07 Nov दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण हेतु निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध: एक विश्लेषण
✎ ग्रैप (GRAP) के अंतर्गत निर्माण और विध्वंस पर प्रतिबंध वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के वैधानिक आदेश से लागू होते हैं, जबकि धूल नियंत्रण और मलबा निस्तारण का आधार निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (प्रदूषण नियंत्रण, वायु गुणवत्ता प्रबंधन, अपशिष्ट प्रबंधन) | GS Paper II — शासन और सार्वजनिक नीति (वैधानिक निकाय, प्रवर्तन तंत्र, राज्य एवं केंद्र के बीच समन्वय) | GS Paper II — सामाजिक न्याय (असंगठित श्रमिकों का कल्याण और रोज़गार पर नीतिगत प्रभाव)
- Prelims: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), ग्रैप (GRAP — Graded Response Action Plan) और उसके चरण, वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) की श्रेणियाँ, वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC), प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC)
- Essay: विकास और पर्यावरण: शहरी निर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण कितना न्यायोचित है?, नगरीय वायु प्रदूषण से निपटने में प्रवर्तन बनाम जन-जागरूकता और तकनीकी समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: ग्रैप (GRAP) के अंतर्गत निर्माण और विध्वंस पर प्रतिबंध वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के वैधानिक आदेश से लागू होते हैं, जबकि धूल नियंत्रण और मलबा निस्तारण का आधार निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
दिल्ली सरकार की शीतकालीन कार्य योजना के तहत 1 नवंबर से बाहरी निर्माण कार्यों और धूल उत्पन्न करने वाले विध्वंस कार्यों पर रोक लागू की गई है, जो 31 जनवरी तक प्रभावी रहेगी। इसके अतिरिक्त वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में 5 नवंबर से 15 दिनों के लिए धूल उत्पन्न करने वाले विध्वंस और बाहरी निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध का आदेश दिया है। इन प्रतिबंधों के पालन की जाँच के लिए संयुक्त प्रवर्तन दलों को संयुक्त रूप से निर्माण एवं विध्वंस (C&D) स्थलों के निरीक्षण, मौके पर जुर्माना और अवैध मलबा डंपिंग पर नज़र रखने का दायित्व सौंपा गया है। रिपोर्ट के अनुसार पाँच दिनों में पूरे दिल्ली में 1.5 करोड़ रुपये से अधिक के चालान किए गए, जिनमें वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के बिना वाहन चलाना और निर्माण प्रतिबंध का उल्लंघन शामिल है। इस कार्रवाई का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है, जहाँ निर्माण स्थलों पर काम बंद होने से श्रमिक गाँव या अन्य राज्यों की ओर लौट गए हैं और उनकी आजीविका प्रभावित हुई है।
पृष्ठभूमि
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की स्थापना वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के तहत हुई, जो दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता के समन्वित प्रबंधन के लिए वैधानिक निकाय है। इसने इससे पहले कार्यरत पर्यावरण प्रदूषण (नियंत्रण एवं शमन) प्राधिकरण (EPCA) का स्थान लिया।
- ग्रैप (GRAP) वायु गुणवत्ता सूचकांक के स्तर के आधार पर चरणबद्ध कार्रवाई की व्यवस्था है। ‘गंभीर’ और ‘अत्यधिक गंभीर’ स्थितियों में निर्माण गतिविधियों, डीज़ल वाहनों और अन्य स्रोतों पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाते हैं।
- दिल्ली में शीतकाल में प्रदूषण बढ़ने के कारणों में तापमान में गिरावट से वायुमंडलीय परतों का नीचे बैठना, पवन गति का कम होना, पराली दहन, वाहनों का उत्सर्जन और धूल शामिल हैं। इसलिए निर्माण और विध्वंस से उत्पन्न धूल को स्रोत पर नियंत्रित करने पर बल दिया जाता है।
- निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अंतर्गत निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय (जैसे हरे जाल से ढकना, ऊँची अस्थायी दीवारें और सामग्री को ढककर रखना) और मलबे के उचित निस्तारण की अपेक्षा की गई है। इन नियमों का प्रवर्तन स्थानीय निकायों और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों या समितियों द्वारा किया जाता है।
- निर्माण श्रमिक मुख्यतः असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं। भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन का विनियमन एवं सेवा शर्तें) अधिनियम, 1996 उनके कल्याण का प्रावधान करता है, परंतु कार्य बंद होने पर अस्थायी बेरोज़गारी की स्थिति से निपटने के लिए अलग से व्यवस्था की आवश्यकता बनी रहती है।
ग्रैप और निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध क्या है?
- ग्रैप (GRAP — Graded Response Action Plan) वायु प्रदूषण की गंभीरता के चार चरणों पर आधारित आपातकालीन कार्ययोजना है, जिसे दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के स्तर के अनुसार लागू किया जाता है।
- वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में 0–50 ‘अच्छा’, 51–100 ‘संतोषजनक’, 101–200 ‘मध्यम’, 201–300 ‘खराब’, 301–400 ‘बहुत खराब’ और 401–500 ‘गंभीर’ श्रेणियाँ होती हैं।
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) एक वैधानिक, बहु-राज्यीय निकाय है, जो दिल्ली-एनसीआर के राज्यों के बीच वायु गुणवत्ता के समन्वय, निगरानी और निर्देश का कार्य करता है।
- वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 प्रदूषण नियंत्रण के मूल वैधानिक ढाँचे हैं; दोनों के अंतर्गत प्रदूषण रोकने के लिए निर्देश और दंड का प्रावधान है।
- निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अंतर्गत निर्माण स्थलों पर हरे जाल, धूल-रोधी आवरण और मलबे के वैज्ञानिक निस्तारण जैसे उपाय अनिवार्य हैं, और मलबे को सार्वजनिक स्थलों पर डंप करना प्रतिबंधित है।
- प्रवर्तन में संयुक्त दल, मौके पर जुर्माना (चालान) और जाँच के लिए प्रदूषण नियंत्रण समिति जैसे संस्थागत तंत्र शामिल होते हैं, जिनके बीच नगर निगम और राज्य सरकार का समन्वय आवश्यक है।
- संवैधानिक दृष्टि से स्वच्छ पर्यावरण में जीने का अधिकार अनुच्छेद 21 के अंतर्गत आता है, अनुच्छेद 48-क राज्य को पर्यावरण संरक्षण का निर्देश देता है और अनुच्छेद 51-क(छ) नागरिकों पर पर्यावरण की रक्षा का मूल कर्तव्य डालता है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| प्रतिबंध की अवधि | वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management) ने 5 नवंबर से 15 दिनों के लिए दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में धूल उत्पन्न करने वाले विध्वंस और खुले में निर्माण कार्य पर रोक लगाई। दिल्ली सरकार की शीतकालीन कार्य योजना के तहत 1 नवंबर से 31 जनवरी तक यह रोक लागू है, जिसमें केवल अनिवार्य सार्वजनिक ढाँचा परियोजनाओं को छूट है। |
| प्रवर्तन तंत्र | निर्माण एवं विध्वंस (C&D) स्थलों के निरीक्षण के लिए संयुक्त प्रवर्तन दल गठित हैं। ये दल स्थल पर जुर्माना लगाते हैं और निर्माण अपशिष्ट के अवैध डंपिंग पर नज़र रखते हैं। इनमें नगर निगम (MCD) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (Delhi Pollution Control Committee) के अधिकारी शामिल हैं। |
| वित्तीय कार्रवाई | पाँच दिनों में पूरे दिल्ली में 1.5 करोड़ रुपये से अधिक के जुर्माने लगाए गए। इनमें वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र (PUC) के बिना वाहन चलाना और निर्माण प्रतिबंध का उल्लंघन शामिल है। पूर्वी ज़िले में 5 नवंबर तक निर्माण गतिविधि प्रतिबंध के उल्लंघन पर 6 लाख रुपये के चालान जारी हुए। |
| अनुपालन की शर्तें | धूल-नियंत्रण के लिए हरा जाल (green net) और कम से कम 10 मीटर ऊँची स्टील शीट जैसे उपाय जाँचे जाते हैं। सामग्री को खुला छोड़ना भी जाँच में आता है। |
| सामाजिक प्रभाव | स्थलों पर काम बंद होने से बड़ी संख्या में श्रमिक अन्य स्थानों को लौट गए हैं। दैनिक मज़दूरी पर आश्रित परिवारों की आय पर सीधा असर पड़ा है। |
महत्व
पर्यावरणीय
- शीत ऋतु में वायु प्रदूषण के चरम स्तर के समय धूल के एक प्रमुख स्रोत पर अस्थायी नियंत्रण लगाया गया है।
- निर्माण और विध्वंस से उत्पन्न धूल सूक्ष्म कणों (PM10 और PM2.5) के बढ़ने में योगदान देती है, इसलिए स्रोत-आधारित उपाय प्रभावी माने जाते हैं।
- अपशिष्ट के खुले में फेंके जाने पर रोक लगाने से जल-निकासी और मृदा प्रदूषण में कमी की संभावना है।
शासन और प्रशासन
- नगर निगम, राज्य प्रदूषण नियंत्रण समिति और राज्य सरकार के बीच बहु-एजेंसी समन्वय का व्यावहारिक मॉडल सामने आया है।
- क्षेत्रीय स्तर पर गठित निकाय (CAQM) के निर्देश राज्य सरकारों के कार्यक्रम में लागू होते हैं, जो सहकारी संघवाद का उदाहरण है।
- स्थल-स्तर पर जुर्माना और अनुपालन जाँच से प्रवर्तन को दंडात्मक के साथ निवारक स्वरूप भी मिलता है।
कानूनी और संस्थागत
- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के तहत आयोग को वायु गुणवत्ता से जुड़े निर्देश जारी करने की शक्ति है।
- निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के प्रावधान पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत आते हैं, जिनका अनुपालन इस कार्रवाई से जुड़ता है।
आर्थिक
- निर्माण क्षेत्र की गतिविधि रुकने से परियोजनाओं की समय-सारणी प्रभावित होती है और लागत बढ़ती है।
- जुर्माने से राजस्व प्राप्त होता है, परंतु इसका प्राथमिक उद्देश्य राजस्व संग्रह नहीं, बल्कि अनुपालन सुनिश्चित करना है।
सामाजिक
- श्रमिकों का पलायन असंगठित क्षेत्र की आजीविका-सुरक्षा के प्रश्न को सामने लाता है।
- स्वास्थ्य के आधार पर लिए गए निर्णय के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का संतुलन नीति-निर्माण में आवश्यक है।
चुनौतियाँ
1. श्रमिक पलायन और आजीविका संकट
- प्रतिबंध के कारण बड़ी संख्या में दैनिक मज़दूर अस्थायी रूप से बेरोज़गार हो गए हैं और कई लौटने की स्थिति में नहीं हैं।
- श्रमिकों को प्रतिबंध के दौरान भुगतान या वैकल्पिक रोज़गार की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं दिखाई देती।
- असंगठित श्रमिकों के लिए निर्माण कल्याण कानूनों का लाभ अक्सर सीमित रहता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय; असंगठित क्षेत्र के श्रमिक; सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020
2. प्रवर्तन की क्षमता और निरीक्षण की सीमा
- विस्तृत क्षेत्र में हज़ारों निर्माण स्थलों की निगरानी के लिए सीमित मानव संसाधन उपलब्ध हैं।
- स्थल-स्तर पर जाँच में छिपे हुए या चोरी-छिपे चल रहे कार्य का पता लगाना कठिन होता है।
- एक ही दिन में सभी क्षेत्रों को कवर करना व्यावहारिक नहीं होता, जिससे अनुपालन में अंतराल बनता है।
यूपीएससी लिंक: शासन में प्रशासनिक सुधार; नागरिक सेवा वितरण और प्रवर्तन
3. गैर-अनुपालन और अवैध निर्माण
- कुछ स्थल बंद पाए जाते हैं, परंतु उनके भीतर गतिविधि जारी रहने की आशंका बनी रहती है।
- धूल-नियंत्रण उपायों का अधूरा या दिखावटी पालन होने की संभावना रहती है।
- छोटे व्यावसायिक और आवासीय निर्माण अक्सर नियमित निगरानी से बाहर रह जाते हैं।
यूपीएससी लिंक: शहरी शासन; पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण
4. निर्माण अपशिष्ट का अवैध डंपिंग
- अपशिष्ट का सही तरीके से संग्रह, परिवहन और निपटान न होने से खुले में धूल और प्रदूषण बढ़ता है।
- निर्माण अपशिष्ट प्रबंधन के लिए निर्दिष्ट स्थलों और पुनर्चक्रण सुविधाओं की उपलब्धता सीमित है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण; ठोस अपशिष्ट प्रबंधन; चक्रीय अर्थव्यवस्था
5. अंतर-राज्यीय समन्वय की चुनौती
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कई राज्य शामिल हैं, इसलिए एक राज्य के उपाय दूसरे राज्यों के प्रभाव से सीमित हो सकते हैं।
- समान मानक, निगरानी प्रणाली और डेटा साझा करने की व्यवस्था में एकरूपता की आवश्यकता रहती है।
यूपीएससी लिंक: संघवाद; अंतर-राज्यीय समन्वय; क्षेत्रीय योजना
6. मौसमी उपाय बनाम दीर्घकालिक समाधान
- प्रतिबंध मुख्यतः शीत ऋतु के आपातकालीन उपाय के रूप में लागू होते हैं, जबकि प्रदूषण वर्ष भर की समस्या है।
- स्वच्छ निर्माण तकनीक, धूल-मुक्त सामग्री और ऑनलाइन निगरानी जैसे स्थायी उपायों का विस्तार अभी सीमित है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण नीति; सतत विकास; नीति-निर्माण में साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| श्रमिक पलायन | प्रतिबंध अवधि में दैनिक मज़दूरों की आजीविका प्रभावित और काम पर वापसी अनिश्चित। |
| प्रवर्तन क्षमता | सीमित कर्मचारी और विशाल क्षेत्र के कारण सभी स्थलों की नियमित जाँच कठिन। |
| अपशिष्ट डंपिंग | निर्माण अपशिष्ट का अवैध निपटान धूल और प्रदूषण का नया स्रोत बनता है। |
| गैर-अनुपालन | बंद दिखने वाले स्थलों पर भी गतिविधि की आशंका, धूल-नियंत्रण उपाय अधूरे। |
| अंतर-राज्यीय समन्वय | कई राज्यों के बीच एकसमान मानक और निगरानी की कमी। |
| मौसमी बनाम स्थायी उपाय | शीत ऋतु के प्रतिबंध वर्ष भर के स्रोत-नियंत्रण का विकल्प नहीं हैं। |
आगे की राह
- श्रमिकों के लिए अस्थायी आय-सहायता और वैकल्पिक रोज़गार की व्यवस्था की जाए, ताकि प्रतिबंध का बोझ सबसे कमज़ोर वर्ग पर न पड़े।
- असंगठित निर्माण श्रमिकों का पंजीकरण और डेटाबेस तैयार कर उन्हें कल्याण लाभों से जोड़ा जाए।
- निर्माण स्थलों की निगरानी के लिए ऑनलाइन पंजीकरण, जीआईएस-आधारित मानचित्रण और ड्रोन जैसी तकनीक का उपयोग बढ़ाया जाए।
- निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट के संग्रह, परिवहन और पुनर्चक्रण की औपचारिक व्यवस्था मज़बूत की जाए।
- धूल-नियंत्रण उपायों को परमिट जारी करने की प्रक्रिया से जोड़ा जाए, ताकि अनुपालन पहले से सुनिश्चित हो।
- अंतर-राज्यीय प्रवर्तन के लिए एकसमान मानक, साझा डेटा प्रणाली और नियमित समन्वय बैठकें सुनिश्चित की जाएँ।
- शीत ऋतु के आपातकालीन उपायों के साथ वर्ष भर के स्रोत-नियंत्रण और स्वच्छ निर्माण तकनीक को प्रोत्साहित किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management) · निर्माण एवं विध्वंस (C&D) अपशिष्ट · धूल-नियंत्रण उपाय · ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (Graded Response Action Plan) · अनुच्छेद 21 और स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार · अनुच्छेद 48A और अनुच्छेद 51A(छ) · सावधानी का सिद्धांत (Precautionary Principle) · प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle) · आजीविका का अधिकार · प्रवासी श्रमिक · व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा संहिता, 2020 · सतत विकास (Sustainable Development)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: स्वच्छ पर्यावरण और स्वास्थ्य का अधिकार
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण संरक्षण का राज्य का दायित्व
- अनुच्छेद 51A(g): पर्यावरण की रक्षा का मौलिक कर्तव्य
अवधारणा प्रवाह
शीत ऋतु में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ना और निर्माण-विध्वंस से धूल उत्सर्जन में वृद्धि। → वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा 5 नवंबर से 15 दिनों के लिए धूल-उत्पादक गतिविधियों पर प्रतिबंध का निर्देश। → दिल्ली सरकार की शीतकालीन कार्य योजना (1 नवंबर से 31 जनवरी) के तहत अनिवार्य सार्वजनिक ढाँचा परियोजनाओं को छोड़कर निर्माण पर रोक। → नगर निगम और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के संयुक्त प्रवर्तन दलों द्वारा स्थलों का निरीक्षण, धूल-नियंत्रण उपायों की जाँच और जुर्माना। → निर्माण कार्य बंद होने से श्रमिकों का पलायन और दैनिक आय का नुकसान। → अवैध निर्माण, अपशिष्ट डंपिंग और गैर-अनुपालन पर निगरानी की चुनौतियाँ सामने आना। → स्थायी समाधान के लिए श्रमिक कल्याण, अपशिष्ट प्रबंधन और स्रोत-नियंत्रण पर दीर्घकालिक नीति की आवश्यकता।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग एक सांविधिक निकाय है, जिसका गठन वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के अंतर्गत किया गया है।
2. संविधान के अनुच्छेद 48A को मौलिक कर्तव्यों में सम्मिलित किया गया है।
3. वेलोर सिटिज़न्स वेलफेयर फोरम बनाम भारत संघ (1996) मामले में प्रदूषक भुगतान सिद्धांत को मान्यता दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: CAQM की स्थापना वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के तहत हुई है। कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 48A राज्य के नीति निदेशक तत्वों में आता है, जबकि मौलिक कर्तव्य अनुच्छेद 51A में वर्णित हैं। कथन 3 सही है: वेलोर मामले में सतत विकास, सावधानी के सिद्धांत और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत को मान्यता मिली।
Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक में एक अभिकथन (A) और एक कारण (R) दिया गया है।
अभिकथन (A): दिल्ली-एनसीआर में शीतकालीन महीनों के दौरान धूल उत्पन्न करने वाले निर्माण कार्यों पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए जाते हैं।
कारण (R): वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण से संबंधित निर्देश जारी करने की वैधानिक शक्ति प्राप्त है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- (b) A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- (c) A सही है, किंतु R गलत है।
- (d) A गलत है, किंतु R सही है।
उत्तर: (a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। — CAQM को एनसीआर और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता से जुड़े निर्देश जारी करने की वैधानिक शक्ति प्राप्त है, और इसी शक्ति के आधार पर धूल-उत्सर्जक कार्यों पर प्रतिबंध लागू किए जाते हैं। अतः R, A की सही व्याख्या है। ध्यान रहे कि GRAP जैसे उपाय AQI की श्रेणियों से जुड़े होते हैं।
Q3. निम्नलिखित सूचियों को सुमेलित कीजिए:
सूची-I (संवैधानिक प्रावधान/अधिनियम/सिद्धांत):
a. अनुच्छेद 48A
b. अनुच्छेद 51A(छ)
c. वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981
d. प्रदूषक भुगतान सिद्धांत
सूची-II (विशेषता):
1. मौलिक कर्तव्य
2. राज्य के नीति निदेशक तत्व
3. राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों का गठन
4. वेलोर मामले में मान्यता प्राप्त सिद्धांत
सही सुमेलन चुनिए:
- a-2, b-1, c-3, d-4
- a-1, b-2, c-3, d-4
- a-2, b-1, c-4, d-3
- a-3, b-4, c-1, d-2
उत्तर: a-2, b-1, c-3, d-4 — अनुच्छेद 48A राज्य के नीति निदेशक तत्व है (2), जबकि अनुच्छेद 51A(छ) पर्यावरण संरक्षण का मौलिक कर्तव्य है (1)। वायु अधिनियम, 1981 के अंतर्गत राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गठित होते हैं (3)। प्रदूषक भुगतान सिद्धांत को वेलोर मामले (1996) में मान्यता मिली (4)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ दिल्ली में शीतकालीन वायु प्रदूषण को रोकने के लिए निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध वायु गुणवत्ता के संरक्षण का एक प्रभावी उपाय है, किंतु इससे दिहाड़ी श्रमिकों की आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि सतत विकास के सिद्धांत के आलोक में ऐसे प्रतिबंधों को न्यायसंगत बनाने के लिए राज्य को कौन-से संस्थागत और सामाजिक सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की संरचना इस प्रकार होनी चाहिए:
1. संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 21 (स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार; सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य, 1991), अनुच्छेद 48A (राज्य का दायित्व) और अनुच्छेद 51A(छ) (नागरिकों का मौलिक कर्तव्य)। एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ मामलों में लोक न्यास सिद्धांत का विकास।
2. विधिक एवं संस्थागत ढाँचा: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), जिसका गठन वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 से हुआ; ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) जो AQI श्रेणियों से जुड़ा है; वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अंतर्गत राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (DPCC सहित); निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (अपशिष्ट का वैज्ञानिक निपटान, धूल-नियंत्रण उपाय और संयुक्त प्रवर्तन दल)।
3. सिद्धांतों का परीक्षण: सावधानी का सिद्धांत और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (वेलोर सिटिज़न्स वेलफेयर फोरम, 1996); सतत विकास की अवधारणा।
4. पक्ष-विपक्ष का संतुलन: प्रतिबंध का पक्ष (वायु गुणवत्ता में तात्कालिक सुधार, सार्वजनिक स्वास्थ्य संरक्षण) बनाम आलोचना (दिहाड़ी श्रमिकों की आजीविका, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, प्रवर्तन में मनमानी की आशंका, प्रतिबंध का केवल संगठित क्षेत्र पर प्रभावी होना)।
5. आजीविका का अधिकार: अनुच्छेद 21 के अंतर्गत ओल्गा टेलिस बनाम बंबई नगर निगम (1985) में आजीविका को जीवन के अधिकार का अंग माना गया; अनुच्छेद 19(1)(छ) के संदर्भ में भी विचार।
6. श्रम विधि का आयाम: चार श्रम संहिताएँ, विशेषकर व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा संहिता, 2020 (जिसमें पूर्ववर्ती अंतर्राज्यीय प्रवासी कामगार अधिनियम, 1979 और भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार अधिनियम, 1996 के प्रावधान समेकित हैं) तथा सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (असंगठित कामगारों हेतु प्रावधान)।
7. सुझाव: प्रतिबंध-काल में कामगारों के लिए मज़दूरी-सहायता और कल्याण उपाय; सत्यापित पंजीकरण; धूल-नियंत्रण तकनीक (हरे जाल, ऊँची स्टील शीट) को अनुपालन-आधारित बनाना; स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के साथ दीर्घकालिक समन्वय; केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों के बीच सहकारी संघवाद।
8. निष्कर्ष: प्रतिबंध को अंतिम विकल्प के बजाय संतुलित, समयबद्ध और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी नीति के रूप में देखना, जिससे पर्यावरण और आजीविका दोनों के अधिकार संरक्षित हों।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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