
| सहयोग | भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) |
| लॉन्च की योजना | 2028 में जापानी रॉकेट H3 द्वारा |
| मुख्य उद्देश्य | चंद्रमा की सतह और उपसतह पर पानी और जल-बर्फ का अध्ययन |
| अवधि | चंद्रमा पर 100 दिन (लगभग 3.5 महीने) |
| अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी | NASA और ESA भी पेलोड के साथ शामिल |
महत्व
वैज्ञानिक महत्व
- चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों में जल-बर्फ की उपस्थिति और वितरण को समझना, जो भविष्य के चंद्र अभियानों और मानव बस्तियों के लिए महत्वपूर्ण है।
- चंद्रमा के भूविज्ञान, स्थलाकृति और खनिज संरचना पर नए डेटा एकत्र करना, जिससे चंद्रमा के निर्माण और विकास के बारे में हमारी समझ बढ़ेगी।
- विभिन्न वैज्ञानिक उपकरणों के माध्यम से चंद्रमा के पर्यावरण और विकिरण स्तरों का अध्ययन करना।
सामरिक महत्व
- अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की बढ़ती क्षमता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करना।
- जापान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और अंतरिक्ष क्षेत्र में नए अवसरों का सृजन करना।
- अमेरिका (NASA) और यूरोपीय संघ (ESA) जैसे प्रमुख अंतरिक्ष अभिकरणों की भागीदारी के साथ बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देना।
तकनीकी महत्व
- लैंडर और रोवर प्रौद्योगिकियों के विकास में ISRO और JAXA की विशेषज्ञता का लाभ उठाना।
- अंतर-अंतरिक्ष यान संचार (Inter Spacecraft Communication) जैसी जटिल तकनीकी चुनौतियों का समाधान करना।
- अंतरिक्ष यान बस और पेलोड संचालन के लिए उन्नत सिमुलेशन और परीक्षण प्रक्रियाओं का उपयोग करना।
आर्थिक महत्व
- अंतरिक्ष क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना, जिससे नई प्रौद्योगिकियों और नवाचारों का सृजन होगा।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से लागत साझाकरण और संसाधनों का अनुकूलन करना।
- भारत के अंतरिक्ष उद्योग और संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना।
चुनौतियाँ
1. अंतर-अंतरिक्ष यान संचार
- चंद्रयान-5 के विभिन्न घटकों और सहयोगी देशों के बीच सुचारू संचार सुनिश्चित करना एक जटिल तकनीकी चुनौती है।
- डेटा ट्रांसमिशन, कमांड और टेलीमेट्री के लिए एक मजबूत और विश्वसनीय संचार प्रणाली विकसित करना।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
2. अंतर्राष्ट्रीय समन्वय
- कई देशों (भारत, जापान, अमेरिका, यूरोप) के बीच तकनीकी आवश्यकताओं, समय-सीमा और परिचालन प्रोटोकॉल का समन्वय करना।
- विभिन्न पेलोड और उनके एकीकरण को सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध – द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह
3. तकनीकी एकीकरण
- ISRO द्वारा निर्मित लैंडर मॉड्यूल और JAXA द्वारा विकसित रोवर मॉड्यूल का निर्बाध एकीकरण सुनिश्चित करना।
- विभिन्न देशों द्वारा विकसित वैज्ञानिक उपकरणों (पेलोड) को रोवर पर सफलतापूर्वक माउंट करना और उनका संचालन करना।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
4. लॉन्च विंडो और समय-सीमा
- 2028 की प्रस्तावित लॉन्च विंडो के भीतर मिशन को तैयार करना और सभी परीक्षणों को पूरा करना।
- मिशन की 100 दिन की चंद्र सतह पर रहने की अवधि के लिए रोवर और पेलोड की कार्यक्षमता सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| तकनीकी समन्वय | विभिन्न देशों की एजेंसियों के बीच तकनीकी मानकों और प्रोटोकॉल का सामंजस्य स्थापित करना। |
| पेलोड एकीकरण | विभिन्न देशों द्वारा विकसित वैज्ञानिक उपकरणों को रोवर पर सफलतापूर्वक एकीकृत करना। |
| मिशन की अवधि | चंद्रमा पर 100 दिनों के लिए रोवर और पेलोड की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना। |
| लॉन्च विंडो | 2028 की प्रस्तावित लॉन्च विंडो के भीतर सभी तैयारियों को पूरा करना। |
| अंतर-अंतरिक्ष यान संचार | लैंडर, रोवर और पृथ्वी के बीच निर्बाध और विश्वसनीय संचार स्थापित करना। |
आगे की राह
- अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग को और मजबूत करना, विशेषकर चंद्र अन्वेषण और गहरे अंतरिक्ष मिशनों में।
- स्वदेशी अंतरिक्ष क्षमताओं को बढ़ाना, विशेष रूप से लैंडर और रोवर प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना।
- युवा वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को अंतरिक्ष अनुसंधान और विकास में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना।
- अंतरिक्ष मलबे को कम करने और अंतरिक्ष संसाधनों के स्थायी उपयोग के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों में योगदान देना।
- चंद्रमा और अन्य खगोलीय पिंडों पर मानव उपस्थिति की संभावनाओं का पता लगाने के लिए अनुसंधान जारी रखना।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना ताकि अंतरिक्ष क्षेत्र में नवाचार और निवेश को गति मिल सके।
- अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों के लिए नई प्रौद्योगिकियों का विकास करना जो पृथ्वी पर जीवन को लाभ पहुंचा सकें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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अवधारणा प्रवाह
चंद्रयान-3 की सफलता → चंद्रयान-5/LUPEX मिशन की स्वीकृति → ISRO और JAXA का संयुक्त विकास → NASA और ESA की भागीदारी → 2028 में H3 रॉकेट से लॉन्च → चंद्रमा पर पानी और जल-बर्फ का अध्ययन → भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए डेटा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. चंद्रयान-5 मिशन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह ISRO और JAXA का एक संयुक्त रोवर मिशन है।
2. इस मिशन का लक्ष्य चंद्रमा की सतह और उपसतह पर जल तथा जल-बर्फ का अध्ययन करना है।
3. NASA और ESA इस मिशन में अपने पेलोड के साथ भाग ले रहे हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि चंद्रयान-5, जिसे लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन मिशन (LUPEX) भी कहा जाता है, ISRO और JAXA द्वारा संयुक्त रूप से विकसित एक रोवर मिशन है। कथन 2 भी सही है क्योंकि मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह और उपसतह पर जल तथा जल-बर्फ का अध्ययन करना है। कथन 3 भी सही है क्योंकि NASA और ESA भी इस मिशन में भाग ले रहे हैं और अपने पेलोड रोवर पर स्थापित करेंगे।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
- चंद्रयान-5: ISRO और JAXA का संयुक्त मिशन
- गगनयान-1: मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन
- H3 रॉकेट: जापानी रॉकेट
- चंद्रयान-3: चंद्रमा के उत्तरी ध्रुव पर लैंडिंग
उत्तर: चंद्रयान-3: चंद्रमा के उत्तरी ध्रुव पर लैंडिंग — चंद्रयान-3 मिशन अगस्त 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरा था, न कि उत्तरी ध्रुव पर। अन्य सभी युग्म सही सुमेलित हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व का परीक्षण कीजिए। चंद्रयान-5 जैसे संयुक्त मिशन भारत की अंतरिक्ष कूटनीति और तकनीकी क्षमताओं को कैसे बढ़ावा देते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के बढ़ते महत्व का संक्षिप्त परिचय दें।
मुख्य भाग:
1. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का महत्व:
– संसाधनों का साझाकरण (वित्तीय, तकनीकी, मानव संसाधन)।
– जोखिमों का वितरण और लागत में कमी।
– तकनीकी विशेषज्ञता और ज्ञान का आदान-प्रदान।
– बड़े और जटिल मिशनों को साकार करना जो अकेले संभव नहीं हो सकते।
– भू-राजनीतिक संबंधों को मजबूत करना।
2. चंद्रयान-5 (LUPEX) का विशिष्ट संदर्भ:
– ISRO और JAXA के बीच सहयोग का उदाहरण।
– NASA और ESA की भागीदारी।
– लैंडर और रोवर मॉड्यूल में भूमिकाओं का विभाजन (ISRO लैंडर, JAXA रोवर)।
– वैज्ञानिक उपकरणों का साझा विकास।
– चंद्रमा पर जल-बर्फ के अध्ययन जैसे विशिष्ट वैज्ञानिक लक्ष्यों की प्राप्ति।
3. भारत की अंतरिक्ष कूटनीति और तकनीकी क्षमताओं को बढ़ावा:
– भारत को एक विश्वसनीय और सक्षम अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित करना।
– उन्नत प्रौद्योगिकियों तक पहुँच और उनका विकास।
– वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में भारत की स्थिति को मजबूत करना।
– भविष्य के अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष मिशनों के लिए मार्ग प्रशस्त करना।
– सॉफ्ट पावर का प्रदर्शन।
निष्कर्ष: अंतर्राष्ट्रीय सहयोग भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक रणनीतिक अनिवार्यता है, जो वैज्ञानिक प्रगति, तकनीकी नवाचार और वैश्विक कूटनीति को एक साथ बढ़ावा देता है।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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