31 Oct कर्नाटक में दूध की कीमतों में 8 रुपये की बढ़ोतरी: बजट और पोषण पर असर
✎ दूध जैसे आवश्यक पोषक खाद्य की मूल्य वृद्धि निम्न-आय वर्ग की पोषण सुरक्षा को सीधे प्रभावित करती है, इसलिए सहकारी मूल्य नीति को लक्षित सब्सिडी और कल्याण योजनाओं के साथ संतुलित करना आवश्यक है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — अर्थव्यवस्था (मूल्य स्तर, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, कृषि विपणन और सहकारिता) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — शासन (राज्य सरकार की नीतियाँ, खाद्य एवं पोषण से जुड़ी कल्याणकारी योजनाएँ, सार्वजनिक स्वास्थ्य)
- Prelims: ऑपरेशन फ्लड (Operation Flood), राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB), श्वेत क्रांति (White Revolution), उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013, प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM POSHAN), राष्ट्रीय पोषण मिशन (POSHAN Abhiyaan), अवरुद्ध वृद्धि (Stunting)
- Essay: कल्याणकारी राज्य में मूल्य नीति और पोषण सुरक्षा के बीच संतुलन, सहकारी मॉडल: उत्पादक के हित और उपभोक्ता की सुलभता के बीच समन्वय
त्वरित पुनरावृत्ति: दूध जैसे आवश्यक पोषक खाद्य की मूल्य वृद्धि निम्न-आय वर्ग की पोषण सुरक्षा को सीधे प्रभावित करती है, इसलिए सहकारी मूल्य नीति को लक्षित सब्सिडी और कल्याण योजनाओं के साथ संतुलित करना आवश्यक है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कर्नाटक सरकार ने दूध के मूल्य में ₹8 प्रति लीटर की वृद्धि की घोषणा की है, जो रविवार, 1 नवंबर से लागू होगी। इस वृद्धि की आलोचना विशेषज्ञों और आम नागरिकों दोनों ने की है। एक कर-दाता मंच के संयोजक की गणना के अनुसार 2023 से दूध का मूल्य कुल ₹15 प्रति लीटर बढ़ा है, जो लगभग 38.5 प्रतिशत की वृद्धि है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे दैनिक मजदूरी पर काम करने वाले श्रमिकों, जैसे निर्माण, घरेलू कार्य और सुरक्षा कर्मियों के घरेलू खर्च बढ़ेंगे। सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मध्याह्न भोजन में अंडों की आपूर्ति बंद होने और मांस के महंगे होने के बीच दूध की महंगाई से बच्चों और महिलाओं में अवरुद्ध वृद्धि (Stunting) तथा अन्य पोषणिक कमियाँ बढ़ सकती हैं।
पृष्ठभूमि
- दूध प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन A और विटामिन B12 का प्रमुख स्रोत है, इसलिए इसकी उपलब्धता और मूल्य सीधे पोषण सुरक्षा से जुड़े हैं।
- भारत में डेयरी क्षेत्र का ढाँचा सहकारी मॉडल पर आधारित है। कर्नाटक में दूध की खरीद और विपणन मुख्यतः सहकारी दुग्ध संघों के माध्यम से होता है, जिनका शीर्ष संगठन कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) है। मूल्य संशोधन में राज्य सरकार की भूमिका भी रहती है।
- ऑपरेशन फ्लड (1970) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (स्थापना 1965) के माध्यम से भारत ने दुग्ध उत्पादन और सहकारी विपणन का विस्तार किया, जिसे श्वेत क्रांति कहा जाता है।
- मध्याह्न भोजन योजना अब प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM POSHAN) के अंतर्गत संचालित होती है। रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक में इसके अंतर्गत अंडों की आपूर्ति बंद की गई है, जिससे पोषण के विकल्पों पर बहस तेज़ हुई है।
- 2025 में जारी एक UNICEF रिपोर्ट में राज्य की जनसंख्या में विटामिन B12, जिंक, कैल्शियम और विटामिन A की कमी का उल्लेख किया गया है, जैसा कि समाचार में बताया गया है।
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत रियायती दर पर अनाज उपलब्ध कराया जाता है, परंतु दूध और अन्य प्रोटीन-युक्त खाद्य पदार्थ इसमें सामान्यतः शामिल नहीं होते, इसलिए इनकी सुलभता अलग से चिंता का विषय बनती है।
दूध की मूल्य वृद्धि और पोषण सुरक्षा का अर्थ क्या है?
- पोषण सुरक्षा का अर्थ है सभी व्यक्तियों को हर समय पर्याप्त, सुरक्षित और पोषक खाद्य पदार्थों तक भौतिक एवं आर्थिक पहुँच होना।
- दूध की मूल्य वृद्धि का सबसे गहरा प्रभाव निम्न-आय वर्ग पर पड़ता है, क्योंकि उनके खर्च का बड़ा हिस्सा पहले से भोजन पर केंद्रित होता है।
- उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में खाद्य पदार्थों का भार अधिक होता है, और दूध तथा दुग्ध उत्पाद इसके प्रमुख घटक हैं; इसलिए इनकी कीमतों में वृद्धि खुदरा मुद्रास्फीति को प्रभावित करती है।
- अवरुद्ध वृद्धि (Stunting) दीर्घकालिक कुपोषण का संकेतक है, जो आयु के अनुपात में ऊँचाई की कमी के रूप में दिखाई देती है।
- सहकारी दुग्ध मॉडल में उत्पादक किसानों को उचित मूल्य मिलना और उपभोक्ताओं को सस्ता दूध मिलना, दोनों लक्ष्य एक साथ साधने की चुनौती होती है।
- लक्षित सब्सिडी, जैसे निर्धन परिवारों या बच्चों के लिए विशेष आपूर्ति, मूल्य वृद्धि के असर को कम करने का एक नीतिगत विकल्प है, परंतु इसके लिए सटीक लाभार्थी पहचान आवश्यक है।
- भारत में खाद्य एवं पोषण नीतियाँ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013, PM POSHAN और राष्ट्रीय पोषण मिशन जैसे ढाँचों के माध्यम से लागू होती हैं, जबकि दुग्ध विकास मुख्यतः राज्य का विषय है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| मूल्य वृद्धि का स्वरूप | राज्य सरकार ने दूध के मूल्य में ₹8 प्रति लीटर की वृद्धि 1 नवंबर से लागू की। आलोचकों के अनुसार 2023 से कुल वृद्धि ₹15 प्रति लीटर रही है। |
| चरणबद्ध वृद्धि | अगस्त 2023 में ₹3, फिर पैकेट मूल्य में ₹2 और मात्रा में 50 मिलीलीटर की वृद्धि (एक लीटर पैकेट 1.05 लीटर), 1 अप्रैल 2025 को ₹4 और अब ₹8 की वृद्धि हुई। |
| प्रतिशत आकलन | एक विशेषज्ञ की गणना के अनुसार 2023 से लगभग 38.5% की वृद्धि हुई है, जबकि वेतन वृद्धि इसकी तुलना में बहुत कम मानी गई है। |
| लक्षित प्रभाव समूह | दैनिक मजदूर, निर्माण श्रमिक, घरेलू कामगार और सुरक्षा गार्ड जैसे निम्न आय वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होंगे। |
| पोषण से जुड़ी चिंता | मध्याह्न भोजन में अंडे की आपूर्ति बंद होने और मांस महंगा होने से दूध की उपलब्धता पर निर्भरता बढ़ी है, जिससे बौनापन (Stunting) और सूक्ष्म पोषक कमी का खतरा बढ़ा है। |
महत्व
आर्थिक
- घरेलू उपभोग व्यय पर सीधा दबाव, विशेषकर आवश्यक खाद्य वस्तुओं की मांग में संवेदनशीलता।
- खाद्य वस्तुओं की मूल्य वृद्धि मुद्रास्फीति (Inflation) के उपभोक्ता स्तर पर प्रभाव को बढ़ाती है।
- निम्न आय वर्ग की वास्तविक क्रय शक्ति घटने से समग्र आर्थिक संवृद्धि में उपभोग की भूमिका पर असर संभव है।
पोषण और स्वास्थ्य
- UNICEF की 2025 रिपोर्ट के अनुसार राज्य में विटामिन B12, जिंक, कैल्शियम और विटामिन A की कमी का उल्लेख किया गया है।
- बच्चों और महिलाओं में कुपोषण बढ़ने से स्वास्थ्य व्यय और रोग-भार में वृद्धि की आशंका जताई गई है।
- प्रोटीन और सूक्ष्म पोषक तत्वों युक्त खाद्य पदार्थों की पहुंच घटने से आहार विविधता पर असर पड़ता है।
श्रम और आय
- कम वेतन पर निर्भर श्रमिकों के लिए मूल्य वृद्धि से जीवन-यापन की लागत और वास्तविक आय के बीच अंतर बढ़ता है।
- गारमेंट वर्कर्स यूनियन के अनुसार गारमेंट श्रमिकों का मासिक वेतन 10 वर्षों से ₹13,500 पर स्थिर बताया गया है।
- स्वचालन और तकनीकी बदलाव से कुछ क्षेत्रों में रोजगार की असुरक्षा भी आय दबाव को जटिल बनाती है।
शासन और नीति
- राज्य सरकार का दूध मूल्य निर्धारण और सामाजिक सुरक्षा दायित्व के बीच संतुलन का प्रश्न सामने आता है।
- गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए लक्षित सब्सिडी बनाम सार्वभौमिक मूल्य नियंत्रण पर नीतिगत बहस तेज हुई है।
- पोषण सुरक्षा राज्य के कल्याणकारी दायित्व का हिस्सा है, इसलिए मूल्य नीति को पोषण लक्ष्यों से जोड़ने की मांग उठी है।
चुनौतियाँ
1. आय और मूल्य में असंतुलन
- मूल्य वृद्धि की दर और श्रमिकों की आय वृद्धि के बीच बढ़ता अंतर निम्न आय वर्ग की क्रय शक्ति को घटाता है।
- एक ही वस्तु पर बार-बार मूल्य वृद्धि से उपभोक्ता अपेक्षाएं और बजट योजना दोनों प्रभावित होते हैं।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था: मुद्रास्फीति और आय वितरण
2. पोषण असुरक्षा का खतरा
- दूध, अंडे और मांस जैसे पशु-आधारित प्रोटीन स्रोतों की पहुंच घटने से बच्चों में बौनापन का जोखिम बढ़ता है।
- अनाज पर अधिक निर्भरता से सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी और गहरी हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक क्षेत्र: स्वास्थ्य, पोषण और कुपोषण
3. सब्सिडी बनाम लक्षित सहायता
- सार्वभौमिक सब्सिडी अधिक खर्चीली होती है, जबकि लक्षित सहायता में पात्रता पहचान की चुनौती रहती है।
- गरीबी रेखा से नीचे और असंगठित श्रमिकों की सटीक पहचान राज्य प्रशासन के लिए कठिन कार्य है।
यूपीएससी लिंक: सार्वजनिक वित्त और सब्सिडी का लक्ष्यीकरण
4. डेयरी क्षेत्र में उत्पादक और उपभोक्ता का संतुलन
- उत्पादक किसानों को उचित मूल्य और उपभोक्ताओं को वहनीय मूल्य, दोनों के बीच संतुलन बनाना कठिन है।
- उत्पादन लागत में वृद्धि, चारा और परिवहन व्यय, मूल्य निर्धारण को प्रभावित करते हैं।
यूपीएससी लिंक: कृषि अर्थव्यवस्था: डेयरी क्षेत्र और किसान आय
5. मध्याह्न भोजन में पोषण की निरंतरता
- मध्याह्न भोजन में अंडे की आपूर्ति बंद होने से प्रोटीन स्रोत कम हुए हैं।
- वैकल्पिक पौष्टिक आहार की लागत बढ़ने से लक्षित पोषण मानकों को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक क्षेत्र: बाल पोषण योजनाएं
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| मूल्य वृद्धि की आवृत्ति | 2023 से चार बार वृद्धि, जिससे उपभोक्ता बजट और योजना पर लगातार दबाव। |
| वेतन और मूल्य का अंतर | निम्न वेतन वाले श्रमिकों की वास्तविक आय में गिरावट की आशंका। |
| पोषण संकेतक | UNICEF रिपोर्ट में विटामिन B12, जिंक, कैल्शियम और विटामिन A की कमी का उल्लेख। |
| प्रोटीन स्रोतों की पहुंच | अंडे और मांस के महंगे होने से पशु-आधारित प्रोटीन तक पहुंच सीमित। |
| लक्षित सहायता की पहचान | गरीबी रेखा से नीचे परिवारों की सटीक पहचान और सहायता का वितरण। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- मध्याह्न भोजन योजना (PM POSHAN)
आगे की राह
- निम्न आय वर्ग और गरीबी रेखा से नीचे परिवारों के लिए लक्षित सहायता तंत्र विकसित किया जाए।
- मूल्य वृद्धि से पहले प्रभाव आकलन और सार्वजनिक परामर्श की पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए।
- मध्याह्न भोजन और आंगनवाड़ी सेवाओं में दूध, दालों और अन्य सस्ते पौष्टिक स्रोतों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
- दुग्ध उत्पादक किसानों से प्रत्यक्ष खरीद और सहकारी मॉडल को सुदृढ़ करके उत्पादक और उपभोक्ता, दोनों के हित संतुलित किए जाएं।
- असंगठित श्रमिकों के वेतन को मूल्य सूचकांक से जोड़ने पर विचार किया जाए।
- राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) जैसे आंकड़ों के आधार पर बाल पोषण संकेतकों की नियमित निगरानी की जाए।
- सब्सिडी नीति को पोषण लक्ष्यों और राजकोषीय क्षमता, दोनों के आधार पर संतुलित रूप से डिज़ाइन किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पोषण सुरक्षा (Nutritional Security) · खाद्य सुरक्षा (Food Security) · राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (National Food Security Act, 2013) · अनुच्छेद 47 (Article 47) · दुग्ध सहकारिता और आनंद मॉडल (Anand Pattern) · ऑपरेशन फ्लड (Operation Flood) · उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index) · बौनापन / स्टंटिंग (Stunting) · पीएम पोषण योजना (PM POSHAN) · लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Targeted Public Distribution System) · प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 47: पोषण स्तर और जन स्वास्थ्य का राज्य दायित्व
- अनुच्छेद 39(f): बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर
अवधारणा प्रवाह
उत्पादन और परिवहन लागत में वृद्धि → राज्य सरकार द्वारा दूध के मूल्य में ₹8 प्रति लीटर की वृद्धि (1 नवंबर से लागू) → परिवारों के मासिक व्यय में वृद्धि, निम्न आय वर्ग पर सबसे अधिक दबाव → दूध और प्रोटीन स्रोतों की खपत में कमी, अनाज पर अधिक निर्भरता → विटामिन और खनिज जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी में वृद्धि → बच्चों में बौनापन (Stunting) और स्वास्थ्य व्यय में वृद्धि → मानव पूंजी और उत्पादकता पर दीर्घकालिक प्रभाव
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आनंद मॉडल में दुग्ध सहकारी संस्थाएँ ग्राम, जिला और राज्य स्तर पर तीन-स्तरीय संरचना में कार्य करती हैं।
2. ऑपरेशन फ्लड (Operation Flood) का आरंभ वर्ष 1970 में हुआ था।
3. आनंद मॉडल के अंतर्गत दूध की खरीद और बिक्री की कीमतें केवल केंद्र सरकार द्वारा तय की जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- इनमें से कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: आनंद मॉडल में गाँव स्तर की समितियाँ, जिला संघ और राज्य स्तरीय महासंघ की तीन-स्तरीय संरचना होती है। कथन 2 सही है: ऑपरेशन फ्लड 1970 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के नेतृत्व में आरंभ हुआ, जिसे वर्गीज कुरियन से जोड़ा जाता है। कथन 3 गलत है, क्योंकि सहकारी संस्थाएँ और राज्य स्तरीय महासंघ अपनी कीमत-नीति में कार्य करते हैं, और राज्य सरकारें भी दूध के दाम के निर्णय में भूमिका निभाती हैं; केंद्र द्वारा एकमात्र निर्धारण का कथन तथ्यतः गलत है।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): निम्न-आय वर्ग के परिवारों में दूध जैसे पोषक खाद्य पदार्थों की कीमत बढ़ने से बच्चों में बौनापन (Stunting) और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी का जोखिम बढ़ सकता है।
कारण (R): दूध कैल्शियम, विटामिन B12 और उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत है।
नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, पर (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, पर (R) गलत है।
- (A) गलत है, पर (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — दूध पोषक तत्वों का सुलभ स्रोत है, इसलिए उसकी सस्ती उपलब्धता बच्चों की वृद्धि और सूक्ष्म पोषक पूर्ति से जुड़ी है। इसलिए कारण (R) स्पष्टतः कथन (A) की व्याख्या करता है। यह तर्क सामान्य पोषण विज्ञान पर आधारित है, किसी विशेष आँकड़े पर नहीं।
Q3. भारत के संविधान के किस अनुच्छेद में राज्य का यह कर्तव्य निर्धारित है कि वह पोषण स्तर और जीवन स्तर को ऊँचा करे तथा लोक स्वास्थ्य में सुधार करे?
- अनुच्छेद 21
- अनुच्छेद 39
- अनुच्छेद 47
- अनुच्छेद 51क
उत्तर: अनुच्छेद 47 — अनुच्छेद 47 राज्य के नीति-निदेशक तत्वों (भाग IV) में आता है और पोषण स्तर, जीवन स्तर तथा लोक स्वास्थ्य सुधार का कर्तव्य देता है। अनुच्छेद 21 जीवन के अधिकार की गारंटी देता है, जिसकी न्यायिक व्याख्या में भोजन का अधिकार भी शामिल किया गया है। अनुच्छेद 39 नीति-निदेशक तत्वों में आजीविका और बच्चों के स्वस्थ विकास से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 51क मौलिक कर्तव्यों से संबंधित है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ दूध जैसे पोषक खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि का निम्न-आय वर्ग के परिवारों, विशेषकर बच्चों और महिलाओं की पोषण सुरक्षा पर प्रभाव पड़ सकता है। इस संदर्भ में भारत में पोषण सुरक्षा के संवैधानिक और वैधानिक ढाँचे की समालोचनात्मक परीक्षा कीजिए। साथ ही बताइए कि सहकारी दुग्ध मॉडल उपभोक्ता की वहनीयता और उत्पादक किसान के उचित मूल्य के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित कर सकता है। (15 Marks)
रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON:
(1) प्रस्तावना: कर्नाटक में 1 नवंबर से दूध पर ₹8 प्रति लीटर की वृद्धि लागू होने का समाचार; एक टिप्पणीकार के अनुसार 2023 से कुल ₹15 प्रति लीटर की वृद्धि और उसका 38.5% होना (यह गणना संबंधित व्यक्ति की है, सरकारी आँकड़ा नहीं); पोषण सुरक्षा और आय-व्यय के बीच तनाव का परिचय।
(2) संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार, जिसमें भोजन के अधिकार की न्यायिक व्याख्या शामिल है; PUCL बनाम भारत संघ, 2001 के अंतरिम आदेश); अनुच्छेद 47 (पोषण स्तर और लोक स्वास्थ्य का कर्तव्य); अनुच्छेद 39(f) (बच्चों के स्वस्थ विकास का अवसर); अनुच्छेद 39 और 47 का न्यायोचित न होना (अनुच्छेद 37) तथा उनके क्रियान्वयन का नीति-निर्माण पर प्रभाव।
(3) वैधानिक और योजनागत ढाँचा: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली, मातृत्व लाभ, आँगनवाड़ी के माध्यम से पूरक पोषण); पीएम पोषण योजना (पूर्व में मध्याह्न भोजन योजना) में अंडे, दूध और पौष्टिक आहार का प्रावधान राज्यों के विवेक पर; पोषण अभियान (2018); राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019-21) के बाल-बौनापन संबंधी आँकड़े।
(4) आर्थिक विश्लेषण: दूध की कीमत पर सहकारी ढाँचा (आनंद मॉडल, NDDB, ऑपरेशन फ्लड 1970); कर्नाटक में राज्य का सहकारी महासंघ (KMF) और राज्य सरकार की भूमिका; उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में खाद्य घटक का प्रभाव और मुद्रास्फीति का निम्न-आय वर्ग पर असमान बोझ; उत्पादक किसान को उचित मूल्य देने की आवश्यकता।
(5) विभिन्न मत: (क) विशेषज्ञों का मत कि सरकार को सीधे किसानों से दूध खरीदकर बीपीएल परिवारों को रियायती दर पर देना चाहिए; (ख) श्रमिक संगठनों का मत कि मजदूरी स्थिर होने से आवश्यक वस्तुएँ अधिक सुलभ होनी चाहिए; (ग) किसान और सहकारी संस्थाओं का मत कि उत्पादक को लाभकारी मूल्य मिलना आवश्यक है। लक्षित सहायता बनाम सार्वभौमिक मूल्य-नियंत्रण की तुलना: लक्ष्यीकरण की त्रुटियाँ (अपवर्जन और समावेशन त्रुटियाँ), प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) का विकल्प, राजकोषीय लागत और रिसाव।
(6) निष्कर्ष: लक्षित पोषण सहायता, सहकारी संस्थाओं की पारदर्शिता, और मूल्य-स्थिरता के बीच संतुलित नीति; अनुच्छेद 47 की भावना के अनुरूप पोषण को विकास का केंद्र बनाने का तर्क।
स्रोत: The Hindu
Karnataka PCS (KPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: कर्नाटक में हाल ही में हुई दूध की कीमत वृद्धि के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- A. यह वृद्धि राज्य सरकार द्वारा केवल किसानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है।
- B. इस वृद्धि से राज्य के बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
- C. इस वृद्धि का राज्य के पोषण स्तर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
- D. यह वृद्धि केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित है।
उत्तर: B. इस वृद्धि से राज्य के बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। — कर्नाटक में दूध की कीमत वृद्धि से राज्य के बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है, जिससे आम जनता पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
Mains: कर्नाटक में हाल ही में हुई दूध की कीमत वृद्धि के कारणों और इसके राज्य के बजट तथा पोषण स्तर पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। अपने उत्तर में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भी उल्लेख करें।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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