05 Oct संरक्षित क्षेत्रों का सिकुड़ना: विकास दबाव से वन्यजीवन पर खतरा
✎ संरक्षित क्षेत्रों का संरक्षण केवल वन्यजीवों की सुरक्षा नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व के लिए आवश्यक पारिस्थितिक संतुलन और सतत विकास की कुंजी है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव-विविधता | GS Paper III — आपदा प्रबंधन | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (पर्यावरण प्रौद्योगिकी)
- Prelims: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, संरक्षित क्षेत्र (Protected Areas), जैव-विविधता हॉटस्पॉट (Biodiversity Hotspot), मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict), सतत विकास (Sustainable Development), पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem)
- Essay: विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन: एक अनिवार्य आवश्यकता, भारत में वन्यजीव संरक्षण की चुनौतियाँ और समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: संरक्षित क्षेत्रों का संरक्षण केवल वन्यजीवों की सुरक्षा नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व के लिए आवश्यक पारिस्थितिक संतुलन और सतत विकास की कुंजी है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
प्रसिद्ध वन्यजीव संरक्षणवादी एम.के. रणजीतसिंह (वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के मुख्य वास्तुकार) ने वन्यजीव सप्ताह समारोह के दौरान चेतावनी दी है कि भारत में संरक्षित क्षेत्र (Protected Areas) सिकुड़ रहे हैं, जबकि विकास, खनन और पर्यटन का दबाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने संरक्षण के लिए केवल प्रतिष्ठित जानवरों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय उनके आवासों और पारिस्थितिक तंत्रों (Ecosystems) को संरक्षित करने पर जोर दिया है।
पृष्ठभूमि
- भारत विश्व के उन 17 विशाल-विविधता वाले देशों (Mega-diverse Countries) में से एक है, जहाँ विश्व की 7-8 प्रतिशत ज्ञात प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 भारत में वन्यजीवों और उनके आवासों के संरक्षण के लिए एक व्यापक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
- भारत में राष्ट्रीय उद्यान (National Parks), वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries), संरक्षण रिजर्व (Conservation Reserves) और सामुदायिक रिजर्व (Community Reserves) जैसे विभिन्न प्रकार के संरक्षित क्षेत्र हैं।
- पश्चिमी घाट (Western Ghats) जैसे क्षेत्र विश्व के प्रमुख जैव-विविधता हॉटस्पॉट (Biodiversity Hotspots) में से एक हैं, जहाँ अद्वितीय वनस्पति और जीव-जंतु पाए जाते हैं।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) एक बढ़ती हुई समस्या है, जो अक्सर आवासों के अतिक्रमण और विकास गतिविधियों के कारण उत्पन्न होती है।
- सतत विकास (Sustainable Development) का सिद्धांत विकास आवश्यकताओं को पूरा करते हुए पर्यावरण की रक्षा और भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों के संरक्षण पर जोर देता है।
भारत में संरक्षित क्षेत्र और उनका महत्व
- संरक्षित क्षेत्र वे भौगोलिक क्षेत्र होते हैं जिन्हें विशेष रूप से प्रकृति और संबंधित पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं (Ecosystem Services) के प्रभावी संरक्षण के लिए नामित, समर्पित और प्रबंधित किया जाता है।
- भारत में, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, संरक्षण रिजर्व और सामुदायिक रिजर्व स्थापित किए गए हैं।
- ये क्षेत्र जैव-विविधता (Biodiversity) के संरक्षण, लुप्तप्राय प्रजातियों (Endangered Species) की सुरक्षा और महत्वपूर्ण पारिस्थितिक प्रक्रियाओं (Ecological Processes) को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- संरक्षित क्षेत्र जल स्रोतों के संरक्षण, मिट्टी के कटाव को रोकने, जलवायु विनियमन और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका प्रदान करने में भी सहायक होते हैं।
- इन क्षेत्रों का महत्व केवल वन्यजीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि ये मानव अस्तित्व के लिए आवश्यक पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण हैं।
- संरक्षित क्षेत्रों का सिकुड़ना या उनका अवक्रमण (Degradation) न केवल जैव-विविधता के नुकसान का कारण बनता है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्षों को बढ़ाता है और पारिस्थितिक सेवाओं को बाधित करता है।
- विकास परियोजनाओं, जैसे कि खनन, सड़क निर्माण और पर्यटन अवसंरचना, के कारण संरक्षित क्षेत्रों पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे उनके मूल उद्देश्य पर खतरा उत्पन्न हो रहा है।
- संरक्षण प्रयासों को केवल ‘आइकॉनिक’ प्रजातियों तक सीमित न रखकर, उनके संपूर्ण आवास और पारिस्थितिक तंत्र पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| संरक्षित क्षेत्र (Protected Areas) | जैव विविधता (Biodiversity) के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण। इनमें राष्ट्रीय उद्यान (National Parks), वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries) आदि शामिल हैं। |
| वन्यजीव (Wildlife) | केवल प्रतिष्ठित जानवर ही नहीं, बल्कि प्रकृति में पाए जाने वाले सभी सजीव प्राणी। पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के स्वास्थ्य का सूचक। |
| पश्चिमी घाट (Western Ghats) | विश्व के जैव विविधता हॉटस्पॉट (Biodiversity Hotspots) में से एक। सदाबहार वनों का घर जो अद्वितीय प्राकृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं। |
| मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) | मानवीय गतिविधियों और वन्यजीवों के आवासों के बीच बढ़ते अतिक्रमण के कारण उत्पन्न होने वाली समस्या, जिससे दोनों को नुकसान होता है। |
| सतत विकास (Sustainable Development) | विकास की वह प्रक्रिया जो वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा करती है, बिना भविष्य की पीढ़ियों की अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता से समझौता किए। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- संरक्षित क्षेत्र जैव विविधता के भंडार हैं, जो विभिन्न प्रजातियों के आवास और अस्तित्व को सुनिश्चित करते हैं।
- वन और उनके जलग्रहण क्षेत्र बारहमासी धाराओं को बनाए रखते हैं, जो उच्च वर्षा वाले और घनी आबादी वाले राज्यों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभावों को कम करने और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव में सहायक होते हैं।
आर्थिक महत्व
- वन और वन्यजीव पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं (Ecosystem Services) प्रदान करते हैं, जैसे जल शुद्धिकरण, मिट्टी संरक्षण और परागण, जिनका आर्थिक मूल्य होता है।
- सतत पर्यटन (Sustainable Tourism) स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसर प्रदान कर सकता है, बशर्ते यह संरक्षण के सिद्धांतों का पालन करे।
सामाजिक महत्व
- वन्यजीव और उनके आवास लोगों को पारिस्थितिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करते हैं, विशेषकर उन समुदायों को जो सीधे प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर हैं।
- प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व मानव अस्तित्व के लिए आवश्यक है, क्योंकि हमारी उत्तरजीविता प्रकृति के स्वास्थ्य से अविभाज्य रूप से जुड़ी है।
चुनौतियाँ
1. संरक्षित क्षेत्रों का सिकुड़ना और अवर्गीकरण
- विकास, खनन और पर्यटन के बढ़ते दबाव के कारण संरक्षित क्षेत्रों का आकार घट रहा है।
- कुछ संरक्षित क्षेत्रों को खनन और निर्माण को समायोजित करने के लिए अवर्गीकृत (de-notified) किया जा रहा है, जिससे उनकी सुरक्षा कम हो जाती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता
2. विकास बनाम संरक्षण
- आर्थिक विकास और भौतिक धन की खोज अक्सर अन्य जीवन रूपों की कीमत पर होती है।
- संरक्षण पर पर्यटन को प्राथमिकता देने से मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: सतत विकास, पर्यावरण नैतिकता
3. वन्यजीव संरक्षण का संकीर्ण दृष्टिकोण
- संरक्षण का ध्यान केवल बाघ, हाथी और तेंदुए जैसे प्रतिष्ठित जानवरों पर केंद्रित रहता है।
- उनके आवासों और पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता है जो लोगों को बनाए रखते हैं।
यूपीएससी लिंक: जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिकी
4. मानवीय गतिविधियों का बढ़ता दबाव
- आग, चराई और अवैध कटाई जैसी गतिविधियाँ वनों और वन्यजीवों के आवासों को नुकसान पहुँचाती हैं।
- अनियमित मौसम पैटर्न, खंडित पहाड़, प्रदूषित नदियाँ और दमघोंटू हवा जैसी वैश्विक चुनौतियाँ भी मानवीय गतिविधियों से जुड़ी हैं।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| संरक्षित क्षेत्रों का संकुचन | जैव विविधता का नुकसान और पारिस्थितिक संतुलन में व्यवधान। |
| खनन और निर्माण | वन्यजीव आवासों का विनाश और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन। |
| पर्यटन का अनुचित प्रबंधन | मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि और पारिस्थितिक तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव। |
| वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 का कार्यान्वयन | अधिनियम के प्रावधानों के बावजूद संरक्षित क्षेत्रों का अवर्गीकरण और अतिक्रमण। |
| पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का क्षरण | जल स्रोतों का सूखना, मिट्टी का कटाव और समग्र पर्यावरणीय सुरक्षा में कमी। |
आगे की राह
- संरक्षण को केवल प्रतिष्ठित जानवरों तक सीमित न रखकर उनके आवासों और समग्र पारिस्थितिकी तंत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
- विकास परियोजनाओं की योजना बनाते समय संरक्षित क्षेत्रों और जैव विविधता पर उनके संभावित प्रभावों का गहन मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
- खनन, निर्माण और पर्यटन जैसी गतिविधियों को विनियमित किया जाना चाहिए ताकि वे संरक्षण के उद्देश्यों के साथ संरेखित हों।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 जैसे मौजूदा कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए और संरक्षित क्षेत्रों के अवर्गीकरण पर रोक लगानी चाहिए।
- पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों-केंद्रित दृष्टिकोण (people-centred approach) अपनाया जाना चाहिए, जिसमें स्थानीय समुदायों को शामिल किया जाए।
- सतत विकास के सिद्धांतों को बढ़ावा देना चाहिए जो आर्थिक प्रगति और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित करें।
- वन्यजीवों और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व के महत्व के बारे में जन जागरूकता बढ़ानी चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
संरक्षित क्षेत्र · वन्यजीव संरक्षण · पर्यावास संरक्षण · जैव विविधता हॉटस्पॉट · वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 · मानव-वन्यजीव संघर्ष · सतत विकास · पारिस्थितिक तंत्र · पश्चिमी घाट · विकास बनाम संरक्षण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 48A’: ‘राज्य पर्यावरण की रक्षा और सुधार का प्रयास करेगा।’}
- {‘अनुच्छेद 51A (g)’: ‘वन्यजीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार करना।’}
- {‘सातवीं अनुसूची (समवर्ती सूची)’: ‘वन और वन्यजीवों का संरक्षण।’}
अवधारणा प्रवाह
विकास का बढ़ता दबाव (खनन, निर्माण, पर्यटन) → संरक्षित क्षेत्रों का संकुचन और अवर्गीकरण → वन्यजीव आवासों का विनाश और पारिस्थितिकी तंत्र का क्षरण → मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि और जैव विविधता का नुकसान → पारिस्थितिक और आर्थिक असुरक्षा में वृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 भारत में वन्यजीवों और उनके आवासों के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कानून है।
2. पश्चिमी घाट को विश्व के जैव विविधता हॉटस्पॉट में से एक माना जाता है।
3. राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य दोनों ही वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत घोषित संरक्षित क्षेत्र हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 भारत में वन्यजीवों के संरक्षण का आधार है। कथन 2 भी सही है क्योंकि पश्चिमी घाट अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त जैव विविधता हॉटस्पॉट है। कथन 3 भी सही है क्योंकि राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य दोनों को इस अधिनियम के तहत संरक्षित क्षेत्रों के रूप में अधिसूचित किया जाता है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
- A. काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान: असम
- B. कान्हा राष्ट्रीय उद्यान: मध्य प्रदेश
- C. पेरियार राष्ट्रीय उद्यान: कर्नाटक
- D. पलामू टाइगर रिजर्व: झारखंड
उत्तर: C. पेरियार राष्ट्रीय उद्यान: कर्नाटक — पेरियार राष्ट्रीय उद्यान केरल में स्थित है, न कि कर्नाटक में। अन्य सभी युग्म सही सुमेलित हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में संरक्षित क्षेत्रों के सिकुड़ने और अवर्गीकृत होने की बढ़ती प्रवृत्ति पर वन्यजीव संरक्षण के संदर्भ में चर्चा कीजिए। इसके पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का भी विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: संरक्षित क्षेत्रों के महत्व और उनके सिकुड़ने की वर्तमान चिंता का संक्षिप्त परिचय। (जैसे एम.के. रणजीतसिंह का कथन)
2. संरक्षित क्षेत्रों के सिकुड़ने के कारण: विकास परियोजनाएं (खनन, निर्माण), पर्यटन का दबाव, अतिक्रमण, अवर्गीकरण (de-notification) की प्रक्रिया।
3. वन्यजीव संरक्षण पर प्रभाव: पर्यावास का नुकसान, जैव विविधता का क्षरण, प्रजातियों का विलुप्त होना, मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि। (बाघ, हाथी जैसे प्रतिष्ठित जानवरों के साथ-साथ पारिस्थितिक तंत्र पर भी प्रभाव)
4. पर्यावरणीय प्रभाव: जल स्रोतों पर प्रभाव (जैसे बारहमासी धाराओं का सूखना), जलवायु परिवर्तन में योगदान, पारिस्थितिक सेवाओं का नुकसान (परागण, मृदा संरक्षण)। पश्चिमी घाट जैसे जैव विविधता हॉटस्पॉट का विशेष उल्लेख।
5. सामाजिक-आर्थिक प्रभाव: स्थानीय समुदायों की आजीविका पर प्रभाव, जनजातीय अधिकारों का मुद्दा, पारिस्थितिकी पर्यटन पर नकारात्मक प्रभाव, दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा पर खतरा।
6. समाधान और आगे की राह: सतत विकास की अवधारणा, लोगों-केंद्रित संरक्षण दृष्टिकोण, प्रभावी कानून प्रवर्तन (वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972), पारिस्थितिक तंत्र-आधारित संरक्षण, पर्यटन का विनियमन।
7. निष्कर्ष: विकास और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए एक संतुलित निष्कर्ष।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Best geography optional coaching
- Best geography optional coaching
- Best geography optional teacher
- Best geography optional teacher
- RBI Extends Directions for Baghat Urban Co-op Bank: Key for UPSC - October 6, 2026
- तमिलनाडु सरकार ने ‘अन्नन सीर योजना’ के लिए 812 करोड़ रुपये आवंटित किए - October 6, 2026
- AI for Disabled Indians: Ensuring Inclusive Tech for UPSC & PCS - October 6, 2026

No Comments