26 Oct ओडिशा और आंध्र में चक्रवात ‘अर्नब’ से पहले स्कूल बंद, मछली पकड़ने पर प्रतिबंध
✎ चक्रवात की गंभीरता उसकी हवा की गति से तय होती है, पर जनहानि का सबसे बड़ा कारण प्रायः समुद्री तूफ़ानी लहर होती है, इसलिए समय पर पूर्व-चेतावनी और निकासी ही 'शून्य क्षति' के लक्ष्य की कुंजी है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (बंगाल की खाड़ी में चक्रवात की उत्पत्ति और मानसून-पश्चात चक्रवात) | GS Paper III — आपदा प्रबंधन (पूर्व-चेतावनी, निकासी और राष्ट्रीय-राज्य संस्थागत ढाँचा) | GS Paper II — शासन (केंद्र-राज्य समन्वय और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005)
- Prelims: चक्रवात का वर्गीकरण (IMD पैमाना: चक्रवाती तूफ़ान, गंभीर चक्रवाती तूफ़ान, अति गंभीर चक्रवाती तूफ़ान), बंगाल की खाड़ी में चक्रवात और उत्तर-पूर्वी मानसून, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और RSMC नई दिल्ली की भूमिका, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA), भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) और समुद्री तूफ़ानी लहर (Storm Surge), सेंडाई फ्रेमवर्क फॉर डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन (Sendai Framework for Disaster Risk Reduction)
- Essay: ‘शून्य मानवीय क्षति’ का लक्ष्य: पूर्व-चेतावनी से सामुदायिक सहनीयता तक, तटीय समुदाय, आजीविका और जलवायु परिवर्तन के दौर में चक्रवात-जोखिम का प्रबंधन
त्वरित पुनरावृत्ति: चक्रवात की गंभीरता उसकी हवा की गति से तय होती है, पर जनहानि का सबसे बड़ा कारण प्रायः समुद्री तूफ़ानी लहर होती है, इसलिए समय पर पूर्व-चेतावनी और निकासी ही ‘शून्य क्षति’ के लक्ष्य की कुंजी है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
26 अक्टूबर 2026 को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बंगाल की खाड़ी के पूर्व-मध्य क्षेत्र में बने गहरे अवदाब को चक्रवाती तूफ़ान ‘अर्णब’ में उन्नत होने की सूचना दी। इसके अनुमानित स्थलपात (landfall) से पहले ओडिशा और आंध्र प्रदेश ने स्कूल बंद किए, समुद्र में मछली पकड़ने पर रोक लगाई और बचाव दल स्टैंड-बाय पर रखे। केंद्र ने ‘शून्य जीवन-हानि और अवसंरचना को न्यूनतम क्षति’ का लक्ष्य दोहराया। IMD ने तटीय आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में अत्यधिक भारी वर्षा का पूर्वानुमान भी जारी किया। आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने आपातकालीन सहायता के लिए टोल-फ्री नंबर जारी किए हैं। यह घटना पूर्व-चेतावनी, निकासी और राज्य-केंद्र समन्वय की व्यावहारिक परीक्षा के रूप में प्रासंगिक है।
पृष्ठभूमि
- बंगाल की खाड़ी में चक्रवात प्रायः मानसून-पश्चात मौसम (अक्टूबर-दिसंबर) में अधिक बनते हैं, जब समुद्र की सतह का तापमान ऊँचा और ऊपरी वायुमंडल में पवन-कतरन (wind shear) अपेक्षाकृत कम होती है।
- वर्ष 1999 के ओडिशा सुपर साइक्लोन में भारी जनहानि हुई थी। उसके बाद राज्य ने चक्रवात-आश्रय स्थल, स्वयंसेवी नेटवर्क और निकासी-योजनाओं पर व्यापक निवेश किया, जिसे आज ‘जनहानि-न्यूनीकरण’ के मॉडल के रूप में देखा जाता है।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की स्थापना हुई। इसी अधिनियम के तहत राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) का गठन हुआ, जो राज्यों के अनुरोध पर त्वरित सहायता देता है।
- IMD की चेतावनियाँ राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों तक पहुँचाई जाती हैं, जिनके आधार पर स्कूल बंद करने, मछुआरों को समुद्र से लौटाने और निकासी का निर्णय राज्य स्तर पर लिया जाता है।
- भारत सेंडाई फ्रेमवर्क (2015-2030) का हस्ताक्षरकर्ता है, जो आपदा-जोखिम न्यूनीकरण में पूर्व-चेतावनी प्रणालियों और सामुदायिक भागीदारी पर बल देता है।
चक्रवात क्या है और आपदा प्रबंधन में इसका प्रबंधन कैसे होता है?
- चक्रवात निम्न दाब वाला एक बड़ा घूर्णी तूफ़ान है, जो उष्ण महासागरीय जल के ऊपर बनता है। उत्तरी गोलार्ध में इसकी घूर्णन दिशा कोरिओलिस बल के कारण वामावर्त (anticlockwise) होती है।
- उत्पत्ति के लिए सामान्यतः समुद्र की सतह का तापमान लगभग 26-27 डिग्री सेल्सियस से अधिक, कम पवन-कतरन और कोरिओलिस बल की उपस्थिति आवश्यक होती है।
- IMD के पैमाने पर हवा की गति के आधार पर अवदाब, गहरा अवदाब, चक्रवाती तूफ़ान, गंभीर चक्रवाती तूफ़ान और अति गंभीर चक्रवाती तूफ़ान जैसे वर्ग तय होते हैं। ‘अर्णब’ को इसी पैमाने पर चक्रवाती तूफ़ान और फिर गंभीर चक्रवाती तूफ़ान के रूप में वर्गीकृत किया गया।
- चक्रवात से मुख्य खतरे तेज़ हवाएँ, अत्यधिक वर्षा, समुद्री तूफ़ानी लहर (storm surge) और तटीय बाढ़ हैं। जनहानि का सबसे बड़ा कारण प्रायः तूफ़ानी लहर होती है, इसलिए निकासी सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपाय है।
- पूर्व-चेतावनी में IMD के साथ INCOIS महासागर-स्थिति के पूर्वानुमान देता है। मछुआरों के लिए समुद्र में जाने पर रोक जैसे निर्देश इसी चेतावनी पर आधारित होते हैं।
- संस्थागत ढाँचा स्तरीय है: NDMA नीति और दिशानिर्देश देता है, NDRF विशेषज्ञ बचाव करता है, SDMA राज्य-स्तरीय योजना और क्रियान्वयन संभालता है और DDMA ज़मीनी स्तर पर समन्वय करता है।
- निवारक उपायों में चक्रवात-आश्रय स्थल, भवनों का सुदृढ़ीकरण, मैंग्रोव और तटीय वनीकरण तथा सामुदायिक जागरूकता शामिल हैं। ये उपाय जोखिम को पहले से कम करते हैं।
- सेंडाई फ्रेमवर्क के अनुसार आपदा-जोखिम की समझ, जोखिम-शासन, निवेश द्वारा लचीलापन और प्रभावी पुनर्निर्माण ‘आपदा-सहनीयता’ के मुख्य स्तंभ हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| चक्रवात की स्थिति | बंगाल की खाड़ी के पूर्व-मध्य भाग में बना यह तंत्र गहरे अवदाब से चक्रवाती तूफ़ान और फिर अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफ़ान में विकसित होने की संभावना रखता है। यह IMD के चक्रवात वर्गीकरण का उदाहरण है। |
| भू-स्पर्श (Landfall) का क्षेत्र | आंध्र प्रदेश और यनम तट पर बापटला और विशाखापत्तनम के बीच भू-स्पर्श अपेक्षित है। इससे आंध्र प्रदेश के तटीय ज़िले और यनम क्षेत्र सीधे प्रभावित होंगे। |
| पवन गति | भू-स्पर्श के समय पवन गति 115-125 किमी प्रति घंटा रहने का अनुमान है। तेज़ हवाओं से कच्चे मकानों, बिजली और संचार ढाँचे तथा फ़सलों को नुकसान का ख़तरा रहता है। |
| निवारक उपाय | ओडिशा और आंध्र प्रदेश द्वारा स्कूल बंद करना, समुद्र में मछली पकड़ने पर रोक और बचाव दलों को स्टैंडबाय पर रखना सक्रिय आपदा प्रबंधन के प्रमुख उपाय हैं। इनका उद्देश्य मानव जीवन की हानि को शून्य के निकट रखना है। |
| चेतावनी और सूचना तंत्र | IMD के बुलेटिन और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर (112, 1070, 1800 425 0101) जनता तक समय पर सूचना पहुँचाने के माध्यम हैं। प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली की प्रभावशीलता इसी पर निर्भर करती है। |
| अत्यधिक वर्षा का पूर्वानुमान | IMD ने ओडिशा, छत्तीसगढ़, तटीय आंध्र प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी दी है। भारी वर्षा से बाढ़ और जलभराव का ख़तरा बढ़ जाता है, जिससे चक्रवात के बाद भी जोखिम बना रहता है। |
महत्व
मानवीय और सामाजिक महत्त्व
- जीवन-रक्षा को प्राथमिकता देना आपदा प्रबंधन का मूल सिद्धांत है। स्कूल बंद करने और मछुआरों को समुद्र में न जाने देने जैसे उपाय इसी सोच से जुड़े हैं।
- तटीय समुदाय, विशेषकर मछुआरा परिवार, आजीविका के नुकसान से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। इसलिए निवारक प्रतिबंधों के साथ राहत और पुनर्वास की योजना भी आवश्यक होती है।
आर्थिक महत्त्व
- कृषि, मत्स्य पालन और पर्यटन जैसे क्षेत्रों पर सीधा असर पड़ता है। राज्य की आर्थिक गतिविधि अल्पकाल में प्रभावित होती है।
- बुनियादी ढाँचे (सड़क, बिजली, दूरसंचार) की क्षति से पुनर्निर्माण का वित्तीय भार बढ़ता है। आपदा के बाद होने वाला यह व्यय राज्य और केंद्र के वित्तीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
प्रशासनिक और संघीय महत्त्व
- चक्रवात प्रबंधन में केंद्र (IMD, NDMA) और राज्य (राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, ज़िला प्रशासन) की संयुक्त भूमिका दिखती है। यह सहकारी संघवाद का व्यावहारिक उदाहरण है।
- बहु-राज्य प्रभाव (ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु के मौसम तंत्र) में समन्वय की आवश्यकता होती है। एक राज्य की तैयारी दूसरे राज्य की सूचना-व्यवस्था पर भी निर्भर करती है।
पर्यावरणीय महत्त्व
- जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में समुद्री तापमान और चक्रवातों की तीव्रता पर चर्चा प्रासंगिक है। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवात तटीय पारिस्थितिकी और मैंग्रोव वनों पर दबाव डालते हैं।
चुनौतियाँ
1. प्रारंभिक चेतावनी का अंतिम मील तक पहुँचना
- मौसम विभाग का पूर्वानुमान सही होने पर भी उसे दूरदराज़ के गाँवों और मछुआरा बस्तियों तक समय पर पहुँचाना कठिन होता है।
- बहुभाषी जनसंख्या और कम साक्षरता वाले क्षेत्रों में चेतावनी का अर्थ स्पष्ट रूप से समझाना एक अलग चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: GS-III: आपदा प्रबंधन; प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली
2. आजीविका की सुरक्षा बनाम निवारक प्रतिबंध
- समुद्र में मछली पकड़ने पर रोक से जीवन सुरक्षित होता है, पर दैनिक मज़दूरी पर निर्भर परिवारों की आय तत्काल रुक जाती है।
- प्रतिबंध की अवधि में वैकल्पिक आय या मुआवज़े की व्यवस्था न होने पर सामाजिक असंतोष और अवैध मछली पकड़ने का ख़तरा रहता है।
यूपीएससी लिंक: GS-II: सामाजिक न्याय; GS-III: समावेशी विकास
3. तटीय बुनियादी ढाँचे की भेद्यता
- कच्चे मकान, बिजली के खंभे और संचार टावर तेज़ हवाओं में सबसे पहले क्षतिग्रस्त होते हैं।
- आपदा-रोधी भवन निर्माण संहिता का पालन सभी क्षेत्रों में समान रूप से नहीं होता, जिससे क्षति का स्तर बढ़ता है।
यूपीएससी लिंक: GS-III: आपदा प्रबंधन; शहरी और ग्रामीण बुनियादी ढाँचा
4. केंद्र-राज्य समन्वय
- आपदा प्रबंधन मुख्यतः राज्यों की ज़िम्मेदारी है, जबकि मौसम पूर्वानुमान, NDRF की तैनाती और संसाधन जुटाने में केंद्र की भूमिका भी होती है।
- बहु-राज्य प्रभाव होने पर संसाधनों के आवंटन और सूचना-साझाकरण में समन्वय की कमी बाधा बन सकती है।
यूपीएससी लिंक: GS-II: संघवाद; केंद्र-राज्य संबंध
5. जलवायु परिवर्तन से बढ़ता जोखिम
- समुद्री सतह के तापमान में वृद्धि से चक्रवात अधिक तीव्र और अप्रत्याशित हो सकते हैं, हालांकि किसी एक घटना को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से सावधानी का विषय है।
- तटीय क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व और अनियोजित विकास से जोखिम का दायरा बढ़ता है।
यूपीएससी लिंक: GS-III: पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन; आपदा जोखिम न्यूनीकरण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| चेतावनी का प्रसार | पूर्वानुमान और ज़मीनी स्तर पर जनता तक सूचना के बीच अंतर से निर्णय में देरी हो सकती है। |
| मछुआरा समुदाय की आजीविका | मछली पकड़ने पर रोक से आय रुकती है, और मुआवज़े या वैकल्पिक रोज़गार की व्यवस्था पर्याप्त न होने पर असंतोष बढ़ता है। |
| बुनियादी ढाँचे की क्षति | बिजली, सड़क और दूरसंचार नेटवर्क के टूटने से राहत कार्य और संचार बाधित होते हैं। |
| केंद्र-राज्य समन्वय | संसाधनों की तैनाती और निर्णय-प्रक्रिया में बहु-स्तरीय तालमेल की आवश्यकता होती है। |
| भवन और तटीय नियोजन | आपदा-रोधी निर्माण मानकों का पालन सीमित होने से कमज़ोर संरचनाओं में जान-माल का जोखिम बना रहता है। |
| जलवायु जनित जोखिम | चक्रवातों की तीव्रता और आवृत्ति में संभावित बदलाव दीर्घकालिक तैयारी की माँग करते हैं। |
आगे की राह
- प्रारंभिक चेतावनी को अंतिम मील तक पहुँचाने के लिए स्थानीय भाषाओं में SMS, सायरन, सामुदायिक रेडियो और ग्राम स्तरीय स्वयंसेवकों का समन्वित उपयोग किया जाए।
- मछुआरा परिवारों के लिए प्रतिबंध-अवधि में आय सहायता और वैकल्पिक आजीविका की त्वरित व्यवस्था की जाए, ताकि अवैध मछली पकड़ने की प्रवृत्ति कम हो।
- तटीय ज़िलों में चक्रवात-रोधी आश्रय गृहों और सामुदायिक भवनों का निर्माण व उनका नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।
- तटीय क्षेत्रों के भू-उपयोग नियोजन में आपदा जोखिम मानचित्रण को शामिल किया जाए।
- केंद्र, IMD और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के बीच वास्तविक समय सूचना-साझाकरण और संयुक्त अभ्यास नियमित रूप से आयोजित किए जाएँ।
- आपदा-रोधी भवन संहिता के पालन की निगरानी स्थानीय निकायों के स्तर पर मज़बूत की जाए।
- बिजली और दूरसंचार नेटवर्क के लिए आपातकालीन बैकअप और तेज़ पुनर्बहाली योजना तैयार रखी जाए।
- आपदा के बाद की क्षति का वैज्ञानिक आकलन और पुनर्निर्माण में पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: जीवन की रक्षा का मौलिक अधिकार
- अनुच्छेद 246: विधायी शक्तियों का विभाजन (सातवीं अनुसूची)
अवधारणा प्रवाह
बंगाल की खाड़ी में समुद्री सतह के ऊपर निम्न दाब क्षेत्र का विकास और गहरे अवदाब का बनना → अनुकूल परिस्थितियों में गहरे अवदाब का चक्रवाती तूफ़ान और फिर गंभीर चक्रवाती तूफ़ान में तीव्र होना → IMD द्वारा पूर्वानुमान, पवन गति और भू-स्पर्श क्षेत्र की घोषणा और चेतावनी जारी करना → राज्य सरकारों द्वारा स्कूल बंद करना, मछली पकड़ने पर रोक और बचाव दलों को स्टैंडबाय पर रखने जैसे निवारक उपाय लागू करना → आपातकालीन हेल्पलाइन और सूचना-तंत्र के माध्यम से जनता तक सूचना पहुँचाना और निकासी की तैयारी करना → भू-स्पर्श के बाद क्षति का आकलन, राहत-बचाव और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू होना
स्रोत: The Hindu
Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: ओडिशा और आंध्र प्रदेश में चक्रवात ‘अर्नब’ की आशंका को देखते हुए राज्य सरकारों द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों में से कौन-सा सही नहीं है?
- राज्यों ने मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
- राज्यों ने सभी स्कूलों को बंद कर दिया है।
- राज्यों ने आपदा प्रबंधन बलों को तैनात कर दिया है।
- राज्यों ने लोगों को तटीय क्षेत्रों से खाली करने का आदेश दिया है।
उत्तर: राज्यों ने आपदा प्रबंधन बलों को तैनात कर दिया है। — ओडिशा और आंध्र प्रदेश ने चक्रवात ‘अर्नब’ के मद्देनजर मछली पकड़ने पर प्रतिबंध और स्कूल बंद किए हैं, लेकिन आपदा प्रबंधन बलों की तैनाती और लोगों को खाली कराने के आदेश की पुष्टि नहीं हुई है।
Mains: चक्रवात ‘अर्नब’ के मद्देनजर ओडिशा सरकार द्वारा उठाए गए आपदा प्रबंधन उपायों का उल्लेख करते हुए, राज्य में चक्रवात तैयारी और प्रतिक्रिया तंत्र की प्रभावशीलता का मूल्यांकन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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