23 Jul MSME ऋण गारंटी योजना: सरकार ने सीजीएस के तहत गारंटी सीमा बढ़ाई, शुल्क घटाया
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय। | GS Paper III — समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।
- Prelims: ऋण गारंटी योजना (CGS), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), ऋण गारंटी कोष ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE), संपार्श्विक-मुक्त ऋण, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) दिशानिर्देश, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC)
- Essay: भारत के आर्थिक विकास में MSME क्षेत्र की भूमिका और चुनौतियाँ, वित्तीय समावेशन और उद्यमिता को बढ़ावा देने में सरकारी योजनाओं का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: ऋण गारंटी योजना (CGS) सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSE) को संपार्श्विक-मुक्त ऋण प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है, जिसका कार्यान्वयन CGTMSE के माध्यम से होता है और यह वित्तीय समावेशन तथा उद्यमिता को बढ़ावा देने में सहायक है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSE) को ऋण सुविधाओं की ऋण गारंटी प्रदान करने के लिए ऋण गारंटी योजना (CGS) लागू कर रहा है। हाल ही में, सरकार ने MSEs के बीच ऋण प्रवाह को बेहतर बनाने और योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए कई उपाय किए हैं, जिनमें गारंटी की अधिकतम सीमा में वृद्धि और वार्षिक गारंटी शुल्क (AGF) में कमी शामिल है। केंद्रीय MSME राज्य मंत्री ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से यह जानकारी प्रदान की है।
पृष्ठभूमि
- सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) भारतीय अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जो रोज़गार सृजन, नवाचार और निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
- इन उद्यमों को अक्सर औपचारिक वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, विशेष रूप से संपार्श्विक (Collateral) सुरक्षा की कमी के कारण।
- इस समस्या के समाधान के लिए, सरकार ने सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSE) के लिए ऋण गारंटी योजना (CGS) की शुरुआत की, जिसे ऋण गारंटी कोष ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE) के माध्यम से लागू किया जाता है।
- यह योजना प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों, महिला नेतृत्व वाले उद्यमों और पिछड़े जिलों में स्थित इकाइयों सहित MSEs को बिना किसी संपार्श्विक सुरक्षा या तृतीय-पक्ष गारंटी के ऋण प्राप्त करने में मदद करती है।
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) भी MSME क्षेत्र को ऋण देने के संबंध में दिशानिर्देश जारी करता है, जिसमें 20 लाख रुपये तक के ऋण के लिए संपार्श्विक सुरक्षा स्वीकार न करने का आदेश शामिल है।
- सरकार और RBI मिलकर MSME क्षेत्र में ऋण प्रवाह को बढ़ावा देने और वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न कदम उठा रहे हैं।
ऋण गारंटी योजना (CGS) और CGTMSE क्या है?
- ऋण गारंटी योजना (CGS) सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) द्वारा लागू की गई एक योजना है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSE) को संपार्श्विक-मुक्त ऋण सुविधाएं प्रदान करना है।
- यह योजना ऋण गारंटी कोष ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE) के माध्यम से संचालित होती है, जो सदस्य ऋण संस्थानों (MLIs) द्वारा MSEs को दिए गए ऋणों के लिए गारंटी प्रदान करता है।
- इसका मुख्य लक्ष्य प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों, महिला नेतृत्व वाले उद्यमों और पिछड़े जिलों में स्थित इकाइयों सहित MSEs को वित्तीय सहायता तक पहुंच प्रदान करना है, ताकि वे बिना किसी संपार्श्विक या तृतीय-पक्ष गारंटी के ऋण प्राप्त कर सकें।
- 1 अप्रैल, 2025 से CGS के तहत दिए गए ऋण के लिए गारंटी की अधिकतम सीमा 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दी गई है।
- वार्षिक गारंटी शुल्क (AGF) संरचना में संशोधन किया गया है और मानक दर में 50% की कमी करके इसे 0.37% प्रति वर्ष कर दिया गया है।
- महिला नेतृत्व वाले MSEs सहित विशेष श्रेणी के नेतृत्व वाले MSEs के लिए गारंटी की सीमा में वृद्धि की गई है।
- चिन्हित ऋण अपुष्ट जिलों (ICDD) में MSEs को ऋण प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए, CGTMSE AGF पर 10% की छूट और अतिरिक्त 5% गारंटी कवरेज प्रदान करता है।
- तमिलनाडु सरकार के सहयोग से तमिलनाडु क्रेडिट गारंटी योजना (TNCGS) नामक एक विशेष गारंटी योजना भी लागू की जा रही है, ताकि तमिलनाडु में विनिर्माण क्षेत्र में कार्यरत MSEs को बेहतर गारंटी कवरेज प्रदान किया जा सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| ऋण गारंटी की अधिकतम सीमा में वृद्धि | सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSE) को अधिक पूंजी तक पहुंच प्रदान करती है, जिससे उनके विस्तार और विकास को बढ़ावा मिलता है। 01.04.2025 से 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये की गई है। |
| वार्षिक गारंटी शुल्क (AGF) में कमी | ऋण प्राप्त करने की लागत को कम करती है, जिससे MSEs के लिए ऋण अधिक किफायती हो जाता है। मानक दर में 50% की कमी करके इसे 0.37% प्रति वर्ष किया गया है। |
| विशेष श्रेणी के MSEs के लिए गारंटी सीमा में वृद्धि | महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों और प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों जैसे कमजोर वर्गों को सशक्त बनाती है, समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है। |
| संपार्श्विक-मुक्त ऋण (20 लाख रुपये तक) | छोटे MSEs के लिए ऋण पहुंच में सुधार करता है, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जिनके पास पारंपरिक संपार्श्विक की कमी है। RBI के निर्देशानुसार। |
| चिन्हित ऋण अपुष्ट जिलों (ICDD) में प्रोत्साहन | पिछड़े क्षेत्रों में MSEs के विकास को बढ़ावा देता है, क्षेत्रीय असमानताओं को कम करता है और संतुलित विकास सुनिश्चित करता है। AGF पर 10% की छूट और अतिरिक्त 5% गारंटी कवरेज। |
| तमिलनाडु क्रेडिट गारंटी योजना (TNCGS) | राज्य सरकारों के साथ सहयोग करके विशिष्ट क्षेत्रीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अनुकूलित समर्थन प्रदान करता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा मिलता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- सूक्ष्म एवं लघु उद्यम (MSE) भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख चालक हैं, जो रोजगार सृजन और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इस योजना से MSEs को समय पर और पर्याप्त ऋण उपलब्ध होने से उनकी उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है।
- ऋण तक पहुंच में सुधार से नए उद्यमों को बढ़ावा मिलता है, विशेषकर प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों और महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों को, जिससे आर्थिक समावेशन बढ़ता है।
- संपार्श्विक-मुक्त ऋण और कम गारंटी शुल्क से MSEs पर वित्तीय बोझ कम होता है, जिससे वे अपनी पूंजी को नवाचार और विस्तार में निवेश कर सकते हैं।
सामाजिक महत्व
- यह योजना महिला उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन प्रदान करके लैंगिक समानता को बढ़ावा देती है, जिससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ती है।
- पिछड़े जिलों में स्थित MSEs को लक्षित समर्थन प्रदान करके क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने में मदद करती है, जिससे इन क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और गरीबी कम होती है।
- छोटे व्यवसायों के विकास से स्थानीय समुदायों में समृद्धि आती है, जिससे सामाजिक स्थिरता और विकास को बढ़ावा मिलता है।
शासन और नीतिगत महत्व
- यह योजना सरकार की ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति के अनुरूप है, जो समाज के सभी वर्गों और क्षेत्रों के समावेशी विकास पर केंद्रित है।
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और राज्य सरकारों के साथ समन्वय, जैसे कि तमिलनाडु क्रेडिट गारंटी योजना (TNCGS) के माध्यम से, सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का एक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
- योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए नियमित जागरूकता कार्यक्रम और हितधारकों के साथ समन्वय, सरकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन और लाभार्थियों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण हैं।
चुनौतियाँ
1. ऋण तक पहुंच का अभाव
- छोटे उद्यमों के पास अक्सर बैंकों द्वारा आवश्यक संपार्श्विक (Collateral) की कमी होती है, जिससे उन्हें औपचारिक ऋण प्राप्त करने में कठिनाई होती है।
- बैंकों द्वारा MSEs को उच्च जोखिम वाले ग्राहक के रूप में देखा जाना, जिससे ऋण आवेदन अस्वीकृत हो जाते हैं या उच्च ब्याज दरें लगाई जाती हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: समावेशी विकास और इससे उत्पन्न मुद्दे
2. जागरूकता की कमी
- कई MSEs को ऋण गारंटी योजना (CGS) और क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE) जैसी योजनाओं के लाभों और आवेदन प्रक्रिया के बारे में जानकारी नहीं होती है।
- योजनाओं की जटिलता और दस्तावेज़ीकरण की आवश्यकताएं छोटे उद्यमियों के लिए बाधा बन सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: शासन: सरकारी नीतियों और हस्तक्षेपों का कार्यान्वयन
3. वित्तीय साक्षरता का अभाव
- कई छोटे उद्यमियों में वित्तीय प्रबंधन, व्यवसाय योजना और ऋण आवेदन प्रक्रियाओं को समझने की क्षमता का अभाव होता है।
- यह कमी उन्हें उपलब्ध ऋण सुविधाओं का प्रभावी ढंग से लाभ उठाने से रोकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: समावेशी विकास
4. क्षेत्रीय असमानताएं
- पिछड़े जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों में MSEs को शहरी क्षेत्रों की तुलना में ऋण प्राप्त करने में अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिससे क्षेत्रीय विकास में असंतुलन बना रहता है।
- बैंकों की शाखाओं की कमी और इन क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं की अपर्याप्त पहुंच भी एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: भूगोल: क्षेत्रीय विकास और असमानताएं
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| संपार्श्विक की आवश्यकता | कई MSEs के पास ऋण के लिए आवश्यक संपार्श्विक नहीं होता, जिससे उन्हें औपचारिक ऋण से वंचित रहना पड़ता है। |
| उच्च वार्षिक गारंटी शुल्क (AGF) | पहले AGF की उच्च दर MSEs के लिए ऋण को महंगा बनाती थी, जिससे उनके लिए योजना का लाभ उठाना मुश्किल होता था। |
| विशेष श्रेणी के MSEs के लिए अपर्याप्त समर्थन | महिला-नेतृत्व वाले और प्रथम पीढ़ी के उद्यमों को अक्सर अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिसके लिए विशेष समर्थन की आवश्यकता होती है। |
| पिछड़े जिलों में ऋण प्रवाह | चिन्हित ऋण अपुष्ट जिलों (ICDD) में MSEs को ऋण तक पहुंच में कठिनाई होती है, जिससे क्षेत्रीय विकास में बाधा आती है। |
| योजनाओं के बारे में जागरूकता की कमी | संभावित लाभार्थियों को CGTMSE जैसी योजनाओं के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं होती, जिससे उनका लाभ नहीं उठा पाते। |
| बैंकों का प्रदर्शन और ऋण प्रवाह | बैंकों द्वारा MSEs को ऋण देने में संकोच या प्रक्रियात्मक बाधाएं समग्र ऋण प्रवाह को प्रभावित करती हैं। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- ऋण गारंटी योजना (CGS)
- क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE)
- तमिलनाडु क्रेडिट गारंटी योजना (TNCGS)
आगे की राह
- MSEs के बीच ऋण गारंटी योजना (CGS) और CGTMSE के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएं, विशेषकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में।
- बैंकों और वित्तीय संस्थानों को MSEs को ऋण प्रदान करने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए, और उनके प्रदर्शन की नियमित समीक्षा की जाए।
- वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाए ताकि MSEs के उद्यमी वित्तीय प्रबंधन और ऋण आवेदन प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
- राज्य सरकारों के साथ सहयोग को और मजबूत किया जाए ताकि क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप विशेष गारंटी योजनाएं विकसित की जा सकें।
- ऋण आवेदन प्रक्रिया को सरल और डिजिटल बनाया जाए ताकि MSEs के लिए ऋण प्राप्त करना आसान हो सके।
- महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों और प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों के लिए विशेष परामर्श और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएं ताकि उन्हें व्यवसाय स्थापित करने और विकसित करने में मदद मिल सके।
- चिन्हित ऋण अपुष्ट जिलों (ICDD) में बैंकों की उपस्थिति और वित्तीय सेवाओं की पहुंच में सुधार किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) · ऋण गारंटी योजना (CGS) · ऋण गारंटी कोष ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE) · संपार्श्विक-मुक्त ऋण · वित्तीय समावेशन · उद्यमिता विकास · क्षेत्रीय असमानताएँ · महिला उद्यमिता · रोजगार सृजन · आत्मनिर्भर भारत
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 38: राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा
- अनुच्छेद 39: राज्य कुछ नीति का अनुसरण करेगा
- अनुच्छेद 43: कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि
अवधारणा प्रवाह
MSEs को संपार्श्विक की कमी के कारण ऋण तक पहुंच में बाधा → सरकार द्वारा ऋण गारंटी योजना (CGS) का कार्यान्वयन → CGTMSE के माध्यम से MSEs को संपार्श्विक-मुक्त ऋण गारंटी → ऋण गारंटी सीमा में वृद्धि और शुल्क में कमी → MSEs के लिए ऋण तक पहुंच में सुधार और वित्तीय बोझ में कमी → MSEs का विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSE) के लिए ऋण गारंटी योजना (CGS) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) द्वारा लागू की जाती है।
2. यह प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों और महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को बिना किसी संपार्श्विक सुरक्षा के ऋण सुविधाएँ प्रदान करती है।
3. इस योजना के तहत दिए गए ऋण के लिए गारंटी की अधिकतम सीमा 10 करोड़ रुपये है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है: CGS को MSME मंत्रालय द्वारा CGTMSE के माध्यम से लागू किया जाता है। कथन 2 सही है: यह योजना प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों और महिला नेतृत्व वाले उद्यमों सहित MSE को बिना किसी संपार्श्विक सुरक्षा या तृतीय-पक्ष गारंटी के ऋण गारंटी प्रदान करती है। कथन 3 सही है: 01.04.2025 से गारंटी की अधिकतम सीमा 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दी गई है।
Q2. ऋण गारंटी कोष ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के तहत एक नियामक निकाय है।
2. यह चिन्हित ऋण अपुष्ट जिलों (ICDD) में MSE को ऋण प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए वार्षिक गारंटी शुल्क (AGF) पर छूट प्रदान करता है।
3. तमिलनाडु सरकार के सहयोग से ‘तमिलनाडु क्रेडिट गारंटी योजना (TNCGS)’ को CGTMSE योजना के तहत लागू किया जा रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है: CGTMSE सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के तहत एक ट्रस्ट है, न कि RBI के तहत एक नियामक निकाय। कथन 2 सही है: CGTMSE, ICDD में MSE को ऋण प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए AGF पर 10% की छूट प्रदान करता है। कथन 3 सही है: तमिलनाडु सरकार के सहयोग से TNCGS को CGTMSE योजना के तहत लागू किया जा रहा है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इस संदर्भ में, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSE) के लिए ऋण गारंटी योजना (CGS) के महत्व का मूल्यांकन कीजिए और इस योजना के तहत हाल ही में किए गए प्रमुख संशोधनों पर प्रकाश डालिए। साथ ही, MSME क्षेत्र में ऋण प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए अन्य उपायों की भी चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में MSME क्षेत्र के महत्व को संक्षेप में बताते हुए CGS की भूमिका और महत्व पर चर्चा करें। दूसरे भाग में, CGS के तहत हाल ही में किए गए संशोधनों जैसे गारंटी सीमा में वृद्धि, वार्षिक गारंटी शुल्क में कमी और विशेष श्रेणियों के लिए प्रावधानों का उल्लेख करें। अंत में, RBI के दिशानिर्देशों, ICDD के लिए छूट और तमिलनाडु क्रेडिट गारंटी योजना जैसे अन्य सरकारी उपायों को शामिल करते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments