स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीयों से भरे तेल टैंकर पर प्रक्षेपास्त्र हमला, चालक दल सुरक्षित

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीयों से भरे तेल टैंकर पर प्रक्षेपास्त्र हमला, चालक दल सुरक्षित

होर्मुज़ जलसंधि में घटनाओं का चक्रप्रक्षेप्य हमलाअज्ञात प्रक्षेप्यआग लगनानियंत्रितनिगरानी बढ़ानास्थिति परनिंदा एवं चेतावनीविधिक-नैतिकव्यापार प्रवाह प्रभाविऊर्जा आपूर्ति
होर्मुज़ जलसंधि में घटनाओं का चक्र

✎ होर्मुज़ जलसंधि विश्व के समुद्री तेल व्यापार का प्रमुख संकरा मार्ग है, जहाँ नौवहन की स्वतंत्रता और भारतीय नाविकों की सुरक्षा ऊर्जा सुरक्षा और प्रवासी कल्याण, दोनों से जुड़े हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (पश्चिम एशिया, भारत के हित और समुद्री सुरक्षा)  |  GS Paper II — भारतीय प्रवासी और नाविकों का कल्याण  |  GS Paper III — ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक समुद्री मार्ग
  • Prelims: होर्मुज़ जलसंधि (Strait of Hormuz): फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला मार्ग, मुसंदम प्रायद्वीप (Musandam Peninsula): ओमान का क्षेत्र, जिसके पास से होकर जहाज़ गुजरते हैं, UKMTO: यूनाइटेड किंगडम समुद्री व्यापार संचालन, समुद्री घटनाओं की निगरानी और सूचना तंत्र, ध्वज राज्य (Flag State): जहाज़ का पंजीकरण और उसके ऊपर अधिकार-क्षेत्र, पारगमन मार्ग (Transit Passage): UNCLOS के तहत अंतरराष्ट्रीय जलसंधियों में नौवहन का अधिकार, नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation), संकरे समुद्री मार्ग (Chokepoint): होर्मुज़, बाब-अल-मंडेब, स्वेज़ नहर और मलक्का जलसंधि, DG Shipping: भारत में नाविकों के पंजीकरण, प्रशिक्षण और नियमन की नोडल संस्था
  • Essay: ऊर्जा सुरक्षा और संकरे समुद्री मार्गों का सामरिक महत्व: क्या आपूर्ति-विविधीकरण पर्याप्त समाधान है?, सीमा पार संघर्ष में प्रवासी नाविकों का कल्याण: राज्य का दायित्व और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

त्वरित पुनरावृत्ति: होर्मुज़ जलसंधि विश्व के समुद्री तेल व्यापार का प्रमुख संकरा मार्ग है, जहाँ नौवहन की स्वतंत्रता और भारतीय नाविकों की सुरक्षा ऊर्जा सुरक्षा और प्रवासी कल्याण, दोनों से जुड़े हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

21 अक्टूबर 2026 (स्थानीय समय) को कुवैत-ध्वजांकित तेल उत्पाद टैंकर M/T Al Dasma, जिस पर 21 भारतीय नाविक सवार थे, होर्मुज़ जलसंधि से गुजरते समय एक अज्ञात प्रक्षेप्य (projectile) से टकरा गया। पोत पर आग लगी, जो बाद में बुझा दी गई। यूनाइटेड किंगडम समुद्री व्यापार संचालन (UKMTO) ने बुखा (ओमान) से 11 नॉटिकल मील पश्चिम में इस घटना को दर्ज किया। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि सभी भारतीय और अन्य चालक दल सुरक्षित हैं तथा सरकार स्थिति पर निगरानी रखे हुए है और पोत-प्रबंधन कंपनी के संपर्क में है। इससे पहले 16 अक्टूबर को भारतीय नाविकों वाले एक अन्य तेल वाहक पोत MT ST 3 पर भी ऐसा ही हमला हुआ था। भारत ने ऐसे हमलों को विधिक और नैतिक दृष्टि से अनुचित बताते हुए नौवहन की स्वतंत्रता और व्यापारिक प्रवाह की निर्बाध सुरक्षा पर बल दोहराया है।

पृष्ठभूमि

  • पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाज़ों पर घटनाओं की एक शृंखला सामने आ रही है, जिससे समुद्री व्यापार की सुरक्षा पर चिंता बढ़ी है।
  • विश्व के समुद्री तेल व्यापार का बड़ा भाग होर्मुज़ से होकर गुजरता है, और भारत के कच्चे तेल आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है, जिसका अधिकांश भाग इसी जलमार्ग से पहुँचता है।
  • भारतीय नाविक वैश्विक समुद्री कार्यबल का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और खाड़ी क्षेत्र के टैंकरों पर बड़ी संख्या में तैनात रहते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सीधे भारत की प्रवासी और श्रम नीति से जुड़ी है।
  • भारत की स्थायी नीति रही है कि समुद्री मार्गों पर नौवहन की स्वतंत्रता और संघर्ष से अप्रभावित व्यापार प्रवाह बना रहे; इसी आधार पर वह ऐसे हमलों की निंदा करता रहा है।
  • 16 अक्टूबर की घटना के बाद यह कुछ ही दिनों में दूसरी ऐसी घटना है, जिसमें भारतीय नाविक प्रभावित हुए हैं। इससे सरकार और जहाज़ प्रबंधन कंपनियों के बीच निरंतर समन्वय की आवश्यकता रेखांकित होती है।

होर्मुज़ जलसंधि क्या है?

  • भौगोलिक स्थिति: यह ईरान और ओमान के मुसंदम प्रायद्वीप के बीच स्थित जलसंधि है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अंततः अरब सागर से जोड़ती है।
  • विस्तार: अपने सबसे संकरे बिंदु पर यह लगभग 33 किलोमीटर चौड़ी है, इसलिए यह विश्व के सबसे महत्वपूर्ण संकरे समुद्री मार्गों में गिनी जाती है।
  • यातायात व्यवस्था: दोनों दिशाओं के जहाज़ों के लिए अलग-अलग गलियारे निर्धारित हैं, जिनकी व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के नियमों से जुड़ी है।
  • विधिक स्थिति: UNCLOS के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय नौवहन में प्रयुक्त जलसंधियों में जहाज़ों को पारगमन मार्ग का अधिकार प्राप्त है, जिसे सामान्यतः तटीय राज्य द्वारा बाधित नहीं किया जा सकता।
  • ध्वज राज्य का सिद्धांत: किसी जहाज़ पर उसके ध्वज वाले देश का अधिकार-क्षेत्र होता है (UNCLOS के अनुच्छेद 91 के अनुसार पोतों की राष्ट्रीयता से जुड़ा सिद्धांत), इसलिए कुवैत-ध्वजांकित पोत पर कुवैत का ध्वज-राज्य अधिकार लागू होता है, भले ही उस पर भारतीय नाविक हों।
  • सूचना तंत्र: UKMTO जैसे संस्थान समुद्री सुरक्षा घटनाओं की निगरानी करते हैं, नाविकों और जहाज़ों को सलाह देते हैं और घटनाओं का रिकॉर्ड रखते हैं।
  • भारत के संदर्भ में: DG Shipping भारतीय नाविकों के पंजीकरण, प्रशिक्षण और कल्याण का नियमन करता है, जबकि नीतिगत समन्वय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के माध्यम से होता है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
घटना का स्वरूप कुवैत-ध्वज वाले तेल उत्पाद वाहक M/T अल दस्मा (Al Dasma) पर अज्ञात प्रक्षेप्य से प्रहार हुआ। इसमें सवार 21 भारतीय नाविकों सहित सभी नाविक सुरक्षित रहे।
स्थान होर्मुज जलसंधि (Strait of Hormuz) में, ओमान के बुखा (Bukha) से लगभग 11 नॉटिकल मील पश्चिम में। यह घटना UKMTO द्वारा दर्ज की गई।
पोत की स्थिति प्रहार से पोत में आग लगी, जो बाद में बुझा दी गई। पोत स्थिर अवस्था में रहा।
होर्मुज जलसंधि का भू-सामरिक महत्व फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला संकरा मार्ग। वैश्विक पेट्रोलियम व्यापार का प्रमुख सामरिक अवरोध-बिंदु (Chokepoint)।
पूर्ववर्ती घटना 16 अक्टूबर को कच्चे तेल के वाहक MT ST 3 पर भी होर्मुज जलसंधि में प्रक्षेप्य से प्रहार हुआ था। उस पोत पर सवार 15 भारतीय नाविक सुरक्षित रहे।

महत्व

आर्थिक

  • भारत के कच्चे तेल आयात का बड़ा भाग खाड़ी क्षेत्र से होकर होर्मुज जलसंधि के मार्ग से आता है। इस मार्ग में व्यवधान सीधे ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करता है।
  • खतरे की स्थिति में युद्ध-जोखिम बीमा (War Risk Insurance) का प्रीमियम और माल-भाड़ा बढ़ता है, जिससे आयात लागत और घरेलू मूल्य-स्तर पर दबाव बनता है।
  • ऊर्जा लागत में वृद्धि से राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) और चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) पर भी असर पड़ सकता है।

सामरिक एवं भू-राजनीतिक

  • क्षेत्रीय संघर्ष के कारण वाणिज्यिक पोतों पर हमलों की श्रृंखला बनना नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) के लिए गंभीर चुनौती है।
  • भारत ने ऐसे हमलों की निंदा करते हुए उन्हें विधिक और नैतिक रूप से अनुचित बताया है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से सुरक्षित और बाधारहित समुद्री व्यापार पर बल दिया है।
  • भारत के ऊर्जा और व्यापार हित खाड़ी क्षेत्र से जुड़े हैं, इसलिए उसकी विदेश नीति में संतुलन और संवाद का महत्व बढ़ जाता है।

मानवीय एवं श्रम-संबंधी

  • वैश्विक समुद्री कार्यबल में भारतीय नाविकों की उल्लेखनीय हिस्सेदारी है। इसलिए उनकी सुरक्षा और कल्याण राष्ट्रीय नीति का महत्वपूर्ण विषय है।
  • प्रहार के समय नाविकों की जान जोखिम में पड़ती है, इसलिए संकट-प्रबंधन और सूचना-प्रवाह की व्यवस्था आवश्यक है।

विधिक एवं अंतरराष्ट्रीय

  • संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS — United Nations Convention on the Law of the Sea) के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय जलसंधियों से पारगमन-अधिकार (Transit Passage) का प्रावधान है। यह अधिकार सुरक्षित नौवहन की अपेक्षा से जुड़ा है।
  • सागरीय सुरक्षा और नौवहन मानकों के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO — International Maritime Organization) जैसी संस्थाएँ नीति-मंच का काम करती हैं।

चुनौतियाँ

1. ऊर्जा आपूर्ति की भेद्यता

  • एक ही सामरिक मार्ग पर आयात की अत्यधिक निर्भरता से आपूर्ति-झटकों का जोखिम बढ़ता है।
  • मार्ग बाधित होने पर वैकल्पिक स्रोतों और मार्गों की लागत अधिक होती है।

2. नाविकों की सुरक्षा और कल्याण

  • खतरनाक जलक्षेत्रों में काम करने वाले नाविकों के लिए शारीरिक और मानसिक जोखिम बढ़ता है।
  • घटना के बाद परिवारों को सूचना, सहायता और पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासनिक चुनौती है।

3. बीमा और माल-भाड़ा लागत का दबाव

  • युद्ध-जोखिम क्षेत्र घोषित होने पर बीमा प्रीमियम बढ़ जाता है, जो परिवहन लागत को ऊपर ले जाता है।
  • लागत-वृद्धि आगे उपभोक्ता कीमतों में पहुँचकर मुद्रास्फीति (Inflation) को प्रभावित कर सकती है।

4. अंतरराष्ट्रीय विधि का प्रवर्तन

  • समुद्री हमलों के दोषियों की पहचान और जवाबदेही तय करना कठिन होता है, क्योंकि कई हमले अज्ञात स्रोतों से होते हैं।
  • जलसंधियों के पारगमन-अधिकार और नौवहन की स्वतंत्रता को व्यवहार में लागू करना बहुपक्षीय सहमति पर निर्भर है।

5. क्षेत्रीय संघर्ष और संतुलित कूटनीति

  • भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र के विभिन्न देशों के साथ संबंध बनाए रखते हुए नौवहन-सुरक्षा पर स्पष्ट रुख अपनाना संतुलन की चुनौती है।
  • क्षेत्रीय तनाव बढ़ने पर प्रवासी भारतीयों और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए त्वरित प्रतिक्रिया-तंत्र आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
सामरिक निर्भरता एक संकरे जलमार्ग पर ऊर्जा आयात का केंद्रीकरण आपूर्ति-सुरक्षा के लिए जोखिम है।
बार-बार होने वाले हमले कम समय में दो घटनाओं से दोहराव का संकेत मिलता है, जिससे निवारण की आवश्यकता बढ़ती है।
बीमा और माल-भाड़ा युद्ध-जोखिम प्रीमियम से आयात लागत बढ़ती है और मूल्य-स्थिरता प्रभावित होती है।
नाविक कल्याण अनिश्चित हालात में नाविकों के लिए तत्काल सूचना, चिकित्सा और सुरक्षा उपायों की कमी जोखिम बढ़ाती है।
विधिक जवाबदेही अज्ञात स्रोतों से हमलों में दोषियों की पहचान कठिन होती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय विधि का प्रवर्तन कमजोर पड़ता है।

आगे की राह

  • कच्चे तेल के स्रोतों और आपूर्ति-मार्गों में विविधता लाकर किसी एक मार्ग पर निर्भरता घटाई जाए।
  • रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) की क्षमता और उपयोग-प्रोटोकॉल को संकट की स्थिति के लिए सुदृढ़ किया जाए।
  • पोत प्रबंधन कंपनियों, ध्वज-राज्यों और भारतीय प्राधिकरणों के बीच सूचना-साझेदारी और आपात-संपर्क तंत्र को मजबूत किया जाए।
  • नाविकों के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण, प्रहार की स्थिति में प्रोटोकॉल और परिवारों के लिए त्वरित सहायता सुनिश्चित की जाए।
  • युद्ध-जोखिम क्षेत्रों के लिए बीमा-व्यवस्था और माल-भाड़ा पर निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि उपभोक्ताओं पर लागत का अनावश्यक भार न पड़े।
  • समुद्री डोमेन जागरूकता (Maritime Domain Awareness) के लिए जहाज-ट्रैकिंग और वास्तविक-समय निगरानी को सुदृढ़ किया जाए।
  • IMO और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर नौवहन सुरक्षा और पारगमन-अधिकार के पालन हेतु सहमति-निर्माण को प्रोत्साहित किया जाए।
  • क्षेत्रीय देशों के साथ कूटनीतिक संवाद द्वारा तनाव-कमी और नौवहन-सुरक्षा के लिए साझा ढाँचा विकसित किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

होर्मुज जलसंधि · समुद्री सुरक्षा · अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग · नेविगेशन की स्वतंत्रता · भारत की ऊर्जा सुरक्षा · मध्य पूर्व में संघर्ष · व्यापारिक जहाजरानी · भू-राजनीतिक प्रभाव · भारत की विदेश नीति · संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 51 — अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा का निर्देश

अवधारणा प्रवाह

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष से खाड़ी क्षेत्र में वाणिज्यिक पोतों पर हमलों की श्रृंखला शुरू होती है।  →  सीमित और संकरे होर्मुज जलसंधि मार्ग से गुजरने वाले पोत अधिक जोखिम में आ जाते हैं।  →  21 भारतीय नाविकों वाले तेल वाहक पर प्रक्षेप्य का प्रहार होता है और पोत में आग लगती है, जो बाद में बुझा दी जाती है।  →  UKMTO घटना दर्ज करता है और पोत प्रबंधन कंपनी व भारतीय प्राधिकरण स्थिति की निगरानी करते हैं।  →  नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और कूटनीतिक स्तर पर उचित विरोध दर्ज किया जाता है।  →  युद्ध-जोखिम बीमा और माल-भाड़ा बढ़ने से ऊर्जा आयात की लागत बढ़ती है।  →  लागत-वृद्धि आगे चलकर घरेलू मुद्रास्फीति और राजकोषीय दबाव को प्रभावित कर सकती है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. होर्मुज जलसंधि फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) और अरब सागर (Arabian Sea) से जोड़ती है।
2. यह विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्गों में से एक है।
3. जलसंधि के उत्तरी तट पर ईरान और दक्षिणी तट पर संयुक्त अरब अमीरात एवं ओमान स्थित हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि होर्मुज जलसंधि फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ती है। कथन 2 भी सही है क्योंकि यह विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि जलसंधि के उत्तरी तट पर ईरान और दक्षिणी तट पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) तथा ओमान स्थित हैं।

Q2. अभिकथन (A): भारत ने मध्य पूर्व में समुद्री नेविगेशन और वाणिज्यिक जहाजरानी पर हमलों की लगातार निंदा की है।
कारण (R): भारत अंतर्राष्ट्रीय जलमार्गों के माध्यम से समुद्री वाणिज्य के सुरक्षित और अबाधित प्रवाह की आवश्यकता पर बल देता है।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि भारत ने समुद्री हमलों की निंदा की है। कारण (R) भी सही है क्योंकि भारत नेविगेशन की स्वतंत्रता और समुद्री वाणिज्य के सुरक्षित प्रवाह का समर्थन करता है। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है क्योंकि भारत की निंदा का मूल कारण अंतर्राष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा और व्यापार के अबाधित प्रवाह को सुनिश्चित करना है, जो उसकी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ होर्मुज जलसंधि के भू-रणनीतिक महत्व का विश्लेषण कीजिए। समुद्री व्यापारिक जहाजरानी पर हाल के हमलों के आलोक में भारत के लिए इसके निहितार्थों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** होर्मुज जलसंधि का संक्षिप्त परिचय और इसका भौगोलिक स्थान।
2. **होर्मुज जलसंधि का भू-रणनीतिक महत्व:**
* **वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति:** विश्व के एक बड़े हिस्से के तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का पारगमन मार्ग।
* **अंतर्राष्ट्रीय व्यापार:** एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग।
* **क्षेत्रीय स्थिरता:** मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन और क्षेत्रीय संघर्षों का केंद्र।
* **सामरिक नियंत्रण:** ईरान, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के लिए रणनीतिक महत्व।
* **अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून:** UNCLOS के तहत ‘पारगमन मार्ग’ के रूप में इसकी स्थिति।
3. **समुद्री व्यापारिक जहाजरानी पर हाल के हमलों के निहितार्थ:**
* **वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर प्रभाव:** तेल की कीमतों में अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान।
* **बीमा लागत में वृद्धि:** जहाजरानी कंपनियों के लिए परिचालन लागत में वृद्धि।
* **क्षेत्रीय तनाव में वृद्धि:** मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक अस्थिरता का बढ़ना।
* **अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताएँ:** समुद्री डकैती, आतंकवाद और अन्य गैर-राज्य अभिकर्ताओं के खतरों में वृद्धि।
4. **भारत के लिए निहितार्थ:**
* **ऊर्जा सुरक्षा:** भारत की 80% से अधिक तेल आवश्यकता आयात पर निर्भर है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा इस जलसंधि से होकर गुजरता है। हमलों से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा खतरा।
* **आर्थिक प्रभाव:** आयात-निर्यात लागत में वृद्धि, मुद्रास्फीति (Inflation) का दबाव।
* **भारतीय नाविकों की सुरक्षा:** जलसंधि से गुजरने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती।
* **विदेश नीति और कूटनीति:** क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए भारत की सक्रिय भूमिका।
* **रक्षा और नौसेना की उपस्थिति:** भारतीय नौसेना की क्षेत्र में उपस्थिति और समुद्री सुरक्षा अभियानों की आवश्यकता।
5. **निष्कर्ष:** भारत के लिए होर्मुज जलसंधि की सुरक्षा का महत्व और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से समुद्री स्थिरता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: orissapost.com


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